Monica Gupta

Writer, Author, Cartoonist, Social Worker, Blogger and a renowned YouTuber

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September 1, 2016 By Monica Gupta Leave a Comment

Thalassemia diseases and Awareness

Thalassemia diseases and Awareness

Thalassemia क्या है और क्या इससे बचा जा सकता है

Thalassemia diseases and Awareness .थैलासीमिया दो प्रकार का होता है। यदि पैदा होने वाले बच्चे के माता-पिता दोनों के जींस में माइनर थेलेसीमिया होता है, तो बच्चे में मेजर थेलेसीमिया हो सकता है, जो काफी घातक हो सकता है किन्तु पालकों में से एक ही में माइनर थेलेसीमिया होने पर किसी बच्चे को खतरा नहीं होता। यदि माता-पिता दोनों को माइनर रोग है तब भी बच्चे को यह रोग होने के २5 प्रतिशत संभावना है।

 

blood

थैलेसीमिया का इलाज और  हमारी जागरूकता

Thalassemia diseases and Awareness के लिए बेहद जरुरी  है कि शादी से पहले जैसे कुंडली मिलाई जाती है. वैसे ही दोनो का रक्त का भी मिलान होना चाहिए.विवाह से पहले महिला-पुरुष दोनों अपनी जाँच करा लें। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार भारत देश में हर वर्ष सात से दस हजार थैलीसीमिया पीडि़त बच्चों का जन्म होता है।

आपको बधाई हो ।  अब आप यह सोच रहे होगे कि बधाई किस बात की तो मै बताना चाहूगी कि बधाई इस बात की कि वाकई मे आप बहुत अच्छे इंसान है। आप निश्चित तौर पर दूसरे के दुख को देख कर दुखी हो जाते है और दूसरे के सुख को देख कर आपको असीम खुशी मिलती है. आप भी देश और समाज की भलाई  के लिए कुछ करना चाहते है ।

कुछ योगदान देना चाहते है , हाँ ,वो अलग बात है कि आपको ज्यादा मौका नही मिलता इसलिए जहां भी आपको कोई  मौका मिलता है वही आप भी भीड का हिस्सा बन जाते है और बढ चढ कर योगदान देते है पर कई बार आपको  महसूस होता है कि काश आप भीड का हिस्सा ना होकर  खुद ही अपने दम पर ऐसी लहर चलाते कि बदलाव आ जाए। इस बात के लिए पुनः बधाई क्योकि  बहुत कम लोग ऐसे होते है जो ऐसी सोच रखते है । ऐसा जज्बा आपके भीतर है तो उस को सलाम  ।

वैसे आप ही जैसे बहुत कम लोग हैं जो चुपचाप  निस्वार्थ  भावना से समाज सेवा के काम में जुटे हुए है ना उन्हे मतलब है कि वो ब्रेकिंग न्यूज बने और ना ही सुर्खियो मे आए। शीनम अपने की दम पर कन्या भ्रूण हत्या Female foeticide in India के प्रति लोगोें को जागरूकता करने मे जुटी है ।

वही एक स्कूली बच्चा मोहित जहां सडक टूटी  देखता है वही बोर्ड लगा देता है ताकि वाहन चालकों को दिक्कत ना हो । वही एक बुजुर्ग भागीरथ जी है वो अपने ही बल पर गंगा को साफ करने मे जुटे  हैं पता है कैसे असल में, वो जो नदी का पानी गंगा मे जा कर मिलता है वहा पानी के बीच मे पत्थर गिरा देते है उससे मोटा कूडा जैसा कि पोलेथिन,कचरा आदि उसमें अड जाता है  और फिर वो उस कूडे को बाहर फेक कर दूसरी जगह पत्थर लगाते है और अपने बल पर प्रयास यही है कि कूडा, कचरा गंगा मैया मे ना जाए।

वही  गीतम गरीब बच्चो की पढाई का खर्च उठा रहें है और सर्दी मे उन्हे कंबल आदि भी दान मे देते रहतेे हेै. रवि हर तीन महीने में रक्तदान देते है  ताकि किसी ना किसी की जिंदगी बचा सकें अभी तक वो 66 बार रक्तदान कर चुके है।

