Monica Gupta

Writer, Author, Cartoonist, Social Worker, Blogger and a renowned YouTuber

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June 23, 2015 By Monica Gupta

Social Media Addiction

cartoon by monica gupta

Social Media Addiction… अजी बस पूछिए ही मत … इतना बुरा हाल है कि बस …. बच्चे हो या युवा या फिर बडे लोग हर समय जुडे रहना चाह्ते हैं एक मिनट भी इससे दूर नही रह सकते. पहले स्टेटस डालेगें फिर उसे भी बार बार देखेंगें को कितने लाईक आए या नही … अगर आए तो इस बात को नार्मली ही लेते हैं और ना आए तो अपना ब्लड प्रैशर बढा लेते हैं ..और गुस्सा हो जाते हैं कि कोई लाईक क्यो नही आया.. या फलां नेट पर तो था फिर भी सने मेरे स्टेट्स को लाईक क्यों नही किया

अब इन साहब को ही देख लीजिए … import export का  business करते हैं  किस तरह से वो भी आपने सुन लिया होगा. एक महिला ने तो अपनी बिटिया का रिश्ता एक व्यक्ति से इसलिए फिक्स कर दिया कि उसके 10 एकड मे फार्म हाऊस है और ढेर सारे पशु भी है… शुक्र है शादी से पहले ही पता चल गया कि कौन सा फार्म हाऊस था ….

वैसे इतना दीवानापन भी अच्छी बात नही है

The signs and symptoms of social media addiction : Get Healthy

As fun as social media is for keeping up with friends, getting news updates and posting the occasional witty meme, for some people it can be destructive.

Dr. Johann Farley, an addiction medicine physician in Merrillville, is seeing more and more families who are struggling with relational issues as a result of social media addiction or dependency.

According to Farley, who is quick to state that he does use and appreciate his smartphone and the many tools that come with it, the biggest problem with social media is the time it takes away from meaningful relationships.

What may seem like an everyday, menial activity — checking your smartphone — could have a subtle impact on relationships over time, Farley says. He sets up this scenario: “Say you’re married and you and your spouse are sitting on the couch at the end of the day. Instead of getting affectionate with each other and talking about your day, you’re both doing your own thing on your phones. You go to bed without any interaction. From there on, you gradually start to move apart.”

The lack of face-to-face interaction is harmful, yes, but can we really throw around the word addiction?

Farley says yes, even going so far as to compare it to substance abuse addiction. “Do you need that eye-opener every morning? Do you feel like you need (to check social media) to calm your nerves? Can you put your cellphone away on your day off and spend time with the family? If the answer is no, there’s a problem.”

Jamie Monday, a counselor at Crown Point High School, agrees that one can be overly reliant on social media. “Dependency on anything is unhealthy when we are not able to function in our normal lives without it,” she says. “It is a good sign that you are dependent on something if you have tried to cut back your usage but have been unsuccessful.”

Monday says she sees this often among adolescents, particularly when their parents take away their mobile devices as a form of punishment. “If the teen is dependent on social media as their way of communicating with their peers, they will have a meltdown and sometimes even experience depression-like symptoms,” she says. See more…

June 23, 2015 By Monica Gupta

फैशन और हम – फैशन और युवा वर्ग

फैशन और हम

फैशन और हम –  फैशन फैशन फैशन …हर कोई फैशन करके रहना चाहता है फैशन की दुनिया में रहना चाहता है. इसमे बुराई नही है पर अपनी फिगर देख कर उसके हिसाब से पहनावा होगा तो देखने वाले को भी अच्छा लगेगा और ना ही हम मजाक का पात्र बनेगें.

फैशन और हम – फैशन की दुनिया

कई बार मोटी महिलाए फैशन के नाम पर टाईट कपडे पहन लेती है चलते उठते बैठते शरीर दिखता है तो वो मजाक का कारण बनती है कई बहुत उम्र की महिलाए चटक गहरे रंग पहन लेती हैं तो भी मजाक की पात्रा बनती हैं. और कई फैशन के चलते महिलाए हाई हील वाले चप्पल खरीद लेती हैं  और चल पाती नही जिससे मजाक का कारण बनती हैं. कई इतना भारी मेकअप कर लेती हैं कि सिर्फ हंसी का पात्र ही बन कर रह जाती है…

और आज तो मैने ऐसी खबर पढी कि हैरान ही रह गई … आप  भी जरुर पढिए

fashion photo

फैशन और हम

Woman lands in hospital after her skinny jeans cuts blood supply – ABP Live

Adelaide: An Australian woman whose skinny jeans cut off the blood supply to her calf muscles collapsed and was forced to crawl to seek help, media reported on Tuesday.

