Odd and Even
Odd and Even
पिछ्ले दिनों मोदी जी का बदला व्यवहार बहुत अच्छा लगा कि चलो जो हुआ सो हुआ अब शायद सब मिल कर काम करेंगें तो बेहतर परिणाम आएगें…. फिर बात आई बिहार में शराब बंदी की… एक ऐसी खबर जो बेहद खुशी लेकर आई. ये खबर चल ही रही थी कि खबर आई दिल्ली में सम और विषम अंकों के वाहन चलाने पर … बेशक,ये खबर किसी के गले से नीचे उतरे या न उतरे पर अगर इन बातों पर गम्भीरता से अम्ल किया जाए तो परिणाम दूरगामी और बेहतर होंगें …
Odd and Even
बीप बीप
बीप बीप
BEEP BEEP …आज शाम किसी काम से मार्किट जाना हुआ. मेरे आगे तीन चार युवा बाते करते जा रहे थे और उनकी बोल चाल की भाषा ऐसी थी कि अगर टीवी पर सुनाई जाए तो 90% बीप बीप का प्रयोग किया जाता. हर बात पर अपशब्द … हर बात पर गाली देते हुए बेहद सहज थे. आखिर किस ओर जा रहे हैं हम!!! चाहे टीवी पर बडबोले बयान बार बार दिखाना हो या मुंह पर काला कपडा बांध कर विरोध करना .. गाली गलौज वाली भाषा आमजन मे जिस तेजी से फैलती जा रही है बेहद चिंताजनक है…. !!!
बीप बीप

नोबेल विजेता कैलाश सत्यार्थी
नोबेल विजेता कैलाश सत्यार्थी
और उनका निस्वार्थ सेवा भाव
सच मानिए तो कैलाश सत्यार्थी जी का नाम मैने पहली बार कल टीवी पर सुना उसके बाद जब उनके बारे मे विस्तार से जाना तो हैरानी के साथ साथ बहुत खुशी भी हुई कि इतने सालों से इतना बडा काम कर रहे हैं वो..!!!.
रक्तदान से जुडे कुछ लोग बहुत ही अच्छा काम कर रहे हैं कई बार जब मैं उनसे उनका साक्षात्कार या तस्वीर लेने की बात करती हूं तो वो मना कर देते हैं कि अरे नही .. हम तो बहुत साधारण से लोग है …हमारी तस्वीर किसलिए … !!! कैलाश जी भी शायद ऐसे ही रहे होंगे … निस्वार्थ सेवा भाव से जो काम किया जाता है उसका फल बहुत मीठा ही निकलता है इसलिए जो लोग समाज सेवा से जुडे हैं उनसे मेरा विनम्र निवेदन है कि बिना फोटो खिचवाए और सुर्खियों में आए बस कार्य करते रहे एक दिन आपका भी होगा !!!
शुभ कामनाएं कैलाश सत्यार्थी जी और मलाला
निर्भया कांड और दोषी की रिहाई
निर्भया कांड और दोषी की रिहाई
16 दिसंबर 2012 को दिल्ली के वसंत विहार में हुए ‘निर्भया कांड’ के नाबालिग आरोपी की सजा अब पूरी होने वाली है . वो 22 दिसंबर को रिहा होगा लेकिन एक रिपोर्ट के मुताबिक चाइल्ड वेलफेयर कमेटी ने यह निर्णय लिया है कि उसे किसी एनजीओ की निगरानी में रखा जाए और उसे उचित शिक्षा दी जाए. यहां उसे व्यवसायिक परीक्षण भी दिया जाएगा. उसकी हरकतों पर भी पुलिस और प्रशासन करीब से नजर रखेगा. इसके बाद ही आगे का फैसला किया जाएगा.
वही, एक खबर के मुताबिक सुनने मे आया है कि पीड़िता की मां ने दोषी ठहराए गए किशोर की इस महीने रिहाई के बाद उसे एक एनजीओ में भेजने के फैसले का विरोध किया है. पीड़िता की मां ने कहा उसे खुला घूमने की इजाजत नहीं मिलनी चाहिए. उन्होने कहा कि उनकी बेटी की बरसी पर उसकी रिहाई उनके मुंह पर तमाचा है. पीड़िता की मां ने आगे कहा कि हमारे लिए उसका (किशोर अपराधी) एक एनजीओ में रहना उसके आजाद रहने जैसा ही है. हमारी मांग है कि उसे रिहा नहीं किया जाना चाहिए.
गौरतलब है कि सबसे ज्यादा ज्यादती इसी नाबालिग ने की थी वारदात के समय बुलंदशहर के रहने वाले इस आरोपी की उम्र 18 वर्ष से कुछ माह ही कम थी. दोषी, बसों में कंडक्टर का काम करता था. आनंद विहार बस स्टैंड से ही इसे गिरफ्तार किया गया था. बताया जाता है कि निर्भया कांड को जधन्य बनाने में इसी का अहम हाथ था.
IBN Khabar
नयी दिल्ली। दिल्ली में 16 दिसंबर सामूहिक बलात्कार के मामले में पीड़िता की मां ने दोषी ठहराए गए किशोर की इस महीने आसन्न रिहाई के बाद उसे एक एनजीओ में भेजने के फैसले का विरोध किया है। पीड़िता की मां ने कहा उसे खुला घूमने की इजाजत नहीं मिलनी चाहिए। उन्होने आगे कहा कि उनकी बेटी की बरसी पर उसकी रिहाई उनके मुंह पर तमाचा है।
पीड़िता की मां ने आगे कहा कि हमारे लिए उसका (किशोर अपराधी) एक एनजीओ में रहना उसके आजाद रहने जैसा ही है। हमारी मांग है कि उसे रिहा नहीं किया जाना चाहिए। Read more…
INDIA’s DAUGHTER
वैसे आपकी राय क्या है इस किशोर अपराधी की रिहाई के बारे में …
जरुर बताईएगा !!
कतरनें समाचार पत्रों की
कतरनें समाचार पत्रों की
ये हैं कुछ कतरनें जो अब पीली पडने लगी हैं
बात सन 98 की है जब जयपुर आकाशवाणी में प्रस्तुति थी… फिर आकाशवाणी हिसार के कार्यक्रम नारी संसार में साक्षात्कार… और फिर कुछ समय बाद ज़ी न्यूज की संवाददाता के तौर पर अखबार में खबर … !!!
ये सब एक दम से नही मिला … बहुत मेहनत और प्रयास किए तब जाकर …. !!!!
आज, बेशक, इन खबरों को बहुत समय बीत गया है पर कतरनों ने याद को जिंदा रखा और अब ब्लाग में हमेशा ताजा ही रहेंगीं … कभी पीली नही पडेंगी ये कतरनें …..
ज़ी न्यूज 2003 से 2012 तक संवाददाता
Do You Know
Fake Email
Fake Email
आज एक पत्रिका मे लेख पढते पढते ध्यान लेखक के ईमेल पर चला गया. बहुत खुशी हुई कि Email लिखा हुआ है.चलो, मैं अपने विचार उन तक पहुचां पाऊगी. मैने बहुत लम्बा सा ईमेल लिखा और उसे भेज दिया . कुछ ही क्षणो मे वो वापिस आ गया. पता चला कि वो ईमेल सही नही है.
ओह !!! बडा दुख हुआ… वैसे अक्सर ऐसा ही होता है चाहे अखबार में किसी का लेख हो या किसी पत्रिका मे….. अक्सर ईमेल सही नही होते!!! ऐसा नही होना चाहिए क्योकि इससे पत्रिका का नाम तो खराब होता ही है पाठक के मन मे भी खराब छवि बैठ जाती है…. !!! वैसे आपका ई मेल तो सही होगा … है ना !!! अगर काम नही कर रहा तो जरुर देखिएगा !!!
Fake Email

