रक्तदान की महत्ता
रक्तदान की महत्ता
इस बात मे कोई दो राय नही कि स्वैच्छिक रक्तदान को लेकर आम जन में जागरुकता पहले की अपेक्षा बढी है और वो बढ चढ कर रक्तदान के लिए आगे आ रहे हैं पर इस बात से भी नकारा नही जा सकता कि इस क्षेत्र में बहुत सी ऐसी भ्रांतियाँ या जानकारी का अभाव है जिनकी वजह से लोगो के बढते कदम पीछे हट जाते हैं. तो ऐसे मे क्या तरीके अपनाए जिनसे ना सिर्फ लोग ही आगे आए बल्कि पूरे परिवार के साथ आकर अन्य परिवारों को भी जागरुक करें.
सबसे पहले तो हमें खुद को ही जागरुक करना होगा. जैसा कि अगर हम चाह्ते हैं कि रक्तदान के क्षॆत्र में शत प्रतिशत स्वैच्छिक रक्तदाता हो तो, ऐसे में, कुछ लोगो का कहना यह भी होता है कि ये कोई होने वाली बात है मतलब ही नही. सबसे पहले तो हमें ये नकारात्मक मानसिकता खत्म करनी होगी.विभिन्न उदाहरणों से लोगो को संतुष्ट करना होगा जैसाकि हाल ही मे देश से पोलियों खत्म हुआ है. जिसके बारे में सोचा भी नही जा सकता था तो ये सोचना कि यह असम्भव है सबसे पहले तो मन से यह विचार निकालवाना होगा और फिर ये कैसे सम्भव है इस पर विचार करना आरम्भ करना होगा. इसके लिए सबसे जरुरी है कि हमारे पास रक्तदान से सम्बंधित बातों की जानकारी हो. अक्सर आधी अधूरी जानकारी के चक्कर में ना तो हम खुद और न ही दूसरो को मोटिवेट कर पाते हैं. यह जानकारी हमें अपने अपने क्षेत्र के डाक्टर, रक्तदाता या ब्लड बैंक से विस्तार से मिल सकती है.
जानकारी मिलने के बाद हमें शुरुआत अपने ही घर से करनी होगी. हम सभी जानते हैं कि घर परिवार की मुख्य धुरी महिला होती हैं. आमतौर पर यह देखा गया है कि महिलाएं अपने पति या बच्चों के रक्तदान करने की बात तो दूर इस विषय पर चर्चा तक करना पसंद नही करती. इसका सीधा सीधा कारण है उनमें जानकारी का अभाव होना. बहुत से ऐसे उदाहरण मैने देखें हैं जिसमें पति पचास बार से भी ज्यादा बार रक्तदान कर चुका है पर पत्नी को नही बताया या घर मे मां को नही बताया कि अगर बताया तो बहुत डांट पडेगी. जबकि ऐसा नही है. महिलाए सारे परिवार को बेहद समझादारी से सहेज कर रखती हैं ऐसे में बस जरुरत है कि रक्तदान के बारे मे विस्तार से समझाने की और उनकी सारी भ्रांतियाँ को दूर करने की. अगर वो समझ गईं तो तो ना सिर्फ वो अपने घर परिवार के लोगो को जागरुक करेगी बल्कि खुद भी रक्तदान के लिए आगे आएगीं. वैसे अपवाद भी बहुत हैं इस क्षेत्र मॆ. समाज मे ऐसी भी महिलाए हैं जो रक्तदान की महत्ता समझती हैं पर इनकी गिनती बस ऊंगलियों पर ही है जबकि हमें इस संख्या को असंख्य करना है.
इसके साथ साथ देश के जाने माने रक्तदाताओं के साथ जनता की समय समय पर राष्ट्रीय स्तर या राज्य स्तर पर रुबरु मुलाकात करवाई जाए ताकि वार्तालाप के माध्यम से जनता के मन में जो भी विचार हैं वो सांझा किए जा सकें. कुछ समय पहले रक्तदान के क्षेत्र में जबरदस्त कार्य कर रहे देवव्रत राय साहब को तीन दिन की ट्रेनिंग के सिलसिले में पंचकुला आमंत्रित किया गया था. उनके अनुभवों ने जनता को प्रेरित करने के साथ साथ बहुत प्रभाव भी छोडा. उनका आना एक मील का पत्थर साबित हुआ इसलिए समय समय पर ऐसे व्यक्तित्व को आमंत्रित करते रहेंगें तो निसंदेह जनता की रक्तदान से सम्बंधित जानकारी भी मिलेगी और ज्ञिज्ञासाओं का समाधान भी होता रहेगा.
