Monica Gupta

Writer, Author, Cartoonist, Social Worker, Blogger and a renowned YouTuber

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You are here: Home / Archives for मोनिका गुप्ता

June 25, 2015 By Monica Gupta

हजम नही हुई

हजम नही हुई

दिल्ली का बजट पेश किया जा रहा था और मैं और मेरी सहेली  मणि बाते करते करते मिलावट तक जा पहुंचे मुझे हैरानी हुई कि वो मिलावट के बारे मे ज्यादा नही बोल रही. कारण पूछ्ने पर उसने बताया कि कुछ खास नही बस बचपन में वो पैंसिल का सिक्का बहुत खाती थी. अरे !! मैने कहा कि मुल्तानी मिट्टी और स्लेटी तक तो ठीक है पर मैने पैंसिल का सिक्का तो मैने भी कभी नही खाया.

उसने बताया कि  जब उसका बेटा  छोटा था और वाकर में बाहर खडा हो जाता था तो कई बार लगता था कि चुपचाप क्या कर रहा है आवाज भी नही आ रही  तब देखती  कि वो बडे मजे से गमले के पास खडा होकर कभी मिट्टी खाता तो कभी  दीवार से खुरच खुरच कर दीवार की पापडी बहुत शौक से खाता था.

बाद में पता चला कि ये कैल्शियम की कमी से होता है.

पिछ्ले दिनों मैगी के साथ साथ जब दूध मे भी मिलावट का सुना तो वो खुद खालिस दूध लेने  दूधिए के पास जाने लगी पर दूध इतना खालिस था कि पचा ही नही. पेट दर्द रहने लगा इसलिए  उसमे पानी मिलाकर पीना पडा.

ह हा हा !!मैने कहा कि असल में, हमारा शरीर मिलावट का इतना आदी हो चला है कि खालिस चीज हजम ही नही होती… मुझे मार्किट जाना था तो मैने उससे जाते हुए पूछा कि तेरे लिए पैंसिल लाऊ स्लेटी लाऊ या मुल्तानी मिट्टी  क्या खाएगी !!!

 

two ladies talking photo

Photo by Internet Archive Book Images

| Harit Khabar

किसी भी प्रकार की खाद्य सामग्री में मिलावट का शक होने पर प्रारंभिक जांच एफडीए (Food and Drug Administration) के अधिकारी करते हैं। ये अधिकारी दुकान या उस जगह पर जहाँ कथित मिलावटी खाद्य पदार्थ बन रहा है, से नमूने इकठ्ठा कर आगे की जाँच के लिए प्रयोगशाला में भेजते हैं। पर एफडीए के अधिकारियों का कहना है कि वह हर जगह जा-जा कर ऐसा कर नहीं सकते क्योंकि एक तो केवल शक के आधार पर वे कितनी जगहों से नमूने इकठ्ठा करें? दूसरा, एफडीए के पास साधनों की कमी है और तीसरी सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि विभाग के पास अधिकारियों की भी इतनी अधिक संख्या नहीं है कि आसानी से हर संदिग्ध जगह से नमूने लिए जा सके।

June 25, 2015 By Monica Gupta

सबसे प्यारा तोहफा

(बाल कहानी)   सबसे प्यारा तोहफा

 

mother and daughter photo

Photo by simpleinsomnia

मैं हूं मणि। अभी कल ही दस साल की पूरी हुर्इ हूं। यानि मेरा कल हैप्पी बर्थ डे था। सप्ताह भर पहले से ही मेरी योजनाएं बन रही थी कि मैं जन्मदिन वाले दिन क्या पहनूंगी, क्या-क्या बनवाऊंगी मम्मी से…… मम्मी का नाम लेते ही मेरा मन फिर उदास हो गया था। आप जानना चाहेंगे कि क्यों मेरा मन उदास हो गया! चलो, कोर्इ और बात करने से पहले मैं इसी बारे में आपसे बात करती हूं।

असल में, पता है क्या बात है! मैं, मम्मी को बहुत प्यार करती हूं , उनका कहना मानती हूं, जो घर में कभी मेहमान आए तो मम्मी की मदद करती हूं , लेकिन पता नही हमेशा मम्मी की ड़ांट ही खानी पड़ती है। ना जाने मम्मी मुझ से क्यों नाराज-नाराज उदास सी रहती हैं। मेरी हर बात में कमी निकालती हैं। कभी भी मेरी तारीफ नहीं करती। पापा की बात ही क्या, वो तो महीने में 20 दिन टूर पर रहते हैं, जब आते हैं तो उनका सोशल सर्किल ही इतना बड़ा है कि उसमें व्यस्त रहते हैं।

