Monica Gupta

Writer, Author, Cartoonist, Social Worker, Blogger and a renowned YouTuber

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September 26, 2016 By Monica Gupta Leave a Comment

आप पार्टी समाचार – ब्रेकिंग न्यूज

आप पार्टी समाचार

आप पार्टी समाचार – ब्रेकिंग न्यूज  आज कल ब्रेकिंग न्यूज बनी हुई है कि AAP Party का विधेयक आज जेल गया.  आज मार  पीट  हुई आज स्याही फेंंकी गई … अरे भई जिस दिन कुछ नही हुआ उस दिन भी तो ब्रेकिंंग न्यूज बनती है .. कि आज कुछ नही हुआ ..

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आप पार्टी समाचार

आम आदमी पार्टी खबर

कई बार आप पार्टी निराश कर देती है जनता जनार्दन को … कैसे ?? वो ऐसे की … आप पार्टी समाचार – ब्रेकिंग न्यूज कुछ लोग तो बस इस फिराक में रहतें है कि किसी तरह आप पार्टी की कोई खबर आए और वो ब्रेकिंग न्यूज बनाए … पर कई बार आप पार्टी निराश कर देती है कुछ लोगो को

 

September 25, 2016 By Monica Gupta Leave a Comment

रक्तदान का महत्व – आईए नया जीवन दें

रक्तदान का महत्व

रक्तदान महादान है और स्वैच्छिक रुप से किया रक्तदान सबसे अच्छा दान है रक्तदान का महत्व समझते हुए हमें रक्तदान जरुर करना चाहिए क्योकि रक्त किसी फैक्ट्री में नही बनता और एक नेक कार्य करने का सबसे बेहतर तरीका है रक्तदान करना

रक्तदान करना मानो किसी को नया जन्म देना

आज का दिन रक्तदान के इतिहास में बहुत अहम है. 25 सितम्बर 1818 को डाक्टर जेम्स ने पहली बार दूसरे शरीर में इंसानी खूब डाला था उससे पहले हमारे शरीर में जानवरों का खून डाला जाता था.

समझे रक्तदान की महत्ता

पहले समय में जब हमें रक्तदान का महत्व नही पता था और जब जानवरों का खून इंसानों में चढाया जाता था तब अलग बात थी पर आज हमें सारी जानकारी है और विज्ञान ने बहुत तरक्की कर ली है इसलिए हमें इसका मह्त्व समझते हुए रक्तदान जरुर करना चाहिए

 

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तो क्याया सोचा ??? किसी की जिंदगी बचा रहे हैं न आप

रक्तदान कर रहे हैं ना आप …

रक्तदान और युवा

जिन मरीजों को लगातार रक्त की जरुरत पडती है अगर वो ही अपना संदेश दें कि रक्तदान कितना अमूल्य है तो भी युवा प्रभावित हो सकते हैं. जैसाकि जम्मू में रहने वाले हीमोफीलिया से पीडित जगदीश कुमार जिन्हे अभी तक लगभग 200बार खूब चढ चुका है या थैलीसीमिया की मरीज संगीता वधवा ,मुम्बई में रहती है अभी तक  800 बार खूब चढ चुका है और ना सिर्फ थैलीसीमिया पर काम कर रही है पर खुद भी जीने की इच्छा छोड चुकी  संगीता उन लोगो की कांऊसलिंग करती है जिन्होनें जिंदगी से हार मान ली है. संगीता आजकल थैलीसिमिया को खत्म करने के लिए Face , Fight और  Finish पर जबरदस्त काम कर रही है. read more at monicagupta.info

और अगर किसी भी वजह से आप रक्तदान नही कर सकते तो किसी को रक्तदान के लिए प्रोत्साहित ही कर दीजिए … यकीन मानिए बहुत अच्छा लगेगा …

( तस्वीर टविटर से साभार )

