Monica Gupta

Writer, Author, Cartoonist, Social Worker, Blogger and a renowned YouTuber

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March 25, 2013 By Monica Gupta Leave a Comment

इंटरनेट और कमेंटस की दुनिया

comments photo

इंटरनेट और कमेंटस की दुनिया

सिर्फ देखने का नही  …. कमेंट भी करने का …!!!

 

वो क्या है ना कि आज मेरे सहेली बता रही थी कि उसने अपने पेज पर एक पोस्ट डाली. जिसे देखा लगभग 1250 लोगो ने और लाईक आए 10 और कमेंट आया … शून्य यानि जीरो यानि 0

वो 

क्या है ना कि अक्सर लोग पोस्ट देख तो जाते हैं उसे कुछ एक को तो इतनी बेहतर लगती है कि कापी भी कर लेते हैं और खुद के नाम से पब्लिश कर देते है पर कमेंट नही करते. वो क्या है ना कि

ऐसा करना अच्छा नही लगता थोडी हिम्मत जुटा कर कभी कभार कमेंट तो कर ही देना चाहिए. वो क्या है ना कि मनोबल बना रहता है… !!! और कई लोग तो मिस्टर इंडिय़ा होते हैं जो दिखाई नही देते यानि हमारे लिखी हुई पोस्ट  को न लाईक करते और कमेंट लिखना तो बहुत दूर की बात है ये भी अच्छी बात नही है …अरे भई … डरों मत अगर देख ही लिया है तो जरा कमेंट भी कर ही डालिए….  सिर्फ देखने का नही

इसलिए अपनी उपरोक्त पक्ति दोहरा रही हूं सिर्फ मेरी

पोस्ट ही नही किसी की भी पोस्ट के लिए ….

सिर्फ देखने का नही !!!

 

  सिर्फ देखने का नही !!!  कमेंट भी करने का …!!!

 

 

monica gupta

March 25, 2013 By Monica Gupta Leave a Comment

Caricature of Cartoonist Monica Gupta

Caricature of Cartoonist Monica Gupta

Caricature of Cartoonist Monica Gupta – कार्टूनिस्ट Cherthala shammy John ने बनाया मेरा ही बना दिया Caricature… क्या हो जब कार्टूनिस्ट का ही कार्टून बना दिया जाए तो …

Caricature of Cartoonist Monica Gupta –

Caricature of Cartoonist Monica Gupta

Caricature of Cartoonist Monica Gupta

March 25, 2013 By Monica Gupta Leave a Comment

Success story of Blood Donor

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सफलता की कहानी … !!!

 Success story of Blood Donor

वो दिन रात रक्त दान के प्रति लोगो को जागरुक करने की मुहिम मे जुटे थे पर लोगो की भ्रातियां, रक्तदान के प्रति नकारात्मक सोच पीछा ही  नही सोच रही थी. उन्ही दिनो की बात है जब वो एक बार कालिज के बच्चो को रक्तदान के लिए प्रेरित करके लौटे ही थे कि एक बच्चे की मम्मी का फोन  आ गया कि मेरे बच्चे को छोड दो.  बेशक आप एक हजार रुपए ले लो पर मेरे बच्चे को रक्तदान के लिए बिल्कुल मत कहना.

वही एक दूसरे उदाहरण में जब वो घर घर जाकर लोगो को रक्तदान के लिए लोगो को जागरुक कर रहे थे तब एक व्यक्ति हाथ जोड कर बोला कि मैं बाल बच्चेदार  आदमी हूं खून दान करके अपनी जिंदगी खतरे मे नही डाल सकता. एक अन्य उदाहरण मे तो और भी आश्चर्यजनक बात हुई. सुबह सवेरे एक प्रोफेसर साहब के पास फोन आया कि रक्तदान केंद्र मे खून की जरुरत है. उन्होने अपनी पत्नी को बताया कि वो खून दान कर के अभी वापिस आते हैं. जब तक वो रक्तदान केंद्र पहुंचे  तब तक एक अन्य व्यक्ति रक्तदान कर चुका था इसलिए प्रोफेसर साहब कुछ देर रुकने के बाद चाय ठंडा पी कर जब घर वापिस लौटे तब पत्नी ने उन्हे देखते ही कहा कि ओह … आप कितने कमजोर लग रहे हो!!! इस पर उन्होने मुस्कुराते हुए बताया कि खून दान तो उन्होने किया ही नही. यह सुनकर उनकी पत्नी बहुत झेप सी गई.

