Monica Gupta

Writer, Author, Cartoonist, Social Worker, Blogger and a renowned YouTuber

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June 24, 2015 By Monica Gupta

अजय का सपना

 

kids story by monica gupta

अजय का सपना बिना मात्रा के मजेदार बाल कहानी है

जब कोई बच्चा नया नया पढना सीखता है तो उसे कहानियां पढने का बहुत शौक होता है पर ज्यादा मात्राओं की समझ  न होने के कारण वो पढ नही पाता  इसलिए मैने कुछ अलग अलग प्रयास किए ताकि वो बच्चे जिन्होने हाल ही मे पढना सीखा है और मात्राए लगाना नही जानते बस आ की मात्रा ही आती है ये कहानी उन बच्चों के लिए है देखिए कैसे फटाफट पढ लेंगें वो ये मजेदार बाल कहानी

अजय का सपना

(वह बच्चें जिन्होनें अभी सिर्फ आ की मात्रा लगाना सीखा है वे यह बाल कथा पढ़ सकते हैं क्योंकि इसमें सिर्फ आ की मात्रा का प्रयोग किया गया है।)

अजय चार साल का नटखट बालक था। अमन उसका बड़ा भार्इ था। अमन समझदार था। वह समय पर पाठशाला जाता। अमन पाठ याद करता पर अजय का जब मन करता तब जाता जब मन ना करता तब बहाना बना कर घर पर ठहर जाता। वह पापा का लाड़ला था। अमन सब समझता था। वह पाठशाला जाता-जाता यह गाना गाता जाता कल बनाना नया बहाना।

एक बार अचानक आवश्यक काम आ गया। माँ तथा पापा कार पर शहर गए। अजय साथ जाना चाह रहा था पर पापा दरवाजा बंद कर बाहर ताला लगा गए। बस, घर पर अजय तथा अमन रह गए।

अमन छत पर समाचार पत्र पढ़ रहा था। उस पर बदमाश तहलका लाल का नाम छपा था। वह तलवार वाला खतरनाक बदमाश था। अजय उसका नाम जानकर ड़र गया। अचानक आसमान पर काला बादल छा गया। घर का दरवाजा खट-खट बज उठा। अजय छत पर ड़रकर खड़ा गाल पर हाथ रखकर पापा-पापा रट रहा था।

यकायक वह बदमाश छत पर आ टपका। उसका रंग एकदम काला था। हाथ पर लाल कपड़ा बंधा था। वह तलवार पकड़ अजय पर लपका तथा हंसा। जब बालक पाठशाला ना जाता, तब हम आता उसका कान काट का जाता, हा! हा! हा!

अजय अचानक ड़र कर मचल गया। वह जाग गया। वाह! वह सब सपना था। अमन पाठशाला जाकर घर आ गया था तथा खाना खा रहा था। बाहर आसमान साफ था। वह माँ, पापा, अजय आवाज लगाता भागा तथा अपना सारा सपना बताया।

अब वह कल पाठशाला जाना चाह रहा था। अमन खाना खाता, मजाक बनाता कह उठा, हाँ……..हाँ कल बनाना नया बहाना पर अजय कह उठा कल बहाना ना बनाऊँगा झटपट उठकर पाठशाला जाऊँगा तथा अपना कान पकड़ कर हँस पड़ा।

अजय का सपना बहुत साल पहले राजस्थान पत्रिका जयपुर से प्रकाशित हुई थी. आप बताओ कि आपको कहानी कैसी लगी !!!

June 24, 2015 By Monica Gupta

बाल कहानी

बाल कहानी

  100रभ की 6तरी

( अंको को शब्दों के साथ जोड़कर कहानी का आनन्द लें)

2पहर के समय बर7 शुरू हो गर्इ। स्कूल से लौटते समय 100रभ ने अपनी कमीज की आस् 3 ऊपर कर ली थी। उसने पिताजी को बहुत बार 6तरी लाने को कहा था पर वो टाल देते थे। आज उसका जन्मदिन है पर उसकी 100तेली माँ ने उसे अभी तक बधार्इ भी नही दी। जब उसने स्कूल में अपने 2स्तों को यह बात बतार्इ तो वह उल्टे ही 100रभ के कान भरने लगे कि 100तेली माँ के आ4-वि4 अच्छे नही होते। वह हमेशा बच्चों में 2ष ही निकालती हैं और अत्या4 करती हैं। कर्इ बार तो उन्हें 6ड़ी से भी पीटती है। कर्इ बार तो बच्चे इतने ला4 हो जाते है कि घर से भागने की 9बत ही आ जाती है।

