Monica Gupta

Writer, Author, Cartoonist, Social Worker, Blogger and a renowned YouTuber

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September 5, 2015 By Monica Gupta

शिक्षक दिवस – शिक्षक की भूमिका

शिक्षक दिवस

Teachers Day आने वाला है और शिक्षा और शिक्षक को लेकर मन में बहुत सारी बातें चल रही हैं.  पौधों को पानी देते हुए मन बना रही थी कि शिक्षक दिवस पर कुछ अच्छा लिखूगी… पर जैसा 15 अगस्त पर हुआ था कुछ ऐसी खबरे आई थी कि जैसा कि वन रैंक वन पैंशन वाले कुछ स्वतंत्रता सेनानियों की पिटाई की गई थी दुख की वजह से स्वतंत्रता दिवस की फील नही आ रही थी. सोचते सोचते दोपहर भी हो गई.

google by monica gupta

शिक्षक दिवस – शिक्षक की भूमिका

शिक्षक की भूमिका को देखते हुए आज  शिक्षक दिवस की फील नही आ रही. खैर, पौधो को पानी देते हुए देखा सामने सडक पर काम चल रहा था और एक शिक्षक मजदूर को बहुत भद्दी गाली देते हुए वहां से निकले.

मूड तो वैसे ही सही नही था इसलिए कमरें मे टीवी चला लिया … खबर आ रही थी कि हरियाणा के एक स्कूल मे अंग्रेजी के अध्यापक को ,अंग्रेजी में जनवरी, फरवरी तक लिखना नही आता और

दूसरी खबर दिखा रहे थे यूपी के टीचर की, जिसे पुलिस इसलिए ले जा रही थी क्योकि वो लडकियों के साथ अश्लील हरकते करता पकडा गया था. हंगामा किया गया और पुलिस अध्यापक को पकड कर ले गई.

सामने वाली इमारत में सरकारी अध्यापक ट्यूशन करके खूब पैसे कमा रहे हैं और नतीजा भी उन्ही बच्चों का अच्छा आता है जो टयूशन ले रहे हैं …नही भई … कुछ नही लिखना … बस चुप रहना ही बेहतर लग रहा है अगले साल देखते हैं शायद कुछ अच्छा फील आ जाए तो … !!!

वैसे शिक्षक दिवस पर गूगल डूडल बेहद आकर्षक है …

September 3, 2015 By Monica Gupta

लडाई झगडे

whatsapp photo

Photo by downloadsource.fr

लडाई झगडे

दो दिन पहले भावना मिली. भावना हमेशा के लिए दिल्ली रहने चली जाएगी. असल मॆ, उसका अपने पति से लडाई झगडा चल रहा है. कारण इतना  है कि  वो नौकरी करना चाह्ती है जबकि पति चाह्ते हैं कि बेटा अभी छोटा है इसलिए अभी बच्चे पर पूरा ध्यान दे और घर सम्भाले.  

घर पर रह कर जो भी काम करना चाहे कर सकती हैं नेट और वाई फाई की भी सारी सुविधाए घर पर थी. चाहे तो घर पर ही छोटा सा आफिस भी बना सकती है. कभी कोई रोक टोक नही थी. ये बात तो भावना भी मानती है पर ना जाने किसलिए अपने सातंवी क्लास में पढने वाले बेटे को छोड कर हमेशा के लिए जाना चाह रही है. इसी सिलसिले में मेरे पास भी आई थी. मैने भी उसे बहुत समझाया. जाने के बाद बच्चे पर क्या बीतेगी कौन करेगा उसकी देखभाल. इस बात का भी हवाला दिया. पर शायद वो मन बना चुकी थी. आज, अभी थोडी देर पहले वो घर पर आई और रोने लगी.

