Monica Gupta

Writer, Author, Cartoonist, Social Worker, Blogger and a renowned YouTuber

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April 22, 2015 By Monica Gupta

Match Fixing

Match Fixing

मैने भी की मैच फिक्सिंग    (व्यंग्य)

क्षमा करें !!! पर माथे पर इतने बल डालने की आवश्यकता नही. मैने कोई गुनाह या कोई डाका नही डाला कि आप मैच फिक्स के नाम से इतना तुनक रहे हैं. अब समाज मे रहते हैं तो जरुरते भी होती है. कुछ काम ऐसे भी होते है जिन्हे निभाना पडता है.बस वही किया है मैने कोई दुनिया से हट कर नही किया ये काम सभी करते है. हां, वो बात है कि कोई चोरी छिपे करता है तो कोई … वैसे मुझे इस बात का कतई दुख नही है कि यह काम मैने चोरी छिपे किया.

cartoon-tihar jail

असल में, जमाना बहुत खराब है किसी को मेरे इस Match Fixing की भनक लग जाती तो बहुत बडी मुश्किल खडी हो जाती. इसलिए बस मैने परम प्रिय नेताजी को अपना हमराज बनाया और नेशनल हाईवे के ढाबे पर मीटिंग फिक्स की. मीटिंग के लिए नेता जी की कडी हिदायत थी कि खास खास लोग ही होने चाहिए.वैसे आपसे क्या छिपाना ऐसा करने से लेन देन की बाते आराम से हो जाती है.
सब कुछ आराम से हो गया. देखते ही देखते मैच फिक्स हो गया. जगह भी फिक्स हो गई कि कहाँ पर दुबारा मिलना है और किसे आना है.यकीन मानिए मेरे परिवार मे सभी बहुत ज्यादा खुश है खासकर कि मेरा बेटा वही चाह्ता था कि मै इस सीजन में मैच फिक्स कर ही दूं शायद उसके दोस्तों के पिता ने भी … खैर !!!
मैं तो नेता जी का धन्यवाद करना चाहूगां कि उन्होने इसे फिक्स करवाने मे बहुत जोर लगाया. मै इसकी कीमत शायद कभी भी नही चुका पाऊगा. अरे… आप कहां चले. क्या ? पुलिस को बताने. अरे, इसमे बताने की क्या बात है वो भी थे उस दिन. रसगुल्ले का डिब्बा दिया था मैने सभी को.
माफ करें!! फोन आ रहा है शायद पंडित जी का है. मुहुर्त निकलवाना है ना. अब आप फिर से हैरान हो गए. अरे भई, बच्चो का मैच फिक्स किया है अब शुभ मुहुर्त देख कर शादी की तारीख भी तो फिक्स करनी है या नही. लो कर लो बात !!! मै बात से क्यू पलटूगा. मैने क्या गलत कहां. वैसे एक मिनट… एक मिनट… आप सोच क्या रहे हैं जरा पता तो चले. क्या किकेट वाला मैच फिक्स?? जैसाकि बडे बडे क्रिकेटर या दूसरे लोग करते हैं.. ह हा हा …
अजी नही.वो तो कुछ दिन पहले एक लडकी देखी थी. बस पसंद आ गई.घर बार भी भला था. शरीफ से लोग है बस उसी से Match Fixing की बात हो रही थी. अब नेता जी समझ लिजिए कि बिचौलिया और अच्छे दोस्त है तो उन्होने पूरा साथ दिया और पहले बात ना फैले इसलिए गुपचुप तरीके से हाईवे पर दोनो को मिलवा दिया था और बहुत जल्दी ही सब कुछ फाईनल हो गया. ओह .. अब समझ आया कि आरम्भ मे Match Fixing की बात सुन कर आपने माथे पर बल क्यो डाल दिए थे. हे भगवान!!! आप भी ना ….. !!!!

April 22, 2015 By Monica Gupta

समाचार पत्र के बारें में – एक व्यंग्य

मटके का पानी छी होता है क्या

समाचार पत्र के बारें में – एक व्यंग्य –  akhbar अखबार ,  news paper यानि समाचार पत्र की भूमिका नेट का जमाना होते हुए भी आज भी बहुत ज्यादा है.

