Monica Gupta

Writer, Author, Cartoonist, Social Worker, Blogger and a renowned YouTuber

  • About Me
  • Blog
  • Contact
  • Home
  • Blog
  • Articles
    • Poems
    • Stories
  • Blogging
    • Blogging Tips
  • Cartoons
  • Audios
  • Videos
  • Kids n Teens
  • Contact
You are here: Home / Blog

June 16, 2015 By Monica Gupta

हम और हमारी नकारात्मक सोच

हम और हमारी नकारात्मक सोच

be positive photo

Photo by h.koppdelaney

कल ही हमारे मित्र विदेश से लौटे. उनको रिसीव करने हम भी एयर पोर्ट गए.वहाँ कार मे बैठ्ने से पहले उन्हे मिठाई खिलाई तो उन्होने उसका रैपर कोई कूडा दान ना दिखाई देने की वजह से सड्क पर ना डाल कर अपनी जेब मे ही डाल लिया. जबकि हमारे ही भारतीय मित्रो ने खुद तो मिठाई के रैपर को जमीन पर ही फेंक दिया और हसँते हुए अपने मित्र को सलाह देने लगे कि भई, यह तो भारत है यहाँ सब कुछ होता है यहाँ क्या सोचना … पूरी सडक अपनी है कही भी फेंक दो … बे वजह जेब क्यो खराब करनी है …उस समय तो मैं चुप रही पर वापिस लौट्ते वक्त यही सोचने लगी कि सारे आरोप सरकार पर लगा कर हम निशचिंत होकर बैठ जाते है कि सरकार ये नही कर रही वो नही कर रही बिना यह जाने कि हम क्या कर रहे है यह हमारी नकारात्मक सोच नही तो क्या है. अगर हम सभी अपना अपना फर्ज़ समझ ले तो क्या नही हो सकता.
हम विदेशो की बात करते हैं कि वहा कठोर कायदे कानून है वहाँ सफाई रखनी जरुरी होती है नही तो फाईन लग जाता है वगहैरा वगहैरा . पर उसके मुकाबले हम यहा क्या कर रहे हैं सिवाय कोसने के कि हम कितने गंद मे रह रहे हैं …
और तो और बार बार मना किया जाता है कि गाडी चलाते समय सीट बेल्ट बाँध ले. हम मे से कितने बाधँते है. हाँ , अगर सामने चैकिंग़ हो रही होगी तो फाईन के चक्कर मे फटाफ़ट लगा लेग़ें … गाडी चलाते समय मोबाईल का इस्तेमाल भी नही करने की सलाह दी जाती है. पर हम तो महान है ना सबसे व्यस्त आदमी है अगर बात नही की तो लाखो का नुकसान जो हो जाएगा. हाँ, अगर कोई ट्क्कर वक्कर हो गई तो दोष अपना नही मानेग़ें …
अगर हम अपनी नकारात्मक सोच हटा कर सकारत्मक सोचेगे और समाज मे रहते हुए नियमो का पालन करेगें तो हमारा देश भी आदर्श देश बन सकता है.
यही बात काफी हद तक मीडिया पर भी लागू होती है वो समाज को सच्ची दिशा दिखा सकता है पर उसकी सोच भी कम नही है मार पिटाई, खून खराबा, अन्धविश्वास, फालतू की फिल्मी खबरो आदि से भरी रहती है खबरे पर जब बात आती है कुछ ऐसी खबरो की जिनसे समाज मे चेतना आए … वो तो गायब ही रहती है अब ताजा उदाहरण ही है कि एक स्कूली बच्चे ने एवरेस्ट पर जीत हासिल की और सबसे कम उम्र का विजेता बन गया कोई बच्चो का खेल नही था कि वो ऐसे ही चढ गया पर वो खबर भी ना के बराबर रही. जब मैं कुछ बच्चो का इंटरवयू लेने पहुची कि उन्हे यह जान कर कैसा लगा कि उनकी ही उम्र का अर्जन ऐवरेस्ट को जीत कर लौटा है. उन्हे तो हैरानी हुई क्योकि इस बात की जानकारी ही नही थी उन बच्चो को कि ऐसा भी हुआ है अब भला बताओ कि समाज के सामने अगर उदाहरण ही नही रखे जाएगे तो समाज तरक्की कैसे करेगा सिर्फ क्राईम से तो गाडी नही चलेगी ना.

