Monica Gupta

Writer, Author, Cartoonist, Social Worker, Blogger and a renowned YouTuber

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September 30, 2015 By Monica Gupta

Rotary Blood Bank

Rotary Blood Bank

 

आईएसबीटीआई की दिल्ली में कांफ्रेस के दौरान बहुत से ऐसे लोगों से मिलना हुआ जो रक्तदान पर बहुत जबरदस्त कार्य कर रहे थे. किसी की संस्था है तो कोई संस्था के साथ मिलकर रक्तदान जैसे सामाजिक कार्य में निस्वार्थ भावना से कार्य कर रहें हैं. लक्ष्य और उद्देश्य सभी का एक है कि देश में शत प्रतिशत स्वैच्छिक रक्तदान हो.

इसी कार्यक्रम में आई रोट्ररी ब्लड बैंक दिल्ली की सीएमओ अंजू वर्मा  और चीफ टैक्निकल आफिसर आशा बजाज जी से मिलना हुआ. बेहद मिलनसार और सबसे अच्छी बात ये कि रक्तदान के प्रति पूरी तरह से समर्पित हैं. आशा जी ने बताया कि  वो और अंजू वर्मा जी जब से रोट्ररी ब्लड बैंक शुरु हुआ वो तभी से यानि 2001 से इसके साथ जुडी हैं.

रोट्ररी ब्लड बैंक का मिशन यही है कि दिल्ली और दिल्ली के आसपास रहने वालों की रक्त की कमी से कभी जान न जाए. इसलिए उनकी संस्था कभी कालिज, कभी स्कूल कभी किसी संस्थान में तो कभी कैम्प के माध्यम से रक्त एकत्र करने के साथ साथ जागरुक भी करते हैं. स्कूल में पेरेंटस टीचर मीटिंग के दौरान कैम्प लगाते हैं क्योकि अगर टीचर या माता पिता रक्तदान करेंगें तो निसंदेह  बडे होने पर बच्चे भी आगे आएंगें.

उन्होने बताया कि ब्लड बैंक में किसी भी तरह से रिप्लेसमैंट नही है और 24 घंटे खुला रहता है. जिसे जब भी जरुरत हो वो फोन करके या मिलकर विस्तार से  जानकारी ले सकता है. दिल्ली मे तुगलकाबाद में उनका रोट्ररी ब्लड बैंक है और  टेलिफोन नम्बर 01129054066- 69 तक नम्बर हैं.

आशा जी ने यह भी बताया कि थैलीसिमिया  का टेस्ट भी यहां होता है. इस बारे में भी वो लगातार जागरुक करते रहतें हैं कि शादी से पहले थैलीसीमिया टेस्ट जरुरी होता है ताकि शादी के बाद किसी भी तरह की दिक्कत का सामना न करना पडे.

आजकल बहुत ज्यादा व्यस्तता है क्योंकि डेंग़ू की वजह से प्लेटलेटस  और रैड ब्लड सैल की बहुत मांग है. उन्होनें बताया कि ब्लड बैंक का सारा स्टाफ स्वैच्छिक रक्तदाता है और हर तीन महीने बाद रक्तदान करता है.

मेरे पूछने पर कि एक महिला होने के नाते महिलाओं की खून की कमी के बारे में क्या कहना चाहेंगी इस पर वो मुस्कुरा कर बोली कि एनीमिया प्रोजेक़्ट पर भी उनका  ब्लड बैंक जुटा हुआ है और समय समय पर चैकअप कैम्प लगाए जाते हैं और जागरुक किया जाता है.

रही बात आज के समय कि तो उन्होनें बताया कि बहुत बदलाव आया है और आ भी रहा है. बहुत अच्छा लगता है जब स्वैच्छिक रक्तदान के लिए ना सिर्फ पुरुष बल्कि महिलाए भी आगे आती हैं. हालाकि यूरोपिय देशों की तुलना में तो बहुत कम है पर फिर भी ऐसी जागरुकता होना एक शुभ संकेत है.

आशा जी ने बताया कि वो लगभग 30 सालों से इस क्षेत्र से जुडी है. जब भी कोई परेशान, दुखी व्यक्ति रक्त के लिए आता है और उसे वो मिल जाता है तो उसके चेहरे की खुशी देख कर एक ऐसी आत्मसंतुष्टि मिलती है जिसे शब्दों मे व्यक्त नही किया जा सकता.

