Monica Gupta

Writer, Author, Cartoonist, Social Worker, Blogger and a renowned YouTuber

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September 5, 2016 By Monica Gupta Leave a Comment

रक्त के प्रकार

कैसे आएगी स्वच्छता

blood 3

क्या आपको अपना blood group पता है

रक्त के प्रकार चार होते हैं और रक्तदान यानि स्वैच्छिक blood donate करने की जब बात आती है तो हम सबसे पहले यही पूछते हैंं कि क्या आपको अपना  blood group पता है पर जब हमें ये ही न पता ही न हो कि हमारे रक्त के प्रकार क्या है तो क्या हो … ??? रक्तदान से जुडी एक खबर जो आपको अचम्भित कर देगी.  गुजरात के सूरत में एक ऐसा ही अजीबो गरीब केस देखने में आया. उनका ब्लड ग्रुप जैसा अभी तक दुनिया में किसी का नही है.

रक्त के प्रकार – रक्तदाता का एक अजीबो गरीब केस

रक्तदान क्षेत्र में काम कर रहे हैं उनके लिए ये खबर जरुर हट कर होगी .अगर हमें रक्त की जरुरत पडे तो यकीनन हम ब्लड बैंक जाएंगें और खून लेंगें पर क्या हो जब हम ब्लड बैंक जाएं और हमें ये पता चले कि हमारा खून तो किसी कैटीगिरी मे है ही नही. अब आपके मन में ये आ रहा होगा कि फिर तो यकीनन मैं बॉम्बे ब्लडग्रुप की बात कर रही हूं पर जी नही ये बॉम्बे ब्लडग्रुप की बात भी नही है ये कोई अलग तरह का ही ब्लड है जिसकी जानकारी अभी तक न डाक्टरों तक हो नही है इतना ही नही इस अनोखे ब्लड ग्रुप का रक्त नमूना वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (डब्ल्यूएचओ)  WHO भी भेजा गया.

इस लैब में दुनिया में ज्ञात सभी तरह के ब्लड ग्रुप मौजूद हैं इसलिए हर तरह की जांच की गई पर इस युवक का ब्लड ग्रुप किसी से मैच नहीं हुआ. लैब ने अपनी जांच के बाद इस बात को स्वीकृति दी है कि यह ब्लड ग्रुप पूरी दुनिया में इकलौता है.

आईए अब आपको सारी कहानी बताते हैं कि आखिर ये है क्या …

जैसाकि हम जानते हैं कि मानव शरीर में चार प्रकार के ब्लड ग्रुप हैं. ये हैं ए, बी, ओ एवं एबी, लेकिन गुजरात के सूरत शहर के एक युवक का ब्लड ग्रुप दुनिया में अनोखा है. ब्लड टेस्ट को सबसे पहले सूरत के लोक समर्पण रक्तदान के डॉक्टरों ने किया. इसमें डॉ. सनमुख जोशी, डॉ. किंजल और अंकिता शेलडिया शामिल थे.लेबोरेटरी ने भी युवक के ब्लड की जांच की, लेकिन उसका कोई ब्लड ग्रुप नहीं मिला.लेबोरेटरी ने इस नए ब्लड ग्रुप को प्रमाणित किया है.

इस बारे में सन्मुख जोशी ने बतायाकि वो  युवक के ब्लडग्रुप पर अभी कुछ और रिसर्च कर रहे हैं कि यह ब्लड क्यों सबसे अलग है ? कैसे बना है?

युवक के फैमली के सभी सदस्यों  के ब्लड की भी जांच की जा रही हैं.

दुनिया में सात ऐसे रेयर ब्लडग्रुप हैं जो किसी से मैच नहीं करते हैं….  दुनिया में ऐसे सात व्यक्ति हैं, जिनका ब्लडग्रुप किसी से मैच नहीं करता है.

डॉ. सनमुख जोशी बताते हैं ‘इन्हें मेडिकल भाषा में कोलटोल कहते हैं. इनमें से एक इंडिया में है. इसके अलावा बॉम्बे ब्लडग्रुप है जो सात हजार में से किसी एक के पास होता है. ऐसे व्यक्ति को रक्त की जरूरत पड़ने पर काफी मुश्किल होती है … खैर देखतें है कि नतीजा क्या निकेलेगा … फिलहाल यह युवक न तो किसी को ब्लड डोनेट कर सकता है, न ही किसी का ब्लड ले सकता है. डॉक्टरों ने इस नए ब्लड ग्रुप का नाम INRA रखा है. इसमें पहले दो शब्द इंडिया और बाद के दो शब्द युवक के नाम से लिए गए हैं.

वाकई ये बात हैरानी का विषय बनी हुई है और यह भी सुनने में आया है कि  रिसर्च के चलते डॉक्टरों ने युवक की पहचान को अभी छिपा रखा है.

दिल्ली स्थित Rotary Blood Bank की चीफ टैक्निकल आफिसर आशा बजाज से जब इस बारे में बात हुई तो उन्होने भी यही कहा  कि रिसर्च का विषय है इस पर रिसर्च करके ही बात की गहराई तक जाया जा सकेगा..

http://m.dailyhunt.in/news/india/hindi/news-track-epaper-newstrac/surat-ke-yuvak-ke-blad-grup-se-doktars-bhi-hairan-duniya-me-kisi-ke-pas-nahi-newsid-57493930

Rotary Blood Bank

Rotary Blood Bank आईएसबीटीआई की दिल्ली में कांफ्रेस के दौरान बहुत से ऐसे लोगों से मिलना हुआ जो रक्तदान पर बहुत जबरदस्त कार्य कर रहे थे. Read more…

 

 

donate blood cartoon by monica gupta

 

 

 

September 5, 2016 By Monica Gupta Leave a Comment

एक अच्छे अध्यापक हैं श्री गणेश

jai ganesh by monica gupta

jai ganesh by monica gupta

आईए श्री गणेश करें

Happy Teachers Day  Lord Ganesha, जी, बिल्कुल एक अच्छे अध्यापक हैं श्री गणेश. जब भी हम किसी कार्य का शुभ आरम्भ  करते हैं तो अक्सर यही बोलते हैं कि चलो श्री गणेश करें. यानि गणेश जी का नाम लिया तो कार्य शुभ ही होगा.पर इसी के साथ साथ गणेश जी अच्छे अध्यापक भी है जो हमें अपनी looks से बहुत तरह के संदेश देते हैं. एक ऐसा सबक जिसे हमने स्कूल में नही पढा.

