Monica Gupta

Writer, Author, Cartoonist, Social Worker, Blogger and a renowned YouTuber

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November 28, 2015 By Monica Gupta Leave a Comment

गरम दल बनाम नरम दिल

मोदी जी

मोदी जी

गरम दल बनाम नरम दिल

गरम दल के नरम दिल बनने के बेशक बहुत कारण बताए जा रहे हों पर एक कारण बिहार में मिलने वाली हार और गठबंधन सरकार को मिलने वाली जीत माना जा रहा है.

वैसे संसद के शीत सत्र में जीएसटी समेत कई विधेयक पास करवाने हैं शायद इस कारण  सरकार के सुर भी नरम पड़ गए हैं. वही प्रधानमंत्री  मोदी जी ने लोकसभा में भी कहा – “लोकतंत्र में ज्यादा ताकत तब बनती है जब हम सहमति से चलें. सहमति नहीं बनने पर अल्पमत या बहुमत की बात आती है…. लेकिन यह अंतिम विकल्प होना चाहिए। जब सहमति बनाने के हमारे सारे प्रयास विफल हो जाएं।’

इस ओर प्रयास भी आरम्भ हो चुके हैं जिसका सकेंत मनमोहन सिंह जी और सोनिया जी को चाय पर बुलाना भी माना जा रहा है

www.bhaskar.com

भीमराव अांबेडकर की 125वीं जयंती समारोह के उपलक्ष्य में संविधान के प्रति प्रतिबद्धता विषय पर दो दिन चली चर्चा का प्रधानमंत्री ने जवाब दिया। उन्होंने असहिष्णुता बढ़ने और संविधान बदलने के प्रयासों के आरोपों का भी जवाब दिया। उन्होंने कहा कि ‘यह भ्रम फैलाया जा रहा है कि संविधान बदलने के बारे में सोचा जा रहा है। न कभी कोई संविधान बदलने के बारे में सोच सकता है और मैं समझता हूं कि कोई ऐसा सोचेगा तब वह आत्महत्या करेगा।’ शेष|पेज 5 पर असहिष्णुता से जुड़े आरोपों पर उन्होंने दोहराया कि “इस सरकार का एक ही धर्म है- इंडिया फर्स्ट। सरकार का एक ही धर्मग्रंथ है- भारत का संविधान। सर्व पंथ समभाव ही आइडिया ऑफ इंडिया है। देश संविधान के अनुसार चला है। आगे भी चलेगा। संविधान की पवित्रता बनाये रखना हम सबका दायित्व और जिम्मेदारी है, हमें अल्पसंख्यक-अल्पसंख्यक करने के बजाए सर्वसम्मति बनाने पर जोर देना चाहिए।’ अंबेडकर ने जीवनभर यातनाएं सही, लेकिन बदले की भावना नहीं आने दी: मोदी मोदी ने कहा- “डॉ. Read more…

 अब आप ही इस बात  के  कयास  लगाए कि  गरम दल बनाम नरम दिल  माजरा क्या है

 

November 28, 2015 By Monica Gupta Leave a Comment

What an Idea

mobile photo

Photo by pedrosimoes7

What an Idea

बात बहुत पुरानी नही है जब टीवी पर  आ रहा आईडिया का विज्ञापन …. ओ हो ओ हो   Get Idea  … Get Idea..  बेहद पसंद था और उसकी धुन थिरकने और गुनगुनाने पर मजबूर कर देती … पर यह थिरकन  तांडव में तबदील होने लगी और  गुनगुनाहट  की जगह ले ली चिल्लाहट ने.. असल में, कुछ महीनों से मोबाईल फीचर के बेवजह बिल लग कर आने लगे .तब कभी कस्टमर केयर  तो कभी लोकल आईडिया आफिस जा जाकर  बार बार  लगातार शिकायत की पर नतीजा शून्य  कोई सुनवाई नही हुई और बिल यथावत  वही लग कर आते रहे. प्लान बदलवाया सारे फीचर हटवा दिए  पर फिर भी ढाक के तीन पात  …. !!!! कुछ नही हुआ बस आश्वासन पर आश्वासन आश्वासन पर आश्वासन ही मिलते रहे कि हो जाएगा …  पर हुआ कुछ नही… माना कि मोबाईल आज के समय की आवश्यकता है रोटी कपडा और मकान से पहले मोबाईल होना जरुरी है. पर इसका यह मतलब भी नही कि कम्पनी वाले ग्राहक को बेवजह तंग करें और तो और  सुनवाई भी न हो …!!!