अभी मेरे जन्मदिन के आने से पहले मैंने मम्मी को अपनी सहेलियों की लिस्ट थमा दी तो मम्मी ने कोर्इ खुशी नहीं दिखार्इ। मैं कुछ नहीं बोली। जन्मदिन को आने में चार दिन बाकी थे।
मैंने मम्मी को कहा कि अपनी सहेलियों को बुलाने का क्या समय दूं ? मम्मी ने कहा कि अभी कल बात करेंगे, आज शाम तेरी नानीजी आ रही हैं।

मैं हैरान……! नानीजी की सूरत मैंने एलबम में ही देखी है। जब मैं दस दिन की थी तब मुझे गोद में लिए…. मुझे नहलाते हुए….. मेरी मालिश करने की ढ़ेरों तस्वीरें हैं…… मैं बहुत खुश होती थी देख कर…… और आज….. इतने सालों बाद वो आ रही हैं….. वो भी मेरे जन्मदिन पर……मैं तो खुशी के मारे दोहरी हुर्इ जा रही थी।

शाम हुर्इ……… नानीजी आ गर्इं। हाथों, गालों पर बेशुमार झुर्रियां……. शायद उम्र का ही तकाजा था। मैं नानीजी से लिपट गर्इ। उन्होंने मुझे प्यारा सा गुड्डा और सौ रूपये उपहार स्वरूप दिए। मम्मी काम में लगी रहीं। मैंने एक बात पर ध्यान देना शुरू किया कि मेरी नानीजी मम्मी को बात-बात पर टोक रहीं थी।

दोपहर के खाने में भी उन्होंने ढ़ेरों नुक्स निकाल दिए। चादर ठीक से ना धुलने पर लम्बा सा लेक्चर दे डाला। मम्मी चुपचाप अपने काम में लगी रहीं। मुझे कुछ अच्छा महसूस नहीं हो रहा था। मन बहुत बेचैन था कि नानी आखिर मम्मी से ऐसा बर्ताव क्यों कर रही है? मेरे बाल-सुलभ मन में एक बात यह आ रही थी कि मम्मी की मम्मी यानि मेरी नानी अपनी बेटी के साथ ऐसा व्यवहार करती हैं, तो कभी ऐसा तो नहीं है कि इसलिए मेरी मेरी मम्मी भी मेरे साथ यही व्यवहार करती हों। पर मैंने मन में सोचा कि मैं तो मम्मी के साथ इतनी अच्छी तरह पेश आती हूं, तो यह वजह तो हो ही नहीं सकती। समय ऐसे ही बीतता रहा। मैं अपने काम में व्यसत रही पर सब कुछ देखती समझती रही।

जन्मदिन से एक दिन पहले मम्मी कपड़े प्रेस करते वक्त बुदबुदा रही थी कि मम्मी हमेशा से ही ड़ांटती आर्इ हैं। अगर मैं लड़का नहीं तो इसमें मेरा क्या दोष……..। यह कह कर मम्मी आंसू पोंछने लगी……
मैं मम्मी के पीछे ही खड़ी थी पर मम्मी को पता ना था। नानीजी बाजार शापिंग के लिए गर्इ हुर्इ थी। मैंने प्रेस का स्विच बंद किया और मम्मी का हाथ खींच कर अपने कमरे में ले गर्इ। मम्मी ने मुझे उस समय कुछ नहीं कहा। मैंने मम्मी के माथे पर प्यार किया। उस समय मेरी आवाज भी थोड़ी भर्रा गर्इ थी। मम्मी, क्या हुआ! मैंने बहुत प्यार से पूछा। मम्मी ने किसी छोटे से आज्ञाकारी बच्चे के समान ना की मुद्रा में गर्दन हिला दी। मैंने पूछा, आप भी मुझे इसलिए प्यार नहीं करती ना, क्योंकि मैं लड़की हूं। मम्मी ने यह सुनते ही मेरे मुंह पर हाथ रख दिया और आंखों से आंसुओं की बरसात होने लगी। मम्मी बोली, बचपन से ही मैं यही सुनती आर्इ हूं। मेरी मां हमे मुझे ही कोसती थी। फिर जब तू हुर्इ तो मुझे और अपमान झेलना पड़ा। मैंने कहा, मां, क्या मैंने आपकी कभी ऐसा महसूस होने दिया कि मैं लड़की हूं। साइकिल चला कर बाजार के सारे काम करके लाती हूं। रेडि़यो ठीक कर देती हूं। गैराज से गाड़ी तक भी बाहर खड़ी कर देती हूं। फिर आप ऐसा क्यों सोचती हैं? नानी की बात ठीक थी। उस समय जमाना और था। अब जमाना बदल गया है। आज के समय में लड़कियां बहुत कम अनुपात में रह गर्इ हैं। बलिक आज के समय में तो लड़की होने पर आपको गर्व होना चाहिए। मम्मी चुपचाप सब बातें सुन रही थी।
मम्मी, मैं आपको और पापा को बहुत प्यार करती हूं और मैं चाहती हूं कि आप भी मुझे उतना ही प्यार दें।

