Monica Gupta

Writer, Author, Cartoonist, Social Worker, Blogger and a renowned YouTuber

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July 9, 2015 By Monica Gupta

कैसे कैसे अविभावक

कैसे कैसे अविभावक

indian traffic light and people photo

Photo by captain.orange

आज दोपहर कुछ बच्चे स्कूल से वापिस आ रहे थे. मौसम खराब था. रेड लाईट होने पर कुछ वाहन रुके. मेरे साथ एक स्कूटी भी रुकी जिसे शायद एक मम्मी चला रही थी और बच्चा पीछे बैठा था. फ्रूटी पीते पीते वो बता रहा था कि आज क्लास मे बहुत नकल चली . मम्मी ने पूछा तूने तो की नही होगी एक ही सत्यवादी हरिशचंद्र पैदा हुआ है हमारे खानदान मे.

बच्चे का क्या जवाब था ये तो पता नही क्योकि हरी लाईट हो गई थी पर चंद मिनट की यह बात बहुत कुछ सोचने पर मजबूर कर गई. मम्मी को बजाय कटाक्ष के उसकी प्रशंसा करनी चाहिए थी ताकि उसका मनोबल और मजबूत होता पर अफसोस जब पेरेंटस ही ऐसी बाते बोलेगें तो …. ????

इसी बात को अगर दूसरे  तरीके से कहा जाता तो अलग ही असर होता … आज जिस तरह से हमारी शिक्षा का स्तर गिरता जा रहा है ये बात  पेरेंटस को बहुत सोचने की है ….

July 7, 2015 By Monica Gupta

Increase vs decrease

  graph photo

Increase vs decrease

जनसंख्या लगातार बढ रही है. महंगाई का तो कोई हिसाब ही नही बेरोजगारी ,भ्रष्टाचार,प्रदूषण, पेट्रोल, राशन आदि की तो बात ही मत करो . हाल बेहाल है. क्या इनसे कभी छुटकारा मिलेगा.  क्या हमारे सामने कभी कमी भी आएगी या कमी का नाम भी इतिहास हो जाएगा    क्या इनसे कभी छुटकारा मिलेगा…..

अगर आप ऐसा ही कुछ सोच रहे हैं तो परेशान होने की कोई जरुरत नही है क्योकि आज के समय मे बहुत सी चीजो मे कमी या गिरावट आई है और तो और कुछ चीजे तो इतनी सस्ती हो गई है कि उनका कोई मोल ही नही रहा और आप हैं कि राग अलापे जा रहे हैं.

 

 

सुनिए हमारी जान(जिंदगी) सस्ती हो गई है इसकी कोई कीमत नही रही.

जीवन के मूल्य गिर गए है.

आँखो का पानी खत्म होता जा रहा है.

विश्वास की नीव कमजोर हो गई है.

सहनशक्ति कम हो गई है.

जंगल खत्म हो गए हैं हरियाली मे भारी कमी आई है.पक्षियो की चहचाहट कम हो गई है.

चीनी मे मिठास कम हो गई है.

बिजली की सप्लाई कम हो गई है.

स्कूलो मे टीचर और अस्पतालो मे डाक्टरो की कमी हो गई है.

खाने मे पोषक तत्वो की कमी हो गई है.

लडकियो मे खून की कमी हो गई है.जागरुकता, इज्जत, आदर मान ना के बराबर रह गए है और भी बहुत उदाहरण है इसलिए यह मत कहिए कि आज के समय मे कमी की कमी हो गई …..

 

कैसा लगा आपको ये Increase vs decrease लेख जरुर बताईगा 🙂  )

July 7, 2015 By Monica Gupta

मैं खिलाडी

मैं खिलाडी

sketch of a man photo

Photo by The British Library

मैं खिलाडी

मैं खिलाडी तू अनाडी …

क्या परिचय दिया आपने अपने बारे मे ? क्या? आप खिलाडी हैं. ओह अच्छा अच्छा … कौन सा खेल खेलते हैं आप… अरे आप तो मेरी बात सुनकर हंसने लगे … बताईए न कौन सा खेल खेलते हैं आप ?? जी क्या कहां ???

