Monica Gupta

Writer, Author, Cartoonist, Social Worker, Blogger and a renowned YouTuber

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December 1, 2015 By Monica Gupta Leave a Comment

Press

Press

Iam from press..

प्रैस का स्टीकर लगाना कितना जायज

एक जानकार मार्किट मे मिले कार के आगे पीछे  PRESS का स्टीकर लगा रखा था. मुझे बडी खुशी हुई अरे वाह !!! प्रैस ??? कौन सा चैनल ??? इस पर वो मुस्कुरा कर बोले अरे कोई नही !!! वो तो Press  लगा कर थोडा सहारा मिल जाता है पुलिस ज्यादा छानबीन नही करती… और चालान भी नही होता मेरे हाव भाव से शायद वो समझ गए कि मुझे यह बात पसंद नही आई थी  …!!!

देखा जाए तो ये सही नही है क्योकि कुछ लोगो के ऐसे दुरुपयोग की वजह से मीडिया को मक्खी / मधुमक्खी की उपमा मिलने लगी है. !!! वैसे आप तो ऐसे नही होंगें !!! है ना !!!

Press Tv

cars photo

Photo by born1945

 

December 1, 2015 By Monica Gupta Leave a Comment

भ्रष्टाचार

भ्रष्टाचार

ईमानदारी गई तेल लेने …

अभी कुछ देर पहले एक परिचित मिले. तनाव में लग रहे थे पूछ्ने पर बताया कि बुरा हाल है इन सरकारी विभागों का. मैनॆ भी हां मे हां मिलाई और कारण पूछा तो उन्होने बताया कुछ काम था विभाग में चाहता था कि तुरंत हो जाए इसलिए आफिसर को कहा कि कुछ ले देकर जल्दी करवा दो तो वो भडक गए बोले कि तरीके से ही चलेगा काम. रिश्वत देकर आप ही लोग तंत्र को बिगाड रहे हैं.

वो बताए जा रहे थे कि हुह, बडा आया सत्यवादी हरीश चंद्र … !!! बुरा हाल है कहते हुए गर्दन झटकते हुए आगे चले गए .अरे !! मैने सोचा कि अगर ऐसा बुरा हाल है बुरा हाल ही अच्छा!! वैसे मुझे भी एक किस्सा याद आया कि एक बहुत पैसे वाले व्यवसायी ने अपनी बेटी की शादी सरकारी कलर्क से महज इसलिए की कि खाता पीता तो होगा ही पर दो महीने बाद लडकी घर आकर बैठ गई और अपने पति की ईमानदारी का रोना रोती रही….
तो ऐसे मामले मे जरा नही बहुत सोचने की दरकार है है ना

भ्रष्टाचार  के बारे में आपकी क्या राय है …

honest photo

Photo by Danielle Scott

December 1, 2015 By Monica Gupta Leave a Comment

विचलित मन

विचलित मन

ये तस्वीर आपको विचलित कर सकती है.

बेशक, सोशल मीडिया यानि गूगल प्लस, फेसबुक, टवीटर पर लिखने , वीडियों अपलोड करने और अपनी बात रखने के अपने फायदे हैं ये एक खुला मंच है जहां हम अपने दिल की भडास या गुब्बार निकाल सकते हैं या अपने विचार सांझा कर सकते हैं पर एक बात इस पर जो पीडा देती है वो ये कि अपने आपको बहुत smart दिखाने के लिए हम कुछ ऐसी तस्वीरे अपलोड कर देते हैं जो नही करनी चाहिए थी. जिन्हे देख कर मन व्यथित हो उठता है.जैसाकि मैने हाल ही मे एक तस्वीर देखी जो एक सडक दुर्धटना की थी और महिला पुरुष के मृत शरीर पडे थे .अन्य तस्वीर में एक नवयुवती ने फांसी लगा रखी थी और उसका मृत शरीर लटक रहा था.

