Monica Gupta

Writer, Author, Cartoonist, Social Worker, Blogger and a renowned YouTuber

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August 31, 2015 By Monica Gupta

कलाम बनाम औरंगजेब

कलाम बनाम औरंगजेब

सभी चैनल वाले मुद्दे से भटक गए हैं बहुत हैरानी की बात है कि आज सडक के नाम पर  औरंगजेब और कलाम साहब की  तुलना हो रही है… और बहस के दौरान अंट  शट बोला जा रहा है वैसे इस संदर्भ में मुझे ज्यादा समझ तो नही पर मेरा  मानना  यही है कि कलाम साहब के नाम अगर कोई नई सडक बना कर समर्पित की जाती तो बेहतर होता… किसी के नाम को बदलना और फिर विवादों मे पडना … विवादों में तो कलाम साहब भी कभी नही पडे थे तो अब उनके जाने के बाद ये ओछी राजनीति किसलिए 🙁 शान से कोई नई सडक बना कर उसका नाम कलाम मार्ग रखते तो बहुत बेहतर होता .. !!

news monica gupta

 

सबसे पहले तो दोनों की तुलना करना अजीब है … दूसरा जो इस बहस को तूल दे रहा है वो हास्यास्पद है और तीसरा अगर जालिमों को हटाने की इतनी ही बात है तो बहुत जल्द यह मुद्दा भी उठेगा कि दशहरा किसलिए मनाते हैं क्यो रावण को हर साल याद करते हैं क्यो राम लीला होती जब कि वो इतना जालिम था… बात ये है ही नही बात सिर्फ इतनी है कि अगर कोई नई सडक बनाकर कलाम साहब का नाम दिया जाता तो अच्छा था … खैर !!

पता नही क्या हो गया मीडिया को, एकंरिग करते करते  एंकर इस बात की पैरवी करने लगते हैं कि कलाम साहब के नाम पर रोड सही है औरंगजेब के नाम पर सही नही है… लडते भिडते चिलाते,  नेता , आखं दिखातें अलग अलग चैनल के  एंकर … दुखद … अफसोस !!!

मुद्दा भटक गया है … हां पर टीआरपी जरुर बढ गई है यानि की उद्देश्य सफल हुआ चैनल वालो का !!!

 

कलाम बनाम औरंगजेब

 

 

August 30, 2015 By Monica Gupta

Prayers

Prayers

हमारी जिंदगी में  prayers का बहुत मह्त्वपूर्ण स्थान है. महिलाएं तो ज्यादातर सुबह सवेरे अपने दिन की शुरुआत नहाने के बाद  पूजा और धूप बत्ती से करती हैं. मेरी सहेली मणि के घर अगर सुबह सुबह जाओ तो घर महकता मिलेगा. बहुत अच्छा लगता है  क्योकि खुश्बू होती ही इतनी मनभावन है.

उसकी देखा देखी मैने भी ऐसा करना शुरु कर रखा है दिन में तीन चार बार तो खुश्बूदार अगरबत्ती लगा ही लेती हूं पर पर पर  आज कुछ ऐसा पढा कि टैंशन सी हो गई. असल में, खबर है कि” हैरानी होगी आपको यह जानकर कि सुगंधित अगरबत्तियों और धूप बत्तियों से निकलने वाला धुंआ शरीर की कोशिकाओं के लिए सिगरेट के धुएं से अधिक जहरीला साबित होता है।

शोधकर्ताओं का कहना है कि अगरबत्ती का धुआं सिगरेट के धुएं की तरह है। अगरबत्ती का धुआं कोशिकाओं में जेनेटिक म्‍यूटेशन करता है। इससे कोशिकाओं के डीएनए में बदलाव होता है, जिससे कैंसर होने का खतरा बढ़ जाता है।

अब ज्यादा तो समझ नही आया बस इतना समझ आया कि अगरबत्ती से निकलता धुंआ बेहद नुकसानदायक है.

वैसे पहले गूगल सर्च में कितनी बार पढा है कि अगरबत्ती बनाए खुश्बू के साथ साथ धन भी कमाए या अगरबत्ती बना कर जीवन महकाए  या सफल बिजनेस है अगरबत्ती का  !!!

