Monica Gupta

Writer, Author, Cartoonist, Social Worker, Blogger and a renowned YouTuber

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You are here: Home / Archives for मोनिका गुप्ता

June 20, 2015 By Monica Gupta

सम्मान का दुरुपयोग

सम्मान का दुरुपयोग   कुछ देर पहले नेट पर एक खबर पढी कि मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने पूर्व क्रिकेटर और राज्यसभा सांसद सचिन तेंदुलकर के ख़िलाफ एक जनहित याचिका स्वीकार की है. उन पर भारत रत्न के दुरुपयोग का आरोप लगाया गया है.

याचिका के अनुसार सचिन भारत रत्न सम्मान का ग़लत इस्तेमाल कर ‘व्यावसायिक उत्पादों के प्रचार के ज़रिए पैसा कमा रहे हैं’.

मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय, जबलपुर के मुख्य न्यायाधीश एएम खानविलकर और जस्टिस के के त्रिवेदी की खंडपीठ ने इसे मंज़ूर करते हुए असिस्टेंट सॉलिसिटर जनरल से पूछा है कि क्या सुप्रीम कोर्ट ने इस तरह के मामलों में कोई दिशा-निर्देश दिए हैं.उन्हें इसके लिए एक सप्ताह का समय दिया गया है. मामले की अगली सुनवाई 23 जून को होगी.’पैसा कमा रहे हैं’ यह याचिका भोपाल के रहने वाले वीके नासवाह ने दायर की है. नासवाह ने कहा, “सचिन ने देश के लिए खेलते हुए बहुत नाम कमाया है. लेकिन अब वो देश के सबसे बड़े नागरिक सम्मान भारत रत्न की ‘प्रतिष्ठा’ का इस्तेमाल कर विभिन्न उत्पादों का प्रचार कर पैसा कमा रहे हैं. ये उस सम्मान की मर्यादा और सिद्धांतों से मेल नहीं खाता है.”

नासवाह ने अपनी याचिका में अनुरोध किया है कि सचिन के व्यावसायिक उत्पादों के प्रचार पर पूरी तरह से रोक लगनी चाहिए या नैतिकता के नाते उन्हें इस पुरस्कार को लौटा देना चाहिए. ‘अगर वह ऐसा नही करते है तो केंद्र सरकार को उनसे सम्मान वापस ले लेना चाहिए.’सचिन अभी 12 उत्पादों का प्रचार कर रहे है.

सम्मान का दुरुपयोग

case against sachin tendulkar, demand to take back bharat ratan

Case Against Sachin Tendulkar, Demand To Take Back Bharat Ratan See more…

बात ज्यादा पुरानी नही है जब सचिन तेंदुलकए के भारत रत्न सम्मान देने का मुद्दा बहुत गरमाया था और जब सम्मान मिला तो न जाने कितनी करोड आखॆ इस सम्मान को देख कर नम हुई थी. इस विषय पर जब मैने बहुत लोगों से बात की … लगभग सभी  लोगों की राय यही थी कि उन्हें अब विज्ञापनों में काम नही करना चाहिए और सार्थक और सामाजिक मुद्दे उठाने चाहिए ताकि लोग उनसे सीख ले सकें. मेरा भी यही विचार है. भारत रत्न सम्मान की गरिमा बनाई रखी रहनी चाहिए और बेवजद विवादों ने पड कर सामाजिक कार्यों से जुडे मुद्दों पर ध्यान दे…

सम्मान का दुरुपयोग

sachin tendulkar photo

Photo by arunramu

June 20, 2015 By Monica Gupta

Yoga Not now

cartoon yoga no by monica gupta

Yoga Not now देखा जाए तो हम लोग बहाना एक्सपार्ट होते हैं. कोई शक नही चीजों  की सराहना भी करते हैं पर  बहाने भी तैयार होते हैं जैसाकि अब इन श्रीमति जी को ही लीजिए … बहुत प्रशंसा कर रहे हैं कि योग बहुत अच्छा रहता है … योग करना चाहिए पर जब अपने करने की बात आती है तो ये बोल रही हैं कि अच्छा है पर वो अगले साल सोचेगी … अरे !!! सोचेगी … ये भी नही कहा कि अगले साल से करुगी … वो भी सोचेगी … हे भगवान !!!

