Monica Gupta

Writer, Author, Cartoonist, Social Worker, Blogger and a renowned YouTuber

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December 2, 2015 By Monica Gupta 1 Comment

उल्टा पुल्टा

कई बार जिंदगी में उल्टा पुल्टा हो जाता है हम सोचते कुछ हैं  और हो कुछ और जाता है … और ऐसे मे क्या हो जाता है ये जानने के लिए पढना पडेगा उल्टा पुल्टा

 

आज शाम सैर करते हुए पार्क मे मेरी सहेली सुरेखा  मिल गई. बहुत उदास लग रही थी और देखने से भी ऐसे लग रहा था मानो बहुत रोई हो. पूछ्ने पर उसने बताया कि प्रिया को कैसर निकला. मेरा दिल धक से रह गया. ओह कितनी मासूम प्यारी बच्ची.थी वो. कब पता चला तब उसने बताया कि परसो ही डाक्टर को दिखाया है अब तो राम ही जाने !!! मै भी उसकी बात सुनकर बहुत उदास हो गई क्योकि प्रिया उनकी इकलौती बच्ची थी. मैने पूछा कि क्या प्रिया को सब पता है … इस पर वो बोली कि पता तो लगना ही था आखिर कितना लंबा चलाएगे धारावाहिक को!! क्या !!! अब मेरे चीखने की बारी थी. उसने बताया और क्या बडे अच्छे लगते है धारावाहिक की बात कर रही है वो !!! तुम क्या समझी.??? अब मै क्या समझी शायद उसे बताना सही नही था पर मैने वहा से खिसकने मे ही भलाई समझी और बडबडाती हुई घर आ गई.

 

घर पहुंची तो फोन बज रहा था. एक रिश्तेदार का था वो बता रहे थे कि अरविंद जी  आज रहें हैं.उनका खाना है इसलिए समय से जरुर आना है रात्रि भोज पर. मै मुस्कुराती हुई बोली  अरे वाह अरविंद केजरीवाल …. मैं जरुर आऊंगी  इस पर वहाँ  से आवाज आई कि आप भी बडी मजाकिया है. अरविंद देशमुख आ रहे हैं वो हमारे स्कूल के टीचर हुआ करते थे खैर आप नही जानती … ह हा हा !! असल मे वो क्या है ना  अपनी बिटिया लंदन से आई हुई है बस उसी के लिए  बडा भोज कर रहे हैं  … !!! और आप भी ना. अब फिर मेरे झेपने की बारी थी और जरुर जरुर कहती हुई मैने झट से फोन रखा. हे भगवान!!! आज क्या हो रहा है.

 

बहुत टेंशन हो रही थी कि आज हो क्या रहा है. कुछ ही देर में  हमारी सदाबहार पडोसन बिल्लू सरीन हमेशा की तरह हाथ मे कटोरा लिए चीनी मांगने आ धमकी. कटोरी थमाते हुए बहुत ही उदास मुद्रा मे बोली कि माता जी को कैंसर है.मैने चीनी डालते हुए कहा कोई कैंसर वैसर नही है सब नाटक बाजी है ड्रामा है ड्रामा  सब. टीआरपी बढाने के लिए चोंचले बाजी है ये .वैसे कौन से धारावाहिक की बात कर रही हो!!!. उसने मेरी तरफ गुस्से से देखा और मेरे हाथ से कटोरी छीनते हुए बोली बोली कि चीनी नही देनी तो ना दो पर माताजी के लिए ऐसा तो मत बोलो और पैर पटकती हुई चली गई.

 

अरे बाप रे!!! वो तो अपनी माता जी के बारे मे सच ही बोल रही थी और मै क्या समझ बैठी !!! सब गडबड झाला हो रहा है आज. अब मै उसके पीछे उसे मनाने भाग रही हूं.

 

 

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 उल्टा पुल्टा  आपको कैसा लगा !!! जरुर बताईएगा 🙂 

December 2, 2015 By Monica Gupta Leave a Comment

ब्लॉग लेखन

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blog photo

Photo by xioubin low

 

ब्लॉग लेखन

एक समय था जब बाजार में ढेर सारी पत्र पत्रिकाओं का बोलबाला था. हर महीने हमें नए अंक का इंतजार रहता और अगर उन जानी मानी पत्रिकाओं में हमारा लेख भी प्रकाशित होता तो फिर तो क्या कहना होता … आज समय बदल चुका है. बेशक, पत्रिकाएं बाजार में बहुत है पर इंटरनेट लिखने और   पढने के लिए विशाल और अथाह सागर बन गया है. इसमे मुख्य भूमिका निभा रहा है ब्लॉग लेखन .