आज के समय में जब मोबाईल  कम्पनियों का इतना जबरदस्त काम्पीटिशन है तो ऐसे में ग्राहकों की  सुविधा का ध्यान तो रखना ही चाहिए ताकि वो छोड कर न जाए पर … पर … पर … !!! ये  तो है उनकी  सोच पर मैने भी सोच लिया है कि अब और नही …   Get Idea  ओ हो  ओ हो नही बल्कि   Get Out Idea  ओ हो … ओ हो …   GET OUT IDEA   नही चाहिए !!!ओ हो ओ हो !!! अब मैं थिरक भी सकती हूं और गुनगुना भी सकती हूं … फीलिंग रिलेक्स्ड 🙂

 

मैं तीस हजारी से बोल रही हूं जरुर पढिएगा

What an Idea पर अगर आपका कोई अनुभव या विचार हो तो जरुर सांझा कीजिएगा …

 

 idea mobile photo

November 28, 2015 By Monica Gupta Leave a Comment

भेडचाल

भेडचाल

हम और हमारी भेड चाल यह जानते हुए थी कि ये रास्ता कही नही जाता…. 

पिछ्ले दिनों दिल्ली से लौटते वक्त, नेशनल हाई वे पर, बहुत सारी भेडें सडक इस तरह से घेर कर चल रही थीं मानों हाई वे न होकर किसी खेत की पगंडडी हो इसलिए कार की रफ्तार बेहद धीमी करनी पडी. मैने कार का शीशा नीचे करते हुए भेडो को बोला ओ भेड जी जरा कच्चे में चलो.. क्यों हमारा रास्ता रोक रखा है. मुझे पता नही कि उन्हें क्या समझ आया क्या नही पर उन्होने म म म म म की आवाज जरुर निकाली. कार आगे बढी तो देखा कि बहुत वाहन लाईन मे लगे खडे हैं पहले लगा आगे शायद रेलवे क्रासिंग होगा पर वो कोई क्रासिंग नही बल्कि जबरदस्त जाम था.  किस वजह से था ये पता नही चला. हम सोच ही रहे थे किया किया जाए तभी देखा एक कार बडी मुश्किल से मुडी और धीरे धीरे धूल उडाता चालक अपनी कार को कच्ची सडक पर ले गया उसकी देखा देखी एक और कार मुडी और फिर एक और कार… ना मालूम किसी को रास्ता पता था या नही  पर उस कार की देखा देखी, कुछ ही पलों में खेत की पगडंडी पर अनगिनत कारें दौड रही थी.

उसी भेड चाल का हिस्सा बनें हम भी कार मे बैठे यही बात कर रहे थे क्या हम ठीक जा रहे हैं ? पता नही ये रास्ता कहां जाएगा या वापिस ही लौट जाए पर वापिस लौटना भी सम्भव नही था क्योकि वाहनों की कतार बढती ही जा रही थी. तभी देखा वही भेडे अब कच्ची पगडंडी पर हमें क्रास कर रही थी और शायद चिढा रही थी कि लो शुरु हो गई तुम्हारी भी भेड चाल ….!!! और मैं निरुत्तर थी. वैसे देखा जाए तो आज हमारी भॆडचाल ही तो है चाहे सडक पर टैफिक जाम में हो या सोशल मीडिया पर किसी बात की सच्चाई जाने बस भेड चाल की तरह उसका समर्थन करते पीछे लग जाते है म म म म म करते …यह जानते हुए भी  कि ये रास्ता कही नही जाता …  

sheep photo

 भेडचाल का समर्थन न ही करें तो अच्छा क्योकि ये रास्ता कही नही जाता

 

November 27, 2015 By Monica Gupta Leave a Comment

बदले बदले से सरकार नजर आते हैं

बदले बदले से सरकार नजर आते हैं

आज बहुत दिनों के बाद कुछ खबरे देख कर बेहद खुशी हुई . जैसाकि दिल्ली में 22.5 करोड की चोरी पुलिस ने तुरंत पकडी. चोर प्रदीप शुक्ला गिरफ्त मे.

दूसरी बिहार मे शराब बंदी लागू की जाएगी और तीसरी आज लोकसभा में संविधान पर चर्चा करते हुए प्रधान मंत्री मोदी जी का सुर मध्यम सप्तक मे था जबकि आजकल हम तार सप्तक ही सुन रहे थे. ये तीन खबरे कुछ राहत लाई पर हैरानी इस बात की है कि हमारे न्यूज मीडिया को यह खबरे हज्म नही हो रही कि अच्छा कैसे हो सकता है इसमे भी वो संशय और हैरानी  व्यक्त कर रहे है और इस में भी कुछ  चटपटा खोज रहे हैं. कुरेद रहें हैं कि शायद मसाला मिल जाए

