Monica Gupta

Writer, Author, Cartoonist, Social Worker, Blogger and a renowned YouTuber

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June 5, 2016 By Monica Gupta Leave a Comment

पौधे और उनकी देखभाल

tulsi 1

पौधे और उनकी देखभाल

( मेरे मन की बात ) आमतौर पर हम जब पर्यावरण दिवस मनाते हैं तो जहन में यही बात रहती है कि ज्यादा से ज्यादा पौधे लगाए और फोटो भी खिचवाएं ताकि न सिर्फ सोशल मीडिया पर अपलोड करके कमेंट बटोर सकें बल्कि अखबारों की भी सुर्खिया बन सकें और अगले दिन बात खत्म पैसा हज्म यानि पौधा सूखता है तो सूखने दो जबकि ये गलत है ..

अगर पौधा लगाए तो बहुत सहेजे भी… चाहे भयंकर गर्मी हो या सर्दी… उसका ख्याल रखना हमारा कर्तव्य है… और जब आपका लगाया पौधा बढा होगा तो आपकी इतनी खुशी मिलेगी जिसका आप अंदाजा भी नही लगा सकेंगें… तो लगा रहे हैं ना आप भी एक पौधा जिंदगी के लिए 🙂

monacartoon plant

May 13, 2016 By Monica Gupta Leave a Comment

ऑडियो – काम वाली बाई – व्यंग्य – मोनिका गुप्ता

टैटू गुदवाना और रक्तदानhttps://monicagupta.info/wp-content/uploads/2016/05/satire-kaam-wali-bai-by-monica-gupta.wav

क्लिक करिए और सुनिए

आप बीती

ऑडियो – काम वाली बाई – व्यंग्य – मोनिका गुप्ता

मोनिका गुप्ता का नमस्कार

आज मैं आपको व्यंग्य सुनाने जा रही हूं जिसका शीर्षक है काम वाली बाई है मेरे पास !!!! …सुनने  से पहले प्लीज ध्यान दें ….इस व्यंग्य की सारी बाते सच्ची धटना पर आधारित है और इसका किसी व्यक्ति,स्थान उम्र से अगर मेल हो तो इसे कोई हैरानी बात ना होनी चाहिए…

जी.. क्या कहा आपने, कि मै क्यो मुस्कुरा रही हूं !!! अब मुस्कुराने की तो बात है ही..!!  मेरे पास काम वाली बाई जो है. दिन मे एक बार आती है या पांच दिन में एक बार .. जी क्या .नहीकुछ नही कुछ नही मैं तो बस वैसे ही! किस समय आते है!!! अरे समय की कोई बात नही. बस आना ही बहुत है उसका.

दिन में किसी भी समय वो दरवाजा खटखटा सकती है ….जब वो आती है तो सबसे पहले मै उसका स्वागत मुस्कुरा कर करती हूं. बैठाती हू और चाय भी पिलाती हूं.फिर जरा किसी सीरियल के बारे मे बातचीत करती हूं और फिर शुरु होता है हमारा काम… ओह, आई मीन उसका काम!! इसके पीछे पीछे इसलिए धूमना पडता है कि उसकी नजर जरा कमजोर है. अक्सर या यू कहिए कि कई बार कूडा नही दिखता तो वो उसे दिखाना पडता है. फिर आजकल उसकी कमर मे दर्द चल रहा है उससे झुका नही जाता इसलिए जरा मै वहाँ झाडु करके  उसकी मदद कर देती हूं. झाड पोछ वो करती नही है इसलिए वो भी साथ की साथ मै ही करती हूंं

रसोई मे वो प्याज और अंडे  वाले बर्तन नही धोती क्योकि उसकी महक उसके सिर मे चढती है इसलिए वो बर्तन मुझे ही …इतना सब होने पर भी अक्सर समय बेसमय उसे उपहार देन पडता है.. जी क्या किसलिए ??? अरे भई ताकि वो महारानी जी टिकी रहे.

क्या करे… आजकल काम वाली बाईया मिलती ही कहां हैं!!! कम से कम फेसबुकस्टेटेस मे तो है बताने को कि मेरे पास काम वाली बाई है. स्टेटेस से याद आया फेसबुक करना मैने ही उसे सीखाया और मैं ही उसकी फैंड लिस्ट में नही हूं जब पूछा तो बोली कि आप तो सारा दिन फेसबुक पर ही लगी रहहती हो मोबाईल सारा दिन टिंग टिंग बजता ही रहता है खामखाह सिर दर्द हो जाता है इसलिए आपको फ्रैंड नही बनाया !!