हैप्पी टीचर्स डे श्री गणेश

मुझे याद है कुछ् समय पहले जब शिव रात्रि आई थी तब शिव जी से भी बहुत कुछ सीखा था जैसे उनके मस्तक से . गंगा से, उनके कंठ में विष धारण करने से … !!! बहुत प्ररेणा मिली थी और आज गणेश चतुर्थी के शुभ अवसर पर हैप्पी टीचर्स डे श्री गणेश  जी को है क्योकि बहुत बातें बहुत सबक सीखें है. आईए आप भी देखिए …

जय गणेशा – ॐ श्री गणेशाय नमः – गणेश चतुर्थी

jai ganesh by monica gupta

जय श्री गणेशाय

मुख – गणेश जी का मुख काफी छोटा होता है परन्तु ये हमें दो संकेत देता है , कि एक तो हमें कम बोलना चाहिए ! कम बोलने से तात्पर्य है कि जितनी आवश्यकता हो उतना ही बोलना चाहिए अधिक नहीं ! दूसरा संकेत जो हमें गणेश जी के मुख से प्राप्त होता है वह है कि हमें कम खाना चाहिए अर्थात जीवन के लिए भोजन करना चाहिए न कि केवल स्वाद के लिए !

मस्तक – गणेश जी का मस्तक काफी बड़ा होता है जो हमें अपनी सोच को बड़ा बनाये रखने की और बड़े विचारों को मस्तिष्क में स्थिरता रखने की सलाह देता है !

आँखें – गणेश जी आँखें काफी छोटी – छोटी होती है जो हमें सन्देश देती है , कि जीवन में सफल होने के लिए एकाग्रता का होना सर्वाधिक महत्वपूर्ण है ! एकाग्रता के बिना सरल से सरल काम को भी पूर्ण नहीं किया जा सकता है और एकाग्रता हो तो पानी में देखकर भी घूमती हुई मछली की आँख को निशाना बनाया जा सकता है !

दांत -गणेश जी का केवल एक ही दन्त होता है दूसरा नहीं अर्थात हमें केवल अच्छी वस्तुओं का संग्रह करना चाहिए बुरी वस्तुओं का नहीं !दूसरा संकेत हमें ये प्राप्त होता है , कि यह शरीर नश्वर होता है जिसे एक दिन अवश्य ही खत्म हो जाना है इसलिए शरीर का अधिक मोह नहीं करना चाहिए लेकिन “शरीर माध्यम खलु धर्मंसाधनं”के विचार को महत्व देते हुए हमें शरीर को नीरोग रखने का पूरा कर्म करना चाहिए क्योंकि शरीर ही संसार में सभी धर्मों को पूरा करने का माध्यम है और मोक्ष का माध्यम है !

कान – गणेश जी के कान काफी बड़े होते हैं और ये बड़े कान हमें एक अच्छा श्रोता बनने का सन्देश देते हैं अर्थात हमारे अंदर धैर्य और एकाग्रता पूर्वक अच्छी बातों को सुनने का सामर्थ्य होन चाहिए !

सूंड – गणेश जी की सूंड मानव शरीर की adaptibility का सर्वश्रेष्ठ उदहारण है !यह सूंड हमें शरीर में दुसरे परिवर्तनों को सहेजने और उनके साथ उसी कुशलता से काम करने का सन्देश देती है !जिस प्रकार स्वयं गणेश जी ने हाथी की सूंड का सामंजस्य स्वयं के शरीर के साथ करते हुए अपने मुख के सभी कार्य सूंड के साथ निर्विघ्न्तापूर्ण संपन्न किये !

हस्त – गणेश जी का दांया हाथ जो आशीर्वाद देने की मुद्रा में उठा हुआ है ,वो सभी जीवों को सुखपूर्वक जीने का आशीर्वाद दे रहा है !और साथ ही साथ संसार से ईश्वर तक जाने वाले उस दिव्य पथ को भी आलोकित कर रहा है !

बड़ा पेट -गणेश जी का बड़ा पेट हमें इस बात की शिक्षा देता है कि हमें जीवन में जो कुछ भी हो रहां है उसे शांतिपूर्वक पचा लेना चाहिए! चाहेवह अच्छा हो रहा है या बुरा !

मोदक अर्थात लड्डू -मोदक हमें इस बात की सूचना देता है कि यदि आप कोई कर्म करते हैं तो आपको उसका फल तो मिलेगा ही लेकिन यदि आपका कर्म और उसके प्रभाव नश्वर होते हैं तो आपको नष्ट होने वाला फल ही प्राप्त होगा लेकिन यदि आपके कर्म ईश्वर प्राप्ति के मार्ग को प्रशस्त करने वाले हैं तो आपका प्रसाद भी अलौकिक ,दिव्य और गणेश जी के मोदक के समान अनश्वर होगा !(अर्थात साधना का फल है मोदक)

कुल्हाड़ी – गणेश जी के दांये हाथ की कुल्हाड़ी हमें ये प्रेरणा देती है , कि हमें सांसारिक बंधनों की असत्य डोरियों को काटकर एकमात्र सत्य ईश्वर की और अग्रसर होने का प्रयत्न करना चाहिए !

रस्सी -गणेश जी के बांये हाथ की रस्सी स्वयं को अपने जीवन के चरम लक्ष्य की और खींच कर ले जाने का संकेत देती है और यह लक्ष्य है स्वयं श्री गणेश !

प्रसाद – गणेश जी सामने रखा हुआ प्रसाद ये बता रहा है  कि सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड आपके कदमों में है और आपके आदेश की प्रतीक्षा कर रहा है !

मूषक(चूहा)- मूषक अर्थात गणेश जी का वाहन !मूषक के द्वारा गणेश जी ये बताना चाह रहे हैं ,कि ऐसी इच्छाएं जो हमारे वश में नहीं होती हैं वो नुकसान पहुंचा सकती है इसलिए इच्छाएं सदैव उस आकार की ही होनी चाहिए कि हम उन पर सवारी कर सकें यदि यदि इच्छाएं हम पर सवारी करना शुरू कर देती है तो मुश्किल हो जाती है !विशालकाय गणेश जी का वाहन छोटा सा मूषक इसी बात की दार्शनिक व्याख्या करता नजर आता है !

गणेश जी

क्यों है ना… गणेश जी का केवल मुख नहीं अंग – अंग भी बोलता है और वो भी लाजवाब !! जय गणेशा !