  IBN Khabar

ये ऐप खासतौर पर उन लोगों को लिए तैयार किया गया है, जिनको घर में समय नहीं मिलता। तो वो फुर्सत में ऑफिस में ही, यहां तक कि अपनी ऑफिस चेयर पर बैठे-बैठे ही, वर्क स्टेशन पर काम करते करते ही योगा कर सकते हैं। इसमें ज्यादातर योगासन उसी तरह से तैयार किए गए हैं, जो चेयर पर बैठे-बैठे ही किए जा सकते हैं। Read more…

वैसे योग वाकई बहुत अच्छा है Yoga Not now वाला आईडिया सोच रही हूं ड्राप ही कर दूं ..  🙂

 

  योग दिवस

नयी दिल्ली : अंतरराष्‍ट्रीय योग दिवस के मद्देनजर देश और विदेश में तैयारी जोरो पर चल रही है. केंद्रीय विदेश मंत्री सुषमा स्वराज योग दिवस में भाग लेन न्यूयॉर्क रवाना हो गई हैं. वे न्यूयॉर्क में ही योग दिवस के कार्यक्रम में शिरकत करने वाली हैं. वहीं भाजपा के राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष अमित शाह पटना में योग दिवस मनायेंगे. राष्ट्रीय राजधानी में भी 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर कई दिग्गज भाग लेंगे जिसको देखते हुए सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए हैं.यहां मुख्य कार्यक्रम के लिए सुरक्षा कर्मियों की 30 कंपनियों को राजपथ एवं आसपास के क्षेत्रों में तैनात किया जायेगा.

दिल्ली पुलिस सहित करीब 5000 सुरक्षा कर्मियों को योग स्थल एवं आसपास की सुरक्षा के लिए तैनात किया जायेगा. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित हजारों योग अभ्यासी सुबह होने वाले कार्यक्रम में भाग लेंगे. खुफिया एजेंसियों द्वारा अलर्ट जारी किये जाने के बाद दिल्ली पुलिस ने कार्यक्रम के दौरान किसी भी हवाई खतरे को टालने के लिए पतंग, गुब्बारे, ग्लाइडर एवं माइक्रो लाइट वस्तुओं को उडाने पर रोक लगा दी है. इसके अलावा फोटोग्राफी के लिए ड्रोन उडानों पर भी प्रतिबंध लगा दिया गया है. दिल्ली पुलिस आयुक्त बी एस बस्सी ने कहा, ‘‘राजपथ पर अंतरराष्ट्रीय योग दिवस कार्यक्रम के लिए पूर्ण सुरक्षा कार्यक्रम किये गये हैं. 18 डीसीपी एवं 30 कंपनियां इस अवसर पर ड्यूटी पर तैनात रहेंगी.’’ अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर आयुष मंत्रालय द्वारा द्वारा आयोजित 35 मिनट का कार्यक्रम सुबह साढे सात बजे शुरू होगा. बस्सी ने कहा कि स्थानी पुलिस सुरक्षा प्रबंधों पर निगाह रख रही है तथा इलाके में खोजी कुत्तों एवं बम निष्क्रिय दस्तों की मदद से छानबीन की जा रही है. पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि 18 डीसीपी स्तर के अधिकारी सुरक्षा प्रबंधों पर निगाह रख रहे हैं जो गणतंत्र दिवस परेड के समान है. उन्होंने कहा कि योग दिवस कार्यक्रम पर करीब 40 हजार लोगों के भाग लेने की संभावना है. इसमें मंत्रियों एवं सांसदों सहित करीब 500 गणमान्य अतिथि होंगे. अधिकारी ने कहा कि इसके अलावा हजारों अधिकारी और करीब पांच हजार बच्चे कार्यक्रम में योग करेंगे. चौदह जून से ही यातायात पर पाबंदियां लगा दी गयी है. राजपथ पर विजय चौक से लेकर इंडिया गेट तक यातायात को रोक दिया गया है तथा क्षेत्र की लगातार निगरानी की जा रही है. See more…

June 20, 2015 By Monica Gupta

फादर्स डे

beer bar  photo

21 june फादर्स डे के लिए सोचा कुछ बच्चों से बात की जाए और उनके पापा के बारे मे विचार लिए जाए कल कुछ बच्चों से बात भी की. लेख लिख ही रही थी कि तभी डोर बेल हुई.

