Laughing Club
Feelings
Feelings
बच्चों का अपने मम्मी पापा के प्रति प्यार …
जहां माता पिता में अपने बच्चों के प्रति भावनाए होती हैं वही बच्चों में भी अपने माता पिता के प्रति भावनाए होती हैं.
बहुत दिनों के बाद मणि का बेटा दो दिन के लिए घर आया. नौकरी में इतना व्यस्त हो गया है कि कई कई बार तो बहुत बहुत दिन फोन पर बात ही नही हो पाती.मणि उसकी आवभगत में जुटी थी. नाश्ते के बाद प्लेट उठा कर रसोई के जा ही रही थी कि बेटे ने आवाज देकर उसे रोका .अपना बैग खोला और बोला आखॆ बंद करो आपके लिए कुछ है. फिर मणि के हाथ कुछ पकडा दिया. हाथ मे लेते ही मणि चौंक गई और आखें खोलती हुई बोली अरे !!!
इतने साल हो गए ..
इसका क्या करुगी.. भूल भाल गई हूं सब !!बेटे ने कहा जब बचपन में आप हमे बजा कर सुनाती थीं तो आप खुद ही कहती थीं कि एक बार बजाना आ जाए तो जिंदगी भर नही भूल सकते ..
मणि ने भी जानॆ अनजाने माउथओरगन होठों से लगा लिया .वही मणि मुझे दिखाने लाई थी और डबडबाई आखें, खुशी … उससे कुछ बोला ही नही जा रहा था. मैं उसकी तरफ देख कर सोचे जा रही थी बहने दे ये आसूं … .. सच, छोटी छोटी खुशियों में Feelings में कितना सारा प्यार अपनापन और अहसास छिपा होता है देख रही हूं..
Feelings पर अगर आपका भी कोई अनुभव हो तो जरुर बताईगा !!!
Brave boy Siddesh
Brave boy Siddesh
Std IV student Siddesh’s timely alert about a broken track saves many lives on Bengaluru-bound trains
एक से बढ कर एक खबरो का बाजार गर्म है. बेसिर पैर की, फालतू और अंट शंट खबरों के शोर मे बहुत अच्छी और प्रेरक खबरें खो जाती है और पटडी के किनारे पर पडे पडे दम तोड देती है.
नेट सर्च करने के दौरान मैने बैंगलौर के बहादुर बच्चे सिद्देश की खबर पढी जिसने एक भयंकर रेल हादसा होने से बचा लिया. उस दिन मैने सारे चैनल खंगाल डाले पर कही भी इस बच्चे की खबर नही दिखाई दी फिर मैने अलग अलग अखबार जोकि आन लाईन थे उन पर देखा तो विस्तार से खबर पढी.
खबर कुछ ऐसे थी कि नौ साल के बच्चे Siddesh सिद्देश ने एक ट्रेन हादसा होने से बचा लिया। वो सरकारी स्कूल, Davanagere मे चौथा कक्षा में पढ़ते है। घटना रविवार सुबह की है।सिद्देश ने न सिर्फ अपने पिता मंजुनाथ को टूटी रेललाइन के बारे में बताया बल्कि अपनी लाल टी शर्ट लहराकर ट्रेन भी रोकी ।
Siddesh के पिता मंदुनाथ रेल लाइन से थोड़ी दूर पर एक छोटा होटेल चलाते हैं। उनके अनुसार बच्चे ने बताया, ‘मैंने टूटी हुई रेल लाइन देखी और परेशान हो गया। मैं जल्दी से अपने पिता जी को बताने के लिए दौड़ा।’ मंजुनाथ ने पहले तो बच्चे की बात को गंभीरता से नहीं लिया लेकिन नन्हा सिद्देश उन्हें खींचकर रेलवे ट्रेक की ओर ले गया। वहां मंजुनाथ ने देखा की रेल लाइन तो सचमुच टूटी हुई है। वहां कुछ और लोग भी इकट्ठे हुए थे लेकिन वह समझ नहीं पा रहे थे कि इस बारे में क्या किया जाए। तब तक तो कुछ ट्रेनें वहां से गुजर भी चुकी थीं।
मंजुनाथ ने बताया कि Siddesh हर रोज ट्रेनों को आते-जाते सुनता है और उनकी आवाज से अच्छी तरह वाकिफ है। सिद्देश की मां अंसुयम्मा ने बताया कि उनके बेटे ने अपनी लाल टी शर्ट एक डंडे में लपेट दी और उसे लहराने लगा। उस समय हुबली- चिद्रांगदा एक्सप्रेस वहां से होकर गुजरने वाली थी।’
वही रेलवे के अधिकारियों का कहना है कि गर्मियों में अक्सर रेल लाइनें टेढ़ी-मेंढ़ी हो जाती हैं। कुछ यात्रियों ने सिद्देश की तारीफ की और जिला प्रशासन से उस बहादुरी के लिए अवॉर्ड दिलाने की अपील की। सिद्देश के स्कूल की हेडमास्टर गायत्री देवी एमसी ने कहा कि वह एक औसत स्टूडेंट है और पढ़ाई के अलावा दूसरी गतिविधियों में भी आगे रहता है। अब हेडमास्टर को लगता है कि वह एक बहादुर बच्चा है जिसने कई जिंदगियां बचाईं हैं।रेलवे स्टेशन मैनेजर ने कहा कि हमारे इंजिनियर ने बच्चे का शुक्रिया अदा किया और इनाम को तौर पर 500 रुपये दिए। हम Brave boy Siddesh को ब्रेवरी अवॉर्डदिलाने की सिफारिश भी करेंगे।
बात किसी भी तरह के पुरस्कार की नही है बात है कि किस खबर की कितनी अहमियत है अगर इस बहादुर बच्चे की खबर दिखाई जाए तो निसंदेह और भी बच्चे प्रेरणा ले कर अपने चारो तरफ हो रही गतिविधियों के प्रति सजग रह सकते है और एक भारतीय होने का फर्ज अदा कर सकते है.