मम्मी ने मुझे गले से लगा लिया और बोली, कर्इ बार मैं भी यही सोचती थी कि मैं तुम्हें खूब प्यार करूं, पर फिर सोचती थी कि जब मुझे अपनी मम्मी से प्यार नहीं मिला तो मैं तुम्हें प्यार क्यों दूं। तुम्हें मैं वही देने लगी जो मुझे अपने घर से मिला। लेकिन मैं वाकर्इ में गलत थी। मेरी प्यारी बच्ची…..मुझे माफ कर दे……! इतने में नानीजी की आवाज आर्इ ओ……..मणि की मां…… दरवाजा तो खोल………मेरे दोनों हाथ भरें हैं…..! मम्मी और मैं दोनों मुस्कुरा दिए।

मम्मी मुझे भली प्रकार समझ चुकी थी। और मेरा जन्मदिन खूब धूमधाम से मनाया गया। नानीजी की अब मुझे परवाह नहीं थी। लेकिन उन्हें आदर-मान देने में मैंने कोर्इ कसर नहीं छोड़ी। नानीजी की आंखें भी खुली की खुली रह गर्इं, जब मेरी एक सहेली विडियो से हमारी पिक्चर बना रही थी और दूसरी फटाफट स्कूटी पर जाकर कोल्ड ड्रिंक्स ला रही थी।

मैं बहुत ही खुश थी। मुझे मम्मी का प्यार मिल गया था, जो कि मेरा सबसे बड़ा तोहफा था। जन्मदिन से अगले दिन पापा का टूर भी खत्म हो गया था। पापा दो दिन घर पर ही रहने वाले थे। पापा मेरे लिए बहुत ही सुंदर डाल लाए थे। जहां इतनी बड़ी, प्यारी गुडि़या देखकर मम्मी और मैं हैरान हो गए, वहीं नानीजी का मुंह बन गया कि गुड्डा ना ला सकता था क्या, जो गुडि़या ले आया।
लेकिन पापा हंसते हुए बोले कि इस घर में गुडि़या के लिए भी तो एक गुडि़या चाहिए। यह बात सुनते ही मम्मी तो शरमा गर्इ। पर मैं समझ गर्इ और अपनी सहेलियों को गुडि़या दिखाने भाग गर्इ।

तो कैसी लगी आपको सबसे प्यारा तोहफा कहानी … आप जरुर बताना 🙂

June 25, 2015 By Monica Gupta

Acting

children playing  photo

Photo by Christina Spicuzza

(बाल कहानी) Acting

टोटके हिचकी के

मैं हूँ मणि। वैसे तो मैं आठवीं कक्षा में पढ़ती हूँ। पर सब मुझे दादी अम्मा कहतें हैं। मैं सभी की मुसीबतें पल भर में भगादेती हूं या  फिर किसी ने शरारत से किसी के कपड़ों पर स्याही छिड़क दी या सार्इकिल स्टैंड़ से किसी ने सार्इकिल की हवा निकाल दी कर उसे गिरा दिया हो तो सभी सिर्फ मेरे पास भागे चले आते और मैं अपने काम में जुट जाती। वैसे यह सब मैंने अपनी मम्मी और दादी मां से सीखा है। हम संयुक्त परिवार में रहते हैं न इसलिए मैं सभी बातों का ध्यान रखती हूँ। मेरी दादी तो सुबह.शाम लोगों की परेशानिया ही दूर करती रहती है। घर में तो मेरा रोब नहीं चलता पर स्कूल में बड़ी स्मार्ट बनती हूँ। किसी की दोस्ती करवानी हो या फिर पक्की कुÍा, मैं सभी कामों में एकदम एक्सपर्ट हूँ।