मीटिंग का अगला सैशन शुरु हो गया था इसलिए मुझे अपनी बात को यही रोकना पडा. जिस सच्चे मन से उनकी संस्था कार्य कर रही है उसके लिए पूरी टीम बधाई की पात्र है… शुभकामनाएं !!!

यकीनन देश में अगर हम शत प्रतिशत स्वैच्छिक रक्तदान देखना चाह्ते हैं तो हम सभी को मिल कर सांझा प्रयास करना होगा.

Rotary Blood Bank

Rotary Blood Bank

 

 

Rotary Blood Bank

 

September 29, 2015 By Monica Gupta

मेरा प्रिय मित्र

मेरा प्रिय मित्र

  मेरा बेस्ट फ्रैंड  

वैसे तो मेरे बहुत मित्र हैं पर उसकी तो बात ही अलग है. हमारी दोस्ती को लगभग बारह साल से भी ज्यादा हो गए. शुरु शुरु में तो उसे देख कर घबरा जाती थी पर जैसे जैसे मुझे उसकी आदत पडती गई बस फिर हमारी दोस्ती पक्की दोस्ती में बदल गई. अब वो हमारा पारिवारिक मित्र है. मेरे सभी रिश्तेदार और दोस्त उसे बहुत अच्छी तरह से जानते हैं.

छोटे से कद का दुबला पतला है पर फिर भी बहुत ताकतवर है. हमेशा मुझे खुश रखने की कोशिश करता है  और मेरा भी हमेशा यही प्रयास रहता है कि कभी वो रुठ न जाए. एक सबसे अच्छी बात ये भी है कि वो समय का बहुत पाबंद हैं और मुझे भी उसी के अनुसार चलने के सलाह देता है. कई बार जब मैं समय का ध्यान न दू तो वो बोल बोल कर नाक और कान में दम कर देता है.

कई बार वो मुझे चुप करा देता है तो कई बार मैं  ही उसे चुप करवा देती हूं. किसी तरह का स्वार्थ या अहम तो है ही नही उसमे … मैं कुछ भी काम कह दूं हमेशा तैयार रहता है… हां खाने के मामले में बहुत सुस्त है पर जब भी खाता है भर पेट खाता है… इसमे कोई शक नही कि वो मुझे हमेशा आईना दिखाता है अगर कभी मैं भटक जाऊ मुझे हमेशा सही राह दिखाता है. जब भी बेहद कीमती है वो मेरे लिए. मैं उसे खोने की कल्पना भी नही सकती.

वो मेरा पक्का दोस्त है. जी क्या ?? मैने उसका नाम नही बताया ?? अरे हां !!! बातो बातों मे तो मैं बताना भूल ही गई. वो मेरा मोबाईल है…. प्यार से मैं उसे मोबू कहती हूं.

भई देखिए … आजकल यही सच है. सभी इससे जुडे रहते हैं एक मिनट भी नही छोडते उसे. चाहे घर के लोग बैठे हो या दोस्त हमारा ध्यान बजाय उनमे होने के पूरा ध्यान मोबाईल पर ही रहता है. तो हुआ न बेस्ट फ्रेंड !!!  मायने बदल गए हैं जनाब !!!

friends photo

September 29, 2015 By Monica Gupta

स्मार्टफोन

स्मार्ट फोन

आजकल हम सभी स्मार्ट हैं  या स्मार्ट फोन  हैं या जिस शहर में हम रह रहे हैं वो स्मार्ट है .. !!! कुछ समझ नही आ रहा .

असल में, हुआ ये कि कल एक जानकार मुझसे नाराज हो गई. उसको शिकायत थी कि मैनें उसका फोन नही उठाया. जबकि मेरे पास तो कोई ट्रिन ट्रिन नही हुई. ऐसे ही  जब आज मैं भी अपनी  सहेली को बार बार फोन कर रही थी और bell जाते ही busy आ जाता. गुस्सा तो बहुत आ रहा था कि ऐसी भी क्या व्यस्त हो रखी है वो  ?? पर बाद में मुझे लगा कि शायद नेटवर्क की दिक्कत होगी.

