Monica Gupta

Writer, Author, Cartoonist, Social Worker, Blogger and a renowned YouTuber

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September 29, 2015 By Monica Gupta

मीडिया का प्रभाव

मीडिया का प्रभाव

मीडिया भी बहुत तरह से प्रभाव छोडती है  जाने अनजाने कई बार अप्रत्यक्ष रुप से भी प्रभावित कर जाती है.

पिछ्ले दिनों मोदी जी के विदेश दौरे पर एक चैनल का रिपोर्टर जनता के बीच मे लाईव कवरेज करता हुआ प्रतिक्रिया ले रहा था. उसके पीछे खडा एक व्यक्ति मोबाईल पर बात कर रहा था और कैमरे को देख कर हाथ भी हिला रहा था. तभी एक पल के लिए वो कैमरे के सामने से हट गया फिर साथ लेकर आया एक महिला को. उसकी गोदी मे एक बच्चा था. वो शायद बताना चाह  रहा था कि उसका बीबी बच्चा भी एक दम ठीक है. महिला ने भी हाथ हिलाया.

अरे !! तभी न्यूज खत्म हो गई. इतना अच्छा सीन चल रहा था. मेरा ध्यान खबर पर नही बल्कि खबर के पीछे था… वैसे लोग बहुत मजा लेते हैं जब कोई कवरेज के लिए आए तो … !!

वैसे कैमरे को देख कर मुस्कान आ ही जाती है. पिछ्ले दिनों पानी की किल्लत पर खबर चल रही थी जहां गुस्साए लोगो का मटका फोड प्रदर्शन चल रहा था वही कुछ महिलाए और युवा कैमरे के आगे मुस्कुरा रहे थे .वही नेता जी की स्पीच चल रही थी. हाल खचाखच भरा हुआ था और जब कैमरा दर्शको पर फोकस होता तो दर्शक खुशी के मारे चिल्लाने लगते और हाथ हिलाने लगते वही नेता जी खुश  थे कि जनता उनके आगमन पर कितनी खुश है  !!!

मीडिया का प्रभाव

reporter photo

September 28, 2015 By Monica Gupta

रक्तदान और युवा

रक्तदान और युवा
रक्तदान और युवा

रक्तदान और युवा

रक्तदान और युवा – रक्तदान पर मैनें दिल्ली रोहिणी  क्राऊन प्लाजा में ट्रास्कान 2015 के दौरान अपने विचार कुछ ऐसे व्यक्त किए. विषय था….सोशल मीडिया के मद्देनजर युवा रक्तदाताओं को कैसे जोडे …

monica gupta 3 speech

रक्तदान और युवा

Recruiting Young Donors- Focus on Social Media

“वसुधैव कुटुम्बकम” बहुत समय पहले सुना करते थे  अर्थात पूरी धरती एक परिवार है मैं अक्सर सोचती थी कि सारी धरती एक परिवार कैसे हो सकती है दुनिया इतनी बडी है कोई कहां तो कोई कहां ऐसे में  एक ही परिवार कैसे हो सकता है  पर जब से  सोशल मीडिया फेसबुक, टवीटर, गूगल सक्रिय हुआ और देश क्या विदेश की भी सभी जानकारी मिलने लगी. विचार सांझा होने लगे. तब लगा कि अरे वाह, जो हमारे पूर्वजो ने  उस समय कहा था वो तो आज साकार हो रहा है.

रक्तदान और युवा

रक्तदान और युवा

 सोशल मीडिया से हमारा जुडे रहना और भी सार्थक हो जाता है अगर हम नोबल cause के लिए जुडे … और रक्तदान जैसा कोई नोबल cause और हो ही नही सकता.

ये सच है कि रक्तदान पुण्य का कार्य है पर सोचने वाली बात ये है कि युवाओं को इससे कैसे जोडे. यूथ इसलिए भी क्योकि वो सोशल नेट वर्क पर बेहद सक्रिय है और दूसरी वजह ये भी है कि वो समाज के लिए कुछ करना चाहता है.