स्कूल की छुटटी के बाद वह सोचता हुआ जा रहा था कि 100तेली माँ से उसकी कभी अनबन भी नही हुर्इ पर आज उन्होनें बधार्इ क्यों नही दी। क्या वो भी उसे घर से निकाल देंगीं? लगता है, अब तो पिताजी भी उसे प्यार नही करते। 6तरी भी शायद इसीलिए नही लाकर दे रहे हैं। इसी सोच में उसे रास्ते में 1ता दीदी मिली। वो हमेशा वे2 के बारे में अच्छी-अच्छी बातें बताया करती थी। उन्होनें उसके घर का समा4 जाना और 2राहें पर से अपने घर चली गर्इ। वो 6मियाँ राम जी की 2ती थी। उसके और 100रभ के पिताजी बहुत अच्छे 2स्त थे। 1ता दीदी के पिताजी 9सेना में 9करी करते थे और 100रभ के पिता सवार्इ मानसिंह में रोगियों का उप4 करते।

यही सोचते-सोचते उसका घर आ गया और उसने ड़रते-ड़रते दरवाजे़ पर 10तक दी पर दरवाज़ें खुला था। कमरे में किसी की आहट ना पाकर वो चुपचाप अपने कमरे में चला गया। उसकी हैरानी की कोर्इ सीमा नही रही जब उसने अपनी 4पार्इ पर 100गात रखी देखी। 100गात खोलने पर उसमें सुन्दर सी 6तरी मिली। जैसे ही उसने पलट कर देखा तो उसकी माताजी और पिताजी जन्मदिन की बधार्इ ताली बजा कर दे रहे थे। उस समय तीनों की आँखें नम थी।

आज का दिन 100रभ के लिए ढ़ेरो खुशियाँ लेकर आया था। उसे अपनी माँ का प्यार मिला। माँ ने बताया कि शाम को तोहफा देकर चौंका देना चाहते थे। इसीलिए सुबह बधार्इ नही दी। अब उसके मन में कोर्इ शंका नही थी कि मम्मी पापा उसे बहुत प्यार करतें हैं। अपनी नर्इ 6तरी लेकर वो 2स्तों को दिखाने बाहर भागा। बाहर धूप निकल आर्इ थी और सुन्दर सा इन्द्रधनुष सुनहरी 6ठा बिखेर रहा था।

umberella photo

Photo by oatsy40

रोचक बाल कहानी 100रभ की छतरी

राजस्थान पत्रिका में प्रकाशित हुई कहानी

आपको कैसी लगी … जरुर जरुर बताईगा 🙂

June 24, 2015 By Monica Gupta

एकांत

cartoon lady sitting by monica gupta

कई बार खुद को अकेला छोड देना अच्छा होता है… भीड में तो हम हर समय ही धिरे रहते हैं शोर शराबा दिन भर  के तनाव को और बढा देता है ऐसे में एकांत बहुत जरुरी हो जाता है कई बार खुद से ही  कुछ सवाल करने होते हैं तो कई बार खुद के किए सवालों के उत्तर तलाशने होते हैं जो एकांत में ही मिलते हैं .. एकांत,  किसी समुद्र का किनारा हो सकता है या किसी पार्क में पेड के नीचे हो सकता है या फिर अपने कमरे मे भी हो सकता है. जहां पूरी शांति हो … बडे बडे नेता हो या कोई फिल्मी कलाकार सब एकांत के बहाने खोजते रहते हैं और कई बार उसे छुट्टियों का नाम भी दे देते हैं

कुल मिला कर खुद से बात करना बहुत जरुरी  है…

 

 

  Ranchi Express Online

एकांत व मौन ये दो ऐसे साधन है, जिनका अभ्यास हर व्यक्ति को करना चाहिए। जीवन की विकट परिस्थितियों में जब कोई भी व्यक्ति साथ नहीं देता, मदद नहीं करता, बल्कि विरोध में खड़ा हो जाता है, ऐसी परिस्थितियों में एकांत व मौन उन अस्त्रों के समान होते हैं, जो हमारी रक्षा करते हैं।

