Monica Gupta

Writer, Author, Cartoonist, Social Worker, Blogger and a renowned YouTuber

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August 8, 2015 By Monica Gupta

Flipcart baba

 

Flipcart baba

 

cartoon flipcart by monica gupta

घर बैठे बैठे हर चीज की सुविधा प्रदान कर रही है On line shopping… तरह तरह के विज्ञापनों से हमें लुभा रही हैं … इतना लुभा रही हैं कि अब तो भगवान जी भी कहने लगे हैं कि मुझ से नही फ्लिपकार्ट से मांग ..

Flipkart CLICK !

नई दिल्ली: हर इंसान की कई ख्वाहिशे होती है, लेकिन कई बार हर ख्वाहिश को पूरा कर पाना मुमकिन नहीं होता। अब आप खुद की ही बात करें, तो कई बार हमारे साथ ऐसा होता है, हम सोचते है कि हम अपने घर के लिए, अपने लिए या हमारे किसी अपने के लिए कुछ ऐसा खरीदें जो उनके और हमारे चेहरे पर मुस्कान ला दें, लेकिन हमारी मनचाही चीज हमें नहीं मिल पाती और हमें अपनी ख्वाहिश को मारकर किसी दूसरी चीज से ही गुजारा करना पड़ता है। पर अब ऐसा नहीं होगा, जी हां, अब आप जो भी सोचगे कि जो भी खरीदना चाहेंगे, आपको वो सब कुछ ‘फिल्पकार्ट’ पर मिलेगा। जी हां, ट्विटर पर भी ‘फिल्पकार्ट’ का सलोगन ‘अब हर विश होगी पूरी’ काफी ट्रेंड कर रहा है। इस ट्रेंड को यूज करके लोग कमेंट कर रहे है कि ‘फिल्पकार्ट’ पर आप जो भी खरीदना चाहे, सब कुछ मिलेगा। ‘फिल्पकार्ट’ आपकी हर विश पूरी करेगा, चाहे फिर आप कोई ड्रैस खरीदना चाहते, कोई गैजेट, क्रिकेट से जुड़ी कोई चीज या फिर कुछ भी और ये सब ‘फिल्पकार्ट’ पर ऑनलाईन खरीदारी करके आप आसानी से अपने घर ला सकते है। हालांकि, इस बात के बारे में कुछ नहीं कहा जा सकता कि चीज आपको वाकई में अच्छी ही मिले। लेकिन लोग इस हैशटैग के साथ काफी कमेंट कर रहे और कंपनी की जमकर तारीफ कर रहे, तो देर किस बात की आप भी कुछ खरीदकर देख ले, कि आपकी विश पूरी हुई की नहीं। See more…

August 7, 2015 By Monica Gupta

मैंगो फैस्टिवल

mango

मैंगो फैस्टिवल यानि आम का त्योहार.

कुछ दिन पहले अखबार मे  पढा कि मैंगो फेस्टिवल चल रहा है. पढते-पढते अचानक हंसी आ गई. बुरा ना मानिएगा पर सच  मे, आजकल , आम आदमी का ही त्योहार चल रहा है और उस त्योहार का नाम है ‘महंगाई’. कोई हाल है क्या. अमीर और अमीर होता जा रहा है और गरीब और ज्यादा गरीब पर असली बैंड बज रहा है आम आदमी का. जिसकी हालत किसी भी तरह आम की विभिन्न किस्मो से अछूती नही है.

पैरी, मलिका और सुंदरी बनने के दिन तो अब हवा हुए … महंगाई ने  तो जनाब  उसका अचार,चटनी और मुरब्बा बना कर रखा हुआ है. किसी मिक्सी मे गोल गोल घूमते शेक की तरह उसकी हालत हो गई है जिसे हर नेता या पैसे वाला बहुत तबियत से स्वाद ले लेकर  निचोड रहा है. बेचारे का रंग  सफेदा की तरह् सफेद पड गया है मानो किसी ने सारा का सारा खून निचोड लिया हो. और अब तो ये हालत हो गई है कि वो सीधा चलना ही भूल गया है और लंगडा आम की तरह लगड़ा कर चल रहा है. अम्बी जैसी खटास जीवन मे भर गई है और शरीर पीला इस कदर हो गया है मानो जन्म से ही पीलिया का मरीज हो …