अगर हम इन सूचको से कुछ सीखतें हैं तभी फायदा है अन्यथा जिन्दगी का ढर्रा जैसा चल रहा है चलता ही रहेगा…

जय गणेशा – ॐ श्री गणेशाय नमः – गणेश चतुर्थी

shri Ganesha by monica gupta

September 4, 2016 By Monica Gupta 2 Comments

सफाई अभियान पर नारे

11 Best Slogan On Cleanliness

11 Best Slogan On Cleanliness

स्वच्छता के प्रति कैसे बदलें लोगो की मानसिकता

बेशक, गली गली में सफाई अभियान पर नारे लगाए जा रहें हैं स्वच्छता की गूंज है. मन की बात में हो ,  देश के मंत्री होंं, फिल्मी सितारे हो या टीवी सितारों का स्वच्छता अभियान में आगे आना  सभी अपनी अपनी तरफ से भरसक प्रयास कर रहे हैंं पर जितनी स्वच्छता होनी चाहिए , आनी चाहिए आ नही पा रही .. !!  जन आंदोलन नही बन  पा रहा रहा.

जब स्वच्छता अभियान का शुभ आरम्भ हुआ

राजपथ पर सफाई अभियान पर नारे लगाते हुए , स्वच्छ भारत अभियान का शुभारंभ करते हुए प्रधान मंत्री  नरेन्द्र मोदी ने कहा, “2019 में महात्मा गांधी की 150वीं जयंती के अवसर पर भारत उन्हें स्वच्छ भारत के रूप में सर्वश्रेष्ठ श्रद्धांजलि दे सकता है।”2 अक्टूबर 2014 को देश भर में एक राष्ट्रीय आंदोलन के रूप में स्वच्छ भारत मिशन की शुरुआत हुई।

 11 Best Slogan On Cleanliness

नारे स्वच्छता अभियान के… कुछ गाँव वालों ने तो स्वच्छता  अभियान को नर्इ दिशा देने के लिए ढ़ेरों नारे बना दिए

मिल जुल कर छोडो़ चिंगारी
स्वच्छ हो जाए दुनिया सारी

 

ना जिलें में, न स्टेट में, सफार्इ सारे देश में

 

लोटा बोतल बंद करो, शौचालय का प्रबन्ध करों

 

1-2-3-4, कुर्इ खुदवा लो मेरे यार

 

बच्चें, बूढ़े और जवान
खुले में शौच से सब परेशान

 

हर गाँव में स्वच्छता ज्योति जगाऐंगें
देश को सुंदर बनाऐेंगें

 

मेरी बहना मेरी माँ, खुले में जाना ना ना ना….

 

करें हम ऐसा काम, बनी रहे देश की शान.

 

सभी रोगों की एक दवाई घर मे रखो साफ सफाई

 

हम सब ने अब ये ठाना हैं, भारत स्वच्छ बनाना है

 

स्वच्छता का रखिए ध्यान

तभी बनेगा देश महान

 

सफार्इ है जहाँ, पढ़ार्इ है वहाँ

 

खुले में शौच, जल्दी मौत

स्वच्छ भारत अभियान मे हमारा योगदान

 

वैसे आपका क्या विचार है कि नारा कैसा हो ताकि सम्पूर्ण स्वच्छता आ जाए..

 

 

September 4, 2016 By Monica Gupta Leave a Comment

संत बनी मदर टेरेसा

mother teresa

mother teresa

ममतामयी Mother Teresa – दुनिया की सबसे खूबसूरत महिला

मदर टेरेसा का संत बनना वाकई में बहुत खुशी और गर्व की बात है.   संत बनी मदर टेरेसा इसलिए आज उनका पहनावा पहन कर बहुत अच्छा महसूस हो रहा है.. ममता और मानवता की मूर्ति का नाम है मदर टेरेसा..

शांति की शुरुआत मुस्कराहट से होती है 

संत बनी मदर टेरेसा ने बहुत बाते ऐसी कहीं हैं जो दिल को छू जाती है जिसमे प्यार है दुलार है सेवा भाव है और जिंदगी का सबक है .

गरीबों और बेसहारा लोगों के लिए जीवन समर्पित करने वालीं मदर टेरेसा को रविवार को वेटिकन सिटी में पोप फ्रांसिस ने संत घोषित कर दिया. मदर टेरेसा को 1979 में नोबेल शांति पुरस्कार और 1980 में भारत रत्न से भी नवाजा गया था। उन्हें आधिकारिक रूप से कलकत्ता की संत कहा जाएगा। कोलकाता में 45 साल तक गरीबों और बीमार लोगों की सेवा करने वाली टेरेसा का निधन 5 सितंबर 1997 में 87 साल की उम्र में हुआ था।

pope francis declares mother teresa as saint in vatican आज तक

वेटिकन सिटी पूरी तरह से सज-धज कर इस सेरेमनी के लिए तैयार हुई थी. संत टेरेसा का रिश्ता भारत से है तो भारत में इस ऐतिहासिक पल को लेकर जोश दुनिया से निराला है. कोलकाता में उनकी मिशनरी से लेकर बैंगलोर, रांची और जगह-जगह संत टेरेसा की प्रार्थना की जा रही है.. Read more…

World gathers at Vatican for Mother Teresa to turn Saint-मदर टेरेसा को पोप फ्रांसिस ने संत घोषित किया – Patrika News

गरीबों और बेसहारा लोगों के लिए जीवन समर्पित करने वालीं मदर टेरेसा को वेटिकन सिटी में पोप फ्रांसिस ने संत घोषित किया patrika.com

 

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जहां जाइए प्यार फैलाइए जो भी आपके पास आए वह और खुश होकर लौटे।

प्यार की भूख को मिटाना रोगी के भूख को मिटाने से कहीं ज्यादा जरूरी है।

Symbol of humanity and love. Sainthood is a great tribute to the person who taught us to spread love every where we go

मदर टेरेसा के 10 अनमोल वचन | Webdunia Hindi

असाधारण व्यक्तित्व की धनी,ममता और मानवता की मूर्ति का नाम ही मदर टेरेसा है। मदर टेरेसा में जीवन से हमें ममता के विराट स्वरूप का दर्शन होता है। उनका हृदय समुद्र की गहराई लिए और विशालता हिमालय की ऊंचाई जैसी थी। | mother Teresa, 10 golden words of Read more…

Road named after Mother Teresa in Bhubaneswar

Bhubaneswar: An important road here was today named after Mother Teresa coinciding with her canonisation ceremony at the Vatican. Dedicating the road linking Satya Nagar and Cuttack-Puri highway in her memory, Chief Minister Naveen Patnaik said henceforth the pathway wuld be known as ‘Saint Mother Teresa Road’. read more at eenaduindia.com

 

 

September 4, 2016 By Monica Gupta Leave a Comment

सादर चरण स्पर्श

cartoon by monica gupta
cartoon by monica gupta

cartoon touch feet

खबरदार. पैर छूना भारी न पड जाए

सादर चरण स्पर्श करना यकीनन बहुत खूबसूरत भाव दर्शाता है पर आज अचानक इसके मायने बदल गए. AAP पार्टी के विधायक संदीप कुमार जोकि सैक्स सीडी में फंस गए हैंं. उनका बयान था कि वो  अपनी पत्नी के पैर छूते हैं जबकि हमारी मान्यताओं के मुताबिक जब हम किसी को  प्रणाम करते हैं तो अहंकार समाप्त होता है और हृदय में समर्पण एवं विनम्रता और प्रेम का भाव जागृत होता है।

मंत्री ने महिलाओं का किया कल्याण

संदीप कुमार आज अपनी गंदी हरकत के चलते सुर्खियों में हैं सादर चरण स्पर्श  उनका आज किसलिए याद किया जा रहा है. असल में था  क्या उनका पैर छूने वाला मामला… आईए जाने !!