मेरे पूछ्ने पर उसने बताया कि आज उसने एक गाजियाबाद मे रहने वाले बच्चे की खबर पढी. बच्चे की मम्मी दुबई नौकरी करने चली गई थी. पति बीमार रहता और बच्चे अपनी नानी के घर रहते. वो बच्चा कक्षा नौं में पढता था. माता पिता के बिखराव से लडाई झगडे से बहुत दुखी था और अपने जन्मदिन से एक दिन पहले 13 साल के शानू ने  वट्स अप पर अपना प्रोफाईल फोटो डाला और खुद को श्रधांजलि दी और फांसी लगा ली. बच्चा अपने माता पिता के अलगांव से बेहद दुखी था. उसे उस फांसी में अपना बच्चा नजर आया. वो ऐसा कभी नही होने देगी इसलिए उसने मन बना लिया है कि घर पर ही रह कर कोई काम शुरु करेगी पर बेटे की परवरिश पर पूरा ध्यान देगीं. इतने में भावना के पति भी आ गए.

मै चाय बनाने के बहाने वहां से बाहर चली गई. दोनों की बातचीत हुई और शायद दोनों ने एक दूसरे से माफी भी मांगी. हमने बिल्कुल चुपचाप चाय पी और जाते जाते एक बार फिर वो भावुक हो गई. मैने उसके गाल पर प्यार से चपत लगाई और बोली बस … वरना अब मैं भी रो दूंगी… दोनो अपने घर चले गए एक आशा के एक उम्मीद के साथ .. मुझे खुशी इस बात की हुई कि बेशक दर्दनाक खबर ही सही पर उसे पढ कर भावना का मन पसीज गया और एक और बच्चा मरने से बच गया.

वैसे आपसी लडाई झगडे में कई बार अहम इतना आगे आ जाता है कि हमारी आखों में पट्टी सी बंध जाती है और हमें कुछ नजर नही आता. जबकि ये फैसले बहुत सोच समझ कर लेने होते हैं.. इसलिए अगर आपके मन में या आपके किसी जानकार के मन में भी कुछ ऐसा चल रहा है तो उन्हें एक बार समझना और समझाना आपका फर्ज बनता है कोई भी कदम उठाने से पहले एक बार अपने मासूम बच्चे की ओर एक बार जरुर देख लेना कि आपके इस लडाई झगडे में मासूम क्या कसूर …थोडी सी समझदारी से काम लेने से बिखरता घर बच सकता है.

और फिर मैं भी उस खबर को गूगल सर्च करने लगी जिसमें बच्चे ने खुदकुशी की थी…!!

 

Student gives tribute himself on WhatsApp before committing suicide – Navbharat Times

पुलिस सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, सोमवार देर रात जीटीबी हॉस्पिटल से पुलिस को सूचना मिली थी कि एक लड़के को मृत हालत में हॉस्पिटल लाया गया था, उसने फांसी लगाकर जान दी है। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंच गई और शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भिजवाया। पूछताछ में खुलासा हुआ कि मृतक लड़के का नाम शानू है। वह अपने बड़े भाई शिखर के साथ वैशाली, गाजियाबाद में रहने वाले अपने नाना-नानी के पास रहता था। वह वहीं के एक पब्लिक स्कूल में नौंवी क्लास मेंपढ़ता था, जबकि उसका भाई दसवीं क्लास में पढ़ता है। स्कूल में खेलते समय उसके पैर में फ्रैक्चर आ गया था। इस कारण वह 19 अगस्त को अपने बड़े भाई के साथ कबीर नगर गली नंबर-4 में रहने वाली अपनी मौसी के घर आया हुआ था।

पुलिस को यह भी पता चला कि शानू के पैरंट्स अलग-अलग रहते हैं। वह इस बात को लेकर भी परेशान रहता था। उसने इसका जिक्र वॉट्सऐप पर भी किया था। बताया जाता है कि उसकी मां पैसे कमाने के लिए दुबई चली गई। पिता अक्सर बीमार रहने लगे। लिहाजा वे दोनों भाई अपने नाना-नानी के पास रहने लगे। परिवार वालों ने पुलिस को बताया कि शानू पढ़ाई में बहुत तेज था। Student gives tribute himself on WhatsApp before committing suicide – Navbharat Times

लडाई झगडे पर अगर आप भी अपना कोई अनुभव सांझा करना चाहे तो बताईएगा हो सकता है आपकी आप  बीती सुनकर किसी की जिंदगी बदल जाए…