बाहर देखा तो तपती धूप मे पसीने से भीगे दो छोटे बच्चे खडे थे. वो पैन बेच रहे थे. मेरे मना करने पर वो बोले कि ले लो आज सुबह से बोनी नही हुई. बहन ने भी कुछ नही खाया. मैने कहा कि तुम्हारे ममी पापा ?? वो बोले पापा शराब पीते हैं उन्ही की वजह से हमे काम करना पड रहा है. मां मजदूरी करती है. उनकी उदासी देख कर बीस रुपए के पैन तो मैने खरीद लिए. पर अचानक मेरी सोच का रुख बदल गया और ऐसे पापाओ पर गुस्सा आने लगा जो शराब के लिए पागल हुए जाते हैं.

बात सिर्फ गरीब लोगों की नही बल्कि हम जैसे मिडल क्लास और हाई प्रोफाईल परिवारों की भी है. कुछ समय पहले एक क्लब मे मीटिंग और डिनर था. रात के 12 बज चुके थे. बच्चे बार बार मम्मियों को घर चलने के लिए कह रहे थे और पापा लोग जुटे थे शराब पीने में…बस अभी चलते है ..कह कह कर एक बजा दिया और लडखडाते हुए खडे हुए. उन बच्चों के चेहरे से गुस्सा साफ झलक रहा था. क्या इज्जत और प्यार रह जाएग बच्चों के मन में अपने पिता के लिए …. कैसे खुश होंगें वो फादर्स डे पर…  अगर आप भी अच्छे पिता बनना और कहलाना पसंद करना चहते हैं तो बच्चों की भावनाओं का ख्याल रखिए … शराब ने कोई भला नही करना आपका बल्कि आपको नुकसान ही पहुंचा रही है.

फादर्स डे की शुभकामनाएं अभी नही … जिस दिन आप इस बुरी गंदी आदत से छुटाकार पा लेंगें उस दिन होगा आपका फादर्स डे ..”

यकीन मानिए …  फादर्स डे टापिक पर लिखने का मन की नही किया और मैं शराब की रोकथाम पर कौन क्या क्या आवाज उठा रहा हैं यही सब सर्च करने लगी.

फादर्स”जरा नही “बहुत” सोचने की दरकार है !!!

खुशी है कि महिलाए, खासकर  गावों की, इस मामले में बहुत पहल कर रही है ..

 

Bender beaten his wife,

वडोदरा, जेतपुर। एक शराबी का पत्नी के साथ मारपीट करना शराब का गोरखधंधा करने वालों पर भारी पड़ गया। साथ ही गुजरात में मद्य निषेध व्यवस्था की जमीनी हकीकत की पोल भी खुल गई।

शिथोल गांव में एक शराबी के पत्नी को पीटने की बात पता चलने पर शुक्रवार को महिलाएं इकठ्ठी हुईं। लाठी-डंडे लेकर शराब के ठेकों पर हमला बोल दिया। आक्रोशित-एकजुट महिलाओं को देख कर कई बुटलेगर घरों में ताला लगाकर फरार हो गए। Read more…

 

Rajasthan Patrika:wine contracts resist, women are the main route jammed

बहरोड़ शराब ठेके के विरोध में गुरुवार को कस्बे की भृर्तहरि कॉलोनी की महिलाओं ने बहरोड़ कस्बे के मुख्य मार्ग पर जाम लगा दिया। जाम से मुख्य मार्ग के दोनों ओर वाहनों की लम्बी कतार लग गई। ऐसे में गर्मी में परेशान वाहन चालक प्रदर्शन कर रही महिलाओं से जाम खोलने की गुजारिश करते रहे, लेकिन महिलाओं ने उनकी एक नहीं सुनी। सूचना पर मौके पर पहुंची पुलिस भी महिलाओं से जाम खुलवाने का प्रयास कर रही है।

