Monica Gupta

Writer, Author, Cartoonist, Social Worker, Blogger and a renowned YouTuber

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October 10, 2015 By Monica Gupta

एक मुलाकात रविंद्र जैन जी से

 

 

Ravinder Jain ( monica Gupta )

 

एक मुलाकात रविंद्र जैन जी से

Ravinder Jain – Famous Playback Singer

बात बहुत साल पुरानी  है जब  रविंद्र जी से  ज़ी न्यूज चैनल के लिए इंटरव्यू लेते हुए मिलने का सुअवसर मिला… उनसे बहुत सारी बाते पूछी और इंटरव्यू खत्म होने के बाद मैने अपने सबसे पंसदीदा गाने की फरमाईश की जोकि उन्होने सुनाया भी …

गाना था फिल्म अखियों के झरोखों से का …. जाते हुए ये पल छिन्न क्यो जीवन … !!! बेहद बेहद शानदार गाना जो सीधा दिल की गहराईयों मे उतर जाता है … !!

आज आप दुनिया मे नही रहे पर आपका संगीत, आपकी आवाज सदा सदा इस दुनिया में गूंजती रहेगी …

ईश्वर आपकी आत्मा हो शांति दे !!!

Ravinder Jain ( monica Gupta )

 

October 8, 2015 By Monica Gupta

सोच को बदलो

सोच को बदलो

कई बार गूगल सर्च में बहुत अच्छी बाते पढने को मिल जाती हैं और हमारी नकारात्मक  बदलनी शुरु हो जाती है ..

यह भी सच है

ये राहें ले ही जायेंगी मंजिल तक, हौसला रख….
कभी सुना है कि अँधेरे ने सवेरा होने ना दिया..!!!

अपनी रोटी जो दूसरो के साथ बांट कर खाता है उसे भूख की बीमारी कभी नही सताती

positive thought photo

Photo by somnathbhagat84

हमारे जीवन में अगर कुछ निश्चित है तो वह है – अनिश्चितता… !!!

एक सच ये भी है … छोटी सोच वालों की जीभ अक्सर बड़ी होती है …..

सपने और लक्ष्य में एक ही फर्क है सपने के लिए बिना मेहनत की नींद चाहिए और लक्ष्य के लिए बिना नींद की मेहनत !!!!

आंधियों में भी जो दीया जलता हुआ मिल जाएगा
उस दीए से पूछना मेरा पता मिल जाएगा

मंजिल न सही नजरों में अभी

कदमों में अभी रफ्तार तो है !!!

 

जब टूटने लगें हौंसलें तो याद रखना
बिना मेहनत के हासिल कुछ नही होता
ढूंढ लेना अंधेरों में अपनी मंजिल
क्योकि जूगनू कभी रोशनी का मोहताज नही होता

अपने अंदर के अहम को निकाल कर स्वयं को हल्का कीजिए क्योकि ऊंचा वही उठता है जो हल्का होता है !!!

नन्हीं बच्चियों को दो चार किताबें पढने दो साहब

कोख से बच आई हैं दहेज से भी बच जाएंगी

 

 

October 8, 2015 By Monica Gupta

रैली लीला

 

रैली ( मोनिका गुप्ता) रैली ( मोनिका गुप्ता)

 

रैली लीला

रैली का रौला .. रैली लीला है या राम लीला  या महाभारत अबकी बार  बहुत जल्दी शुरु हो गई है  कही आग उगलते नश्तर की तरह चुभते नेताओ के  बयान,  कही अठ्ठाहस करती राक्षसी और पिशाच जैसी हंसी, कही जंगल राज की बात तो कही धृर्त् राष्ट्र की तरह आखॆ बंद किए बैठी कानून व्यव्स्था, तो कही नेता और मीडिया के चक्रव्यूह मे फसंती जनता …

आज के संदर्भ में यक्ष प्रश्न

आज के समय में किसे सुधरना चाहिए
नेता को ( भडकाऊ भाषणों से)
न्यूज चैनलों को (बेसिर पैर की बातों को तूल देने पर )
या जनता को कि जो ये हो रहा है होता रहेगा इसलिए अपना मन खराब न करे…
है कोई जवाब ???

