Cartoon Sansad
दस दिन हो गए पर संसद में मानसून सत्र की कार्यवाही एक दिन भी नही चली. वही कुछ लोग अपने ग्रहों को कोस रहें हैं तो वहीं मेरी ये पात्रा संसद की ग्रह दशा जानने के लिए पंडित जी के पास पहुंच गई…
Writer, Author, Cartoonist, Social Worker, Blogger and a renowned YouTuber
By Monica Gupta
By Monica Gupta


एक बच्ची की चिठ्ठी
नमस्ते सरकार अंकल,
आप कैसे हैं? आशा है ठीक ही होंगें. सरकार अंकल वैसे मुझे चिट्ठी लिखने का जरा भी अनुभव नही हैं क्योकि आजकल ईमेल का जमाना है पर मेरे मम्मी-पापा कहते हैं कि अगर सरकार तक कोई बात पहुंचानी हो तो पत्र ही लिखा जाता है… इसीलिए मै अपनी बात पत्र के माध्यम से ही कह रही हूं.
सरकार अंकल, वैसे मैं अभी छ्ठी स्कूल में ही पढ़ रही हूं पर खुद को लगता नहीं कि मै छोटी हूं क्योंकि घर पर और बाहर इतनी टेंशन है कि मुझे लगता है कि मै समय से पहले ही बहुत बडी हो गई हूं. मेरा बचपन कहीं खो सा गया है. खैर,यह बात बताने के लिए मैने आपको पत्र नही लिखा है. बल्कि मै आपसे कुछ निवेदन करना चाह्ती हूं.
सरकार जी, सच पूछो तो मुझे काला धन, स्विस बैंक या लोकपाल के बारे मे जरा-सी भी जानकारी नही है और न ही मेरे दिमाग में ये सारी बातें आ पाएंगी. मै तो बस आपसे जरा सी विनती करना चाहती हूं कि हर रोज होने वाले बंद और हडतालों को रुकवा दीजिए. मेरे पापा की छोटी-सी दुकान है जिससे हम तीन भाई-बहनो का खर्चा चलता है. कभी किसी तो कभी किसी वजह से दुकान बंद हो जाती है तो उस दिन हमें फाका करना पडता है और सभी को खाली पेट ही सोना पडता है.
दूसरी बात यह है कि बिजली ही नही होती. बहुत कट लगते हैं और कभी गलती से आ भी जाए तो वोल्टेज इतना कम होता है कि लगता ही नही कि बिजली है. फोन करो तो कोई फोन नही उठाता या फिर नम्बर व्यस्त आता रहता है. बरसात हो तो सुनने को मिलता है कि पीछे से गई है, पता नही कब आएगी.
अगली बात मेरे स्कूल से है. हैरानी है कि हमारे टीचरो को अपने विषय का ज्ञान ही नही है. अगर कोई बच्चा खडा होकर कोई प्रश्न पूछ ले तो वो नाराज हो जाते हैं और कक्षा से बाहर खडे होने की सजा दे देते हैं. वैसे तो टीचर हैं ही कम, ऊपर से सरकार के काम से अक्सर डयूटी लग जाती है तो पढाई की वैसे ही छुट्टी हो जाती है. आप इस बात पर भी जरुर ध्यान देना कि स्कूल मे कृपा करके मिडडे मील बंद हो जाए.
हर रोज गंदा खाने से पेट खराब तथा दर्द अब सहन नही होता. इसके इलाज के लिए रुपया अलग से खर्च करना पडता है, इस करके हम घर से खाना लाकर खुश है.
सरकार अंकल, अगली बात यह कि कचहरी के फैसले जल्दी करवा दिया करो. मेरे दादा जी की जमीन का केस पिछ्ले 24 साल से चल रहा है. दादा जी भी अब नही रहे और पिताजी को बार-बार तारीख पर जाना पडता है जिस करके बहुत तनाव हो जाता है हमारे घर पर. शायद एक लाख मिलना है पर अभी तक जैसाकि मैने मम्मी पापा को बाते करते सुना है लाख से ज्यादा तो खर्चा अभी तक हो ही गया है.
सरकार अंकल, मुझे अपना भारत देश बहुत अच्छा लगता है. कल ही मैने निबंध प्रतियोगिता ने ‘मेरा भारत महान’ विषय पर लेख लिखा था जिसके लिए मुझे सम्मानित भी किया गया था. मै भी देश के लिए बहुत कुछ करना चाहती हू पर इतनी परेशानियां और दुख मेरी हिम्मत को तोड रहे हैं.
अंकल, कोई गलती हो तो क्षमा करना. मैने पहले भी लिखा था कि मुझे ज्यादा समझ नही है, ज्ञान भी नही है पर, असल मे, अपने परिवार और दोस्तो का दुख देखा नही जा रहा था इसलिए आपको पत्र लिखना पड़ा. नही तो मै आपको तकलीफ नही देती. मै जानती हू कि आपके कंधों पर कितना बोझ है.
पता नही कि मेरा ये पत्र आपको कब तक मिलेगा. पर जब भी मिलेगा मुझे आशा ही नही पूरा विश्वास है कि आप मुझ छोटी-सी बच्ची की बात का जवाब जरूर देग़ें.
आपके घर पर सब कैसे हैं? सबको हमारी तरफ से नमस्कार बोलना.
पत्र के जवाब इंतजार मे
शेष फिर
आपकी नन्ही देशवासी
By Monica Gupta