हम और हमारी नकारात्मक सोच
हम सभी को एक दूसरो पर दोष डालने की बजाय खुद को अच्छा बनाना होगा अपनी सोच सकारात्मक रखनी होगी अच्छे उदाहरण समाज के सामने रखने होग़ॆं ताकि उनका अनुकरण किया जा सके. इसमे आपसे अच्छी भूमिका तो कोई निभा ही नही सकता …

हम और हमारी नकारात्मक सोच

June 16, 2015 By Monica Gupta

रिटायरमैंट नही फुल स्टाप

रिटायरमैंट नही फुल स्टाप………..

रिटायरमैंट का नाम सुनते ही मन मे एक ही बात आती है कि अब … बस… लाईफ मे फुल स्टाप लग गया. लेकिन जो लोग ऐसा सोच रहे हैं उनके लिए एक खुश खबर है अब अगर वो वाकई मे समाज के लिए कुछ करना चाहते हैं तो उनके लिए ढेरो रास्ते खुले हैं.

रिटायरमैंट के बाद खाली बैठ कर लोग बहुत भावुक हो जाते हैं चिडचिडे हो जाते हैं वो मन ही मन सोचते हैं कि बस हमने जितना काम करना था वो कर लिया पर असल मे सही मायनो मे उनमे ऊर्जा की कोई कमी नही होती.  अगर वो अध्यापक रिटायर हुए है तो वो बच्चो को पढा सकते हैं या जिसमे भी रुचि हो वो काम कर सकते हैं जिससे ना उनमे भावना आएगी कि बस हमारी जिंदगी रुक गई है और वह उसी उत्साह और जोश के साथ काम करते जाएगें

 

 

 

old man  photo

 

हमारे एक जानकार का घर बन रहा था उन्हे एक व्यक्ति ऐसा चाहिए था जो उस बनते घर मे बैठ सके ताकि मजदूर खाली न बैठे… ऐसे में उन्होने एक दादा से जिक्र किया … दादा सारा दिन खाली रहते थे अब जब उन्हें पता चला कि बैठने के पैसे भी मिलेंगें तो वो खुश हो गए …मजदूरों से बाते भी करते रहते और मजदूर भी अपने काम मे लगे रहते देखते ही देखते घर बहुत जल्दी बन गया.
सीनियर सिटीजन की सेवाओ की, अनुभवो की देश को समाज को जरुरत है ताकि विकास के काम सुचारु रुप से चलते रहें.
खाली घर पर बैठ कर चिढ्ने कुढ्ने की बजाय अगर वो काम पर ध्यान देगें तो उनका भी अच्छा समय व्यतीत होगा और उनके अनुभवो से हमें भी फायदा होगा खासकर बच्चे बहुत कुछ सीख सकतें हैं
और इसकी  हमे बहुत जरुरत है इसलिए अब फुल स्टाप नही रही रिटायरमैंट ………..अब तो शुरुआत है नई जिन्दगी की …

 

रेल हादसे ने छीन लिए दोनों ही हाथ: हिमाचल प्रदेश के जिला ऊना के गगरेट-दौलतपुर रोड पर स्थित गांव दियोली के मूल निवासी पूर्ण चंद परदेसी के पिता रामरक्खा दिल्ली के शकूर बस्ती रेलवे स्टेशन पर गनमैन के पद पर कार्यरत थे। 1959 में परदेसी जब चौथी कक्षा में पढ़ रहे थे तो एक दिन स्कूल जाने के दौरान रेलगाड़ी से उतरते समय रेल के पहिए की चपेट में आकर अपने दोनों ही हाथ गंवा बैठे। उन्होंने इसे जिंदगी का सबक मान इसी एक टुकड़े में चमड़े की छोटी सी बैल्ट के बीच कलम फंसाकर लिखना शुरू कर दिया। 1970 में द्वितीय श्रेणी में मैट्रिक करने के बाद बड़े भाई के साथ होशियारपुर लौट आए। पूर्ण चंद की सुंदर लिखावट बताती है कि उन्होंने जीवन को कभी बोझ नहीं बनने दिया। साल 1976 में देश के तत्कालीन राष्ट्रपति फखरुद्दीन अली अहमद के हाथों नैशनल अवार्ड से सम्मानित परदेसी अब तक 1 लाख से भी अधिक पुस्तकों व मैगजीनों की प्रूफ-रीडिंग कर चुके हैं। होशियारपुर के साधु आश्रम में बतौर प्रूफ रीडर से करियर की शुरूआत करने वाले परदेसी हिंदी, संस्कृत, अंग्रेजी व पंजाबी में अब तक लाखों पुस्तकों की प्रूफ रीडिंग का काम सफलतापूर्वक निभा रहे हैं। रिटायरमैंट के बाद भी ईमानदारी व जज्बा बेमिसाल पूर्ण चंद परदेसी की ईमानदारी और जीने का जज्बा ही है कि साल 2005 में रिटायरमैंट के बाद भी संस्थान को उनकी जरूरत महसूस हुई। पिछले 10 सालों से कांट्रैक्ट बेस पर काम करने के दौरान प्रूफ रीडिंग का काम करते हुए इन पुस्तकों से सबक लेना कभी नहीं भूले… Read more…