अब जरुरत इस बात की है कि हम कुछ हट कर करें जिससे युवाओं में एक नया जोश पैदा हो… वैसे हट करने से याद आया आपने सैल्फी विद डोटर तो सुना ही होगा. बेटी बचाओ, बेटी पढाओ के अंतर्गत एक और अभियान चला कि गांव की जो बेटी सबसे ज्यादा पढी लिखी होगी वो 15 अगस्त को झंडा फहराएगी और मुख्यातिथि भी होगी उसके साथ आए माता पिता के लिए अलग बैठने की व्यवस्था की जाएगी.

इस अभियान को इतना पसंद किया गया कि अब तो गांव के वो लोग भी जो लडकियों को पढाना सही नही समझते थे उनकी मानसिकता भी बदल गई है. वो ज्यादा से ज्यादा लडकियों को पढाने के लिए आगे आ रहे हैं.

नेट के माध्यम से रक्तदान से जुडी  खबर हट कर हों  उनका उदाहरण सामने रखे तो भी जागृति आ सकती है… जैसा कि एक खबर पढी कि अहमदाबाद के रोहित उपाध्याय  ने 100 बार रक्तदान किया.. शायद आपको इस खबर में कोई नयापन न लगे पर अगर मैं आपको कहूं कि वो रिक्शा चलातें है तो शायद कुछ हट कर  लगे लेकिन अगर मैं आपको ये बताऊ कि वो मरना चाहते थे इसलिए रक्तदान करने गया था तो शायद आप भी चौंक़ जाएगें.

असल में, अहमदाबाद के राहुल उपाध्याय रिक्शा चलाते हैं वो अपनी जिंदगी से बहुत परेशान  हो गए थे और सुसाईड करना चाहते थे उन्हें लगता था कि रक्तदान करने पर आदमी मर जाता है इसलिए रक्तदान करने गए थे पर रक्तदान करके जब यह पता चला कि  उन्हें तो कुछ हुआ नही और उन्होनें किसी की जिंदगी बचाई है तो उनकी सोच बदल गई और लगातार रक्तदान करने लगे…

रक्तदान और युवा

रक्तदान और युवा

एक अन्य उदाहरण है इंदौर के निवासी अशोक नायक का. पेशे से दर्जी हैं लोगो के कपडे सिलते हैं. रक्त के क्षेत्र मे नायक बनकर उभरे हैं. जब इनका अपना एक दोस्त खून न मिलने की वजह से दुनिया छोड गया तो इन्होने ये बात दिल से लगा ली और अपने छोटे से घर में, छोटा सा ब्लड काल सेंटर खोल लिया और  नेट वर्क तैयार किया और उसी के माध्यम से लोगो को खन उपलब्ध करवाने लगे  .

मुम्बई, दिल्ली, कलकत्ता जैसे महानगरों में इनकी अपनी रक्तदाताओं की सूची है और जैसे ही जरुरतमंद का फोन आता है रक्तदाता वहां हाजिर हो जाता है. अब इन्होने प्रशासन की मदद से रक्तदाता वाहिनी सेवा भी शुरु की है जो की खास तौर पर महिलाओ के लिए है. तो है ना ये मिसाल.

देश में ननद भाभी का झगडे अक्सर हम सुनते हैं पर भाभी की जान बचाने के लिए ननद ने किया रक्तदान भी एक मिसाल बन सकता है राजस्थान के बासवाडा के हमीरपुर गांव में ये मिसाल देखने को मिली जब गर्भवती भाभी की जान बचाने के लिए ननद ने रक्तदान किया.

शादी जैसे पावन दिन पर भी दुल्हे का रक्तदान करना युवाओ के लिए मिसाल बन सकती है. उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर निवासी अमर सिह ने शादी वाले दिन कुछ हट कर करने की ठानी और शादी के दिन  कुछ मीठा हो जाए सोच कर शादी वाले दिन ही रक्तदान किया और  मिसाल कायम की.

