वर्तमान समय में नारी की सोच – महिलाए और आत्मविश्वास – अगर आज महिलाएं और समाज की बात करें तो क्या पतंग और महिला की क्या एक ही कहानी है ??? जर्र जर्र … तार तार … लपक लो … वो गिरी पडी है … लूट लो … या कुछ और … !!!
वर्तमान समय में नारी की सोच – महिलाए और आत्मविश्वास – महिलाएं और समाज
कल एक programe में गई बडा अच्छा सा माहौल था … कुछ लोग पंतग उड रहे थे … कही ढोलक बज रहा था तो कही मूंगफली और रेवडी खाते लोग बाते कर रहे थे …
मैं वही बैठ गई कुछ जानकार महिलाएं बाते कर रही थी पहले नोट बंदी फिर त्योहारों की कि क्या मायने रह गए आज त्योहारों के … और फिर महिला असुरक्षा पर आकर टिक गई पतंग जैसी हो गई है हम महिलाओ की जिंदगी … कोई सुरक्षा नही जैसे पतंग के बारे मे कहते हैं कि लपक लो, लूट लो बस ऐसी ही हो गई है हम महिलाओ की … आज हालात कुछ ऐसे हो गए
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वो पतंग
ये सुनकर मुझे ध्यान आया जब मेरी भी ऐसी ही सोच थी बात पिछ्ले साल की है जिसे मैं आपसे शेयर करना चाहूगी मकर सक्रांति के बाद एक पतंग कट कर सामने बिजली की तार पर उलझ गई थी
घर के सामने बिजली की तार पर एक पंतग अटकी हुई है. बहुत दिनों से मैं इसे लगातार देखती हुई सोचती थी कि एक बार यह फटनी और तार तार होनी शुरु हो जाए फिर अच्छी सी कविता लिखूगी कि हाय पतंग तेरा क्या जीवन और फिर उस पंतग को महिलाओ से जोडूगी कि महिला का जीवन भी पंतग जैसा निरीह, बेचारा है पर आशा मे खिलाफ उस पंतंग को कुछ भी नही हुआ हालाकि टंगे हुए उसे महीना से ज्यादा हो गया है पर पूरे विश्वास से हवा मे झूल रही है.
वर्तमान समय में नारी की सोच – महिलाए और आत्मविश्वास
तब मन में विचार आया कि और हर situation में अपना आत्म विश्वास बनाए रखें अगर हम स्वयं को मजबूत रखें तो हमें कोई चीज या बात हमें तोड नही सकती इसके किए हमे अपनी लक्षमण रेखा निर्धारित करनी होगी कि हमारे लिए क्या सही है और क्या गलत और इस पंतग ने मेरी सोच को नई दिशा दे डाली… बात बस यही है खुद को कमजोर नही समझना और हर परिसथ्ति का डट का सामना करना है ..जरुर सोचिए
फिलहाल मकर सकारंति की बधाई पोजिटिव सोचने की बहुत आवश्यकता है
महिला और समाज – भारतीय समाज में नारी का स्थान – Monica Gupta
महिला और समाज – भारतीय समाज में नारी का स्थान – हाल ही में हम महिलाओं से जुडे दो बेहद खास त्योहार गए. करवा चौथ, अहोई अष्टमी का. इंटरनेट पर खूब मजाक बनाया monicagupta.info





















बदहाल इमारते
विरासत की सैर का जिम्मा संभालने वाले इतिहासकार (वॉक लीडर) जैसे कथा-कहानियों के अद्भुत शिल्पी भी होते हैं। हमारे ही शहर के उन पक्षों को वो रोचक शैली में प्रस्तुत करते हैं जिनसे हम अकसर अनजान होते हैं या फिर जिनके बारे में बहुत थोड़ा जानते हैं। सप्ताहांत की शुरुआत का इससे बेहतर तरीका भला और क्या होगा कि आप अपने आपको जानने से दिन की शुरुआत करें। यकीन मानिए, हम भले ही खुद को जानने-समझने और पहचानने का कितना भी दावा क्यों न करते आए हों, । यहां तक कि एक समय था जब सिर्फ विदेशी सैलानी ही इनमें शिरकत इतिहास और ऐतिहासिक धरोहरों की वो समझ दी है कि आज अगर मेरे स्कूली टीचर मुझसे मिलें तो ‘स्टम्प’ हो जाएंगे। इतिहास की जानकारी न रखने वाले सामान्य लोगों को भी इस तरह की विरासत की सैर करने पर महसूस होता है कि पत्थर सचमुच बोलते हैं। खण्डहर खुद-ब-खुद अपनी दीवारों में कैद किस्से-कहानियां कहने लगते हैं और गुजरे जमाने के राजाओं-रानियों की प्रेम कहानियों से लेकर खूनी इतिहास की परतें खुलने लगती हैं। विरासत की सैर और कला के अन्य कार्यक्रमों की जानकारी देने वाली कई वेबसाइटें और फेसबुक पेज भी आजकल लोकप्रिय हो रहे हैं। तो अब आप सुबह-सवेरे उठने और अपना ट्रैक सूट पहनकर इतिहास को जानने के लिए निकलने को तैयार हो जाइये। 