June 16, 2015 By Monica Gupta

छुट्टियों की न करें छुट्टी

छुट्टियों की न करें छुट्टी ..
छुट्टी का नाम लेते ही चेहरे पर एक अजीब सी मुस्कान आ जाती है और अगर यही छुट्टियाँ महीने की हो तो.. बस फिर तो कहना ही क्या. अब गर्मी आ गई है और ये लाई है ढेर सारी छुट्टियाँ .
पूरी मौज मस्ती, आराम, नेट, पिक्च्चर,फोन, मोबाईल, मैसेज, दोस्त और भी ना जाने क्या क्या.

 

cartoon smile by monica guptaछुट्टियों की न करें छुट्टी
सच बात है, पर इस बात मे भी कोई दो राय नही कि जहाँ छुट्टियो मे बच्चो के चेहरे खुशी से चमक जाते हैं वही दूसरी ओर घर मे मम्मी का तनाव भी थोडा सा बढ जाता है.खासकर उनका जो गृहणी हैं क्योकि अपनी दिनचर्या मे तो वो सुबह बच्चो, बडो को स्कूल,कालिज और दफ्तर भेज कर कुछ पल अपने भी आराम के निकाल लेती थी टीवी देख लिया,फोन पर गप्पे लगा ली पर अब चौबीसो धंटे की धमा चौकडी मे आराम कहाँ.
छुट्टियो मे, बच्चो का एक छ्त्र राज हो जाता है. सुबह उठने का समय अजी मतलब ही नही कि समय पर उठ जाए और नाश्ता ले लें. 10 बजे तक तो सोना ही होता है जिसकी वजह से घर मे ना सफाई ढंग से हो पाती है और ना ही झाड पोछ और घर बिखरा बिखरा सा ही लगता है ऐसे मे मम्मी लोग का पारा चढना स्वाभाविक ही होता है. नाश्ते का समय सही नही हुआ तो लंच के समय की भी छुट्टी हुई समझो. और फिर उपर से बच्चो की फरमाईश कि ये खाना है वो खाना है यहाँ जाना है वहाँ जाना है. फिर बच्चो के दोस्त भी कम नही होते और अगर छुट्टियो मे मेहमान ना आए तो छुट्टी लगती ही नही. उफ …!!!!
और एक बात कि अगर घर मे एक बच्चे की छुट्टी हो और दूसरे बडे बच्चे की परीक्षा चल रही हो तो एक मस्ती और दूसरा pin drop silence चाहता है ऐसे मे आप सोच सकते है कि घर मे जबरदस्त तनाव का माहौल बन जाता है.
ऐसे मे आप छुट्टी की छुट्टी ना होने दें यानि घर पर अपने बडे से या मम्मी लोग से पूरा सहयोग करके चले.  धमाल,हल्ला गुल्ला शोर शराबा सब करें पर limit मे रह कर ही करें ना करने पर आपको सुबह सुबह से ही जो डांट पडनी शुरु होगी तो सारा दिन आपका भी कोप भवन मे बीतेगा और सभी सदस्यो को भी तनाव झेलना पड सकता है.