 

जरा सोचिए कि ऐसे वातारवरण मे लोगो मे जागरुकता पैदा  करना  कितना कठिन काम रहा होगा पर उनके भीतर  लग्न, जोश, जनून ने ऐसे मुश्किल काम को सम्भव कर दिखाया. भले आज वो हमारे बीच नही है सन 2011 की 20 अगस्त को वो पंच तत्व मे विलीन हो गए पर रक्त दान के क्षेत्र मे जो मिसाल कायम कर गए वो एक मील का पत्थर बना खडा सभी का पथ प्रदर्शक कर रहा हैं.

 

रक्तदान के क्षेत्र मे अपनी एक अलग ही पहचान बनाने वाली उस शख्सियत का नाम है स्वर्गीय श्री हजारी लाल बंसल. 22 सितम्बर 1935 को भटिंडा के कटार सिह वाला मे जन्मे और सन 1962 मे हमेशा के लिए रामपुरा फूल मे बस गए. सब कुछ अच्छा चल रहा था कि अचानक जिंदगी ने एक ऐसा मोड लिया कि उनकी सोचने की दिशा ही बदल गई या ये भी कह सकते हैं कि जिंदगी को  एक नया मकसद मिल गया.

 

बात सन 1975 की है. उनकी बिटिया रजनी  की अचानक तबियत खराब हो गई  और उनके शरीर मे बस दो ग्राम खून ही रह गया. वो पहली बार था जब उन्होने  रक्तदान किया. हालाकि उनके एक अन्य रिश्तेदार ने भी रक्तदान किया पर खून और भी चाहिए था. वो खून के लिए इधर उधर बहुत भटके, घूमे  फिरे और खून नही मिल पाया फिर पीजीआई चंडीगढ ले जाया गया और ईश्वर का शुक्र रहा रहा कि उनकी बिटिया की जान बच गई और वो कुछ समय बाद सकुशल घर लौट आई. पर इस धटना ने हजारी लाल जी को बुरी तरह से झंझोर दिया और उन्होने निश्चय किया कि चाहे कुछ हो जाए रक्तदान की वो एक मुहिम चलाएगे. तब उन्होने अपने  जीवन को एक नई दिशा दी और उसी दिन से वो रक्तदान की मुहिम मे जुट गए. फिर झेलने पडी ढेरो नकारात्मकता और लोगो का रक्तदान के प्रति विपरीत रवैया. पर बस  एक अजीब सा जनून था जोकि उनके कमजोर नेत्र रोग के सामने भी कमजोर नही पडा. असल मे, जब वो दसवी कक्षा मे थे. तभी उन्हे नेत्र रोग हो गया था जिसकी वजह से लगातार उनकी नेत्र ज्योति क्षीण होती जा रही थी. दसवी कक्षा मे वो मात्र 50% ही देख पाते थे. धीरे धीरे यह ला ईलाज रोग बढता ही जा रहा था और जिंदगी के आखिरी 15 सालो मे वो पूरी तरह से नेत्र विहीन हो चुके थे और दूसरो की मदद के बिना कुछ् नही कर पाते थे. पर यह बात भी माननी पडेगी कि भले ही खुद वो बिना नेत्र ज्योति के रहे पर लोगो के दिलो मे रक्तदान के प्रति रक्तदान की ऐसी आलौकिक रोशनी जगा गए कि वो आज भी सभी का मार्ग प्रशस्त कर रही है.  Success story of Blood Donor