August 31, 2015 By Monica Gupta

कलाम बनाम औरंगजेब

कलाम बनाम औरंगजेब

सभी चैनल वाले मुद्दे से भटक गए हैं बहुत हैरानी की बात है कि आज सडक के नाम पर  औरंगजेब और कलाम साहब की  तुलना हो रही है… और बहस के दौरान अंट  शट बोला जा रहा है वैसे इस संदर्भ में मुझे ज्यादा समझ तो नही पर मेरा  मानना  यही है कि कलाम साहब के नाम अगर कोई नई सडक बना कर समर्पित की जाती तो बेहतर होता… किसी के नाम को बदलना और फिर विवादों मे पडना … विवादों में तो कलाम साहब भी कभी नही पडे थे तो अब उनके जाने के बाद ये ओछी राजनीति किसलिए 🙁 शान से कोई नई सडक बना कर उसका नाम कलाम मार्ग रखते तो बहुत बेहतर होता .. !!

news monica gupta

 

सबसे पहले तो दोनों की तुलना करना अजीब है … दूसरा जो इस बहस को तूल दे रहा है वो हास्यास्पद है और तीसरा अगर जालिमों को हटाने की इतनी ही बात है तो बहुत जल्द यह मुद्दा भी उठेगा कि दशहरा किसलिए मनाते हैं क्यो रावण को हर साल याद करते हैं क्यो राम लीला होती जब कि वो इतना जालिम था… बात ये है ही नही बात सिर्फ इतनी है कि अगर कोई नई सडक बनाकर कलाम साहब का नाम दिया जाता तो अच्छा था … खैर !!

पता नही क्या हो गया मीडिया को, एकंरिग करते करते  एंकर इस बात की पैरवी करने लगते हैं कि कलाम साहब के नाम पर रोड सही है औरंगजेब के नाम पर सही नही है… लडते भिडते चिलाते,  नेता , आखं दिखातें अलग अलग चैनल के  एंकर … दुखद … अफसोस !!!

मुद्दा भटक गया है … हां पर टीआरपी जरुर बढ गई है यानि की उद्देश्य सफल हुआ चैनल वालो का !!!

 

कलाम बनाम औरंगजेब

 

 

August 26, 2015 By Monica Gupta

गूगल डूडल

गूगल डूडल

 

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गूगल डूडल

कोई खास दिन आता नही कि मेरा ध्यान सबसे पहले गूगल  डूडल पर जाता है कि उन्होनें आज क्या बनाया होगा. सच पूछिए तो आज के दिन के बारे मे जरा भी पता नही था हां, पर फिल्म में देखा था इसलिए ये जरुर पता था कि स्पेन में ऐसा टमाटर मारने का उत्सव  कुछ मनाया जाता है पर डूडल देख कर वाकई मजा आ गया.

तरह तरह के रंग बिरगें डूडल सदा हमारा ध्यान आकर्षित करते हैं. जिस दिन के बारे मे पता होता है उस दिन अच्छा लगता है और जिस दिन की जानकारी न हो वो जानने का मन करता है कि आखिर ये गूगल डूडल स्पेशल है तो कोई खास बात जरुर होगी… 🙂 है ना 🙂 और फिर शुरु हो जाती है गूगल सर्च 🙂

 

La Tomatina’s 70th anniversary and its big, messy secret – Vox

The history of La Tomatina is a lot like any food fight — it’s a little bit of fun that got way out of hand.

The history of La Tomatina is a lot like any food fight — it’s a little bit of fun that got way out of hand.

Like many Spanish festivals, the celebration was originally a religious one, to honor Bunol’s patron saint, San Luis Bertran. One year — either 1944 or 1945 — there was a tussle during a procession and some boys tossed tomatoes. A few say it was prompted by village rivalries. Some say it was a joke. But others claim it stemmed from unhappiness with Francisco Franco’s reign following Spain’s civil war. See more…

और इससे भी अच्छी बात ये है कि सभी के  जन्मदिन पर भी  गूगल खास तोहफा गूगल डूडल  होता है और शुभकामनाएं भी होती है इससे ज्यादा स्पेशल फील करवाना …. !!! 