एक बार की बात है। मैं, मीशू और नोनू खेल रहे थे। सन्नी तो खेल कर चला गया था। सामी अभी तक आया नहीं था। आकाश में बादल से आ गए इसलिए मैंने सोचा कि जल्दी घर चलतें हैं, हम पार्क से निकल ही रहे थे कि सामी आ गया। वो हमारा पड़ोसी है, पढ़ता तो मेरी कक्षा में है पर स्कूल दूसरा है। उस समय उसे हिचकी आ रही थी। वो खेलना चाह रहा था लेकिन मैंने मना कर दिया। उसने मुझसे कहा कि तुम तो ऐसे भाग रही हो जैसे काला कुत्ता देख लिया हो।

मैंने उससे कहा कि काला कुत्ता तो नहीं पर एक काली गाड़ी जरूर देखी है। सामी बोला. काली (हिचकी) कार। मैंने पूछा पहले तू बता कि हिचकी कैसे आ रही है। वो बोला घर के (हिचकी) बाहर चने वाला (हिचकी) खड़ा था उसमें (हिचकी) मसाला बहुत तेज था बस…. हिचकी (हिचकी) लग गर्इ (हिचकी) अब बताओ…….. (हिचकी) मैंने बोला हम अभी जब खेल रहे थे तो हमने देखा कि एक बहुत सुंदर लड़की रोती हुर्इ गाड़ी में बैठी है। मुझे लगा कि शायद वो तुम्हारी कक्षा की दीपा है। सामी बोला.दीपा…. (हिचकी) कटे हुए थे। मैंने कहा हां-हां। वो बोला कि दो काले कपड़़े पहने अंकल उसे गाड़ी में बैठा रहे थे, शायद उठा कर न ले जा रहे हों। सामी का मुंह खुला ही रह गया (हिचकी) तुम्हारा मतलब……………. किड़नैप। मैंने भी गर्दन हिला दी। वो उतावला हो उठा। बोला (हिचकी) चलो जल्दी चलते हैं (हिचकी) कहीं पुलिस की पहुंच से दूर हो गये तो…… मैंने भी जल्द बाजी दिखार्इ और पार्क के बाहर सामी के साथ मीशू और नोनू भी लपक लिए।

सामी ने मुझसे पूछा, तुम्हें पुलिस स्टेशन का पता है ? मैंने कहा हां.हां। चलो जल्दी चलें। सामी नाराज हो गया बोला दीपा किड़नैप हो गर्इ है और तू हँस रही है। मैंने हँसते हुए कहा बुद्धु। कोर्इ किड़नैप विड़नैप नहीं हुआ है बस……………. तेरी हिचकी रोकने का नाटक था। सामी हैरानी से खड़ा का खड़ा रह गया। मैंने कहा ये था…………… शाक टि्रटमेंट। जब हिचकी रोकनी हो तो ध्यान दूसरी ओर लगा देते हैं जिससे हिचकी रूक जाती है। अब माहौल थोड़ा हल्का हो गया था।

हम सब मिलकर हँसने लगे और सड़क पार करने लगे। सामी ने बताया कि यही चने वाला है पर इसके चने है बहुत स्वादिष्ट। हम चारों ने मिलकर चने खाए। सामी अभी तक हैरान था कि मैं कितनी बातूनी हूँ और  Acting भी अच्छी कर लेती हूँ। तभी मुझे उसमें मसाला इतनी तेज लगा कि मुझे ही हिचकी लग गर्इ। सामी, मीशू, नोनू हंसने लगे कि अब Acting बंद करो। लेकिन मैंने कहा कि मुझे (हिचकी) सचमुच हिचकी लग गर्इ (हिचकी) हैं। तभी सामी बोला कि मेरे पीछे काला कुत्ता खड़ा है। उसे पता था कि मैं काले कुत्ते से बहुत ड़रती हूँ पर मैंने कहा मुझे (हिचकी) मेरी (हिचकी) तू मजाक कर (हिचकी) रहा है ताकि मेरी हिचकी रूक जाए। हंसते-हंसते मैंने पीछे मुड़कर देखा तो मेरी सांस ऊपर की ऊपर अटकी रह गर्इ। यह सचमुच का शाक (झटका) था।

