Monica Gupta

Writer, Author, Cartoonist, Social Worker, Blogger and a renowned YouTuber

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October 21, 2015 By Monica Gupta

कन्या भ्रूण

जय माता की ( मोनिका गुप्ता)

जय माता की ( मोनिका गुप्ता)

कन्या भ्रूण

कन्या भ्रूण, अष्टमी और कंजके…

मेरी नजर से

वैसे इस बार अष्टमी पर कंजके करते हुए एक बात जरुर महसूस हुई कि अब की बार लडकियों के लिए ज्यादा मेहनत नही करनी पडी. असल में, नवरात्र की अष्टमी पर कन्या को भोजन करवाया जाता है और उनसे आशीर्वाद लिया जाता है.पिछ्ले काफी बार से अष्टमी पर कन्याए बहुत कम मिलती थी और बहुत भागमभाग रहती थी कि किसी तरफ आठ कन्या मिल जाए पर इस बार सब बहुत आराम से हो गया.बहुत कन्याए आई और बाद में भी आती रहीं.

पहले तो अष्टमी आने से पहले टेंशन सी हो जाती थी कि कहां कहां से लडकी को इकठ्ठा करें या फिर मंदिर में ही हलवा पूरी दे आएं … पिछ्ले काफी समय से, हमारे हरियाणा में जो लिंग अनुपात कम हो रहा था कन्या भ्रूण हत्या बेहिसाब हो रही थी. सरकार द्वारा उठाए गए कठोर कदम और जनता में जागरुकता भी  इसका एक कारण हो सकता है…. शायद  ये एक शुभ संकेत हो … शायद जल्द ही अनुपात बराबर हो जाए … !!! जय माता की !!!

मैं हमेशा कहती हू कि गर्ल है तो कल है … !!! जय माता की !!!

 

October 20, 2015 By Monica Gupta

हे न्यूज चैनल्स

कार्टून ( मोनिका गुप्ता )

कार्टून ( मोनिका गुप्ता )

  हे न्यूज चैनल्स

 

बचपन में हम एक खेल खेलते थे. गाय उड, चिडिया उड, फल उड, आज शायद यही खेल न्यूज चैनल खेल रहा है. एक खबर बनती है और दूसरी फुर्र करके उड जाती है… किसान आत्महत्या की खबर उड. इंद्राणी उड, रेप उड, विवादित बयान उड, अकादमी सम्मान उड…

कल मणि से बात होते होते बहस में तबदील हो गई. असल में, बात हो रही थी न्यूज चैनल की. जिस तरह से खबरें परोसी जा रही हैं… अंतहीन बहस हो रही है उस का क्या प्रभाव हो रहा है समाज पर. मेरी राय यह थी कि  न्यूज चैनल आतंक फैला रहे है जहां उनकी भूमिका निष्पक्ष होनी चाहिए पर उससे उलट वो टीआरपी बढाने के चक्कर मे कुछ भी परोसे जा रहे हैं जबकि उनके उपर बहुत बडा दायित्व है समाज के प्रति. उसके क्या पूछ्ने पर मैने बताया चाहे हिंदू मुस्लमान के झगडे हो या बडबोले नेताओ के विवादित बयान… अरे !!! जो जरुरी ही नही है वो किसलिए दिखाए जाएं… ना दिखाने की बात तो दूर वो तो तोड मरोड के पेश किए जा रहे हैं फिर उस पर लोगो के टवीट दिखाते हैं और एक घंटा बहस करवाते हैं और नतीजा … गई भैंस पानी में …यानि शून्य…

इस पर उसका कहना था कि कई खबरे जरुरी होती है दिखाना चाहिए कि समाज में क्या क्या हो रहा है  !!! और हिंदू मुस्लमान के झगडे ??? मैने बीच मे ही बात काटी… ये क्या है इससे क्या भला होगा समाज में बल्कि बार बार दिखा कर आपसी नकारात्मकता और हिंसा को ही बढावा मिलेगा… बिल्कुल गलत ट्रैक पर चले गए हैं न्यूज चैनल..बस अपने 24 घंटे पूरे करने हैं जिसमें मार काट, दंगे, विवादित बयान और विज्ञापन ही मकसद रह गया है. एक तरफ कैंसर की बात करेंगें दूसरी तरफ पान मसाला उस  कार्यक्रम को प्रायोजित करता है !!  बहुत उलझा हुआ मसला है ये !!