उनके सपुत्र श्री सुनील बंसल ने सारी जानकारी देते हुए बताया कि उनके पिता जी के बारे मे कुछ भी कहना सूरज को दीया दिखाने के बराबर है. पापा का जोश और जनून था जब हमारे गांव रामपुरा फूल मे 1 अक्टूबर 1978 को पहली बार रक्तदान कैम्प लगा. जिसमे पहली बार 46 रक्तदाताओ ने रक्तदान किया. उनके पिता ब्लड डोनर फांउडेशन के संस्थापक भी रहे. जब भी वो रक्तदान पर बोलते सभी चुप होकर बहुत गम्भीरता से उनकी बात सुनते और रक्तदान के प्रति प्रेरित होते. उनके पिता को सन 84 मे रेड क्रास सोसाईटी ने और 1996 तथा 2008 मे इंडियन सोसाईटी आफ ब्लड ट्रांसफ्यूजन ने भी विशेष रुप से सम्मानित किया था. सुनील जी ने बहुत गर्व से बताया कि आज उनके गांव रामपुरा फूल मे शत प्रतिशत स्वैच्छिक रक्तदाता हैं. दूर दराज जानी मानी संस्थाए यहां रक्तदान कैम्प लगाती है और खून की वजह से कोई व्यक्ति की जान जाए ऐसा कभी नही हुआ. आज वो स्वय भी रक्तदान के प्रति लोगो को प्रेरित करने मे दिन रात जुटे हैं और खुद 34 बार रक्तदान भी कर चुके है.

वाकई मे , हजारी लाल जी के बारे मे जान कर बहुत खुशी हुई. इसी दौरान रजनी जी जोकि इस मुहिम  का कारण बनी. उनसे भी बात की. रजनी जी ने बताया कि हर कोई चाहता है कि वो बीमार ना पडे पर मेरा बीमार पडना मेरे पापा की जिंदगी मे एक नई क्रांति ले आएगा यह कभी नही सोचा था. खुद नेत्र ज्योति ना के बराबर होते हुए भी लोगो को रक्तदान के क्षेत्र मे राह दिखाई. मुझे गर्व है कि मैं ऐसे पिता की बेटी हूं. उनके जज्बे के आगे मैं नत मस्तक हूं.  

यकीनन श्री हजारी लाल बंसल जी का नाम रक्तदान के क्षेत्र मे अग्रणी रहेगा. आईएसबीटी आई परिवार की और से उन्हे सादर श्रधांजलि!!!Success story of Blood Donor!!!

 

 

मोनिका गुप्ता

सिरसा


हरियाणा

March 14, 2013 By Monica Gupta Leave a Comment

अच्छी बातें

अच्छी बातें ….( सकंलित)

Thoughts !!!

 

जनहित मे जारी …!!!

दो दो बात करने से काम बनता है
और
दो दो हाथ करने से काम बिगडता है

है ना 🙂

 

ऐसी ही है हम महिलाएं ….

मासूम इतनी कि पलक का बाल अगर चेहरे पर गिरा होगा तो झट से आखॆ बंद करके wish मांगने लग जाएगी
और
इरादो में मजबूत इतनी कि कई बार ईश्वर को ही चलेंज कर देगी

🙂

 

 

खूबसूरत है वो मुस्कान जो दूसरो के चेहरे पर भी मुस्कान ले आए…..!!! है ना 🙂

 

बेशक फिल्में तीन वजह से चलती हो पर फेसबुक एक ही वजह से चलती है और वो वजह है …
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INTER NET..!!!!!

🙂

 

 

कृप्या ध्यान दें !!!

कठिन समय में धैय धारण करने का मतलब है कि आधी लडाई जीत लेना !!!

तो धैर्य धारण करने मे ही असली समझदारी है !!! है ना 🙂

 

 

कृप्या ध्यान दीजिए ..

बजाय यह कहने के कि “No One Likes Me
ये कहिए कि “There Is No One Like Me.”