इस बात में कोई शक नही कि विभिन्न राज्यों के कुछ लोग निस्वार्थ भाव से रक्तदान के क्षेत्र में बहुत सराहनीय कार्य कर रहे हैं. टीम बना कर या ब्लाग के माध्यम से या फिर वेब साईट बनाकर अपने अपने स्तर पर प्रयास कर रहे हैं. उनके काम करने के तरीके को, चित्रों या पोस्टर्स के माध्यम से प्रदर्शिनी रुप में लगाया जाएगा तो बहुत कुछ सीखने को मिलेगा.
कुछ खास मौकों पर रक्तदाताओं और उनके परिवारो को सम्मानित करते रहने से भी रक्तदान के प्रति उत्साह बढता है. मैने स्वयं अनेक कार्यक्रम ऐसे देखें हैं जहां मंच पर रक्तदाता परिवारों को बुला कर उनके अनुभव सांझा किए जाते हैं और उन्हें सम्मानित भी किया जाता है. इतना ही नही जिसने एक बार भी (खासतौर पर महिला) रक्तदान किया है उसके अनुभव भी पूछे जाते हैं और सम्मान देकर प्रेरित किया जाता है. यकीन मानिए इस तरह से उनका बोलना उन लोगो पर बहुत प्रभाव डालता है जिन्होने एक बार भी रक्तदान नही किया.
जब हम परिवार की बात करते हैं तो मन में बुजुर्गों की छवि के साथ साथ बच्चों की छवि भी उभर कर आती है. बच्चें हमारे देश का भविष्य हैं. अगर हम नींव भी मजबूत बना देंगें तो आने वाले समय में जागरुकता खुद ब खुद बढ जाएगी. स्कूल के पाठय क्रम में या फिर एक स्पेशल क्लास इसी से सम्बंधित होनी चाहिए. छात्रो का समय समय पर हीमोग्लोबिन चैक होना चाहिए ताकि बचपन से ही वो अपने स्वास्थय का ख्याल रखें. नियमित चैकअप से खानपान के बारे मे जागरुकता भी बढेगी. खासकर लडकियां पौष्टिक भोजन लेती रहेंगी और 18 साल के होते होते तक वो बेझिझक रक्तदान कर पाएगीं.
रक्तदान से सम्बंधित एक पत्रिका या अखबार निकले और उसमे पूरे देश के रक्तदान की मुहिम से जुडे लोगों के परिचय और उनका अनुभव हो तो इससे भी जागरुकता लाई जा सकती है. इसी के साथ साथ सोशल नेट वर्किग साईट जैसे कि फेसबुक पर भी पेज बना कर पूरे देश से जुडा जा सकता है और नई नई जानकरी भी मिल सकती है.
कहने का आशय यह है कि जनता को, उनके परिवार को स्वैच्छिक रक्तदान के प्रति प्रोत्साहित करने के सैकडो तरीके हैं बस जरुरी है कि हमारे भीतर की लग्न, एक जोश,एक जज्बा, एक कर्मठता को जगाने की. अगर वो जाग गया तो हमें अपने मकसद से कामयाब होने से कोई ताकत नही रोक सकती.
रक्तदान की महत्ता लेख आपको कैसा लगा ?? जरुर बताईएगा !!!
प्यारा परिवर्तन
मन की बात
मन की बात
मन में हम सभी के हजारों बाते होती है कोई कह पाता है तो किसी के मन मे ही रह जाती है अब प्रधान मंत्री ने जब डेंगू मच्छर को स्वच्छता के लिए धन्यवाद दिया तो वो बोल उठा अरे वाह !!! आपने तो मेरे मन की बात कह दी !!!