Photo by jepoirrier 
धारावाहिकों के किरदार
एक जानकार को डिनर पर आमत्रित करने के लिए फोन किया तो उन्होने कहा कि वो साढे नौ बजे के बाद ही घर से चलेगें क्योकि वो अपना पसंदीदा सीरियल छोड नही सकते. वैसे ये कहानी घर घर की है पर मेरा मानना ये है कि टीवी सीरियल सीरियसली कभी नही देखना चाहिए क्योकि ना सिर्फ मुख्य किरदार कभी भी बदल सकते हैं बल्कि कहानी 10- 20 साल तक भी आगे जा सकती है और तो और पूरी कहानी ही बदल सकती है … कुछ समय पहले एक सीरियल आता था लौट आओ तृष्षा … कहानी हट कर थी इसलिए देखना शुरु किया .. इस मे वो बच्ची भी थी जो बजरंगी भाईजान मे थी.
खैर, देखते ही देखते अच्छी खासी सस्पैंस वाली कहानी बिल्कुल ही बदल गई. फिर उसमे अलग अलग कोर्ट केस ही रह गए जिसका पहले की कहानी से कोई लिंक ही नही था और केस भी ऐसे जो हर बार नई कहानी लेकर आते जैसाकि अदालत सीरियल मे होते थे कभी वो सीरियल 40 मिनट का होता कभी 50 मिनट का और फिर अचानक सीरियल ही बंद हो गया.
एक धारावाहिक महाराणा प्रताप आ रहा है दो साल आगे कर दिया कोई दिक्कत नही दिक्कत तब आई जब मुख्य पात्र अकबर को ही बदल दिया. जरा सोचना चाहिए जो अपना समय निकाल कर इन धारावाहिको को देखते हैं उनके दिल पर क्या गुजरती होगी .एक समय था जब 13 एपिसोड ही होते थे दर्शक दिल से देखते थे फिर एपिसोड की संख्या बढने लगी अब तो कोई हाल ही नही. शायद ही कोई बिरला सीरियल होगा जिसका कभी कोई किरदार ही न बदला हो… यकीनन सभी किरदार बहुत मेहनत करते हैं और अपना बेस्ट भी देते हैं पर अगर देखते ही देखते किरदार ही बदल जाए तो दर्शक बेचारा भी क्या करे किसके पास जाए किसके पास रोना रोए … आज के फास्ट लाईफ मे वो भी तो समय निकाल रहा है ना देखने के लिए ….
तो अगर आप किसी भी धारावाहिक को देख रहे है जरुर देखिए उसका पुन प्रसारण भी देखिए पर अचानक बदलाव के लिए भी तैयार रहिए और सबसे अहम बात ये कि इन सीरियल्स को सीरियसली देखना बंद कर दीजिए…
By Monica Gupta

By Monica Gupta
Entertainment
बड बोले बयान मे हम आगे… काम न करने में हम आगे … धरना देने मे हम आगे … चैनलो पर अब तो सास बहू से भी ज्यादा लडाने भिडाने में हम आगे, टीआरपी बटोरने में हम आगे…. बोलो फुल्ल टू एंटरटेनमैंट Entertainment करते है या नही … बताओ करते हैं या नही … बोलो करते हैं या नही !!!
अब भई फिल्मों का तो पता नही कि एंटरटेनमैंट से चलती है या नही पर इतना पक्का है कि हमारी राजनीति में एंटरटेनमैंट के सभी गुण हैं और यही वजह है कि ये आज के समय मे सभी सास बहू सीरियल को हटाती हुई टीआरपी के मैसान में सबसे आगे चल रही है … कोई शक या सवाल ???
By Monica Gupta

