Monica Gupta

Writer, Author, Cartoonist, Social Worker, Blogger and a renowned YouTuber

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September 24, 2015 By Monica Gupta

सोशल मीडिया और हम

 

social media photo

 

सोशल मीडिया और हम

शोशा सोशल मीडिया का ….

सोशल बनाया … सोशल बनाया … सोशल बनाया आपने … !!!

वैसे एक बात तो माननी पडेगी कि फेसबुक या अन्य सोशल नेट वर्क ने हमें बहुत एक्टिव बना दिया है. पहले जब कोई त्योहार होता तो पापा  या घर के बडे लोग अक्सर कन्नी काटते थे कि मैं जाकर क्या करुगां तुम लोग ही हो आओ.  वही  अब जब से सोशल नेट वर्क सक्रिय हुआ है  पापा लोग खुद जाना पसंद करने लगें हैं और मम्मी  जो हर में कोई भी त्योहार साधारण  घरेलू साडी मे त्योहार मनाती  अब पूरा सज धज के तैयार होकर इसे मनाती है और सभी सपरिवार फोटो खिचवाने के लिए आगे आते हैं इतना ही  नही बच्चे भी चाह्ते है कि  उनकी पूरी फैमिली की तस्वीर हो  इसलिए घर के दादा दादी, नाना नानी बुआ, चाचा सभी मिल कर मनाए ताकि फेसबुक पर ज्यादा  से ज्यादा कमेंटस बटोर सकें  और कोशिश  यही रहती है कि फटाफट फोटो अपलोड कर दें चलिए , इसमें बुरा क्या है … इसी बहाने से ही सही … सब एक तो हो जाते हैं इसलिए थैक्स यू है जी फेसबुक और  अन्य सोशल नेट वर्किंग साईटस का  !!

सोशल बनाया … सोशल बनाया … सोशल बनाया आपने … !!!

सोशल मीडिया और हम

September 24, 2015 By Monica Gupta

फेसबुक मित्र

facebook friend photo

 

फेसबुक मित्र

कुछ देर पहले गेट पर घंटी बजी. एक लडकी थी उसने बताया कि वो पीछे वाली कालोनी मे काम करती हैं. निशा दीदी ने भेजा है. मैं खुश हो गई कि शायद नई काम वाली बाई मुझे मिल गई. मैं जैसे ही कुछ बोलने को हुई वो बोली दीदी ने बताया कि आप फेसबुक करती रहती हो. उनका वाई फाई नही चल रहा. आप जरा मेरे दो तीन कमेंट कर दोंगें और फोटो भी बदलनी है.

मैने बाहर जाने का बहाना बना दिया और मना कर दिया. फिर निशा को फोन करके सारी बात पूछी तो वो बोली कि इस काम वाली ने दुखी कर रखा है खुद तो लिखना आता नही english मे… मुझसे ही लिखवाती है शुरु शुरु में तो मुझे बुरा नही लगा अब तो काम छोड कर बैठ जाती है और कभी इस पर कमेंट कभी इस पर लाईक, कभी उसकी यहां फोटो खीचों कभी वहां … इसलिए अब वो उसके आते ही वाई फाई बंद कर देती है … !!

हे भगवान !!! फेसबुक पर भी कौन कैसा है कुछ पता नही चलता … हम समझते कुछ और हैं और निकलता कुछ और !! वैसे आपने तो देखभाल के ही फेसबुक मित्र बनाए होंगें … है ना ??? क्या पता वो भी आपकी फ्रेंड लिस्ट मे … !!! जिसके कमेंट उसकी मालकिन ….. !!!

फेसबुक मित्र के बारे मे आपका कोई अनुभव हो तो जरुर बताईगा !!

September 23, 2015 By Monica Gupta

ऐसा भी होता है

driver

ऐसा भी होता है

कई बार कुछ ऐसा पढने या सुनने को मिल जाता है कि लगता ही नही है कि यह हकीकत है. ऐसा लगता है मानो कोई फिल्मी कहानी है और किरदार अपना अपना काम खत्म कर के चले जाएगे. पर ये हकीकत है.जिसे मै आपको जरुर बताना चाहूगी. बात है सन 2012 की जिसे मैने नेट पर ही पढा था.

 पूना के एक जाने माने industrialist श्री जावेरी पूनावाला हैं और उनका ड्राईवर है देवी दत्तजोकि पिछ्ले तीस सालो से उनके यहां कार चला रहा है.श्री पूनावाला उस समय जरुरी मीटिंग के सिलसिले मे पूना आए हुए थे जब उन्हे पता चला कि उनके ड्राईवर की मृत्यु हो गई है. उन्होने सारे काम रोक कर देवी दत्त के परिवार वालो से विनती की कि वो जरा उनका इंतजार करे और वो तुरंत हैलीकाप्टर से मुम्बई रवाना हो गए. वापिस लौट कर उन्होने उसी गाडी को सजवाया जिसे देवीदत्त चलाया करते थे और उसमे देवीदत्त का पार्थिव शरीर रखवाया और उस गाडी को स्वंय चला कर घाट तक ले कर गए.