La Tomatina 70th Anniversary

For its 70th anniversary, Doodler Nate Swinehart captures the energy of today’s festivities with an animation awash in splattered tomatoes and brimming with the youthful delight of its characters.

Concept Thumbnails

Concept Animation

Animation Layout Plan Read more…

थैक्स गूगल … शुभकामनाए !!!

August 26, 2015 By Monica Gupta

क्या आप जानते हैं ये रोचक बातें

क्या आप जानते हैं – कुछ बातें अकसर हमें हैरान परेशान करती हैं और हम उसके बारे में जानना चहते हैं जैसाकि  कान किसलिए छिदवाए जाते हैं , माथे पर कुमकुम किसलिए लगाया जाता है या जमीन पर बैठ कर भोजन करना किसलिए जरुरी है

 

tulsi by monica gupta

क्या आप जानते हैं ये रोचक बातें

 

क्या आप जानते हैं ये रोचक बातें

क्या आप जानते है कि पहले समय में लोग चुटिया क्यों रखते थे या कान छिदवाने से क्या लाभ होता है या  जमीन पर बैठ कर खाना खाने से क्या फायदा होता है   या  घर पर तुलसी लगाने का कोई फायदा है या नही…

आईए जाने इसी से जुडी कुछ बातें और उसके पीछे  छिपे वैज्ञानिक तर्क ….
क्या आप जानते हैं कि कान छिदवाने की परम्परा के पीछे क्या वैज्ञानिक तर्क है. वो ये हैं कि कान छिदवाने से सोचने की शक्तित बढ़ती है। डॉक्टरों का भी मानना है कि इससे बोली अच्छी होती है और कानों से होकर दिमाग तक जाने वाली नस का रक्त संचार नियंत्रित रहता है।

माथे पर कुमकुम या तिलक लगाने का भी वैज्ञानिक तर्क है और वो ये कि आंखों के बीच में माथे तक एक नस जाती है और कुमकुम या तिलक लगाने से उस जगह की ऊर्जा बनी रहती है। माथे पर तिलक लगाते वक्त जब अंगूठे या उंगली से प्रेशर पड़ता है, तब चेहरे की त्वचा को रक्त सप्लाई करने वाली मांसपेशी सक्रिय हो जाती है। इससे चेहरे की कोशिकाओं तक अच्छी तरह रक्त पहुंचता है.

भारतीय संस्कृति के अनुसार जमीन पर बैठकर भोजन करना अच्छी बात मानी जाती है।
वैज्ञानिक तर्क के अनुसार जमीन पर बैठ कर भोजन करने से, आलथी पलती मारकर बैठने से जोकि एक प्रकार का आसन है. इस पोजीशन या आसन में बैठने से मस्तिाष्क शांत रहता है और भोजन करते वक्त अगर दिमाग शांत हो तो पाचन क्रिया अच्छी रहती है। इस पोजीशन में बैठते ही खुद-ब-खुद दिमाग से एक सिगनल पेट तक जाता है, कि वह भोजन के लिये तैयार हो जाये।

हाथ जोड़कर नमस्ते करने के पीछे भी वैज्ञानिक तर्क है वो ये कि जब सभी उंगलियों के शीर्ष एक दूसरे के संपर्क में आती हैं और उन पर दबाव पड़ता है। एक्यूप्रेशर के कारण उसका सीधा असर हमारी आंखों, कानों और दिमाग पर होता है, ताकि सामने वाले व्यक्तिर को हम लंबे समय तक याद रख सकें। वैसे दूसरा तर्क यह भी कह सकते हैं कि शैक हैंड के बजाये अगर हम नमस्ते करते हैं तो सामने वाले के शरीर के कीटाणु आप तक नहीं पहुंच सकते। अगर सामने वाले को स्वाइन फ्लू भी है तो भी वह वायरस आप तक नहीं पहुंचेगा। जोकि फायदेमंद ही रहेगा.