आप राजनीति के मैदान के खिलाडी हैं. जनता को कितना भड्काना है आरक्षण का मुद्दा कितना,कब, कहाँ, कैसे उठाना है. कहाँ बसो, ट्रेनो को आग लगानी है. इसके खिलाडी तो नही है   आप ? ओह अच्छा अच्छा इसके साथ साथ   मैच फिक्सिंग के मैदान के खिलाडी हैं कि कब कहाँ कितना और किसको देना लेना है. किसको स्टिंग आपरेशन मे फसंवाना है या किसे बाहर निकालना है. इसके भी परफेक्ट खिलाडी हैं और इसी के साथ साथ  आप यकीनन देश की भोली भाली जनता को विदेश भेजने के नाम पर लाखो रुपये गटकने वाले खिलाडी  भी होग़ें. है ना. जोकि लालच दिखा कर धोखे से रुपए ऐंठ कर फरार हो जाते हैं.क्यो जनाब!!! कितने रुपये गटके आपने? कुछ बताईए ना …

असल में, हमारे देश मे खिलाडियो की कमी नही है यहाँ किस्म किस्म के खिलाडी है… वैसे आप खिलाडी तो नही होंगें .. क्या कहां … आप खिलाडी हैं … कौन से खेल के … 🙂

 

मैं खिलाडी तू अनाडी

July 6, 2015 By Monica Gupta

Take Care

Take Care

Pic by Monica Gupta

अभी कुछ देर पहले मणि मेरे घर खीर ले कर आई … अरे वाह खीर !!!! किस खुशी में … वो बोली कि जब पिछ्ले दिनों वो छुट्टियों में बाहर चले गए थे तो पौधे सूख गए थे. एक को तो बचा नही पाई थी पर एक पौधे को उसने बचा लिया. उसकी खूब देखभाल की सुबह दोपहर शाम पानी दिया और आज सुबह उसमे फूल खिला है. उसी खुशी में खीर … मैने उसकी आखों मे झिलमिलाती खुशी देखी.

सच, हम अक्सर पौधो के मामले मे सुस्त हो जाते हैं अगर उन्हे लगाया है तो पानी देना तपती गर्मी से बचाना भी हमारा ही फर्ज है. घर की सुंदरता बढाने के साथ साथ वो हमारे अच्छे दोस्त भी है. अगर आप भी बचा सकते हैं तो किसी को मुरझाने से बचा लिजिए… Take Care of plants …

पर्यावरण को सुरक्षित रखने के बहुत लोग अपने अपने तरीके से संदेश देते हैं … कोई टीवी पर, कोई नाटिका के माध्यम से तो कोई गीत गाकर तो कोई समाचार पत्र मे माध्यम से जनता को प्रेरित करते हैं …

दैनिक भास्कर ने भी एक अभियान छेडा

बरसात के इस मौसम में अपने नाम का पौधा लगाएं।

औषधीय पौधा लगाएंगे तो और भी उत्तम होगा।

एक पौधा हमारे लिए माध्यम बनेगा, अपने बचपन को फिर से जीने का।

मा नसून ने दस्तक दे दी है। फिलहाल इसने तेजी नहीं पकड़ी है। मगर पूरी उम्मीद है कि कुछ देर से ही सही, घटाएं जमकर बरसेंगी।

हर वर्ष की तरह, इस बार भी दैनिक भास्कर समूह अपने करोड़ों पाठक परिवारों के साथ मिलकर आज से पौधरोपण अभियान की शुरुआत कर रहा है। यही तो सही समय है, जब हमारे द्वारा लगाए गए पौधे धरती की गोद में आसानी से पल-बढ़ सकते हैं।

आइए, आज हम एक नई परंपरा की शुरुआत भी करते हैं। बरसात के इस मौसम में हम अपने नाम का एक पौधा लगाते हैं। और फिर उसकी देखभाल उतने ही प्यार से करें, जैसी हमारे बड़े हमारी करते थे। यकीन मानिए, जब हम रोज सुबह अपने नाम के इस पौधे को देखेंगे तो हमारे चेहरे पर कुछ वैसी ही मासूम मुस्कुराहट होगी, जैसी बचपन में हुआ करती थी। वह पौधा हमारे लिए माध्यम बनेगा, अपने बचपन को फिर से जीने का।