वही दूसरी side एक शक्स है जिन्हे जब से पता चला कि साईप्रेस देश में थैलीसीमिया की मात्रा जागरूकता से वहां इसकी संभावना शून्य स्तर तक आ गई है बस तभी से सोच लिया कि अपने देश में वो भी थैलीसीमिया के प्रति देश में जागरूकता लाएगे  और यहा भी इसे शून्य के स्तर तक ले जाएगे भले ही प्रयास छोटे स्तर पर है पर प्रयास तो है।

बात की तह तक गये तो जाना कि थैलीसीमिया  एक घातक बीमारी है । जिसमें शरीर में हीमोग्लोबिन नहीं बनता और रक्त की अत्यधिक कमी हो जाती है । ऐसे में इस रोग से पीडित व्यक्ति की जान भी चली जाती है । साथ ही साथ यह भी जाना कि अगर इस अनुवांशिक  रोग की जगरूकता दिखाने से यह राग जड से खत्म किया जा सकता है तो वो क्यो ना उसका कैरियर यानि संवाहक ही बना जाए ताकि लोगों की अज्ञानता दूर कर सके।

वैसे शुरू में इसकी  ज्यादा  जानकारी नही थी पर रक्तदान के दौरान इस बीमारी का नाम जरूर सुना था। धीरे-धीरे जानते गए कि हमारे देश में लगभग 3 करोड लोग थैलीसीमिया  कैरियर है और लगभग अज्ञानता  स्वरूप 10 हजार थैलीसीमिया ग्रस्ति बच्चे हर साल जन्म लेते हैै । इस रोग से पीडित  मरीज के षरीर में खून की कमी हो जाती है।

शरीर में हीमोग्लोबिन जरूरत का आधा भी नही बनता । इस कारण  आयु के अनुसार शरीर का न बढना,जिगर ,तिल्ली व हृदय के आकार का बढ  जाना और मरीज की मौत तक हो जाती है । इस रोग का इलाज काफी महंगा है । उतर भारत में यह रोग अधिक जड़ जमा रहा है मरीज को प्रत्येक  दो से चार सप्ताह में रक्त चढाना होता है । वही 20 से 50 हजार रूपये तक की दवाइयाँ खानी होती है और तो और बोनमैरो  ट्रांसप्लांट करने पर आमतौर पर इस रोग से छुटकारा मिल जाता है । लेकिन यह ना सिर्फ बहुत जोखिम भरा है बल्कि  इसका खर्च  लाखों में आता है और इतना खर्चा करना हर व्यक्ति के बस में भी नही है । इसलिए आम आदमी हर महीने दुखी और परेशान होकर रक्त ही चढवाता रह जाता है । कुल मिलाकर अगर जरा सी जागरूकता बरती जाए तो सभी दिक्कतो और मुसीबतो का सामना करने से बच सकते है । अगर आप जागरुक हैं और शादी से पहले इसका मिलान भी करवाना जरुरी समझतें हैं तो आपको बधाई हो..

असल में, जागरूकता बस इसी बात की है कि शादी से पहले जैसे कुंडली मिलाई जाती है। वैसे ही दोनो का रक्त का भी मिलान होना चाहिए।

थैलीसीमिया  अनुवांशिक रोग है प्रत्येक व्यक्ति के शरीर में थैलीसीमिया के दो जीन होते है । एक माइनर व दूसरा मेजर , शादी के वक्त जोडे की इलेक्ट्रोफोरेसिस नामक मशीन से थैलीसीमिया जांच जरूर की जानी चाहिए । यदि लड़के-लड़की में थैलीसीमिक माइनर है तो उनके होने वाले बच्चों में थैलीसीमिक मेजर होने की पूरी आशंका होती है  यानि कैरियर की टेस्टिंग के दौरान अगर दोनो मे से स्वस्थ है और दूसरा कैरियर तो दोनो की शादी में कोई अडचन नही पर भगवान ना करे कि अगर महिला और पुरूश दोनो में ही इसके कैरियर पाए जाते है तो उनके खुशहाल भविश्य के लिए यही सही रहेगा कि वो शादी बिल्कुल ना करे। ऐसे मे उनकी संतान के थैलीसीमिया ग्रस्त होने की पूरी सम्भावनाए रहती है.