जब उनसे पूछा कि उन्होने ऐसा क्यो किया तो उन्होने कहा कि देवीदत्त मे दिन रात उनकी सेवा की. वो उसके बहुत आभारी है जिसके एवज मे वो इतना तो कर ही सकते है.इसके साथ साथ देवीदत्त बहुत गरीबी से ऊपर उठे थे और इन हालातो मे उन्होने अपनी लडकी को सी.ए. बनाया है जोकि तारीफ के काबिल है.
श्री जावेरी ने बताया कि इसमे कोई शक नही कि रुपया तो हर कोई कमा लेता है पर हमे उन लोगो का भी धन्यवादी होना चाहिए जिनका सफलता मे योगदान रहा. उनका ऐसा मानना है और उन्होने वही किया.
वाकई मे,यह मानवता का एक शानदार उदाहरण है जो कुछ ना कुछ सोचने पर मजबूर कर देता है कि ऐसा भी होता है.

September 23, 2015 By Monica Gupta

सफलता की कहानी

 

ashok[1]

सफलता की कहानी

रक्तदान के क्षेत्र में एक प्रेरणा है अशोक कुमार

रक्तदाता श्री अशोक कुमार

रक्तदान से सम्बंधित एक कार्यक्रम चल रहा था. मीडिया, नेता, वक्ता, टीचर, डाक्टर आदि बहुत सज्जन मौजूद थे. सभी बहुत ध्यान पूर्वक कार्यक्रम सुन रहे थे तभी अचानक दरवाजा खुला और एक पुलिस वाले भीतर आए. उन्हे देख कर अन्य लोगो की तरह मेरे मन मे भी यही सवाल उठ रहा था कि यह यहां किसलिए आए हैं इनका यहां क्या काम है. इतने मे उन्हे स्टेज पर बुलाया गया. मैने सोचा कि स्पीच वगैरहा देकर चले जाएगे. पर स्पीच के दौरान सुना कि वो तो स्वयं रक्तदाता हैं और अभी तक 45 बार रक्तदान कर चुके हैं और 15 बार रक्तदान के कैम्प लगा चुके हैं. उनकी बातो से प्रभावित होकर मैने विस्तार से उनसे बात की.

सफलता की कहानी

उनका पूरा नाम है श्री अशोक कुमार. 3 सितम्बर सन 1972 मे जन्मे अशोक जी का जन्म हरियाणा के करनाल मे हुआ. पिता आर्मी मे थे. उन्होने सन 1962 और 1965 की लडाई भी लडी इसलिए बचपन से ही वो उनसे प्रेरित थे और बस एक ललक थी कि बडे होकर या तो आर्मी या पुलिस मे जाना है. कालिज मे जाने के बाद एनसीसी ज्वाईन कर ली थी. वैसे ना तो उन्हे सांइस और ना ही कामर्स का शौक था पर बडो के कहने पर उस विषय को लेना पडा. इससे पहले मैं कुछ और पूछती उन्होने बताया कि आज की तारीख मे उनके पास चार डिग्री बीकाम, एमकाम, एलएलबी और एलएलएम की हैं. फिर सन 98 मे वो पुलिस मे भर्ती हुए और आजकल हरियाणा के कुरुक्षेत्र मे वो फिंगर प्रिंट एक्सपर्ट हैं.

रक्तदान के बारे मे अपने पहले अनुभव को उन्होने इस तरह से बताया कि सन 90 मे जब एनएसएस का कैम्प लगा था तब वो और उनके तीन चार दोस्त रक्तदान करने गए. तब अपने तीनो दोस्तो मे वो ही रक्तदान कर पाए और उनके दोस्त किसी ना किसी वजह से रक्त दान नही कर पाए. उस दिन इनमे एक अलग सा ही आत्मविश्वास आ गया और बस तभी से रक्तदान की शुरुआत हुई. एक और अच्छी बात यह भी हुई कि घर पर सभी ने शाबाशी दी और प्रोत्साहित किया. वैसे भी आर्मी मे समय बेसमय रक्त की जरुरत तो पडती ही रहती थी तब उनके पिता भी हमेशा आगे रहते. यही भावना उनके मन मे भी घर कर गई थी कि वो भी कभी भी जरुरतमंद को अवश्य खून दिया करेगें.