एकांत में जहां व्यक्ति, अन्य दूसरे व्यक्तियों के सम्पर्क से बचता है वहीं मौन में वह किसी से कुछ भी बोलता नहीं है। शांत रहता है, केवल देखता है। एकांत व मौन अपने जीवन में शक्ति अर्जन करने के साधन है जिसके माध्यम से हम विरोधी शक्तियों व विपरीत परिस्थितियों का मुकाबला कर सकते हैं, जब हम किसी से मिलते नहीं है, एकांत में रहते हैं, तो हम स्वयं के सबसे करीब होते हैं। इस समय हमें आत्मचिंतन करने का अधिक समय मिल पाता है।

हम स्वयं के प्रति अपनी क्षमताओं के प्रति आसानी से एकाग्र हो जाते हैं। यद्यपि बाहरी परिस्थितियों द्वारा मिलने वाला तनाव हमें एकाग्र होने से बाधा पहुंचाता है, लेकिन फिर भी एकांत होने पर हमें स्थिर व एकाग्र होने से रोक नहीं सकता। इन परिस्थितियों से निपटने के लिए हमें क्या उपाय करना चाहिए, किस तरह इनका सामना करना चाहिए। हमें क्या-क्या सहायता मिल सकती है और अपनी अतिरिक्त क्षमताओं को बढ़ाने के लिए हमें क्या करना चाहिए। मौन के माध्यम से हम अपनी वाक क्षमता को नियंत्रित करते हैं। हमारे शरीर व मन से अपार ऊर्जा का बहाव होता है, बोलने के द्वारा भी हमारी बहुत सारी ऊर्जा व्यय होती है। यदि हम मौन धारण करते हैं तो इस ऊर्जा को व्यय होने से बचा सकते हैं और इसका सदुपयोग कर सकते हैं। अनर्गल बोलना, अत्यधिक बोलना, चर्चाएं करना आदि इसलिए साधनाकाल में वर्जित है, जितना आवश्यक व उपयोगी है, उतना ही बोलना चाहिए, अन्यथा चुप रहना चाहिए। हमें सार्थक बोलना चाहिए और अधिक सुनना चाहिए। इसलिए परमात्मा ने इस मानव शरीर में दो कान और एक मुंह दिया है, ताकि हम दो कानों से सुने और उसका कम शब्दों में उचित प्रत्युत्तर दें, साथ में अपनी भावाभिव्यक्ति भी करें।

इसके अतिरिक्त यदि हमें कोई अप्रिय व असहनीय कठोर बातें सुनने को मिलती है, तो उन्हें एक कान से सुनो और दूसरे से निकाल दो। उन पर ध्यान न दें, क्योंकि उन पर ध्यान देने का मतलब है स्वयं को दुखी व परेशान करना। कई बात ऐसी बातों को सुनने से व्यक्ति के स्वाभिमान को ठेस पहुंचती है और वह फिर दूसरे के स्वाभिमान को ठेस पहुंचाने वाले कार्य करने लगता है। कठोर बातें, कटुक्ति व्यंग्य आदि सुनने से व्यक्ति का क्रोध व अहंकार जाग्रत होता है, जो उसे दिग्भ्रमित कर सकता है। इसलिए हमें इतना समझदार तो होना ही चाहिए कि हम किस तरह की बातों को ध्यान से सुने। किन बातों पर ध्यान न दें। कैसी वाणी बोले, कितना बोले और क्या बोले, इस संसार में सुनने योग्य वही बातें हैं, जो महापुरुषों ने जीवन के संदर्भ में व्यक्ति के लिए कही है। वहीं बातें हमारा मार्गदर्शन करती है।

June 24, 2015 By Monica Gupta

Package

Package…cartoon package by monica gupta

Package  आमतौर पर जब भी किसी को नई नौकरी मिलती है तो लोगों का यही सवाल होता है कि Package क्या है .. कितना है … पर हमारी ये मैडम जी भी महान है … इन्होनें शादी की है बेटे की और खुशी खुशी बता रही है कि बहुत सारा कैश, प्लैट , गहने और कार के साथ पैकेज में बहू आई है फ्री… फ्री … फ्री … क्या कहेंगें ऐसी मानसिकता को.. दहेज का लालच हमारे देश से खत्म क्यों नही हो रहा … या हम लोग ही इसे खत्म नही करना चाह्ते … कोई भी शादी हो या सगाई का समारोह… हम शादी मे मिली चीजों की नुमाईश करते नजर आते हैं … बहुत शर्म आती है लोगों की मानसिकता पर

 