पर आज वही अगरबत्ती और धुआं  गूगल  पर जब सर्च किया तो वही हैरान कर देने वाली खबर बहुत जगह पढने को मिली…

Prayers

Details

http://epaper.navbharattimes.com/details/4486-61408-1.html Via navbharattimes.com

Reasons to say NO to agarbattis or incense sticks

शोध के नतीजों के आधार पर फेफड़ों की बीमारी से जूझ रहे लोगों के लिए यह अच्‍छा होगा कि वह धूप के धुंए से बचें। अगरबत्ती और धूपबत्ती को फेफड़ों के कैंसर, ब्रेन ट्यूमर और बच्‍चों के ल्‍यूकेमिया के विकास केसाथ जोड़ा जा रहा है। Via patrika.com

ये तो कभी सोचा ही नही कि ऐसा भी होता है इसलिए तनाव हो गया है फिलहाल तो मैं मणि को सचेत करने जा रही हूं वैसे आप तो ज्यादा धूप बत्ती नही करते होंगें अगर करते हैं तो जरुर सोचिएगा !!

Prayers लेख आपको कैसा लगा जरुर बताईगा !!!

August 6, 2015 By Monica Gupta

हमारा पशु प्रेम

 

animals photo

Photo by magnus.johansson10

                                  हमारा पशु प्रेम (व्यंग्य)

तू इस तरह से मेरे जिंदगी मे शामिल है जहां भी जाऊं ये लगता है तेरी महफिल है …. रुकिए रुकिए ज्यादा सोचिए मत!!! असल मे, यह गाना मैं पशुओ के लिए गुनगुना रही हूं जो हमारे चारो तरफ है. जिधर देखू तेरी तस्वीर नजर आती है…क्या???

 आपको विश्वास नही हो रहा चलिए मै बताती हूं. सुबह सुबह घर से आफिस  जाने के लिए  निकलती हूं तो हमारी पडोसन गजगामिनी उर्फ मुन्नी अक्सर हमारे गेट के आगे फल और सब्जियो के छिलके फैकती मिल जाती है. असल मे, वो क्या है ना सडक पर धूमने वाले सांड और बैल भूखे रहे यह उसे सहन नही होता और उसके घर के आगे उनका नाच हो यह भी उसे अच्छा नही लगता इसलिए वो अच्छी पडोसन होने के नाते अपना प्यार दिखाती हुई ,छिलके फेंक कर मीठी मुस्कुराहट लिए भीतर चली जाती है और मै भी जल्दी से कार मे बैठ कर दफ्तर लपकती हूं कि कही लडाई करते सांड और बैल मेरा रास्ता ही ना रोक ले.

अब रास्ते की बात करे तो सडक पर एक मैन होल का ढक्कन किसी ने चुरा लिया तो गऊ माता उसमे गिर गई थी. ना सिर्फ लोग बल्कि चैनल वाले भी लाईव कवरेज के लिए माईक लेकर खडे सनसनी पेश कर रहे थे और यह अब तो हर रोज की ही बात हो गई हैं.

हमेशा की तरह भारी ट्रैफिक से बच बचाकर किसी तरह  दफ्तर पहुची तो  मेरा स्वागत बुलडोजर से  हुआ. क्या !! आप उसे भी  नही जानते !! बुलडोजर हमारे बास के कुत्ते का नाम है पर श्श्श्श्श्श … उसे  कुछ भी कहना …पर…. कुत्ता मत कहना. बास बुरा मान जाएगे.खैर, जैसे ही मै बास के रुम मे पहुंची तभी उनकी श्रीमति जी का फोन आ गया और शेर से वो अचानक भीगी बिल्ली बन कर म्याऊ म्याऊ करके बात करने लगे. उफ ये पशु प्रेम !!

अपनी सीट पर आई तो एक फाईल गायब थी तभी पता चला कि आज बंदरो की टोली आई थी खिडकी के रास्ते. हो सकता है कि कागज,वागज उठा कर ले गए हो. मैने सिर पकड लिया कि अब बलि का बकरा मै ही बनने वाली हूं और हुआ भी यही चाहे आप इसे बंदर धुडकी कहे या गीदद भभकी … मुझे घर भेज दिया गया कि आप जाकर आराम करें. कल बात करेगे.

देखे कल ऊटं किस करवट बैठता है सोचते सोचते  मै घर लौट आई. पर बात अभी भी खत्म नही हुई. घर पर चूहे बिल्ली की कोई कार्टून चल रही थी.सच, उफ!!! जानवरो ने तो मुझे कही का नही छोडा.आज अगर मेरी नौकरी जाएगी भी तो वो भी सिर्फ बंदर की वजह से.सच मे, ये जानवर जिंदगी मे इस कदर हावी हो गए है कि मुझे  काला अक्षर भैंस बराबर लगने लगा है और मैं खडी बास यानि भैस के आगे बीन बजा रही हूं और शायद  मगरमच्छ के आसूं बहा रही हू पर .. पर … पर …!!!