थैलेसीमिया और सफलता की कहानी – Monica Gupta

थैलेसीमिया और सफलता की कहानी Blood donation, रक्तदान , रक्तदाता या स्वैच्छिक रक्तदान  की जब भी करते हैं तो thalassemia का जिक्र जरुर आता है. थैलेसीमिया एक आनुवशिक रक्त विकार है। इस रोग में रोगी के शरीर में हीमोग्लोबिन सामान्य स्तर से कम हो जाता है। शरीर में ऑक्सीजन का सुचारु रूप से सचार करने के … Read more…

 

वैसे आपके क्या विचार हैं इस बारें में जरुर बताईएगा …

(तस्वीर ग़ूगल से साभार)

September 1, 2016 By Monica Gupta Leave a Comment

थैलेसीमिया और सफलता की कहानी

थैलेसीमिया

थैलेसीमिया की मरीज और उनकी सफलता की कहानी

Blood donation, रक्तदान , रक्तदाता या स्वैच्छिक रक्तदान  की जब भी करते हैं तो thalassemia का जिक्र जरुर आता है. थैलेसीमिया और सफलता की कहानी भी जरुर पढनी चाहिए कि कैसे वो इससे जूझ रहे हैं.

आखिर क्या है  thalassemia

थैलेसीमिया  और  सफलता की कहानी  जानने से पहले जानना जरुरी है कि आखिर है क्या थैलेसीमिया… थैलेसीमिया एक आनुवशिक रक्त विकार है। इस रोग में रोगी के शरीर में हीमोग्लोबिन सामान्य स्तर से कम हो जाता है। शरीर में ऑक्सीजन का सुचारु रूप से सचार करने के लिए हीमोग्लोबिन की जरूरत होती है। लाल रक्त कोशिकाओं की विकृति रक्त की लाल कोशिकाओं में विकृति आने के कारण थैलेसीमिया होता है।

sangeeta

यह रोग प्रायः आनुवांशिक होता है और अधिकतर बच्चों को ग्रसित करता है, उचित समय पर उपचार न होने पर बच्चे की मृत्यु तक हो सकती है। रक्त के लाल कणों की आयु लगभग 120 दिनों की होती है। लेकिन जब थैलेसीमिया होता है, तब इन कणों की आयु कम हो कर सिर्फ 20 दिन और इस से भी कम हो जाती है।
इससे शरीर में स्थित हीमोग्लोबिन पर सीधा असर पड़ता है। यदि हीमोग्लोबिन की मात्रा शरीर में कम होती है, तो शरीर कमजोर हो जाता है, जिससे शरीर को कई रोग ग्रस्त कर लेते हैं।

मुम्बई में एक कार्यक्रम के दौरान 34 वर्ष की संगीता हरिदास वधवा से मिलना हुआ। उनके जोश और उत्साह को देख कर  मन हुआ कि उनसे बात की जाए कि अखिर उनमे इतनी एनर्जी  कहाँ से आई। उनसे बात करते अचानक मैं चौक गई । असल में, वो थैलीसीमिया मेजर की मरीज हैं।

मैने उनकी इस जिंदादिली को सलाम किया और उनके बारे में और बाते जानने की कोशिश की। संगीता ने बताया कि वैसे वो एक भाई और दो बहने हैं पर दो साल पहले यानि 27 साल की उम्र में उनकी बहन पायल की थैलीसीमिया की वजह से मृत्यु हो गई थी । विस्तार से उन्होने बताया कि उनके शरीर में आयरन की मात्रा बहुत बढ गई जिससे दिल का दौरा पडा और …………।। अपने दिल को मजबूत करते हुए उन्होने बताया कि यह उन्ही का सपना था कि थैलीसीमिया के मरीजो को लेकर एक समूह या एनजीओ बनाया जाए और देश भर में इसके प्रति जागरूकता अभियान चलाया जाए और आज यहां इस कार्यक्रम मे अपनी बात रखने वो यहां  अपने दोस्तों के साथ आई हुई है।