महिलाओं ने बताया कि जिस जगह पर शराब का ठेका खुला हुआ है उसके नजदीक मंदिर, स्कूल व पार्क है। ऐसे में शराब का ठेका होने से उन्हेें तथा बच्चों को समस्या का सामना करना पड़ रहा है। महिलाओं ने बताया कि उक्त ठेका अन्य कहीं स्थानांतरित करने की मांग वे पूर्व में कर चुकी हैं, लेकिन अभी तक कोई गौर नहीं किया जा रहा है। यह प्रदर्शन तीसरी बार किया जा रहा है। शराब ठेकेदार ठेका खोलने पर आमदा है, जबकि कॉलोनीवासी ठेका नहीं खुलने देंगे।

उल्लेखनीय है कि महिलाएं जब भी विरोध में सड़क पर उतरती हैं पुलिस प्रशासन व ठेकेदार कुछ दिन के ठेका बंद करवा देते हैं। कुछ दिन बाद फिर से यह ठेका खुल जाता है। लोगों की मांग है कि आबादी क्षेत्र में व भृर्तहरि मंदिर के समीप ठेका नहीं खोला जाए। See more…

……. और जो पिता शराब नही पीते या छोडने का फैसला कर चुके हैं उन्हें हैप्पी फादर्स डे … !!!!

June 19, 2015 By Monica Gupta

मानवीय आधार पर

मानवीय आधार पर

Advani cartoon by monica guptaमानवीय आधार पर …..

बेशक मानवीय आधार पर मदद की बात हो रही है पर अडवाणी जी का कुर्सी के प्रति प्रेम आज भी सच्चा है और मदद की आज भी दरकार है !!!

– www.bhaskar.com

भाजपा नेताओं की दलील है कि स्वराज ने ऐसा ‘मानवीय’ आधार पर किया, क्योंकि ललित मोदी की प|ी कैंसर पीड़ित हैं, पुर्तगाल में उनकी सर्जरी होनी थी और इस मौके पर मोदी की वहां आवश्यकता थी। मगर सामने आए दो तथ्यों ने इस तर्क को कमजोर किया है। पुर्तगाल में 14 वर्ष से अधिक उम्र के व्यक्ति के ऑपरेशन के लिए किसी बालिग परिजन द्वारा सहमति देने की अनिवार्यता नहीं है। फिर मोदी को यात्रा दस्तावेज दो साल के लिए मिले, जिसे आधार बनाकर उन्होंने दुनिया के विभिन्न हिस्सों की सैर की है। बहरहाल, बात यहीं तक होती तो इस प्रकरण को विदेश मंत्री की निर्णय संबंधी भूल मान लिया जाता। मगर उनके पति स्वराज कौशल की अतीत में ललित मोदी से निकटता और उनकी बेटी बांसुरी स्वराज के मोदी की लीगल टीम का हिस्सा रहने की बातें सामने आने से विपक्ष को ‘लाभ की अदला-बदली’ और राजनीतिक नैतिकता के उल्लंघन का आरोप लगाने का अवसर मिला है। यह केंद्र सरकार और भाजपा का दायित्व बनता है कि वे इन मुद्‌दों पर विश्वसनीय स्पष्टीकरण प्रस्तुत करें। ऐसा करने में वे विफल रहे, तो यही धारणा बनेगी कि सुषमा स्वराज ने अपने पद की गरिमा के अनुरूप आचरण नहीं किया। क्या ऐसी धारणा बनना भाजपा के हित में होगा? See more…