अक्सर भोजन की शुरुआत तीखे से और अंत मीठे से किया जाता है और इसके पीछे वैज्ञानिक तर्क यह है कि तीखा खाने से हमारे पेट के अंदर पाचन तत्व एवं अम्ल सक्रिय हो जाते हैं। इससे पाचन तंत्र ठीक तरह से संचालित होता है और खाने के अंत में मीठा खाने से अम्ल की तीव्रता कम हो जाती है। इससे पेट में जलन नहीं होती है।

सुबह उठकर सूर्य को जल चढ़ाते हुए नमस्कार करने की परम्परा के पीछे भी वैज्ञानिक तर्क ये है कि
पानी के बीच से आने वाली सूर्य की किरणें जब आंखों में पहुंचती हैं, तब हमारी आंखों की रौशनी अच्छी होती है।

पुराने समय में ऋषि मुनि सिर पर चुटिया रखते थे। कई बार आपको पंडित लोग आज भी चुटिया लिए मिल जाएगें. इसका वैज्ञानिक तर्क ये है कि जिस जगह पर चुटिया रखी जाती है उस जगह पर दिमाग की सारी नसें आकर मिलती हैं। इससे दिमाग स्थििर रहता है और इंसान को क्रोध नहीं आता, सोचने की क्षमता बढ़ती है।
व्रत रखने का बहुत क्रेज है लेकिन इसके पीछे भी वैज्ञानिक तर्क ये भी है

व्रत करने से पाचन क्रिया अच्छी होती है और फलाहार लेने से शरीर का डीटॉक्सीफिकेशन होता है, यानि उसमें से खराब तत्व बाहर निकलते हैं। शोधकर्ताओं के अनुसार व्रत करने से कैंसर का खतरा कम होता है। हृदय संबंधी रोगों, मधुमेह, आदि रोग भी जल्दी नहीं लगते। तुलसी के पूजन को अहमियत देने के पीछे भी वैज्ञानिक तर्क ये है कि

तुलसी इम्यून सिस्टम को मजबूत करती है। अगर घर में पेड़ होगा, तो इसकी पत्तिकयों का इस्तेमाल भी होगा और उससे बीमारियां दूर होती हैं।

क्या आप जानते हैं … आपको कैसा लगा अगर आपके पास भी कुछ बताने को तो जरुर शेयर करें …

http://hindutavadarshan.blogspot.in/2015/05/blog-post_44.html

August 25, 2015 By Monica Gupta

छेडछाड मामले

छेडछाड मामले

कल सभी न्यूज चैनल पर सुर्खियों मे थी ये खबर कि दिल्ली में जसलीन के साथ हुई छेडछाड … जसलीन ने फेसबुक पर सारी बात विस्तार से बताई और पुलिस ने भी उसके हौंसले को सलाम करते हुए ईनाम की धोषणा कर डाली..

जसलीन ने लिखा – इस शख्स ने मुझ पर तिलकनगर पर करीब 8 बजे फब्तियां कसीं. वो सिल्वर रंग की रॉयल एनफील्ड पर था जिसका नंबर है DL 4S CE 3623. जब मैंने उससे कहा कि मैं उसकी फोटो खींच रही हूं और मैं उसके खिलाफ शिकायत करूंगी तो उसने बाकायदा फोटो के लिए पोज बनाया और कहा कि जो कर सकती है कर ले. कंप्लेंट करके दिखा फिर देखियो क्या करता हूं मैं.

मैंने अपने लिए लड़ाई लड़ना तय किया है और मैं तिलक नगर थाने में उसकी फोटो और गाड़ी नंबर के साथ शिकायत कर चुकी हूं. कृपया इसे खूब शेयर करें. आज उसने मेरे साथ ये किया है कल वो किसी और के साथ इससे कहीं ज्यादा बुरी हरकत कर सकता है. मैं यहां वो सब लिख सकती थी जो उसने मुझसे कहा था लेकिन मैं नहीं चाहती थी कि ऐसे शब्दों की वजह से फेसबुक मेरी पोस्ट को हटा दे.जसलीन ने हिम्मत नहीं हारी और लड़ाई छेड़ दी. तिलकनगर पुलिस मौके पर पहुंची और शिकायत दर्ज करने के बाद मनचले की गाड़ी के नंबर के आधार पर तलाश शुरू कर दी.