September 24, 2016 By Monica Gupta Leave a Comment

भारत और पाकिस्तान के बीच संबंध

भारत और पाकिस्तान के बीच संबंध

भारत और पाकिस्तान के बीच संबंध में लगातार खटास बढती जा रही है और इसका जीता जागता उदाहरण है न्यूज चैनल जो दिन रात युद्द कराने की फिराक में हैं

 

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भारत और पाकिस्तान के बीच संबंध

भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध

भारत और पाकिस्तान के बीच संबंध में बढती खटास के चलते अब  भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध की सम्भावना बढती जा रही है जिसमे भरपूर योगदान है न्यूज चैनलों का …

 

September 24, 2016 By Monica Gupta Leave a Comment

डॉक्टर कैसे बने – मरीजो से किस तरह पेश आएं सीख रहें हैं डाक्टर्स

डॉक्टर कैसे बने

डॉक्टर कैसे बने पढ कर आपको हैरानी नही हुई होगी क्योकि कोई भी डॉक्टर बन सकता है पर यहां बात अच्छा डॉक्टर कैसे बने की हो रही है

अच्छा डॉक्टर बनने का तरीका

डॉक्टर कैसे बने – मरीजो से किस तरह पेश आएं सीख रहें हैं डाक्टर्स… यकीनन एक हट कर खबर है … आज अखबार में एक खबर पढी तो मन बहुत कुछ सोचने पर मजबूर हो गया… असल में, खबर थी कि मरीजो से किस तरह पेश आएं सीख रहें हैं डॉक्टर्स… मुझे याद आ गई वो बात आज से कुछ साल पहले जब मुझे जॉनडिस यानि पीलिया हो गया था और मुझे दिल्ली के जाने माने अस्पातल के डॉक्टर के पास इलाज के लिए ले कर जाया गया.

मेरी हालत बहुत खराब थी पर वो बात मुझे भुलाए नही भूलती.

हुआ यूं कि जब मुझें डॉक्टर के पास ले कर जाया गया तो मेरी आवाज नही निकल रही थी. बुखार था और बहुत कमजोरी भी बहुत थी. डॉक्टर ने रिपोर्ट देखी और मुझसे बात  की तो मेरी आवाज ही नही निकल रही थी. इस पर डॉक्टर की बातों का मेरी मम्मी ने जवाब देंना शुरु किया … इस पर वो मेरी मम्मी से बहुत बतमीजी से बोले कि मरीज कौन है … आप है क्या ??? आप चुप रहिए …  किसलिए बात कर रही हैं …

यकीन मानिए उस समय तबितय खराब होने के बावजूद मुझे इतना गुस्सा आया कि डाक्टर की मेरी मम्मी से इतनी बतमीजी से बात करने की हिम्मत कैसे हुई .. मैने मम्मी की तरफ गुस्से से देखा और उठने का इशारा किया पर मम्मी ने मुस्कुरा के बात बदल दी और आराम से सहज होकर डॉक्टर से बात करने लगी ..

और मुझे डॉक्टर की बात का जवाब देना पडा …पर बहुत बुरा लगा  कि जब घर पर मरीज हो तो घर का माहौल कितना तनाव भरा हो जाता है ऐसे में डॉक्टर मे  ही एक आशा की किरण दिखाई देती है पर अगर वो ही बतमीजी से बात करे तो बहुत दर्द होता है …

 खासकर जब वो बहुत जाना माना हस्तपाल हो … वापिस आने के बाद  कुछ दिन यही चलता रहा कि डॉक्टरों को भी ट्रैनिंग मिलनी चाहिए कि मरीजों से कैसे पेश आए … क्योकि कोई खुशी खुशी तो उनके पास आता नही … ऐसे में मरीज के सामने डाक्टर का फोन पर बात करते रहना या … देर से आना या रुखे लहजें में बात करना जरा भी अच्छा नही लगता ..अब अब अगर इन सब बातों की जानकारी मिलेगी ट्रैनिंग मिलेगी तो यकीनन बहुत अच्छा होगा …