The 35-year-old woman from Adelaide, who doctors have labelled a “fashion victim”, suffered nerve damage severe enough to bring about numbness. She had to spend four days in hospital.

A consultant neurologist at the Royal Adelaide Hospital, Thomas Kimber said the woman’s decision to wear the restrictive leg-hugging denim had brought about the medical episode, ABC reported.

“She spent all that day really squatting down to help her relatives clean out cupboards,” he said, adding “she noticed that her legs were becoming increasingly uncomfortable as the day went on (but) didn’t really think much of it”.Kimber said the compression of two major nerves in the woman’s calf had caused her increasing weakness in her legs.

When the woman took a break with a walk in a park, she noticed her feet becoming increasingly weak before falling.

“By this time it was dark and quite late at night. She was unable to stand up again and really was there for some time before she could crawl to the side of the road, hail a cab and bring herself to the Royal Adelaide Hospital,” said Kimber.

The hospital staff had to cut the jeans due from the woman’s legs due to “massive swelling”. See more…

Image via www.abplive.in

अब आप खुद ही फैशन से होने वाले लाभ और हानि का आंकलन कीजिए और अपनी राय बनाईए

फैशन और हम

June 23, 2015 By Monica Gupta

गंदगी प्रेमी

गंदगी प्रेमी

गंदगी प्रेमी

मेरी एक सहेली हिल स्टेशन पर रहती है. कल ही उससे बात हो रही थी कि कैसा मौसम है. कैसी भीड है वहां तो वो मायूस सी बोली कि अब तो जल्दी से लोगों की छुट्टियां खत्म हो बस..जाए सब जल्दी से . अरे !!! ऐसा क्यो?? मेरे पूछने पर उसने बताया कि लोग धूमने आते हैं बहुत अच्छा लगता है पर गंदगी भी बहुत फैला जाते हैं खासकर सडक पर घूमते घूमते… कुछ खाएगें तो पीएगें तो… पूरी सडक मानो डस्ट बीन समझते हैं… वो ये सोचते ही नही हैं कि यहां भी लोग रहते हैं ना जाने कब समझ आएगी अब तो सच पूछो तो छुट्टियों के नाम से टेंशन ही हो जाती है.उसकी बात ने बहुत सोचने पर मजबूर कर दिया.

पता नही हम लोग सफाई का  स्वच्छता का ख्याल रखते क्यों नही है. घर से बाहर निकलो तो गंदगी पार्क में जाओ तो गंदगी. घर का कूडा बस अपने घर से बाहर  निकालना आता है कि बस अपना घर साफ रहे बाकि किसी की चिंता नही.

ऐसे ही बाजारों में दुकानों पर होता है. सुबह सवेरे सभी झाडू लगा कर अपनी  अपनी दुकान के आगे का कूडा साईड पर रख देगें और ऐसा हर दुकान दार करता है कुछ एक कूडे को आग भी लग अदेते हैं पर शाम तक वो कूडा वही पडे पडे लोगों के पावों से लगता वापिस दुकानों के सामने आ जाता है और फिर वही गंदगी … खाने पीने की स्टालस के आगे तो और भी बुरा हाल होता हैडस्ट बीन होते हुए भी उसे इस्तेमाल नही किया जाता.

वैसे आप तो ऐसे गंदगी प्रेमी  बिल्कुल नही होंगें.. है ना … और अगर हैं तो जरा नही बहुत सोचने की दरकार है.

 

 hill station scenery photo

गंदगी प्रेमी

cleaning Ganga campaign should not be limited to Photography

उत्तराखंड बाढ़ और भूस्खलन त्रासदी के दो साल पूरा होने पर यहां आयोजित एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि उत्पादन व उपभोग के लिए हुए विकास का प्रकृति बदला ले रही है। उन्होंने कहा, ‘हर जगह बांधों व बिजलीघरों का निर्माण हो रहा है जो प्राकृतिक आपदाओं का कारण बन रही है। हमें इस बारे में सोचने की जरूरत है।’

प्रधानमंत्री द्वारा चलाए जा रहे गंगा सफाई अभियान पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि यह राष्ट्र के धार्मिक व सांस्कृतिक धरोहर को बचाने के लिए है। प्रकृति को दरकिनार करने पर न तो हम अपना जीवन बचा सकेंगे और न ही धर्म की रक्षा कर पाएंगे। See more…

