Monica Gupta

Writer, Author, Cartoonist, Social Worker, Blogger and a renowned YouTuber

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March 23, 2016 By Monica Gupta Leave a Comment

होली का त्योहार , महिलाएं और डर

होली का त्योहार , महिलाएं और डर

होली का त्योहार , महिलाएं और  डर

बुरा ना मानो होली है. होली मेरा प्रिय त्योहार है गुझिया की महक और गुलाल बहुत सुंदर लगते हैं पर बस डर लगता है तो होली के दिन  घर से बाहर निकलने मे… !! बहुत लोग, खासकर, महिलाएं भीतर रहना ही पसंद करती हैं या ऐसी जगह छिप जाती हैं जहां कोई पहुंच न सके … वैसे अपवाद भी हर क्षेत्र में होते हैं … !!!

होली का त्योहार और हमारा डर

होली का त्योहार , महिलाएं और  डर

March 23, 2016 By Monica Gupta Leave a Comment

# होली है – बुरा न मानो होली है

# होली है – बुरा न मानो होली है

# होली है – बुरा न मानो होली है

होली ने हमारे दिलों मे हौले से दस्तक दे दी है और हर कोई बडा हो या छोटा होली के रंग में रंगा झूम रहा है … वो अलग बात है कि इस बार यह कंफ्यूजन रहा संशय रहा कि होलिका दहन कब होगा और  अनुमान सरकारी छुट्टी और  ड्राई डे से लगाया गया  पर होली की खुमारी ही ऐसी है कि सब भूल कर गुझिया की खूश्बू में, मस्ती में होली खेलते नजर आते है…

सैमसन क्रिएशनस भी अपने अलग अलग कार्यक्रमों से सभी का मनोरंजन करता रहा है. होली का त्योहार भी बच्चों ने खूब मौज मस्ती के साथ मनाया. किसी ने कार्ड बनाना सीखाया तो किसी ने भगवान का नाम लेकर कार्यक्रम का श्री गणॆश किया किसी ने चुटकुला सुनाया तो किसी ने रंगारंग डांस दिखाया … कोई भी हो हर त्योहार हमें प्रिय है जिसे हम सभी मिल जुल कर मनाते है. आईए देखे मस्ती मौज से भरा कार्यक्रम होली है

 

 

https://youtu.be/jRlPwk7iMNg

 

बात बहुत ज्यादा पुरानी भी नही है जब हम इतने अदब वाले होते थे कि होली के मौके कब पर किसी  पर हंसना हो या तंग करना हो तो इस  बात को  ध्यान में रखते  हुए कि अगला बुरा न मान जाए इसलिए साथ ही साथ बोल देते बुरा न मानो होली है … पर आज हमारे समाज इतना कुछ धटित हो रहा है कि यह कहना कि बुरा न मानो … कहना अजीब सा लग रहा है

# होली है – बुरा न मानो होली है

कैसा लगा आपको ये रंगारंग कार्यक्र्म ..

जरुर बताईएगा

March 22, 2016 By Monica Gupta Leave a Comment

एक उपलब्धि ऐसी भी

एक उपलब्धि ऐसी भी

 

एक उपलब्धि ऐसी भी

स्कूली शिक्षा और उपलब्धि

परीक्षा समाप्त हुई और अब तैयारी है नई क्लास में जाने की. कुछ बच्चों के रिजल्ट आ गए और कुछ के आने वाले हैं. कोई खुश है तो कोई उदास है पर सबसे ज्यादा ध्यान देने वाली बात ये है कि अगर नम्बर कम आए हैं तो ज्यादा उदास होने की जरुरत नही. नई क्लास में शुरुआत से ही आप खूब मेहनत करो, नियमित रहो और अगले साल नतीजा खूब अच्छा लाओ ..

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वैसे नियमित रहने की बात  से मुझे अमन की याद आ गई. क्या ?? अमन  कौन ?? आप अमन मिढ्ढा को नही जानते. अरे !! चलिए कोई बात नही … मैं आपको अमन के बारे मे विस्तार से बताती हूं. अमन मिढ्ढा हरियाणा के सिरसा में रहते हैं सैंट जेवियर्स स्कूल में पढ रहे हैं और अभी दसवीं क्लास की परीक्षा दे रहे हैं. आपको पता है कि अमन की सबसे बडी खासियत क्या है !!!

