Monica Gupta

Writer, Author, Cartoonist, Social Worker, Blogger and a renowned YouTuber

  • About Me
  • Blog
  • Contact
  • Home
  • Blog
  • Articles
    • Poems
    • Stories
  • Blogging
    • Blogging Tips
  • Cartoons
  • Audios
  • Videos
  • Kids n Teens
  • Contact
You are here: Home / Archives for Monica Gupta

June 17, 2015 By Monica Gupta

मैं हूं मणि

मैं हूं मणि -मोनिका गुप्ता

mai hu mani by monica gupta

मैं हूं मणि …

मैं हूं मणि, मेरी पहली प्रकाशित किताब. सन 2008 में प्रकाशित बाल पुस्तिका में 54 पेज  में  16 कहानिय़ां है. पुस्तक को हरियाणा साहित्य अकादमी से बाल साहित्य पुरुस्कार मिला.

मैं हूं मणि  के माध्यम से मैने कुछ अपना बचपन और कुछ बच्चों का बचपन सम्मलित किया है. चाहे कहानी  चाकलेट की बेटी हो या मैं हूं राजकुमारी या मुझे नही बनना मम्मी वम्मी … बच्चों के मासूम मन को दर्शाता है …!!

मेरी लिखी एक बाल कहानी …

ऐसी ही हूँ मैं…………!

सुबह का समय……! मैं यानि मणि, स्कूल जाने के लिए तैयार हो रही हूँ पर मैंने जुराबें कहां रख दी मिल ही नही रही। बेल्ट भी देखने के लिए पूरी अलमारी छान मारी पर जब मम्मी मेरा स्कूल बैग ठीक करने लगी तब देखा उसी बैग में बेल्ट पड़ी थी। एक जुराब ना मिलने से अलमारी से दूसरा जोड़ा निकाल कर दिया। मेरा कमरा ऐसा हो रहा था मानो अभी-अभी भूकम्प आया हो। वैसे यह आज की बात नहीं है। मैं ऐसी ही हूँ। कमरा साफ-सुथरा रखना मेरे बस की बात नहीं………… वैसे मैं अभी तीसरी कक्षा में ही तो हूँ।

फिर पढ़ार्इ के अलावा मुझे पता है कितने काम होतें हैं….. गिनवाऊँ……… ओ.के. गिनवाती हूँ। पापा के पैरों पर खड़े होकर उन्हें दबाना, मम्मी की टेढ़ी-मेढ़ी चोटी बनाना, मटर छीलते समय उन्हें खाना ज्यादा डि़ब्बे में ड़ालना कम…….और….और…. पापा के हाथों व पैरों की उंगलियां खींचना, दादाजी की पीठ पर कंधे से खुजली करना…….ऊपर से पढ़ार्इ….पढ़ार्इ और पढ़ार्इ……….. है ना कितना काम। ओफ………..बस का हार्न बजा………… लगता है मेरी स्कूल बस मुझे लेने आ गर्इ है……….।

दोपहर के दो बजे मैं स्कूल से लौटती हूँ। उस समय मुझे अपना कमरा चमकता-दमकता मिलता है। यही हर रोज होता है।

हर सुबह मेरी तलाश, खोजबीन जारी रहती है और मम्मी मेरी हमेशा सहायता करती है क्योंकि ऐसी ही हूँ मैं…..। एक दिन मम्मी को कहीं जाना था तो मम्मी ने मुझे सुबह ही घर की डुप्लीकेट चाबी थमा दी। चाबी अक्सर मैं गुम कर देती हूँ इसलिए मम्मी मेरे गले में पहने काले धागे में चाबी ड़ाल देती हैं इससे चाबी गुम नहीं होती। मैं स्कूल से लौटी तो घर पर ताला लगा था। मैंने घर खोला और अंदर से बंद कर लिया। मम्मी मुझे हिदायत देकर गर्इ थी क्योंकि हमारे शहर में चोरियां बहुत हो रही थी।

हमेशा की तरह मैंने साफ-सुथरे घर को गंदा कर दिया। स्कूल बैग जमीन पर पटका। बेल्ट कहीं, जुराबें कहीं और कौन सी ड्रेस पहनूं के चक्कर में सारी अलमारी अस्त-व्यस्त कर दी। ड्रेस मैंने निकाली पर अलमारी बंद नहीं की क्योंकि ऐसी ही हूँ मैं।