असल में, 8 मार्च 2015 को महिला दिवस के उपलक्ष्य में हुए एक कार्यक्रम के दौरान कुमार ने अपनी सफलता में पत्नी ऋतु वर्मा के बलिदानों का ज़िक्र करते हुए कहा था ‘मैं अपने माता-पिता के पैर छूता हूं क्योंकि वे मुझे इस दुनिया में लाए, मुझे बड़ा किया और मुझे अच्छी शिक्षा दी. लेकिन उनके बाद मेरी पत्नी ही थीं जो संकट की घड़ी में भी मेरे साथ थी और इसके लिए मैं उनका सम्मान करता हूं.’ संदीप की इस बात पर सभागृह तालियों से गूंज उठा था. दिलचस्प बात यह है कि एक साल बाद सोशल मीडिया पर एक बार फिर इसी बयान को याद किया जा रहा है लेकिन इस बार संदर्भ अलग है.

आपत्तिजनक सीडी में फंसे संदीप कुमार का पत्नी के पैर छूने वाला बयान फिर याद किया गया

आप विधायक संदीप कुमार एक बार फिर चर्चा में आ गए हैं. इससे पहले वह पिछले साल तब सुर्खियों में आए थे जब उन्होंने महिला दिवस के मौके पर कहा था कि वह हर सुबह अपनी पत्नी के पैर छूते हैं. ndtv.com

 

पत्नी के पैर छूने से लेकर बर्खास्तगी तक.. – BBC हिंदी

एक आपत्तिजनक सीडी के सामने आने के बाद मंत्री पद से हटाए गए संदीप कुमार पर सोशल मीडिया बंटा.

दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाति मालिवाल ने ट्वीट किया, ”संदीप कुमार का यह काम चौंकानेवाला और दुर्भाग्यपूर्ण है. ऐसे लोग मंत्री बनने के लायक नहीं हैं, महिला और बाल कल्याण तो दूर की बात है….अच्छी सरकार ने उन्हें हटा दिया है.”

भाजपा सांसद परेश रावल ने ट्वीट किया, ”वो परेशान करते रहे, उसके बावजूद, हम….स्कैंडल करते रहे.” Read more…

 

Sandeep Kumar suspended primary membership of AAP 14626079

विपक्ष के आरोप प्रत्‍यारोप के बीच आप ने सेक्‍स सीडी कांड में फंसे संदीप कुमार की प्राथमिक सदस्‍यता निलंबित की। अब देखना यह है कि पार्टी संदीप के खिलाफ आगे क्‍या स्‍टैंड लेती है। 14626079 See more…

 

September 3, 2016 By Monica Gupta Leave a Comment

अंधविश्वास पर कितना विश्वास

कार्टून- अंधविश्वास एक समस्या

कार्टून मोनिका गुप्ता

अंधविश्वास के उदाहरण

बेशक, अन्धविश्वास एक अभिशाप है  पर हमें अंधविश्वास पर कितना विश्वास है ये अक्सर  देखने को मिल ही जाता है और अंधविश्वास एक समस्या बन कर सामने खडा हो जाती है.

हमारे अंधविश्वासी नेता

हमारे नेताओं को अंधविश्वास पर कितना विश्वास है. इसके  कुछ उदाहरण देखने को मिले. पिछ्ले दिनो एक खबर पढी कि  कर्नाटक के मुख्यमंत्री  सिद्धारमैया हाल में मैसूर के दौरे पर गए तो हर जगह सीधे हाथ में नींबू लेकर घूमते देखे गए. मैसूर में सिद्धारमैया मीडिया के सामने आए भी तो उन्होंने नींबू को लेकर किसी सवाल का जवाब नहीं दिया.

गौरतलब है कि कभी अंधविश्वासों का जोरदार विरोध करने की बात कहने वाले आज अंधविश्वास को मान रहें हैं वही अगर कुछ महीने पहले की बात याद हो तो उनकी कार पर कौआ क्या बैठा, 35 लाख की नई कार खरीदने का ऑर्डर दे डाला.

सीएम का एक छोटी सी घटना के लिए 35 लाख की नई कार खरीदने का आदेश सच में चौंकाने वाला था  अगर राज्य का सीएम अंधविश्वास में इस कदर यकीन करेगा तो आम लोगों के बीच भला क्या संदेश जाएगा?

वैसे बात ये भी है कि हम भी कही न कही किसी न किसे रुप में अंधविश्वास का साथ देते दिख ही जाते हैं.

हम भी हैं अंधविश्वासी

हम मंगलवार के दिन बाल कटाना गुनाह मानते हैं.

हम गाड़ियों में, घर, दुकान आदि के दरवाजों पर धागे में बंधे नींबू और मिर्च लटकाते हैं.

अन्धविश्वास के चलते शाम और रात के समय झाडू नही लगाते और घर में झाडू को खडा करके नही करके रखते.

चप्पल उल्टी करके रखी हो तो वहम हो जाता है कि घर मे लडाई हो जाती है.

टूटे शीशे में चेहरा नही देखते क्योकि ऐसा माना जाता है कि टूटे कांच में देखने से किस्मत फूट जाती है.

सूरज डूबने के बाद यानि दिन छिपने के बाद नाखून न काटे जाना भी एक अंधविश्वास है.

 

karnataka cm siddaramaiah lemon in right hand tours mysore: ख़बरें: आज तक

कुछ जगह ऐसी धारणा है कि बुरी बलाओं को भगाने के लिए पूजा के बाद नींबू दिया जाता है. ऐसे में सवाल ये उठता है कि क्या सिद्धारमैया भी अंधविश्वासों को मानने लगे हैं. read more at aajtak.intoday.in

हमारी जिंदगी आस्था या अंधविश्वास – Monica Gupta

हमारी जिंदगी आस्था या अंधविश्वास Superstition मेरी सहेली मणि बहुत खुशी खुशी मेरे पास आई और चहकते हुए बताया कि उनकी कालोनी मे रहने वाला मनु उनके पास आया और उसने बताया कि दीदी एक बार जब वो अपनी पहली बी टेक की परीक्षा देने जा रहा था वो आप उसके घर के सामने … See more…

 

वैसे आपकी अंधविश्वास  के बारे मे क्या सोच है?? जरुर बताईगा !!