मेरी हिचकी का तो पता नहीं पर जो मैं वहां से दौड़ी मैंने सांस घर आकर ही लिया। मीशू, नोनू और सामी दूर खड़े मुझे देखकर हाथ हिला रहे थे और मैं दिल की धड़कनों को काबू में रखकर उन्हें बाय कर रही थी। वैसे एक बात बता दूं मेरी दादी और मम्मी कुत्तों से बिल्कुल नहीं डरती पर पता नहीं इन कुत्तों को देखकर मेरी घिग्घी क्याें बंध जाती है। अंदर पहुंची तो दादी किसी से बतिया रही थी। मैं भी दादी के साथ बैठकर उनकी बातों में हामी भरने लगी और यह सोचने लगी कि क्या बहाना लगाऊंगी कि मैं क्यों भागी ताकि मेरे दोस्तों के बीच कल मेरा मजाक ही न बन पाए।

तो नन्हें  दोस्तो.  कैसी लगी आपको  Acting   कहानी जरुर बताना 🙂

June 25, 2015 By Monica Gupta

काम ही काम

(बाल कहानी ) काम ही काम

मैं हूं गोलू। पता है अभी-अभी पांचवीं कक्षा में आया हूं। बाप रे….बहुत पढ़ार्इ है। स्कूल से वापिस आने के बाद बस…….पढ़ते रहो…….पढ़ते रहो……!! एक दिन बरसात बहुत तेज हो रही थी इसलिए मैं उस दिन स्कूल नहीं गया। उसी दिन हमारी टीचर ने गणित के दो पाठ पढ़ा दिए। अगले दिन स्कूल जाने पर पता चला तो बहुत दु:ख हुआ क्योंकि टीचर से पढ़े बिना गणित के पाठ को समझना बहुत कठिन था। मैं परेशान इसलिए हो गया था कि टीचर ने अगले दिन उसका टेस्ट लेना था। उधर पापा-मम्मी के साथ मुझे किसी अंकल की शादी में भी शामिल होना था। पर पढ़ार्इ की वजह से मैंने शादी में जाने सेे मना कर दिया क्योंकि मैंने मन ही मन ठान रखी थी कि वो सवाल तो मैं हल करके ही रहूंगा। मम्मी ने मुझे लालच दिया कि वहां फलूदा आर्इसक्रीम होगी, गोलगप्पे होंगे, पाव-भाजी होगी, पर मेरे मन में तो गणित के सवाल घूम रहे थे सो मैंने शादी में जाने से मना कर दिया।

मम्मी पहले तो मुझे साथ में जाने के लिए मनाती रही पर मेरे बार-बार मना करने पर तो गुस्सा ही हो गर्इ और गुस्से में बोली, ठीक है……..नहीं जाना तो मत जाओ। मम्मी दूसरे कमरे में तैयार होने लगी। पापा ने भी तैयार होना शुरू कर दिया। मैं सवाल हल करने में जुट गया। तभी मम्मी की आवाज आर्इ। वह बोल रही थी कि बार्इ आने वाली होगी। उसे कहना कि मेज के नीचे से अच्छी तरह झाडू लगाए। आजकल काम बहुत गंदा करने लगी है और ना ही उसका कोर्इ समय है आने का…..जब मन आता है चली आती है।  ठीक है, मैंने कहा और फिर दुबारा सवाल हल करने लगा।

 

 

 boy studing  photo

Photo by woodleywonderworks

तभी फिर आवाज आर्इ कि शायद गैस वाला भी आ जाए। गैस चैक करके ही रखवाना। आजकल ये लोग गड़बड़ी बहुत करने लगे हैं। मैंने फिर आवाज देकर कहा, ठीक है, देख लूंगा। और फिर सिर खुजलाने लगा क्योंकि मैं सवाल हल नहीं कर पा रहा था।

इतने में मम्मी तैयार होकर आर्इ और कहने लगी कि तौलिया धूप में डाला है। अगर बरसात हो जाए तो अंदर ले आना। और हां, नीतू की मम्मी का फोन आएगा रेखा आंटी का नम्बर लेने के लिए। डायरी में आर के आगे उनका टेलिफोन नंबर लिखा है, बता देना।
पापा बाहर जाकर गाड़ी स्टार्ट करने लगे और मम्मी जाते-जाते मुझे हिदायत देने लगी कि टेलिविज़न बिल्कुल मत देखना। पढ़ार्इ के लिए घर रूके हो तो पढ़ार्इ ही करना, फिर थोड़ा-सा रूककर मम्मी बोली- Þशाम को पांच बजे कर्इ बार पानी इतना तेज आता है कि छत वाली टंकी से पानी गिरने लगता है। मोटर के पास वाल्व को उलटा घुमा देना, पानी गिरना बंद हो जाएगा। खाना और नमकीन रसोर्इ में रखा है, मन करे तो खा लेना।
मेरा सिर वैसे ही इतने काम सुनकर चकरा रहा था। मैंने मम्मी को आवाज देकर पूछा कि क्या वो पांच मिनट रूक सकती हैं क्योंकि अब मैंने भी उनके साथ शादी की पार्टी में जाने का मन बना लिया है। मम्मी बड़बड़ाती हुर्इ पापा को बताने चली गर्इ कि मैं भी साथ चल रहा हूं। मम्मी तैयार होने में मेरी मदद कर रही थी और गुस्से में बोल रही थी- जल्दी-जल्दी तैयार हो जाओ।