बदले बदले से सरकार नजर आते हैंsearching  photo

 

November 27, 2015 By Monica Gupta Leave a Comment

रक्तदान और अमिताभ बच्चन

रक्तदान और अमिताभ बच्चन

रक्तदान और अमिताभ बच्चन (एक खुलासा) हेपिटाइटिस बी और बिग बी की वैक्सीन को लेकर जागरुकता

स्वैच्छिक रक्तदान की जागरुकता के लिए ,मैं, अक्सर अपनी मोटिवेशनल स्पीच में ,बच्चन साहब के नाम को भी लेती हूं कि इन्हें भी रक्त की जरुरत पडी थी. रक्त की जरुरत किसी को भी कभी भी पड सकती है  इसलिए स्वैच्छिक रक्तदान की महत्ता समझ कर  इसे नियमित करते रहना चाहिए ताकि हम किसी की अनमोल जिंदगी बचा सकें . पर, आज, जब अमिताभ बच्चन जी ने अपने स्वास्थ्य को लेकर एक बड़ा और गंभीर खुलासा किया कि वो 20 सालों से हेपिटाइटिस बी से जूझ रहे हैं.

रक्तदान और अमिताभ बच्चन

1982 में फिल्म कुली की शूटिंग के दौरान लगी चोट के बाद उन्हें 200 लोगों का कुल मिलाकर करीब 60 बोतल खून चढ़ाया गया था, जिनमें से एक डोनर का खून हेपिटाइटिस बी के वायरस से संक्रमित था। इसकी ख़बर उन्हें 18 साल बाद लगी. उनका 75 फीसदी लि‍वर संक्रमित हो चुका है और सिर्फ एक चौथाई हिस्सा ही काम कर रहा है और वो सिर्फ़ 25 फ़ीसदी के सहारे जी रहे हैं.

(गूगल सर्च से साभार तस्वीर)

रक्तदान और अमिताभ बच्चन

रक्तदान और अमिताभ बच्चन

 

सुनकर  बेहद हैरानी और दुख हुआ. सोचने की बात ये है कि इसमें अमिताभ जी का क्या दोष ??? वो बेकसूर होते हुए भी एक ऐसी सजा भुगत रहे हैं जो कसूर उन्होनें  कभी किया ही नही.

 बेशक, यह बात उन्होने टीका करण यानि  वैक्सिनेशन की जागरुकता  के संदर्भ मे कही हो पर इस बात से मेरे मन में एक और ही बात उभर कर आई और वो है रक्तदान के प्रति जागरुकता का अभाव. चाहे वो ब्लड बैंक हो, टैक्नीशियन हो आम रक्तदाता… सभी को, अलग अलग क्षेत्र में,  रक्तदान के के बारे में  जानकारी का अभाव है जिसके चलते ऐसी धटनाए देखने को मिलती हैं.

बेहद गम्भीर  और चिंता का विषय  है क्योंकि ऐसा सुनकर जिन्हें हम रक्तदान के लिए प्रेरित करते हैं वही पीछे हट जाते हैं और वैसे भी हमारे इस सिस्टम में इतनी खामियां हैं कि  रक्तदान के लिए लोगो को प्रेरित करना दिन प्रतिदिन बहुत मुश्किल होता जा रहा है.

रक्तदाता को भी समझना होगा कि रक्तदान करते समय किन बातों का ध्यान रखना बेहद जरुरी हैं रक्तदान से पहले फार्म को भली प्रकार से पढ कर ही रक्तदान करना चाहिए ताकि बाद में किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पडे.

ब्लड डोनेशन कैम्पस में भी बजाय अपना टारगेट पूरा करने के रक्तदाताओं का होमोग्लोबिन और  भार इत्यादि भली प्रकार चैक करना चाहिए और इस बात का भी ध्यान देना चाहिए कि वो ना सिर्फ फार्म पढे बल्कि सच्चाई से उस पर अम्ल भी करें अगर कोई पीलिया आदि जैसी बीमारी है तो  उसे छिपाने के बजाय डाक्टर को बताए.

बेशक , स्वैच्छिक रक्तदान के लिए बहुत लोग, संस्थाए दिन रात काम  कर रही हैं. कुछ गैरसरकारी अस्पताल भी ऐसे हैं जहां ब्लड टेस्ट बहुत अच्छी प्रकार किया जाता है ताकि रक्त जांच में किसी तरह की कोई कमी न रह जाए. इतना ही नही, यहां तक की हीमोफीलिया और थैलीसिमिया की बीमारी से पीडित  मरीज भी स्वैच्छिक रक्तदान के प्रति जागरुकता फैलाने का काम कर रहे हैं ताकि जनता जागरुक हो और उनका जीवन क्रम चलता रहे .