वैसे अच्छे डॉक्टर भी है पर बहुत कम … मरीज से आत्मीयता तो रही नही बस पैसा किस तरह से कमा लें यही विचार चलता रहता है उनके मन में …

ये खबर कोलकाता के वरिष्ठ डॉक्टर दीप्तेंद्र के सरकार की है जिन्होनें एक कम्युनिकेशन स्किल का एक खास पाठ तैयार किया है ये मरीज और डॉक्टर के बीच की दूरी कम करेगा…

फिलहाल बहुत अच्छी खबर है क्योकि अगर डॉक्टर अपना कर्त्वय सही से निभाएगा तो मरीज की आधी बीमारी तो वैसे ही दूर हो जाती है … !!!

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डॉक्टर कैसे बने

 

 

September 24, 2016 By Monica Gupta Leave a Comment

वोट किसे दे

वोट किसे दे

वोट किसे दे एक यक्ष प्रश्न है क्योकि कहने को सभी मेहनती, ईमानदार, हमारे अपने हैं पर हकीकत से कोसो दूर .. ऐसे मे पहचानना मुश्किल है कि  किसे वोट दिया जाए …

कौन है सही उम्मीदवार

वोट किसे दे कौन है सही उम्मीदवार …

अभी थोडी देर पहले मणि बहुत गुस्से में घर पर आई … बोली कि उसने सोच लिया है कि किसे वोट देगी इस बार … असल में, हमारे शहर में नगर पालिका के चुनाव हैं उसी की बात कर रही थी… मैनें कहा कि अरे शांत बालिके … वैसे भी बताते नही कि हम किसको वोट देंगें … वो बोली पर उसने मन बना लिया है कि जिसका पोस्टर उसकी दीवार पर नही लगा होगा उसे ही  वोट देगी …

वोट किसे दे कौन है सही उम्मीदवार …

वोट किसे दे … असल में, हर पार्टी वाला घरों की दीवारों पर पोस्टर लगा लगा कर जा रहे हैं और पोस्टर पर गोंद भी पक्की है जोकि सारी दीवारो का सत्यानाश कर रही हैं इसलिए जिसका पोस्टर उसकी दीवार पर नही होगा, जिसके इश्तिहार सबसे कम सडक पर बिखरे होंगें. जिसने उतावला होकर लगातार घर की घंटी नही बजाई होगी कि जल्दी बाहर आओ हम बाहर खडे हैं , जिसने अपनी रैली या सभा के दौरान जाम न लगाया होगा जनता को परेशानी नही दी होगी और जिसके लाउडस्पीकर मध्यम आवाज में बजी होंगें वही है सच्चा हकदार वोट पाने का …

मेरे विचार से मणि का वोट “नोटा “ की भेंट चढने वाला है क्योकि ऐसा कोई उम्मीदवार ही नही होगा जिसने ये सब न किया हो …

वैसे अच्छे उम्मीदवार को हम ही चुनते हैं इसलिए जागरुक हमे ही होना पडेगा … पढा लिखा उम्मीदवार ही अनपढ जैसा काम करेगा तो आगे हम उसे फर्ज निभाने का मौका कैसे देंगें … अगर हम इन सभी बातो का ख्याल रखे और सही उम्मीदवार का चयन करें तो मेरा ख्याल है कि उम्मीदवार भी सतर्क हो जाएगा …

वैसे अब मैं भी सोच रही हूं क्योकि कल वोट डाले जाएगें कि मेरा वोट किसको … हाय राम  रे  बाजार, चौराहों के साथ साथ मेरे घर की भी सारी दीवारे पोस्टरो से अटी पडी हैं…  फिलहाल तो मैं मणि का समर्थन ही कर रही हूं …