मुझे व्यक्तिगत रुप से खबर बेहद प्रेरक लगी . इसलिए इसे विस्तार मे दिया. और भविष्य मे भी इस तरह की खबरों पर मेरी नजर रहेगी और ऐसे बहादुर बच्चों के बारे मे लगातार लिखती रहूगी
बधाई और ढेर सारी शुभ कामनाएं सिद्देश !!! Siddesh हमें आप पर गर्व है!!! Brave boy Siddesh … Wow !!!
Commentator
Hetvi Pareek … Child Artist
Hetvi Pareek … Child Artist
जिन्हे सपने देखना अच्छा लगता है उन्हे रात छोटी लगती है, जिन्हें सपने पूरा करना अच्छा लगता है उन्हे दिन छोटा लगता है…..!!! ऐसे ही अपने नन्हे मासूम सपने पूरे करने मे जुटी है आठ साल की हेतवी पारिख. जी, हां, वही हेतवी पारिख जिन्हे आप आजकल सब टीवी के बहुचर्चित धारावाहिक “लापतागंज” मे भाग्यलक्ष्मी के किरदार के रुप मे देख रहे हैं. जैसे अपने किरदार मे उसने सब मन मोह लिया ठीक वैसे ही मीठी मुस्कान और प्यारी सी आवाज लिए वो हम सब के दिलों में कब घर कर गई पता ही नही चला.
Hetvi Pareek … Child Artist “बालिका वधू”,”रिंग रांग रिंग”,”हारर नाईटस” आदि धारावाहिको के साथ साथ अनेको विज्ञापनों जैसे लाईफ बाय, हिप्पो चिप्स,कोलगेट, युनिसेफ, नूडल्स आदि में नन्ही हेतवी अपना ध्यान हमारी और आकर्षित कर रही है. प्यारी सी हेतवी से जब बात करने का मौका मिला तो उन्होने मासूमियत से सारे जवाब देने शुरु किए. मुस्कुराते हुए बताने लगी कि उनका जन्म मुम्बई मे 29 दिसम्बर 2004 को हुआ. वो अपने मम्मी पापा की इकलौती बेटी है और वो अभी तीसरी क्लास मे पढ रही है. इसी बीच उनकी मम्मी तृप्ति जी भी आ गई. मेरे पूछ्ने पर कि टीवी सीरियल मे काम करने का कैसे विचार बना. क्या कोई परिवार मे भी हैं जो पहले से ही इस क्षेत्र मे काम कर रहे हैं.
उन्होनें बताया कि उनका कोई फिल्मी बैकग्राऊंड नही है और ना ही कोई गाड फादर हैं. असल मे, जब हेतवी छोटी थी तो सभी कहते थे कि यह बहुत ही प्यारी है इसे अभिनय के क्षेत्र मे आना चाहिए. पहले तो ज्यादा ध्यान नही दिया पर दोस्तों के बार बार कहने पर उन्होनें एक बार कोशिश करने की सोची. पर राह आसान नही थी. बहुत जगह गए. आडीशन दिए.कुल मिलाकर यह ये कहे कि बहुत धक्के खाए तो गलत नही होगा. जब ट्राई करना शुरु किया तब ये तीन साल की थी. दो साल बीत गए पर कही से आशा की किरण नही नजर आई. तृप्ति जी बताए जा रही थी कि बस उन्होने हिम्मत नही हारी और एक दिन आया जब हेतवी 5 साल की उम्र मे कैमरे के आगे अपना पहला शाट दे रही थी.वो पल सबसे ज्यादा खुशी का पल था जब आज भी वो पल आखों के सामने आ जाता है तो आखॆ खुद ब खुद नम हो जाती हैं.