पर मैं मुस्कुरा रहा था क्योंकि बात सिर्फ दो-तीन घंटों की ही है। घर पर इतने कामों में तो मेरी पढ़ार्इ होने से रही। दो घंटों बाद वापिस आ ही जाएंगे तो आराम से कमरा बंद करके पढ़ार्इ कर लूंगा।

पापा ने गाड़ी स्टार्ट कर दी थी और मैं भाग कर मम्मी के साथ गाड़ी में बैठ गया।

कैसी लगी आपको मेरी कहानी जरुर बताईएगा 🙂

June 25, 2015 By Monica Gupta

मैं हूं मणि

(बाल कहानी)   मैं हूं मणि

ऐसी ही हूँ मैं…

सुबह का समय……! मैं यानि मणि, स्कूल जाने के लिए तैयार हो रही हूँ पर मैंने जुराबें कहां रख दी मिल ही नही रही। बेल्ट भी देखने के लिए पूरी अलमारी छान मारी पर जब मम्मी मेरा स्कूल बैग ठीक करने लगी तब देखा उसी बैग में बेल्ट पड़ी थी। एक जुराब ना मिलने से अलमारी से दूसरा जोड़ा निकाल कर दिया। मेरा कमरा ऐसा हो रहा था मानो अभी-अभी भूकम्प आया हो। वैसे यह आज की बात नहीं है। मैं ऐसी ही हूँ। कमरा साफ-सुथरा रखना मेरे बस की बात नहीं………… वैसे मैं अभी तीसरी कक्षा में ही तो हूँ।

फिर पढ़ार्इ के अलावा मुझे पता है कितने काम होतें हैं….. गिनवाऊँ……… ओ.के. गिनवाती हूँ। पापा के पैरों पर खड़े होकर उन्हें दबाना, मम्मी की टेढ़ी-मेढ़ी चोटी बनाना, मटर छीलते समय उन्हें खाना ज्यादा डि़ब्बे में ड़ालना कम…….और….और…. पापा के हाथों व पैरों की उंगलियां खींचना, दादाजी की पीठ पर कंधे से खुजली करना…….ऊपर से पढ़ार्इ….पढ़ार्इ और पढ़ार्इ……….. है ना कितना काम। ओफ………..बस का हार्न बजा………… लगता है मेरी स्कूल बस मुझे लेने आ गर्इ है……….।

दोपहर के दो बजे मैं स्कूल से लौटती हूँ। उस समय मुझे अपना कमरा चमकता-दमकता मिलता है। यही हर रोज होता है।

हर सुबह मेरी तलाश, खोजबीन जारी रहती है और मम्मी मेरी हमेशा सहायता करती है क्योंकि ऐसी ही हूँ मैं…..। एक दिन मम्मी को कहीं जाना था तो मम्मी ने मुझे सुबह ही घर की डुप्लीकेट चाबी थमा दी। चाबी अक्सर मैं गुम कर देती हूँ इसलिए मम्मी मेरे गले में पहने काले धागे में चाबी ड़ाल देती हैं इससे चाबी गुम नहीं होती। मैं स्कूल से लौटी तो घर पर ताला लगा था। मैंने घर खोला और अंदर से बंद कर लिया। मम्मी मुझे हिदायत देकर गर्इ थी क्योंकि हमारे शहर में चोरियां बहुत हो रही थी।

हमेशा की तरह मैंने साफ-सुथरे घर को गंदा कर दिया। स्कूल बैग जमीन पर पटका। बेल्ट कहीं, जुराबें कहीं और कौन सी ड्रेस पहनूं के चक्कर में सारी अलमारी अस्त-व्यस्त कर दी। ड्रेस मैंने निकाली पर अलमारी बंद नहीं की क्योंकि ऐसी ही हूँ मैं।