युवा हीरो को बहुत फोलो करते हैं आमिर खान, अमिताभ बच्चन साहब या जान एब्राहिम आदि अगर इनकी फोटो या खबर दिखा कर उन्हें मोटिवेट किया जाए तो यकीनन सकारात्मक असर पडेगा.

विभिन्न धर्मों के लोग जब रक्तदान करते हैं तो प्रेरणा बन जाते हैं. श्वेताम्बर जैन साध्वी का रक्तदान करना अपने आप में एक मिसाल है.11901637_10203274005931532_876266951_o

युवा शक्ति को तरह तरह के इवेंट के माध्यम से भी प्रोत्साहित किया जा सकता है जिसमें एक है युवाओ को लेकर विशाल रक्त बूंद यानि ब्लड ड्राप बनाना  जैसाकि आईएसबीटीआई द्वारा किया गया विशाल आयोजन था.

 

drop blood

युवाओं को खास दिन पर रक्तदान के लिए प्रेरित किया जा सकता है जैसाकि होली, 15 अगस्त, कुछ लोग दिन खोजते है तो कई लोग कोई न कोई दिन खोज निकालते हैं रक्तदान करने के लिए अब जैसाकि आदिवासी दिवस शायद हमने कभी सुना भी नही होगा पर देखिए बढ चढ कर रक्तदान हुआ इस दिन भी…

एक अन्य मिसाल अपना खून नेगेटिव होते हुए सोच पोजेटिव रखी और नेगेटिव ब्लड ग्रुप की लिस्ट तैयार कर ली जोकि हरदम रक्तदान के लिए तैयार रहते हैं .. जज्बा हो तो ऐसा

negetive blood donor

जिन मरीजों को लगातार रक्त की जरुरत पडती है अगर वो ही अपना संदेश दें कि रक्तदान कितना अमूल्य है तो भी युवा प्रभावित हो सकते हैं. जैसाकि जम्मू में रहने वाले हीमोफीलिया से पीडित जगदीश कुमार जिन्हे अभी तक लगभग 200बार खूब चढ चुका है या थैलीसीमिया की मरीज संगीता वधवा ,मुम्बई में रहती है

अभी तक  800 बार खूब चढ चुका है और ना सिर्फ थैलीसीमिया पर काम कर रही है पर खुद भी जीने की इच्छा छोड चुकी  संगीता उन लोगो की कांऊसलिंग करती है जिन्होनें जिंदगी से हार मान ली है. संगीता आजकल थैलीसिमिया को खत्म करने के लिए Face , Fight और  Finish पर जबरदस्त काम कर रही है.

सोशल मीडिया पर  भी सोशल मीडिया के माध्यम से भी प्रेरित किया जा सकता है एक मेरी युवा जानकार थी. फेसबुक पर ज्यादा समय रहती थी पर कमेंट कम मिलते थे. बहुत मायूस थी और बातों बातों में उसने अपनी प्रोब्लम बताई.

मैने उससे पूछा कि  रक्तदान कराते हुए की फोटो डालो बहुत कमेंटस मिलेगें उसने बोला कि रक्तदान तो कभी किया नही तो मैने कहा कि कर के देख लो … दो दिन बाद जब मैने उसका प्रोफाईल देखा तो 100 लाईक्स थे और पचास से ज्यादा कमेंटस थे और तो और फैंड रिक्वेस्ट भी आनी शुरु हो गई थी. अब उसने ये अभियान नियमित करने की ठान ली है.

युवाओ को बैट्ररी का उदाहरण देकर भी समझाया जा सकता है कि जिस तरह मोबाईल की बैट्टरी डाऊन हो जाती है और हमे चार्ज करना पडता है ठीक वैसे ही इंसानो की बैट्री भी कभी कभी डाऊन हो जाती है और चार्जर रुपी खून से उसमे जान डालनी पडती है..