ऐसा हम अपने परिवार के सभी सदस्यों के लिए करें। परिवार का प्रत्येक सदस्य अपने नाम का एक पौधा लगाए। यदि भास्कर के करोड़ों पाठक अपने नाम का एक पौधा लगाएं और उसकी देखभाल करें, तो हम पर्यावरण को हराभरा करेंगे ही, आने वाली पीढ़ियों को अपने नाम की अनमोल विरासत भी देंगे।

 

 www.bhaskar.com

Via bhaskar.com

Take Care

July 6, 2015 By Monica Gupta

सादर चरण स्पर्श

बच्चों के लिए अच्छी आदतें

सादर चरण स्पर्श – आज घर पर एक मित्र आए . उनके छोटे  से बच्चे ने बहुत शालीनता से झुक कर पैर छुए. सच जानिए बहुत अच्छा लगा. बच्चों में इस तरह के संस्कार जरुर देने चाहिए. पुराने ऐतिहासिक धारावाहिकों में भी अक्सर  ये देखने को मिल जाता है. कुछ लोग पाव छूने पर आशीर्वाद देते हैं और पीठ थपथपाते हैं तो कुछ रोक लेते हैं कि अरे नही नही … हम इतने बडे अभी नही हुए हैं..!!!

सादर चरण स्पर्श

वैसे मेरी एक जानकार थी वो पैर छूने पर बस मुहं से ही बोलती थी खुश रहो पर सिर पर हाथ नही रखती थी … बाद मे महसूस किया कि वो कभी भी किसी को सिर पर हाथ रख कर आशीर्वाद नही देती थी पर दूर से ही खुश रहो बोल देती थी. वैसे पहले समय की अगर बात करें तो कई लोग जब अपने से बडे को पत्र लिखते थे तो वो शुरुआत ही सादर चरण स्पर्श से करते थे.

हिंदू परंपराओं में से एक परंपरा है सभी उम्र में बड़े लोगों के पैर छुए जाते हैं। इसे बड़े लोगों का सम्मान करना समझा जाता है. उम्र में बड़े लोगों के पैर छूने की परंपरा काफी प्राचीन काल से ही चली आ रही है। इससे आदर-सम्मान और प्रेम के भाव उत्पन्न होते हैं। साथ ही रिश्तों में प्रेम और विश्वास भी बढ़ता है। पैर छूने के पीछे धार्मिक और वैज्ञानिक कारण दोनों ही मौजूद हैं।

bow his head photo


जब भी कोई आपके पैर छुए तो सामान्यत: आशीर्वाद और शुभकामनाएं तो देना ही चाहिए, साथ भगवान का नाम भी लेना चाहिए। जब भी कोई आपके पैर छूता है तो इससे आपको दोष भी लगता है। इस दोष से मुक्ति के लिए भगवान
का नाम लेना चाहिए। भगवान का नाम लेने से पैर छूने वाले व्यक्ति को भी सकारात्मक परिणाम प्राप्त होते हैं और आपके पुण्यों में बढ़ोतरी होती है।
आशीर्वाद देने से पैर छूने वाले व्यक्ति की समस्याएं समाप्त होती है, उम्र भी बढ़ती है।
किसी बड़े के पैर क्यों छुना चाहिए:-
पैर छुना या प्रणाम करना, केवल एक परंपरा या बंधन नहीं है। यह एक विज्ञान है
जो हमारे शारीरिक, मानसिक और वैचारिक विकास से जुड़ा है। पैर छूने से केवल बड़ों का आशीर्वाद ही नहीं मिलता बल्कि अनजाने ही कई बातें हमार अंदर उतर जाती है।

पैर छूने का सबसे बड़ा फायदा शारीरिक कसरत होती है, तीन तरह
से पैर छुए जाते हैं। पहले झुककर पैर छूना, दूसरा घुटने के बल बैठकर तथा तीसरा साष्टांग प्रणाम। झुककर पैर छूने से
कमर और रीढ़ की हड्डी को आराम मिलता है। दूसरी विधि में हमारे सारे जोड़ों को मोड़ा जाता है, जिससे उनमें होने वाले
स्ट्रेस से राहत मिलती है, तीसरी विधि में सारे जोड़ थोड़ी देर के लिए तन जाते हैं, इससे भी स्ट्रेस दूर होता है। इसके
अलावा झुकने से सिर में रक्त प्रवाह बढ़ता है, जो स्वास्थ्य और आंखों के लिए लाभप्रद होता है। प्रणाम करने का तीसरा सबसे बड़ा फायदा यह है कि इससे हमारा अहंकार कम होता है। किसी के पैर छूना यानी उसके
प्रति समर्पण भाव जगाना, जब मन में समर्पण का भाव आता है तो अहंकार स्वत: ही खत्म
होता है।