फि्रज में से कोल्ड़ डि्रंक निकाला और ठाठ से लेट कर टीवी देखने लगी। बार-बार चैनल बदले जा रही थी। क्योंकि मुझे समझ में नहीं आ रहा था कि क्या देखूं और क्या न देखूं। फिर मम्मी की ड्रेसिंग टेबल वाली दराज खोल कर बैठ गर्इ कि मम्मी की सारी चूडि़यां, बिन्दी ठीक कर के लगाती हूँ। इसी बीच घर की लाइट चली गर्इ। मैं बोर होने लगी। मम्मी अभी आर्इ नही थी। मैंने सोचा कि घर बंद करके अपनी सहेली सुधा के यहां चली जाती हूँ। फिर मैंने घर ढंग से बंद किया और सुधा के घर गुडि़या-गुडि़या खेलने चली गर्इ ।

शाम हो गर्इ थी। मम्मी को सुधा की मम्मी से कुछ काम था इसलिए वो बाजार से सीधा ही सुधा के घर आ गर्इ। मुझे वहां खेलते देख उन्होंने गुस्सा किया कि पढ़ार्इ कब करूंगी और पापा भी बेचारे दफ्तर से आ गए होंगे और बाहर ही खड़े गुस्सा हो रहे होंगे।

मैं खेल भूल कर तुरन्त मम्मी के साथ घर चल पड़ी। घर गर्इ तो बाहर पापा और उनके दोस्त परेशान से खड़े थे। पापा ने बताया कि वह पाँच मिनट से बाहर खड़े हैं। घर का ताला तो बंद है पर अंदर से हल्की-हल्की आवाजें आ रही है। पीछे की खिड़की भी खुली है। वैसे पड़ोस के जैन साहब ने बताया कि उन्हाेंने पुलिस को फोन भी कर दिया है। पापा गुस्से से मुझे ही घूरे जा रहे थे। सभी अंदाजा लगा रहे थे कि पता नहीं, भीतर कितने लोग हैं।

पुलिस भी आ गर्इ। मम्मी ने घर की चाबी पुलिस वालों को दे दी। दोनों पुलिस वालों ने दरवाज़ा धीरे से खोला और धीरे-धीरे कमरे में प्रवेश किया। भीतर वाले कमरे से हल्की-हल्की रोशनी व आवाजें भी आ रही थी। एक पुलिस वाले ने भीतर से बाहर आकर यह रिर्पाट दी।

मेरी मम्मी भी पूरी तरह से घबरा गर्इ। पता नहीं क्या हो रहा होगा। तभी दूसरे वाला पुलिस मैन बाहर अपनी बन्दूक लेने आया तो उसने बताया कि भीतर का कमरा बिल्कुल फैला हुआ है। ऐसा लग रहा है मानो पूरी खोजबीन की हो। पांव तक रखने की जगह नहीं है। मैं तो बिल्कुल ही रूआंसी हो गर्इ। पापा-मम्मी दोनों मुझे गुस्से से देख रहे थे। आसपास के पड़ोसी भी इकटठे हो गए। चारों तरफ फुसफुसाहट हो रही थी।
तभी भीतर गए पुलिस वाले ने मेरे पापा को आवाज देकर भीतर बुलवाया। पिताजी ड़रते-ड़रते अन्दर गए फिर उन्होंने मेरी मम्मी और मुझे आवाज दी। हम दोनों भी अंदर गए। अन्दर जाकर देखा तो भीतर कोर्इ नहीं था। सिर्फ पापा और दो पुलिस वाले थे और हां कमरे में टीवी जरूर चल रहा था।
मुझे याद आया कि टीवी तो मैं चलता ही भूल गर्इ थी। बिजली चले जाने के कारण मुझे टीवी को बंद करना ध्यान ही नही रहा।

पुलिस वाले अंकल पापा को कह रहे थे कि वह तो इतना बिखरा कमरा देख कर हैरान थे और सोच रहे थे कि इतना तो चोर ही चोरी करते वक्त कमरा फैला कर जाते हैं।

पापा-मम्मी मेरी तरफ घूर कर देख रहे थे। मुझे एक तरफ तो खुशी थी घर में चोर नहीं है लेकिन पुलिस वालों के आगे मुझे बहुत बेइज्जती महसूस हुर्इ क्योंकि वह सारा कमरा तो मैंने ही फैलाया था…….। पुलिस अंकल मुझ से पूछने लगे कि क्या मैंने ही यह कमरा फैलाया है।