 कहना गलत नहीं होगा कि ब्लॉग  अपनी बात रखने का सबसे अच्छा माध्यम है जिस पर हम अपने मन की बात, अपने विचार, अपने अनुभव सांझा कर सकते हैं और अपनी सोच  को नई उडान दे सकते हैं. अपना ब्लॉग बना कर विभिन्न विषयों व लेखो के जरिए अपना ज्ञान, अनुभव सांझा  कर सकते हैं जिससे पाठको को फायदा मिल सके.

एक समय ऐसा था जब मुझे भी ब्लॉग की कोई जानकारी नही थी. बस नेट पर इधर उधर सर्च करती. कभी कहीं तो कभी कहीं  कमेंट करती रहती. फिर जब मुझे ब्लाग की जानकारी मिली तो मुझे लगा कि ये तो बहुत ही अच्छा आईडिया है. यहां लिख कर मैं अपने विचारों को नया रुप दे सकती हूं और अपने विचार सांझा कर सकती हूं  और तब से आज तक मैं ब्लाग में विभिन्न 896 पोस्ट डाल चुकी हूं.

अक्सर ब्लॉग बनाने के बारे में मेरी बहुत लोगों से बात होती रहती है.

ब्लॉग लेखन कौन कर सकते हैं …

उदाहरण के तौर पर एक जानकार से बात की तो उसका कहना था कि उसे तो सिवाय अपने गार्डन और किचेन गार्डन की देखभाल के और कुछ नही आता. उसमे लगभग 100 तरह के फूल खिले हैं और हर रोज छोटे से बागीचे से वो ढेर सारी सब्जियां निकालती है. मैने उसे बताया कि ऐसे बहुत लोग हैं जिनके पास बहुत जगह खाली है और बहुत समय भी है अगर ये सब बातों की जानकारी वो अपने ब्लाग पर डालेग़ी तो बहुत लोगो को फायदा होगा और पर्यावरण पर जो सकारात्मक असर पडेगा वो अलग … इस पर उसे बात जंच गई.

एक अन्य उदाहरण में एक बच्चे की ड्राईंग बहुत अच्छी है वो बस उसे बना बना कर अलमारी मे रख देता है अगर ब्लाग बना कर वो उसमे डालेगा तो और भी उस जैसे नन्हे बाल कलाकारों  का मनोबल बडेगा और वो आगे आएगे और धीरे धीरे वो अपना जूनियर ग्रुप भी बना सकते हैं.

और रिटायर हुए लोगों के लिए तो ये वरदान से कम नही. वो अपने अनुभव और जानकारी ब्लाग के माध्यम से आम जन तक पहुंचा सकते हैं. स्वास्थ्य का ख्याल कैसे रखा जाए क्या किया और क्या न किया जाए उनसे बेहतर हमे कोई नही बता सकता.

देखा जाए तो हम नेट पर कुछ न कुछ सर्च करने ही जाते हैं और अगर हम किसी को अपने अनुभव के आधार पर कोई उपयोगी जानकारी कोई सुझाव कोई पठनीय सामग्री दे सकें तो इससे बेहतर और क्या बात हो सकती है. बडे, बुजुर्ग, गृहणियां या कालिज मे पढने वाले छात्र  सभी ब्लाग बना कर ना सिर्फ अपनी बात दूसरो तक रख सकते हैं बल्कि ब्लाग को आय का साधन भी बना सकते हैं यानि कि एक पंथ दो काज…

 बातें बहुत है और उदाहरण भी बहुत है बस जरुरत है आपको एक रुप देने की और अपनी सोच को एक उडान देने की.

… तो अगर आप भी ब्लाग के माध्यम से अपनी अलग पहचान बनाना चाहते हैं तो  Contact करें

 

December 2, 2015 By Monica Gupta Leave a Comment

सहिष्णु बनाम असहिष्णु

सहिष्णु बनाम असहिष्णु

और मैं  असहिष्णु होते होते रह गई

 

टीवी पर लगातार सहिष्णु और असहिष्णु की बहस चले जा रही थी और मुझे भी बहुत गुस्सा आ रहा था.बहस देखते देखते मेरा ब्लड प्रेशर भी बढ रहा था. असल में, उस बहस को देख कर नही बल्कि बार बार घडी की सूई को देख कर… बार बार सडक पर झांक रही हूं तो कभी घडी देख रही हूं  पर दूर दूर तक काम वाली बाई का कोई निशान नही…. हुह !!! मारे गुस्से के मेरा रक्तचाप बढे जा रहा है और दूसरी तरफ खून भी उबल रहा है.  इतना उबाल आया हुआ है कि मैं वीर रस की कविता लिख सकती हूं ..खैर , मैं बता रही थी कि आज तो इंतेहा ही हो गई. दोपहर का एक बज रहा है और महारानी जी अभी तक नही आई. बस आज तो  असहिष्णु बन कर खुद से निणर्य कर ही लिया कि इसे नही रखना चाहे कुछ भी हो जाए.

