Monica Gupta

Writer, Author, Cartoonist, Social Worker, Blogger and a renowned YouTuber

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April 23, 2015 By Monica Gupta

किसान आत्महत्या

  किसान आत्महत्या

  इंसान से इंसान का हो भाई चारा यही था पैगाम तुम्हारा … कहां गया पैगाम तुम्हारा …

कोई शक नही कि आप पार्टी की ग्रह दशा सही नही चल रही पहले आप के अपनो का छोड कर जाना  और  फिर जंतर मंतर  पर किसान द्वारा आत्महत्या प्रकरण … बेहद दुखदाई … सच पूछो तो जिन्होने आप को कभी  अपनी पलकों पर बैठाया था आज निशब्द हैं  …

cartoon -AK -monica

April 22, 2015 By Monica Gupta

Mission Target

cartoon- Mission Target

Mission Target

Target को पूरा करने के लिए ना जाने क्या क्या नही करना पडता, अस्तपाल मे आपरेशन इसलिए होते हैं कि टारगेट पूरे करने है बेशक टारगेट के चक्कर में कितनी ही मौतें न हो जाए. अब इन महाशय को देखिए चोर भी अपना टारगेट पूरा करने की फिराक में है. और तो और पुलिस भी अपना टारगेट पूरा करने के चक्कर में चोर को पकडना चाह रहा है !!!

Mission Target

April 22, 2015 By Monica Gupta

आईए बहस करें

आईए बहस करें
तो जनाब !!! आईए बहस करें! क्या ? मुद्दा क्या है ?

देखिए ये तो बिल्कुल ही गलत बात है . आज के समय मे भी मुझे बहस का मुद्दा बताने की जरुरत है क्या. आज हर टीवी चैनल,हर चौपाल,हर गली हर होटल हर नुक्कड पर एक ही बहस चल रही है और आप पूछ रहे है कि ??? क्या ठीक है चलिए चलिए माफ किया. हां तो बताईए आपको क्या कहना है इस बारे में.

people talking photo

आईए बहस करें
ठहरिए… इससे पहले कि आप कुछ कहे. मै बताना चाह्ती हूं कि आजकल यही सब कुछ सुनने और देखने को मिल रहा है और यकीन मानिए मै भी सच्चे देशभक्त की तरह इसके यानि भ्रष्टाचार को मिटाने के हक मे हूं. कल किट्टी पार्टी मे हम 50 महिलाओ ने इस बात का जोरदार समर्थन किया सभी ने ताली बजा कर् इसका स्वागत किया.देखिए इसकी फोटू भी छपी है आज के अखबार मे.वो अलग बात है कि मेरी तस्वीर जरा सी छिप गई है और शीला जी की तस्वीर ज्यादा साफ आई है. असल मे, हर मीटिंग मे फोटोग्राफर वही लाती है ना तो दे दिए होंगे उसे ज्यादा रुपए. हुह !!!!

चलो खैर अगली बार मे इस फोटोग्राफर को आऊट ना करवा दिया तो मेरा नाम …
हां, तो मै बात कर रही थी भ्रष्टाचार खत्म करने की. आपको पता है कि बच्चो के स्कूल मे भी इसी उपलक्ष मे तरह तरह के आयोजन करवाए गए. निबंध प्रतियोगिता,चित्रकारी और वाद विवाद. मै तो व्यस्तता के कारण जा नही सकी पर इन काम्पीटिशन मे जिसे जज बनाया मै क्या.. हम सब जानते है कि कौन कौन प्रथम , दूसरा और तीसरा स्थान पाएगा. अजी, आपने सही पहचाना जो स्कूल को सबसे ज्यादा दान देते है .. बस उन्ही के बच्चो का ही ख्याल रखा गया ताकि स्कूल मे 10 कम्प्यूटर आ सकें और एक बडा सा हाल बन सकें.
हां, तो बात हो रही थी कि भ्रष्टाचार को खत्म करने की.