एक वो दिन था और आज का दिन है. आठ साल की हेतवी शूटिंग मे पूरी तरफ से व्यस्त है.पास मे बैठी Hetvi Pareek शरारत कर रही थी तो मैने पूछा कि जब रिकार्डिंग होती है तब पढाई कैसे करती हो इस पर वो बोली कि कभी कभी स्कूल मिस हो जाता है पर जब पेपर होते हैं तब वो उन्हे नियमित रुप से देती है और तब कोई शूटिंग नही करती.
मेरे पूछने पर कि कभी रिकार्डिंग के दौरान मजेदार बात हुई जिसे याद करके बहुत हंसी आती हो. इस पर उसने एक पल सोचा फिर जोर जोर से हंसते हुए बताने लगी कि कुछ समय पहले लापतागंज की रिकार्डिंग चल रही थी और उसका सोने का सीन था. उसे आखे बंद कर सोने को कहा गया और वो सचमुच मे ही सो गई. सीन खत्म होने के बाद सब उसे उठा रहे थे और वो मजे से सोए जा रही थी. उसकी प्यारी प्यारी बाते सुन कर सच मे बहुत मजा आ रहा था. मैने हेतल से फिर पूछा कि खाने मे क्या पसंद है इस पर वो तपाक से बोली पिज्जा और चाईनीज. मैने भी तपाक से पूछ लिया और दूध पीना कैसा लगता है इस पर वो बोली तो कुछ नही पर उसके हाव भाव से मै समझ गई थी कि और बच्चो की तरह वो भी दूध के नाम से कोसो दूर भागती है.
तृप्ति जी ने बताया कि 6 से 8 घंटे की शूटिंग के दौरान वो घर का खाना, फल और जूस सेट पर ले कर जाती हैं ताकि समय समय पर उसे दे सके. तब वो मना नही करती और चुपचाप ले लेती है. हेतवी साथ ही बैठी सारी बाते सुन रही थी मैने पूछा कि अब तक का सबसे अच्छा रोल कौन सा लगता है इस पर वो बोली कि वैसे तो सभी अच्छे लगते हैं पर लापतगंज करते हुए बहुत मजा आ रहा है. वहां बहुत मस्ती भी करते है. खासकर एक ऐपिसोड था जिसमे सीरियल “चिडिया घर” और “लापतागंज” मिला कर एक घंटे का बनाया था उसमे उसने अपनी मम्मी यानि इन्दुमति का किरदार निभाया था. जिसकी सभी ने बहुत प्रशंसा की थी.
बताते बताते वो मानो उसी की यादो मे खो गई. मैने उसे उन यादो से बाहर निकाला और पूछा कि उसके पसंदीदा हीरो और हीरोईन कौन है. मुस्कुराते हुए वो बोली कि करीना, कैटरीना और आमिर, सलमान और शाहिद अंकल बहुत ही पसंद हैं और बहुत मन है कि इन सभी के साथ एक बार जरुर काम करे वैसे काजोल आंटी के साथ तो नूडल्स के विज्ञापन मे काम किया ही था. तब सच मे बहुत अच्छा लगा था. हेतवी की मम्मी ने बताया कि जो भी रोल इसे दिया जाता है उसे पूरी मेहनत और लग्न के साथ निभाती है और हर समय एक जोश मे रहती है. बात चाहे पढाई की हो या रिकार्डिंग की. दोनो तरफ पूरा ध्यान रहता है. खुशी इस बात की भी है कि पढाई मे भी उतना ही बेहतर नतीजा लाती है और स्कूल मे सब इसे बहुत प्यार करते हैं.
सच मे, Hetvi Pareek की प्यारी प्यारी बाते सुन कर जाने का मन तो नही कर रहा था पर उसकी शूटिंग थी और तैयारी भी करनी थी. जाने से पहले मैने एक बात उससे जरुर पूछी कि वो अपनी उम्र के बच्चो को क्या मैसेज देना चाहेगी इस पर वो बोली कि किसी भी काम की टॆंशन नही लेनी चाहिए. जिस काम का करने का मन हो वो जरुर करना चाहिए. मेहनत से काम करते रहना चाहिए. फिर उसका रिजल्ट हमेशा अच्छा ही आएगा. वाकई मे, उसने बिल्कुल सही कहा. आज नन्ही हेतवी धारावाहिक, विज्ञापनो के साथ साथ दो फिल्मे भी कर रही है. पापा मम्मी की लाडली हेतवी भी दिन रात मेहनत, लग्न और सच्चाई से काम करती रहे और ईश्वर करे कि जिस मुकाम पर वो पहुचनां चाहे उसे सफलता मिले.
नन्ही ,प्यारी सी Hetvi Pareek … Child Artist को ढेर सारी शुभकामनाएं !!!!
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