फ्रिज में से कोल्ड़ डि्ंक निकाला और ठाठ से लेट कर टीवी देखने लगी। बार-बार चैनल बदले जा रही थी क्योंकि मुझे समझ में नहीं आ रहा था कि क्या देखूं और क्या न देखूं। फिर मम्मी की ड्रेसिंग टेबल वाली दराज खोल कर बैठ गर्इ कि मम्मी की सारी चूडि़यां, बिन्दी ठीक कर के लगाती हूँ। इसी बीच घर की लाइट चली गर्इ। मैं बोर होने लगी। मम्मी अभी आर्इ नही थी। मैंने सोचा कि घर बंद करके अपनी सहेली सुधा के यहां चली जाती हूँ। फिर मैंने घर ढंग से बंद किया और सुधा के घर गुडि़या-गुडि़या खेलने चली गर्इ ।

शाम हो गर्इ थी। मम्मी को सुधा की मम्मी से कुछ काम था इसलिए वो बाजार से सीधा ही सुधा के घर आ गर्इ। मुझे वहां खेलते देख उन्होंने गुस्सा किया कि पढ़ार्इ कब करूंगी और पापा भी बेचारे दफ्तर से आ गए होंगे और बाहर ही खड़े गुस्सा हो रहे होंगे।

मैं खेल भूल कर तुरन्त मम्मी के साथ घर चल पड़ी। घर गर्इ तो बाहर पापा और उनके दोस्त परेशान से खड़े थे। पापा ने बताया कि वह पाँच मिनट से बाहर खड़े हैं। घर का ताला तो बंद है पर अंदर से हल्की-हल्की आवाजें आ रही है। पीछे की खिड़की भी खुली है। वैसे पड़ोस के जैन साहब ने बताया कि उन्हाेंने पुलिस को फोन भी कर दिया है। पापा गुस्से से मुझे ही घूरे जा रहे थे। सभी अंदाजा लगा रहे थे कि पता नहीं, भीतर कितने लोग हैं।

पुलिस भी आ गर्इ। मम्मी ने घर की चाबी पुलिस वालों को दे दी। दोनों पुलिस वालों ने दरवाज़ा धीरे से खोला और धीरे-धीरे कमरे में प्रवेश किया। भीतर वाले कमरे से हल्की-हल्की रोशनी व आवाजें भी आ रही थी। एक पुलिस वाले ने भीतर से बाहर आकर यह रिर्पाट दी।

मेरी मम्मी भी पूरी तरह से घबरा गर्इ। पता नहीं क्या हो रहा होगा। तभी दूसरे वाला पुलिस मैन बाहर अपनी बन्दूक लेने आया तो उसने बताया कि भीतर का कमरा बिल्कुल फैला हुआ है। ऐसा लग रहा है मानो पूरी खोजबीन की हो। पांव तक रखने की जगह नहीं है। मैं तो बिल्कुल ही रूआंसी हो गर्इ। पापा-मम्मी दोनों मुझे गुस्से से देख रहे थे। आसपास के पड़ोसी भी इकटठे हो गए। चारों तरफ फुसफुसाहट हो रही थी।
तभी भीतर गए पुलिस वाले ने मेरे पापा को आवाज देकर भीतर बुलवाया। पिताजी ड़रते-ड़रते अन्दर गए फिर उन्होंने मेरी मम्मी और मुझे आवाज दी। हम दोनों भी अंदर गए। अन्दर जाकर देखा तो भीतर कोर्इ नहीं था। सिर्फ पापा और दो पुलिस वाले थे और हां कमरे में टीवी जरूर चल रहा था।
मुझे याद आया कि टीवी तो मैं चलता ही भूल गर्इ थी। बिजली चले जाने के कारण मुझे टीवी को बंद करना ध्यान ही नही रहा।

पुलिस वाले अंकल पापा को कह रहे थे कि वह तो इतना बिखरा कमरा देख कर हैरान थे और सोच रहे थे कि इतना तो चोर ही चोरी करते वक्त कमरा फैला कर जाते हैं।

पापा-मम्मी मेरी तरफ घूर कर देख रहे थे। मुझे एक तरफ तो खुशी थी घर में चोर नहीं है लेकिन पुलिस वालों के आगे मुझे बहुत बेइज्जती महसूस हुर्इ क्योंकि वह सारा कमरा तो मैंने ही फैलाया था…….। पुलिस अंकल मुझ से पूछने लगे कि क्या मैंने ही यह कमरा फैलाया है।