Feel The Change. ….!!! 🙂

 

 

सबसे मुश्किल काम … खुद को सुधारना
सबसे आसान काम …. दूसरो मे दोष निकालना

🙂

 

पते की बात …

हमेशा सच बोलना चाहिए ताकि कसम खाने की जरुरत ही ना पडे….!!!:)

 

जनहित मे जारी 🙂

महिलाए कृप्या ब्लड Donor से पहले ब्लड owner बनें…!!! अच्छी बातें हमेशा ही अच्छी लगती हैं … है ना 🙂

 

मोनिका गुप्ता

 

 

March 14, 2013 By Monica Gupta Leave a Comment

ISBTI

isbti- yamuna nagar-monica gupta

ISBTI

 रक्तदान करने वाले को दिल का दौरा कभी नही पड सकता . आईएसबीटीआई , रादौर यमुना नगर में  रक्तदान पर आयोजित कार्यशाला में अपने विचार रखते गणमान्य अतिथि !!

March 14, 2013 By Monica Gupta

Blood donation video

Blood Donation

Blood donation video

रक्तदान से बढकर कोई दूसरा पुण्य का कार्य नही है और अगर हम (खासकर महिलाए) किसी वजह से रक्तदान न कर पाए तो लोगों को स्वैच्छिक रक्तदान के लिए प्रेरित करने से बढ कर अन्य कोई नेक कार्य नही है किसी को जन्म देना हो या रक्तदान करके किसी को नया जीवन देना हो दोनों की नेक कार्य है…

जिस तरह से लोग जानकारी के अभाव मे रक्त न मिलने की वजह से मर रहे हैं लोगो को रक्तदान के लिए प्रेरित करना हमारा फर्ज है ताकि रक्त की कमी से किसी को मरने न दिया जाए. ऐसे ही रक्त दान से सम्बंधित ट्रैनिंग के दौरान प्रेरित करती !!

क्या आपने कभी रक्तदान किया है या कभी रक्तदान के लिए किसी को प्रेरित किया है जरुर बताईएगा …

Blood Donation

Blood Donation and Way of Motivation

March 6, 2013 By Monica Gupta Leave a Comment

निर्भया

 

cartoon mahila

निर्भया

निर्भया Nirbhaya  दिल्ली में 16 दिसम्बर 2012 के बहुचर्चित बलात्कार और हत्या की आपराधिक घटना की पीड़िता को समाज व मीडिया द्वारा दिया गया नाम है। भारतीय कानून व मानवीय सद्भावना के अनुसार ऐसे मामले में पीड़ित की पहचान को उजागर नहीं किया जाता।  ऐसी धटना के बाद भी जिस तरह से रेप  केस बढे जा रहे हैं लग रहा है मानो अब महिलाओं और बच्चियों का बस यही नाम रह जाएगा ऐसा प्रतीत हो रहा है

अफसोस !! बेहद दुखद !!! इतनी असुरक्षा !!!

निर्भया

March 5, 2013 By Monica Gupta Leave a Comment

अच्छे दिन आयेंगे

cartoon ..mahila diwas

अच्छे दिन आयेंगे

बहुत समय से अच्छे दिनों की इंतजार है. महिला असुरक्षा इतनी बढ गई है कि घर से निकलते हुए डर लगता है. कानून अव्यवस्था , रेप, महिला असुरक्षा … बस बहुत बुरा हाल है ..

मोदी सरकार का नारा था चुनावों में कि अच्छे दिन आएंगें .. उसी की इंतजार है पता नही बाहर कब आऊं हो सकता है जल्दी या फिर कभी नही …

मन मे बार बार यही प्रश्न परेशान कर रहा है कि क्या अच्छे दिन आयेंगे   ????