आज सुबह सुबह आई और ये बोल कर गई है कि 500 रुपए बढाओ उसका खर्चा नही चल रहा है. बस जरा  बस यही सुनने के बाद सिर जरा सा दर्द कर रहा है. वैसे आपसे क्या छिपाना !! असल मे, आजकल सिर दर्द बहुत रहने लगा है और बी पी भी ज्यादा हो गया है.. वो क्या है ना काम वाली बाई को कुछ कह नही सकते कुछ कहो तो तैयार रहो सुनने के लिए कि जा रही हूं छोड कर और अगर घर पर बताती हू कि काम वाली बाई कितना तंग करती है तो वो तुरंत कह देते है कि हटा तो उसे. इतना परेशान किसलिए होना है. वो क्या है ना हटाने के बाद मुझे ही पता है कि मेरे स्टेटेस, घूमने फिरने और किटी पार्टी पर रोक ही लग जाएगी इसलिए बस चला रही हूं जैसा चल रहा है और मुझे खुशी है कि काम वाली बाई है मेरे पास !! हाय !!

व्यंग्य - मोनिका गुप्ता

व्यंग्य – मोनिका गुप्ता

कैसा लगा आपको ???

जरुर बताईएगा !!!

लघु कथा – पसंद ना पसंद (Audio)  भी जरुर सुनिए 🙂

 

 

May 12, 2016 By Monica Gupta Leave a Comment

परीक्षा परिणाम और गरीबी

Cartoon

परीक्षा परिणाम और गरीबी

आईए दोषारोपण करें …

आजकल  जब नतीजा आता है तो पता चलता है कि  बेहद गरीब बच्चो ने बहुत तकलीफों के चलते  बाजी मारी और अव्वल रहे  सारा मीडिया और कैमरा उस और दौड पडता है बहुत अच्छी बात है पर कुछ वो बच्चे इसे पचा नही पा रहे जिन्हें सारी सुख सुविधाए मिलती हैं टयूशन का खर्चा पेरेंट्स उठाते है और कोचिंग सैंटर मे पढने भेजते हैं पर बजाय मन लगा कर पढने के बच्चे  इसका दोष अपनी अमीरी को ही दे रहे हैं …

Surya Kant Dwivedi works untiringly at the University of Lucknow as a security guard. Making ends meet for his family of five is a struggle on his meagre income. When his youngest son expressed interest in attempting the UPSC exams – not once, but thrice – Surya agreed, despite the fact that his son’s pursuit would mean one less earning member in the family. read more at thebetterindia.com

 

3 Achievers Rise Above Their Circumstances to Crack UPSC

The announcement of the UPSC results this week brought great cheer to more than a 1,000 candidates and their families across the country. The moment of celebration was sweeter still in the Dwivedi household in Lucknow.

Surya Kant Dwivedi works untiringly at the University of Lucknow as a security guard. Making ends meet for his family of five is a struggle on his meagre income. When his youngest son expressed interest in attempting the UPSC exams – not once, but thrice – Surya agreed, despite the fact that his son’s pursuit would mean one less earning member in the family. read more at thebetterindia.com

 

http://www.thebetterindia.com/55096/upsc-aspirants-inspirational-stories/

कुल मिलाकर निष्कर्ष यही निकलता है कि पढाई  अमीरी गरीबी नही देखती वो देखती है सच्ची मेहनत, ईमानदारी  और लग्न अगर हम सच्चे मन से कर रहे हैं तो हमे अच्छे नम्बर लाने से कोई नही रोक सकता …बाकि दोष देना छोडिए और मेहनत कीजिए..

 

परीक्षा परिणाम और गरीबी

 

May 2, 2016 By Monica Gupta Leave a Comment

लघु कथा – ऑडियो – रफ्तार – मोनिका गुप्ता

मोनिका गुप्ताhttps://monicagupta.info/wp-content/uploads/2016/05/story-speed-by-monica-gupta.wav

Click here to listen Short Story

लघु कथा – ऑडियो – रफ्तार – मोनिका गुप्ता

नमस्कार

आप हमेशा कहानियां पढते हैं चलिए आज आपको कहानी सुनाते हैं. कहानी का शीर्षक है ” रफ्तार” कहानी की अवधि 1 मिनट 46 सैंकिंड है.