सभी का मूड off हो जाए तो वाकई मे छुट्टी की छुट्टी ना हो जाए घर पर कहना मान कर मिलजुल कर रहना पडेगा. मेहमान के आने पर बजाय खुद भी बैठ कर आर्डर करने के घर मे मदद करवाए .कभी मम्मी के लिए खुद उठ कर कुछ काम करे. और समय मिलने पर आराम से बैठ कर उनकी मदद ले ताकि आपका होमवर्क समय पर पूरा हो सके.
सबसे ज्यादा जरुरी बात ये है कि छुट्टियो मे summer camp या कोई भी hobby class join करें अपनी छुट्टी को व्यर्थ ना जाने दें. कुछ ना कुछ रचनात्मक जरुर ही करें.
अब आप यही कहेगे कि इतनी मुश्किल से तो छुट्टियाँ मिली है तो इसमे भी काम. पर यह काम आपकी आगे आने वाली जिंदगी मे बहुत काम आएगा इस बात का तो पक्का यकीन है और कौन सा आपको पूरा दिन ही उस काम मे लगे रहना है मुश्किल से एक या दो धंटे का होगा उस के बाद तो पूरा दिन आपका है आप जैसा चाहे उस का फायदा उठाए और अगर बिलकुल भी कुछ करने का मन नही है तो भी एक अच्छे बच्चे की तरह घर पर रहे या जहाँ भी रहने जाए वहाँ इतनी अच्छी प्रकार से रहे कि सभी आपके वापिस जाने के बाद आपको याद करे ना कि कन्नी काटे.
यकीनन काम मुशकिल जरुर है पर नामुमकिन नही है अगर आप प्यार देगे तो आपको प्यार ही मिलेगा वो भी ढेर सारा. इसलिए छुट्टियो मे खूब सारा enjoy करें और छुट्टी की छुट्टी ना होने दें.
जाते जाते एक चुटकुला …
एक बच्चा मच्छर उडना सीख रहा था. जब पहली बार उडा और लोगो के बीच मे पहुचां तो बहुत खुश हुआ और वापिस आकर अपने मम्मी पापा को बताया कि लोग तो मुझसे बहुत खुश हैं. मै जहाँ भी गया उन्होने मेरा स्वागत तालियाँ बजाकर कर किया ….

छुट्टियों की न करें छुट्टी

June 15, 2015 By Monica Gupta

Distressed jeans

Distressed jeans – चाहे पार्टी में महिलाओं द्वारा लम्बा सा गाउन जोकि दूर तक झाडू मारता जाए या फटे कपडे पहना जिसे सभ्य भाषा में Distressed jeans कहते हैं जरा भी पसंद नही

बडे शहरों का बडा कल्चर या छोटे शहरों की छोटी सोच…

 

distressed jeans cartoon by monica gupta Distressed jeans

 

Distressed jeans

हर युग में फैशन अपनी अदभुत छ्टा बिखेरता है और युवाओ को नए स्टाईल के कपडे पहने देखना बहुत भाता है खासकर मैट्रो की बात करें तो युवा वर्ग फटी जींस पहनने मे बहुत शान समझता है और उसे फटा कहना वो अपमान समझता है

उसका कहना है कि ये Distressed jeans है जितनी distressed उतनी ही महंगी और वही पहनने में असली मजा.. कुछ लोगों के साथ इस बारे में जब गरमा गर्म बहस हो गई तो मुझे तालिबान तक की उपाधि भी मिल गई और कुछ ने कहा कि आपकी सोच छोटी है.

युवा पसंद करता है तो क्या दिक्कत है … एक बार तो लगा कि मैं ही बहस मे अकेली पड गई हूं और सिर्फ मैं ही इसे बहस का मुद्दा बना रही हूं कि (मेरी भाषाँ में ) फटी जींस, यानि (distressed जींस) नही पहननी चाहिए ये फटे वाला फैशन कदापि नही हो सकता. पता नही पेरेंटस अपने बच्चों के आगे खुशी खुशी झुक जाते हैं या उनकी खुशी के लिए ये बात भी माननी… ?? नो आईडिया !!!

अगर आप भी अपने विचार देंगें तो मुझे खुशी होगी 🙂

Distressed jeans

How to distress your denim jeans –

Use a cheese grater: An easy way to distress your jeans is with a cheese grater where the distress look can be created by vigorously grating the fabric. You can also use a knife or the blade of a scissor.

– Add bleach: Bleaching is necessary when it comes to distressing jeans. When applied properly, bleach can make a new pair of jeans appear quite lived in.

– Wash and Wear: Wash your jeans several times before wearing. Washing will both soften the denim as well as emphasise the fraying of the distressed edges

Read more…

June 15, 2015 By Monica Gupta

काम वाली बाई

काम वाली बाई है मेरे पास हयं !!!!

पढने से पहले प्लीज ध्यान दें ….इस व्यंग्य की सारी बाते सच्ची धटना पर आधारित है और इसका किसी भी व्यक्ति,स्थान उम्र से अगर मेल हो तो इसे कोई हैरानी बात ना होगी ….

जी हां, अब मुस्कुराने की तो बात है ही..!! मेरे पास काम वाली बाई जो है. हयं.(अमिताभ स्टाईल मे)

cartoon maid servent by monica gupta

 

 

जी बिल्कुल, वो मुझे भूल जाए ऐसा हो नही सकता और मै उसे भूल जाऊ ऐसा मै होने नही दूगीं.(सुनील शेट्टी स्टाईल मे) सुबह शाम दिन मे दो बार आती है.क्या पूछा आपने !!छुट्टी इत्यादि!! अरे वो कोई भी दिक्कत ही नही, यह सब तो चलता ही रहता है.समय पर आती है!!! अरे समय की कोई बात नही. बस आना ही बहुत है उसका. हां वो अलग बात है कि इसके इंतजार मे मै जरा आस पास की पडोसनो के घर चक्कर लगा आती हूं और इसी बहाने मिलना जुलना भी हो जाता है सहेलियो से.