दूसरी तरफ जसलीन की मदद में आए हजारों फेसबुक यूजर्स. सिलसिला शुरू हुआ तो सामने आ गई मनचले की पूरी पहचान.

बात को अभी 24 घंटे भी नही हुए थे कि खबरों में आने लगा कि लडकी का ये पब्लिस्टी स्टंट ही है अचानक चैनल पर  एक प्रत्यक्षदर्शी सामने आया और उसने बताया कि लडकी सही नही है और उसने खुद ऐसे शब्दों का इस्तेमाल किया कि वो अपने मुंह से नही बोल सकते. वही खुद लडके ने यानि सरबजीत ने कहा कि सब गलत है . मेरी नौकरी चली गई परिवार में, रिश्तेदारों में बदनामी हुई वो अलग…

 

traffic on red light photo

Photo by bigmick

वही प्रत्यक्षदर्शी ने  भी कहा कि वो महिलाओ का सम्मान करता है पर जो इस लडकी ने किया उस को ऐसा नही करना चाहिए…

मुझे याद आया कि कुछ समय पहले भी रोहतक की दो बहनों आरती और पूजा से छॆडछाड का मामला सामने आया था. सरकार ने उनके हौंसले को सलाम किया और ईनाम दिलवाने की मांग भी की जबकि अगले ही दिन दोनों बहनों को गलत साबित करने के लिए  आवाजे उठी और मामला गहराया और फिर  दब गया.

दुख इस बात का भी है कि कुछ लोग ऐसी खबरों मॆं भी राजनीति तलाशते हैं… वैसे मामले तो बढते ही जा रहे हैं चाहे कैब छेडछाड मामला हो या सिग्नल पर छेड्छाड का

कुल मिला कर यही बात सामने आती है जब भी ऐसी खबरें जब दिखाई जाए तो मीडिया को जल्दबाजी नही करनी चाहिए दोनों पक्षों को सामने रख कर ही खबर दिखानी चाहिए ना मैं लडके की तरफदारी कर रही हूं और ना ही लडकी की… पर सच्चाई जानने का हम सभी का अधिकार है  और अगर सच्ची खबर सामने आएगी तो हम यकीनन हम कुछ फैसला ले सकते हैं.

हद तो तब हो गई जब ये खबर खत्म होते ही एक अन्य खबर लखनऊ से आ रही थी और एक लडकी एक मनचले की पिटाई कर रही थी और लडका हाथ जोड कर कह रहा था माफ कर दो बहन !! उसके आगे पीछे की क्या कहनी है क्या बात हुई शायद ये बताना चैनल ने जरुरी नही समझा !!!

 

BBC

हरियाणा के रोहतक में कथित रूप से छेड़खानी करने वाले तीन पुरुषों की पिटाई करतीं दो बहनों का एक मोबाइल फ़ोन से बना हुआ वीडियो भारत में काफ़ी चर्चित हुआ है.

हालांकि पुरुषों को गिरफ़्तार कर लिया गया है, लेकिन एक अन्य वीडियो आने के बाद लड़कियों के आरोपों पर सवाल उठने लगे हैं, जिसमें यही दोनों बहनें एक पार्क में एक आदमी पर हमला करती हुई दिख रही हैं.

उल्लेखनीय है कि इन लड़कियों को राज्य सरकार ने साहस के लिए अवॉर्ड देने की घोषणा की थी जिसे फ़िलहाल रोक लिया गया है.

यह घटना रोहतक ज़िले में हुई. दो छात्राएं- आरती (22) और पूजा (19) एक सरकारी बस से अपने घर जा रही थीं.

छोटी बहन पूजा ने बीबीसी हिंदी को बताया कि बस में तीन लोगों ने उसके साथ दुर्व्यवहार किया, उन्होंने धमकी दी और छेड़छाड़ की.

उन्होंने कहा कि आत्मरक्षा के लिए उन्होंने बेल्ट निकाल कर उनकी पिटाई कर दी. See more…

वैसे इन छेडछाड मामले में आपके क्या विचार है … जरुर बताईगा !!!

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