हैलो
हैलो, मैं नरेंद्र मोदी बोल रहा हूं
आजकल मोबाईल हो या इंटरनेट सुविधा इतनी हो गई है प्रतिदिन किसी न किसी पार्टी की और से फोन बजते ही रहते हैं …
अब इन भिखारी जी को ही देखिए व्यस्त है फोन सुनने मे …!!!
हैलो
Writer, Author, Cartoonist, Social Worker, Blogger and a renowned YouTuber
By Monica Gupta Leave a Comment
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IQBAL AZAD – Actor – मशहूर टीवी अदाकार इकबाल जी का का आजकल Colors TV पर romantic thriller and drama ” बेपनाह ” धारावाहिक बहुत पसंद किया जा रहा है… धारावाहिक में इकबाल आजाद जी Waseem Siddique यानि अब्बा का किरदार बखूबी निभा रहे हैं… कुछ समय पहले जब मेरी उनसे बात हुई थी तो कुछ बातें उन्होने शेयर की थी… आईए जानें उनकी कुछ जानी कुछ अंजानी बातें..

Zoya siddique with waseem siddique
एक अच्छे अदाकार की यही खासियत होती है कि वो जिस भी किरदार मे ढले अपनी अमिट छाप छोड जाए. मशहूर टीवी अभिनेता “इकबाल आजाद” अपने हर रोल में ना सिर्फ अपनी छाप छोडने में कामयाब रहे हैं बल्कि असल जिंदगी मे भी उनके व्यक्तित्व मे इतना गजब का आकर्षण है कि अपनी सादगी और सहजता से किसी के भी दिल में अपनी जगह बना लेते हैं.
बेशक इकबाल आजाद किसी परिचय के मोहताज नही पर बहुत से दर्शक उन की जिंदगी के बारे में जानने को बहुत इच्छुक हैं इसलिए मैनॆं इकबाल जी से समय लिया और उन्होनें अपनी व्यस्त दिनचर्या से कुछ पल निकाले और फिर शुरु हुआ बातचीत का सिलसिला….
27 अक्टूबर को पटना में जन्मे इकबाल, बेशक ,अपने चार भाई बहनों में दूसरे नम्बर पर थे पर शरारतें और उछ्ल कूद करने मे अव्वल नम्बर पर रहे. पापा गुजरात और मम्मी हिमाचल से थी पर अपना व्यापार शुरु करने के लिए पटना आ गए और फिर यही बस गए.
बचपन की शैतानियों को याद करते हुए एक किस्सा सुनाया कि उनके घर का कुछ काम चल रहा था. उनका कुत्ता राजू हमेशा उनके साथ रहता. काम के दौरान घर पर बहुत सारी मिट्टी मगंवाई. तब उन्होनें एक गडडा खोदा और उसमे राजू को बैठा दिया और फिर उस पर मिट्टी डाल कर उस गड्डे को पूरा भर दिया. उस समय सिर्फ उसका मुहं ही दिखाई दे रहा था. गड्डा भरने के कुछ पल बाद राजू बाहर निकल आया और गुस्से मे उसने उनकी कलई पकड ली और बस गुर्राता ही रहा मानो बहुत नाराज हो पर अच्छी बात यह रही कि उसने काटा नही. उस दिन एक नया सबक सीखा कि बेवजह जानवरों को परेशान नही करना चाहिए.
बचपन की और यादें सांझा करते हुए उन्होने बताया कि जहां वो रहते थे वहां ज्यादातर सभी हिंदू परिवार थे. पर तब हिंदू ,मुस्लिम का फर्क होता ही नही था. सरस्वती पूजा हो या दुर्गा पूजा, जन्माष्टमी हो या विश्वकर्मा पूजा वो हमेशा चंदे के लिए दोस्तों के साथ घर घर जाया करते थे और वही सब दोस्त ईद और बकरी ईद का बेसब्री से इंतजार करते. वो दिन भी क्या दिन थे. बचपन में स्काउट और गाईड फिर कालिज में एनसीसी ज्वाईन किया और बिहार के बैस्ट कैडिट चुने गए. बताते बताते उन दिनों की यादों मे खो से गए.