गंदगी प्रेमी

June 22, 2015 By Monica Gupta

सावधान पत्रकार

सावधान पत्रकार

mafia by monica guptaसावधान पत्रकार पहले उत्तर प्रदेश के जोगेंद्र और अब मध्य प्रदेश में भी एक लापता पत्रकार संदीप कोठारी को जलाकर मार डालने की घटना ने स्तब्ध कर दिया .मैं ये नही कहूंगी कि इस मुद्दे पर सारा मीडिया मौन क्यो हैं? क्योकि जानती हूं टीआरपी नही है मिर्च मसाला भी नही है और अगर कुछ बोले तो कही वो खुद ही इसका शिकार न बन जाए .. भले ही अब उनकी मौत आत्महत्या दिखाई जाए पर ऐसे बेबाक और साहसी पत्रकारों को मेरा नमन.

यकीनन सब देख पढ कर बहुत दुख हुआ कि मीडिया ही इस बात पर मौन धारण करके बैठा है. एक छोटी जगह का पत्रकार सुबह से शाम तक  एक खबर बनाने में के लिए पूरा दिन इस उम्मीद से निकाल देता है कि एक स्टोरी के कुछ पैसे मिलेगें और अगर वो धासूं खबर हुई तो ब्रेकिंग न्यूज भी बन सकती है …  और न्यूज चैनल चलाने वाले और कठपुतलिया बने बैठे आका अपना फरमान सुनाते रहते हैं. सच्चाई और बेबाक पत्रकारिता की आवाज को दबा दिया जाता है ..

एक छोटे से शहर की पत्रकार होने के नाते मैने भी बहुत बाते देखी है कुछ का मुकाबला किया तो कुछ पर चुप होकर बैठ गई. इतना जरुर जानती हू कि छोटे शहर के पत्रकार बहुत छोटी छोटी स्टोरी के लिए  मेहनत करते हैं जिसका उनको एक प्रतिशत भी नही मिलता और वही फालफू की खबरो को मात्र टीआरपी बढाने के लिए पूरा पूरा दिन मिल जाता है

मनमोहन सिह जी और मोदी जी के मौन पर मजाक बनाने और हवा देने वाला मीडिया इस मामले में जिस तरह से मौन साधे बैठा है स्तब्ध कर रहा है

 

BBC

शाहजहांपुर में पत्रकार जगेंद्र सिंह की संदिग्ध मौत के बाद अब मध्यप्रदेश के एक पत्रकार संदीप कोठारी की कथित रूप से हत्या की ख़बर आ रही है.

जगेंद्र सिंह की 8 जून को हुई मौत से पहले आख़िरी बयान में उन्होंने पांच पुलिस वाले और राज्य के एक मंत्री के ख़िलाफ़ हमले का आरोप लगाया लेकिन अब तक किसी को गिरफ़्तार नहीं किया गया है जबकि कोठारी की हत्या के बाद तीन लोग गिरफ़्तार किए गए हैं.

छोटे शहरों में पत्रकारों पर बढ़ते हुए हमलों पर उनके अंदर असुरक्षा का माहौल है. मैं शाहजहांपुर में कुछ स्थानीय पत्रकारों से मिला और उनके काम काज के बारे में जानकारी हासिल करने की कोशिश की.

अंधेरे से एक कमरे में पतलून और बनियान पहने एक आदमी कंप्यूटर पर काम कर रहा है. तेज़ पंखे के बावजूद कमरा काफ़ी गर्म है. दो और लोग वहां अपने कामों में मशगूल हैं. कमरे में रखे कैमरे, ट्राइपॉड और टेप्स को देखकर कोई भी अंदाज़ा लगा सकता है कि ये किसी मीडिया वाले का दफ़्तर है.

यानी अगर अख़बार के एक पत्रकार की किसी एक महीने में 10 कहानियां प्रकाशित हुईं तो उस महीने में उसकी कमाई केवल 1500 रुपए हुई. दूसरे शब्दों में उसकी एक मज़दूर से भी कम कमाई है.

स्थानीय पत्रकार कहते हैं कि कहानी के लिए दूर दूर तक धूप, गर्मी और बरसात में अपने पेट्रोल के ख़र्च पर जाना पड़ता है.