March 5, 2013 By Monica Gupta Leave a Comment

रक्तदाता महिलाएं

रक्तदाता महिलाएं

Blood Donation के क्षेत्र में महिलाएं भी किसी से कम नही हैं. वो चाहे तो रक्तदान की पूरी जानकारी लेकर  अपने पूरे परिवार को  रक्तदान के लिए प्रेरित कर समाज में अलग पहचान बना सकती हैं

 

कुछ समय पहले आईएसबीटीआई की ओर से स्वैच्छिक रक्तदान पर एक दिवसीय सम्मेलन था. बहुत दर्शक और बहुत वक्ता थे. रक्तदान के बारे मे बहुत पुरुषों ने  बोला कि उन्होने जब रक्तदान किया तब घर पर अपनी पत्नी को नही बताया या अपनी मां को नही बताया क्योकि वो नाराज हो जाती कि रक्त किसलिए दे कर आए हो. एक ने तो बताया कि उन्होने 5 साल तक अपने घर मे किसी को खबर नही लगने दी कि वो रक्तदान कर रहे हैं. अगर पता चल जाता तो वो उसे रक्तदान नही करने दिया जाता.

वही उसी कार्यक्रम मे एक सज्जन ने बताया कि महिलाओ की कुछ परेशानियां ऐसी होती है कि वो खून नही दे सकती जैसा कि स्तनपान, महावारी और एनीमिया इसलिए पुरुषो को आगे आना चाहिए और ज्यादा से ज्यादा रक्तदान करना चाहिए.

एक सज्जन ने यह भी बताया कि भले ही रक्तदान के लिए महिलाओं मे बहुत उत्साह देखने को मिलता है और वो बढ चढ कर र्क्तदान के लिए कैम्पो मे आती भी हैं  पर जब उन्हे पता चलता है कि उनमे खून की कमी यानि एनीमिया है वो रक्तदान नही कर सकती तब उन्हें मजबूरन पीछे हटना पडता है.

तब मेरे दिमाग मे बस एक ही बात आई कि भले ही हम महिलाओं को हर महीने किसी न किसी रुप मे परेशानी से दो चार होना पडता है पर अगर कम से कम हमें रक्तदान के बारे मे विस्तार से जानकारी होगी तो अपने घर परिवार के लोगो को तो बजाय रक्तदान पर नाराज होने के होने प्रेरित तो कर सकती हैं.और इसके साथ साथ  भले ही रक्तदान ना करे पर इतना तो करें कि खुद मे तो रक्त  हो यानि ब्लड डोनर से पहले रक्त ओनर तो बनें.

अगर महिलाए एनीमिया से कम ग्रसित होगी तो रक्त की भी कम जरुरत पडेगी. इसके साथ साथ यह भी जानकारी भी होनी जरुरी है कि रक्तदान से कोई नुकसान नही होता.चाहे स्वयं रक्तदान करे या अपने घर परिवार मे किसी का, तो भी बहुत जागरुकता आ सकती है. असल मे, रक्तदान के बारे मे जब भी महिलाओ से बात की तो यही जवाब मिला कि हमे तो किसी ने कहा ही नही या हमे तो पता ही नही था.

महिला दिवस पर यही संकल्प लें कि रक्तदान के बारे मे सारी जानकारी लेगी और अगर होमोग्लोबिन 12.5 है तो रक्तदान करके खुद महसूस करेगी कि क्या अनुभव रहा और अगर किसी वजह से खुद ना कर पाई तो कम से कम अपने परिवार के सदस्यो को नाराजगी दिखाने के बजाय रक्तदान के लिए जरुर प्रेरित करेगी. जैसे

किसी को जन्म देना एक खूबसूरत अहसास है ठीक वैसे ही किसी को नई जिंदगी देना भी एक खूबसूरत अहसास से कम नही है.

रक्तदाता महिलाएंblood donor photo

Photo by Armed Services Blood Program

March 4, 2013 By Monica Gupta Leave a Comment

Mahila Diwas

Mahila Diwas

Mahila Diwas 

महिला दिवस

एयर पोर्ट पर एक नवयुवती पुरुषो के पास जा जा कर रोता हुआ मासूम चेहरा लिए नम्र निवेदन कर रही थी कि उसका सामान ज्यादा हो गया है प्लीज इसे आप रख ले. अपने गंतव्य पर पहुंच कर वो ले लेगी. पर यह बात सिर्फ पुरुषो  से ही कह रही थी. महिलाओ के पास नही जा रही थी और जब भी समय मिलता एक किनारे पर खडी होकर  किसी से हंस बोल कर मोबाईल पर बतियाने लगती. आदमी जंहा उसकी मदद को तैयार थे वही महिलाए उसे गुस्से वाली निगाहों से  देख रही थी कि किस तरह अपनी मासूमियत का फायदा उठा रही है.

