Monica Gupta

Writer, Author, Cartoonist, Social Worker, Blogger and a renowned YouTuber

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April 29, 2015 By Monica Gupta

छोटी बाल कहानी

छोटी बाल कहानी

छोटी बाल कहानी- बच्चों की कहानियां बहुत रोचक लगती हैं उन्हें पढने में बहुत मजा आता है और अगर कहानी हिंदी अंग्रेजी मिक्स हो तो और भी अच्छा हो … मैने भी एक ऐसी ही रोचक और मनोंरजक कहानी लिखी

छोटी बाल कहानी

बहुत छोटी और प्यारी सी कहानी है जिसे हिंदी भी पढनी आती है और अंग्रेजी भी वो इस कहानी का आनंद ले कर इसे पढ सकते हैं…  बात सन 98 की है. बच्चों के मजेदार लेख और कहानिया समय समय पर राष्ट्रीय समाचार पत्र पत्रिकाओं मे छपते रहे हैं एक ऐसा ही बच्चों की मजेदार कहानी राजस्थान पत्रिका” मे छपी .. कहानी थी डबलू की मिठाई … हिंदी अंग्रेजी मिक्स …

 

छोटी बाल कहानी

छोटी बाल कहानी कैसी लगी ?? जरुर बताईगा !!!

April 24, 2015 By Monica Gupta

लाईव खुदकुशी

लाईव खुदकुशी …

वो तो मीडिया के पास कोई और खबर नही है इसलिए एक ही खबर जंतर मंतर और आम आदमी पार्टी कसूरवार  से चिपके हुए हैं कोई दूसरी खबर आते ही उस पर टूट पडेगी …  फिर तू कौन मैं खामखाह… कौन सा किसान और किसकी आत्महत्या.. !!!

लाईव खुदकुशी किसी व्यक्ति की है या खबरिया चैनलों की कहना मुश्किल है

….किसी के रोने पर टीआरपी, आपतिजनक बयानों को बार बार दिखाने पर टीआरपी .. पूरी तरह से संवेदनहीन है मीडिया.. तस्वीर का एक ही रुख दिखाता है जबकि अगर वो खुद ही जज और  वकील बन कर जनता के सामने खडा  हैं तो तस्वीर के दोनों रुख पेश करने चाहिए  और जहां तक राजनीति की बात है मीडिया मे किस कदर राजनीति हावी है हम सब जानते है…. वाकई ये वो मीडिया नही है जो कभी हुआ करती थी…  अफसोस !!! मिर्च, मसाला , छौक, तडका… कुछ ज्यादा ही हो रहा है … कम डालो ,नपा तुला डालो और ढंग से परोसो भई अन्यथा .. लाईव खुदकुशी होती ही रहेंगी … !!!

April 24, 2015 By Monica Gupta

सोच

सोच

एक जानकार बहुत अमीर हैं और उनकी विशाल हवेली  निर्माणाधीन थी. मैं वहां गई तो उन्होने मुझे कहा कि उपर तक जाकर सारा देख कर आओ. मेरे पूछने पर उन्होनें बताया कि सीढियों पर नही चढ सकते क्योकि घुटनों मॆ दर्द है लिफ्ट अभी लगी नही है. मैं सारा घर देख कर नीचे आ रही थी तो देखा कि पतले दुबले मजदूर कोई सीमेंट की बोरी लेकर उपर चढ रहे थे तो कोई दस दस ईटे … गजब की फुर्ती पाई थी उन मजदूरों ने.

बातो बातों में जानकार ने बताया कि कल मजदूर आपस मे बात कर रहे थे कि मालिक कितना अमीर है इतना आलीशान घर बनवा रहा है जबकि वो सोच रहे थे कि मजदूर कितने सुखी है सुबह से शाम तक आराम से काम करते हैं बीच में अपना टिफिन खाते हैं 1 घंटे की नींद लेते हैं और शरीर इतना मजबूत की भारी भारी सामान भी सीढियों पर ले जाए जबकि उन्हें स्वयं सीढी पर चढने के लिए सहारे की जरुरत होती है और काम का इतना तनाव रहता है कि नींद लाने के लिए भी गोली खानी पडती है.  वो बता रहे थे कि उनके हिसाब से मजदूर ही ज्यादा सुखी है. हालाकि इनका इलाज चल रहा है पर यह बात भी शत प्रतिशत सही है कि ठीक होने के बाद भी वो इतने एक्टिव कभी नही हो पाएगें.