मेरे पूछ्ने पर कि एक्टिंग करने की धुन कैसे और कब सवार हुई. इस पर वो हंसते हुए बोले एक्टिंग का भूत या कीडा कहिए. बात तब की है जब वो सात साल के थे. महमूद और जूनियर महमूद की फिल्म देखी और बस तभी से मन मे घर कर गया कि बडे होकर एक्टिंग ही करनी है बस !!! मेरे पूछ्ने पर कि क्या आपके मम्मी पापा मान गए इस पर वो मुस्कुराते हुए बोले उन्हें बताया ही नही बस पूरा ध्यान पढाई पर ही रखा.
जब बारहवीं क्लास मॆ आए तो थियेटर ज्वाईन कर लिया उस समय “चतुरंग” नाम का बेहद क्रिएटिव बंगाली ग्रुप था. एक दिन जब टाईम्स आफ इंडिया में उनके अभिनय की तारीफ और फोटो छपी तब घर पर पता चला. उन्होनें मुस्कुराते हुए बताया कि घर की तरफ से कभी कोई पाबंदी नही लगी इसलिए थोडे समय बाद थियेटर “निर्माण कला मंच” ज्वाईन कर लिया वहां लगभग दस के करीब नाटक किए और सच मानिए उनसे बहुत हौंसला मिला. कुछ समय बाद मुम्बई में एक्टिंग का दो महीने का क्रेश कोर्स किया और बस फिर सन 94 से कभी मुड कर नही देखा. अपने धारावाहिकों को याद करते हुए उन्होनें बताया कि “टी टाईम मनोंरंजन” ( हास्य) , “छोटी मां” (ज़ी चैनल) “स्पेशल स्क्वैड” स्टार वन पर ,”केसर”, “बदलते रिश्तों की दास्तान”, “कुछ झुकी पलकें”, “कभी सास कभी बहू”, “अदालत”, “F.I.R”. “नादानियां”,… और नाटकों में “All The Best”, ना जाने ऐसे ढेरों नाटक और धारावाहिक हैं जिसमें उन्होने काम किया. हर किरदार अलग ही छाप छोड गया. “नादानियां” में उनके “नन्दू “के किरदार को बहुत ज्यादा पसंद किया था.
मेरे पूछने पर कि उन्हें अभी तक कौन सा किरदार अच्छा लगा इस पर वो बोले कि “स्टार बैस्ट सैलर” की टेलिफिल्म “विटनैस” मे उन्हें अपना रोल अभी तक का सबसे बेहतर रोल लगा.
IQBAL AZAD वैसे उन्हें हास्य अभिनय करना बेहद पसंद है. उनका मानना है कि हास्य अभिनय करने मे एक अलग ही आनंद आता है. हास्य की बात से मेरे मन में एक प्रश्न उठा कि शूटिंग के दौरान क्या कभी कोई अजीबो गरीब वाक्या पेश आया. कभी आप अपने डायलाग भूले. इस पर बहुत सहजता से कहा कि वो तो अक्सर भूलते ही रहते हैं पर एक बहुत मजेदार बात हुई.
आजकल “तेरे शहर में” नामक धारावाहिक आ रहा है उसकी शूटिंग चल रही थी. बहुत गम्भीर सीन फिल्माया जा रहा था पर पता नही क्या हुआ कि बात पर हंसी आ गई. और जितनी गम्भीरता उस सीन मे लानी चाहिए थी उसके विपरीत होता रहा. सभी किरदार बहुत बुरी तरह हंस रहे थे. डायरेक्टर को भी गुस्सा आ गया और लंच ब्रेक करवा कर कसम खिलवाई कि हम बिल्कुल नही हंसेंगें.