अपने बारे मे वो बता रही थी  कि जब वो पाँच साल की थी तब उन्हे और उनके परिवार को पता चला कि उन्हे थैलीसीमिया है । तभी अचानक मैं पूछ  बैठी कि ये तो जन्म के चार पांच महीने मे ही पता चल जाता है  इस पर संगीत ने बताया कि तब  यानि आज से 30 साल पहले ना तो इतनी  जानकारी थी और ना ही टेस्ट इत्यादि की कोई सुविधा. 5 साल की उम्र में पता चला और डाक्टरों  ने यह कह दिया कि वो बस 15 साल तक ही जिंदा रहेगी ।  खैर , मन को मजबूत करके वो पढ़ाई मे लगी रही  हालांकि हर 15-20 दिन के अंतराल पर उन्हे खून चढ़ाया जाता था और समय ऐसे ही बीत रहा था।

जब 12वी क्लास पास कर ली और आगे पढाई का मन हुआ तो लोगो ने कहा कि क्या करेगी पढ़ कर कोई फायदा नही होगा शायद दूसरे शब्दो मे यही बताना चाहते थे कि उसका अंत बहुत नजदीक है । वो भी लोगों की बातों में आ गई और आगे की पढाई का विचार छोड कर अलग अलग  जैसे स्पोकन इंगलिश, ब्यूटिशियन , कम्प्यूटर जैसे कोर्स में दाखिला ले लिया और कोर्स पूरा होने के बाद पिछडे वर्ग की महिलाओं और गरीब लोगों को अपने घर पर ही उसकी ट्रैनिंग  देने लगी। उनके मम्मी- पापा का बहुत सहयोग मिलता  रहा  जिससे उनका मनोबल कभी नही गिरा ।

इस बीच दस साल बीत गए पर आगे पढ़ाई करने की इच्छा कम नही हुई फिर अपने मम्मी -पापा के सहयोग से उन्होने आगे दाखिला ले लिया और पढाई जारी रखी । आज वो थैलीसीमिया  अभियान से जुडी  जगह -जगह जाकर लोगों को इसके प्रति जागरूक बनाने में प्रयासरत है।

एक सर्वे के अनुसार संगीत ने बताया कि देश की जनसख्या के कुल मिलाकर 4 प्रतिशत लोग थैलीसीमिया से ग्रस्ति हैं और सही मायनो मे देखा जाए तो 1 प्रतिशत भी स्वैच्छिक रक्तदाता नही मिलते । सही रक्त  ना मिलने  से अनेक बीमारियां लग जाती है और इसी वजह से हम थैलीसीमिया के मरीज समय से पहले ही दम तोड देते हैं इसलिए रक्तदान  के बारे मे भी लोगों को जागरूकता होनी बहुत जरूरी है। यह उनके भविष्य के लिए भी अच्छा है और उनके दिए गए रक्त से चार लोगों की जान बचेगी वो तो उससे भी ज्यादा पुण्य का काम है ।

यकीनन उनकी बात बहुत सही है और थैलीसीमिया के मरीज होने के नाते वो जितनी सही ढंग से अपनी बात कह पा रही थी वो सीधा दिल में उतर रही थी । उन्होने बताया कि साईप्रस जैसे देश में जागरूकता के चलते थैलीसीमिया का स्तर शून्य पा आ गया है तो हम अपने देश मे यह अभियान छेड़ कर इसे शून्य के स्तर तक क्यो नही ला सकते।