वही फेसबुक पर कुछ जानकार दबाव बना रहे है कि अपने प्रोफाईल पिक्चर को तिरंगा करो … पर आप ही बताईए कि कैसे करुं सुबह का बनाया कार्टून नेट स्लो चलने की वजह से शाम को ही अपलोड हो तो कैसे और किस विश्वास से अपनी तस्वीर बदलें… मैं सोच ही रही थी कि तभी मणि भी आ गई.हम बाते कर ही रहे थे कि अचानक उसके पास फोन आया. उसने फोन नही उठाया मेरे पूछ्ने पर उसने बताया कि अगर एक बार फोन पर बात शुरु हो गई तो आधा घंटा समझो गया.. और वैसे भी आजकल नेट वर्क की दिक्कत चल रही है तो जब मिलेगी बोल दूंगी कि अच्छा ?? फोन किया था ??? ओह ?? पता ही नही चला !!!

हे भगवान !!! आजकल हम सभी स्मार्ट हैं  या स्मार्ट फोन  हैं या जिस शहर में हम रह रहे हैं वो स्मार्ट है .. !!! जरा सोच लूं !!!

smart phone photo

September 24, 2015 By Monica Gupta

चप्पलें

 rubber foot wear photo

Photo by ▓▒░ TORLEY ░▒▓

 

चप्पलें

एक सहेली के पावं में फ्रेक्चर हो गया.  उसका फोन बताने के लिए आया. मैं उससे मिलने गई और मिलने से पहले ढेर सारी बाते मन में आ रही थी कि  जरुर ही सडक पर आते जाते किसी वाहन से टक्कर हुई होगी. आजकल लोग चलाते भी तो बेहिसाब तेज है कोई नियम कानून तो रहा ही नही.

 पर वहां पहुंच कर कुछ और ही बात पता चली. असल में, हुआ ये कि घर मे ही उसका पैर फिसला धडाम और …. !!! पर ये हुआ कैसे!! मेरे पूछ्ने पर झिझकते हुए बताया कि  उसकी घरेलू चप्पल धिस गई थी और अक्सर जरा से पानी मे भी फिसलती थी.

कुछ दिन पहले वो बाजार जाकर नई जोडी ले भी आई थी पर आलस वश या कुछ भी समझ लो  …. कुछ भी समझ लो उसे पहना ही नही और सुबह कपडे धोते अचानक फिसली और सीधा 1 महीने के लिए बिस्तर पर. !! बात कितनी छोटी सी थी पर कितनी बडी हो गई और उसके साथ साथ पूरे परिवार को दिक्कत का सामना करना पडेगा वो अलग …

हे पाठक जनो अगर आप भी इस तरह का कोई आलस इत्यादि कर रहे हैं तो कृप्या न करे और अपना ध्यान रखे !!! और रही बात मेरी भई मैं तो नई चप्पलें खरीदने चली ..!!

September 23, 2015 By Monica Gupta

घरेलू नौकर और चुगली

just think photo

Photo by SodanieChea

घरेलू नौकर और चुगली

कुछ दिन पहले मार्किट में एक जानकार मिल गई. बाते करते हुए वो बोली कि वो भी उसी तरफ जा रही हैं मुझे ड्राप कर देगीं. मै मना न कर सकी. कार ड्राईवर चला रहा था और सारे रास्ते कभी वो अपनी सास की तो कभी अपनी ननदों की बुराई करती रही. बीस मिनट का रास्ता मुझे  दो घंटे का लगा, मेरे असहज होने की दो वजह थी एक तो उनका बुराई करना और दूसरा कार चालक भी सुन रहा होगा. वो भी क्या सोचता होगा अपनी मालकिन के बारे में. मैने एक बार उन्हे इशारा किया कि ड्राईवर सुन रहा है बाद मे बात कर लेंगें  पर मेरी बार अनसुनी कर दी गई और बोलती ही रही.

एक अन्य पडोसन काम वाली बाई के साथ आधा आधा घंटा बतियाती रहती है. सभी घरों का इतिहास खंगालने के बाद चाय पानी पिला कर उसे विदा करती है और ये रोज की बात है. वही एक अन्य महिला सब्जी वाले से सारी बाते करती है. अरे!! आप सब्जी लो और जाओ पर नही ..वो तो उसे ये तक बता देती है कि आज सब्जी नही लेंगें. हफ्ते के लिए बाहर जा रहे हैं. किसी के समझाने पर नही उसे तब समझ आया जब घर पर चोरी हो गई.