मुझे महसूस हुआ कि वो भीतर से बहुत दुखी है. असल में ये भी सच है कि जो हमारे पास नही होता अक्सर हम उसी की इच्छा रखते हैं. मजदूरों को अमीरी प्रभावित कर रही थी और जानकार को उन मजदूरों का बढिया स्वास्थ्य. देखा जाए तो परेशान हम सब ही है पर अगर सकारात्मक नजरिया रखेंगें तो जिंदगी ज्यादा अच्छे ढंग से जी पाएगे अन्यथा परेशान ही रहेगें… इतने मे मजदूरो की चाय बन कर आ गई और वो सब सुड सुड करके चाय की चुस्की लेने लगे … बाहर निकली तो आंटी खम्भों और दीवार की तराई यानि पानी दे रही थी ताकि वो मजबूत बनें और मैं सोच रही थी कि इतनी इमारते बन गई अब हम उन्ही को मजबूत बनाने के लिए पानी देते हैं जबकि पहले हरियाली के लिए  पौधों को पानी दिया करते थे …

cartoon-building-monica

April 22, 2015 By Monica Gupta

अर्थ दिवस पर अनर्थ

  आज यानि अर्थ दिवस पर अनर्थ हो गया. पर राजनेता क्या इस अर्थ  से सबक ले पाएगें या हमेशा की तरह अर्थ हीन राजनीति ही होती रहेगी
किसान
जंतर मंतर पर आज, किसान रैली में,  राजस्थान के किसान गजेन्द्र सिंह राजपूत ने पेड़ पर चढ़कर आत्महत्या कर ली . सारा मीडिया वहां था और  देखते ही देखते …. !!!!
अर्थ दिवस पर अनर्थ
मेरा विचार यह है कि अगर, जिस समय पता चला कि कोई लटक गया है तो उसी समय भाषण रोक कर तुरंत उस व्यक्ति की और जाना नही भागना चाहिए था और उसे स्वयं अस्तपाल जाते तो शायद …
अगर ये होता तो ऐसा होता अगर वो होता तो ऐसा होता … जो भी हुआ बेहद दुखद हुआ…
प्लीज….  एक दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप न करे! अर्थ दिवस पर अनर्थ हुआ बेहद दुखद 🙁
हे ईश्वर.. सभी को  सदबुधि दो!!!

April 22, 2015 By Monica Gupta

आईए बहस करें

आईए बहस करें
तो जनाब !!! आईए बहस करें! क्या ? मुद्दा क्या है ?

देखिए ये तो बिल्कुल ही गलत बात है . आज के समय मे भी मुझे बहस का मुद्दा बताने की जरुरत है क्या. आज हर टीवी चैनल,हर चौपाल,हर गली हर होटल हर नुक्कड पर एक ही बहस चल रही है और आप पूछ रहे है कि ??? क्या ठीक है चलिए चलिए माफ किया. हां तो बताईए आपको क्या कहना है इस बारे में.

people talking photo

आईए बहस करें
ठहरिए… इससे पहले कि आप कुछ कहे. मै बताना चाह्ती हूं कि आजकल यही सब कुछ सुनने और देखने को मिल रहा है और यकीन मानिए मै भी सच्चे देशभक्त की तरह इसके यानि भ्रष्टाचार को मिटाने के हक मे हूं. कल किट्टी पार्टी मे हम 50 महिलाओ ने इस बात का जोरदार समर्थन किया सभी ने ताली बजा कर् इसका स्वागत किया.देखिए इसकी फोटू भी छपी है आज के अखबार मे.वो अलग बात है कि मेरी तस्वीर जरा सी छिप गई है और शीला जी की तस्वीर ज्यादा साफ आई है. असल मे, हर मीटिंग मे फोटोग्राफर वही लाती है ना तो दे दिए होंगे उसे ज्यादा रुपए. हुह !!!!

चलो खैर अगली बार मे इस फोटोग्राफर को आऊट ना करवा दिया तो मेरा नाम …
हां, तो मै बात कर रही थी भ्रष्टाचार खत्म करने की. आपको पता है कि बच्चो के स्कूल मे भी इसी उपलक्ष मे तरह तरह के आयोजन करवाए गए. निबंध प्रतियोगिता,चित्रकारी और वाद विवाद. मै तो व्यस्तता के कारण जा नही सकी पर इन काम्पीटिशन मे जिसे जज बनाया मै क्या.. हम सब जानते है कि कौन कौन प्रथम , दूसरा और तीसरा स्थान पाएगा. अजी, आपने सही पहचाना जो स्कूल को सबसे ज्यादा दान देते है .. बस उन्ही के बच्चो का ही ख्याल रखा गया ताकि स्कूल मे 10 कम्प्यूटर आ सकें और एक बडा सा हाल बन सकें.
हां, तो बात हो रही थी कि भ्रष्टाचार को खत्म करने की.