अमन लगातार 6 साल से बिना छुट्टी लिए नियमित स्कूल जा रहे हैं… अरे ?? आप खडे क्यों हो गए ??? बैठ जाईए आराम से !! वैसे बात तो है ही हैरानी की…!!! जब मुझे पता चला था तो मैं भी हक्की बक्की रह गई थी … !! 6 साल !!! आज जहां हम बच्चे नए नए बहाने खोजते हैं sick leave हमारी जेब में हमेशा तैयार रहती है कि किस तरह स्कूल से छुट्टी करें पर वही अमन स्कूल जाने के बहाने खोजता है.

 

अमन ने बताया कि जब वो पांचवी क्लास के बाद  जब क्लास 6 में गए तब   महसूस किया  कि उन्होनें तो दो साल में एक भी छुट्टी नही ली. अमन की इस शानदार उपलब्धि देखते हुए स्कूल ने सम्मानित किया गया. जहां स्कूल के सभी टीचर बेहद प्रभावित थे वही कुछ बच्चे परेशान भी थे क्योकि उन्हें शायद कही न कही डर था कि अमन की इस नियमित उपलब्धि से कही उनके माता पिता भी उन्हें हर रोज स्कूल जाने के लिए टोकना न करना शुरु कर दें  इसलिए वो कई बार अमन से बोला करते कि अगर वो छुट्टी करेगा और स्कूल नही आएगा तो उसे फलां उपहार देंगें … पर अमन ने यह होने ही नही दिया और आज इस बात को 6 साल जी हां 6 साल हो गए हैं और अमन नियमित स्कूल जा रहा है उन्होनें एक भी छुट्टी नही की .

इस उपलब्धि के लिए स्कूल से तो सम्मानित हुए  ही हैं साथ ही साथ उनकी इस शानदार उपलब्धि पर जिला प्रशासन ने भी सम्मानित किया.

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मुझसे बात करते हुए अमन ने विस्तार से बताया कि स्कूल उनका दूसरा घर है और उन्हें हर रोज स्कूल जाने में बहुत खुशी मिलती है. अमन अपनी मम्मी और अपने दादू को खासतौर पर इस बात का श्रेय देते हैं  कि वो हमेशा प्रोत्साहित करते रहे और 6 साल नियमित स्कूल जाते जाते कैसे बीत गए पता ही नही चला… !!

बातों बातों में अमन ने यह भी बताया कि शायद लगातार स्कूल जाने की वजह से  वो क्लास में भी प्रथम स्थान प्राप्त कर रहा है. ओह !!  एक और उपलब्धि !!! वैसे लगातार चार साल प्रथम आना भी कोई कम उपलब्धि नही. मेरा विचार था कि जो बच्चा रोज स्कूल जाता हो. पढाई में प्रथम आता हो वो तो co curricular activities यानि सह पाठ्यक्रम गतिविधियां पर तो ध्यान दे ही नही पाता होगा. इस पर अमन ने  मुस्कुराते हुए बताया कि स्कूल की सांस्कृतिक गतिविधियों में वो अक्सर एंकरिग किया करता है और उसे क्रिकेट खेलना बेहद पसंद है.

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अमन का अभी 10 क्लास  बोर्ड का एक पेपर बाकी है मेरे पूछ्ने पर कि परीक्षा का डर लगता है उन्होनें  बताया कि बहुत डर लगता है कई बार ऐसा लगता है कि कुछ नही आता पता नही क्या होगा पर इस बार एक बहुत अच्छी बात हुई वो ये कि प्रधान मंत्री मोदी जी ने मन की बात मे परीक्षा की बात की थी जोकि बहुत काम आई क्योकि उन्होने बात को इस तरीके से कहा कि अब की बार परीक्षा का डर बहुत कम लगा…!!

इतने मे अमन की मम्मी रिम्पी मिढ्ढा अमन की पसंदीदा घी वाली परौंठी ले आई और अमन खाना खाकर पढाई में जुट गया.अमन की मम्मी ने बताया कि अमन की देखा देखी नमन अमन का छोटा भाई भी उसी के नक्शे कदम पर चल रहा है और वो भी नियमित रुप से बिना छुट्टी लिए स्कूल जा रहा है.

वाकई, अमन और नमन सभी बच्चों के लिए प्रेरणा हैं. अमन के माता पिता  और उसके दादा जी  बधाई के सच्चे हकदार  हैं… !

…अरे .. आप क्या सोचने लगे … नई क्लास में नए उत्साह और नई उम्मीदों को लेकर जाईए. नियमित रहिए और नियमित रुप से पढिए फिर देखिए उसका नतीजा इतना अच्छा आएगा इसका आप अंदाजा ही नही लगा सकते. वो कहते भी है ना कि आप हर उस काम को कर सकते हैं जिसे आप वाकई करना चाहते हैं.