प्रधान मंत्री मोदी जी ने भी युवा शक्ति को रक्तदान के लिए प्रेरित किया और विश्व रक्तदाता दिवस पर टवीट किया कि रक्तदान समाज की बडी सेवा है आज हम रक्तदान के महत्व के बारे में अपने संकल्प को दोहराते हैं मेरे युवा मित्रों को इस सम्बंध में अग्रणी भूमिका निभानी चाहिए.

W H O जैसी बडी संस्थाए भी प्रेरणा बन सकती हैं जैसाकि हाल ही में विश्व रक्तदाता दिवस पर कैम्पेन लांच किया गया जिसका थीम था

( मेरे जीवन को बचाने के लिए धन्यवाद )Thank you for a saving my life.

thanks for saving my life

जो इस क्षेत्र में अच्छा कार्य कर रहे हैं उनकी सराहना होनी भी बहुत जरुरी है ताकि उनका मनोबल बना रहे. जैसाकि डाक्टर संगीता पाठक, डाक्टर रवनीत कौर, सोनू सिह, ब्लड  कनेक्ट की पूरी टीम, श्री राजेंद्र माहेश्वरी, श्री दीपक शुक्ला, श्री मंजुल पालीवाल जब मैने इनको रक्त की जरुरत के लिए फोन किया समझिए टेंशन खत्म हो गई और मरीज को नया जीवन मिल गया.

जनता को स्वैच्छिक रक्तदान के लिए प्रेरित करते रहना चाहिए और यह डर निकाल देना चाहिए कि अकेले हम से नही हो पाएगा…. और फिर भी  हिम्मत हार जाए तो दशरथ मांझी को याद करिएगा जिन्होने अकेले अपने दम पर पूरा पहाड तोड  कर रास्ता बना लिया था. उनके किए कार्य की तुलना आज ताजमहल से हो रही है.

majhi

तो जैसे मैने आरम्भ मे ही कहा था वसधैव कुटुम्बकम सारी धरती एक परिवार है और हमे हमें अपने परिवार की रक्षा करनी है मिलजुल कर कदम बढाने होंगें और उनके लिए एक ही बात कहना चाहूंगी कि “

“मंजिल मिले या न मिले  ये तो अलग बात है

पर हम कोशिश भी न करें ये तो गलत बात है ”

जय रक्तदाता

मोनिका गुप्ता

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September 25, 2015 By Monica Gupta

नेगेटिव

नेगेटिव

नेगेटिव या पाजिटिव

कुछ देर  पहले एक जानकार का फोन आया बोली बहुत टेंशन हो रही है मैं बिना बात जाने बोली, अरे पाज़िटिव सोच फिर देखना सब ठीक होगा. वो बोली पाज़िटिव ही तो नही चाहिए. उसने बताया कि डेंगू का टेस्ट करवाया है रिपोर्ट आने वाली है और तुम बोल रही हो कि पाजिटिव सोच !!  अरे बाप रे !! मैने तुरंत फोन रखने में ही भलाई समझी.