ऐसा नही था हमारा देश.. !! अचानक मैं इमोशनल हो गई. हिंदू ,मुस्लमान को हमने कभी नही अलग समझा. बचपन मे भी यही पढा था कि भारत में भिन्नता होते हुए भी एकता का देश है और वाकई था … पर जिस तरह से घर वापिसी और बीफ, मार काट के मुद्दे उठे मानों खबरों का पूरा संसार ही बदल गया. बीफ गौ वध सुन सुन कर कान ही पक गए. मेरे एक मित्र बता रहे थे कि आजकल न्यूज चैनल लगाने मे एक डर सा लगने लगा है..पता नही क्या झेलना पड जाए. और तो और साहित्य अकादमी को लेकर सम्मान लौटाने के मुद्दे को भी इन्होने बेवजह बहुत तूल दे दिया और भिडा दिया साहित्यकारों को …!!! राजनीति डाल दी उनके लेखन में !!! बेशक, जिस तरह से साहित्यकारों में अपवाद हैं ठीक वैसे ही न्यूज चैनल्स में भी अपवाद हैं …

पर फिर भी समझ नही आता कि बेसिर पैर की खबरे दिखा कर क्या मकसद पूरा करना चाह्ते हैं.

अरे भई !!!दिखाओ पर दोनो पहलू तो दिखाओ … सकारात्मक दिखाते नही बस नकारात्मकता के पीछे ही पडे हुए हैं. मैं खुद भी दस साल ज़ी न्यूज से जुडी रही हूं पर यकीनन तब इतना बुरा हाल नही था खबरों का…!!! शायद इसलिए कि तब टवीटर और सोशल मीडिया इतना तेज नही था..

आज इंसानियत उड, संवेदनशीलता उड…. गम्भीरता उडन छू हो चली है और बिना किसी निष्कर्ष के हमारी भी बह्स गर्म चाय पर समाप्त हो गई.

ऐसा प्रतीत हो रहा है कि मानों ये न्यूज चैनल रावणी हंसी हंस रहे हों और हम दर्शक सीता के समान हाय राम हाय राम चिल्ला रहे हो … कि आओ हमे इससे बचाओ …!!!( राम लीला का मौसम  है न इसलिए ये डायलाग लिखना जरुरी है)

हे न्यूज चैनल्स जरा रहम करो !!! ईश्वर आपको सदबुधि प्रदान करे!!!

 

 

 

 

October 19, 2015 By Monica Gupta

साहित्य सम्मान

साहित्य सम्मान ( मोनिका गुप्ता)

साहित्य सम्मान ( मोनिका गुप्ता)

      साहित्य सम्मान

साहित्य अकादमी अवार्ड लौटाने का जिम्मा जिस तरह से न्यूज चैनल वालो ने लिया हुआ है वो कमाल है …

हद तो तब हो गई जब वो घर घर घुस कर साहित्य अकादमी सम्मान आन लाईन लाईव लौटाने की बात कर रहे हैं … भई हम तो नही लौटाने वाले ये बात तो पक्का है .

 

BBC

उर्दू के जाने माने शायर मुनव्वर राना ने एक लाइव टीवी कार्यक्रम के दौरान अपना साहित्य अकादमी अवॉर्ड लौटाने का ऐलान किया है.

राना से पहले चालीस से ज़्यादा साहित्यकार अपने साहित्य अकादमी अवॉर्ड लौटा चुके हैं.

बीबीसी संवाददाता दिलनवाज़ पाशा से बात करते हुए मुनव्वर राना ने कहा कि वे ये अवॉर्ड मौजूदा हालात के विरोध में लौटा रहे हैं.

कुछ दिन पहले ही मुनव्वर राना ने फ़ेसबुक पर पोस्ट किया था कि अवॉर्ड लौटाने से हालात नहीं बदलेंगे, साहित्यकारों को अपनी क़लम उठानी होगी.

लेकिन अब अपने अवॉर्ड लौटाने के फ़ैसले का बचाव करते हुए उन्होंने कहा, “लोग ये समझते हैं कि या तो मुनव्वर राना डर गए हैं या बिक गए हैं, अगर मुझे बिकना होता तो मैं चालीस बरस पहले बिक गया होता, अब कौन मेरी क्या क़ीमत देगा. मेरे लिए ये अवॉर्ड बोझ बन गया था. बस वो बोझ उतारा है.” Read more…

वैसे न्यूज चैनल जिस तरह से इन दिनों अपनी भूमिका निभा रहे हैं अत्यंत दुखद है

साहित्य सम्मान

October 16, 2015 By Monica Gupta

बीफ मुद्दा

beef cartoon by monica gupta

beef cartoon by monica gupta

 

बीफ मुद्दा

आपरेशन बीफ

यही सही रहेगा… नेता जी की जुबान से बीफ शब्द ही डिलीट कर देता हूं … न नेता बोलेगें न मीडिया भैस ओह क्षमा न मीडिया इस मुद्दे पर बहस करेगी!!! लगता है समाज मे इसके अतिरिक्त और कोई मुद्दा ही नही रह गया !!! बहुत अफसोस होता है ये सब देख सुन कर !!