मैं जोर से रो पड़ी और कहने लगी कि प्लीज़ अंकल आप मेरी शिकायत किसी से मत करना। सारी गलती मेरी थी। मैं ऐसी ही हूँ। स्कूल से आकर सारा कमरा फैला देती हूँ। फिर टीवी देखते-देखते लाइट चली गर्इ। मैंने खिड़की खोल दी पर…. घर पर बोर हो रही थी तो मैं बिना खिड़की, टीवी बंद किए ही सुधा के घर खेलने चली गर्इ। पर बाहर से ताला जरूर लगा गर्इ।

पुलिस वाले अंकल ने बताया कि फिर शाम हुर्इ, अंधेरा हुआ तो टीवी की हल्की-हल्की आवाज और कम ज्यादा होती रोशनी से ऐसे लगा कि घर पर कोर्इ है और खुली खिड़की देख कर तो मन का शक पक्का हो चला। मैं रो रही थी। पर मुझे सबक मिला चुका था। मैंने मम्मी-पापा और पुलिस अंकल से वायदा लिया कि मैं आगे से ऐसा नहीं करूंगी। कमरा ठीक रखूंगी। दो-तीन दिन बाद फिर वही रोज मर्रा की तरह कमरा फैलाना शुरू हो गया क्योंकि…….. ऐसी ही हूँ मैं…….. है ना!

कैसी लगी कहानी जरुर बताईएगा …. 🙂

मैं हूं मणि …

 

 

 

June 17, 2015 By Monica Gupta

महिला दिवस

महिला दिवस ………….मेरी नजर में

 

cartoon oh no
8 मार्च ….  महिला दिवस यानि खूब गहमा गहमी का दिवस… बस इसे मनाना है … किसी भी सूरत में…..चाहे प्रशासन हो….या कोई संगठन, क्लब हो या कोई एन जी ओ….सब अपने अपने ढगं से मनाते हैं.

इस दिन जबरदस्त भाषण बाजी होती है .. महिलाओ को कमजोर बता कर उन्हे आगे आने के लिए उत्साहित किया जाता है. नारी सशक्तिकरण की याद भी उसी दिन आती है. दावे किए जाते है कि हमारे यहाँ कार्यक्रम मे 50 महिलाए आएगी तो कोई कहता है कि हमारे पास 100 आएगीं. हैरानी की बात…….आती भी हैं या भर भर कर उन्हें लाया जाता है.  उस दिन उनका पूरा समय भी लिया जाता है. कई बार उन्हे खुश करने के लिए उस दिन ट्राफी दी जाती है… आईए ….एक नजर डालते हैं…… 8मार्च की सुबह पर……
मिताली का अपने पति से जम कर झगडा हुआ…क्योंकि दिवस मनाने के चक्कर मे जल्दी जल्दी वो डबल रोटी जला बैठी और अंडा कच्चा ही रह गया ….पति महोदय बिना कुछ खाए द्फ्तर चले गए.

दीपा को महिला दिवस का कही से न्यौता ही नही आया था …..इस चक्कर मे घर मे काफी तनाव था …..दो बार अपने बेटे की पिटाई कर चुकी है…और चार बार फोन उठा कर देख चुकी है…पर घंटी है कि बज ही नही रही ..वो महिला दिवस को कोसती हुई ….बालो मे तेल लगा कर ….जैसे ही नहाने घुसती है….अचानक फोन बज उठता है और उसे आमंत्रण मिलता है कि कल तो फोन मिला नही …बस ..अभी आधे घंटे मे क्लब पहुचों…. आगे आप समझदार हैं…..कि क्या हुआ होगा ….

सरकारी दफ्तर मे काम करने वाली कोमल की अलग अलग तीन जगह डयूटी थी …उधर घर पर पति बीमार थे और लड्की के बोर्ड का पेपर था.. उसे सेंटर छोड कर आना था ….टेंशन के मारे उसका दिमाग घूम रहा था उपर से दफ्तर से फोन पर फोन आए जा रहे थे कि जल्दी आओ….
अमिता समय से पहले तैयार होकर खुद को बार बार शीशे मे निहार रही थी कि अचानक बाहर से महेमान आ गए …..वो भी सपरिवार …दो दिन के लिए ….उन्हे नाश्ता देकर जल्दी आने का कह कर वो तुंरत भागी … संगीता के पति का सुझाव था कि उनकी बेटी के शादी के कार्ड  वही प्रोग्राम मे बाटँ दे…… उससे चक्कर, पेटोल और समय बच जाएगा ……कार्ड निकालने के चक्कर मे वो बहुत लेट हो गई ….और वहाँ बाटंना तो दूर वहाँ लिफाफा ही किसी ने पार कर लिया ….
खैर , ऐसे उदाहरण तो बहुत है पर बताने वाली बात यह है कि प्रोग्राम मे सभी महिलाए मिलकर खुश होकर ताली बजा कर महिला दिवस का स्वागत कर रही थी …… वो अलग बात है कि उघेड बुन सभी के दिमाग मे अलग अलग चल रही थी.