कहानी -थकावट ( मोनिका गुप्ता)

कहानी -थकावट

इस कहानी का पात्र दिनेश गलत कामों में लिप्त है और  पकडे जाने के डर से अपनी पत्नी और बच्चों के साथ गांव में साधारण जीवन जीने की इच्छा करता है पर अन्त में क्या होता है क्या वो बच जाता है या पुलिस के सामने डर कर घुटने टेक देता है … यही सब जानने के लिए सुनिए कहानी ” रफ्तार” और बताईए कि कहानी कैसी लगी ??

कहानी महिला दिवस भी जरुर सुनिएगा

लघु कथा – ऑडियो – रफ्तार – मोनिका गुप्ता

May 2, 2016 By Monica Gupta Leave a Comment

अजब गजब नाम और मेरे मन की बात

नाम बदलना कितना सार्थक - जब गुडगांव बना गुरुग्राम

अजब गजब नाम और मेरे मन की बात

अगर मैं क्रांति, आंदोलन, संघर्ष, भूख हडताल ,नेता की बात करुं तो आपको लगेगा कि मैं आज राजनीति की बात कर रही हूं पर नही ये एक परिवार में बच्चों के नाम हैं .. जी हां, मध्यप्रदेश के रहने वाले समाज सेवी मुन्नालाल ने अपने बच्चों के नाम बहुत खुशी खुशी रखे हैं… है ना हैरानी की बात … !!

वैसे कुछ शहर तो कुछ गांव के नाम भी अजीबो गरीब होते हैं मुझे याद है न्यूज के सिलसिले में जब अक्सर सिरसा के गांव जाना पडता था कुछ गांव के नाम ऐसे है कि बोलने मे झिझक सी महसूस होती जैसे कुताबढ, कुतियाना विचार आता था कि नाम परिवर्तन की इन गांवों को जरुरत है ना कि गुडगांव का गुरुग्राम होना …वैसे कुछ गावों के नाम प्यारे भी बहुत हैं जैसाकि दादू , मिठरी , हस्सू, कालूआना..वैसे कालूआना प्यारा नाम नही है …  😆

दैनिक भास्कर

दैनिक भास्कर

कुछ लोग चुनाव चिन्ह भी अजीबो गरीब रखते हैं तो कुछ एक दूसरे की वोट काटने के लिए एक जैसे नाम रख लेते हैं..

मैं पढ ही रही थी कि तभी मणि का फोन आया कि वो मेरे घर नही आ रही क्योकि उसकी कामवाली बाई शिमला गई है.. अरे वाह मैने कहा वाह शिमला.. क्या बात है !! इस पर वो बोली अरे वो वाला शिमला नही यही पास में एक गांव है शिमला वहां गई है… !!

अचानक मेरी नजर  उसी अखबार में छ्पी एक दूसरी खबर पर गई.. गुजरात के कुछ गांवो के नाम भूतडी, चुडैल… कैसे लेते होंगें ये लोग अपने गावों का नाम !!

गूगल सर्च और अजब वेबसाईट      भी जरुर पढिए

 

BBC

भारत में शहरों के नामों को बदलने का काम 20 साल पहले तब शुरू हुआ था जब भाजपा और शिवसेना की सरकार ने 1996 में बंबई का नाम बदलकर मुंबई रखा.

लेकिन यह गुरूग्राम से अलग मामला था, क्योंकि ज़्यादातर लोग बंबई, मुंबई या फिर बुंबई नाम का इस्तेमाल करते थे और उससे परिचित भी थे. लेकिन तब भी विरोध करने वालों का तर्क यही था कि बंबई एक ब्रांड था और उससे ब्रांड का नुक़सान होगा.

पीछे मुड़कर देखने पर और 20 साल के लंबे अंतराल पर नज़र डालने से ये नहीं लगता है कि नाम बदलने से ब्रांड का कोई नुक़सान हुआ है.