आजकल सभी दफ्तरो मे यही ज्वलंत विषय बना हुआ है.वो तो उन लोगो ने शुक्र मनाया कि मामला जरा सा delay  हो गया है नही तो बहुत लोग सुसाईड करने वाले थे. अब इतने आलीशान बंगले ,ठाठ बाठ और बच्चो की ऊचीं शिक्षा कहां और कैसे दिखाते.पर कुल मिला कर चर्चा का ज्वलंत विषय जरुर बना हुआ है और बहस जारी है कि इनका अब क्या होगा.
हां, तो बात हो रही थी भ्रष्टाचार की. आज जगह जगह रैली,जूलूस और हडताल की जा रही है. सब उसका हिस्सा बनना चाह्ते है और तो और इस दौरान समोसा,चाय पार्टी का लुफ्त भी उठा रहे हैं.जिसे देखो वही इस बात की शपथ ले रहा है कि ना वो रिश्वत लेगा और ना ही देगा. अब कहिए आपके क्या विचार है इस बारे मे. अजी कुछ तो बोलिए. लगता है आप इसका समर्थन नही कर रहे. बस… आप जैसे लोगो की वजह से ही तो देश इतनी भयंकर परेशानियो से दो चार हो रहा है. हमे देखिए, ना दिन देख रहे ना रात बस जुटे है इस अभियान मे.
क्या ? क्या कहा आपने ? आप भी जुडे है इस अभियान से ? ह ह हा !!! कैसे ? जरा मै भी तो सुनु. क्या? आपने खुद से वायदा किया है कि आप किसी को रिश्वत नही देंगे. और आप यह चाह्ते है कि मै भी खुद से यानि अपने दिल मे झांक कर खुद से वायदा करु कि मै खुद इसका समर्थन नही करुगी. बस अपने सच्चे दिल से वायदा करुं.
माफ करे महाशय. इतना समय नही है मेरे पास कि अकेले बैठ कर चिंतन करु और खुद से प्रण ले लू कि कभी ना रिश्वत दूगी और ना लूगी. इतना समय नही है मेरे पास. आजकल तो इतने चैनल और सभाओ के महाबहस मे भाग लेने के लिए निमंत्रण आ रहे है कि खुद से बात करने का यानि आत्मचिंतन का समय ही नही है मेरे पास.हां अगर आपके पास समय है तो आप भी इस महा बहस मे शामिल हो सकते हैं. मै आपके इस महाबहस मे शामिल होने की सिफारिश जरुर कर सकती हू असल मे,मेरी पहुंच बहुत ऊपर तक है.ह ह हा.इसलिए …क्या आप शामिल ही नही होना चाह्ते. हद है लगता है आपने देश प्रेम का जज्बा ही नही है.

चलिए सादर नमस्कार.फिलहाल मै बहुत व्यस्त हूं …हुह … ना जाने कहां से चले आते है और कहते है कि खुद को बदलो जमाना बदल जाएगा…..हुह !!!

आईए बहस करें … कैसा लगा ?? जरुर बताईएगा !!

April 22, 2015 By Monica Gupta

Intuition in our life

ब्लड ग्रुप ओ और मच्छर

 

Intuition in our life

 पूर्वाभास और हमारी जिंदगी …!!!

हमारी जिंदगी मे यदा कदा Intuition या दूसरे शब्दो मे कहे पूर्वाभास होना अक्सर सुनने को मिल जाता है.जैसाकि अरे !! मुझे तो पहले ही पता चल गया था कि कुछ ना कुछ जरुर होने वाला है, या आखं फडकने को लेकर भी ऐसा अनुमान लगा लिया जाता है कि कुछ होने वाला है या फिर अगर पडोस मे बिल्ली अजीब सी आवाज निकाले तो हुश हुश करके उसे इसलिए भगा दिया जाता है कि कही कुछ बुरा ना हो जाए.चाहे तो पक्षियो का बहुत ज्यादा शोर हो या उनकी चुप्पी हो तो भी सहज ही ऐसा अनुमान लगा लिया जाता है कि कुछ होने वाला है.

cartoon oh no Intuition in our life some times makes us sad.

कुछ लोग इसे छठी इंद्रिय का नाम भी देते हैं. अब प्रश्न यह उठता है कि क्या वाकई मे ऐसा कुछ होता है? कुछ लोग इसे हकीकत मानते हैं और कुछ कोरी कल्पना. वैज्ञानिकों ने अपने अध्ययन में स्पष्ट किया है कि छठी इंद्रिय की बात सिर्फ कल्पना नहीं, वास्तविकता है, जो हमें किसी घटित होने वाली घटना का पूर्वाभास कराती है.
यूनिवर्सिटी ऑफ ब्रिटिश कोलंबिया के रॉन रेसिक ने एक अध्ययन कर पाया कि छठी इंद्रिय के कारण ही हमें भविष्य में होने वाली घटनाओं का पूर्वाभास होता है.

हाल ही में दीपक से मिलना हुआ. उन्होने बताया कि उनके दादा इन दिनो बीमार चल रहे थे. वो दादा के पास ही थे. अचानक सोते हुए वो उठे और बोले कि वो मुझे बुला रहें हैं. मैं जा रहा हूं. सबका ख्याल रखना. देखते ही देखते उनकी सासं उखड गई. अब ये पूर्वाभास नही तो क्या है.