आज माहौल ऐसा नही है. समय बहुत बदल गया है. चाहे मालिश करने वाला हो,काम वाली बाई हो, माली हो या घरेलू नौकर अपने दुखडे उनके आगे न रोए तो बेहतर….. अपनापन दिखाए और प्यार से रखे पर अपने ही परिवार के सदस्यों की बुराई उनसे न करें  … क्योकि एक बार उन्हें भनक लग गई ना तो वो उसका भरपूर फायदा उठा सकते हैं बेशक अपवाद भी हैं पर बहुत कम इसलिए बहुत समझ कर रहने की आवश्यकता है … वैसे आप तो ऐसे नही होंगें … अगर हैं तो जरा नही बहुत सोचने की दरकार है… बाकि आप खुद भी समझदार हैं … है ना !!!

घरेलू नौकर और चुगली कैसा लगा ??? जरुर बताईगा !!! यदि आपका कोई अनुभव भी हमसे सांझा करना चाहे तो भी आपका स्वागत है !!

 

September 21, 2015 By Monica Gupta

रक्तदान की महत्ता

रक्तदान की महत्ता 

रक्तदान ( मोनिका गुप्ता)

रक्तदान ( मोनिका गुप्ता)

 

इस बात मे कोई दो राय नही कि स्वैच्छिक रक्तदान को लेकर आम जन में जागरुकता पहले की अपेक्षा बढी है और वो बढ चढ कर रक्तदान के लिए आगे आ रहे हैं पर इस बात से भी नकारा नही जा सकता कि इस क्षेत्र में बहुत सी ऐसी भ्रांतियाँ या जानकारी का अभाव है जिनकी वजह से लोगो के बढते कदम पीछे हट जाते हैं. तो ऐसे मे क्या तरीके अपनाए जिनसे ना सिर्फ लोग ही आगे आए बल्कि पूरे परिवार के साथ आकर अन्य परिवारों  को भी जागरुक करें.

सबसे पहले तो हमें खुद को ही  जागरुक करना होगा. जैसा कि अगर हम चाह्ते हैं कि रक्तदान के क्षॆत्र में शत प्रतिशत स्वैच्छिक रक्तदाता हो तो, ऐसे में, कुछ लोगो का कहना यह भी होता है कि ये कोई होने वाली बात है मतलब ही नही. सबसे पहले तो हमें ये नकारात्मक मानसिकता खत्म करनी होगी.विभिन्न उदाहरणों से लोगो को संतुष्ट करना होगा जैसाकि हाल ही मे देश से पोलियों खत्म हुआ है. जिसके बारे में सोचा भी नही जा सकता था तो ये सोचना कि यह असम्भव है सबसे पहले तो मन से यह विचार  निकालवाना होगा और फिर ये कैसे सम्भव है इस पर विचार करना आरम्भ करना होगा. इसके लिए सबसे जरुरी है कि हमारे पास रक्तदान से सम्बंधित बातों की जानकारी हो. अक्सर आधी अधूरी जानकारी के चक्कर में ना तो हम खुद और न ही दूसरो को मोटिवेट कर पाते हैं. यह जानकारी हमें  अपने अपने क्षेत्र के डाक्टर, रक्तदाता या ब्लड बैंक से विस्तार से मिल सकती है.

जानकारी मिलने के बाद हमें शुरुआत अपने ही घर से करनी होगी. हम सभी जानते हैं कि घर परिवार की मुख्य धुरी महिला होती हैं. आमतौर पर यह देखा गया है कि महिलाएं अपने पति या बच्चों के रक्तदान करने की बात तो दूर इस विषय पर चर्चा तक करना पसंद नही करती. इसका सीधा सीधा कारण है उनमें जानकारी का अभाव होना. बहुत से ऐसे उदाहरण मैने देखें हैं जिसमें पति पचास बार से भी ज्यादा बार  रक्तदान कर चुका है पर पत्नी को नही बताया या घर मे मां को नही बताया कि अगर बताया तो बहुत डांट पडेगी. जबकि ऐसा नही है. महिलाए सारे परिवार को बेहद समझादारी से सहेज कर रखती हैं ऐसे में बस जरुरत है कि रक्तदान के बारे मे विस्तार से समझाने की और उनकी सारी भ्रांतियाँ को दूर करने की. अगर वो समझ गईं तो  तो ना सिर्फ वो अपने घर परिवार के लोगो को जागरुक करेगी बल्कि खुद भी रक्तदान के लिए आगे आएगीं. वैसे अपवाद भी बहुत हैं इस क्षेत्र मॆ. समाज मे ऐसी भी महिलाए हैं जो रक्तदान की महत्ता समझती हैं पर इनकी गिनती बस ऊंगलियों पर ही है जबकि हमें इस संख्या को असंख्य करना है.