Fake Email
लक्ष्य और निगाहें
लक्ष्य और निगाहें
बच्चे और उनका मनोविज्ञान
आज के बच्चे अपना पूरा ध्यान सोशल मीडिया जैसे फेसबुक, गूगल , टवीटर आदि पर देते है. बहुत लोग इसे बुरा भी कहते हैं कि बच्चे बिगड रहे हैं पर इसके माध्यम से इसका उदाहरण देकर समझाया भी जा सकता है… कैसे ??? ऐसे … हुआ यूं कि एक बार मैं एक जानकार के घर गई. वो अपने बेटे को पढा रही थी कि निगाहें अपने लक्ष्य की ओर ही रखनी चाहिए. एकाग्रचित्त होना चाहिए … तभी हम सफल होंगे. उधर उधर भटक गए तो जिंदगी मे कुछ नही कर पाएगे. पर उसका बेटा कंफ्यूज सा हो रहा था …बेटे को निगाहें, लक्ष्य कुछ समझ नही आ रहा था.परेशान होकर वो माथे पर बल डाल कर सिर खुजलाने लगा.
मैंने उसकी सोच को भांपते हुए कहा कि फेसबुक करते हो … उसके चेहरे पर स्माईल आ गई. मैंने कहा अच्छा एक मिनट अपना लैपटाप ले आओ. वो अंदर लेने भागा और मेरी सहेली गुस्से से मुझे देखने लगी. अयं !!! मुझे ये क्या सूझी. कुछ ही पल में मैंने फेसबुक खोल लिया और उस बच्चे को बताने लगी कि जिस तरह से लाईक पर क्लिक करेंगे तभी लाईक होगा पोस्ट पर क्लिक करेंगे तभी वो पोस्ट होगा और सब पढ पाएगे और अगर हम इधर उधर ही क्लिक करते रहेगे तो क्या कुछ होगा. करके देखो … उसने आसपास क्लिक किया पर कुछ नही हुआ पर जैसे ही लाईक को दबाया लाईक हो गया …. मैनें कहा बस यही बात है लक्ष्य की…. इधर उधर ध्यान भटेकेगा तो कुछ नही होगा बस ध्यान केंदित रखना चाहिए यानि क्लिक सही करना है और आगे बढते रहना चाहिए. अरे वाह !! तो इसका मतलब ये है … उसके बेटे को भी बहुत अच्छी तरह से समझ आ गया था.
अब फेसबुक इतनी भी बुरी नही है समझाने के लिए भी अच्छा उदाहरण बन सकता है … है ना हां वो अलग बात है कि मेरी सहेली जरुर नाराज हो गई क्योकिं उसके बेटे ने कहा कि मम्मी बस पांच मिनट मेरा दोस्त लाईन पर क्या चैट कर लू प्लीज .. प्लीज .. प्लीज … और मैने खिसकने में ही भलाई समझी … !!! हा हा हा हा ….. !!!!
बच्चों का मनोविज्ञान जानना बहुत जरुरी है …

लक्ष्य और निगाहें
कहानी दैनिक जागरण में
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