वही रिचा ने बताया कि उसके अंकल बीमार थे. ऐसा लग रहा था कि वो कभी भी स्वर्ग सिधार सकते हैं. देर सवेर जब भी कोई फोन आता लगता उन्ही की कोई खबर होगी. समय बीता और वो ठीक होते चले गए.इतने ठीक हुए कि आफिस भी जाने लगे. तभी एक दिन दोपहर को फोन आया. पता नही पर अचानक वो बोल पडी कि अकंल हम सब को छोड कर चले गए. पास बैठी उसकी मम्मी ने टोका कि क्या बोल रही है. अब तो वो ठीक हैं. पर जैसे ही फोन पर बात की खबर सच्ची साबित हुई. सभी हैरान थे और रिचा ने बताया कि वो खुद भी हैरान थी कि अचानक यह बात उसने कैसे कह दी.
रवि कश्यप ने बताया कि वो अपनी लडकी के लिए बहुत समय से लडका देख रहे थे पर कोई बात नही बन रही थी. तभी एक दोपहर पता नही उन्हे झपकी आई या क्या हुआ कि उन्हे Intuition हुई  कि घर मे बहुत मेहमान है और खुशी का माहौल है. वो एकदम से उठ बैठे.अपनी पत्नी को सारी बात बताई. तभी अचानक एक फोन आया और देखते ही देखते उनका सपना सच हो गया. अचानक बात बन गई और लडकी को लोग चुन्नी चढा कर हाथो हाथ ले गए. बताते बताते उनकी आखे नम हो गई.

वही रजनी ने बताया कि एक बार वो सुबह उठी और बेवजह ही रोने लगी. ना उसे और ना उसके परिवार वालो को समझ आया कि आखिर बात है क्या. पर रजनी को मन ही मन लग रहा था Intuition हो रही थी कि  कुछ बुरी खबर आने वाला है. तभी उसकी सहेली घर पर आई और उसने बताया कि रश्मि जोकि उन दोनो की सहेली थी सडक एक्सीडेंट मे मारी गई.
मीना ने बताया पूर्वाभास उसे कई बार होता है और वो अक्सर ठीक भी होता है. काम के सिलसिले मे उसे अक्सर बाहर जाना पडता है. कई बार उसे खुद ही लगने लगता है कि आज उसे वहां नही जाना चाहिए और वो नही जाती. कुछ समय बाद खबर मिलती है कि जहां उसे जाना था वहां कोई ना कोई अनहोनी हुई है.
ऐसे ना ना जाने अनगिनत उदाहरण है. ऐसी बातो पर कुछ लोग विश्वास करते है तो कुछ अंधविश्वास !!! पर चाहे कुछ भी हो आज के इस कम्प्यूटर युग मे भी कुछ ना कुछ तो ऐसा जरुर है जो हमे सोचने पर मजबूर कर देता है…!!

अगर आपका भी कोई ऐसा अनुभव हो तो जरुर बताईएगा …

April 20, 2015 By Monica Gupta

पहचान

 

 ( मोनिका गुप्ता)

( मोनिका गुप्ता)

पहचान (कविता)

नन्हू की चाची
दिव्या की मौसी
गीता की ताई
नीरु की आंटी
जमुना की बाई जी
दीप की भाभी
लीना की देवरानी
रानो की जेठानी
सासू माँ की बहू रानी
माँ की मोना
पति की सुनती हो
रामू की बीबी जी
मणि की मम्मी
इन नामो से मेरी

पहचान कही गुम हो गई
एक दिन
आईने के आगे
खुद को जानने की कोशिश की
तो
मुस्कुरा दिया आईना
और बोला
मेरी नजरो मे ना तुम
चाची हो ना ताई
ना भाभी हो ना बाई
बस

तुम सिर्फ तुम हो
सादगी की मूरत
दयालुता की प्रतीक
प्रेम की देवी

ईश्वर का प्रतिबिम्ब
बस …
तभी से अपने पास
आईना रखने लगी हूं
ताकि पहचान धुंधलाने पर
उसके अक्स मे खुद को जान सकू
पहचान सकू….
कि मैं भी कुछ हूं
कि मैं भी कुछ हूं ….( पहचान )

 

 

 

April 20, 2015 By Monica Gupta

जी में आता है

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जी में आता है  … (कविता)

जी में आता है
ये बदल दू
वो बदल दूं
कुछ ऐसा लिखू
कि मच जाए हलचल
सुप्त समाज मे भर दूं नव चेतना
भर दू रंग इस बेरंग दुनिया में
अंधियारी गलियो मे भर दूं नई रोशनी
फिर
अनायास ही ठिठक जाती हूं
क्योंकि
मैं भी उसी समाज का हिस्सा हूं
कौन देगा मौका
कौन सुनेगा बात
ना रुपया ना सिफारिश मेरे पास
मेरी कलम कैसे कह पाएगी अपने दिल की बात
फिर बैठे बैठे जी भर आया
अपनी लिखी कविता को फिर दिल से लगाया …

जी में आता है…. कविता कैसी लगी ? जरुर बताईएगा !!!

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