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अक्सर लोग कहते हैं कि जिनकी शादी नहीं हुई, वे खुशनसीब और खुशहाल हैं। उन्हें तनाव कम है। जिनकी शादी हो गई है, वे तनाव में रहते हैं, कई तरह की पारिवारिक परेशानियों में रहते हैं, उन्हें पैसे की ज्यादा जरूरत रहती है, वगैरह! जिनकी शादी नहीं हुई है, उन्हें भी पैसे की कम जरूरत नहीं होती। हमारा समाज अविवाहित लड़कों की पूरी योग्यता उनकी कमाई से नापता है। उनकी कमाई की ऊंचाई के दायरे में ही समाज उनका मान-सम्मान करता है। परिवार का प्यार भी उनकी कमाई की लंबाई-चौड़ाई के अनुपात में घटता-बढ़ता रहता है। उनके लिए दहेज भी उनकी कमाई के ग्राफ के हिसाब से तय होता है। इसलिए आज माता-पिता की सबसे बड़ी चिंता बेटे की नौकरी हो गई है।

अगर कोई योग्य और समझदार लड़का किसी कारणवश पैसा नहीं कमा पाता है या कम कमाता है, तो उसकी शादी में कई तरह की बाधाएं आती हैं। जबकि एक कम पढ़ा-लिखा और पोंगापंथी लड़का ज्यादा पैसा कमा रहा है, तो उसकी शादी उससे ज्यादा योग्य लड़की से हो जाती है। हमारे समाज के लिए यह सब सामान्य है। लेकिन इस प्रवृत्ति के कारण और परिणाम पर विचार करें तो आश्चर्यजनक तथ्य सामने आएंगे। पैसे की किल्लत और उसके चलते जलालत कई युवाओं को आत्महत्या तक के बारे में सोचने के लिए मजबूर कर देती है। बेरोजगारी का आलम यह है कि योग्यता के अनुरूप काम की क्या कहें, काम के अनुरूप पैसे भी नहीं मिलते हैं। कुंवारे ही अभी सबसे ज्यादा भटकाव और टकराव झेल रहे हैं- पद, पैसा और प्यार के मोर्चे पर।

पद पाने के लिए वे किसी भी तरह का समझौता कर लेते हैं। कहीं भी, कैसे भी और कैसी भी, बस एक नौकरी मिल जाए! एक नौकरी एक युवा की पूरी जिंदगी की दशा-दिशा नियंत्रित करने लगी है। इसी के लिए वे आसानी से भ्रष्टाचार के शिकार भी हो जाते हैं। इसके बाद भ्रष्टाचार का यह घुन उन्हें ऐसे खाता जाता है कि प्रथम श्रेणी का अधिकारी बनने के बाद भी एक अच्छे-खासे पढ़े-लिखे युवा को जेल जाने की नौबत तक आ जाती है, क्योंकि पद के साथ-साथ पैसे का खुमार युवाओं को अंधा कर देता है। वे जायज-नाजायज में फर्क नहीं कर पाते। रातों-रात अमीर बनने और ऐशो-आराम की जिंदगी जीने की ललक उन्हें एक ऐसे अंधे कुएं में ले जाती है, जहां से निकलने का शायद ही कोई रास्ता हो। Read more…

Package

June 23, 2015 By Monica Gupta

तुलसी जी की महिमा

तुलसी जी की महिमाtulsi by monica gupta

 

तुलसी जी की महिमा

घर पर मेरी सहेली आई हुई थी. उसने बाहर तुलसी लगी देखी और बोली बहुत खुश होकर बोली …  वाह तुम्हारे तो तुलसी जी लगी हुई है और वो भी बहुत खिली खिली. मैने हैरानी से कहा तुलसी जी.. उसने बोला कि तुलसी जी बहुत आदर मान का पौधा है.

श्री तुलसी प्रणाम
वृन्दायी तुलसी -देव्यै प्रियायाई केसवास्य च,विष्णु -भक्ति -प्रदे देवी सत्यवात्याई नमो नमः”

मैं श्री वृंदा देवी को प्रणाम करती हूँ जो तुलसी देवी हैं , जो भगवान् केशव की अति प्रिय हैं – हे देवी !आपके प्रसाद स्वरूप , प्राणी मात्र में भक्ति भाव का उदय होता है.

उसने बताया कि तुलसी जी को कई नामों से पुकारा जाता है. इनके आठ नाम मुख्य हैं – वृंदावनी, वृंदा, विश्व पूजिता, विश्व पावनी, पुष्पसारा, नन्दिनी, कृष्ण जीवनी और तुलसी.