तभी भैंस का  मेरा मतलब  बास का फोन आ गया. उन्हे शाम को अपनी पत्नी के साथ शांपिग जाना था और मेरी डय़ूटी लगा दी कि बुलडोजर को पार्क मे घुमाने ले जाना है क्योकि मैनें उन्हे बताया हुआ था कि मुझे जानवरो से विशेष प्रेम है इसलिए मरती क्या न करती. मुस्कुरा  कर हामी भर् दी.सोचा शेर के मुहं मे हाथ डालने से क्या फायदा.अब तो जल्दी ही बुलडोजर के बहाने गधे को बाप बना कर अपनी प्रोमोशन  का राग जरुर छेड दूगी और मै बछिया का ताऊ बनी जी हजूरी मे जुट गई.

सडक पर बुलडोजर इतरा कर चल रहा था जैसे अपनी गली मे कुत्ता भी शेर हो. सैर सपाटा करवा कर घर पहुची तो पडोसन मुन्नी रात के खाने की तैयारी कर चुकी थी. गेट के आगे  छिलको मे मटर और गाजर भी थी लग रहा था कि शायद मेहमानो को बुलाया है नही तो सुबह शाम मैथी,गोभी और आलू के छिलको से ही दो चार होना पडता है मै खडी खडी सोच ही रही थी तभी  ना जाने कहां से बैलो के जोडे को छिलको की महक आई और वो अचानक  सरपट भागते भागते आए और छिलके खाने मे जुट गए और मै डर के मारे घर के भीतर भागी. तभी फोन की घंटी घनघना उठी बास का फोन था  कि कल सुबह जल्दी आ जाना क्योकि शाम को घर लौटते वक्त कोई बैल अचानक उनकी  गाडी के सामने आ गया टक्कर हो गई और उन्हे  पैर मे फ्रैक्चर हो गया है….

तो  मै सही हू  ना … जानवर हमारी  जिंदगी मे शामिल हुए कि नाहि  …  इसलिए जहां भी जाए ये लगता है …!!!!

जरुर बताईएगा कि आपको हमारा पशु प्रेम कैसा लगा ??

August 5, 2015 By Monica Gupta

Traffic

Traffic

आज गूगल सर्च के दौरान जब गूगल का साईन देखा तो समझ नही आया कि ये क्या है … उसमे ट्रैफिक लाईट बनी हुई थी और ट्रैफिक भी था. पर भला हो नेट का बहुत जल्दी पता चल गया कि आज ट्रैफिक लाईट का 100वा जन्मदिन है …

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सडक के ट्रैफिक के साथ साथ सोशल साईटस पर हमारा भी ट्रैफिक बनाए रखिए … शुभकामनाएं !!! Best wishes !!!

August 3, 2015 By Monica Gupta

जब कार चलाना सीखा

car drive photo

 

जब कार चलाना सीखा

मुसीबत मोल ली मैने ..

जी हां … आजकल समय ही ऐसा चल रहा है.चारो तरफ टेंशन,परेशानी ही दिखाई देती रहती है. आमतौर पर हम इन तनाव या मुसीबत से छुटकारा पाना चाह्ते है पर दूसरी तरफ एक उदाहरण मै हू जोकि मुसीबत को खुद ही न्यौता दे आई और वो भी पूरे जोश के साथ पर अब कहने को कुछ नही बचा. बस चारो तरफ गहन अंधकार ही अंधकार है. खैर, इससे पहले आप माथे पर बल डाल कर ज्यादा सोचने पर मजबूर हो जाए मै आपको दुख भरी दास्तान सुनाती हूं.

बात ज्यादा पुरानी नही है बस पिछ्ले महीने ही ही है.एक दिन बाजार जाते समय मुझे एक सहेली मिली वैसे स्कूल टाईम मे वो नालायक नम्बर वन थी.पर पता नही आजकल उसे क्या हो गया है इतनी स्मार्ट इतनी स्मार्ट हो गई है कि बस पूछो ही मत.बाल कटवा लिए है धूप का चश्मा पहनने लगी है और सबसे बडी बात की कार चलाती है. बस यही मेरी दुखती रग है.