हां तो मै कह रही थी कि ….!! ओहो ! आपके पास तो प्रश्न बहुत है.मेरी भी तो सुनिए जरा. अब वो क्या है ना उसके घर आने के बाद आगे पीछे धूमना पडता है. असल मे, पिछ्ले दिनो एक सोने की चैन गुम …!!! अब उस पर तो शक कर नही सकती !!! अरे भई, शक किया तो छोड कर जो चली जाएगी ना !!!

हां, तो मै कह रही थी कि जब वो आती है तो सबसे पहले मै उसका स्वागत मुस्कुरा कर करती हूं. बैठाती हू और चाय भी पिलाती हूं.फिर जरा किसी सीरियल के बारे मे बातचीत करती हूं और फिर शुरु होता है हमारा काम… ओह आई मीन उसका काम!! इसके पीछे पीछे इसलिए धूमना पडता है कि उसकी नजर जरा कमजोर है. अक्सर या यू कहिए कि कई बार कूडा नही दिखता तो वो उसे दिखाना पडता है. फिर आजकल उसकी कमर मे दर्द चल रहा है उससे झुका नही जाता इसलिए जरा मै वहाँ झाडु करके उसकी मदद कर देती हूं.

झाड पोछ वो करती नही है इसलिए वो भी साथ की साथ मै ही करती हू ताकि एक ही बारी मे मेरा घर साफ साफ हो जाए.फिर अक्सर जाले वगैरहा भी साफ करने होते है ना मुझे वो उसका एक्स्ट्रा समय लेना पडता है और फिर उसके घर के लिए रोटियां या खाना इत्यादि पैक करके देना पडता है मुझे.!!!

बर्तन धोने के लिए गरम पानी करके देती हूं ताकि सारे बर्तन साफ धुले.अक्सर वो प्याज वाले बर्तन नही धोती. उसकी महक उसके सिर मे चढती है इसलिए प्याज वाले बर्तन मै ही साफ करती हूं और बर्तन धोने के बाद दूसरे घरो मे काम करने के चक्कर मे और जल्दी जाने के चक्कर मे वो बस टोकरी मे ही डाल जाती है जिसे मैं ही लगाती हूं.अरे( आपको क्या पता आठ घर है उसके पास!! अब थोडा सा लिहाज तो करना बनता है कि नही!!

अक्सर समय बेसमय उसे इनाम या उपहार स्वरुप कुछ ना कुछ देती रहती हूं. क्या !!! किसलिए ??? अरे भई ताकि वो महारानी जी टिकी रहे. क्या करे… आजकल काम वाली बाईया मिलती ही कहां हैं!!! कम से कम स्टेटेस मे तो है बताने को कि मेरे पास काम वाली बाई है.हयं!!

अच्छा, मै अभी चलती हूं!! क्या पूछा !!! कहां !! अरे! क्या बताऊ!! आज बो बोल कर गई है कि 200 रुपए बढाने है उसका खर्चा नही चल रहा है.. बस यही सुनने के बाद सिर जरा सा दर्द कर रहा है. वैसे आपसे क्या छिपाना !!

असल मे, आजकल सिर दर्द बहुत रहने लगा है और बीपी भी ज्यादा हो गया है.. वो क्या है ना काम वाली बाई को कुछ कह नही सकते कुछ कहो तो तैयार रहो सुनने के लिए कि जा रही हूं  छोड कर और अगर घर पर बताओ कि काम वाली बाई कितना तंग करती है तो वो तुरंत कह देते है कि हटा दो उसे. इतना परेशान किसलिए होना है. बस इसलिए ही ….!! पर मुझे खुशी है कि काम वाली बाई है मेरे पास !!पर अब बस फर्क इतना ही है कि हयं नही हाय ( मोनिका गुप्ता स्टाईल मे)