चाहे वो घर की हो दफ्तर की हो या किसी अन्य बात की … महिलाए है ना….. चाह कर भी खुद को परिवार से अलग नही कर पाती….. शायद यह हमारी सबसे बडी खासयित है जोकि पूरे संसार मे कही और नही मिलेगी… हमारे देश मे हर परिवार का अपना रहन सहन है… अपना खान पान है….. परिवार जब शादी के लिए रिश्ता खोजता है तो उसके जहन मे होता है कि उसे कैसी लडकी चाहिए वो नौकरी पेशा हो या नही फिर बाद मे किस बात की तकरार.  ये तो हम महिलाओ की खासियत है कि घर और द्फ्तर या परिवार मे सही तालमेल रखती हैं.  आदमी महिला के खिलाफ कितना बोल ले पर उसके बिना वो अधूरा ही है… और यही बात हम महिलाओ पर भी लागू होती है .

कोई भी महिला आदमी के बिना अधूरी है तो फिर तकरार किस बात की है. क्यो अहम बीच मे आ जाता है ….. क्यों वो अपनी अपनी जिंदगी मे खुश नही रह सकते. प्रश्न इतना बडा भी नही है जितना लग रहा है .. इसका उतर हमे खुद खोजना होगा वो भी कही दूर जाकर नही बलिक अपने घर –परिवार मे .

मेरे विचार में बजाय मंच पर खडॆ होकर अपने हक की बात करने से या चिल्ला चिल्ला दुहाई देने से अच्छा है कि महिला को अपने घर की चार दिवारी मे परिवार वालो के बीच ही फैसला लेना होगा. अपना अच्छा बुरा खुद सोचना होगा.  माईक के आगे जोर जोर से दुहाई देने से बजाय खुद का मजाक बनने से कुछ हासिल ना हुआ है ना ही होगा. आप खुद ही नजर डाले कि बीते सालो मे 8 मार्च के बाद कितना और कहा कहा बद्लाव आया है तो सब  खुद ब खुद साफ हो जाएगा.
इसीलिए घर से अलग होकर या परिवार से उपर होकर फैसले लेने की बजाय परिवार के साथ चलेगें और अगर आपके अपने अपने परिवार मे जाग्रति आ गई तो हर रोज महिला दिवस होगा और बजाय लडाई झगडॆ के महिला और उसकी भावनाओ को समझ कर उसे ना सिर्फ घर मे बल्कि बाहर भी सम्मान मिलेगा ..जिसकी वो हकदार है ..नही तो इतने सालो से महिला दिवस मना रहे है ना .. बस आगे भी सालो साल मनाते ही रह जाएगे ..
तो .. 8 मार्च की सार्थकता तभी होगी जब हम सभी इस बात का गहराई से मथनं करे और जल्दी से जल्दी किसी निर्णय पर पहुचे ..

ये तो मेरी राय है आप इन विचारो से सहमत है या नही …. अपने विचार सांझा   जरुर करें ….

June 17, 2015 By Monica Gupta

नाजुक हैं आदमी

नाजुक हैं आदमी …

सुन कर आप सोच रहे होगे कि भला आदमी और नाजुक … हो ही नही सकते … लेकिन यह बात काफी हद तक सही है हालांकि अपवाद तो हर जगह होते हैं.

 

man emotional  photo

 

असल में, आदमी खुद दिखाते नही हैं .. जैसाकि हम महिलाएं  करती हैं  कि तुरंत रोना शुरु कर देती हैं लेकिन आपको यह जानकर हैरानी होगी कि ज्यादातर आदमियो का दिल एक दम मोम की तरह होता है पर वो मजबूत हैं बस यह दिखाने की कला उन्हें आती है.

अभी कुछ दिन पहले मेरी सहेली अपने बच्चे को स्टेशन छोडने आई तो उसने बताया कि इसके पापा इसे छोडने कभी नही आते वो तो इसे बाय भी नही बोल सकते. इसके एक दिन जाने से पहले ही वो उदास हो जाते हैं. पापा को देख कर बेटा भी उदास हो जाता है इसलिए उसे ही हमेशा मन पक्का करके छोडने आना पडता है.