असल मे, मुझे कार चलानी नही आती. आज के समय मे कार ना चलाना आना हैरानी का विषय ना बने इसलिए मैने उसी समय घर आकर घोषणा कर दी कि कल से मै गाडी चलाना सीख रही  हूं. जो चाहे सो हो. छोटे बेटे ने तुरंत अग़ूंठा दिखा कर मेरा समर्थन किया जबकि 90% परिवार जनो की राय थी कि रहने दो क्या फायदा.

पर मै एक बार जिद कर जाती हू तो फिर अपने आप की भी नही सुनती बडे स्टाईल से डायलाग बोल कर इतराने लगी और कहा कि ठान लिया तो बस ठान लिया और अगले ही दिन ब्यूटी पार्लर मे जाकर छोटे छोटे बाल कटवा लिए और गोगल भी खरीद लिए. अब  भई स्टाईल भी तो मारना जरुरी होता है .जल्दी ही खोज शुरु हुई कार सीखाने वाले की और 15 दिन मे मै फराटे से  कार चलाना सीख गई हालाकि दो चार बार बहुत बुरी तरह बची भी हूं.अब सारी बाते क्या बतानी. आप खुद भी समझदार है….  है ना.

अब आप सोच रहे होंगे कि भई इसमे दुख भरी बात कहा है तो वही बताने तो जा रही हू.कि मुसीबत मोल ली मैने. छोटे छोटे कामो के लिए अब सब मेरा ही मुंह देखते है कि ग़ाडी भी है और ड्राईवर भी.चाहे बाजार से आधा  किलो आलू लाने हो कपडे प्रैस करवाने हो या राशन का सामान हो लाना हो .सब मेरे सिर पर ही आ गया कि कार है ना . पहले दुकान वाले  सामान  आदमी के हाथो भिजवा देते थे पर अब उनका एक ही जवाब होता है कि कार है ना आप ही आ जाओ. आदमी नही ना है. दुकान बंद करके आना पडेगा.वगैरहा वगैरहा.

घर पर किसी के जूते मे मोची से जरा सी कील ही ठुकवानी हो तो भी कार है ना. और तो और जो मेहमान सालों से हमारे यहां नही आए थे जबसे उन्हे पता चला कि मैने कार सीख ली है वो आने को तैयार है.हफ्ते दस दिन का कार्यक्रम बना कर आ रहे है. पहले उन्हे रेलवे स्टेशन लेने जाओ फिर आवभगत,जायकेदार व्यंजन बनाओ,सेवा करो और  फिर अलग अलग जगह सुबह से शाम तक  दिल्ली दर्शन  करवाओ शापिंग करवाओ और फिर रात को लजीज व्यंजन से स्वागत करो ताकि वो नाराज ना हो जाए.

पहले तो मात्र घर ही सम्भालती थी पर अब जबसे कार चलाना सीखा है बस मानो मुसीबत ही मोल ले ली है मैने.अब तो दोहरी भूमिका हो गई है.घर पर सब निश्चिंत होकर बैठे है और सभी खुश है कि अब तो दिक्कत की कोई बात ही नही है.पर मै सिर पकड कर बैठी हूं कि क्यो मैने कार चलाना सीखा और अपने पैरो पर खुद कुल्हाडी मार ली.बेटे ने जो उस दिन अगूंठा दिखा कर मेरी बात का समर्थन किया था  मुझे वो थम्स अप की बजाय  ठेंगा लग रहा है. कुछ भी कहो  इसमे अब कोई मेरी मदद नही कर सकता क्योकि यह मुसीबत खुशी खुशी मैने ही मोल ली थी… अब तो इसे भुगतना तो पडेगा ही पडेगा….