  LiveHindustan.com

विदेश मंत्री सुषमा स्वराज द्वारा आईपीएल के पूर्व प्रमुख ललित मोदी के देश छोड़कर बाहर जाने में मदद करने के आरोपों के बाद कांग्रेस ने रविवार को उनके इस्तीफे की मांग की। कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने कहा, ‘सुषमा स्वराज को नैतिकता के आधार पर इस्तीफा दे देना चाहिए।’ ब्रिटेन के एक समाचार पत्र में प्रकाशित रपट के मुताबिक, ब्रिटेन में भारतीय मूल के सांसद कीथ वाज ने ललित मोदी को यात्रा दस्तावेज उपलब्ध कराने के लिए सुषमा स्वराज के नाम का इस्तेमाल कर ब्रिटेन के शीर्ष आव्रजन अधिकारी पर दबाव बनाया था। दिग्विजय ने कहा, ‘मंत्री ने ललित मोदी जैसे एक व्यक्ति की मदद की, जिसके खिलाफ यहां लुकआउट नोटिस जारी किया गया था। यह बहुत गंभीर मामला है। विदेश मंत्री ऐसे व्यक्ति की मदद कर रही हैं, जो फरार है।’ उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इस मामले पर स्पष्टीकरण देना चाहिए। कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने भी इस मामले पर सुषमा और भाजपा पर निशाना साधा। सुरजेवाला ने कहा कि इससे एक मनी लॉड्रिंग और मैच फिक्सर ललित मोदी की भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के साथ घनिष्ठ संबंधों का पता चलता है। उन्होंने कहा, ‘क्या किसी भगोड़े की मदद करने के लिए नया नियम बनाया गया है? क्या उनकी भविष्य में भी मदद की जाएगी? यह तो राष्ट्र विरोधी है।’ उन्होंने कहा, ‘मैं प्रधानमंत्री, गृहमंत्री और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह से पूछना चाहता हूं कि यदि कल दाऊद इब्राहिम मानवीय आधार पर मदद मांगे तो क्या उसकी भी मदद की जाएगी।’ बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) की अध्यक्ष मायावती ने कहा कि इस मुद्दे को संसद में उठाया जाएगा। मायावती ने कहा, ‘हमारी मांग है कि इस मामले की जांच हो। हम इसे संसद में उठाएंगे।’ इस बीच विदेश मंत्री ने ट्विटर पर स्पष्टीकरण दिया और कहा कि उन्होंने मानवीय आधार पर ललित मोदी को देश से बाहर जाने में मदद की थी, क्योंकि उनकी पत्नी कैंसर से जूझ रही थी। उन्होंने 2०13 में सर्जरी भी कराई थी। उन्होंने कहा कि यह घटना उनके मंत्री बनने से पहले की है। See more…

June 18, 2015 By Monica Gupta

वो तीस दिन

वो तीस दिन

वो तीस दिन ” मेरा पहला बाल उपन्यास और अब तक की सातवीं प्रकाशित किताब है. नेशनल बुक ट्रस्ट, इंडिया की ओर से प्रकाशित बाल उपन्यास सन 2014 में प्रकाशित हुआ.

बाल उपन्यास की मुख्य पात्रा है कक्षा दस ने पढने वाली मणि. जोकि किसी भी बच्चे की तरह बेहद शरारती चुलबुली है पर कक्षा दस की परीक्षा खत्म होने के बाद नतीजा आने से पहले तीस दिनों में ऐसा क्या होता है कि मणि के एक जबरदस्त बदलाव आ जाता है…

कहानी बेहद रोचक, मनोरंजक और शिक्षाप्रद है.

इसकी एक छोटी सी झलक ….