समाचार पत्र के बारें में – एक व्यंग्य

आज के दौर में भी अखबार छप रहा है और लोग उसे चाव से पढ रहे हैं पर दो महिलाए अखबार की बुराई करने में जुटी है कि अखबार जरा भी अच्छा नही.. सम्पादक महोदय की आखों से नींद उडना स्वाभाविक ही था कि आखिर अखबार अच्छा क्यों नही… आईए जाने की इन दो महिलाओं को अखबार में क्या खामियां नजर आई और फिर सम्पादक महोदय क्या कहते हैं…

 

https://www.facebook.com/linkmonicagupta

 

आज अचानक समाचार पत्र के सम्पादक को आपात कालीन बैठक बुलानी पडी. असल में, हुआ यू कि आज दफतर आते समय लिफ्ट मे दो महिलाए बात कर रही थी कि ( बीप बीप और बीप बीप.. अब आपको वो बात नही बता सकते है ना इसलिए बीप बीप लिखना पड रहा है ) हां,तो महिलाए बात कर रही थी कि…… अखबार तो जरा भी अच्छा नही है हां पहले ठीक था पर अब … !!! अचानक वो सम्पादक महोदय को देखकर चुप हो गई और फिर पहली मंजिल पर उतर कर अपने दफतर चली गई. बस तभी से सम्पादक महोदय का माथा ठनका और आनन फानन मे बैठक बुला ली.

 

अखबार अच्छा नही …… इस मामले को इतनी गम्भीरता से लिया गया कि जो सुबह सवेरे हॉकर अखबार फेंक कर आते हैं उन्हें तक को बुला लिया गया. सब अपने अपने विचार रख रहे थे. सम्पादक को डर लग रहा था कि कभी मालिक को पता चल गया तो उनकी छुटटी ही ना हो जाए. अखबार वाले  ने बताया कि वो अपना काम सुबह सवेरे कर देता है दूसरे सम्पादक ने कहा कि बीच मे गल्तियाँ बहुत होने लगी थी पर उसका ध्यान रखा जाएगा. दूसरे ने कहा कि वह लेख नेट से सीधा ही उठा कर बिना कांट छांट किए पेस्ट कर देता था पर अब ध्यान रखेगा एक ने अपनी राय दी कि हो सकता है कि अखबार मे विज्ञापन बहुत आते है शायद इसलिए … !!! पर इस बात को भी सिरे से नकार दिया गया क्योकि अगर विज्ञापन ही नही आऐगे तो अखबार का खर्चा कैसे चलेगा.

सम्पादक को चिंता इस बात की थी कि आज के इस कॉम्पीटीशन के युग मे अगर कोई नया अखबार आ गया तो … आज दो महिलाए बात कर रही है कल दस करेगी….परसो सौ ….उन्होने सिर को झटका और बहुत गम्भीर मुद्रा मे बैठक करीब दो धंटे तक चली.

एक सर्वे कम्पनी को कोंट्रैक्ट देने का निश्चय कर लिया गया कि वो अखबार के लेख व खबरो की कमियां लोगो से पूछे ताकि सुधार किया जा सके.

news paper photo

शाम को दफ्तर से जाते वक्त सम्पादक महोदय को फिर वही महिलाए लिफ्ट मे मिली. सम्पादक ने सोचा कि चलो सबसे पहले इनके ही विचार लेते है और बहुत शालीनता से पूछा कि उनके अखबार मे उन्हे कौन से लेख ना पसंद और पसंद है. दोनो पहले तो सकपकाई फिर बोली कि बोली कि ऐसी कोई बात नही है. इस पर सम्पादक ने कहा कि बताईए आप सुबह तो बात कर रही थी ना ..तो इस पर दोनो बोलने लगी कि बात लेख या खबर की नही है हमारे पास इतना समय ही नही होता कि अखबार बैठ कर पढा जा सके.
इस पर सम्पादक ने कहा पर आप लोग सुबह तो (बीप बीप .. बीप बीप ) की बुराईयां कर रही थी अखबार अच्छा नही….  इस पर वो मुस्कुराते हुए बोली अ…ओ अच्छा वो … असल मे,क्या है ना कि वो बच्चो को सुबह टिफिन देती है यानि पराठी उस अखबार मे मे पैक कर के देती हैं और बच्चे स्कूल से घर पर आकर अक्सर शिकायत करते है कि परांठी पर कागज के अक्षर की छाप आ जाती है.