वरिष्ठ पत्रकार सरदार शर्मा ‘स्वतंत्र भारत’ अख़बार के ब्यूरो चीफ़ हैं. उनके अनुसार कम वेतन से बड़ी समस्या ‘पत्रकारिता का अपराधीकरण’ है. See more…

धटना ने स्तब्ध कर दिया है और अब लगता है कि रही सही  सच्चाई और दब जाएगी और फिर खत्म ही हो जाएगी

सावधान पत्रकार

June 22, 2015 By Monica Gupta

Short nap

Short nap

high way and car photo

Photo by MSVG

कल हाई वे जाते हुए एक कार हमारे आगे निकली और कुछ ही देर में हमारे देखते ही देखते सीधा सडक से नीचे उतरती चली गई. अचानक उसके ब्रेक की आवाज से हमारा ध्यान गया. ना कार का टायर फटा न सामने से कोई पशु आया और न ही चालक ने शराब पी रखी थी… शुक्र है कि बहुत बचाव हो गया पर हुआ क्या ??? पूछने पर उसने झेपते हुए बताया कि दो चार दिन से आफिस में बहुत काम था और दिल्ली जाना भी जरुरी था.

थकावट बहुत थी और नींद भी पूरी नही हुई थी शायद अचानक कार चलाते झपकी आ गई थी.अरे बाप रे..बेशक वाहन चलाते हुए मोबाईल पर बात करना खतरनाक है पर बिना नींद पूरी हुए वाहन चलाना भी कम खतरनाक नही …

वैसे बस पर भी लिखा होता है कि यात्री का 1 , 2 और 3 सीट पर सोना मना है वो इसलिए लिखा होता है कि  अक्सर यात्री को सोता देख कर वाहन चालक को भी नींद आ जाती है…

पलक झपकते ही कोई बहुत बडी दुर्धटना न हो जाए. इसलिए घर से तरोताजा होकर ही निकलिए …वैसे आप तो ऐसा नही करते होंगें और अगर करते हैं तो जरा नही बहुत सोचने की दरकार है.. आपकी जिंदगी की यात्रा शुभ रहे

short nap बेशक फायदे बहुत है पर अगर आप किसीकार्यक्रम में मंच पर ही झपकी लेने लग जाएगें तो हंसी का पात्र बन जाएगें और ड्राईव करते झपकी लेंगें तो  जान लेवा हो जाएगी … क्योकि भी चीज जिंदगी से बढी नही इसलिए अगर जिंदगी से सच्चा प्यार है तो टेंशन, झपकी थकावट सब घर पर  छोड कर ही निकलना बेहतर है….

 

Hints From Heloise: Power up with a nap! – The Washington Post

Dear Readers: Are you fully awake? Are you TIRED? Are you functioning, but sort of on 3/4 power? You could be one of the millions and millions of folks who are sleep-deprived! We work many hours, do errands on the way home, fight traffic and worry about late buses and trains. Then we come home and there is more to do. If you can find 20-30 minutes for a power nap, it could help tremendously.

Try to find a quiet spot (or wear earplugs), keep light to a minimum (or cover your eyes with something) and find the coolest (temperature) place you can.

If you can’t nap (especially at work), try for a short break — walk around the office or outside. Even go into a bathroom stall and close your eyes, block out noise and quiet your mind — yes, I’ve done this! — Heloise See more…

June 21, 2015 By Monica Gupta

Not a good idea

 

playing kids photo

Photo by “Vicky Dixon”

Not a good idea कुछ देर पहले कुछ स्कूली बच्चे घर के सामने से बाते करते हुए जा रहे थे. एक बोला अरे यार तूने मोदी को देखा. सफेद कुर्ता पजामा पहना हुआ था. दूसरा हंसता हुआ बोला ओ बेटे तू यकीन नही करेगा मेरे पापा, भाईयों बहनों इतना अच्छा बोलतें हैं कि मोदी भी शरमा जाए..

फिर एक अरविंद केजरीवाल का मजाक बनाते हुए कहना लगा कि हमारी तो औकात ही क्या है जी आम आदमी हैं ही हम तो … और फिर अपनी क्लास टीचर का मजाक उडाते वो तो आगे बढ गए पर मैं सोच रही थी कि हम किस तरह से मजाक बनाने लगें हैं. आदर मान देकर बोलना तो लगभग समाप्त ही हो चुका है.

Not a good ideaअब तो आखों की शर्म भी नही रही. ऐसे में, अगर घर के बडे ही बच्चों को आदर मान सीखाने की बजाय दूसरो का मजाक कैसे बनाना है यह सीखाएगें तो क्या होगा आप सोच भी नही सकते … बेशक इसमे टीवी चैनल की भी बहुत महत्वपूर्ण भूमिका बन जाती है. हमारे घर के बच्चे आदर दे मान सम्मान से बात करेंगें तो निसन्देह बहुत अच्छा लगेगा.  अन्यथा कोई बडी बात नही कल को आप और हम भी  इसका शिकार बन गए तो तो..तो … तो …!!! 🙄

 

Not a good idea

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