खोजी पत्रकारिता
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बात कुछ समय पहले की है. जब हमारे शहर मे जबरदस्त बारिश के साथ भयंकर ओलाबारी हुई और देखते ही देखते ना सिर्फ सडको पर पानी भरने लगा बल्कि घरो मे भी पानी धुसने लगा.करीब धंटा बारिश चली पर मेरी सहेली मणि का घर आश्चर्य का विषय बना हुआ था.
मणि के घर 6-7 ओले अभी भी जस के तस थे. यानि पिघले नही थे. बारिश, ओले की वजह से सर्दी बहुत बढ गई थी और रात भी होने वाली थी अगली सुबह फिर देखा तो वैसे ही थे. लोगो का जमावडा बढने लगा और मेरा रिपोर्टरी दिमाग भी सोचने लगा कि आखिर यह पिघले क्यो नही. कही कोई उल्कापात के कण तो हमारे यहां नही आ गए है.खैर, किसी को उसे हाथ नही लगाने दिया गया.बहुत पत्रकार भी उसकी तस्वीर लेकर गए. शहरी बच्चो ने तस्वीरे फेसबुक पर डाल दी वही और मधुबन से एक जांच टीम भी गठित करके वहा से रवाना हो गई.
उस दिन पूरी धूप निकल गई, मैं दुबारा मणि के घर गई तो वो ट्रंक के गर्म कपडे बाहर सुखा रही थी क्योकि उसके स्टोर मे पानी चला गया था. तभी मैने पूछा कि क्या स्टोर मे फिनाईल की गोलियां भी थी तो वो बोली कि हां बहुत थी. कुछ ट्रंक के अंदर तो कुछ ट्रंक के पीछे गलती से गिर गई थी. बस, मैंने वही सिर पकड लिया. वो ओले, वोले कुछ नही फिनाईल की गोलियां थी जो बरसात के पानी के साथ अंदर से बह कर बाहर आ गए थे.इतने मे कुछ चैनल की ओबी लाईव टेलिकास्ट के लिए वहां पहुच चुकी थी. मैं उनको मना कर ही रही थी कि अचानक मोबाईल की आवाज से मेरी नींद खुल गई.
चैनल की तरफ से फोन था कि शहर के पास के गांव मे दो गैंगस्टर घुस आए है उनकी ताजा अपडेट चाहिए. फोन रखने के बाद मैने ऐसे सपने के लिए सिर को झटका और फिर नई खबर की जानकारी जुटाने मे जुट गई. … !!! 🙂
खोजी पत्रकारिता
नमस्कार
नमस्कार
टीवी चैनल पर निरंतर बहस चलती रहती है..पर किसी तह तक नही पहुंचती. आईए आपको भी एक ऐसी ही बेसिर पैर की बह्स में लिए चलते हैं
नमस्कार !! आज बहस का मुद्दा है वेलेंटाईन डे !!! हमारे फेसबुक स्टूडियो मे साथ चार विशेषज्ञ जो इस क्षेत्र मे माहिर है, पधारे हुए हैं. आप सभी का स्वागत है. “अ”, “ब” “स” “ड”.
मिसेज “अ” सबसे पहले मैं आप से पूछती हूं कि क्यो मनाते हैं हम वेलेंटाईन.
“अ” जैसे ही बोलने को होती हैं जी देखिए, असल मे, वो क्या है, न कि ….!!! (बात काटते हुए)
जी.. बिल्कुल… अभी आपके पास दुबारा आउगी. अभी श्री “ब” कुछ कहना चाह रहे हैं.
“ब” कुछ कहने लगते हैं कि मैं “अ” की बात पर ही आ रहा हूं असल में… जी बिल्कुल, “अ” और “ब” अभी आपके पास दुबारा आउगीं पर अभी लेना पड रहा है एक बहुत ही छोटा सा ब्रेक. जी मैं आऊंगी आपके पास (12 मिनट बाद) ब्रेक पर जाने से पहले मैं बात कर रही थी … जी हां, लग रहा है मिस “स” कुछ कहना चाह रही है
( “अ” और “ब” का गुस्से मे पारा हाई हो गया क्योकि बोलने का मौका नही मिल रहा इसलिए “स” की बात काटने के लिए अ, ब और स तीनो एक सुर मे बोल रहे हैं और %ं$#@$%ं&*(*&ं%ंक्या बोल रहे हैं कुछ समझ नही आ रहा….!!) इसी बीच मे लेते हैं एक छोटा सा ब्रेक, कही जाईएगा मत( 15 मिनट बाद)
एक बार फिर से हमारे स्टूडियो मे आपका स्वागत है. हमारे साथ हमारे संवाददाता फोन लाईन पर जुड गए हैं. जी क्या कहना है आपको. लोगो की वेलेंटाईन डे पर क्या प्रतिक्रिया है….. हैलो… हैलो… !!! ओह, लगता है हमारे संवाददाता तक हमारी आवाज नही पहुचं रही है .चलो थोडी देर मे फिर बात करने की कोशिश करेंगे…
अभी “ड्” साहब एक दम शांत बैठे हैं उनसे पूछ्ते हैं कि उनका क्या कहना है आज के दिन के बारे मे… “ड्” कुछ बोलने को होते ही हैं कि उससे पहले …. लेते हैं एक बहुत ही छोटा सा ब्रेक कही जाईएगा मत आज का विषय बहुत ही रोचक चल रहा है…( 15 मिनट बाद ) !!हां, तो ब्रेक पर जाने से पहले बात हो रही थी कि क्यो मनाते हैं हम वेलेंटाईन डे. पर अफसोस के साथ कहना पड रहा है कि समय बहुत कम है और विज्ञापन ज्यादा. सभी पधारे मेहमानो का धन्यवाद. पढते रहिए और अपने विचार देते रहिए. अगले सप्ताह फिर मिलेंगे एक नए विषय के साथ ….!! 🙂
नमस्कार

मोनिका गुप्ता
हरियाणा साहित्य अकादमी- अब मुश्किल नही कुछ भी
हरियाणा साहित्य अकादमी- अब मुश्किल नही कुछ भी
बाल साहित्य के अन्तर्गत
हरियाणा साहित्य अकादमी द्वारा लेखन के क्षेत्र मे विभिन्न पुरस्कारो की घोषणा हुई. उसमे मेरे द्वारा लिखी गई बाल साहित्य की पांडुलिपी ” अब मुश्किल नही कुछ भी” को हरियाणा साहित्य अकादमी की ओर से अनुदान मिला है. इसमे देश की दस जानी मानी हस्तियो ने अपने बचपन और जीवन के बारे मे विस्तार से बताया है जो बच्चो के लिए सिर्फ रोचक ही नही बल्कि प्रेरक भी होगा.