काम भी ऐसा करती है कि पूछो मत. कई बार तो काम मे इतनी फुर्ती दिखाएगी कि चीता भी शरमा जाए और टीवी पर कोई धारावाहिक चल रहा होगा तो इतनी धीरे धीरे काम करेगी कि कछुआ भी दांतो तले ऊंगली दबा ले. मेरा बडबडाना जारी था कि  खुद का इतना तगडा नेट वर्क है उसका  कि बाकि सब सोशल नेट वर्किंग साईट उसके आगे फेल हैं.

हे भगवान, कितना लिहाज कर लिया कितने कपडे लत्ते और खाने इत्यादि का सामान दे दिया. पर उसकी तो कोई गिनती ही नही.यहा तक की उसको खुश करने के लिए उसका फेसबुक पर एकांऊट भी खोल दिया था और सबसे पहले मैने उसे दोस्ती का पैगाम भेजा. अजी क्या भेजा… मेरा ही भेजा खराब हुआ था.बस आज मैने मन ही मन  फैसला ले लिया था.

 आज तो तू गई. सोचते सोचते  मै भीतर आ गई और नेट लगा लिया. मै बहुत  असहिष्णु बन चुकी थी और  खुद को सहिष्णु करती  फेसबुक देखने लगी.

  मै देख ही रही थी तभी दरवाजे पर चिरपरिचित सी धंटी बजी. अनायास ही मेरे चेहरे पर मुस्कान दौड गई. कामवाली बाई आ गई थी. मेरी सहिष्णुता अचानक जागृत हो गई और मुस्कुराहट बिखेरती हुए दरवाजा खोलते हुए बोली अरे !! क्या हुआ सब ठीक है ना … तेरी तबियत वगैरहा !!! पता है तेरे फेसबुक पर 5 रिक्वेस्ट आई हैं एक तो अपनी मिसेज शर्मा का ही है … वो भी खुश हो गई … और बोली अच्छा दिखाओ तो … और मैं पूरी तरह से सहिष्णु  बनी उसे फेसबुक दिखा रही

फिर उसका काम शुरु हुआ … वही चीता चाल और मैं उसे निर्देश देती रही कि मेज के नीचे से  कूडा निकाल परदा हटा कर झाडू लगा आदि आदि … उसके जाने के बाद रसोई मे चाय बनाती बनाती  मैं सोच रही थी कि  सहिष्णु का इससे अच्छा उदाहरण और कहां मिल सकता है…. तो क्या हुआ अगर वो देर से आई. तो क्या हुआ वो बिना बताए छुट्टी कर लेती है … इंसान ही तो है. देर सवेर तो हो ही जाती है….. और मंद मंद मुस्कुराती हुई  टीवी पर सहिष्णु और असहिष्णु पर बहस सुनने लगी.

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सहिष्णु बनाम असहिष्णु आपको कैसा लगा ?? जरुर बताईएगा !!

December 1, 2015 By Monica Gupta Leave a Comment

भ्रष्टाचार

भ्रष्टाचार

ईमानदारी गई तेल लेने …

अभी कुछ देर पहले एक परिचित मिले. तनाव में लग रहे थे पूछ्ने पर बताया कि बुरा हाल है इन सरकारी विभागों का. मैनॆ भी हां मे हां मिलाई और कारण पूछा तो उन्होने बताया कुछ काम था विभाग में चाहता था कि तुरंत हो जाए इसलिए आफिसर को कहा कि कुछ ले देकर जल्दी करवा दो तो वो भडक गए बोले कि तरीके से ही चलेगा काम. रिश्वत देकर आप ही लोग तंत्र को बिगाड रहे हैं.

वो बताए जा रहे थे कि हुह, बडा आया सत्यवादी हरीश चंद्र … !!! बुरा हाल है कहते हुए गर्दन झटकते हुए आगे चले गए .अरे !! मैने सोचा कि अगर ऐसा बुरा हाल है बुरा हाल ही अच्छा!! वैसे मुझे भी एक किस्सा याद आया कि एक बहुत पैसे वाले व्यवसायी ने अपनी बेटी की शादी सरकारी कलर्क से महज इसलिए की कि खाता पीता तो होगा ही पर दो महीने बाद लडकी घर आकर बैठ गई और अपने पति की ईमानदारी का रोना रोती रही….
तो ऐसे मामले मे जरा नही बहुत सोचने की दरकार है है ना

भ्रष्टाचार  के बारे में आपकी क्या राय है …

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Photo by Danielle Scott

December 1, 2015 By Monica Gupta Leave a Comment

विचलित मन

विचलित मन

ये तस्वीर आपको विचलित कर सकती है.