24 घंटे के खबरिया चैनल, एक एक घंटे की बहस और बहस के अंत में बोलेगें कि समय नही है समय खत्म हो रहा है अरे !!!… जब इतना समय लगाया है तो कुछ समय और देकर कम से कम किसी निष्कर्ष पर तो पहुंचों.. हर रोज यही ड्रामा चलता है … दर्शकों को अधर मे छोड कर क्या दिखाना चाह्ते हो अगर, वाकई आप अपने उठाए मुद्दों के प्रति गम्भीर हैं तो हटाओ विज्ञापन जो बहस के दौरान बार बार दिखाते हो … मत लो ब्रेक… लगातार दिखाओ बहस !! पर नही !! ये न होगा आपसे !! बस दिखावा ही करो कि आप जैसा जागरुक और सजग चैनल कोई दूसरा हो ही नही सकता…!!! हुह !!

भेजा फ्राय !!!

 

October 7, 2015 By Monica Gupta

Joy Of Giving

Joy Of Giving

 

Joy Of Giving by Monica Gupta

Joy Of Giving by Monica Gupta

Joy Of Giving

Joy Of Giving सप्ताह चल रहा है और श्राद्द भी चल रहे हैं ऐसे मे सबसे पहले गाय माता को रोटी खिलाई जाती है .गऊ माता को खाना नही बल्कि गऊ माता को खिलाना है असली Joy Of Giving …

October 5, 2015 By Monica Gupta

बीफ

बीफ

कार्टून  बीफ ( मोनिका गुप्ता )

कार्टून बीफ ( मोनिका गुप्ता )

बीफ

जिस तरह से बीफ की खबर ब्रीफ में दिखाई जा रही है … दिल बैठा जा रहा है. चाहे न्यूज चैनल हो या नेता सब अपनी अपनी टीआरअपी  बढाने में जुटे है और बेचारी गौ माता पूरी तरह से घबराई हुई है …

 

  ABP News

सवाल उठता है कि क्या बीफ और गौ मांस एक ही शब्द है या फिर इसके जो मायने लगाये जा रहे हैं वो गलत हैं. अगर ठेठ अंग्रेजी संदर्भ में देखें, तो कैंब्रिज डिक्शनरी के मुताबिक बीफ का मतलब होता है मवेशी यानी गाय का मांस. वैसे भी अगर वैश्विक संदर्भ में देखें, तो बीफ को गाय, बैल, सांढ़, बछड़े या बछिया के मांस को परिभाषित करने के लिए ही उपयोग में लाया जाता है. ऐसे में भारत से बड़े पैमाने पर बीफ का निर्यात कैसे होता है, जिसका हवाला दे रहे हैं उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और इसी बहाने हमला कर रहे हैं केंद्र की सरकार पर और उसके अगुआ मोदी पर, ये याद दिलाते हुए कि लोकसभा चुनावों के पहले मोदी खुद पिंक रिवोल्यूशन के नाम पर यूपीए की तत्कालीन सरकार पर हमला बोल चुके हैं.

दरअसल जब भारत में हम बीफ शब्द का इस्तेमाल करते हैं और खास तौर पर निर्यात के संदर्भ में, तो इसका मतलब गाय, बैल, सांढ, बछिया या बछड़े के मांस के निर्यात से नहीं होता, बल्कि इसका अर्थ होता है भैंस के निर्यात से. इस तथ्य की तरफ इशारा खुद केंद्रीय वाणिज्य राज्य मंत्री निर्मला सीतारामन ने भी एक प्रेस कांफ्रेंस कर किया. सीतारामन के मुताबिक, भारत से गाय, बैल, सांढ, बछिया या बछड़े के मांस का निर्यात नहीं होता, बल्कि भैंस के मांस का निर्यात होता है. इसी भैंस के निर्यात को आम आदमी तो ठीक, खुद मीडिया भी बीफ एक्सपोर्ट कह देता है, जिसका अर्थ ये लगा लिया जाता है कि भारत से गौ मांस का निर्यात होता है. अगर हम विविध राज्यों के कानूनों को देखें, तो कुछ राज्यों को छोड़कर ज्यादातर राज्यों में गौ हत्या पर प्रतिबंध है. ऐसे में भला गौ मांस का निर्यात कैसे हो सकता है. यहां तक कि भैंसों के मांस का जो निर्यात होता है, उसमें उनकी हड्डियां तक नहीं होती हैं, सिर्फ और सिर्फ बोनलेस भैंस मांस का निर्यात होता है. Read more…