उफ ये आम आदमी !! ना जाने कितने सब्जबाग तोता परी सपने देखे होगे इसने भी. पर जिस तरह दशहरे मे रावण धू-धू करके चल जाता है ठीक वैसे ही उसके सपने भी दशहरी हो चले है और सब …!!! बेचारे ही हालत आम पापड जैसी हो चली है … जिसे काला नमक डाल कर बडा स्वाद लेकर खाया  जाता है

इससे भी बढ कर  विडम्बना क्या होगी कि अब आम ही नही खा पा रहा आम आदमी. तो हुआ ना ये  आम आदमी का  त्योहार.  इस त्योहार के  लिए ना तो आपको कही टिकट लेना पडेगा और ना कही जाना पडेगा. नजर घुमा कर तो देखिए जनाब,  मैंगो मैन फेस्टिवल ही फेस्टिवल दिखाई दे जाएगा जिसमे आम आदमी फुस होता ओह क्षमा करें हाफुस होता दिखाई देगा …

कैसा लगा ये लेख … जरुर बताईगा 🙂

August 7, 2015 By Monica Gupta

आतंकवाद

cartoon jail by monica gupta

 

आतंकवाद

 बडा दुख होता है कि आतंक की धटनाए लगातार बढती ही जा रही हैं और उससे भी ज्यादा दुख यह देख कर होता है कि हम मे से ही कुछ लोग आतंकी की पैरवी करने पहुंच जाते हैं..

Sorry folks, Naved’s not Kasab: Udhampur gunman shows Pak jihadi factories’ desperation – Firstpost

Pakistan should start worrying about the quality of terrorists it is sending to India.

A boy-turning-man who bleats ‘mujhe mat pakdo’ when caught by villagers; smiles sheepishly when questioned about his motives; gives replies incoherently when grilled about his target and immediately reveals his name, address and nationality…is this all the terror training industry in Muzzafarabad could conjure in its ugly fight against India?

The abject decline in standards is visible. Mohammad Naved alias Qasim Khan alias Usman Khan is not even an Ajmal Amir Kasab, himself a semi-unhinged petty criminal who was brainwashed by the trainers for attacking India. See more…

August 7, 2015 By Monica Gupta

वो तीस दिन -बाल उपन्यास

monica gupta woh tees din

वो तीस दिन -बाल उपन्यास  ( मोनिका गुप्ता)

क्या ??? आपने अभी तक नही पढी … पढ लीजिए बहुत ही अच्छा बाल उपन्यास है वो तीस दिन … फिर न कहना कि हमें तो पता ही नही था नही तो जरुर पढते … अब तो online भी ले सकते हैं नेशनल बुक ट्रस्ट की साईट पर जाकर ..

 

August 7, 2015 By Monica Gupta

Cartoon Sansad

cartoon politics by monica gupta

Cartoon Sansad

दस दिन हो गए पर संसद में मानसून सत्र की कार्यवाही एक दिन भी नही चली. वही कुछ लोग अपने ग्रहों को कोस रहें हैं तो  वहीं मेरी  ये पात्रा संसद  की ग्रह दशा जानने के लिए पंडित जी के पास पहुंच गई…

 

 

August 6, 2015 By Monica Gupta

एक पत्र सरकार के नाम

कैसे आएगी स्वच्छता

 

writing letter  photo

 

एक पत्र सरकार के नाम

एक बच्ची की चिठ्ठी

नमस्ते सरकार अंकल,

आप कैसे हैं? आशा है ठीक ही होंगें. सरकार अंकल वैसे मुझे चिट्ठी लिखने का जरा भी अनुभव नही हैं क्योकि आजकल ईमेल का जमाना है पर मेरे मम्मी-पापा कहते हैं कि अगर सरकार तक कोई बात पहुंचानी हो तो पत्र ही लिखा जाता है… इसीलिए मै अपनी बात पत्र के माध्यम से ही कह रही हूं.