कैसा लगा आपको ये व्यंग्य … जरुर बताईएगा 🙂

जब कार चलाना सीखा

August 3, 2015 By Monica Gupta

आई बरसात तो

rain photo

Photo by VinothChandar

आई बरसात तो

आहा से आह तक का सफर

इन दिनो बरसात की खबर पढ कर या सुनकर मन मायूस हो जाता क्योकि हमारे शहर मे बरसात हो ही नही रही थी. ऐसी बात नही है कि यहां बादल नही आते. बादल गरजने के साथ साथ् बिजली भी खूब चमकाते  पर वो कहते है ना जो गरजते है वो बरसते नही बस …. ऐसा ही कुछ हो रहा था. बहुत मन था कि बरसात आए तो आनंद लें. गर्मा गर्म अदरक और इलाइची की चाय के साथ हलवा और पकौडे बनाए. बच्चो के साथ बारिश मे भीगे और कागज की नाव चलाए. पर खुशी से  आहा करने का मौका ही नही मिल रहा था. यही सोचते सोचते मैं अखबार के पन्ने पलटने लगी. तभी अचानक आखो मे आगे अंधेरा सा छा गया. अरे! चिंता मत करे. कोई चक्कर वक्कर नही आया मुझे पर ऐसा लग रहा था कि जो सूर्य महाराज पूरी तेजी से भरी दोपहरी मे चमक रहे थे अचानक उनकी चमक हलकी पड  गई.बाहर देखा तो  आसमान मे बहुत काला बादल  था. आज तो यकीनन बरसना ही चाहिए. मै सोच ही रही थी कि अचानक बूदाबांदी शुरु हो गई और मन मयूर नाच उठा.

इतने मे बच्चे भी वापिस लौट आए और कपडे बदल कर हाथ मे छतरी और बरसाती पहन कर कागज की नाव बना कर  बरसात  का आनंद उठाने को तैयार हो गए. उधर मेरी भी सहेलियाँ आ गई और हमने बरसात का खूब  मजा उठाया. प्रकृति एक दम साफ साफ धुली धुली लग रही थी.गमलो मे लगे पौधे हवा के साथ हिलते हुए ऐसे लग रहे थे मानो अपनी खुशी का इजहार कर रहे हों.  फेसबुक पर भी बरसात की सूचना दे दी गई और लाईक और कमेंट का अम्बार लग गया.. और तो और दो तीन निकट  दोस्तो का तो बधाई के लिए फोन भी आ गया कि आखिरकार भगवान ने आपकी सुन ली. सारे चेहरे खिले खिले थे.ऐसा लग रहा था मानो खुशी बरस रही थी.  माहौल खुशनुमा हो चला था. अचानक तापमान इतना कम हो गया कि पंखा भी एक नम्बर पर करना पडा. काफी देर तक भीगने के बाद कपडे बदल कर् बच्चे नेट पर काम करने लगे और सहेलियो ने भी विदा ली.

तभी अचानक बहुत तेज बिजली चमकी और मेरी आखं खुली. अरे! ये सपना था. बाहर आकर देखा तो सचमुच मूसलाधार  बरसात हो रही थी. बेशक मन खुश हुआ.पर इतनी तेज बरसात देख कर चिंता भी हो गई. तभी बिजली चली गई. चिंता इस बात की थी कि अभी बच्चे भी नही वापिस आए थे. फोन करने लगी तो वो भी डेड हो गया था. मोबाईल का नेटवर्क तो वैसे ही दुखी कर रहा था. रेंज ही नही होती कभी इसकी. खैर! सोचा कि चलो इतने पकौडो की तैयारी कर लूं रसोई मे गई तो देखा कि रसोई की नाली मे पानी जाने की बजाय बाहर आ रहा था यानि सीवर ओवरफ्लो कर रहा था. बाहर सडक पर देखा तो वो पूरी भर गई थी और ऐसा लग रहा था कि पानी किसी भी क्षण घर मे आ सकता  है  और देखते ही देखते पानी अंदर आना शुरु हो गया. असल मे बाहर सडक को ऊंचा  बनाया जा रहा है शायद इसी लिए .. !!!

वो क्षण किसी भंयकर सपने से कम नही था. मैने तीन चार पर अपने को चिकोटी काटी कि यह सब सपना ही हो.पर आह! अफसोस यह सपना नही हकीकत था. ना बिजली ना फोन ना मोबाईल और ऊपर से घर मे आता पानी. मेरा सारा शौक हवा हो गया.

बस भगवान से  सच्चे दिल से एक ही प्रार्थना कर रही हूं  कि बरसात  को तुरंत रोक दो मै 11 रुपए का प्रशाद चढाऊगी.पर भगवान तक  मेरी अर्जी जब तक  लगी  तब तक काफी देर हो चुकी थी. बरसात के लिए खुशी की आहा अब तक दुख भरी  आह  मे बदल चुकी थी. सरकार, प्रशासन और अडोस- पडोस को कोसते हुए नम हुई आखों से सारे काम भूल कर झाडू, कटका लिए बरसात के रुकने की इंतजार कर रही हूं !!!

आई बरसात तो … बरसात ने दिल तोड दिया

कैसा लगा आपको ये व्यंग्य जरुर बताईएगा 🙂

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