October 4, 2015 By Monica Gupta

घर परिवार

घर परिवार 

 

घर परिवार और समय का महत्व

कल शाम एक जानकार से बात हो रही थी.बातों बातों में मैंने  बताया कि एक टीवी पर बहुत ही अच्छा विज्ञापन आ रहा है जिसमे बेटी अपनी मां को बेटी कह कर पत्र लिखती है और उन्हें ब्लड प्रेशर चैक करने की मशीन भेजती है और लिखती है तुम्हें इसकी जरुरत है… तुम्हारी मां … !!पर मेरी इस बात पर वो जानकार उदास हो गईं और बोली कि तुम तो लिखती रहती हो ब्लाग …क्या मेरी बात को लिख दोगी???

मैंने कहा, अरे क्यो नही आप बताईए तो … इस पर वो बोली कि लगभग 40 -45  साल पहले उनकी शादी बहुत अमीर घर मे हुई. हर तरह की सुख सुविधाएं थी. सारा समय किट्टी पार्टी, सोशल वर्क में लगी रही और घर के लिए समय नही दिया. पति वैसे भी ज्यादातर बाहर रहते और उन्होनें दूसरी शादी भी कर ली थी जिसका उन्हें बहुत बाद में पता चला…  बेटा पहली क्लास में हुआ तो मसूरी होस्टल भेज दिया ताकि झंझट ही न रहे… बेटे से मिलने जब भी जाते तो उनके दोस्तों की पूरी फौज जाती ताकि सैर सपाटा और आऊटिंग भी हो जाए…

कभी उसके बालमन को जानने की कोशिश नही की कि उसे भी मेरी, घर की याद आती होगी.. वो भी मेरी गोदी चाह्ता होगा मुझसे लिपट कर रोना चाह्ता होगा. शिकायत करना चाहता होगा … बस अपनी सहेलियों और अपने ग्रुप में मस्त रही और जाने अनजाने बहुत दूर कर लिया मैने उसे अपने आप से … आज वो विदेश में है और शादी कर ली है दो बच्चे भी हैं और खुश है अपनी दुनिया में … आज मैं उसे याद करती हूं मुझे उसकी जरुरत है पर किस मुंह से बुलाऊं … आज बहुत पछतावा है .. काश मैंने उसे समय दिया होता…. काश  उसके बालो पर हाथ फेरा होता….  काश उसे थपकी देकर सुलाया होता तो …आज सब कुछ है मेरे पास पर फिर भी कुछ नही है … बिल्कुल सुनसान है घर … और बेटे की बनाई कुछ तस्वीरे दिखाने लगीं …

भरे हुए गले से वो तस्वीरे दिखाए जा रही थी और मैं अपने आंसुओं को चाह कर भी रोक नही पा रही थी. मैं बस उसका हाथ पकड कर उन्हें सिवाय दिलासा देने के कुछ नही कह पाई और बाहर आकर सोचने लगी कि बहुत जरुरी है अपने परिवार अपने बच्चों को समय देना. ये हमारी सबसे बडी दौलत हैं और इन्हे सहेजना हमारा कर्तव्य… बच्चों के अच्छे भविष्य के लिए बाहर भेजना कोई गलत नही पर जब वो छुटटियों में घर आए या जब हम मिलने जाए तो पूरा स्नेह दर्शाना बहुत जरुरी है… नही तो जैसे मेरी ये जानकार दुखी हैं और पछता रहीं है और रो रही है वैसे हमे भी इसका सामना न करना पडे… बच्चों का अपने पेरेंट्स और पेरेंटस अपने बच्चों की तरफ लगाव और प्यार सदा बना रहे…

 

घर परिवार और समय का महत्व आपको कैसा लगा …!!! अगर आप भी अपना कोई अनुभव सांझा करना चाहें तो आपका स्वागत है !!!home family photo

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