अब मेरे मन मे एक ही सवाल था कि पुलिस वालो के लिए अक्सर लोग बोलते है कि ये लोग तो खून पीतें हैं. इस पर वो मुस्कुराते हुए बोले कि यकीनन बोलते हैं और कई बार दुख भी होता है पर खुद काम अच्छा करते चलो तो कोई परेशानी नही आएगी. एक बार का वाक्या याद करते हुए उन्होने बताया सन 2010 मे जब उन्होने खून दान किया तो अखबार मे प्रमुखता से खबर छपी तो श्री सुधीर चौधरी (आईपीएस) ने भी यही बात की थी और शाबाशी भी दी थी कि बहुत अच्छा कार्य कर रहे हों. तब भी विश्वास को एक नया बल मिला था.

कोई मजेदार बात सोचते हुए उन्होने बताया कि जब भी वो कैम्प लगाते है कि जानी मानी शखसियत को बुलाते हैं. एक बार ( नाम नही बताया) जब उन्होने अपने कैम्प मे आने का निमत्रंण दिया तो पहले तो उन्होने सहर्ष स्वीकार कर लिया पर बाद मे बोले कि उन्हे रक्त देख कर ही डर लगता है इसलिए वो नही आ पाएगे. पर बहुत प्रयास और समझाने के बाद वो आए और पूरे समय कैम्प पर ही रहे पर रक्तदान के नाम से आज भी कतराते हैं.

अशोक जी ने बहुत गर्व से बताया कि आज की तारीख मे लगभग 1000 पुलिस विभाग के लोग उस मुहिम से जुडे हैं और वो जब भी खुद कैम्प आयोजित करते हैं ज्यादा से ज्यादा पुलिस को जोडते हैं ताकि समाज मे फैली धारणा को वो बदल सकें. समाज सेवा मे मात्र रक्तदान ही नही वो भ्रूण हत्या, वृक्षारोपण, सडक दुर्धटना मे घायल लोगो की मदद करना और गरीब बच्चो को छात्रवृति भी प्रदान करवाते हैं. आज की तारीख मे अशोक जी के पास दो नेशनल एवार्ड हैं. 15 स्टेट एवार्ड ,13 जिले व प्रशासन की ओर से मिले सम्मान और 23 एनजीओ की तरफ से मिले विशेष सम्मान मिले है जोकि बहुमूल्य हैं. मैं उनकी बातों से शत प्रतिशत सहमत थी.

अंत मे जब मैने पूछा कि जनता के लिए क्या संदेश है इस पर वो बोले कि एक कविता लिखी हैं. ये बात फिर चौका गई क्योकि पहली बात तो वो पुलिस वाले फिर रक्तदाता और फिर अब कवि भी. अपना संदेश उन्होने कुछ इस तरह से रखा….

आओ मिल कर कसम ये खाए

खून की कमी से ना कोई मरने पाए

जात पात और मजहब से उपर उठ कर

इंसानियत की जोत जगाए

हम तो है भारत वासी देख का गौरव ऊंचा बढाए !!!

अशोक जी इसी तरह रक्तदान की मुहिम को आगे बढाते रहॆं. आईएसबीटीआई परिवार की ओर से ढेरो शुभकामनाएं !!!!

सफलता की कहानी आपको कैसी लगी ?? जरुर बताईगा !!

मोनिका गुप्ता

September 22, 2015 By Monica Gupta

Audio-व्यंग्य बिजली जाने का सुख- मोनिका गुप्ता

Audio-व्यंग्य बिजली जाने का सुख- मोनिका गुप्ता

http://radioplaybackindia.blogspot.in/…/bijli-jane-ka-sukh-… लीजिए सुनिए … मेरा लिखा व्यंग्य मेरी ही आवाज मे … व्यंग्य है .. बिजली जाने का सुख ..

बिजली जाने का सुख …

 व्यंग्य बिजली जाने का सुख

 हैरान होने की कोई जरुरत नही, बिजली कटस को देखते हुए मैं इस नतीजे पर पहुंची हूं कि बिजली जाने के तो सुख ही सुख है.सबसे पहले तो समाज की तरक्की मे हमारा योगदान है भले ही वो अर्थ आवर ही क्यो न हो. और  बिजली नही तो बिल भी कम आएगा और उन पैसों से ढेर सारी शापिंग.

वृद्ध् लोग बिजली न होने पर हाथ का पखां करेगें तो कन्धों के जोडो की अकडन खुल जाएगी. घरो मे चोरी कम होगी कैसे ? अरे भई, बिजली ना होने की वजह से नींद ही नही आएगी जब सोएगें नही तो चोर आएगा कैसे..