 

विश्व में तुलसी को देवी रुप में हर घर में पूजा जाता है. इसकी नियमित पूजा से व्यक्ति को पापों से मुक्ति तथा पुण्य फल में वृद्धि मिलती है. यह बहुत पवित्र मानी जाती है और सभी पूजाओं में देवी तथा देवताओं को अर्पित की जाती है. पद्म पुराण में कहा गया है कि  नर्मदा दर्शन, गंगा स्नान और तुलसी पत्र का संस्पर्श ये तीनो समान पुण्य कारक है .

दर्शनं नार्मदयास्तु गंगास्नानं विशांवर, तुलसी दल संस्पर्श: सम्मेत त्त्रयं”

मैं बहुत हैरानी से उनकी बात सुन रही थी. गंगा स्नान, नर्मदा दर्शन के समान ही इसे भी पवित्र माना गया है सुनकर हैरानी भी हुई और खुशी भी.

उन्होनें बताया कि ऐसा भी सुनने में आता है कि  जो लोग प्रातः काल में गत्रोत्थान पूर्वक अन्य वस्तु का दर्शन ना कर सर्वप्रथम तुलसी का दर्शन करते है उनका अहोरात्रकृत पातक सघ:विनष्ट हो जाता है.

ज्यादा गूढ बातें तो मुझे समझ नही आई पर बाते करते करते हम वही बैठ गए. तभी मुझे ख्याल आया मैने एक बार तुलसी विवाह के बारे में सुना था . मैने  पूछा कि आखिर ये  तुलसी विवाह क्या होता है ?

उन्होनें बताया प्राचीन काल में जालंधर नामक राक्षस ने चारों तरफ़ बड़ा उत्पात मचा रखा था। वह बड़ा वीर तथा पराक्रमी था। उसकी वीरता का रहस्य था, उसकी पत्नी वृंदा का पतिव्रता धर्म। उसी के प्रभाव से वह सर्वजंयी बना हुआ था। जालंधर के उपद्रवों से परेशान देवगण भगवान विष्णु के पास गये तथा रक्षा की गुहार लगाई। उनकी प्रार्थना सुनकर भगवान विष्णु ने वृंदा का पतिव्रता धर्म भंग करने का निश्चय किया। भगवान ने उनके पति का रुप धरा और उसके पास पहुंच गए. जब वृंदा ने देखा कि उसके पति आए हैं तो वो पूजा से उठ गई. और उनके चरण छू लिए … बस वही , उधर, उसका पति जालंधर, जो देवताओं से युद्ध कर रहा था, वृंदा का सतीत्व नष्ट होते ही मारा गया।

जब वृंदा को इस बात का पता लगा तो क्रोधित होकर उसने भगवान विष्णु को शाप दे दिया, ‘जिस प्रकार तुमने छल से मुझे पति वियोग दिया है, उसी प्रकार तुम भी अपनी स्त्री का छलपूर्वक हरण होने पर स्त्री वियोग सहने के लिए मृत्यु लोक में जन्म लोगे।’ यह कहकर वृंदा अपने पति के साथ सती हो गई।

जिस जगह वह सती हुई वहाँ तुलसी का पौधा उत्पन्न हुआ। एक अन्य प्रसंग के अनुसार वृंदा ने विष्णु जी को यह शाप दिया था कि तुमने मेरा सतीत्व भंग किया है। अत: तुम पत्थर के बनोगे। विष्णु बोले, ‘हे वृंदा! यह तुम्हारे सतीत्व का ही फल है कि तुम तुलसी बनकर मेरे साथ ही रहोगी। जो मनुष्य तुम्हारे साथ मेरा विवाह करेगा, वह परम धाम को प्राप्त होगा।’ बिना तुलसी दल के शालिग्राम या विष्णु जी की पूजा अधूरी मानी जाती है। शालिग्राम और तुलसी का विवाह भगवान विष्णु और महालक्ष्मी के विवाह का प्रतीकात्मक विवाह है।

तुलसी का पत्ता, फूल, फल, मूल, शाखा, छाल, तना और मिट्टी आदि सभी पावन हैं। तुलसी दर्शन करने पर समस्त पापों का नाश होता है, स्पर्श करने पर शरीर पवित्र होता है, प्रणाम करने पर रोगों का निवारण करती है, जल से सींचने पर यमराज को भी भय पहुंचाती है, तुलसी का पौधा लगाने से जातक भगवान के समीप आता है। तुलसी को भगवद चरणों में चढ़ाने पर मोक्ष रूपी फल प्राप्त होता है।