सच पूछों तो वो मुझे किसी देवदूत के कम नही लग रही थी जो इतनी परेशानियों और दुखों के बाद भी बस एक ही मिशन मे जुटी हुई हैं। इसलिए वो यूथ थैलीसीमिया एलाईस के साथ जुडी उसकी स्थापना की और बस एक ही मिशन लेकर चली कि Face, Fight & Finish..  लोग थैलीसीमिया को झेल रहे है इसका सामना कर रहे है इससे लड़ रहे है। पर इसे खत्म क्यो नही करने के लिए कदम उठा रहे जबकि जागरूकता लाने से यह हमेशा के लिए खत्म हो सकता है।

एक समय ऐसा था जब संगीता जिंदगी से हार गई थी पर उनके माता पिता ने हौंसला  बढाया और   आह संगीता अपने जैसे मरीजो का जो जिंदगी से हिम्मत हार गया है उन को परामर्श देकर उनमे नई रोशनी का संचार करती दिखाई देती है ।

मै कुछ पूछने को ही हुई थी। कि इतने में उस कार्यक्रम में उनकी स्पीच का समय हो गया और वो मन मे एक नया जोश भर कर सैकड़ो लोगों के सामने अपने विचार रखने के लिए स्टेज की तरफ चल दी और मै भी उनको शुभकामनाए देती हुई आगे बढ गई ।

इस छोटी सी मुकालात से एक बहुत बड़ी बात सीखने को मिली कि कभी भी हिम्मत नही हारनी चाहिए। दुःखों तकलीफो का सामना मजबूत होकर करेगें तो वे भी ज्यादा  देर तक हमारे सामने टिक नही पाएगें। जैसे भी किसी ने सच कहा है कि हमे तक तक कोई नही हरा सकता जब तक हम अपने आप से ना हार जाए।

 

थैलीसीमिया जड से खत्म हो सकता है बस जागरुकता होनी चाहिए…

September 1, 2016 By Monica Gupta Leave a Comment

Stairs to Success or CD of Failure – an interesting example

Stairs to Success or CD of Failure - an interesting example

Stairs to Success

सफलता के लिए हम बात करते हैं सीढियों की यानि Stairs to Success और असफलता के लिए सीडी यानि CD of Failure ही बहुत है.

जिसका आज उदाहरण देखा AAP  पार्टी के विधायक एक सैक्स सीडी ( sex scandal ) के सिलसिले मे सुर्खियों में हैं ..

Stairs to Success or CD of Failure - an interesting example

Success and Failure in life

सफलता के लिए हमेशी सीढी होती है पर कई बार असफलता सीडी से आ जाती है जैसाकि आज आप विधायक संपीप कुमार के साथ देखने को मिला.

 

 

September 1, 2016 By Monica Gupta Leave a Comment

Cartoon – AAP ke Vidhayak

AAP cartoon monica gupta

Cartoon – AAP ke Vidhayak

चाहे AAP के 21 विधायक  हो, जीतेंद्र तोमर हो या  सैक्स sex स्कैंडल मे फसे महिला विकास मंत्री संदीप कुमार

AAP के विधायक , आप की सरकार के सितारे आजकल गर्दिश में चल रहे है. हर रोज कोई न कोई विधायक अपना रंग दिखा रहा है पंजाब चुनाव मे लगे अरविंद केजरीवाल की आप सरकार लगातार विवादों में घिरती जा रही है

 

AAP minister Sandeep Kumar sacked after objectionable cd came – www.bhaskar.com

AAP minister Sandeep Kumar sacked after objectionable cd came Read more…

 

aap’s sandeep kumar once claimd, touches wifes feet daily – Navbharat Times

सेक्स स्कैंडल में फंसे AAP के संदीप कुमार ने कहा था, रोज सुबह पत्नी के पैर छूता हूं कथित सेक्स स्कैंडल में फंसे AAP के संदीप कुमार वही हैं, जिन्होंने पिछले साल दावा किया था कि वह रोज सुबह उठकर अपनी पत्नी के पैर छूते हैं। संदीप कुमार सुल्तानपुर माजरा से आम आदमी पार्टी (AAP) के विधायक हैं। Read more…

वैसे आप पार्टी के बारे में आपके क्या विचार हैं ??