एक हमारे पडोसी हैं जब से उनकी बेटी की शादी हुई है तब से वो चुप से हो गए हैं.  बेटी जब भी मिलने घर आती है वो उससे गले लग कर खूब रोते हैं. अब जब उसके भी बेटी हो गई है उनके वापिस जाने के बाद वो अकेले बैठ कर खूब रोते हैं फ़िर  हार कर उनकी पत्नी को मन मजबूत करके उन्हे चुप करवाना पडता है.
एक मित्र तो और भी कमाल है. उनकी लडकी 25 साल की हो गई है. जब भी उसके लिए कोई रिश्ता आता है तो वो किसी छोटे बच्चे की तरह रोने लग जाते हैं.  दीपक जब से पेपर मे प्रथम आया और उनके घर जब भी बधाई का फोन आता उसके पापा भावुक हो उठते.
मोहन जी की पत्नी जब तक अस्पताल  मे थी वो उनसे मिलने नही गए क्योकि वो उन्हे बीमार नही देख सकते थे.  वो अपना ही दिल पकड कर बैठ गए कि उन्हें ही कही कुछ ना हो जाए ..
ऐसे ना जाने कितने उदाहरण है इस बारे मे … जिससे बस एक ही बात सामने आती है कि आदमी भी नरम दिल के इंसान होते हैं बस वो दिखाते नही है अपने दिल मे ही रखते हैं यह बात आपको भी पता होगी … है ना … तो अगर आप किसी को पत्थर दिल आदमी बोले तो बोलने से पहले सोच लें क्योकि नाजुक हैं आदमी… !!!

June 17, 2015 By Monica Gupta

मेहमान नवाजी

अतिथि कब आओगेंguests  photo
सुन कर बहुत अजीब लग रहा होगा कि कब आओगे…पर यह सही और सच लिखा है ..आमतौर पर हम किसी के आने से खुश नही होते… इसके ढेर सारे कारण है…. सारे तो बताने सम्भव नही पर कुछ इस प्रकार हैं…  एक तो घर की दिनचर्या बिगड जाती है .. अगर कामकाजी महिला है तो डबल दिक्कत …घर पर अगर ज्यादा छोटे बच्चे हैं तो तीन गुणी दिक्कत और घर मे कोई बीमार है तो चार गुणा दिक्कत .. महेमान आने पर स्टोर से बर्तनो का सैट निकालना पडता है .. बिस्तर निकालने पडते है. नमकीन मीठा और शरबत ज्यादा मगँवा कर रखना पडता है..इत्यादि .. ..इत्यादि इत्यादि… अब भाई… इतने नुकसान है तो फायदा क्या है.
तो जनाब फायदा यह है कि बहुत दिनो से गंदे घर की सफाई हो जाती है रसोई घर साफ हो जाता है.स्नान घर मे पिचके हुए 3-4 टूथपेस्ट और शैम्पू के 5-7 रैपर और छोटे छोटे साबुन और साबुन दानी तुरंत साफ कर दी जाती है.

अलमारी भी साफ की जाती है कि कही महेमान गलती से खोल ना ले… बैठक के कमरो की भी सफाई की जाती है सोफे के गदे के नीचे जो अखबार बिल या फिल्मी किताबे पडी होती हैं साफ की जाती हैं. रद्दी दे दी जाती है.

आगंन के गमलो मे गुडाई की जाती है .. नए पौधे लगाए जाते हैं मानो सारे पर्यावरण की हमे ही चिंता है.

खुद को घर एक दम साफ साफ लगता है. हां …  वो बात अलग है कि जब महेमान वापिसी की टिकट साथ लेकर आता है तो मन खुशी से नाच उठता है लेकिन जब टिकट भी नही हो और वो जम ही जाए तो बेचारा मन जाने अनजाने बोल उठता है… कब जाओगे अतिथि …
आप मेरी बात से सहमत है या नही .. जरुर बताना ..जल्दी बताना .. क्योकि आजकल छुट्टियां ही चल रही है … और टिग टांग … ओह मेरे घर की घंटी बजी … अरे बाप रे बाप … आज सुबह से ही लिखने का काम कर रही हूं घर इतना फैला हुआ है कि ध्यान ही नही दिया … कही कोई मेहमान वेहमान आए गए तो … नही ….. !!!