बताईए अच्छा नही लगता ना.. इतने मे दूसरी बोली कि वो सुबह सुबह अखबार से घर पर बाश बेसिन के उपर लगा शीशा और उसके पति कार का शीशा साफ करते है तो अखबार ही शीशे पर चिपक जाता है. साफ ही नही होता अब बताईए अखबार कैसा अच्छा लगे. डबल मेहनत करनी पडती है साफ करने मे उसे. बस यही सोच रहे है है कि बीप बीप या बीप बीप …

तभी  पहली महिला बोल उठी कि इतना ही नही कई बार  चाय पीते वक्त मक्खी आकर बैठ जाती है तो अखबार को गोल लपेट कर ही तो उससे मक्खी मारेंगें…. पर नही… अजी ग्रिप ही नही बनती … और मक्खी उड जाती है मरती ही नही … अब ऐसे अखबार कैसे अच्छा हो …कोई मजबूती तो हो कि मारों और मक्खी गिर कर मर जाए…..   इसलिए लगा कि अखबार अच्छा नही !!

सम्पादक महोदय का हैरानी से मुहँ खुला का खुला ही रह गया और अब उनके पास बीप बीप के इलावा कहने को कुछ नही बचा था.
इतने मे लिफ्ट का दरवाजा खुला और दोनो महिलाए मटकती हुए बाहर चली गई और सम्पादक महोदय वही खडे के खडे रह गए….

 

अखबार अच्छा नही  आपको कैसा लगा ?? जरुर बताईएगा 🙂

 

April 22, 2015 By Monica Gupta

साक्षरता दिवस

अथ श्री साक्षरता दिवसाय नम:

चलो जी, हर साल की तरह इस साल भी आ गया साक्षरता दिवस. मन मे एक अलग सा ही उत्साह था कि देखते है कि इस साल के आंकडे क्या कहते है यानि क्या हमनें साक्षरता को लेकर सोपान चढी है या …. !!!! खैर चैनल लगाया तो अंट शंट खबरो के इलावा कुछ भी नही आ रहा था. मैने सोचा शायद आज के दिन को भूल गए है या अभी तक सर्वे जारी होगा. शाम तक ताजी रिपोर्ट आ जाएगी.eduction  photo

वैसे मेरे दिमाग मे भी पत्रकार का कीडा कुलबुला रहा था सोचा कि मै क्या किसी से कम हूं … चलो, साक्षरता दिवस पर   लोगो के साक्षात्कार ले कर आती हूं साक्षरता के बारे मे. मोबाईल और पेपर पैन उठाया और कूद पडी पडी मैदान मे. तभी सिर पर मूली के छिलके गिरे. मै घबरा गई और ऊपर देखा तो दूसरी मंजिल वाली आंटी खिसिया गई और बिना माफी मांगे कोलगेट स्माईल लिए बोली कि वो का है ना आज कूडे वाला तो आएगा नही … मूली के छिलके पडे पडे सूख रहे थे सोचा सडक पर ही डाल दू गाय खा लेगी … भला हो जाएगा उसका … फिर उल्टे ही मुझसे पूछने लगी कि कही जा रही हो क्या.. गुस्सा तो मुझे बहुत आया पर खुद को संयत करती हुई बोली कि आज साक्षरता दिवस है लोगो का साक्षात्कार लेने जा रही हूं.इस पर वो वैसी ही स्माईल बरकरार रखती हुई बोली … वाह !!! मेरा भी ले लो. डबल एम ए पास हूं और आजकल जनसम्पर्क विभाग मे सोशल वर्क में काम कर रही हूं.