अपने घर में एक तुलसी का पौधा जरूर लगाएं। इसे उत्तर, पूर्व या उत्तर-पूर्वी दिशा में लगाएं या फिर घर के सामने भी लगा सकते हैं। पारंपरिक ढंग के बने मकानों में रहने वाले ज्यादा सुखी और शांत रहते थे।

तुलसी का धार्मिक महत्व तो है ही लेकिन वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी तुलसी एक औषधि है। आयुर्वेद में तुलसी को संजीवनी बुटि के समान माना जाता है।तुलसी में कई ऐसे गुण होते हैं जो बड़ी-बड़ी जटिल बीमारियों को दूर करने और उनकी रोकथाम करने में सहायक है। तुलसी का पौधा घर में रहने से उसकी सुगंध वातावरण को पवित्र बनाती है और हवा में मौजूद बीमारी के बैक्टेरिया आदि को नष्ट कर देती है।मान्यता  यह भी है कि तुलसी का पौधा घर में होने से घर वालों को बुरी नजर प्रभावित नहीं कर पाती और अन्य बुराइयां भी घर और घर वालों से दूर ही रहती हैं। तुलसी का पौधा घर का वातावरण पूरी तरह पवित्र और कीटाणुओं से मुक्त रखता है। इसके साथ ही देवी-देवताओं की विशेष कृपा भी उस घर पर बनी रहती है।

अरे वाह तुलसी जी तो गुणों की खान है …plannt

उनके जाने के बाद मैने भी नेट पर सर्च किया तो बहुत बाते लिखी हुई हैं तुलसी जी के बारे में …

1 तुलसी की पत्तियों का रस शहद के साथ मिलाकर चाटने से शारीरिक शक्ति बढ़ती है। इसे एक प्रकार का टॉनिक माना जाता है।

2 तुलसी की पत्तियों का रस और अदरक मिलाकर चाटने से खांसी में आराम मिलता है और गले की खराश भी दूर होती है।

3 चेहरे पर मुंहासे और दाग-धब्बे होने पर तुलसी की पत्तियों का रस और नींबू के रस को मिलाकर लगाने से चेहरा साफ होता है। खुजली वाले स्थान पर लगाने से खुजली से भी आराम मिलता है।

4 जुकाम होने पर तुलसी और गुड़ से बना काढ़ा पीने से राहत मिलती है।

5 विषैले कीड़े के काटने पर जहर का असर कम करने के लिए तुलसी का रस प्राथमिक उपचार के काम आता है। जिस स्थान पर तुलसी का पौधा लगा हो उसके आस-पास का वातावरण शुद्ध होता है।

6 सफेद और काली तुलसी दोनों में समान गुण होते हैं।

7 तुलसी की पत्तियों को चाय की तरह उबाल कर पीने से पेचिश में आराम मिलता है।

तुलसी के पत्तों का काढ़ा पीने से पित्त के विकार में लाभ मिलता है। जहां तुलसी का पौधा लगा होता है वहां लक्ष्मी जी निवास करती हैं। See more…

तुलसी जी की महिमा अपरमपार है

1 मान्यता है कि तुलसी का पौधा घर में होने से घर वालों को बुरी नजर प्रभावित नहीं कर पाती और अन्य बुराइयां भी घर और घरवालों से दूर ही रहती हैं।

2 तुलसी का पौधा घर का वातावरण पूरी तरह पवित्र और कीटाणुओं से मुक्त रखता है। इसके साथ ही देवी-देवताओं की विशेष कृपा भी उस घर पर बनी रहती है।

3 कार्तिक माह में विष्णु जी का पूजन तुलसी दल से करने का बडा़ ही माहात्म्य है। कार्तिक माह में यदि तुलसी विवाह किया जाए तो कन्यादान के समान पुण्य की प्राप्ति होती है।

पदम पुराण में कहा गया है की तुलसी जी के दर्शन मात्र से सम्पूर्ण पापों की राशि नष्ट हो जाती है,उनके स्पर्श से शरीर पवित्र हो जाता है,उन्हें प्रणाम करने से रोग नष्ट हो जाते है,सींचने से मृत्यु दूर भाग जाती है,तुलसी जी का वृक्ष लगाने से भगवान की सन्निधि प्राप्त होती है,और उन्हें भगवान के चरणों में चढाने से मोक्ष रूप महान फल की प्राप्ति होती है।