June 17, 2015 By Monica Gupta

Indian Women

Indian Women

Indian Women का नाम जहन में आते ही हमारे समक्ष ऐसी महिला की छवि उभर कर आती है जिसने पहनी हो border वाली साड़ी, माथे पर हो बड़ी सी बिन्दी और हाथों में हो रंगबिरंगी चूडि़यों की खनखनाहट। दया, ममता, करूणा से सरोबार ऐसी Document(254)Indian Women को देख कर मन अनायास ही नतमस्तक हो जाता है।
सच, Indian Women की तो बात ही खास है। श्रंृगार ही उसका गहना है। मीठी, मोहक मुस्कुराहट लिए वो अपने घर परिवार में, बड़े-बुजुर्गों में, नाते रिश्तेदारों में पूरी तरह रम जाती है। इंडियन वामेन जानती है कि जो श्रंृगार की सामग्री जैसे नथ, टीका, पायल जिसे वो धारण कर रही है उसे सिर्फ शरीर से ही नहीं बलिक दिल में भी धारण कर चुकी है क्योंकि उसके लिए दिखावे की सुन्दरता नहीं बलिक असली सुन्दरता दिल के अन्दर छिपी हुर्इ है तभी तो वो जानती है उन आभूषणों की महिमा जिन्हें वो धारण करती है। जैसे :-
कड़े यानि कड़े जो वो सिर्फ सुन्दरता के लिए धारण नहीं करती बलिक वह जानती है कड़े का अर्थ है किसी से कड़े अथवा कटु वचन ना बोलें।

अंगुली में धारण किए जाने वाले छल्ले का मतलब है कि किसी से छल-कपट ना करें।

आंखों में लगाया जाने वाला काजल सदा यही कहता है कि शील का जल बनाए रखें यानि आंखों में शर्म रूपी पानी हमेशा बना रहे।

टीका हमेशा यही संदेश देता है कि यश का टीका मस्तक पर बना रहे।

Indian Women जानती है कि कर्णफूल सिर्फ लगाने से ही सुन्दरता नहीं बढ़ जाएगी बलिक कर्ण यानि कानों से सिर्फ दूसरों की प्रशंसा ही सुनेगी और किसी की बुरार्इ में बिल्कुल हिस्सा नहीं लेगी।

हंसली हमेशा यह दिखाती है कि हमेशा हंसमुख रहें। कभी किसी भी बात से किसी का मन ना दुखने दे।
Indian Women कमरबंद जब बांधती हैं तो मन ही मन यह संकल्प भी लेती है कि वो हमेशा सतकर्म यानि अच्छे कर्मों के लिए तैयार रहती है।

मोहनमाला धारण करते हुए उसके मन में सिर्फ एक ही बात रहती है कि अपने सदगुणों से वो सभी का मन मोह ले।

बंदनी का श्रंृगार वो बहुत दिल से करती है लेकिन वो इसका अर्थ भी जानती है कि बंदना करे अर्थात अपने पति, अपने गुरूजन की वो वंदना करेगी और उन्हें सदैव उचित आदर-मान देगी।

Indian Women का सबसे प्रिय आभूषण है पायल जोकि पांव में पहनी जाती है वो जानती है कि पायल का अर्थ क्या है पायल का सीधा सादा सा अर्थ है बड़े-बुजर्ुगों के चरण स्पर्श करना यानि झुक कर रहना जिसे वो दिल से करती है और हमेशा करती रहेगी।
तो देखा, ये है Indian Women । जो ना सिर्फ आभूषण धारण करती है बलिक उन्हें पूरी जिन्दगी अपनाती भी है। धन्य है Indian Women

June 17, 2015 By Monica Gupta

एक पत्र चोर के नाम

एक पत्र चोर के नाम

बाल साहित्य लेखन बच्चे की तरह  बहुत  मासूम होता है और इसे लिखते वक्त बाल मन मे उठने वाली सभी भावनाओ को पिरोना होता है… बाल साहित्य लिखना किसी चैलेंज़ से कम नही…

बच्चे का पैगाम, चोर के नाम

समझ नहीं आ रहा कि तुम्हें किस नाम से सम्बोधन करूँ प्रिय, तो तुम हो ही नहीं सकते क्योंकि तुमनें घर में मेरे मम्मी-पापा और बूढ़े दादा-दादी को बहुत रूलाया है। अन्य कोर्इ आपत्त्तिजनक सम्बोधन मैं कर नहीं सकता क्योंकि मेरे परिवार से मुझे ऐसे संस्कार ही नहीं मिले। लेकिन एक बात तो तय है कि तुम बुरे हो…………बहुत बुरे हो।

child photo

कल ही की तो बात है सुबह से हम कितने खुश थे। मुझे पता लगा था कि हमारे घर नन्हा-मुन्हा मेहमान आने वाला है। मम्मी भी कितनी प्यारी लग रही थी, भगवान जी के सामने हाथ जोड़कर वह कितनी देर तक लक्ष्मी माँ को निहार रही थी और सुबह से ना जाने कितनी बार मेरा माथा चूम रही थी।