मन तो उस समय ऐसा हुआ कि …. पर मैने अपने आप को समझाया कि कंट्रोल मोना … फिर चेहरे पर मुस्कान लिए मै बोली कि वो क्या है ना कि किसी से समय फिक्स किया हुआ है नही तो जरुर लेती आपका …. कहती हुई मे बाल और कपडे झाडती हुई वहां से निकल गई.
सामने कालिज था. बहुत लडको का झुंड खडा था .मै उनके ओर जाने को हुई ही थी कि वो सामने से गुजरती हुई लडकियो को गंदे गंदे कमेंट देने लगे. लडकियां तो सिर झुका कर चली गई पर उसी समय जब वहां से जब टीचर निकली तो उन्हे देखकर जोर जोर से हंसने लगे. मुझे इस समय वहा कुछ भी बोलना सही नही लगा और मै दूसरी तरफ मुड गई. मै सोच रही थी कि कूडा फेकने वाली आंटी या कालिज जाने वाले स्टूडेट आखिर किस श्रेणी मे आते हैं साक्षर या निरक्षर या अनपढ …!!! साक्षरता दिवस … हे भगवान !!!
उदास मन लिए थोडा और आगे बढी तो एक झुगी झोपडी से जोर जोर के पीटने की आवाजे आ रही थी. मां अपने बच्चे को पीट रही थी. असल मे, बच्चा स्कूल जाना चाह्ता था जबकि मां उसे ना जाने के लिए पीट रही थी कि पढ कर भी क्या निहाल करेगा. अभी से कमाएगा तो ही जी पाएगा नही तो … !!!मै आगे बढ कर कुछ समझाने को हुई ही थी कि इसने मुझे बहुत गुस्से से देखा और देखते ही देखते वहां भीड इकट्टी होने लगी तो मैने समय की नजाकता को देखते हुए चुपचाप खिसकना ही सही समझा.
थोडी आगे जाने पर मैने देखा कि शायद साक्षरता दिवस पर यहा कोई प्रोग्राम होने वाला है यहां तो पक्का ही कोई ना कोई अच्छा साक्षात्कार मिलेगा ही. तभी सामने से एक बडी सी गाडी आकर रुकी .अचानक चौकीदार उस गाडी सवार से सभ्यता से बोला बोला कि सर, आप कार आगे खडी कर लिजिए. यहा नो पर्किंग का बोर्ड लगा है. इस पर कोट पैंट पहने सभ्य दिखने वाला बाबू असभ्यता पर उतारु हो गया. तू है कौन ??? तू जानता है मै कौन हूं ??? मेरे एक इशारे पर तेरी छुट्टी समझ … बडा आया मुझे कहने वाला … मुझे … !!! कहते कहते ना जाने किसे उसने मोबाईल मिला लिया और जिससे भी बात की उसे तुरंत आने को कहा..

सच पूछो तो मेरा मन तो शुरु से ही उदास हो रहा था पर पर अब इतना कुछ देख कर मन वापिस जाने को करने लगा. और मै घर वापिस लौट गई.
सोफे पर धडाम से बैठते हुए खबरे लगाई तो ब्रेकिंग न्यूज आ रही थी …”आकंडे बता रहे है कि देश में अनपढ लोगो की संख्या विश्व भर मे सबसे अधिक ”
उफफफफ … मैने सिर खुजलाते हुए चैनल ही बदल दिया और मन ही मन बोल उठी … साक्षरता दिवस….अथ श्री साक्षरता दिवसाय नम: !!!!!

April 22, 2015 By Monica Gupta

Intuition in our life

ब्लड ग्रुप ओ और मच्छर

 

Intuition in our life

 पूर्वाभास और हमारी जिंदगी …!!!

हमारी जिंदगी मे यदा कदा Intuition या दूसरे शब्दो मे कहे पूर्वाभास होना अक्सर सुनने को मिल जाता है.जैसाकि अरे !! मुझे तो पहले ही पता चल गया था कि कुछ ना कुछ जरुर होने वाला है, या आखं फडकने को लेकर भी ऐसा अनुमान लगा लिया जाता है कि कुछ होने वाला है या फिर अगर पडोस मे बिल्ली अजीब सी आवाज निकाले तो हुश हुश करके उसे इसलिए भगा दिया जाता है कि कही कुछ बुरा ना हो जाए.चाहे तो पक्षियो का बहुत ज्यादा शोर हो या उनकी चुप्पी हो तो भी सहज ही ऐसा अनुमान लगा लिया जाता है कि कुछ होने वाला है.

cartoon oh no Intuition in our life some times makes us sad.