Traffic
आज गूगल सर्च के दौरान जब गूगल का साईन देखा तो समझ नही आया कि ये क्या है … उसमे ट्रैफिक लाईट बनी हुई थी और ट्रैफिक भी था. पर भला हो नेट का बहुत जल्दी पता चल गया कि आज ट्रैफिक लाईट का 100वा जन्मदिन है …
सडक के ट्रैफिक के साथ साथ सोशल साईटस पर हमारा भी ट्रैफिक बनाए रखिए … शुभकामनाएं !!! Best wishes !!!
By Monica Gupta

एक पत्र दुल्हनियां के नाम ….
बचपन मे घर घर खेलने वाली देखते ही देखते इतनी बडी हो गई कि आज अपना ही घर बसाने पिया के घर जा रही है.जहां एक तरफ् मम्मी पापा को खुशी होती है वही दूसरी ओर उनके सुखद भविष्य को लेकर अंजाना सा भय उनके मन मे व्याप्त रहता है.
इसमे कोई शक नही कि समय बहुत तेजी से बदल रहा है और इसी आपा धापी मे हमारी मान्याताए भी बदल रही है. आजकल पापा तो व्यस्त रह्ते ही है साथ ही साथ मम्मियां भी नौकरी करने लगी है और इसी वजह से ज्यादातर बच्चे होस्टल मे रहने लगे है और यहां तक की अपने घर की शादी जैसे मौको पर मम्मी को भी आफिस से ज्यादा से ज्यादा हफ्ते की छुट्टी ही मिल पाती है.
वैसे देखा जाए तो इसमे कोई दिक्कत भी नही है आजकल सब रेडिमेट हो रहा है.शादी के लिए हाल ,खाना पीना आदि वगैरहा सारे इंतजाम. बस आर्डर बुक करवा दो और सभी चिंताओ से मुक्त हो जाओ. और मेहमान भी चंद घंटे के लिए आते हैं और चले जाते है किसी के पास समय ही नही होता.
मम्मी पापा को शादी के समय बस एक ही चिंता हमेशा रहती है और वो है शादी के बाद वो अपना घर बार कैसे सम्भालेगी. इसमे कोई शक नही कि आजकल आप सभी लडकियां बहुत स्मार्ट हो गई हो. खूब शिक्षित हो गई हो और हजारो कमाने लगी हो.और आप अपना भला बुरा खूब अच्छी तरह से समझती हो या कई बार ऐसा भी होता है कि आप किसी की बात सुनना भी पसंद नही करती.
प्यारी दुल्हनियां, शादी कोई गुड्डे गुडिया का खेल नही. यह एक बेहद पवित्र बंधन है और इस रिश्ते की गरिमा को रखने के लिए कुछ बाते ख्याल रखनी बहुत ही जरुरी है. पति पत्नी के एक साथ मिल जुल कर ही गृहस्थी रुपी गाडी आराम से चला सकते हैं. आप आजकल देख ही रही है कि एकल परिवार ज्यादा होने लग गए है. बेटा भी अपने घर से दूर रह कर नौकरी करने लगा है.ऐसे मे पति पत्नी दोनो की सूझबूझ से घर खूबसूरत बन सकता है. अपना आचरण नारी सुलभ यानि लज्जा,सादगी, शालीनता और वाणी मे मिठास रखें. अपने घर परिवार को पूरा समय दें. बजाय जो आपके घर मे होता था उसका अनुसरण करने के आपको अपने नए घर और पति के परिवार के हिसाब से ही एडजस्ट करना होगा. बात बात पर व्यंग्य करना या किसी बात पर कटाक्ष करना बहुत चुभ जाता है इसलिए जो भी बोले और किसी के लिए भी बोले बहुत सोच समझ कर ही बोले.वैसे यही बात वर पक्ष पर भी लागू होती है और यह सब आपसी तालमेल से ही आएगी.
सबसे जरुरी बात यह है कि अपने घर की बात घर की चार दीवारी मे ही रहे. छोटा मोटा झगडा हर घर मे होता है इसलिए बजाय इधर उधर बाते करने के या हर बात फोन करके घर बताने के कोशिश करे कि बात घर मे ही मिल बैठ कर करे और उसका निष्कर्ष निकाले. सूझबूझ से आप अपने घर की बगिया महका सकती हैं. अपने नए प्यारे से घर को समझे और समझादारी से काम लें…
बाते तो बहुत सारी है अभी आप नई दुनिया मे कदम रखने जा रही है इसलिए अभी के लिए इतना ही ….
अपने नए जीवन की शुरुआत के पहले कदम ले लिए ढेर सारी शुभकामनाएं…
शेष फिर
आपकी शुभचिंतक
By Monica Gupta