उन जानी मानी हस्तियो के नाम
हैं…Nraghuraman Aiyer,
Ashok Chakradhar,
Bharti Singh,
,Sanket Goswami,
Yudhbir Singh,
Manmohan singh(सिनेटोग्राफर) और Vijaya Ghosh (लिम्का बुक आफ रिकार्ड की सम्पादिका) हैं.
अब मुश्किल नही कुछ भी”किताब बच्चों को जरुर प्रभावित करेगी
जब कैंसर को शिकस्त दी – आत्मविश्वास से भरी सच्ची घटना
जब कैंसर को शिकस्त दी – आत्मविश्वास से भरी सच्ची घटना – मैं एक हीरोईन से मिली … आपके मन में माधुरी दीक्षित, हेमा मालिनी या आलिया भट्ट आ रहे होंगे पर नही… ये जो हीरोईन हैं इनका नाम कभी अखबार मे नही आया… कभी ब्रेकिंग न्यूज नही बनी पर मेरी नजर में किसी हीरोईन से कम नही …और अगर आप सुनेगें तो आप भी कह उठेंगें कि वाकई ये है सही मायनों नें हीरोईन …
जब कैंसर को शिकस्त दी – आत्मविश्वास से भरी सच्ची घटना
मेरी खबर- कैंसर से जीत… मणि के घर जाना हुआ. उसके घर रिश्तेदार आए हुए थे. उनके साथ एक प्यारी सी 3 महीने की गुडिया भी थी. गोल मटोल गुडिया के चेहरे पर स्माईल इतनी प्यारी थी कि मन करा कि उसे गोदी मे ही लिए रहूं. पर उनको वापिस जाना था इसलिए वो अपने मम्मी पापा के साथ चली गई. उनके जाने के बाद मणि ने बताया कि इस प्यारी सी गुडिया की मम्मी को यानि पप्पी को कैंसर था.
जब कैंसर को शिकस्त दी – आत्मविश्वास से भरी सच्ची घटना –
Hats Off ….!!! उसे लगभग 8-9 महीने पहले पता चला और वो मुम्बई चले गए वही रह कर इलाज करवाया. इसी बीच अनेकों बार उसकी कीमोथैरेपी भी हुई. जहां एक तरफ उसका खाने का मन नही करता था वही दूसरी तरफ अपने भीतर पल रही नन्ही जान के लिए खाना और अच्छी डाईट लेनी भी जरुरी थी. मैं हैरान और हक्की बक्की होकर सारी बाते सुने जा रही थी. एक तो कैंसर का नाम ही डरावना है उस पर कीमो, आप्रेशन या रेडिएशन ना जाने कितनी तरह की प्रक्रिया से गुजरना पडता है
ऐसे मे मन हार जाता है पर पप्पी ने ना सिर्फ उसे सहन किया बल्कि अपने जज्बे को जिंदा रखते हुए अपनी बेटी को जन्म भी दिया हालाकि वो आप्रेशन से ही हुई पर उसके बाद भी वो कैंसर का ईलाज करवाती रही. अब वो ठीक होकर वापिस अपने शहर लौट रही थी इसलिए यहां पर थोडी देर के लिए रुकी.
काश मुझे पहले पता होता तो मै जरुर उसकी हौंसला अफजाई करती और उसकी पीठ थपथपाती. मैं अपने घर जाने के लिए खडी ही हुई थी कि पप्पी सामने खडी थी. वो अपना पर्स ले जाना भूल गई थी इसलिए दुबारा आई थी. अचानक उसे सामने खडा देख कर मेरी आखे छ्लछ्ला आई और मैने उसे गले से लगा लिया और उसकी बहुत बहुत तारीफ की जिसकी वाकई मे वो सच्ची हकदार थी.
प्यारी से मुस्कान लिए वो वहां से चले गए और मैं अपने घर लौटती हुई यही सोचती रही कि बेशक पप्पी कोई नामी गिरामी खिलाडी, अभिनेत्री या कोई जानी मानी हस्ती नही है पर जिस विश्वास के साथ उसने अपने दर्द को सहा और एक बच्ची को जन्म दिया वो मेरे लिए किसी रियल हीरोईन से कम नही है. ईश्वर करे अब वो हमेशा स्वस्थ रहे और सेहतमंद रहे.
बीती ताहि बिसार दे – बीती हुई बात को पकड कर बैठना सही नही – Monica Gupta
बीती ताहि बिसार दे – बीती हुई बात को पकड कर बैठना सही नही – अक्सर हम past की बातों को लेकर बैठ जाते हैं और अपना भविष्य खराब कर लेते हैं. घर पर एक जानकर आईं. . read more at monicagupta.info
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मेरी खबर आपको कैसी लगी … !!!!
monica gupta