वो तीस दिन
मै हूँ मणि। आज मेरी दसवीं क्लास की बोर्ड़ परीक्षा का आखिरी दिन है। हे भगवान! कितनी टेन्शन थी ना………। आज पता है मैं घर जाकर सबसे पहले क्या करूंगी। शर्त लगा लो आप लोग बता ही नहीं सकते। मैं सबसे पहले टेलिविज़न चलाऊंगी और दो महीने से जो पिक्चरें मैंने नहीं देखी वो देखूंगी और अपने मोबार्इल पर आए मैसेज पढूंगी। पता है पिछले दो महीनों से मम्मी-पापा ने मुझे कुछ भी नहीं करने दिया बस…………..पढ़ार्इ………..पढ़ार्इ………पढ़ार्इ……… इस करके………. आज मैं ढे़र सारी मनमानी करने वाली हूं।
उफ……….शुक्र है………. आज आखिरी पेपर उम्मीद के अनुसार ठीक ही हो गया अब तो जल्दी थी घर पहुंचने की। मैं रास्ते में जा रही थी कि मेरे सामने वाली सड़क पर एक स्मार्ट सी युवती, छोटे-छोटे बालों वाली, आंखों में धूप का चश्मा लगाए, बैग कन्धे पर लटकाए सड़क पार कर रही थी कि शायद उसका पांव फिसल गया या पता नहीं………..क्या हुआ………पर वो बहुत बुरी तरह से गिर गर्इ। पता नहीं उसे देखकर मेरी बहुत बुरी तरह हंसी निकल गर्इ और मैं ठहाका लगाती ताली बजाकर हंसती हुर्इ आगे बढ़ी। उधर वो तुरन्त उठी मेरी तरफ देखा फिर अपने कपड़ों को झाड़ा और ऐसे चल दी मानो कुछ हुआ ही ना हो। मैं हंसती हुर्इ आगे बढ़ी। सामने से पुनीता आ रही थी उसने बताया कि वो आज से ही ब्यूटीशियन का कोर्स ज्वाइन कर रही है और उसकी बहन कुकिंग का। मैंने मुंह बिचका लिया और बोली भर्इ मैं तो आराम करूंगी और टेलिविज़न ही देखूंगी। उसको बाय बोलकर मैं घर की ओर बढ़ गर्इ। दूसरी तरफ से गीता मैड़म आ रहे थे………मैंने उन्हें देख कर भी अनदेखा कर दिया क्योंकि देखती तो उन्हें नमस्ते करनी पड़ती………….कौन करे नमस्ते…………..यही सोचती हुर्इ मुंह दूसरी तरफ करके मैं आगे बढ़ गर्इ।

घर पहुंची तो मम्मी छोले-भठूरे बना रहीं थीं। मैं बिना हाथ धोए और बिना कपड़े बदले रसोर्इ में घुसी और प्लेट लगाने लगी। मम्मी ने हमेशा की तरह टोका और और ड़ांटा और मैंने भी हमेशा की तरह उनकी बात अनसुनी कर दी और गर्मागर्म भठूरे का पहला निवाला आदत के अनुसार मम्मी को खिलाया और फिर खुद खाया। मम्मी गरमा-गर्म भठूरे उतारती रही मेरी प्लेट में ड़ालती रही और मेरे पेपर के बारे में पूछती रही कि कितने नम्बर आ जाएंगे। मेरा पूरा ध्यान टेलिविज़न पर आ रहे धारावाहिक पर केंद्रित हो चुका था इसलिए मैंने मम्मी को साफ तौर पर कह दिया कि आज का पेपर ठीक हो गया और आज पढ़ार्इ के बारे में कोर्इ बात मत करना। आज मैं सिर्फ टी.वी. देखूंगी और मोबार्इल पर आए मैसेज़ पढूंगी और आगे भेजूंगी। इतने में लार्इट चली गर्इ। मुझे गुस्सा तो बहुत आया पर सोचा चलो समय का फायदा उठाती हूं और मैसेज पढ़ती हूं। बाप रे………बीस मैसेज़ थे।

woh tees din by monica gupta

ये किताब आप नेशनल बुक ट्रस्ट की साईट से ओनलाईन भी खरीद सकते हैं ..

http://www.nbtindia.gov.in/books_detail__10__nehru-bal-pustakalaya__1676__wo-tees-din.nbt

 

tees din

ISBN 978-81-237-7087-1

आपकी प्रतिक्रिया का इंतजार है …

June 18, 2015 By Monica Gupta

समय ही नही मिलता

books of monica gupta

समय ही नही मिलता

 

समय ही नही मिलता… नाटक संग्रह है. इसमे लगभग सभी नाटक वो हैं जिनका आकाशवाणी जयपुर और आकाशवाणी रोहतक से झलकी रुप मे प्रसारण हो चुका है. उन्ही नाटक़ों को समय ही नही मिलता नामक किताब में पिरों दिया है. किताब का प्रकाशन सन 2009 में जयपुर के श्याम प्रकाशन द्वारा किया गया. इसमे कुल 91 पेज हैं और 14 नाटक है. नाटक संग़्रह को हरियाणा साहित्य अकादमी द्वारा अनुदान मिला.