कुछ लोग इसे छठी इंद्रिय का नाम भी देते हैं. अब प्रश्न यह उठता है कि क्या वाकई मे ऐसा कुछ होता है? कुछ लोग इसे हकीकत मानते हैं और कुछ कोरी कल्पना. वैज्ञानिकों ने अपने अध्ययन में स्पष्ट किया है कि छठी इंद्रिय की बात सिर्फ कल्पना नहीं, वास्तविकता है, जो हमें किसी घटित होने वाली घटना का पूर्वाभास कराती है.
यूनिवर्सिटी ऑफ ब्रिटिश कोलंबिया के रॉन रेसिक ने एक अध्ययन कर पाया कि छठी इंद्रिय के कारण ही हमें भविष्य में होने वाली घटनाओं का पूर्वाभास होता है.

हाल ही में दीपक से मिलना हुआ. उन्होने बताया कि उनके दादा इन दिनो बीमार चल रहे थे. वो दादा के पास ही थे. अचानक सोते हुए वो उठे और बोले कि वो मुझे बुला रहें हैं. मैं जा रहा हूं. सबका ख्याल रखना. देखते ही देखते उनकी सासं उखड गई. अब ये पूर्वाभास नही तो क्या है.

वही रिचा ने बताया कि उसके अंकल बीमार थे. ऐसा लग रहा था कि वो कभी भी स्वर्ग सिधार सकते हैं. देर सवेर जब भी कोई फोन आता लगता उन्ही की कोई खबर होगी. समय बीता और वो ठीक होते चले गए.इतने ठीक हुए कि आफिस भी जाने लगे. तभी एक दिन दोपहर को फोन आया. पता नही पर अचानक वो बोल पडी कि अकंल हम सब को छोड कर चले गए. पास बैठी उसकी मम्मी ने टोका कि क्या बोल रही है. अब तो वो ठीक हैं. पर जैसे ही फोन पर बात की खबर सच्ची साबित हुई. सभी हैरान थे और रिचा ने बताया कि वो खुद भी हैरान थी कि अचानक यह बात उसने कैसे कह दी.
रवि कश्यप ने बताया कि वो अपनी लडकी के लिए बहुत समय से लडका देख रहे थे पर कोई बात नही बन रही थी. तभी एक दोपहर पता नही उन्हे झपकी आई या क्या हुआ कि उन्हे Intuition हुई  कि घर मे बहुत मेहमान है और खुशी का माहौल है. वो एकदम से उठ बैठे.अपनी पत्नी को सारी बात बताई. तभी अचानक एक फोन आया और देखते ही देखते उनका सपना सच हो गया. अचानक बात बन गई और लडकी को लोग चुन्नी चढा कर हाथो हाथ ले गए. बताते बताते उनकी आखे नम हो गई.

वही रजनी ने बताया कि एक बार वो सुबह उठी और बेवजह ही रोने लगी. ना उसे और ना उसके परिवार वालो को समझ आया कि आखिर बात है क्या. पर रजनी को मन ही मन लग रहा था Intuition हो रही थी कि  कुछ बुरी खबर आने वाला है. तभी उसकी सहेली घर पर आई और उसने बताया कि रश्मि जोकि उन दोनो की सहेली थी सडक एक्सीडेंट मे मारी गई.
मीना ने बताया पूर्वाभास उसे कई बार होता है और वो अक्सर ठीक भी होता है. काम के सिलसिले मे उसे अक्सर बाहर जाना पडता है. कई बार उसे खुद ही लगने लगता है कि आज उसे वहां नही जाना चाहिए और वो नही जाती. कुछ समय बाद खबर मिलती है कि जहां उसे जाना था वहां कोई ना कोई अनहोनी हुई है.
ऐसे ना ना जाने अनगिनत उदाहरण है. ऐसी बातो पर कुछ लोग विश्वास करते है तो कुछ अंधविश्वास !!! पर चाहे कुछ भी हो आज के इस कम्प्यूटर युग मे भी कुछ ना कुछ तो ऐसा जरुर है जो हमे सोचने पर मजबूर कर देता है…!!