शाम को मैंने ही जिदद की थी कि हम होटल में खाना खाने जाऐंगे, मम्मी का भी चटपटी चीज खाने को मन था। अत: पापा भी दफ्तर से जल्दी छुटटी लेकर आ गए थे। वह सरकारी नौकरी में हैं, पहले मेरे दादू भी सरकारी नौकरी में थे पर रिटायर होने के पश्चात वह गाँव में रहने लगे। मम्मी की खुशखबरी सुनकर वह और दादी भी बधार्इ देने आए थे।

अगले महीने मेरे चाचा की शादी होनी थी तो खूब खरीददारी भी चल रही थी। मैंने घोड़ी पर चाचा के साथ बैठना था इसलिए मेरी अचकन, पगड़ी और बहुत बड़ा मोतियों का हार लाए थे। मम्मी ने सब सम्भाल कर अपनी अलमारी में रखा हुआ था। माँ ने भी अपने पसन्द की सुन्दर साडि़यां खरीदी थी और पापा ने भी ढ़ेर सारी खरीददारी की थी।
चोर, तुम तो जानते ही हो, र्इमानदारी से सरकारी नौकरी करने वाले की आय क्या होती है। वैसे, मेरे पापा ने हमें किसी भी चीज़ की कभी तंगी नहीं होने दी। वह सिर ऊँचा करके चलते और कभी भी गलत बात सहन नही करते थे। अच्छा तो मैं बता रहा था कि शाम को होटल से खाना खाकर जब हम निकले तो सोचा अगर सिनेमा के टिकट मिल जाते हैं तो शो ही देख लेंगे। भाग्यवश कहो या दुर्भाग्य वश टिकट मिल गए और हम रात को बारह बजे घर पहुंचे।
पापा को घर पहुंचते ही कुछ गड़बड़ लगी। पापा लार्इट जला कर जेब से चाबी निकाल ही रहे थे कि दरवाजे का ताला टूटा पड़ा था। पापा स्वयं को संयत करके दादू का हाथ पकड़ कर घर के अन्दर दाखिल हुए तो घर खाली-खाली सा नजर आ रहा था। टी.वी., टेप-रिकार्डर  और दीवार घड़ी कहीं नजर नहीं आ रहे थे।
पूरे घर को इस तरह से उलट-पुलट कर रखा था मानों अभी-अभी भूचाल आया हो। मम्मी की अलमारी से सारे कपड़े जमीन पर बिखरे पड़े थे और उसमे रखा नकदी और जेवर सब गायब था। वैसे मुझे पता नहीं मम्मी के पास क्या-क्या था पर इतना पता है कि मम्मी एकदम सन्न होकर पलंग पर गिर पड़ी थी और पापा ने मुझे पानी लाने के लिए दौड़ाया।
रसोर्इघर के पास ही हमारा छोटा सा मंदिर है उस लक्ष्मी गणेशजी के मंदिर में रखा सारा चढ़ावा भी ले गए और हनुमान जी की गुल्लक को जमीन पर फैंक कर उसे तोड़ कर उनकी रोजगारी भी ले गए। मुझे परसों ही कक्षा में प्रथम आने पर सोने का तमगा (गोल्ड़ मैड़ल) मिला था जोकि मैंने गणेश जी की मूर्ति गिरा कर ले गए।
हर कमरे का ताला टूटा हुआ था। कुछ भी समझ नहीं आ रहा था। पडोसी भी सब घर पर इकटठा हो रहे थे। सदा मुस्कुराने वाली मेरी मम्मी को देख कर मेरी आँखों से आँसू बहे ही जा रहे थे। मम्मी की नर्इ साडि़यां, मेरी शादी के लिए तैयार की गर्इ अचकन भी ले गए। हमारे ही घर का सामान, हमारी ही अटैची और बैग में भर-भर कर ले गए।
पता नहीं, तुम कितने लोग आए थे और क्यों आए थे। आखिर हमने तुम्हारा क्या बिगाड़ा था। मुझे पता है कि पापा ने किस तरह रूपया-रूपया जोड़कर छोटा सा रंगीन  टेलिविज़न खरीदा था और मेरी मम्मी कालोनी के बच्चों को घर पर पढ़ाती ताकि मैं सबसे अच्छे स्कूल में पढ़ संकू।
लेकिन आज मैं बहुत उदास बेबस और मायूस महसूस कर रहा हूँ