 बिजली ना रहने से सास बहू के आपसी झगडे कम होगें दोनो बजाय एक दूसरे को कोसने के बिजली विभाग को कोसेगीं हैं इससे मन की भडास भी निकल जाएगी और मन को अभूतपूर्व शांति भी मिलेगी. बिजली न होने से दोस्ती भी हो जाएगी.

अब बिजली ना होने पर आप घर से बाहर निकलेगे अडोस पडोस मे पूछेगे लाईट के बारे में. फिर धीरे धीरे  जान पहचान होगी  और दोस्ती हो जाएगी. बिजली न होने की वजह से आप श्रृंगार  और वीर रस के  कवि या लेखक बन सकते हैं. ऐसे लेख निकलेगें आपकी कलम से कि बस पूछिए ही मत.और तो और आप जोशीले भी बन सकते है बिजली घर मे ताला लगाना, तोड फोड , जलूस की अगवाई में महारथ हासिल हो सकती है.बातें तो और भी है पर हमारे यहाँ 3घंटे से लाईट गई हुई है और अब इंवरटर में लाल लाईट जल गई है.

बिजली विभाग का फोन नो रिप्लाई  आ रहा है गुस्से मे मेरा बीपी बढ रहा है डाक्टर को फोन किया तो वो बोले तुरंत आ जाओ. अब ओटो का खर्चा, डाक्टर की फीस ,दवाईयो का खर्चा सभी के फायदे ही फायदे हैं और कितने सुख गिनवाऊँ बिजली जाने के.

 

Monica Gupta

Monica Gupta

Audio-व्यंग्य बिजली जाने का सुख- मोनिका गुप्ता

September 22, 2015 By Monica Gupta

शराब और लडकियां

 

शराब और लडकियां

आज सुबह टीवी पर खबर देख कर मन खराब हो गया. अरे नही !! किसी  नेता के  बड बोले बयान नही देखे ?? उनसे तो मनोरंजन होता है मन खराब नही होता.. असल में, सुबह खबर देखी कि महिला शराब पी कर हंगामा कर रही थी और बहुत अंट शंट  बोल रही थी. खबर एक नही बल्कि तीन तीन थी. दो खबर देरहादून की थी और एक मुम्बई की. एक ने तो हद ही कर दी थाने में ही पुलिस के सामने  बोतल गटक रही थी. मेरा तो देख कर ही सिर शर्म से झुक गया … हे भगवन !! क्या होगा इस देश का !!  मुझे याद आई आज से तीन साल पहले की बात.. नेट पर एक फोटो देखी जिसमे तीन चार महिलाए बीयर की दुकान के बाहर खडी है और दो बीयर पी रही है.. मैने उस समय यह सोच कर सिर झटक दिया कि  ये सब ट्रिक होगी फोटोग्राफी की.. ऐसे थोडे ही ना होता है …

इसी बात के कुछ समय बाद लंच के लिए दिल्ली के जान माने होटल में गए. हमारे सामने एक यंग लडका लडकी आ कर बैठे. सामने ही बैठे  थे इसलिए उनकी आवाज भी साफ आ रही थी. लडकी ने वेटर से पहले शराब मगवाई.  फिर दोनो ने पी. हालाकि लडका बार बार मना कर रहा था.  लडकी ने दूसरी बोतल भी मगवाई. मुझे यह देख कर गुस्सा आ रहा था. इस पर मुझे  ही डांट भी पड गई कि कौन सी दुनिया में रह रही हो मोनिका .. ये तो यहां आम बात है … तू खाना खा आराम से … !!! थोडी देर में लडकी की आवाज ज्यादा तेज हो गई . लडका उसे कुछ समझा रहा था था और फिर  लडका  टुन्न हुई  लडकी को पकड कर  बाहर ले जा रहा था.

अगर ये कुछ साल पहले की बात है तो यकीनन अब तो बहुत तरक्की हो गई होगी  so called समाज में … लडकियां  और भी आगे निकल गई होगी… हैरानी की बात तो ये है कि अगर इस बारे मे हम टोके तो हम ओल्ड फैशन हैं. और अगर लडकी खुद बहक जाए और भगवान न करे इसके साथ कुछ गलत हो जाए तो उम्मीद करते हैं कि हम मोमबती ले कर सबसे आगे आए..

हैरानी है कि जहां बहुत गांव की महिलाए शराब की दुकान बंद करवाने के लिए धरने पर बैठी रहती है और समाज के ठेके दारों से भिड भी जाती हैं वही समाज का एक तबका ऐसा शर्मनाक भी है ..

          !!drink 1                                drink2

बेशक, बहुत पढ लिख गई हैं  लडकियां ,अपने पैरो पर खडी हो गई हैं पर प्लीज  शर्म करिए … अपनी मर्यादा न लांघे !!!

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