 

September 3, 2016 By Monica Gupta Leave a Comment

फ़्री बर्थ डे गिफ्ट – ऑडियो

रिश्वतखोरी - आईए रिश्वत दें
मोनिका गुप्ता

मोनिका गुप्ता

 

https://monicagupta.info/wp-content/uploads/2016/09/audio-free-gift-by-monica-gupta.wav

दोस्त को क्या गिफ्ट दें  जन्मदिन पर

फ़्री बर्थ डे गिफ्ट – ऑडियो. जन्मदिन हो या साल गिरह बहुत टेंशन हो जाती है कि अपने दोस्त को क्या उपहार दिया जाए..  जोकि  सबसे अच्छा हो.  आज अचानक मुझे ऐसे gift का  idea आया जिसे आप सुनेगें तो आप भी कह उठेंगें कि आप भी यही उपहार देंगें  पर इसके लिए आपको क्लिक करके  2 मिनट और 58 सैंकिड  की ओडियो सुननी पडेगी. तो तैयार हो जाईए और सुनिए ऑडियो…..

जन्मदिन सबसे अनोखा उपहार

फ़्री बर्थ डे गिफ्ट – ऑडियो.

जरुर सुनिए इससे आपको आईडिया आ जाएगा कि अपने दोस्त को क्या उपहार देना चाहिए. मोनिका गुप्ता का नमस्कार !! मेरी सहेली का जन्मदिन आ रहा है सोच सोच कर थक गई कि क्या gift  दूं जो भी विचार मन में आता है दूसरा विचार उत्तर लिए खडा होता है कि नही ये नही.

जैसाकि मन में आया कि wrist watch  दे दू फिर लगा अरे नही है उसके पास.. फिर मन हुआ कि परफ्यूम दे दूं पर याद आया कि कि उसे एलर्जी है अक्सर सिरदर्द हो जाता है फिर मन में आया कि कुछ  Online  ही gift  दे दूं पर वो भी कैंसिल कि कही डिलीवरी late हुई या सही नही निकला तो फिर चक्कर पड जाएगा…

फिर मन हुआ कि cake  ही दे दूं बर्थ डे सैलीब्रेशन ही हो जाएगा..पर फिर ध्यान आया कि अरे नही वो वैसे ही अपना weight  कम करने के सोच रही है ऐसे में वो मुझे ही बुरा कहेगी कि मोटा बनाने आ गई .

फिर मन में हुआ कि क्यो न जिम की चार महीने की membership  ही गिफ्ट कर दूं फिर लगा अरे नही … वो नाराज हो जाएगी कि क्या मोटा समझ रखा है क्या …

फिर क्या दूं क्या दूं .. फिर मन में आया कि छोडो  उसे मार्किट ही ले जाती हूं और पसंद की shopping  करवा दूं पर वो idea  इसलिए ड्राप कर दिया कि कही किसी महंगी चीज पर उसका मन आ गया… मेरा बजट गडबडा गया तो क्या होगा …

कुल मिलाकर नतीजा शून्य कुछ नही सूझ रहा .. सोचा थोडी देर internet on  कर लूं  Facebook ,  Twitter  और वटसअप ही देख लूं और अचानक मुझे आईडिया आ ही गया…

ऐसा गिफ्ट मन में आया है कि आप सोच भी नही सकते और इतना मुझे यकीन है कि अगर आप भी सुनेगे तो आप भी कह उठेंगें कि आप भी अपने दोस्तों को वही देंगें.. और वो gift  है फेसबुक पर अपनी सहेली की हर पोस्ट को न सिर्फ like  करना बल्कि कमेंट भी करना ..

चाहे टवीटर हो, इंस्टाग्राम हो या  वटस अप उसके हर मैसेज का जवाब देना और उसे अपनी तरफ से भी मैसेज करना. ये पैकेज कम से कम 6 महीने का तो होगा.

असल में, ये आईडिया मुझे फेसबुक देखते हुए आया एक जानकार का जन्मदिन था और शुभकामनाओं की  सुनामी आई हुई थी और वो सभी के जवाब भी नही दे पा रहा था इसलिए जितने वो like  कर सकता कर दिया और एक   धन्यवाद post बनाई  पर  उस पर मुश्किल से तीस चालीस लाईक थे और पांच सात कमेंटस ..और जन्मदिन के अगले दिन  जब कोई नोर्मल पोस्ट लिखी तो वही दो चार पांच लाईक और भूला भटका एक आधा कमेंट …

ऐसा ही होता है बस फेसबुक पर जन्मदिन  ही ऐसा दिन होता है जब सबसे ज्यादा कमेंट मिलते हैं उसके आगे पीछे नही.. इसलिए सोचा कि क्यो ना उसे साल या छ महीने का पैकेज ही दे दू ..

हर रोज उसकी पोस्ट पर लाईक और कमेंट करना उसे खुश रखने का, मनोबल बढाने का इससे बेहतर गिफ्ट और कोई नही सूझ रहा .. टीवी पर विज्ञापन आ रहा था बिनानी सीमेंट का…. सस्ता नही सबसे अच्छा जी बिल्कुल सस्ता नही सबसे अच्छा गिफ्ट है ये …

आप भी अपने दोस्तों को ये दीजिए यकीन मानिए आपकी दोस्ती पर मोहर लगाने का काम करेगा ये उपहार … !!

कल फिर मिलूगी एक नए गिफ्ट ओह मेरा मतलब एक नए ऑडियो के साथ तब तक अपना ख्याल रखिए और खुश रहिए मुस्कुराते रहिए.. बाय बाय !!!

सोशल नेटवर्किंग और हमारे सोचने का तरीका – Monica Gupta

Click n listen hindi  audio of 2 min & 8 Sec about  “Social Networking Sites and our thinking”.

Click n listen hindi audio of 2 min & 8 Sec about “Social Networking Sites and our thinking”. सोशल नेटवर्किंग और हमारे सोचने का तरीका मनोरंजक, प्रेरक ऑडियो, एक जागरुक नागरिक होने के नाते प्लीज बिजली जितनी आती है उसका उपयोग सम्भल कर करे और पानी बिल्कुल वेस्ट ना करें और हो सके तो एक पौधा लगा कर उसकी देखभाल करें …ड्राईव करते समय सीट बेल्ट बांधे या हेलमेट read more at monicagupta.info

जरुर बताईए कि आपको कैसी लगी ऑडियो ताकि मैं इसे और भी बेहतर बना सकूं … !!!