बेशक, सोशल मीडिया यानि गूगल प्लस, फेसबुक, टवीटर पर लिखने , वीडियों अपलोड करने और अपनी बात रखने के अपने फायदे हैं ये एक खुला मंच है जहां हम अपने दिल की भडास या गुब्बार निकाल सकते हैं या अपने विचार सांझा कर सकते हैं पर एक बात इस पर जो पीडा देती है वो ये कि अपने आपको बहुत smart दिखाने के लिए हम कुछ ऐसी तस्वीरे अपलोड कर देते हैं जो नही करनी चाहिए थी. जिन्हे देख कर मन व्यथित हो उठता है.जैसाकि मैने हाल ही मे एक तस्वीर देखी जो एक सडक दुर्धटना की थी और महिला पुरुष के मृत शरीर पडे थे .अन्य तस्वीर में एक नवयुवती ने फांसी लगा रखी थी और उसका मृत शरीर लटक रहा था.

बेशक , उस पर नजर पडी और मैं तुरंत नेट बंद कर दिया  या दूसरे शब्दों में कहूं तो मन विचलित सा हो गया और धबराहट सी हो गई कि ये क्या देख लिया और नेट बंद करने के बावजूद  भी वही तस्वीर बार बार आखों के सामने आने लगी.

जाने माने समाचार पत्र या टीवी पर भी जब इस तरह की खबर दिखाते हैं तो वो थोडी धुंधली करके दिखाते हैं ताकि पाठक या दर्शक को वो तस्वीर विचलित न कर दे पर सोशल मीडिया पर कुछ लोग ऐसी तस्वीरे दिखा कर ना जाने क्या साबित करना चाह्ते है… ये ठीक नही है 😐  अगर आप भी ऐसा करते हैं तो कृपया न करें !!!

stop photo

विचलित मन के बारे में आपकी राय क्या है ??

November 28, 2015 By Monica Gupta Leave a Comment

What an Idea

mobile photo

Photo by pedrosimoes7

What an Idea

बात बहुत पुरानी नही है जब टीवी पर  आ रहा आईडिया का विज्ञापन …. ओ हो ओ हो   Get Idea  … Get Idea..  बेहद पसंद था और उसकी धुन थिरकने और गुनगुनाने पर मजबूर कर देती … पर यह थिरकन  तांडव में तबदील होने लगी और  गुनगुनाहट  की जगह ले ली चिल्लाहट ने.. असल में, कुछ महीनों से मोबाईल फीचर के बेवजह बिल लग कर आने लगे .तब कभी कस्टमर केयर  तो कभी लोकल आईडिया आफिस जा जाकर  बार बार  लगातार शिकायत की पर नतीजा शून्य  कोई सुनवाई नही हुई और बिल यथावत  वही लग कर आते रहे. प्लान बदलवाया सारे फीचर हटवा दिए  पर फिर भी ढाक के तीन पात  …. !!!! कुछ नही हुआ बस आश्वासन पर आश्वासन आश्वासन पर आश्वासन ही मिलते रहे कि हो जाएगा …  पर हुआ कुछ नही… माना कि मोबाईल आज के समय की आवश्यकता है रोटी कपडा और मकान से पहले मोबाईल होना जरुरी है. पर इसका यह मतलब भी नही कि कम्पनी वाले ग्राहक को बेवजह तंग करें और तो और  सुनवाई भी न हो …!!!

आज के समय में जब मोबाईल  कम्पनियों का इतना जबरदस्त काम्पीटिशन है तो ऐसे में ग्राहकों की  सुविधा का ध्यान तो रखना ही चाहिए ताकि वो छोड कर न जाए पर … पर … पर … !!! ये  तो है उनकी  सोच पर मैने भी सोच लिया है कि अब और नही …   Get Idea  ओ हो  ओ हो नही बल्कि   Get Out Idea  ओ हो … ओ हो …   GET OUT IDEA   नही चाहिए !!!ओ हो ओ हो !!! अब मैं थिरक भी सकती हूं और गुनगुना भी सकती हूं … फीलिंग रिलेक्स्ड 🙂

 

मैं तीस हजारी से बोल रही हूं जरुर पढिएगा

What an Idea पर अगर आपका कोई अनुभव या विचार हो तो जरुर सांझा कीजिएगा …

 

 idea mobile photo

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