ढेर सारी शुभकामनाएं !!!

March 21, 2016 By Monica Gupta Leave a Comment

न्यूज चैनल और मेरे मन की बात

हे भगवान

हे न्यूज चैनल

न्यूज चैनल और मेरे मन की बात

बात का बतंगड़ बनाते खबरिया चैनल और मेरे मन की बात

एक सामारोह में  जानकार की बिटिया अपनी मम्मी से बहुत बुरी तरह बत्तमीजी  से बात कर रही थी और उसकी मम्मी चेहरे पर स्माईल लिए यह दिखाने की कोशिश कर रही थी कि सब नार्मल है … कोई बात ही नही… !! आमतौर पर जब बच्चे ढंग से बात नही करते तो माता पिता उनका ढिंढोरा नही पीटते कि बच्चे ने क्या बोला … इधर उधर बुराईया नही करते फिरते अपने बच्चों की… वो बच्चे को प्यार से समझाते है और बताते है कि क्या सही और क्या गलत है …

ठीक उसी तरह मीडिया भी समाज में एक परिवार के समान ही है…!! बेशक, मीडिया का काम हमें हर बात से रुबरु करवाना है पर क्या बस इतना ही उसका कर्तव्य है … ( अगर सच भी दिखाए तो भी ठीक हैं … वो तो राजनीति के गुलाम बनें या टीआरपी या विज्ञापन के चक्कर मे पडे रहते हैं और खबरें बिखर जाती हैं )

उसकी भी कुछ जिम्मेदारी है समाज के प्रति या नही… उसका भी फर्ज होना चाहिए कि बजाय हर बात को बढा चढा कर दिखाने के, टीआरपी के चक्कर में बेसिर पैर की ब्रेकिंग न्यूज दिखाने के, जरा संयम से काम ले और खबर को इस एंगल से दिखाए कि माहौल में तनाव बढाने की बजाय दर्शक पर खबर का सकारात्मक असर पडे … !!

अक्सर हैरानी होती है जब खबर को न सिर्फ  लगाई बुझाई में बल्कि तोड मरोड् के बल्कि भडकाने में लगे रहते हैं और 24 घंटे चलने वाले चैनल में जब बहस करते हैं तो यह कह कर बहस खत्म हो जाती है कि समय खत्म हो गया … !! अरे भई !! 24 घंटे का चैनल है … जरा विज्ञापन कम कर दो … पर खबर को सार्थक तो बनाओं … एक घंटे की बहस का कोई हल तो निकालो !!! बुरा न मानना पर आज जिस माहौल में हमारा देश चला गया है उसकी कही न कही जिम्मेदारी चैनल की भी है… न्यूज हमारी जिंदगी में बहुत गहरा असर डालती है इसलिए भी यह बात कहनी जरुरी है… !!

इसलिए हे न्यूज चैनल वालो … अगर आपका चैनल वाकई संजीदा है, देश के प्रति अच्छी और सकारात्मक सोच रखता है  और  देश की दशा सुधारना चाहते हैं तो टीआरपी का लालच छोडना होगा..  आपको सुधरना होगा… खुद को राजनीति और नेताओं से दूर रखना होगा … खबर पर पैनी निगाह तो रखनी होगी पर दोनों पक्षों को भी दिखाना होगा ये नही कि बस एक ही पक्ष की राय लेकर न्यूज की इति श्री कर ली जाए…आज समाज के एक अभिन्न अंग हो… चौथे स्तम्भ हो और इसका मतलब आप शायद भली प्रकार जानते हो.  आपकी भूमिका बहुत महत्वपूर्ण है बचकानी हरकते छोड कर गम्भीरता से अपना कार्य अंजाम दें

बुरा न मानिएगा पर आपके कंधों पर एक बहुत बडी जिम्मेदारी है और उसे निभाना होगा … अन्यथा इस दिशा में हमारा देश जा रहा है ….. !!! बस … बाकि आप खुद समझदार  हैं…

(कुछ दिनों से न्यूज चैनल पर देश के हालात देख कर मन परेशान सा है इसलिए यह सब लिखने पर मजबूर हुआ… )