 

September 2, 2016 By Monica Gupta Leave a Comment

गांधी हत्या, आरएसएस और हे राम

bapu gandhi cartoon by monica gupta

bapu gandhi cartoon by monica gupta

 

महात्मा गांधी और उनकी हत्या का रहस्य

सात दशक पुराना गांधी हत्याकांड  Gandhi assassination आज फिर चर्चा में है. गांधी हत्या, आरएसएस और हे राम  ने नई बहस छेड दी है. राहुल गांधी के वकील कपिल सिब्बल ने गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में कहा कि राहुल अपने बयान, ”आरएसएस के लोगों ने गांधी को गोली मारी” पर क़ायम हैं और रहेंगे. इस विषय पर खूब राजनीति हो रही है.

आरएसएस को गांधी की हत्या से जोड़ने वाले बयान के लिए राहुल गांधी मुकदमा लड़ेंगे

ये मामला तब उठा था जब राहुल गांधी ने 6 मार्च, 2014 को महाराष्ट्र के भिवंडी इलाक़े में एक चुनावी रैली में कहा था कि महात्मा गांधी की हत्या राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के लोगों ने की थी. आज गांधी हत्या, आरएसएस और हे राम सुर्खियों में है

RSS slams Rahul Gandhi for his U turn in Supreme Court – Navbharat Times

सुप्रीम कोर्ट में राहुल गांधी के बयान को लेकर RSS ने साधा निशाना राहुल गांधी ने गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में कहा कि वह इस बारे में अपने बयान के एक-एक शब्द पर कायम हैं कि महात्मा गांधी की हत्या के पीछे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ था। इस पर RSS ने सवाल खड़ा किया कि कांग्रेस नेता के रुख में U-टर्न क्यों आ गया और वह दो साल तक मामले में मुकदमे से क्यों बचते रहे। read more at indiatimes.com

 

गांधी हत्या और आरएसएस | Webdunia Hindi

राजनेताओं को यह समझना होगा कि अपने राजनीतिक नफे-नुकसान के लिए किसी व्यक्ति या संस्था पर झूठे आरोप लगाना उचित परंपरा नहीं है। कांग्रेस के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राहुल गांधी शायद यह भूल गए थे कि अब वह दौर नहीं रहा, जब नेता प्रोपोगंडा करके किसी को बदनाम Read more…

बापू – Monica Gupta

बापू और उनका हे राम गाँधी बापू को सादर नमन आज सुबह किसी ने सोशल नेट वर्किंग साईट फेसबुक पर “हे राम” लिखा हुआ था. कुछ देर बाद देखा तो उसमे दो लाईक थे. काफी देर बाद जब न्यूज फीड मे दुबारा देखा तो उसके किसी मित्र मे पूछा कि क्या हुआ!!! आज हे राम … Read more..

September 1, 2016 By Monica Gupta Leave a Comment

Thalassemia diseases and Awareness

Thalassemia diseases and Awareness

Thalassemia क्या है और क्या इससे बचा जा सकता है

Thalassemia diseases and Awareness .थैलासीमिया दो प्रकार का होता है। यदि पैदा होने वाले बच्चे के माता-पिता दोनों के जींस में माइनर थेलेसीमिया होता है, तो बच्चे में मेजर थेलेसीमिया हो सकता है, जो काफी घातक हो सकता है किन्तु पालकों में से एक ही में माइनर थेलेसीमिया होने पर किसी बच्चे को खतरा नहीं होता। यदि माता-पिता दोनों को माइनर रोग है तब भी बच्चे को यह रोग होने के २5 प्रतिशत संभावना है।

 

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थैलेसीमिया का इलाज और  हमारी जागरूकता

Thalassemia diseases and Awareness के लिए बेहद जरुरी  है कि शादी से पहले जैसे कुंडली मिलाई जाती है. वैसे ही दोनो का रक्त का भी मिलान होना चाहिए.विवाह से पहले महिला-पुरुष दोनों अपनी जाँच करा लें। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार भारत देश में हर वर्ष सात से दस हजार थैलीसीमिया पीडि़त बच्चों का जन्म होता है।

आपको बधाई हो ।  अब आप यह सोच रहे होगे कि बधाई किस बात की तो मै बताना चाहूगी कि बधाई इस बात की कि वाकई मे आप बहुत अच्छे इंसान है। आप निश्चित तौर पर दूसरे के दुख को देख कर दुखी हो जाते है और दूसरे के सुख को देख कर आपको असीम खुशी मिलती है. आप भी देश और समाज की भलाई  के लिए कुछ करना चाहते है ।

कुछ योगदान देना चाहते है , हाँ ,वो अलग बात है कि आपको ज्यादा मौका नही मिलता इसलिए जहां भी आपको कोई  मौका मिलता है वही आप भी भीड का हिस्सा बन जाते है और बढ चढ कर योगदान देते है पर कई बार आपको  महसूस होता है कि काश आप भीड का हिस्सा ना होकर  खुद ही अपने दम पर ऐसी लहर चलाते कि बदलाव आ जाए। इस बात के लिए पुनः बधाई क्योकि  बहुत कम लोग ऐसे होते है जो ऐसी सोच रखते है । ऐसा जज्बा आपके भीतर है तो उस को सलाम  ।

वैसे आप ही जैसे बहुत कम लोग हैं जो चुपचाप  निस्वार्थ  भावना से समाज सेवा के काम में जुटे हुए है ना उन्हे मतलब है कि वो ब्रेकिंग न्यूज बने और ना ही सुर्खियो मे आए। शीनम अपने की दम पर कन्या भ्रूण हत्या Female foeticide in India के प्रति लोगोें को जागरूकता करने मे जुटी है ।

वही एक स्कूली बच्चा मोहित जहां सडक टूटी  देखता है वही बोर्ड लगा देता है ताकि वाहन चालकों को दिक्कत ना हो । वही एक बुजुर्ग भागीरथ जी है वो अपने ही बल पर गंगा को साफ करने मे जुटे  हैं पता है कैसे असल में, वो जो नदी का पानी गंगा मे जा कर मिलता है वहा पानी के बीच मे पत्थर गिरा देते है उससे मोटा कूडा जैसा कि पोलेथिन,कचरा आदि उसमें अड जाता है  और फिर वो उस कूडे को बाहर फेक कर दूसरी जगह पत्थर लगाते है और अपने बल पर प्रयास यही है कि कूडा, कचरा गंगा मैया मे ना जाए।

वही  गीतम गरीब बच्चो की पढाई का खर्च उठा रहें है और सर्दी मे उन्हे कंबल आदि भी दान मे देते रहतेे हेै. रवि हर तीन महीने में रक्तदान देते है  ताकि किसी ना किसी की जिंदगी बचा सकें अभी तक वो 66 बार रक्तदान कर चुके है।