 इस बात में भी कोई दो राय नही कि इन सभी के ऐसे प्रयासों से, जागरुकता की वजह से अनगिनत लोगो की जिंदगियां भी बच रही हैं पर फिर भी रक्तदान के क्षेत्र में हम बहुत पीछे हैं बहुत कार्य करना है, बहुत प्रयास करना है और सफर बहुत लम्बा है …!!

डाक्टर से लेकर ब्लड बैंक और  टेक्नीशियन स्टाफ मे पारदर्शिता और हम रक्तदाताओं में  जागरुकता जब तक  नही आएगी हम उस लक्ष्य को नही जीत सकते जिसमे हम कहते हैं हमारे देश में खून की कमी से कोई नही मरना चाहिए और शत प्रतिशत स्वैच्छिक रक्तदाता हो ..

इसके लिए रक्तदान की सरकारी और गैर सरकारी संस्थाओं को आगे आकर आम जन जागरुक करना होगा. जन साधारण की सभी भ्रांतियां और सभी प्रश्नों के उत्तर देने होगें ताकि भविष्य में कोई संशय न रहे. युवा वर्ग को रक्तदान के लिए प्रेरित और प्रोत्साहित करना होगा.

मात्र रक्तदान करना ही नही बल्कि रक्तदान के प्रति जागरुकता लाना ही हमारा परम कर्तव्य होना चाहिए.

रक्तदान और अमिताभ बच्चन  लेख के बारे में आपकी क्या राय है जरुर बताईएगा … !!

टैटू गुदवाना और रक्तदान – Monica Gupta

टैटू गुदवाना और रक्तदान – 14 जून यानि World Blood Donor Day पर मैं कुछ लिखने का सोच ही रही थी कि घर पर जानकार आ गए बातो में उन्होने बताया कि उनकी fiancee read more at monicagupta.info

 

November 27, 2015 By Monica Gupta Leave a Comment

How to dress up – Ladies

How to dress up – Ladies

महिलाएं और उनका सजने सवरने का तरीका सलीका कैसा होना चाहिए .. आज इस बात की बहुत जरुरत है! हम कितने भी खूबसूरत क्यो न हो ब्यूटी पार्लर  beauty parlour जाकर हजारो रुपे खर्च कर आए पर जब तक सलीका ही नही होगा सब  बेकार है…

खूबसूरती के साथ साथ सलीका  होना भी बहुत जरुरी है . असल में ,कल समारोह में एक महिला को देखा जोकि बेहद खूबसूरत लग रही थी. सलीके से बांधी हुई साडी, आभूषण और हलका सा मेकअप सभी कुछ बहुत फब रहा था. मेरे मन में हुआ कि जाकर उस महिला से हैलो बोल कर उसे बताऊ कि वो बेहद खूबसूरत लग रही है. मैं आगे बढी ही थी कि तभी उसके पास कोई फोन आ गया और वो बात करने लगी मैं भी वही दूसरी और खडी होकर उसके फोन रखने का इंतजार करने लगी. बातचीत के दौरान शायद उसकी सहेलियां भी उस के पास आ गई थी. फोन रखते ही वो अजीब सा मुंह बना कर बोली यार कसम से, दुखी हो गई मैं इस सास से …. पूछ रही है कि क्या हम पहुंच गए शादी में … ना जाने कब इससे छुटकारा….. इसी बीच आया आकर उसी महिला को बोली बेबी रो रहा है शायद उसे सर्दी लग रही है तो वो तुनक कर बोली हद है , कसम से ,एंजाय भी नही कर सकते यहां …

ये बाते सुनते ही मैं तुरंत वापिस लौट आई .. मन कसैला सा हो गया … ऐसी महिला की सुंदरता भी किस काम की जिसे ना बडो से बात करने की समझ और न बच्चे से प्यार … मैने भगवान का शुक्र मनाया कि मैं उसकी प्रशंसा करने से बच गई …और गरमा गर्म टिक्की खाने स्टाल की ओर बढ गई…!!!

वैसे हम अक्सर शादी ब्याह जैसे माहौल में कुछ ज्यादा ही फ्री हो जाते हैं और कुछ ज्यादा ही बोल जाते हैं जबकि बहुत सोच समझ कर बोलना चाहिए क्योकि अक्सर ऐसे कार्यक्रमों में बहुत लोग हमे नोटिस करते हैं …. कसम से … !!! वैसे आप तो ऐसे नही होंगें …. और अगर हैं तो जरा नही बहुत सोचने की दरकार है … !!!

सलीका के बारे में आपके क्या विचार हैं !!!

think photo

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