नाटको मे पति पत्नी की नोंक झोंक है… मम्मी बेटे का वार्तालाप है कही हाय तौबा है यो कही प्यार का एक्सीटेंट …

आईए एक छोटी सी झलक पढें … नाटक ( झमेला नाम का)

ट्रिन ट्रिन
श्री मलिक- हैलो…. यस…. आर्इ.एम. मलिक….. स्पीकिंग
अरे….. आप रोर्इये मत….. हाँ…..हाँ……हाँ….. मैं अख़बार देखता हूँ….. (पन्ने पलटने की आवाज़) हाँ सेठ जी, पेज तीन पर दूसरा कालम…….हाँ…..हाँ……. ये तो आपका ही साक्षात्कार छपा है……..लेकिन……. हाँ…….. आप रोर्इये मत……. मैं आपको पढ़ कर सुनाता हूँ……… सेठ दीन दयाल की फैक्टरी ने लाखों का मुनाफ़ा कमाया। इस अवसर पर उन्होंने पार्टी आयोजित की…… सेठ जी……. यह तो सारा ठीक…… हाँ……. हाँ…….. पढ़ रहा हूँ………. हाँ……. उन्होंने पार्टी आयोजित की और डुगडुगी के एडिटर को बताया कि हर सफल आदमी के पीछे किसी और औरत का हाथ होता है……………………….
मलिक- हे भगवान …… ये क्या कर दिया एडिटर ने……….. और शब्द ग़लती से छप गया। सेठ जी…. आप रोर्इये मत……… मैं ………..मैं माफ़ी माँगता हूँ…….. क्या…….. सेठानी जी से …… हाँ…….. हाँ……. मैं उनसे भी माफ़ी माँग लूँगा…….. कल……… कल…….. मुझे खेद है कालम में मैं आपकी खबर दुबारा दूँगा कि हर सफल आदमी के पीछे किसी औरत का हाथ होता है और सेठ जी की सफलता के पीछे उनकी पत्नी का विशेष योगदान है। सेठ जी प्लीज रोर्इये मत…..
(फ़ोन रखता है) (खुद से) ये सम्पादक का बच्चा तो डुगडुगी की डुगडुगी बजवा कर ही रहेगा……!!
(दरवाज़े की घंटी बजती है)
श्री मलिक- ओह…. अब कौन आया !! मालिक…… ज़रा देखना……..!
मालिक- साहब……..! मैं आटा गूंथ रहा हूँ………. आप ही देख लो
(दूर से आवाज़ आती है)
श्री मलिक- गुस्से में…….. हूँ……. मैं रसोर्इ में जाकर देखता हूँ……… ये हमेशा आटा ही गूंथता रहता है…… जब भी देखो…… आटा गूंथ रहा हूँ…….. अरे……. तू यहाँ बैठा चाय पी रहा है…….. और मुझे कह रहा ……. मैं आटा गूंथ रहा हूँ……..
मालिक- अब साहब…… आप भी तो कितनी बार खाना खा रहे होते हैं और फ़ोन आने पर कहते हैं कि कह दे, साहब बाथरूम में हैं…… तो मैंने भी…..
श्री मलिक- चल….. बस….. अब चुप कर……. मैं ही खोल देता हूँ दरवाज़ा…..
श्री मलिक- अरे…….. चाची आप……..!!
चाची- हाय-हाय…….. ग़जब हो गया……… तेरा भार्इ यानि मेरा बेटा…… ये देख….. टेलिग्राम आया है……… पढ़ तो इसे…….
श्री मलिक- ऐ मेरे वीर, मेरे प्रिय, सीमा तुम्हे बुला रही है। दोनों बाँहे फैलाएं तुम्हारा स्वागत करती है तुम कब आओगे…. लेकिन चाची अपूर्व तो छुट्टियों में यहीं आया हुआ है ना……