इसके साथ साथ देश के जाने माने रक्तदाताओं के साथ जनता की समय समय पर राष्ट्रीय स्तर या राज्य स्तर पर रुबरु मुलाकात करवाई जाए ताकि वार्तालाप के माध्यम से जनता के मन में जो भी विचार हैं वो सांझा किए जा सकें. कुछ समय पहले  रक्तदान के क्षेत्र में जबरदस्त कार्य कर रहे  देवव्रत राय साहब को तीन दिन की ट्रेनिंग के सिलसिले में पंचकुला आमंत्रित किया गया था. उनके अनुभवों ने जनता को प्रेरित करने के साथ साथ बहुत प्रभाव भी छोडा. उनका आना एक मील का पत्थर  साबित हुआ इसलिए समय समय पर ऐसे व्यक्तित्व  को आमंत्रित करते रहेंगें तो निसंदेह जनता की रक्तदान से सम्बंधित जानकारी भी मिलेगी और ज्ञिज्ञासाओं का समाधान भी होता रहेगा.

इस बात में कोई शक नही कि विभिन्न राज्यों के कुछ लोग निस्वार्थ भाव से रक्तदान के क्षेत्र में बहुत सराहनीय कार्य कर रहे हैं. टीम बना कर या ब्लाग के माध्यम से या फिर वेब साईट बनाकर अपने अपने स्तर पर प्रयास कर रहे हैं. उनके काम करने के तरीके को, चित्रों या पोस्टर्स के माध्यम से प्रदर्शिनी रुप में लगाया जाएगा तो बहुत कुछ सीखने को मिलेगा.

 कुछ खास मौकों पर रक्तदाताओं और उनके परिवारो को सम्मानित करते रहने से भी रक्तदान के प्रति उत्साह बढता है. मैने स्वयं अनेक कार्यक्रम ऐसे देखें हैं जहां मंच पर रक्तदाता परिवारों को बुला कर उनके अनुभव सांझा किए जाते हैं और उन्हें सम्मानित भी किया जाता है. इतना ही नही जिसने एक बार भी (खासतौर पर महिला) रक्तदान किया है उसके अनुभव भी पूछे जाते हैं और सम्मान देकर प्रेरित किया जाता है. यकीन मानिए इस तरह से उनका बोलना उन लोगो पर  बहुत प्रभाव डालता है जिन्होने एक बार भी रक्तदान नही किया.

जब हम परिवार की बात करते हैं तो मन में बुजुर्गों की छवि के साथ साथ बच्चों की छवि भी उभर कर आती है. बच्चें हमारे देश का भविष्य हैं. अगर हम नींव भी मजबूत बना देंगें तो आने वाले समय में जागरुकता खुद ब खुद बढ जाएगी. स्कूल के पाठय क्रम में या फिर एक स्पेशल क्लास इसी से सम्बंधित होनी चाहिए. छात्रो का  समय समय पर हीमोग्लोबिन चैक होना चाहिए ताकि बचपन से ही वो अपने स्वास्थय का ख्याल रखें.  नियमित चैकअप से खानपान के बारे मे जागरुकता भी बढेगी. खासकर लडकियां पौष्टिक  भोजन लेती रहेंगी और 18 साल के होते होते तक वो बेझिझक रक्तदान कर पाएगीं.

रक्तदान से सम्बंधित एक पत्रिका या अखबार निकले और उसमे पूरे देश के रक्तदान की मुहिम से जुडे लोगों के परिचय और उनका अनुभव हो तो इससे भी जागरुकता लाई जा सकती है. इसी के साथ साथ सोशल नेट वर्किग  साईट जैसे कि फेसबुक पर भी पेज बना कर पूरे देश से जुडा जा सकता है और नई नई जानकरी भी मिल सकती है.

कहने का आशय यह है कि जनता को, उनके परिवार को स्वैच्छिक रक्तदान के प्रति  प्रोत्साहित करने के सैकडो तरीके हैं बस जरुरी है कि हमारे भीतर की लग्न, एक जोश,एक जज्बा, एक कर्मठता को जगाने की. अगर वो जाग गया तो हमें अपने मकसद से कामयाब होने से कोई ताकत नही रोक सकती.

रक्तदान की महत्ता लेख  आपको कैसा लगा ?? जरुर बताईएगा !!! 

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