इतने में एक अन्य रिश्तेदार का फोन आ गया वो बोली कि टेस्ट करवाने के लिए रिपोर्ट भेजी है. मैने कहा चिंता न करना नेग़ेटिव ही आएगी. ( असल में, पहली वाली बात का भूत अभी तक दिमाग में था) वो बोली कि शुभ शुभ बोलो. तीन साल से बहु के बच्चा नही हो रहा अब कुछ आस बंधी और तुम बोल रही हो नेगेटिव रिपोर्ट आएगी. हे भगवान !! आज क्या हो रहा है मेरे साथ. सोच ही रही थी गेट पर घंटी बजी. बाहर गई तो दो लोग खडे थे बोले क्या किसी नेगेटिव को जानती हैं अब दिमाग में फिर वही चल रहा था. मैने कहा कि मैं किसी नेगेटिव व्यक्ति को नही जानती. वो बोले कि हमने सुना था कि आप जरुर मदद करेंगी. नेगेटिव व्यक्ति को जानती होगी. मेरे पूछ्ने पर उन्होनें बताया कि नेगेटिव ब्लड चाहिए मरीज बहुत सीरियस है. अरे बाप रे !! मैने तुरंत फोन घुमाया और नेगेटिव ब्लड का प्रबन्ध करवाया. कुछ देर में एक सहेली आई उसने बताया कि तुमनें एक घर किराए का दिलवाया था पर उसकी मालकिन तो बहुत ही नेगेटिव निकली. दुखी कर दिया उसने हमारा रहना. मैने कहा कि ये तो मैने बता दिया था इस पर वो बोली तभी तो थैक्स करने आई हूं !! मैने कहा वो कैसे ?? इस पर वो बोली कि इतनी नेगेटिव है वो इतनी नेगेटिव है वो हमने सोच लिया अब किराए  के घर  मे नही अपना ही घर बनाएगे और आज हमने जगह देख ली और लोन की बात चल रही है बैंक में.. हे भगवान !! आज तो मैं अच्छी नेगेटिव पाजिटिव के चक्कर मे पडी.

नेगेटिव

नेगेटिव या पाजिटिव

be positive photo

Photo by bluekdesign

September 24, 2015 By Monica Gupta

सोशल मीडिया और हम

 

social media photo

 

सोशल मीडिया और हम

शोशा सोशल मीडिया का ….

सोशल बनाया … सोशल बनाया … सोशल बनाया आपने … !!!

वैसे एक बात तो माननी पडेगी कि फेसबुक या अन्य सोशल नेट वर्क ने हमें बहुत एक्टिव बना दिया है. पहले जब कोई त्योहार होता तो पापा  या घर के बडे लोग अक्सर कन्नी काटते थे कि मैं जाकर क्या करुगां तुम लोग ही हो आओ.  वही  अब जब से सोशल नेट वर्क सक्रिय हुआ है  पापा लोग खुद जाना पसंद करने लगें हैं और मम्मी  जो हर में कोई भी त्योहार साधारण  घरेलू साडी मे त्योहार मनाती  अब पूरा सज धज के तैयार होकर इसे मनाती है और सभी सपरिवार फोटो खिचवाने के लिए आगे आते हैं इतना ही  नही बच्चे भी चाह्ते है कि  उनकी पूरी फैमिली की तस्वीर हो  इसलिए घर के दादा दादी, नाना नानी बुआ, चाचा सभी मिल कर मनाए ताकि फेसबुक पर ज्यादा  से ज्यादा कमेंटस बटोर सकें  और कोशिश  यही रहती है कि फटाफट फोटो अपलोड कर दें चलिए , इसमें बुरा क्या है … इसी बहाने से ही सही … सब एक तो हो जाते हैं इसलिए थैक्स यू है जी फेसबुक और  अन्य सोशल नेट वर्किंग साईटस का  !!

सोशल बनाया … सोशल बनाया … सोशल बनाया आपने … !!!

सोशल मीडिया और हम

September 24, 2015 By Monica Gupta

फेसबुक मित्र

facebook friend photo

 

फेसबुक मित्र

कुछ देर पहले गेट पर घंटी बजी. एक लडकी थी उसने बताया कि वो पीछे वाली कालोनी मे काम करती हैं. निशा दीदी ने भेजा है. मैं खुश हो गई कि शायद नई काम वाली बाई मुझे मिल गई. मैं जैसे ही कुछ बोलने को हुई वो बोली दीदी ने बताया कि आप फेसबुक करती रहती हो. उनका वाई फाई नही चल रहा. आप जरा मेरे दो तीन कमेंट कर दोंगें और फोटो भी बदलनी है.