 

August 31, 2016 By Monica Gupta Leave a Comment

Cartoon – Heavy rain in Delhi caused traffic jam

 Cartoon of Waterlogging  in Delhi

पिछ्ले दिनों गुडगांव में भयंंकर ट्रैफिक जाम हुआ था और आज भारी बारिश के चलते दिल्ली ही मानो डूब गई. चारो तरफ पानी ही पानी नजर आ रहा था और रेंगते हुए वाहन !!

वही अमेरिका से आए US Secy of State John Kerry ने भी खूब मजाक बनाया .

cartoon water in delhi by monica gupta

 

Heavy rain in Delhi caused traffic jam – waterlogging

दिल्ली में भारी बारिश ( Heavy rain) के चलते traffic jam हो गया जगह जगह waterlogging हो गई .

ये सब देखते हुए US Secy of State John Kerry ने  IIT-Delhi  के छात्रों से कहा …

Have you (students)come here in boats,? asked US Secy of State John Kerry on his arrival at IIT-Delhi #DelhiRains

तो उनका एक मजाकिया और व्‍यंग्‍यात्‍मक रवैया नजर आया। कैरी ने छात्रों से पूछ ही डाला,’क्‍या आप लोग नाव में यहां तक पहुंचे हैं?’

Heavy rain in Delhi Gurgaon caused traffic jams – www.bhaskar.com

ट्विटर पर निकला लोगों का गुस्सा
– एक यूजर ने सीएम मनोहर लाल खट्टर को लिखा कि लोकल एडमिनिस्ट्रेशन के सारे दावों के बावजूद गुड़गांव में लगातार जाम लग रहा है।
– @J_Mahto ने लिखा- मानेसर में ट्रैफिक जाम है। दोबारा गुड़गांव में कैसे पानी जमा हो गया?
– @poonams_7 ने लिखा कि कम देर बारिश हुई और गुड़गांव फिर थम गया। एक पेशेंट कार में फंसा हुआ है। हर जगह कारें फंसी हुई दिख रही हैं।
– @DilliDurAst ने कहा कि 15 मिनट की बारिश के बाद ही दिल्ली रिंग रोड के बड़े इंटरसेक्शन्स पर बाढ़ जैसे हालात हो गए हैं।
– @Rohinisgh ने कहा कि आधे घंटे की बारिश भी दिल्ली की सड़कों पर बाढ़ जैसे हालात लाने और ट्रैफिक थमने के लिए काफी है।

Huge traffic jams and water logging were reported across Delhi today Read more…

शर्म से भी पानी-पानी हुई दिल्ली…: AAJ TAK:

चंद घंटों की बारिश ने दिल्ली में ड्रेनेज सिस्टम की परतें उधेड़ दी. सड़कें जलमग्न हो गईं और इंतजामों का जनाजा निकल गया. दिल्ली में जलभराव की वजह से जगह-जगह जाम लगा, जिसमें अमेरिकी विदेश मंत्री जॉन कैरी और देश के सेनाध्यक्ष दलबीर सुहाग भी फंस गए. जॉन कैरी ने दिल्ली में जाम पर ऐसी चुटकी ली कि दिल्ली को शर्म से भी पानी-पानी होना पड़ा. read more at aajtak.intoday.in

water

हैदराबाद मे भारी बारिश के बाद खुद को बचाते …

डूबते को तिनके का सहारा तो सुना था पर डूबते चूजो  को चप्पल का सहारा पहली बार देखा … ( एक द्श्य)

August 31, 2016 By Monica Gupta Leave a Comment

खेल, पदक और पहलवान की मानवीय संवेदनाए

London Olympics Yogeshwar dutt bronze India turn Silver

खेल में पदक मिलना सम्मान की बात होती है पर मानवीय संवेदनाओं के चलते पहवान योगेश्वर दत्त ने बहुत अच्छा टवीट किया. Yogeshwar Dutt not keen to collect upgraded silver medal, wants Besik Kudukhov’s family to keep it

ओलिंपिक ब्रॉन्ज के बदले सिल्वर नहीं चाहते योगेश्वर . बोले जीतने वाले जिस रेसलर की हादसे में हुई मौत, उसी का परिवार रखे पदक