June 15, 2015 By Monica Gupta

काश मैं अध्यापक होता

काश मैं अध्यापक होता

 

cartoon arvind kejriwal by monica gupta

काश मैं अध्यापक होता

वैसे बचपन से सपने सभी देखते हैं कि मै बडा होकर ये बनूगां या वो बनूगां. तो जनाब, मेरा भी बचपन से सपना था कि काश मैं अध्यापक बनूं इसलिए नही कि मै पढने मे बहुत होशियार था. असल मे, आप से क्या छुपाना. मैंं पढाई मे बहुत कमजोर था पर दिक्कत की कोई बात नही थी क्योकि हमारे सर जी टयूशन मे पूरी मदद करते थे और हम भी समय समय पर उनके घर का छोटा मोटा काम करके जैसे कि जन्मदिन पर उपहार ले जाना, कपडे प्रैस करवा करवाना, जूता ठीक करवाना ,दर्जी से कपडे लाना या गैस बुक करवाना और अक्सर अपना गैस सिलेंडर ही दे आना वगैरहा वगैरहा करके उन्हे खुश रखते और हमे जाने अनजाने पेपर की जानकारी हो जाती और बिना पढे ही पास हो जाते और तो और कई बार तो ऐसा भी हुआ कि जब पेपर चैक होने आते तो वो हमे पास बुला कर चुपचाप सारा पेपर लिखवा देते यानि पूरा सहयोग दोतरफा रहता.

शिक्षक की भूमिका

अब सर जी के इतने ऐशो आराम देख कर मन मे बचपन से ही इच्छा हिलोरे मारने लगी थी कि अगर कुछ बने तो टीचर ही बने और पूरी जिन्दगी आराम से बिताए क्योकि उन्हे ना तो स्कूल जाने की टेंशन और ना पैसो की क्योकि ट्यूशन से भरपूर कमाई थी.

क्या कुछ नही था उनके घर मे.सुख सुविधाओ का सारा सामान था.बच्चे अच्छे स्कूल के होस्टल मे पढ रहे थे . बस यही सब बाते दिल को छू गई और जब मैने अपनी दिल की बात सभी घर वालो को बताई तो घर के सभी लोग मेरा निणर्य सुन कर फूले नही समाए और जुट गए उसे पूरा करने मे.

अजी नही नही … पढाई और अच्छे अंक नही.बल्कि अच्छे सिफारिशी और खाऊ पीऊ नेता की तलाश में. बहुत जल्दी तलाश खत्म भी हो गई और कुछ सालो बाद मेहनत रंग लाई और मेरा सपना पूरा हुआ. पांच लाख रुपए देकर बात पक्की हो गई और मेरी पहली पोस्टिंग शहर से बहुत दूर के गांव मे सरकारी स्कूल के अध्यापक के तौर कर दी गई.

मै खुशी मे फूला ना समाया और अपना बोरिया बिस्तर लेकर नए सपने लिए गांव पहुंचा. सोचा था गांव के लोग स्वागत मे खडे होग़ें पर ऐसा कुछ नही हुआ बल्कि कुछ लोग इस इंतजार मे खडे थे कि कब मास्टर आए और पढाना शुरु करे. खैर पहला दिन था ना सोचा धीरे धीरे सब ठीक हो जाएगा.

अगले दिन कक्षा लेते हुए मैने ट्यूशन का जिक्र क्लास मे कर दिया कि कोई भी आ सकता है. अगले दिन पूरा गांव स्कूल मे इक्क़ठा हो गया और धमकी भी दे डाली कि खबरदार आगे से ट्यूशन का नाम भी लिया.जो पढाना है जितना पढाना है स्कूल के समय मे पढाओ और फिर भी नतीजा अच्छा ना आया तो आपकी खैर नही….!

मैने बडी मुश्किल से थूक गटका और कक्षा मे चला गया. पढाते पढाते मै सोचने लगा कि शायद पिछले कुछ सालो मे समय बहुत बदल गया है. खैर मैने हिम्मत नही हारी. अगले सप्ताह मैने धोषणा कर दी कि आने वाली 16 को मेरा जन्मदिन है पर हाय रे यहां भी किस्मत ने साथ नही दिया.कक्षा मे खडे होकर सभी बच्चो ने ताली जरुर बजा दी पर किसी एक बच्चे की तरफ से उपहार ….अजी मतलब ही नही.

खैर, एक दिन मैने एक बच्चे से कहा कि अपने घर का 5 किलो शुद देसी घी लेकर आना क्योकि शहरो मे तो मिलावट होती है ना. लडका सुबह सुबह घी ले आया और पीछे पीछे उसके पिता डंडा ले कर पहुंच गए कि घी के पैसे अभी दे दो क्योकि अक्सर बाद मे उन्हे याद नही रहता. मेरा तो सिर ही घूम गया. मरता क्या न करता. उसी समय रुपए देने पडे वो भी शहरी रेट से ज्यादा. मेरे पूछ्ने पर वो बोले कि शुद्द घी है खालिस है तो पैसे तो यकीनन ज्यादा लगेंगे ही.