मुंबई की समस्या आधारभूत ढांचों की है. यह बाहरी लोगों को रोज़गार तो मुहैया कराता है लेकिन उनके रहने के लिए मुंबई के पास बस ख़स्ताहाल सुविधाएं ही बची हैं. read more at bbc.com

 

 

हे भगवान !! हे ईश्वर!! हे प्रभु !!

 

April 29, 2016 By Monica Gupta Leave a Comment

ऑडियो – लघु कहानी- थकावट- मोनिका गुप्ता

कहानी -थकावट ( मोनिका गुप्ता)https://monicagupta.info/wp-content/uploads/2016/04/story-thakavat-by-monica-gupta.wav

 

ऑडियो – लघु कहानी- थकावट- मोनिका गुप्ता – Audio of a short story by Monica Gupta .कहानी -थकावट -परिवार और नारी की दशा को दिखाती मेरी लिखी लघु कथा थकावट जरुर सुनिए

थकावट

ऑडियो – लघु कहानी- थकावट- मोनिका गुप्ता –

परिवार और नारी की दशा को दिखाती मेरी लिखी लघु कथा थकावट जरुर सुनिए… और अगर पढना चहएं तो आप पढ भी सकते हैं और अपनी राय दे सकते हैं कि यही सच्चाई है या नही

ऑडियो - लघु कहानी- थकावट- मोनिका गुप्ता

ऑडियो – लघु कहानी- थकावट- मोनिका गुप्ता

थकावट

अनुज का परिवार देर रात जयपुर लौटा। बहुत रात होने की वजह से सारे होटल और ढाबे बंद हो चुके थे। उधर, सभी का भूख के मारे बुरा हाल था। अनुज की पत्नी संध्या ने हिम्मत दिखाई और हाथ-मुँह धोकर रसोई में घुस गई। फटाफट आधा गूँथा और दूसरी तरफ पापड़ की सब्जी छौंक दी। फटाफट प्लेटें लगाईं और खाने के लिए सभी को आवाज दी।

अनुज सहित तीनों बच्चे मनु, दिप्पी और संजू फटाफट खाने में जुट गए। बच्चे परांठे के साथ पापड़ की सब्जी की तारीफ करने लगे कि आज तक ऐसी सब्जी नहीं खाई … बहुत स्वादिष्ट बनी है। अनुज ने भी कटोरी में सब्जी डालते हुए कहा कि सच मेंए ऐसा स्वाद तो पहले कभी नहीं आया ।
खाने में तारीफ पाकर संध्या खुश हो गई और थकावट भूलकर करारे-करारे परांठे जोश के साथ बनाने लगी। धीरे-धीरे सभी का पेट भरने लगा। तभी संजू ने कहा कि ऐसा लग रहा है मिर्च तेज है, दिप्पी बोला कि शुरू वाले परांठे ज्यादा करारे बन रहे थे,

अब मजा नहीं आ रहा। अनुज भी कहाँ पीछे रहने वाले थे! वो बोले कि पापड़ की करी ज्यादा पतली हो गई है और मसाला भी थोड़ा तेज ही लग रहा है… ।

उलाहना सुनकर संध्या को भी अपनी थकावट याद आ गई थी। वो जान चुकी थी कि अब सभी का पेट भर चुका है इसलिए कमियाँ निकाली जा रही हैं। सभी खाना खाकर उठ चुके थे। संध्या ने खाने की प्लेटें समेटी और थोड़ा-ेसा खाना खाकर सोने की तैयारी करने लगी। सच, आज वो बहुत थक गई थी।

और बताईए कि थकावट कहानी कैसी लगी ??

एक शख्सियत – तनवीर जैदी (फिल्मी कलाकार) – Monica Gupta

तनवीर ज़ैदी – बहुमुखी प्रतिभा सम्पन्न एक शख्सियत – तनवीर जैदी (फिल्मी कलाकार) फिल्म इंडस्ट्री का जाना माना नाम तनवीर जैदी आज किसी परिचय के मोहताज नही. अपने नाम के अनुरुप जोश और उत्साह से भरपूर तनवीर एक आशा की किरण हैं. अपनी फिल्म “इश्क समुंदर “की प्रोमोशन के दौरान तनवीर ज़ैदी से ढेर सारी बातें हुई. तनवीर ना सिर्फ एक थियेटर आर्टिस्ट हैं बल्कि एक लेखक, एक सम्पादक, read more at monicagupta.info

 

 

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