पहलवान और उनकी मानवीय संवेदनाए

पहलवान का नाम सुनते ही दिमाग में एक भारी भरकम छवि आती है पर पहलवान का दिल भी इतना नर्म और मानवीय संवेदनाओं से भरा हो सकता है ये सोचा न था.. बात ओलम्पिक मैडल विजेता योगेश्वर दत्त की है …

कल अचानक एक खबर पढी कि भारतीय पहलवान योगेश्वर दत्त के लिए एक बड़ी खुशखबरी सामने आ सकती है। लंदन ओलंपिक में 60 किलो भारवर्ग में कांस्य पदक जीतने की उपलब्धि योगेश्वर के लिए रजत पदक जीतने में बदल सकता है क्योकि ये सूचना मिली है कि रूसी पहलवान बेसिक कुदखोव डोप में फंस गए हैं।
खास बात यह है कि जिन कुदखोव के डोप में फंसने की बात की जा रही है उनकी 2013 में एक सड़क दुर्घटना में मौत हो चुकी है।

सूत्र की मानें तो कुश्ती संघ का दावा है कि कुदखोव डोप में फंस गए हैं और ऐसे में लंदन ओलंम्पिक में कांस्य पदक जीतने वाले योगेश्वर का रजत पदक पर अधिकार बनता है। इस लिहाज से उसकी ओर से यूडब्ल्यूडब्ल्यू से पूछा गया है अगर कुदखोव डोप में फंसते हैं तो उनकी ओर से जीता गया रजत पदक योगेश्वर को दिया जाएगा या नहीं। हालांकि कुश्ती संघ को जवाब नहीं मिला है… पर आज अचानक नजर एक योगेश्वर के टवीट पर गई आप भी पढिए … 

Four Years After London Olympics, Yogeshwar Dutt’s Bronze For India To Turn Silver – योगेश्वर दत्त को मिल सकता है लंदन ओलंपिक का सिल्वर पदक , India News News In Hindi -amar Ujala

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रियो ओलंपिक में दयनीय प्रदर्शन करने वाले भारतीय पहलवान योगेश्वर दत्त के लिए एक बड़ी खुशखबरी सामने आ सकती है। Read more…

Yogeshwar Dutt denies for London silver medal – www.bhaskar.com

yogeshwar dutt, Yogeshwar Dutt denies London silver medal, wants Besik Kudukhov’s family to keep it, London 2012 Olympics, Rio 2016 Olympics, Yogeshwar Dutt also acknowledged Besik Kudukhov as a “great” wrestler Read more…

 

 

yogeshwar-dutt_1472636831

(तस्वीर गूगल से साभार)

बहुत खुशी भी हुई और ये समझ भी नही आ रहा कि उन्होने सही लिखा या गलत … !!! जो भी हो मुझे योगेश्वर की भावनाओ ने प्रभावित किया .. आप क्या सोचते हैं ??

Forget silver, Yogeshwar Dutt’s London Olympics bronze is set to turn into gold | Latest News & Updates at Daily News & Analysis

Toghrul Asgarov of Azerbaijan, who won gold in the 60kg Freestyle Wrestling category, has reportedly tested positive for consuming performance enhancing drugs and if Yogeshwar’s samples come out clean, then the grappler is in for a golden treat. Two-time Olympic medallist Kudukhov died in a car crash in southern Russia in 2013. Incidentally, after receiving news of his bronze medal getting converted into a silver Yogeshwar expressed his desire that the medal should not be taken away from the late wrestler’s family.

Forget silver, Yogeshwar Dutt’s London Olympics bronze is set to turn into gold – If Yogeshwar Dutt’s samples come out clean, then the grappler is in for a golden treat. Read more…

2012 London Olympics: Yogeshwar Dutt’s 2012 Games medal may turn to gold |

नई दिल्ली: 2012 लंदन ओलंपिक में ब्रॉन्ज मेडल जीत चुके योगेश्वर दत्त अब सिल्वर नही गोल्ड की उम्मीद  read more at abpnews.abplive.in

 

 

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