बीफ मुद्दा

October 16, 2015 By Monica Gupta

Ways to Encourage

Ways to Encourage

 

अच्छी,  प्रेरित करने वाली बातें हमेशा हमारा हौंसला बढाती हैं. गूगल सर्च के दौरान एक प्रेरक प्रसंग पढा और उसने बहुत कुछ सोचने पर मजबूर कर दिया.

प्रसंग पढा कि एक स्कूल मे सांस्कृतिक कार्यक्रम होना था.सभी बच्चे उसमे हिस्सा लेना चाह्ते थे. एक बच्चे का तो बहुत ही ज्यादा मन था कि वो भी उसमे हिस्सा ले. टीचर ने बच्चो को ओडिशन के लिए बुलाया. बच्चे ज्यादा थे और कार्यक्रम कम थे.

खैर, सभी बच्चे अपने अभिभावकों के साथ पहुंचे. एक बंद हॉल में टीचर बच्चों का आडिशन ले रहे थे. बाहर बैठे माता पिता परिणाम की प्रतीक्षा कर रहे थे. थोडी देर बाद कुछ बच्चे चहकते हुए और बाक़ी चेहरा लटकाए हुए, बाहर आए. वो बच्चा जिसका बहुत ही ज्यादा मन था हिस्सा लेने का वो दौड़ता खुश होता हुआ अपनी मां के पास आया. मां बच्चे को देख कर खुश हुई और सोचा कि बच्चा खुश होकर बाहर आया है जरुर वो भी किसी मे हिस्सा ले रहा होगा. तभी बच्चा बोला ‘जानती हो मां, क्या हुआ?’ मां ने चेहरे पर अनजानेपन के भाव बनाए और उसी मासूमियत से बोली, ‘नही , पता नही बताओ क्या हुआ???
बच्चा उत्साह से बोला, ‘टीचर ने सभी से अभिनय कराया. वो जो रोल चाहता था, वह तो किसी और बच्चे को मिल गया. लेकिन जानती हो, उसकी भूमिका तो नाटक के किरदारों से भी बड़ी मजेदार है।’ मां को बड़ा आश्चर्य हआ कि ऐसा क्या रोल मिला है । बच्चा बेहद उत्साहित होकर बोला, ‘अब मैं ताली बजा कर प्रोत्साहित करुंगा …
पढ कर बहुत अच्छा लगा. वाकई, अगर हम जिंदगी के रंगमंच की बात करना करें तो हम सभी किसी न किसी किरदार मे दिखना चाह्ते हैं पर किसी को शाबाशी देना या प्रोत्साहित करना हमे नही सिखाया जाता जबकि जिंदगी में आगे बढने के लिए दूसरों को प्रोत्साहित करना भी बेहद जरुरी है.

अगर हम दूसरों की प्रशंसा करते हैं तो बहुत अच्छी बात है और अगर नही करते तो करनी चाहिए !!!

Ways to Encourage

encourage photo

Photo by ePublicist

October 15, 2015 By Monica Gupta

दाल के भाव

दाल कार्टून ( मोनिका गुप्ता)

दाल कार्टून ( मोनिका गुप्ता)

दाल के भाव

सुना है दाल बहुत भाव खा रही है…दाल मखनी, दाल  तडका या दाल फ्राई … हम सभी को किस्म किस्म के स्वाद वाली दाले बहुत पसंद है पर यहां दूसरी किस्म की दाल की बाते हो रही हैं… है वो दाल ही पर दाल नही है…

आज  दाल की ही चर्चा है कोई कह रहा है दाल नही गल रही, तो कोई कह रहा है ये मुंह और मसूर की दाल, कोई कह रहा है दाल ही काली है तो किसी को घर की मुर्गी दाल बराबर लग रही है, कोई दाल भात मे मूसलचंद है तो कोई दाल जूतियों में बांट रहा है.. तू दाल दाल तो मैं पात पात … मैं भी देखू ऐसी कैसी दाल है जो आसमान छू रही है.. इसलिए जा रही हूं …

दाल के भाव

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