मैने बाहर जाने का बहाना बना दिया और मना कर दिया. फिर निशा को फोन करके सारी बात पूछी तो वो बोली कि इस काम वाली ने दुखी कर रखा है खुद तो लिखना आता नही english मे… मुझसे ही लिखवाती है शुरु शुरु में तो मुझे बुरा नही लगा अब तो काम छोड कर बैठ जाती है और कभी इस पर कमेंट कभी इस पर लाईक, कभी उसकी यहां फोटो खीचों कभी वहां … इसलिए अब वो उसके आते ही वाई फाई बंद कर देती है … !!

हे भगवान !!! फेसबुक पर भी कौन कैसा है कुछ पता नही चलता … हम समझते कुछ और हैं और निकलता कुछ और !! वैसे आपने तो देखभाल के ही फेसबुक मित्र बनाए होंगें … है ना ??? क्या पता वो भी आपकी फ्रेंड लिस्ट मे … !!! जिसके कमेंट उसकी मालकिन ….. !!!

फेसबुक मित्र के बारे मे आपका कोई अनुभव हो तो जरुर बताईगा !!

September 23, 2015 By Monica Gupta

सफलता की कहानी

 

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सफलता की कहानी

रक्तदान के क्षेत्र में एक प्रेरणा है अशोक कुमार

रक्तदाता श्री अशोक कुमार

रक्तदान से सम्बंधित एक कार्यक्रम चल रहा था. मीडिया, नेता, वक्ता, टीचर, डाक्टर आदि बहुत सज्जन मौजूद थे. सभी बहुत ध्यान पूर्वक कार्यक्रम सुन रहे थे तभी अचानक दरवाजा खुला और एक पुलिस वाले भीतर आए. उन्हे देख कर अन्य लोगो की तरह मेरे मन मे भी यही सवाल उठ रहा था कि यह यहां किसलिए आए हैं इनका यहां क्या काम है. इतने मे उन्हे स्टेज पर बुलाया गया. मैने सोचा कि स्पीच वगैरहा देकर चले जाएगे. पर स्पीच के दौरान सुना कि वो तो स्वयं रक्तदाता हैं और अभी तक 45 बार रक्तदान कर चुके हैं और 15 बार रक्तदान के कैम्प लगा चुके हैं. उनकी बातो से प्रभावित होकर मैने विस्तार से उनसे बात की.

सफलता की कहानी

उनका पूरा नाम है श्री अशोक कुमार. 3 सितम्बर सन 1972 मे जन्मे अशोक जी का जन्म हरियाणा के करनाल मे हुआ. पिता आर्मी मे थे. उन्होने सन 1962 और 1965 की लडाई भी लडी इसलिए बचपन से ही वो उनसे प्रेरित थे और बस एक ललक थी कि बडे होकर या तो आर्मी या पुलिस मे जाना है. कालिज मे जाने के बाद एनसीसी ज्वाईन कर ली थी. वैसे ना तो उन्हे सांइस और ना ही कामर्स का शौक था पर बडो के कहने पर उस विषय को लेना पडा. इससे पहले मैं कुछ और पूछती उन्होने बताया कि आज की तारीख मे उनके पास चार डिग्री बीकाम, एमकाम, एलएलबी और एलएलएम की हैं. फिर सन 98 मे वो पुलिस मे भर्ती हुए और आजकल हरियाणा के कुरुक्षेत्र मे वो फिंगर प्रिंट एक्सपर्ट हैं.