दो दिन पहले एक महिला से मुलाकात हुई. उसने बताया कि करीब चार महीने पहले एक जानी मानी पत्रिका के सम्पादक ने उसका साक्षात्कार लिया और उसे पहले कहा कि अगले महीने साक्षात्कार आएगा और इसी सिलसिले मे ना सिर्फ उसकीफोन पर बात हुई  बल्कि पर्सनली मुलाकातें भी हुई. अब इस बात को महीनो बीत गए. महिला लगातार फोन कर रही है पर अब शायद मतलब निकल गया है तो सम्पादक ने फोन उठाना बंद कर दिया है. वैसे ऐसा ही कुछ फिल्म लाईन मे  अकसर सुनने मे  आता  है कि  हीरोईन बनने की चाह मे महिला कई बार बेवजह बहुत आगे बढ जाती है और उसका अंत दुखद होता है.

वही एक अन्य महिला अपने आसूं के बल पर ना सिर्फ आफिस मे अपने बॉस बल्कि बहुत लोगो की भावनाओ के साथ खेल रही हैं. कुल तनखाह मात्र 5000 है पर 15 हजार के फ्लैट मे रह रही है और 25 हजार फीस वाले स्कूल मे अपनी बच्ची को दाखिल करवाया हुआ है. हैरानी हो रही है ना पर ये हकीकत है.  एक परिवार मे माता पिता अपनी ही लडकी को जोर देते है कि तु जा और अपने मालिक से पर्सनल तालुकात रख.

वही कुछ पति भी जल्दी प्रमोशन के चक्कर मे बास के आगे पीछे धूमने को बुरा नही मानते. इससे भी ज्यादा दुखद बात तब होती है जब कोई महिला पर पुरुष से अपना मतलब ना निकलने पर उस पर उल्टा ही रेप जैसा धिनौना अपराध का नाम लगा देती है और बात बिगडने की दशा मे अपनी शिकायत वापिस ले लेती है.

 ऐसी महिलाए देर सवेर अपने ही जाल मे  फस जाती है और  उबरना मुश्किल नही नामुमकिन सा हो जाता है और ऐसी सीख मिलती है कि जिंदगी भर उस बात की भरपाई नही हो पाती.एक अन्य उदाहरण मे एक महिला को एक व्यक्ति ने प्राईवेट कालिज मे नौकरी दिलवाई अब उनका आभारी होने के नाते वो उनके बच्चो को ट्यूशन पढाती है और पेपर मे क्या क्या आएगा उन्हे परोक्ष रुप मे जानकारी भी देती है.  ऐसे ना जाने अनगिणत उदाहरण है.

 कृप्या अपने मतलब के लिए अपना शोषण मत होने दें. चाहे नौकरी की बात हो, शादी ब्याह की बात हो या किसी भी अन्य तरह के लालच या प्रलोभन की बात हो. इससे पहले की कोई अनहोनी हो जाए. लोग आपका फायदा उठा जाए और आप  सिर पर हाथ पे हाथ धर के बैठे रह जाए. और तब आत्महत्या के इलावा कोई दूसरी राह ही ना सूझे. आपको स्वयं ही जागरुक बनना पडेगा.

बेशक, राह बहुत कांटो भरी है इसलिए कई बार मन का विश्वास डगमगा जाता है पर ऐसी बाते ना हो उसके लिए अपने मन मे पक्का विश्वास पैदा करना होगा और  और जल्दबाजी भी नही दिखानी होगी.अगर  हम कदम सोच समझ कर चलेगी तो राह मुश्किल जरुर लगेगी पर सफलता भी जरुर मिलेगी. बस किसी भी वजह से खुद को शोषित ना होने दें, जागरुक बनें.

Mahila Diwas पर आपकी राय आपके विचारों का स्वागत है !!

 

 

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