बेशक , उस पर नजर पडी और मैं तुरंत नेट बंद कर दिया  या दूसरे शब्दों में कहूं तो मन विचलित सा हो गया और धबराहट सी हो गई कि ये क्या देख लिया और नेट बंद करने के बावजूद  भी वही तस्वीर बार बार आखों के सामने आने लगी.

जाने माने समाचार पत्र या टीवी पर भी जब इस तरह की खबर दिखाते हैं तो वो थोडी धुंधली करके दिखाते हैं ताकि पाठक या दर्शक को वो तस्वीर विचलित न कर दे पर सोशल मीडिया पर कुछ लोग ऐसी तस्वीरे दिखा कर ना जाने क्या साबित करना चाह्ते है… ये ठीक नही है 😐  अगर आप भी ऐसा करते हैं तो कृपया न करें !!!

stop photo

विचलित मन के बारे में आपकी राय क्या है ??

December 1, 2015 By Monica Gupta Leave a Comment

भारतीय महिलाए और समाज

indian lady photo

Photo by Picture Institute- Bristol Margate Nida London

 

भारतीय महिलाए और समाज

 महाराष्ट्र के शनि शिंगणापुर मंदिर में एक महिला ने शनि महाराज को तेल चढा दिया. इसके बाद बवाल खडा हो गया क्योकि ट्रस्ट का कहना है कि 400 साल की परंपरा में पहली बार किसी महिला ने मंदिर के चबूतरे पर चढकर शनि महाराज को तेल चढाया, यहां ऎसा नहीं होता है। ट्रस्ट की ओर से रविवार को मंदिर का शुद्धिकरण किया गया. इस खबर को बहुत प्रमुखता से दिखाया गया. खबर देखते देखते मेरा मन बहुत साल पीछे उड चला. मैं उन दिनों मे पहुंच गई जब टीवी, मोबाईल या कम्प्यूटर नही हुआ करते थे.

संयुक्त परिवार होते और और नानी ,दादी के घर बिल्कुल अलग माहौल होता. रेडियों ,पत्र, पत्रिकाओ का बोलबाला हुआ करता था. पत्रिकाओं में एक पत्रिका थी सरिता. सरिता पत्रिका में एक कालम आता था हमारी बेडिया. उसे अगर आज के समय में पढे तो हैरान हो जाएगा कि महिलाओ के साथ किस किस तरह का व्यवहार किया जाता था.  किस तरह के आडम्बर और बेडिया थी समाज में.

बाहर की तो बात अलग है घर पर ही ढेरों बंधनों में रहती जैसाकि महीने के तीन दिन उसके साथ अछूत जैसा व्यवहार किया जाता था ( सम्भव है आज भी कुछ परिवारों में यह परम्परा हो) और अगर कोई विधवा हो गई है तो उसके लिए तो बहुत बंधन थे समाज में. लडकियों को बस रसोई घर तक ही सीमित रखा जाता. पढाई तो बहुत दूर की बात थी और अगर फिर भी पढ लिख लेती तो आठवी, दसवी करते ही रिश्ते की खोज शुरु हो जाती. इतना ही नही घरों में अपने ही लोग महिला का शोषण करते और उसे अपनी आवाज दबाने को मजबूर किया जाता और वो ये सब जुल्म सहती रहती. कुल मिला कर उस दौर को पुरुष प्रधान समाज का नाम दिया जाए तो गलत नही.

अब बात आती है आज के दौर की. जहां माता पिता लडकी को पढाना चाहते हैं. शहरों में ही नही गांवों में भी लडकी को पढाने लिखाने के मामले में मानसिकता बदली है. इतना ही नही जो कोई भ्रूण या लिंग की जांच करवाता है कि अगर लडकी है तो गिरवा दो कि भावना रखता है ऐसे डाक्टर को और अविभावकों को  सलाखों के भीतर कर दिया जाता है. महिलाए नौकरी करके कमा रही हैं और अपने पैरों पर खडी हैं आज समाज में बोलने की आजादी, लिखने की आजादी है और टीवी धारावाहिकों  सोशल नेट वर्क आदि के माध्यम से  जानकारी मिलती है कि क्या सही है क्या गलत ? अनेको एप्प मार्किट में आ गए हैं  जिससे चाहे वो बच्ची हो या महिला सचेत और जागरुक रहती है.