उधर स्कूल मे स्टाफ ना के बराबर था. लगभग 200 बच्चो के स्कूल मे एक मैं और एक दूसरे अध्यापक और एक चपडासी था. अक्सर सरकारी काम कभी गणना तो कभी किसी दूसरे काम से हमारी डयूटी लग जाती तो दूसरे टीचर की क्लास भी लेनी पडती और कई कई बार तो चपडासी भी बनना पडता.

कभी गलती से किसी बच्चे से पीने के लिए पानी मंगवा लिया तो अगले दिन पूरा गांव इक्ट्ठा हो जाता कि हमारे बच्चे यहां पढने आते है ना कि यहां के चपडासी हैं. मै स्कूल मे 5 मिनट कभी देरी से पहुंचता तो गांव वाले गेट पर ताला लिए खडे रह्ते कि ऊपर शिकायत करगें कि मास्टर देरी से आते है और धमकी देते कि अगर आगे देरी से आए तो स्कूल को ताला ही लगा देगें.

मेरे तारे पूरी तरह गर्दिश मे चल रहे हैं.कभी किसी बच्चे ने अच्छा काम किया और मैने प्यार से सिर पर हाथ फेर दिया तो गांव वाले भडक लाते है कि बच्चे को छेड दिया. मास्टर का करेक्टर सही नही है और अगर किसी बच्चे ने सही काम नही किया और मैने गुस्सा कर दिया तो भी मुसीबत खडी हो जाती कि मास्टर पिटाई करता है.

कुल मिला कर मै हैरान परेशान हूं कि मैने टीचर बनने का सपना क्यो देखा. बार बार खुद को चिकोटी काट रहा हूं कि काश यह सब सपना ही हो पर अफसोस यह सच है सपना नही.

अब मुझे कैसे भी झेलना ही पडेगा. काश मैं अध्यापक होता … की बजाय यह कहना ज्यादा सही है कि काश मै अध्यापक “ना” होता.

काश मैं अध्यापक होता

काश मैं अध्यापक होता  आपको कैसा लगा … जरुर बताईएगा !!

June 11, 2015 By Monica Gupta

Statue of Bapu

Statue of Bapu

cartoon bapu by monica gupta

Statue of Bapu   आजकल गर्मी सारे रिकार्ड तोड रही है पारा हाई चल रहा है. पशु पक्षी भी गर्मी से बेहाल हैं …  पार्क मे बापू की मूर्ति लगी हुई है …  ये छोटा गरीब मासूम बच्चा सोच रहा है कि बापू को भी तो गर्मी लग रही होगी… इसलिए उनके उपर उसने छतरी कर दी …

June 11, 2015 By Monica Gupta

मैं शपथ लेता हूं

cartoon oath by monica gupta  मैं शपथ लेता हूं कि …. शपथ लेते ही सार से नेता की जिम्मेदारी बढ जाती है और उसे निष्ठापूर्वक अपना कर्तव्य निभाना चाहिए पर ये हो नही रहा … हमारे आज के नेताओ पर किसी पर रेप का केस है किसी पर जमीन हडपने का तो किसी पर फर्जी डिग़्री का.. बहुत ही दुख होता है और बुरा लगता है जब हम किसी को पूरे विश्वास के साथ जीताते हैं और उसकी असलियत इस तरह सामने आती है

Delhi Law Minister Jitender Singh Tomar arrested in fake degree case: As it happened | Zee News

New Delhi: Delhi Law Minister and Aam Aadmi Party (AAP) leader Jitender Singh ​Tomar was on Tuesday arrested in connection with the fake degree row. Read more…

– www.bhaskar.com

शपथ के बाद ही मंत्री पद संभालना संवैधानिक प्रक्रिया है। सांसद या विधायकों को भी शपथ लेनी होती है, वहीं सुप्रीम कोर्ट/हाईकोर्ट के जज और भारत के नियंत्रक-महालेखापरीक्षक (कैग) को भी पद संभालने से पहले शपथ लेनी होती है। लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि पद संभालने से पहले ली जाने वाली यह शपथ होती क्या है, शपथ ग्रहण की पूरी प्रक्रिया क्या होती है, क्यों ली जाती है शपथ और इसका प्रारूप क्या होता है। आइए, जानते हैं

See more…

June 10, 2015 By Monica Gupta

पटखनी

पटखनी

cartoon neta by monica gupta

 