असल में वो क्या है ना स्वच्छता की बाते और वायदे तो बडे बडे हुए थे पर वो मिशन नाकामयाब लग रहा था. फिर आया मौसमी डेंगू … जिसकी वजह से प्रशासन, सरकार जनता हरकत में आई और बचाव के लिए ही सही स्वच्छता रखनी शुरु कर दी … वैसे वो भी हैरान है कि मन की बात उन्होनें कैसे जान ली…
रिटायरमेंट

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रिटायरमेंट
मोहन कुमार जिन्हें कभी लोग भाई साहब या बडे भाई के नाम से ज्यादा जानते थे बार बार अपना मोबाईल और लैंड लाईन चैक कर रहे थे क्योकि बहुत समय से कोई फोन की घंटी नही बजी थी. उन्हे लग रहा था कि फोन मे शायद कोई गडबडी ना हो पर सब ठीक था इसलिए बार बार चैक कर रहे थे. अभी दस दिन ही हुए है उनकी रिटायरमेंट को. शहर मे बहुत अच्छे सरकारी ओहदे पर थे वो. नौकरी के दौरान उन्हे ना दिन का चैन ना रात की नींद .. हर समय वक्त बेवक्त बस कुछ अंंजाने रिश्तेदारों तो कभी जान पहचान नाते रिश्तेदारो के फोन ही घनघनाते रहते.
बडे भाई … आपकी गुडिया की शादी है जरुर आना है और हां अगर सात आठ गैस सिलेंडर का इंतजाम हो जाता तो..! भाई साहब… हम आज सपरिवार आपसे मिलने आ रहे है हफ्ता भर रुकेंगें. भाई जी … पासपोर्ट बनवाना है जल्दी. मुन्ना विदेश जाने की सोच रहा है .. आप साईन कर देना. भाई साहब… चाची बीमार है सोच रहे हैं कि आपके पास ले आए आप सरकारी अस्पताल मे कह कर अच्छा इलाज करवा दोगें .
बडे भाई साहब … सुना है आपके एरिया मे जमीन बिक रही है जरा सस्ते मे सौदा करवा दो .. !! भाई साहब … आपके भतीजे को जेल हो गई है . जरा जज से बात करके मामला रफा दफा तो करवा दो.
और बडे भाई या भाई साहब बने मोहन कुमार सभी का काम करवा देते. इस सब में घर वाले भी अक्सर नाराज हो जाते इस बात पर अक्सर घर में तनाव भी हो जाता था पर ….. !!!
मोहन कुमार इसी ख्यालो मे ही गुमसुम थे कि अचानक टेलिफोन की घंटी बजी. उनके चेहरे पर खुशी दौड गई.गला साफ करते हुए उन्होने फोन उठाया पर शायद वो गलत नम्बर था…
और वो सोच रहे थे कि उनके परिवार की नाराजगी कितनी जायज होती थी…
रिटायरमेंट….
हे भगवान
हे भगवान
उफ्फ ये मोबाईल
काफी दिनो से मेरी एक सहेली से फोन पर बात नही हुई तो सोचा कि चलो फ्री हूं उसे फोन मिला लू. असल मे, मेरी सहेली जब भी बात करती है इतनी अच्छी तरह बात करती है मानो सारा प्यार ही उडेल रही हो. उससे बात करके मन खुश हो जाता है.
उसी खुशी मे मैने फोन मिला लिया पर मेरी आशा के विपरीत उसने पूछा कि कौन बोल रहा है? पहले मैने सोचा कि मजाक कर रही है फिर सोचा शायद मुझसे नम्बर गलत न मिल गया पर नम्बर भी सही था. जब वो नही पहचानी तो मुझे बताना पडा कि मै कौन बोल रही हूं. उसने तुरंत क्षमा मांगी और बताया कि असल में, उसका मोबाईल चोरी हो गया. नए मोबाईल मे नम्बर फ़ीड नही है इसलिए पहचान नही पाई. खैर उस समय तो मैने फोन रख दिया पर सोचने लगी कि वाकई में मोबाईल हमारी जिंदगी से बहुत बुरी तरह से जुड गया है कि इसके गुम होने पर क्या सब खत्म !!
मैं सोच ही रही थी कि अचानक घर पर मेहमान आ गए. वो बैठे ही थे कि अचानक उनके पास किसी का फोन आया.फोन सुनते ही वो घबरा गए और पूछ्ने लगे कि ये कब हुआ! अचानक ऐसे कैसे हो सकता है! हे भगवान! अब क्या होगा उसके बिना कैसे होगा?कैसे रहेगी ?? मैं बात सुन रही थी और किसी अनिष्ट आशंका को लेकर बुरी तरह धबरा गई. मन मे बुरे बुरे विचार आने लगे. फोन रखते ही मेरे पूछ्ने पर कि क्या हुआ उन्होने धबराए स्वर में बताया कि बिटिया का फोन था अपनी सहेली के मोबाईल से कर रही थी. असल में, उसका मोबाईल खो गया है…. और वो तनाव मे ही बाहर निकल गए.
हे भगवान
उफ्फ ये मोबाईल 🙂
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