सरकार अंकल, वैसे मैं अभी छ्ठी स्कूल में ही पढ़ रही हूं पर खुद को लगता नहीं कि मै छोटी हूं क्योंकि घर पर और बाहर इतनी टेंशन है कि मुझे लगता है कि मै समय से पहले ही बहुत बडी हो गई हूं. मेरा बचपन कहीं खो सा गया है. खैर,यह बात बताने के लिए मैने आपको पत्र नही लिखा है. बल्कि मै आपसे कुछ निवेदन करना चाह्ती हूं.

सरकार जी, सच पूछो तो मुझे काला धन, स्विस बैंक या लोकपाल के बारे मे जरा-सी भी जानकारी नही है और न ही मेरे दिमाग में ये सारी बातें आ पाएंगी. मै तो बस आपसे जरा सी विनती करना चाहती हूं कि हर रोज होने वाले बंद और हडतालों को रुकवा दीजिए. मेरे पापा की छोटी-सी दुकान है जिससे हम तीन भाई-बहनो का खर्चा चलता है. कभी किसी तो कभी किसी वजह से दुकान बंद हो जाती है तो उस दिन हमें फाका करना पडता है और सभी को खाली पेट ही सोना पडता है.

दूसरी बात यह है कि  बिजली ही नही होती. बहुत कट लगते हैं  और कभी गलती से आ भी जाए तो वोल्टेज इतना कम होता है कि लगता ही नही कि बिजली है. फोन करो तो कोई फोन नही उठाता या फिर नम्बर व्यस्त आता रहता है. बरसात हो तो सुनने को मिलता है कि पीछे से गई है, पता नही कब आएगी.

अगली बात मेरे स्कूल से है. हैरानी है कि हमारे टीचरो को अपने विषय का ज्ञान ही नही है. अगर कोई बच्चा खडा होकर कोई प्रश्न पूछ ले तो वो  नाराज हो जाते हैं और कक्षा से बाहर खडे होने की सजा दे देते हैं. वैसे तो टीचर हैं ही कम, ऊपर से सरकार के काम से अक्सर डयूटी लग जाती है तो पढाई की वैसे ही छुट्टी हो जाती है. आप इस बात  पर भी  जरुर ध्यान देना कि स्कूल मे कृपा करके मिडडे मील बंद हो जाए.

हर रोज गंदा खाने से पेट खराब तथा दर्द अब सहन नही होता. इसके  इलाज के लिए रुपया अलग से खर्च करना पडता है, इस करके हम घर से खाना लाकर खुश है.

सरकार अंकल, अगली बात यह कि कचहरी के फैसले जल्दी करवा दिया करो. मेरे दादा जी की जमीन का केस पिछ्ले 24 साल से चल रहा है. दादा जी भी अब नही रहे और पिताजी को बार-बार तारीख पर जाना पडता है जिस करके बहुत तनाव हो जाता है हमारे घर पर. शायद एक लाख मिलना है पर अभी तक जैसाकि  मैने मम्मी पापा को बाते करते सुना है लाख से ज्यादा तो खर्चा अभी तक हो ही गया है.

सरकार अंकल, मुझे अपना भारत देश बहुत अच्छा लगता है. कल ही मैने निबंध प्रतियोगिता ने ‘मेरा भारत महान’ विषय पर लेख लिखा था जिसके लिए मुझे सम्मानित भी किया गया था. मै भी देश के लिए बहुत कुछ करना चाहती हू पर इतनी परेशानियां और दुख मेरी हिम्मत को तोड रहे हैं.

अंकल, कोई गलती हो तो क्षमा करना. मैने पहले भी लिखा था कि मुझे ज्यादा समझ नही है, ज्ञान भी नही है पर, असल मे, अपने परिवार और दोस्तो का दुख देखा नही जा रहा था इसलिए आपको पत्र लिखना पड़ा. नही तो मै आपको तकलीफ नही देती. मै जानती हू कि आपके कंधों पर कितना बोझ है.

पता नही कि  मेरा ये पत्र आपको कब तक  मिलेगा. पर जब भी मिलेगा मुझे आशा ही नही पूरा विश्वास है कि आप मुझ  छोटी-सी बच्ची की बात का जवाब जरूर देग़ें.

आपके घर पर सब कैसे हैं? सबको हमारी तरफ से नमस्कार बोलना.

पत्र के जवाब इंतजार मे

शेष फिर

आपकी नन्ही  देशवासी

 

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