आजकल सभी दफ्तरो मे यही ज्वलंत विषय बना हुआ है.वो तो उन लोगो ने शुक्र मनाया कि मामला जरा सा delay  हो गया है नही तो बहुत लोग सुसाईड करने वाले थे. अब इतने आलीशान बंगले ,ठाठ बाठ और बच्चो की ऊचीं शिक्षा कहां और कैसे दिखाते.पर कुल मिला कर चर्चा का ज्वलंत विषय जरुर बना हुआ है और बहस जारी है कि इनका अब क्या होगा.
हां, तो बात हो रही थी भ्रष्टाचार की. आज जगह जगह रैली,जूलूस और हडताल की जा रही है. सब उसका हिस्सा बनना चाह्ते है और तो और इस दौरान समोसा,चाय पार्टी का लुफ्त भी उठा रहे हैं.जिसे देखो वही इस बात की शपथ ले रहा है कि ना वो रिश्वत लेगा और ना ही देगा. अब कहिए आपके क्या विचार है इस बारे मे. अजी कुछ तो बोलिए. लगता है आप इसका समर्थन नही कर रहे. बस… आप जैसे लोगो की वजह से ही तो देश इतनी भयंकर परेशानियो से दो चार हो रहा है. हमे देखिए, ना दिन देख रहे ना रात बस जुटे है इस अभियान मे.
क्या ? क्या कहा आपने ? आप भी जुडे है इस अभियान से ? ह ह हा !!! कैसे ? जरा मै भी तो सुनु. क्या? आपने खुद से वायदा किया है कि आप किसी को रिश्वत नही देंगे. और आप यह चाह्ते है कि मै भी खुद से यानि अपने दिल मे झांक कर खुद से वायदा करु कि मै खुद इसका समर्थन नही करुगी. बस अपने सच्चे दिल से वायदा करुं.
माफ करे महाशय. इतना समय नही है मेरे पास कि अकेले बैठ कर चिंतन करु और खुद से प्रण ले लू कि कभी ना रिश्वत दूगी और ना लूगी. इतना समय नही है मेरे पास. आजकल तो इतने चैनल और सभाओ के महाबहस मे भाग लेने के लिए निमंत्रण आ रहे है कि खुद से बात करने का यानि आत्मचिंतन का समय ही नही है मेरे पास.हां अगर आपके पास समय है तो आप भी इस महा बहस मे शामिल हो सकते हैं. मै आपके इस महाबहस मे शामिल होने की सिफारिश जरुर कर सकती हू असल मे,मेरी पहुंच बहुत ऊपर तक है.ह ह हा.इसलिए …क्या आप शामिल ही नही होना चाह्ते. हद है लगता है आपने देश प्रेम का जज्बा ही नही है.

चलिए सादर नमस्कार.फिलहाल मै बहुत व्यस्त हूं …हुह … ना जाने कहां से चले आते है और कहते है कि खुद को बदलो जमाना बदल जाएगा…..हुह !!!

आईए बहस करें … कैसा लगा ?? जरुर बताईएगा !!

April 16, 2015 By Monica Gupta

किसान की दुर्दशा

किसान की दुर्दशा – फसल बर्बाद होने की वजह से किसान आत्महत्या कर रहे  हैं. उत्तर प्रदेश में पिछले कुछ महीनों में 100 से भी ज्यादा किसान खुदकुशी कर चुके हैं जबकि महाराष्ट्र, पंजाब, आंध्र प्रदेश और देश के दूसरे हिस्सों से भी किसानों की आत्महत्या की खबरें लगातार मिल रही हैं।

किसान की दुर्दशा

मीडिया में किसानों की आत्महत्याओं की बातें आ रही हैं, लेकिन मीडिया को इस मुद्दे को लेकर जितना गंभीर होना चाहिए, वह शायद नहीं है। राजनेताओं की लड़ाई में किसान का जो असली मुद्दा है, वह छुप जाता है।  टीवी चैनलों पर बहस में  किसान नहीं, राजनेता नज़र आते हैं।

राजनेता भी किसानों को लेकर बस अपने तरीके से ‘गंभीर’ नज़र आ रहे हैं। कोई रैली के जरिये किसानों का मुद्दा उठाने की कोशिश कर रहा है, तो कोई मुआवजे की बात कर रहा है। प्रधानमंत्री जी  ‘मन की बात’ से लेकर राजनीति के मंच तक किसान की बात कर रहे हैं।

प्रधानमंत्री ने किसानों के लिए मुआवज़ा भी बढ़ा दिया है, जो अच्छी बात है। लेकिन सवाल यह उठता है कि क्या यह मुआवजा किसानों तक पहुंच पाता है। अगर पहुंचता है, तो कितना ???

पिछले ही दिनों ऐसी खबरें आईं कि उत्तर प्रदेश के कुछ इलाक़ों में किसानों को मुआवजे के रूप में 50 से लेकर 200 रुपये तक के चेक दिए जा रहे हैं। सोचने की बात है कि ये मुआवजा है या किसानों के साथ मजाक।

अगर ऐसा ही हाल रहा, तो चाहे कितना भी मुआवज़ा बढ़ा दिया जाए, किसानों का हाल कभी सुधरने वाला नहीं है.. और भविष्य मे कुछ ऐसी खबर भी देखने सुनने को मिल सकती है .

cartoon-kissan suicide -monica gupta

किसान की दुर्दशा

किसान रैली

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