वैसे आपकी क्या सोच है इस बारें में जरुर बताईएगा …

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Photo by byungkyupark

September 22, 2016 By Monica Gupta Leave a Comment

भारत में महिलाओं के खिलाफ अपराध

भारत में महिलाओं के खिलाफ अपराध

भारत में महिलाओं के खिलाफ अपराध लगातार बढते ही जा रहे हैं. रेप, मर्डर या दहेज के लिए जला देना तो अब आम बात हो चली है

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आज के समय में महिलाऎ

भारत में महिलाओं के खिलाफ अपराध लगातार बढते ही जा रहे हैं. रेप, मर्डर या दहेज के लिए जला देना तो अब आम बात हो चली है

हर बार अमिताभ बच्चन जैसे वकील नही मिलेंगें और न ही NO मतलब समझने वाले लोग … ‘ना सिर्फ एक शब्द’ नहीं है, एक पूरा वाक्य है जिसे किसी व्याख्या Explanation की जरूरत नहीं है. ‘No’Means No.

भारतीय समाज में नारी की स्थिति

बेशक, भारत में महिलाओं के खिलाफ अपराध लगातार बढते ही जा रहे हैं पर इनसे हट कर कुछ अलग पिछ्ले दो दिन से कुछ न कुछ ऐसा देखने सुनने को मिला कि समझ नही आ रहा कि क्या रिएक्श्न होना चाहिए.

असल में, दो दिन पहले एक जानकार मिली. बहुत खूबसूरत साडी पहनी हुई थी. जब मैनें उन्हें कहा कि आप बेहद खूबसूरत लग रही हैं तो वो बोली कि शादी को 38 साल हो गए पर आज तक कभी अपनी पसंद के कपडे नही पहने. संयुक्त परिवार है जो मिलकर खरीदा जो आया वही पहन लिया … कभी अपनी पसंद ना पसंद का सोचा नही. पर अब कुछ दिन से महसूस हुआ और सोचा कि अपनी जिंदगी जी कर देखूं अपनी पसंद का पहनावा, खाना सब कर रही हूं और आज सब कुछ बहुत अच्छा लग रहा है …

मुझे तभी ख्याल आया एक सहेली रजनी  का जो अपने बाल कटवाना चाहती थी क्योकि झडने शुरु हो रहे थे उसने सोचा छोटे करवा लेती हूं ताकि कुछ समय बाद घने हो जाए … पर पति महोदय राजी नही थे … वो चाहते थे कि उनकी पत्नी के बाल लम्बे ही रहें … और वो चुप ही रही.. यानि वो पति के आगे बोल नही पाई … यह कोई एक बार की बात नही … वो अपने पति के आगे हर बात पर झुकती आ रही है …

क्या माने की पहली वाली महिला ने अपनी पसंद का पहनावा पहन कर क्या बगावत की … बिल्कुल नही … ना पहली महिला ने बगावत की और न दूसरी महिला दबी … बस बात भावनाओं की रही .. बेशक, दोनों को पति हो या पत्नी एक दूसरे की भावनाओं का सम्मान जरुर करना चाहिए ..

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महिला चाहे खुद कमाती है या नही कमाती यानि वो हाउस वाईफ है होम मेकर है उसे भी अपने बारे में सोचने का पूरा हक है …

पर इसी के साथ अपना एक दायरा भी निश्चित करना बेहद जरुरी है … बेशक अपनी सीमा को लांध कर एक बार तो बहुत खुशी मिलेगी पर वो ज्यादा देर तक टिकी नही रहेगी…

अब मैं आती हूं उस धटना पर जो दिल्ली में हुई बुराड़ी हत्याकांड मे अपनी व्यक्ति ने एक तरफा इश्क में महिला को कैंची से 30 बार वार किए मार डाला और सैल्फी ली और खुद ही पुलिस को फोन किया कि मैने मर्डर कर दिया है.