March 20, 2016 By Monica Gupta Leave a Comment

रिजल्ट, बच्चे और अविभावक

बच्चे, रिजल्ट और अविभावक

रिजल्ट, बच्चे और अविभावक

mother and parents photo

जरा सोचिए

कुछ देर पहले एक जानकर आए हुए थे…चाय पीते हुए उन्होनें बताया कि बहुत टेंशन हैं बच्चों का रिजल्ट आना है … 31 मार्च को पेरेंटस टीचर मीटिंग है… मैने भी कहा कि ओह … शायद बच्चों के पेपर अच्छे नही हुए … वो बोले अरे नही पेपर तो बहुत अच्छे हुए हैं और ये हर साल फर्स्ट ही आते हैं… इस बात की तो चिंता नही … तो प्रोब्लम क्या है … मेरे पूछ्ने पर काजू खाते खाते उसने बताया कि असल में , बच्चे हमेशा खाने के लिए टोकते हैं कि और बच्चों के पेरेंटस भी आते हैं सभी फिट और स्मार्ट है पर आप दोनों बहुत मोटे हो … अगर 31 तक वजन कम हुआ तो ठीक है नही तो रिजल्ट लेने आप लोग नही आओगे… अचानक मेरा ध्यान काजू कतली पर चला गया जोकि लगभग खत्म हो चुकी थी… शायद बच्चों की चिंता जायज थी पर हम लोग क्यों नही सोचते अपनी सेहत के बारे में … !!

एक बेचारा संडे मिलता है और उसी में ओवर ईंटिंग …पराठीं, पूरी आलू, मिठाई …… !!! अरे भई !! खा खा कर क्यों बेचारे शरीर को दुख दे रहे हैं !! अगर बच्चे अभी से चिंता कर रहे हैं तो अच्छी बात है …!! मोटापे के लिए, शादी, त्योहार, थाईराईड या दूसरे बहाने बहाने बनाने छोडिए और अपनी सेहत पर ध्यान देना शुरु कीजिए अन्यथा डाक्टरों के चक्कर भी कम बुरे नही !! बाकि आप खुद समझदार हैं … है ना !! 

Take care …एक दूसरे को कहना  या वटस अप करना बहुत अच्छा लगता है  कि हमें आपकी परवाह है पर क्या वाकई हम अपना ख्याल रखते हैं ??

जरा सोचिए और वाकई में अपना ध्यान रखिए … अच्छा नही बहुत अच्छा लगेगा  😆

रिजल्ट, बच्चे और अविभावक

March 19, 2016 By Monica Gupta 1 Comment

रोचक बाल कहानी – जब पापा ने बनाए मटर के चावल

रोचक बाल कहानी – जब पापा ने बनाए मटर के चावल

रोचक बाल कहानी – जब पापा ने बनाए मटर के चावल

हमेशा ही मम्मी और रसोई का नाता रहा है. मैने आज तक पापा को रसोई से पानी का गिलास खुद लेकर पीते नही देखा. पापा सरकारी अफसर हैं इसलिए दफ्तर के साथ साथ घर पर भी खूब रौब चलता है. ओह क्षमा करें. असल में, बात बताने के चक्कर मैं यही बताना भूल गई कि मैं हू मणि. सातवीं क्लास मे पढती हूं और छोटे से शहर मे रहती हूं.

हां तो मैं बता रही थी कि मम्मी सारा दिन घर पर ही रहती हैं. दिन हो या रात सारा समय काम ही काम… हाँ भाई… नौकरों से काम लेना कोई आसान काम है क्या, हाँ… अरे भई आप तो कुछ समझते ही नही है अब जब पापा सरकारी दफ्तर में काम करते हैं तो नौकर चाकर भी होंगें न हमारे घर पर …हां तो मैं क्या बता रही थी .. मैं बता रही थी कि पिछ्ले कुछ दिनो से पापा खाने में कोई ना कोई नुक्स निकाल रहे थे. इसीलिए मम्मी ने रसोइए की छुट्टी कर के रसोई की कमान खुद सम्भाल ली थी.

पर पापा को इसमे भी तसल्ली नही हुई. नुक्स निकालने का काम तो चलता ही रहा और साथ मे एक बात और जुड गई कि मेरी माता जी खाना ऐसे बनाती थी मेरी माता जी खाना वैसे बनाती.ये सुनकर मम्मी को कभी कभार गुस्सा आ जाता जो अक्सर मेरे ऊपर ही निकलता. ह हा हा !!  खैर समय  ऐसे ही प्यार और लडाई झगडे में बीतता रहा.

peas rice photo

शनिवार को पापा यह कह कर सोए कि कि वो कल सुबह नाश्ते मे बासी परांठा और आलू मैथी ही खाएगे. मुझे पता है कि मम्मी ने बहुत दिल से बनाया. पर वो भी पापा को पसंद नही आया.