बहुत कंट्रोल के बाद सीन किया और वो ओके हुआ. पर अभी भी याद करते हैं तो वैसी ही हंसी आ जाती है. फिल्मों के काम के बारे में उन्होनें बताया कि तीन फिल्में की है जिसमे से एक राम गोपाल वर्मा जी की भी है पर अभी तक रिलीज नही हुई है.
मैं जानना चाह रही थी कि कोई अगर इस इंड्रस्ट्री में आना चाहे तो उसे क्या कहना चाहेगें. इस पर वो तपाक से बोले उनका वेलकम है. अगर उसके दिमाग में एक्टिंग का कीडा है तो वो हर हालत मे आएगा ही आएगा पर उसके लिए ये भी जरुरी है कि वो अपने आसपास थियेटर ज्वाईन करे. अपने भीतर छिपे हुनर को बाहर लाए. बस सिर्फ बोरिया बिस्तर उठा कर ही न आ जाए. स्कूल या कालिज मे पढते पढते थियेटर करना शुरु कर दे तो बेहतर होगा.
अपने प्रशंसकों के बारे में IQBAL AZAD नें बताया कि बहुत अच्छा लगता है जब लोग आपको जानते हैं पहचानते हैं और आगे बढ कर आपका ओटोग्राफ और फोटो लेते हैं.
बातों का सिलसिला खत्म होने का नाम ही नही ले रहा था. लंच टाईम भी हो रहा था तो मैने उनसे पूछा कि खाने मे क्या क्या पसंद हैं उन्होनें बताया कि उनकी पत्नी डाक्टर फराह इकबाल बहुत अच्छी कुक भी है. उनके द्वारा बनाए सभी पकवान वो बेहद चाव से खाते हैं. जहां तक मीठे की बात है रसगुल्ला उनकी कमजोरी है. बेहद और बेहद पसंद है. जिस अंदाज से उन्होने बोला मुझे लगा कि मेरे मुंह मे भी पानी आ गया.
इसी बीच उनका सीन तैयार था और वो उठ खडे हुए और जाते जाते कहा कि बचपन से एक ही बात सोची थी कि एक्टिंग करनी है और वो कर रहा हूं बस ये सफर ऐसे ही चलता रहे. दर्शकों का प्यार मिलता रहे बस … !!!
उनके जाने के बाद मैं यही सोच रही थी कि इतने समय से इस इंड्रस्टी में है और किसी भी तरह का कोई घमंड और गुरुर नही बस सच्ची मेहनत और लग्न से अपने मुकाम की ओर बढे चले जा रहे हैं…
ढेरों शुभकामनाएं IQBAL AZAD जी !

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उफ ये फैशन …
मेरी सहेली मणि अभी मिलने आई.
जबरदस्त जुकाम था. अरे!! अभी पिछ्ले सप्ताह ही बुखार ठीक हुआ था. अब फिर से ??? माना कि मौसम बदला है दुबारा सर्दी आ गई है पर मणि अपना ख्याल बहुत अच्छी तरह रखती है.
स्वेटर या शाल जरुर लेती है फिर ये दुबारा ??? इस पर उसने बताया कि एक दो शादियों मे जाना था. वहां वो शाल ले कर गई पर उसकी जानकार सहेलियो ने कार मे शाल रखे रहने दी. बोली कि तुम इसे लोगी तो हमे भी लेनी पडेगी जोकि हम नही चाह्ते शाल मे ज्वैलरी कैसे दिखेगी … स्टाईल कैसे दिखाएगें…
ये बहन जी टाईप लुक कार मे रखो और खींच कर उसे ले गए. बस देर रात तक कार्यक्रम चला और नतीजा … जुकाम, खांसी … छी .. हे भगवान !!! क्या है ये !!! दिखावा करके क्या हासिल होगा समझ से बाहर है
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