और चोर, तुमको पत्र लिख रहा हूँ। पापा मेरे आँसू पोंछते हैं लेकिन खुद के दस-दस आंसू टपक जाते हैं, मुझे हिम्मत देते हैं और खुद………… कमजोर पड़ जाते हैं। अचानक मम्मी को रात ही को अस्पताल ले जाना पड़ा मुझे नहीं पता क्या बात है पर दादी ने बताया कि अचानक उनकी तबियत खराब हो गई अब वह कल वापिस घर आऐंगी। मुझे ज्यादा समझ तो नही पर इतना जरुर कह सकता हूं कि कोई न कोई बात मुझसे जरुर चिइपाई जा रही थी क्योकि अस्पताल से आने के बाद सभी दबी आवाज में कुछ बातें कर रहे थे.
घर में पुलिस भी आर्इ। उन्होंने हमारे बयान  भी लिखे पर सामान कब मिलेगा और मिलेगा या नहीं इसका किसी को नहीं पता। पर इतना पता है आज खुशी हमारे घर से दो सौ मील दूर भाग गर्इ हैं। मैं भगवान से प्रार्थना करता हूँ कि वह समय के साथ सब ठीक कर देगा और मेरी मम्मी भी अस्पताल से जल्दी ही वापिस आ जाएगी।
चोर, अगर जाने-अनजाने तुम मेरा यह लेख पढ़ रहे हो तो मैं तुम्हारे सामने आँसू भरी आँखें और हाथ जोड़ कर विनती करता हूँ कि प्लीज़, चोरी करना छोड़ दो। इस महंगार्इ के समय में हर आदमी तिनका-तिनका जोड़ कर अपना आशियाना बनाता है तुम उसे एक झटके में मत ले जाओ…….. मत ले जाओ…….. मत ले जाओ……..

एक बच्चे का चोर के नाम पैगाम आपको कैसा लगा ??? जरुर बताईएगा !!!

  • « Previous Page
  • 1
  • …
  • 313
  • 314
  • 315
  • 316
  • 317
  • …
  • 391
  • Next Page »

Stay Connected

  • Facebook
  • Instagram
  • Pinterest
  • Twitter
  • YouTube

Categories

छोटे बच्चों की सारी जिद मान लेना सही नही

Blogging Tips in Hindi

Blogging Tips in Hindi Blogging यानि आज के समय में अपनी feeling अपने experience, अपने thoughts को शेयर करने के साथ साथ Source of Income का सबसे सशक्त माध्यम है  जिसे आज लोग अपना करियर बनाने में गर्व का अनुभव करने लगे हैं कि मैं हूं ब्लागर. बहुत लोग ऐसे हैं जो लम्बें समय से […]

GST बोले तो

GST बोले तो

GST बोले तो –  चाहे मीडिया हो या समाचार पत्र जीएसटी की खबरे ही खबरें सुनाई देती हैं पर हर कोई कंफ्यूज है कि आखिर होगा क्या  ?  क्या ये सही कदम है या  देशवासी दुखी ही रहें …  GST बोले तो Goods and Service Tax.  The full form of GST is Goods and Services Tax. […]

डर के आगे ही जीत है - डर दूर करने के तरीका ये भी

सोशल नेटवर्किंग साइट्स और ब्लॉग लेखन

सोशल नेटवर्किंग साइट्स और ब्लॉग लेखन – Social Networking Sites aur Blog Writing –  Blog kya hai .कहां लिखें और अपना लिखा publish कैसे करे ? आप जानना चाहते हैं कि लिखने का शौक है लिखतें हैं पर पता नही उसे कहां पब्लिश करें … तो जहां तक पब्लिश करने की बात है तो सोशल मीडिया जिंदाबाद […]

  • Home
  • Blog
  • Articles
  • Cartoons
  • Audios
  • Videos
  • Poems
  • Stories
  • Kids n Teens
  • Contact
  • Privacy Policy
  • Terms of Use
  • Disclaimer
  • Anti Spam Policy
  • Copyright Act Notice

© Copyright 2024-25 · Monica gupta · All Rights Reserved