रक्तदान के बारे मे अपने पहले अनुभव को उन्होने इस तरह से बताया कि सन 90 मे जब एनएसएस का कैम्प लगा था तब वो और उनके तीन चार दोस्त रक्तदान करने गए. तब अपने तीनो दोस्तो मे वो ही रक्तदान कर पाए और उनके दोस्त किसी ना किसी वजह से रक्त दान नही कर पाए. उस दिन इनमे एक अलग सा ही आत्मविश्वास आ गया और बस तभी से रक्तदान की शुरुआत हुई. एक और अच्छी बात यह भी हुई कि घर पर सभी ने शाबाशी दी और प्रोत्साहित किया. वैसे भी आर्मी मे समय बेसमय रक्त की जरुरत तो पडती ही रहती थी तब उनके पिता भी हमेशा आगे रहते. यही भावना उनके मन मे भी घर कर गई थी कि वो भी कभी भी जरुरतमंद को अवश्य खून दिया करेगें.

अब मेरे मन मे एक ही सवाल था कि पुलिस वालो के लिए अक्सर लोग बोलते है कि ये लोग तो खून पीतें हैं. इस पर वो मुस्कुराते हुए बोले कि यकीनन बोलते हैं और कई बार दुख भी होता है पर खुद काम अच्छा करते चलो तो कोई परेशानी नही आएगी. एक बार का वाक्या याद करते हुए उन्होने बताया सन 2010 मे जब उन्होने खून दान किया तो अखबार मे प्रमुखता से खबर छपी तो श्री सुधीर चौधरी (आईपीएस) ने भी यही बात की थी और शाबाशी भी दी थी कि बहुत अच्छा कार्य कर रहे हों. तब भी विश्वास को एक नया बल मिला था.

कोई मजेदार बात सोचते हुए उन्होने बताया कि जब भी वो कैम्प लगाते है कि जानी मानी शखसियत को बुलाते हैं. एक बार ( नाम नही बताया) जब उन्होने अपने कैम्प मे आने का निमत्रंण दिया तो पहले तो उन्होने सहर्ष स्वीकार कर लिया पर बाद मे बोले कि उन्हे रक्त देख कर ही डर लगता है इसलिए वो नही आ पाएगे. पर बहुत प्रयास और समझाने के बाद वो आए और पूरे समय कैम्प पर ही रहे पर रक्तदान के नाम से आज भी कतराते हैं.

अशोक जी ने बहुत गर्व से बताया कि आज की तारीख मे लगभग 1000 पुलिस विभाग के लोग उस मुहिम से जुडे हैं और वो जब भी खुद कैम्प आयोजित करते हैं ज्यादा से ज्यादा पुलिस को जोडते हैं ताकि समाज मे फैली धारणा को वो बदल सकें. समाज सेवा मे मात्र रक्तदान ही नही वो भ्रूण हत्या, वृक्षारोपण, सडक दुर्धटना मे घायल लोगो की मदद करना और गरीब बच्चो को छात्रवृति भी प्रदान करवाते हैं. आज की तारीख मे अशोक जी के पास दो नेशनल एवार्ड हैं. 15 स्टेट एवार्ड ,13 जिले व प्रशासन की ओर से मिले सम्मान और 23 एनजीओ की तरफ से मिले विशेष सम्मान मिले है जोकि बहुमूल्य हैं. मैं उनकी बातों से शत प्रतिशत सहमत थी.

अंत मे जब मैने पूछा कि जनता के लिए क्या संदेश है इस पर वो बोले कि एक कविता लिखी हैं. ये बात फिर चौका गई क्योकि पहली बात तो वो पुलिस वाले फिर रक्तदाता और फिर अब कवि भी. अपना संदेश उन्होने कुछ इस तरह से रखा….

आओ मिल कर कसम ये खाए

खून की कमी से ना कोई मरने पाए

जात पात और मजहब से उपर उठ कर

इंसानियत की जोत जगाए

हम तो है भारत वासी देख का गौरव ऊंचा बढाए !!!

अशोक जी इसी तरह रक्तदान की मुहिम को आगे बढाते रहॆं. आईएसबीटीआई परिवार की ओर से ढेरो शुभकामनाएं !!!!

सफलता की कहानी आपको कैसी लगी ?? जरुर बताईगा !!

मोनिका गुप्ता

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