उसी समय पापा ने एलान कर दिया कि वो दोपहर को खुद ही मटर के चावल बनाएगे. मम्मी के चेहरे पर अजीब सी परेशानी  और मैं हैरान. पापा और खाना. मुझे समझ नही आ रहा था.
दोपहर के एक बजे मम्मी ने जबरदस्ती टीवी पर क्रिकट मैच देखते हुए पापा को उठाया कि भूख लग रही है.खाना बनाओ. मैच बहुत मजेदार चल रहा था.  पापा अनमने भाव से उठे. मम्मी ने चावल पहले ही भीगो दिए थे इस पर पापा ने गुस्सा किया माता जी तो पहले कभी नही भिगोते थे. अब तो खराब ही बनेंगें … फिर पापा ने कूकर माँगा. मम्मी के कहने पर कि पतीले मे ज्यादा खिले- खिले बनेगें पर पापा तो पापा ठहरे. जो बोल दिया सो बोल दिया. वैसे आप यह मत समझना कि मैं मम्मी की चमची हूँ. मैं सच बात का ही साथ देती हूँ.फिर पापा ने देसी घी लिया और खूब सारा उसमे डाल दिया ताकि मटर अच्छी तरह भुन जाए इतने में मैच मे छ्क्का लगा जल्दी जल्दी मैच देखने के चक्कर मे उन्होंने मसाला भी अंदाजे से  डाल दिया.

मैं और मम्मी चुपचाप पापा का काम देखते रहे. मम्मी तो चुपचाप गर्दन हिलाती रही और मै वँहा स्लैब पर बैठी पापा का लाईव टेलिकास्ट देख रही थी. सच. मुझे बहुत मज़ा आ रहा था. उधर पापा ने मैच देखने के चक्कर मे मटर मे भी नुक्स निकालने शुरु  कर दिए कि मटर तो मीठी है ही नही चावल कैसे अच्छा बनेगा. मैच मे फिर एक खिलाडी आउट हो गया. तभी दरवाजे पर घंटी बजी.मम्मी बाहर जाने को हुए तो पापा ने मना कर दिया कि पहले मसाला भुनने दो फिर जाना.मै उतर के जाने को हुई तो मुझे भी डाटं पड गई कि बार बार आने जाने से उनका ध्यान हट रहा है. तभी फिर एक खिलाडी आउट हो गया. बाहर फिर से घटीं बजी. उधर पापा से कूकर का ढ्क्कन बन्द ही नही हो रहा था. पापा बोले कि कूकर ही खराब है. मम्मी ने गर्दन मटकाते अगले ही पल उसे बन्द कर दिया. इस पर भी पापा बोलने से नही चूके कि उफ आज कल के ये बरतन और मम्मी के पल्लू से  हाथ पोंछ कर बैठक मे चले गए. दुबारा घंटी बजने पर मैं बाहर भागी.

अरे!!!  सामने दादी खडी थीं. उन्होने बताया कि शहर आने का एकदम से प्रोग्राम  बना और वो आ गई. सुबह ही मटर के चावल बनाए थे तो वो भी ले आई.  दादी ने पानी पीया ही था कि कूकर की सीटी भी बज गई. पापा ने एलान कर दिया था कि कूकर वो ही खोलेगे. दादी की मौजूदगी मे उसे खोला गया.पर….  पर …यह समझ ही नही आ रहा था कि यह चावल है या खिचडी. मटर के चावलों का पूरी तरह से हलवा बन चुका था.

पापा मैच देखते हुए धनिए की चटनी के साथ मजे से दादी वाले चावल खा रहे थे और हम. हम मटर वाली खिचडी. नाक मुहं बना कर. इसी बीच मे भारत मैच जीत गया.पर पापा खुश होकर बोले कि रात को वो आलू की परौठी बना कर खिलाएगे.यह सुनते ही मैं और मम्मी कान पर हाथ रख कर जोर से चिल्लाए. नही…. अब और नही. यह सब देख कर दादी ठहाका लगा कर हँस दी और वो किस्सा सुनाने लगी जब मेरे दादा जी ने पहली और शायद आखिरी बार गुड के चावल बनाए थे ..

 

कैसी लगी कहानी जरुर बताईएगा  🙄

Photo by pelican

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