अचानक मेरी तंद्रा भंग हुई और देखा उसी मंदिर के पुजारी बता रहे थे कि परम्परा किसने बनाई और क्यो बनाई ये तो पता नही पर 400 साल से भी ज्यादा से यही चली आ रही है इसलिए मंदिर का शुद्धिकरण करना जरुरी था. उस महिला ने सही किया या गलत इस विषय पर बहस चालू हो चुकी है पर कुल मिला कर उन दिनों की तुलना में आज समाज में महिलाओं को लेकर बहुत परिवर्तन आया है बेशक, उन बेडियों से आजाद तो नही हुए पर राहत जरुर मिली है जोकि एक अच्छा संकेत है.

महिलाओं ने अपनी मिली स्वतंत्रता का कितना दुरुपयोग किया है … ये अलग बहस का विषय है जिसके बारे में अगली बार मुद्दा उठाएगें ..

भारतीय महिलाए और समाज के बारे में आपकी क्या राय है …

November 30, 2015 By Monica Gupta Leave a Comment

शरारत और बचपन के दिन

शरारत और बचपन के दिन

  Shararat  aur Bachpan, मासूम बचपन, प्यारा बचपन ,

बच्चों की दुनिया बहुत प्यारी है इसे प्यारा ही बने रहने दीजिए.

आज  सुबह हमारे शहर में बहुत धुंध थी. मैं बाहर खडी मौसम देख रही थी. कुछ बच्चे धुंध में बच्चे अपनी स्कूल बस की इंतजार कर रहे थे और कुछ बच्चे बाते करते हुए जा रहे थे.तभी पीछे से एक बच्चे की आवाज आई देख मै सिग्रेट पी रहा हूं. मै हैरान कि स्कूल जाने वाले बच्चे ये क्या कर रहे है और मेरे मन में सैकडो बाते आ गई उस बच्चे के भविष्य को लेकर और मैने उसी समय पीछे मुड कर देखा कि .पता है मैने क्या देखा. बच्चा धुंध की वजह से मुहं से जान बूझ कर, हंसता हुआ, धुंआ निकाल कर सिग्रेट् पीने की एक्टिंग कर रहा था. मै उसकी  मासमूयित पर मुस्कुरा दी.

सच, आज के तनाव भरे वातावरण मे हम इतने घुल मिल गए है कि बचपन, मासूमियत और उनकी शरारतो को भूलते ही जा रहे हैं जबकि हमे उन्हे जिंदा रखना है. फिर मै भी उन बच्चो के मिल कर हंसते हंसते जानबूझ कर एक्टिंग करके मुहं से धुंआ निकलने लगी….!!! उनकी मासूम और प्यारी हंसी हमेशा ऐसी ही बनी रहॆ उसके एक लिए हमे ही प्रयास करने होंगें ..

बचपन

childhood photo

Photo by susivinh

November 29, 2015 By Monica Gupta Leave a Comment

रिपोर्टर

कार्टून रिपोर्टर ( मोनिका गुप्ता)

कार्टून रिपोर्टर ( मोनिका गुप्ता)

रिपोर्टर

कहना गलत न होगा कि आज जिस तरह से चैंनलों पर न्यूज नमक, मिर्च छिडक कर परोसी जा रही है उसे देखते हुए ब्लड प्रेशर ही बढ रहा है. ऐसे में इन महिला के दिल में भय समा गया है. इनका कहना है कि होने वाली बहू भले ही किसी प्रोफेशन से हो बस रिपोर्टर नही होनी चाहिए क्योकि हर बात को तोड मरोड कर और चटपटा करके बताएगी और घर में कलह बढ जाएगी…..

क्राईम रिपोर्टर

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