अगर आपका भी कोई ऐसा अनुभव हो तो जरुर बताईएगा …

April 22, 2015 By Monica Gupta

किसान रैली

किसान रैली    बरसात क्या आई मानों किसानों की जिंदगी मॆ ग्रहण सा लग गया. फसले तबाह हो गई और किसान आत्महत्या करने पर मजबूर हो गए. लेकिन नेता अपनी अपनी पार्टी का राग आलाप रहे हैं कभी भाजपा तो कभी कांग्रेस तो कभी आप पार्टी स्वयं को किसान का हितैषी बता रहे हैं पर उनका दुख दर्द कोई नही समझ रहा.. बस किसान रैली में सभी दल राजनीति कर रहे है और किसने कैसा भाषण दिया इस पर लगातार चर्चा हो रही है अफसोस !!! ऐसे मे पृथ्वी दिवस की शुभकामनाए कैसे दें किसानों को …

cartoon- farmer-monica

April 21, 2015 By Monica Gupta

शुभ यात्रा

cartoon -gud days-monicaआपकी यात्रा शुभ हो !! शुभ यात्रा  जी … अभी आए नही है … अच्छे दिन आने वाले हैं … बस चलते रहिए … चलते रहिए और चलते रहिए … कभी न कभी आ ही जाएगे… आपकी यात्रा शुभ हो 🙂

Modi One Year

‘अच्छे दिन आने वाले हैं’ का नारा देकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सत्ता में आए थे। एक साल के दौरान उन्होंने 18 विदेश दौरे किए। कच्चे तेल की कीमत में गिरावट आई तो पेट्राेल-डीजल सस्ता हुआ। लेकिन फरवरी के बाद कीमतें फिर बढ़ने लगीं। मोदी का चीन दौरा खत्म होते-होते सोशल मीडिया पर उनका जादू भी कमजोर पड़ता दिखा। 26 मई को मोदी सरकार के एक साल पूरे होने के मौके पर dainikbhaskar.com आपको बता रहा है कि अच्छे दिन की कोशिश में मोदी कहां चूके और कहां तारीफ पाई?

Expert View : मोदी के पास अब देने को ज्यादा कुछ नहीं – राजनीतिक विश्लेषक और वरिष्ठ पत्रकार अरविंद मोहन का मानना है कि पिछले एक साल में मोदी सरकार को लेकर जनता के उत्साह में कमी आई है। अटल बिहारी वाजपेयी और मनमोहन सिंह की तुलना में मोदी के पास अब देने के लिए बहुत कुछ नहीं है। सरकार अब पब्लिसिटी को ज्यादा तव्वजो दे रही है। लेकिन मोदी के पास खुद का उत्साह बचा है। उसमें कमी आती है तो यह चिंता की बात होगी। जहां तक स्वच्छ भारत अभियान, बीमा योजना, जन धन योजना की बात है तो ये हल्के कार्यक्रम हैं। इनके जरिए राजनीतिक-सामाजिक स्तर पर प्रभाव नहीं डाला जा सकता। – ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल इंडिया के चेयरमैन पी.

भट्टाचार्य का कहना है कि फिलहाल महंगाई काबू में है। अच्छे दिन हैं या नहीं, इसका पता मानसून के बाद चलेगा, क्योंकि इस बार अलनीनो का असर रह सकता है। कच्चे तेल के दाम बढ़े तो भी महंगाई बढ़ेगी। – अंतरराष्ट्रीय संबंध मामलों के जानकार पुष्पेश पंत का कहना है कि मोदी सरकार की विदेश नीति की कई लोग आलोचना कर रहे हैं, लेकिन मैं मानता हूं कि उनकी विदेश नीति काफी संतुलित रही है। मोदी की सभी 18 विदेश यात्राएं सोची-समझी रणनीति का हिस्सा थीं। विदेश नीति में एक-एक कदम काफी सूझबूझ के साथ उठाया गया। See more…

कछुआ चाल है … अभी तो पहला साल है आप चलते रहिए …आपकी यात्रा शुभ हो !!  अभी आए नही है … अच्छे दिन आने वाले हैं … बस चलते रहिए … चलते रहिए और चलते रहिए … कभी न कभी आ ही जाएगे… आपकी यात्रा शुभ हो 🙂

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