अंत काल के समय ,तुलसीदल या आमलकी को मस्तक या देह पर रखने से नरक का द्वार बंद हो जाता है। तुलसी का धार्मिक महत्व तो है ही लेकिन विज्ञान के दृष्टिकोण से भी तुलसी एक औषधि है। आयुर्वेद में तुलसी को संजीवनी बुटि के समान माना जाता है।तुलसी में कई ऐसे गुण होते हैं जो बड़ी-बड़ी जटिल बीमारियों को दूर करने और उनकी रोकथाम करने में सहायक है।

तुलसी का पौधा घर में रहने से उसकी सुगंध वातावरण को पवित्र बनाती है और हवा में मौजूद बीमारी के बैक्टेरिया आदि को नष्ट कर देती है। तुलसी की सुंगध हमें श्वास संबंधी कई रोगों से बचाती है। साथ ही तुलसी की एक पत्ती रोजाना सेवन करने से हमें कभी बुखार नहीं आएगा और इस तरह के सभी रोग हमसे सदा दूर रहते हैं। तुलसी की पत्ती खाने से हमारे शरीर की रोगप्रतिरोधक क्षमता काफी बढ़ जाती है।

1. तुलसी रक्त में कोलेस्ट्रॉल की मात्रा नियंत्रित करने की क्षमता रखती है।

2. शरीर के वजन को नियंत्रित रखने हेतु भी तुलसी अत्यंत गुणकारी है। इसके नियमित सेवन से भारी व्यक्ति का वजन घटता है एवं पतले व्यक्ति का वजन बढ़ता है यानी तुलसी शरीर का वजन आनुपातिक रूप से नियंत्रित करती है।

3. तुलसी के रस की कुछ बूंदों में थोड़ा-सा नमक मिलाकर बेहोश व्यक्ति की नाक में डालने से उसे शीघ्र होश आ जाता है।

4. चाय बनाते समय तुलसी के कुछ पत्ते साथ में उबाल लिए जाएं तो सर्दी, बुखार एवं मांसपेशियों के दर्द में राहत मिलती है। 5. 10 ग्राम तुलसी के रस को 5 ग्राम शहद के साथ सेवन करने से हिचकी एवं अस्थमा के रोगी को ठीक किया जा सकता है। 6. तुलसी के काढ़े में थोड़ा-सा सेंधा नमक एवं पीसी सौंठ मिलाकर सेवन करने से कब्ज दूर होती है।

7. दोपहर भोजन के पश्चात तुलसी की पत्तियां चबाने से पाचन शक्ति मजबूत होती है।

8. 10 ग्राम तुलसी के रस के साथ 5 ग्राम शहद एवं 5 ग्राम पिसी कालीमिर्च का सेवन करने से पाचन शक्ति की कमजोरी समाप्त हो जाती है।

9. दूषित पानी में तुलसी की कुछ ताजी पत्तियां डालने से पानी का शुद्धिकरण किया जा सकता है।

10. रोजाना सुबह पानी के साथ तुलसी की 5 पत्तियां निगलने से कई प्रकार की संक्रामक बीमारियों एवं दिमाग की कमजोरी से बचा जा सकता है। इससे स्मरण शक्ति को भी मजबूत किया जा सकता है।

11. 4-5 भुने हुए लौंग के साथ तुलसी की पत्ती चूसने से सभी प्रकार की खांसी से मुक्ति पाई जा सकती है।

12. तुलसी के रस में खड़ी शक्‍कर मिलाकर पीने से सीने के दर्द एवं खांसी से मुक्ति पाई जा सकती है।

13. तुलसी के रस को शरीर के चर्मरोग प्रभावित अंगों पर मालिश करने से दाग, एक्जिमा एवं अन्य चर्मरोगों से मुक्ति पाई जा सकती है।

14. तुलसी की पत्तियों को नींबू के रस के साथ पीस कर पेस्ट बनाकर लगाने से एक्जिमा एवं खुजली के रोगों से मुक्ति पाई जा सकती है। Read more…

जय हो तुलसी जी की आप वाकई बहुमुल्य हैं. तुलसी जी की महिमा अपार है !!!