वही दूसरी side एक शक्स है जिन्हे जब से पता चला कि साईप्रेस देश में थैलीसीमिया की मात्रा जागरूकता से वहां इसकी संभावना शून्य स्तर तक आ गई है बस तभी से सोच लिया कि अपने देश में वो भी थैलीसीमिया के प्रति देश में जागरूकता लाएगे  और यहा भी इसे शून्य के स्तर तक ले जाएगे भले ही प्रयास छोटे स्तर पर है पर प्रयास तो है।

बात की तह तक गये तो जाना कि थैलीसीमिया  एक घातक बीमारी है । जिसमें शरीर में हीमोग्लोबिन नहीं बनता और रक्त की अत्यधिक कमी हो जाती है । ऐसे में इस रोग से पीडित व्यक्ति की जान भी चली जाती है । साथ ही साथ यह भी जाना कि अगर इस अनुवांशिक  रोग की जगरूकता दिखाने से यह राग जड से खत्म किया जा सकता है तो वो क्यो ना उसका कैरियर यानि संवाहक ही बना जाए ताकि लोगों की अज्ञानता दूर कर सके।

वैसे शुरू में इसकी  ज्यादा  जानकारी नही थी पर रक्तदान के दौरान इस बीमारी का नाम जरूर सुना था। धीरे-धीरे जानते गए कि हमारे देश में लगभग 3 करोड लोग थैलीसीमिया  कैरियर है और लगभग अज्ञानता  स्वरूप 10 हजार थैलीसीमिया ग्रस्ति बच्चे हर साल जन्म लेते हैै । इस रोग से पीडित  मरीज के षरीर में खून की कमी हो जाती है।

शरीर में हीमोग्लोबिन जरूरत का आधा भी नही बनता । इस कारण  आयु के अनुसार शरीर का न बढना,जिगर ,तिल्ली व हृदय के आकार का बढ  जाना और मरीज की मौत तक हो जाती है । इस रोग का इलाज काफी महंगा है । उतर भारत में यह रोग अधिक जड़ जमा रहा है मरीज को प्रत्येक  दो से चार सप्ताह में रक्त चढाना होता है । वही 20 से 50 हजार रूपये तक की दवाइयाँ खानी होती है और तो और बोनमैरो  ट्रांसप्लांट करने पर आमतौर पर इस रोग से छुटकारा मिल जाता है । लेकिन यह ना सिर्फ बहुत जोखिम भरा है बल्कि  इसका खर्च  लाखों में आता है और इतना खर्चा करना हर व्यक्ति के बस में भी नही है । इसलिए आम आदमी हर महीने दुखी और परेशान होकर रक्त ही चढवाता रह जाता है । कुल मिलाकर अगर जरा सी जागरूकता बरती जाए तो सभी दिक्कतो और मुसीबतो का सामना करने से बच सकते है । अगर आप जागरुक हैं और शादी से पहले इसका मिलान भी करवाना जरुरी समझतें हैं तो आपको बधाई हो..

असल में, जागरूकता बस इसी बात की है कि शादी से पहले जैसे कुंडली मिलाई जाती है। वैसे ही दोनो का रक्त का भी मिलान होना चाहिए।

थैलीसीमिया  अनुवांशिक रोग है प्रत्येक व्यक्ति के शरीर में थैलीसीमिया के दो जीन होते है । एक माइनर व दूसरा मेजर , शादी के वक्त जोडे की इलेक्ट्रोफोरेसिस नामक मशीन से थैलीसीमिया जांच जरूर की जानी चाहिए । यदि लड़के-लड़की में थैलीसीमिक माइनर है तो उनके होने वाले बच्चों में थैलीसीमिक मेजर होने की पूरी आशंका होती है  यानि कैरियर की टेस्टिंग के दौरान अगर दोनो मे से स्वस्थ है और दूसरा कैरियर तो दोनो की शादी में कोई अडचन नही पर भगवान ना करे कि अगर महिला और पुरूश दोनो में ही इसके कैरियर पाए जाते है तो उनके खुशहाल भविश्य के लिए यही सही रहेगा कि वो शादी बिल्कुल ना करे। ऐसे मे उनकी संतान के थैलीसीमिया ग्रस्त होने की पूरी सम्भावनाए रहती है.

थैलेसीमिया और सफलता की कहानी – Monica Gupta

थैलेसीमिया और सफलता की कहानी Blood donation, रक्तदान , रक्तदाता या स्वैच्छिक रक्तदान  की जब भी करते हैं तो thalassemia का जिक्र जरुर आता है. थैलेसीमिया एक आनुवशिक रक्त विकार है। इस रोग में रोगी के शरीर में हीमोग्लोबिन सामान्य स्तर से कम हो जाता है। शरीर में ऑक्सीजन का सुचारु रूप से सचार करने के … Read more…

 

वैसे आपके क्या विचार हैं इस बारें में जरुर बताईएगा …

(तस्वीर ग़ूगल से साभार)

September 1, 2016 By Monica Gupta Leave a Comment

थैलेसीमिया और सफलता की कहानी

थैलेसीमिया

थैलेसीमिया की मरीज और उनकी सफलता की कहानी

Blood donation, रक्तदान , रक्तदाता या स्वैच्छिक रक्तदान  की जब भी करते हैं तो thalassemia का जिक्र जरुर आता है. थैलेसीमिया और सफलता की कहानी भी जरुर पढनी चाहिए कि कैसे वो इससे जूझ रहे हैं.

आखिर क्या है  thalassemia

थैलेसीमिया  और  सफलता की कहानी  जानने से पहले जानना जरुरी है कि आखिर है क्या थैलेसीमिया… थैलेसीमिया एक आनुवशिक रक्त विकार है। इस रोग में रोगी के शरीर में हीमोग्लोबिन सामान्य स्तर से कम हो जाता है। शरीर में ऑक्सीजन का सुचारु रूप से सचार करने के लिए हीमोग्लोबिन की जरूरत होती है। लाल रक्त कोशिकाओं की विकृति रक्त की लाल कोशिकाओं में विकृति आने के कारण थैलेसीमिया होता है।

sangeeta

यह रोग प्रायः आनुवांशिक होता है और अधिकतर बच्चों को ग्रसित करता है, उचित समय पर उपचार न होने पर बच्चे की मृत्यु तक हो सकती है। रक्त के लाल कणों की आयु लगभग 120 दिनों की होती है। लेकिन जब थैलेसीमिया होता है, तब इन कणों की आयु कम हो कर सिर्फ 20 दिन और इस से भी कम हो जाती है।
इससे शरीर में स्थित हीमोग्लोबिन पर सीधा असर पड़ता है। यदि हीमोग्लोबिन की मात्रा शरीर में कम होती है, तो शरीर कमजोर हो जाता है, जिससे शरीर को कई रोग ग्रस्त कर लेते हैं।