चाची- हाँ…..हाँ….. अब इसके लछन तो देख…… हम यहां इस जवान के लिए लड़की देख रहे हैं और ये किसी सीमा से (ज़ोर से रोती है) अ ह ह ह…
इतने में बेटा आता है………।
माँ……माँ…….. पिताजी ने बताया कि फ्रंट से पत्र आया है……. जरा दिखाओ तो….. और…… तुम…… रो क्यों रही हो !
चाची- अपूर्व…… ये सीमा कौन है……!
श्रीमती मलिक- चाची………पूछो…….पूछो…….. इसके साथ अपने लाड़ले मलिक बेटे से ये भी पूछो कि यह रचना कौन है जिसे लेकर पूरे दिन दफ़्तर में बैठे रहते हैं (जोर से रोती है)
नौकर- मालकिन, हम धनिया को लेने जा रहा हूँ।
श्रीमती मलिक – ठीक है, जल्दी आ जाना।
श्री मलिक- अरे…….आर.यू……..ये तुम्हे क्या हो गया। कम-से-कम मुझसे तो पूछ लेती……•
(इतने में पी.के. की पत्नी भी आ जाएगी)
चाची- अपूर्व…. तुमसे तो मैं बाद में बात करती हूँ। आर्इ.एम. ये……..ये…….. मैं क्या सुन रही हूँ…….. कौन है ये रचना।
श्रीमती मलिक- चाची पता है……… पता है…….. पी.के. बहके साहब का भी कोर्इ चक्कर है किसी कल्पना के साथ (फिर ज़ोर से रोएगी)
श्री मलिक- गुस्से से……… चुप……… चुप……… बिल्कुल चुप……..।
यहां बैठो…….. आर.यू…. मैं क्या काम करता हूँ।
श्रीमती मलिक- आप सम्पादक हैं………. (नाक से सांस लेकर)
संपादक का काम होता है लेख यानि आर्टिकल, रचना को पढ़ कर उसे प्रकाशित करना……. ये कोर्इ वैसी रचना नहीं है जो तुम समझ रहे हो….
चाची का बेटा- और माँ……..मैं आपको भी बता दूँ कि यह सीमा हमारे देश की सीमा है, जिसके लिए हम जान लुटा देते हैं………. ना कि कोर्इ मेरी गर्लफ्रैंड़…. सीमा….
श्रीमती मलिक- ठीक है……… पर पी.के. बहके साहब की वो लड़की……..
श्री मलिक- कौन लड़की…….. ओ…….. कल्पना…….. अरे बुद्धु, कल्पना……. यानि सोच, इमेजीनेशन……… समझी।
क्या ? ? हाँ……
श्रीमती मलिक- मुझे क्षमा करें अब मैं शक नहीं करूंगी और प्रेम के साथ रहूँगी।
श्री मलिक- क्या ? ? ”प्रेम अब तुम मुझे छोड़ कर किसी प्रेम के साथ रहोगी……..।
श्रीमती मलिक- ये वो वाला प्रेम नहीं बलिक प्यार वाला प्रेम है।
(सब हँसतें हैं)
(दरवाज़े की घंटी बजती है)
श्रीमती मलिक- ये लड़की कौन है…….
मालिक- जी……… ए ही है हमार धनिया……..
श्रीमती मलिक- क्या ? ? ……..
(दोबारा घंटी)
श्रीमती मलिक- मालिक…….. ज़रा देखना……. कौन आया है……..
मालिक- मालकिन…….. हम ज़रा धनिया को काम समझा रहा हूँ….. आप ही देख लो ना।

ऐसे की कुछ मजेदार नाटकों का संग्रह है … समय ही नही मिलता

ISBN 978-93-80018-11-9

 

 

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