 

Rajasthan Patrika:secret of feet touching sanskar

जयपुर चरण स्पर्श व चरण वंदना को भारतीय संस्कृति में सभ्यता और सदाचार का प्रतीक माना जाता है। आत्मसमर्पण का यह भाव व्यक्ति आस्था और श्रद्धा से प्रकट करता है। यदि वैज्ञानिक दृष्टिकोण से देखा जाए तो चरण स्पर्श की यह क्रिया व्यक्ति को शारीरिक और मानसिक रूप से पुष्ट करती है। यही कारण है कि गुरुओं, (अपने से वरिष्ठ) ब्राह्मणों और संत पुरुषों के अंगूठे की पूजन परिपाटी प्राचीनकाल से चली आ रही है।

यही कारण है कि गुरुओं, (अपने से वरिष्ठ) ब्राह्मणों और संत पुरुषों के अंगूठे की पूजन परिपाटी प्राचीनकाल से चली आ रही है।

इसी परंपरा का अनुसरण करते हुए परवर्ती मंदिर मार्गी जैन धर्मावलंबियों में मूर्ति पूजा का यह विधान दक्षिण पैर के अंगूठे की पूजा से आरंभ करते हैं और वहां से चंदन लगाते हुए देव प्रतिमा के मस्तक तक पहुंचते हैं। rajasthanpatrika.patrika.com

कुछ भी कहिए पर चापलूसी से दूर होकर चरण स्पर्श आदर के साथ किया जाए तो सुखकर होता है …

सादर चरण स्पर्श … लेख आपको कैसा लगा !! जरुर बताईएगा !!

July 2, 2015 By Monica Gupta

पोस्ट अच्छी बुरी

 

social networking sites photo

Photo by Franco Bouly

पोस्ट अच्छी बुरी

 

कल  फेसबुक पर एक पोस्ट देखी.  फोटो में आटो वाला अपने वाहन मे विकलांगों को फ्री सर्विस देता है उन्होने अपने ओटो मे यही बात बडा करके लिखवाई हुई थी. उस पोस्ट पर लिखा था बताओ कितने लाईक मिलेंगें और उस पर मुश्किल से 10 -12 लाईक थे.

बात लाईक करने या न करने की नही है क्योकि यकीनन पढते तो सभी है बस अच्छाई को पसंद करने के लिए बस क्लिक नही कर पाते. पर मुझे यकीन है कि ऐसे लोग दिल ही दिल मे प्रशंसा भी करते होंगें.

दो दिन पहले एक अन्य तस्वीर भी देखने को मिली. आठ दस साल की लडकी की तस्वीर थी और उसमे लिखा था कि ” मेरे पापा ने कहा है कि अगर इस फोटो को एक हजार लाईक मिले तो वो सिग्रेट पीना छोड देंगें. मुझे अच्छा लगा कि लगभग 900 से ज्यादा लाईक हो चुके थे. मैने भी तुरंत लाईक कर दिया. हालाकि उसके बाद मुझे वह फोटो न्यूज फीड मे नही दिखी. पता नही लोगो ने उसे लाईक किया या  नही  वैसे आप चाहे कुछ भी कहें पर कई पोस्ट वाकई में अच्छी होती है.

एक पोस्ट तो पढ कर मजा ही आ गया . उसमे लिखा था कि मैने अभी भगवान की फोटो शेयर की है. इंतजार कर रहा हूं कि शुभ समाचार क्या मिलेगा… क्योकि उस पोस्ट पर लिखा था कि जल्दी से शेयर करो और शुभ समाचार पाओ…

बहुत समय पहले इसी प्रकार के पोस्टकार्ड आया करते थे तब समझ नही आता था कि इसे फेंक दे , फाड दें या जवाबी 50 पत्र लिख कर डाल दे…

खैर पोस्ट हर तरह की है अच्छी बुरी … हमारी ऊपर है कि हम उसे देख कर अनदेखा कर देतें हैं या लाईक करके अपनी सहमति जताते हैं.

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