 

cute little girl photo

मैं जोर से रो पड़ी और कहने लगी कि प्लीज़ अंकल आप मेरी शिकायत किसी से मत करना। सारी गलती मेरी थी। मैं ऐसी ही हूँ। स्कूल से आकर सारा कमरा फैला देती हूँ। फिर टीवी देखते-देखते लाइट चली गर्इ। मैंने खिड़की खोल दी पर…. घर पर बोर हो रही थी तो मैं बिना खिड़की, टीवी बंद किए ही सुधा के घर खेलने चली गर्इ। पर बाहर से ताला जरूर लगा गर्इ।

पुलिस वाले अंकल ने बताया कि फिर शाम हुर्इ, अंधेरा हुआ तो टीवी की हल्की-हल्की आवाज और कम ज्यादा होती रोशनी से ऐसे लगा कि घर पर कोर्इ है और खुली खिड़की देख कर तो मन का शक पक्का हो चला। मैं रो रही थी। पर मुझे सबक मिला चुका था। मैंने मम्मी-पापा और पुलिस अंकल से वायदा लिया कि मैं आगे से ऐसा नहीं करूंगी। कमरा ठीक रखूंगी। दो-तीन दिन बाद फिर वही रोज मर्रा की तरह कमरा फैलाना शुरू हो गया क्योंकि…….. ऐसी ही हूँ मैं…….. है ना!

 

कैसी लगी आपको ये कहानी जरुर बताईगा 🙂

मैं हूं मणि

June 25, 2015 By Monica Gupta

पतंग बनी तीर कमान

पतंग बनी तीर कमान

(बच्चों की कहानी)

पतंग का मौसम वैसे तो उड़न छू हो गया था पर नन्हे गोलू को पतंगों का इतना शौक था कि उसने पतंग सम्भाल कर रखी हुर्इ थी। वह सोच रहा था किसी दिन जब तेज हवा चलेगी तब वो पतंग उड़ाऐगा। एक दिन शाम को जब मौसम सुहावना हुआ। बादलों के साथ-साथ हवा भी खूब तेज चलने लगी तब गोलू अपनी पतंग लेकर छत पर जा पहुँचा। वहाँ अचानक ड़ोर उसके पाँव में उलझ गर्इ और पतंग दो जगह से फट गर्इ। गोलू उदास होकर बैठ गया कि अब क्या करे किससे खेलें।

वो चुपचाप बैठ कर पतंग को उल्ट-पुल्ट कर देखने लगा तभी उसके मन में एक विचार आया। उसने बड़ी सफार्इ से पतंग का कागज फाड़ ड़ाला। अब उसमें रह गर्इ दो सीखनुमा ड़ण्ड़ी । एक थोड़ी गोलार्इ में और एक सीधी। उसने गोलार्इ वाली ड़ण्ड़ी और लम्बी ड़ण्ड़ी को अलग करके गोलार्इ वाली ड़ण्ड़ी में एक दूसरे तरफ लम्बार्इ में धागा बाँध दिया और वो बन गया कमान के आकार का और जो दूसरी ड़ण्ड़ी थी वो अपने आप तीर बन गर्इ थी। गोलू अपनी इस उपलबिध पर बड़ा खुश हुआ कि पतंग से उसने तीर-कमान बना लिया और वो नीचे अपने मम्मी-पापा को बताने भागा। उन्होनें भी उसके विचार की बहुत तारीफ की और समझाया भी कि तीर कमान ध्यान से खेलना किसी को चोट ना पहुँचें। मम्मी की बात का समर्थन करता हुआ वो अपने दोस्त मोना और पिन्टू को दिखाने उनके घर भागा।

 

boy flying kite photo

Photo by G’s memories

 

पतंग बनी तीर कमान … कैसी लगी … जरुर बताईएगा 🙂

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GST बोले तो –  चाहे मीडिया हो या समाचार पत्र जीएसटी की खबरे ही खबरें सुनाई देती हैं पर हर कोई कंफ्यूज है कि आखिर होगा क्या  ?  क्या ये सही कदम है या  देशवासी दुखी ही रहें …  GST बोले तो Goods and Service Tax.  The full form of GST is Goods and Services Tax. […]

डर के आगे ही जीत है - डर दूर करने के तरीका ये भी

सोशल नेटवर्किंग साइट्स और ब्लॉग लेखन

सोशल नेटवर्किंग साइट्स और ब्लॉग लेखन – Social Networking Sites aur Blog Writing –  Blog kya hai .कहां लिखें और अपना लिखा publish कैसे करे ? आप जानना चाहते हैं कि लिखने का शौक है लिखतें हैं पर पता नही उसे कहां पब्लिश करें … तो जहां तक पब्लिश करने की बात है तो सोशल मीडिया जिंदाबाद […]

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