मुम्बई में एक कार्यक्रम के दौरान 34 वर्ष की संगीता हरिदास वधवा से मिलना हुआ। उनके जोश और उत्साह को देख कर  मन हुआ कि उनसे बात की जाए कि अखिर उनमे इतनी एनर्जी  कहाँ से आई। उनसे बात करते अचानक मैं चौक गई । असल में, वो थैलीसीमिया मेजर की मरीज हैं।

मैने उनकी इस जिंदादिली को सलाम किया और उनके बारे में और बाते जानने की कोशिश की। संगीता ने बताया कि वैसे वो एक भाई और दो बहने हैं पर दो साल पहले यानि 27 साल की उम्र में उनकी बहन पायल की थैलीसीमिया की वजह से मृत्यु हो गई थी । विस्तार से उन्होने बताया कि उनके शरीर में आयरन की मात्रा बहुत बढ गई जिससे दिल का दौरा पडा और …………।। अपने दिल को मजबूत करते हुए उन्होने बताया कि यह उन्ही का सपना था कि थैलीसीमिया के मरीजो को लेकर एक समूह या एनजीओ बनाया जाए और देश भर में इसके प्रति जागरूकता अभियान चलाया जाए और आज यहां इस कार्यक्रम मे अपनी बात रखने वो यहां  अपने दोस्तों के साथ आई हुई है।

अपने बारे मे वो बता रही थी  कि जब वो पाँच साल की थी तब उन्हे और उनके परिवार को पता चला कि उन्हे थैलीसीमिया है । तभी अचानक मैं पूछ  बैठी कि ये तो जन्म के चार पांच महीने मे ही पता चल जाता है  इस पर संगीत ने बताया कि तब  यानि आज से 30 साल पहले ना तो इतनी  जानकारी थी और ना ही टेस्ट इत्यादि की कोई सुविधा. 5 साल की उम्र में पता चला और डाक्टरों  ने यह कह दिया कि वो बस 15 साल तक ही जिंदा रहेगी ।  खैर , मन को मजबूत करके वो पढ़ाई मे लगी रही  हालांकि हर 15-20 दिन के अंतराल पर उन्हे खून चढ़ाया जाता था और समय ऐसे ही बीत रहा था।

जब 12वी क्लास पास कर ली और आगे पढाई का मन हुआ तो लोगो ने कहा कि क्या करेगी पढ़ कर कोई फायदा नही होगा शायद दूसरे शब्दो मे यही बताना चाहते थे कि उसका अंत बहुत नजदीक है । वो भी लोगों की बातों में आ गई और आगे की पढाई का विचार छोड कर अलग अलग  जैसे स्पोकन इंगलिश, ब्यूटिशियन , कम्प्यूटर जैसे कोर्स में दाखिला ले लिया और कोर्स पूरा होने के बाद पिछडे वर्ग की महिलाओं और गरीब लोगों को अपने घर पर ही उसकी ट्रैनिंग  देने लगी। उनके मम्मी- पापा का बहुत सहयोग मिलता  रहा  जिससे उनका मनोबल कभी नही गिरा ।

इस बीच दस साल बीत गए पर आगे पढ़ाई करने की इच्छा कम नही हुई फिर अपने मम्मी -पापा के सहयोग से उन्होने आगे दाखिला ले लिया और पढाई जारी रखी । आज वो थैलीसीमिया  अभियान से जुडी  जगह -जगह जाकर लोगों को इसके प्रति जागरूक बनाने में प्रयासरत है।

एक सर्वे के अनुसार संगीत ने बताया कि देश की जनसख्या के कुल मिलाकर 4 प्रतिशत लोग थैलीसीमिया से ग्रस्ति हैं और सही मायनो मे देखा जाए तो 1 प्रतिशत भी स्वैच्छिक रक्तदाता नही मिलते । सही रक्त  ना मिलने  से अनेक बीमारियां लग जाती है और इसी वजह से हम थैलीसीमिया के मरीज समय से पहले ही दम तोड देते हैं इसलिए रक्तदान  के बारे मे भी लोगों को जागरूकता होनी बहुत जरूरी है। यह उनके भविष्य के लिए भी अच्छा है और उनके दिए गए रक्त से चार लोगों की जान बचेगी वो तो उससे भी ज्यादा पुण्य का काम है ।

यकीनन उनकी बात बहुत सही है और थैलीसीमिया के मरीज होने के नाते वो जितनी सही ढंग से अपनी बात कह पा रही थी वो सीधा दिल में उतर रही थी । उन्होने बताया कि साईप्रस जैसे देश में जागरूकता के चलते थैलीसीमिया का स्तर शून्य पा आ गया है तो हम अपने देश मे यह अभियान छेड़ कर इसे शून्य के स्तर तक क्यो नही ला सकते।

सच पूछों तो वो मुझे किसी देवदूत के कम नही लग रही थी जो इतनी परेशानियों और दुखों के बाद भी बस एक ही मिशन मे जुटी हुई हैं। इसलिए वो यूथ थैलीसीमिया एलाईस के साथ जुडी उसकी स्थापना की और बस एक ही मिशन लेकर चली कि Face, Fight & Finish..  लोग थैलीसीमिया को झेल रहे है इसका सामना कर रहे है इससे लड़ रहे है। पर इसे खत्म क्यो नही करने के लिए कदम उठा रहे जबकि जागरूकता लाने से यह हमेशा के लिए खत्म हो सकता है।

एक समय ऐसा था जब संगीता जिंदगी से हार गई थी पर उनके माता पिता ने हौंसला  बढाया और   आह संगीता अपने जैसे मरीजो का जो जिंदगी से हिम्मत हार गया है उन को परामर्श देकर उनमे नई रोशनी का संचार करती दिखाई देती है ।

मै कुछ पूछने को ही हुई थी। कि इतने में उस कार्यक्रम में उनकी स्पीच का समय हो गया और वो मन मे एक नया जोश भर कर सैकड़ो लोगों के सामने अपने विचार रखने के लिए स्टेज की तरफ चल दी और मै भी उनको शुभकामनाए देती हुई आगे बढ गई ।

इस छोटी सी मुकालात से एक बहुत बड़ी बात सीखने को मिली कि कभी भी हिम्मत नही हारनी चाहिए। दुःखों तकलीफो का सामना मजबूत होकर करेगें तो वे भी ज्यादा  देर तक हमारे सामने टिक नही पाएगें। जैसे भी किसी ने सच कहा है कि हमे तक तक कोई नही हरा सकता जब तक हम अपने आप से ना हार जाए।

 

थैलीसीमिया जड से खत्म हो सकता है बस जागरुकता होनी चाहिए…

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