पटखनी …. लॉकअप से तोमर ने भेजा सीएम केजरीवाल को इस्‍तीफा
गिरफ्तारी के बाद कल कानून मंत्री जितेंद्र सिंह तोमर ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। तोमर ने लॉकअप से मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को इस्तीफा भेजा, जिसे स्वीकार कर लिया गया। उप मुख्यमंत्री मनीष सिसौदिया ने कहा, ‘तोमर ने मुख्यमंत्री को अपना इस्तीफा भेज दिया है और मुख्यमंत्री ने उसे स्वीकार कर लिया।

See more…

दिल्ली सरकार और केंद्र के बीच अधिकारों की जंग ने मंगलवार को नया मोड़ ले लिया है। दिल्ली पुलिस ने एलएलबी की फर्जी मार्कशीट मामले में राज्य के कानून मंत्री जीतेंद्र सिंह तोमर को गिरफ्तार किया। इस पर आम आदमी पार्टी बिफर गई। केंद्र पर दिल्ली में आपातकाल जैसे हालात बनाने का आरोप लगाया। यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कहने पर गृह मंत्रालय में साजिश रची गई।

– www.bhaskar.com

See more…

पटखनी

June 10, 2015 By Monica Gupta

Mouth organ

Mouth organ … बहुत दिनों के बाद मणि का बेटा दो दिन के लिए घर आया. नाश्ते के बाद बेटे ने अपना बैग खोला और बोला आखॆं बंद करो आपके लिए कुछ है. फिर मणि के हाथ कुछ पकडा दिया. हाथ मे लेते ही मणि चौंक गई और आखें खोलती हुई बोली अरे !!! Mouth organ !! इतने साल हो गए .. इसका क्या करुगी.. भूल भाल गई हूं सब !!

बेटे ने कहा जब बचपन में आप हमे Mouth organ बजा कर सुनाती थीं तो आप खुद ही कहती थीं कि एक बार बजाना आ जाए तो जिंदगी भर नही भूल सकते .. मणि ने भी जानॆ अनजाने Mouth organ होठों से लगा लिया . वही मणि मुझे दिखाने लाई थी और डबडबाई आखें, खुशी … उससे कुछ बोला ही नही जा रहा था.

 

Mouthorgan  photo

Photo by Nina J. G.

मैं हाथ में mouth organ लिए ….उसकी तरफ देख कर सोचे जा रही थी….  बहने दे ये आसूं … .. सच, छोटी छोटी खुशियों में कितना सारा प्यार अपनापन और अहसास छिपा होता है

  • « Previous Page
  • 1
  • …
  • 189
  • 190
  • 191
  • 192
  • 193
  • …
  • 235
  • Next Page »

Stay Connected

  • Facebook
  • Instagram
  • Pinterest
  • Twitter
  • YouTube

Categories

छोटे बच्चों की सारी जिद मान लेना सही नही

Blogging Tips in Hindi

Blogging Tips in Hindi Blogging यानि आज के समय में अपनी feeling अपने experience, अपने thoughts को शेयर करने के साथ साथ Source of Income का सबसे सशक्त माध्यम है  जिसे आज लोग अपना करियर बनाने में गर्व का अनुभव करने लगे हैं कि मैं हूं ब्लागर. बहुत लोग ऐसे हैं जो लम्बें समय से […]

GST बोले तो

GST बोले तो

GST बोले तो –  चाहे मीडिया हो या समाचार पत्र जीएसटी की खबरे ही खबरें सुनाई देती हैं पर हर कोई कंफ्यूज है कि आखिर होगा क्या  ?  क्या ये सही कदम है या  देशवासी दुखी ही रहें …  GST बोले तो Goods and Service Tax.  The full form of GST is Goods and Services Tax. […]

डर के आगे ही जीत है - डर दूर करने के तरीका ये भी

सोशल नेटवर्किंग साइट्स और ब्लॉग लेखन

सोशल नेटवर्किंग साइट्स और ब्लॉग लेखन – Social Networking Sites aur Blog Writing –  Blog kya hai .कहां लिखें और अपना लिखा publish कैसे करे ? आप जानना चाहते हैं कि लिखने का शौक है लिखतें हैं पर पता नही उसे कहां पब्लिश करें … तो जहां तक पब्लिश करने की बात है तो सोशल मीडिया जिंदाबाद […]

  • Home
  • Blog
  • Articles
  • Cartoons
  • Audios
  • Videos
  • Poems
  • Stories
  • Kids n Teens
  • Contact
  • Privacy Policy
  • Terms of Use
  • Disclaimer
  • Anti Spam Policy
  • Copyright Act Notice

© Copyright 2024-25 · Monica gupta · All Rights Reserved