इस बात को बार बार टीवी पर दिखाया गया कि लोग खडे तमाशा देखते रहे मर्डर होता रहा पर कोई सामने नही आया. मारने वाला व्यक्ति एक तरफा आशिक था … आदि आदि … फिर धीरे धीरे पर्दा हटने लगा …

और सच्चाई भी कम भयावह नही थी और वो थी कि पुलिस के मुताबिक 2012 से ही दोनों एक दूसरे को जानते थे. तब करुणा सुरेंद्र उर्फ आदित्य  के एक कंप्यूटर इंस्टिट्यूट में पढने जाती थी. वहीं से दोनों के बीच दोस्ती हुई और फिर दोनो एक साथ रिलेशनशिप में आ गए. दोनों साथ-साथ घूमते थे. यहां तक कि करुणा ने अपनी फेसबुक वॉल पर दोनों की सेल्फी समेत कई तस्वीरें भी पोस्ट की थीं.

इसी बीच सुरेन्द्र ने करुणा की एक न्यूड फोटो देख ली थी. जो उसने किसी और लड़के को भेजी थी. इसके साथ ही उसने किसी और लड़के के साथ करुणा का फेसबुक चैट भी पढ़ लिया था. इसी बात से सुरेंद्र का गुस्सा बढ़ गया था और उसने करुणा को खत्म करने की ठान ली थी.

यह भी सुनने में आया कि वि व्यक्ति शादीशुदा था और उसकी पत्नी उससे अलग रह रही थी.. अब बताईए करुणा का मर्डर देख कर दिल भले ही पसीज गया हो लेकिन एक गुस्सा भी था कि उसने अपनी स्वतंत्रता का दुरुपयोग किया… जरा सा सम्भल कर रहना चाहिए था अगर हम खुद ही किसी से धुलते मिलते हैं उसे लिफ्ट देते हैं तो इसका अंजान क्या होगा ये हमें पता ही होता है..

फिर इसी बीच में “पिंक “ मूवी भी देखी … बेशक, आप सब कुछ भी कहे लेकिन मेरा मानना यही है कि कामकाजी हो या धरेलू महिला अपना एक दायरा बना कर रखना चाहिए एक लक्षमण रेखा खींच लेनी चाहिए और उसे पार करने की सोचनी भी नही चाहिए…

आस पडोस, दोस्त, रिश्तेदारों की तीखी नजरें झेलते हुए कोर्ट कचहरी, पुलिस के चक्कर आसान नही है … पिंक तो एक फिल्म थी पर असल जिंदगी में किस मानसिक प्रताडना से गुजरना पडता है इसका तो हम और आप अंदाजा ही नही लगा सकते

जो लड़कियां अकेले रहती हैं, अपने पैरों पर खड़ी हैं, डिस्को जाती हैं, वेस्टर्न कपड़े पहनती है, शराब या सिगरेट पीती हैं, लडको से हंस कर बात करती हैं, उनके किरदार पर प्रश्नचिन्ह इसलिए लगते हैं क्योकि ये हमारा भारत देश है पर अगर हम अपनी मिली स्वतंत्रता का सही प्रयोग नही करेंगें तो हमे जिल्लत भी झेलनी पड सकती है…

हर बार अमिताभ बच्चन जैसे वकील नही मिलेंगें और न ही NO मतलब समझने वाले लोग … ‘ना सिर्फ एक शब्द’ नहीं है, एक पूरा वाक्य है जिसे किसी व्याख्या Explanation की जरूरत नहीं है. ‘No’Means No.

बस यही उधेडबुन चल रही है और मेरा मन तो यही कह रहा है कि बेशक,  बदलाव आएगा जरुर आएगा … पर आज बदलाव नही है … और हमें इसी सच को स्वीकार करना है और अपने दायरे में रहना है …

वैसे आपके क्या विचार हैं इस बारे में जरुर बताईएगा !!

(दो तस्वीर गूगल से साभार)

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