नाजुक है रिश्ता
चार महीने पहले एक जानकार की शादी हुई थी. तब किसी कारण से जा नही पाए. कल पता लगा कि वो अपने घर आई हुई है तो सोचा कि आज मिल ही आती हूं. मणि को फोन कर ही रही थी कि साथ चलते हैं इतने में वो घर ही आ गई.. जब मैने उससे कहा तो वो बोली कि नही जाना उनके घर क्योकि वो लड कर आ गई है और सुनने मे यही आया है कि वो कभी वापिस नही जाएगी अब !! अरे !! मैने कहा ये क्या बात हुई .. !! अभी समय ही कितना हुआ है शादी को और इतनी जल्दी ऐसा निर्णय लेना !!! मुझे याद है कि शायद शहर की सबसे महंगी शादी थी वो … और दहेज का तो पूछो ही मत ऐसे में झगड कर घर वापिस आ जाना ???

फिर मेरी और मणि की इसी विषय पर बात हुई कि आखिर इतनी जल्दी क्यो अलगाव की नौबत आ रही है.. मणि का कहना था कि जो लडकी आज खुद कमाती है आत्मनिर्भर है शायद इसलिए वो दब कर नही रहना चाह्ती या अगर बात दब कर रहने की ना भी हो बराबरी की हो और शायद हमारा पुरुष समाज स्वीकार नही कर पा रहा हो या शायद दोनों की ईगो का टकराव हो या पैसा हो या … हमारी बहस अभी भी जारी है शायद आप कोई कारण बता सकें कि क्यो हो रहे हैं विवाह के तुरंत बाद अलगाव… ??
By Monica Gupta

बेटी बचाओ अभियान
By Monica Gupta
संंसद , सांसद, धरना, हंगामा और देश के नेता , जिस तरह से संसद नही चल रही और मानसून सत्र मे धरने आदि का दौर जारी है हे राम ही मुंह से निकल रहा है और उसे देख कर स्वर्ग में बैठ कलाम साहब भी यही सोच रहे होंगें …
don’t challenge the law: sumitra mahajan to MPs – Navbharat Times
समाजवादी पार्टी अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव ने भी कुछ कहने का प्रयास किया। हालांकि, स्पीकर ने उनसे प्रश्नकाल के बाद बात रखने को कहा। इससे असंतुष्ट लेफ्ट पार्टियों, समाजवादी पार्टी और आरजेडी सदस्य सदन से वॉकआउट कर गए। अध्यक्ष ने वाईएसआर कांग्रेस सदस्यों की नारेबाजी के बीच ही पूरा प्रश्नकाल चलाया। उल्लेखनीय है कि मानसून सत्र शुरू होने के बाद से ही सुषमा स्वराज, वसुंधरा राजे और शिवराज सिंह चौहान के इस्तीफे की मांग पर दबाव बनाने के लिए सदन में पोस्टर दिखाने और आसन के समक्ष आने वाले कांग्रेस के 25 सदस्यों को अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने कल सदन की पांच बैठकों के लिए निलंबित कर दिया था। See more…

Blogging Tips in Hindi Blogging यानि आज के समय में अपनी feeling अपने experience, अपने thoughts को शेयर करने के साथ साथ Source of Income का सबसे सशक्त माध्यम है जिसे आज लोग अपना करियर बनाने में गर्व का अनुभव करने लगे हैं कि मैं हूं ब्लागर. बहुत लोग ऐसे हैं जो लम्बें समय से […]

GST बोले तो – चाहे मीडिया हो या समाचार पत्र जीएसटी की खबरे ही खबरें सुनाई देती हैं पर हर कोई कंफ्यूज है कि आखिर होगा क्या ? क्या ये सही कदम है या देशवासी दुखी ही रहें … GST बोले तो Goods and Service Tax. The full form of GST is Goods and Services Tax. […]

सोशल नेटवर्किंग साइट्स और ब्लॉग लेखन – Social Networking Sites aur Blog Writing – Blog kya hai .कहां लिखें और अपना लिखा publish कैसे करे ? आप जानना चाहते हैं कि लिखने का शौक है लिखतें हैं पर पता नही उसे कहां पब्लिश करें … तो जहां तक पब्लिश करने की बात है तो सोशल मीडिया जिंदाबाद […]