June 22, 2015 By Monica Gupta

सावधान पत्रकार

सावधान पत्रकार

mafia by monica guptaसावधान पत्रकार पहले उत्तर प्रदेश के जोगेंद्र और अब मध्य प्रदेश में भी एक लापता पत्रकार संदीप कोठारी को जलाकर मार डालने की घटना ने स्तब्ध कर दिया .मैं ये नही कहूंगी कि इस मुद्दे पर सारा मीडिया मौन क्यो हैं? क्योकि जानती हूं टीआरपी नही है मिर्च मसाला भी नही है और अगर कुछ बोले तो कही वो खुद ही इसका शिकार न बन जाए .. भले ही अब उनकी मौत आत्महत्या दिखाई जाए पर ऐसे बेबाक और साहसी पत्रकारों को मेरा नमन.

यकीनन सब देख पढ कर बहुत दुख हुआ कि मीडिया ही इस बात पर मौन धारण करके बैठा है. एक छोटी जगह का पत्रकार सुबह से शाम तक  एक खबर बनाने में के लिए पूरा दिन इस उम्मीद से निकाल देता है कि एक स्टोरी के कुछ पैसे मिलेगें और अगर वो धासूं खबर हुई तो ब्रेकिंग न्यूज भी बन सकती है …  और न्यूज चैनल चलाने वाले और कठपुतलिया बने बैठे आका अपना फरमान सुनाते रहते हैं. सच्चाई और बेबाक पत्रकारिता की आवाज को दबा दिया जाता है ..

एक छोटे से शहर की पत्रकार होने के नाते मैने भी बहुत बाते देखी है कुछ का मुकाबला किया तो कुछ पर चुप होकर बैठ गई. इतना जरुर जानती हू कि छोटे शहर के पत्रकार बहुत छोटी छोटी स्टोरी के लिए  मेहनत करते हैं जिसका उनको एक प्रतिशत भी नही मिलता और वही फालफू की खबरो को मात्र टीआरपी बढाने के लिए पूरा पूरा दिन मिल जाता है

मनमोहन सिह जी और मोदी जी के मौन पर मजाक बनाने और हवा देने वाला मीडिया इस मामले में जिस तरह से मौन साधे बैठा है स्तब्ध कर रहा है

 

BBC

शाहजहांपुर में पत्रकार जगेंद्र सिंह की संदिग्ध मौत के बाद अब मध्यप्रदेश के एक पत्रकार संदीप कोठारी की कथित रूप से हत्या की ख़बर आ रही है.

जगेंद्र सिंह की 8 जून को हुई मौत से पहले आख़िरी बयान में उन्होंने पांच पुलिस वाले और राज्य के एक मंत्री के ख़िलाफ़ हमले का आरोप लगाया लेकिन अब तक किसी को गिरफ़्तार नहीं किया गया है जबकि कोठारी की हत्या के बाद तीन लोग गिरफ़्तार किए गए हैं.

छोटे शहरों में पत्रकारों पर बढ़ते हुए हमलों पर उनके अंदर असुरक्षा का माहौल है. मैं शाहजहांपुर में कुछ स्थानीय पत्रकारों से मिला और उनके काम काज के बारे में जानकारी हासिल करने की कोशिश की.

अंधेरे से एक कमरे में पतलून और बनियान पहने एक आदमी कंप्यूटर पर काम कर रहा है. तेज़ पंखे के बावजूद कमरा काफ़ी गर्म है. दो और लोग वहां अपने कामों में मशगूल हैं. कमरे में रखे कैमरे, ट्राइपॉड और टेप्स को देखकर कोई भी अंदाज़ा लगा सकता है कि ये किसी मीडिया वाले का दफ़्तर है.

यानी अगर अख़बार के एक पत्रकार की किसी एक महीने में 10 कहानियां प्रकाशित हुईं तो उस महीने में उसकी कमाई केवल 1500 रुपए हुई. दूसरे शब्दों में उसकी एक मज़दूर से भी कम कमाई है.

स्थानीय पत्रकार कहते हैं कि कहानी के लिए दूर दूर तक धूप, गर्मी और बरसात में अपने पेट्रोल के ख़र्च पर जाना पड़ता है.

वरिष्ठ पत्रकार सरदार शर्मा ‘स्वतंत्र भारत’ अख़बार के ब्यूरो चीफ़ हैं. उनके अनुसार कम वेतन से बड़ी समस्या ‘पत्रकारिता का अपराधीकरण’ है. See more…

धटना ने स्तब्ध कर दिया है और अब लगता है कि रही सही  सच्चाई और दब जाएगी और फिर खत्म ही हो जाएगी

सावधान पत्रकार

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छोटे बच्चों की सारी जिद मान लेना सही नही

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