Monica Gupta

Writer, Author, Cartoonist, Social Worker, Blogger and a renowned YouTuber

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July 8, 2015 By Monica Gupta

अधिनायक जय है

adhinayak  by monica gupta

अधिनायक जय है

बचपन से पढते और सुनते आ रहे हैं कि कुछ लोग इतिहास बदल देते हैं …  By God  इस का जीता जागता उदाहरण भी मिल गया … हमारे नेता  और कुछ कर पाए या न कर पाए पर देश का इतिहास जरुर बदलने पर आमादा है

अरे !! हमारे नेता के सिवा है किसी मे इतनी जुर्र्त? नेता और कुछ कर पाए या न कर पाए पर देश का इतिहास जरुर बदलने पर आमादा है चाहे अकबर की बात हो, महाराणा प्रताप की बात हो या फिर हमारे राष्ट्रीय गान जन ग़ण मन … अधिनायक की बात हो… आईए बदलते इतिहास के हम भी साक्षी बनें … भूले व्यापम व्यूपम और बदले इतिहास…… जय जय जय जय हे

Adhinayak Word Should Be removed From National Anthem 12567358

जयपुर। राजस्थान के राज्यपाल कल्याण सिंह ने कहा कि राष्ट्रगान से ‘अधिनायक’ शब्द हटाना चाहिए, इसके बदले ‘मंगल’ शब्द का इस्तेमाल होना चाहिए। अधिनायक शब्द आजादी से पहले के अंग्रेजी शासकों का महिमा मंडन करता है।

राजस्थान विश्वविद्यालय के 26वें दीक्षांत समारोह में कल्याण सिंह ने कहा -‘जन-गण-मन अधिनायक जय है.. लेकिन अधिनायक कौन है? ये अंग्रेजी शासक की प्रशंसा है। अब हमे इसकी जगह जन-गण-मन मंगल गाए.. लिखना चाहिए।’ उन्होंने कहा कि राष्ट्रगान में संशोधन करने का मतलब यह नहीं है कि वह इसके रचयिता रविंद्र नाथ टैगोर का सम्मान नहीं करते हैं।

अकबर नहीं महाराणा प्रताप महान

राज्यपाल कल्याण सिंह ने इसके पहले महाराणा प्रताप को मुगल शासक अकबर से ज्यादा महान बताया था और अकबर की बजाय महाराणा प्रताप नाम से पहले ‘महान’ शब्द लगाने की बात कही थी। ऐसे ही वे झांसी की रानी को विक्टोरिया से अधिक महान और मराठा शासक शिवाजी को औरंगजेब से महान बता चुके हैं। Via jagran.com

 

  BBC

राजस्थान के राज्यपाल कल्याण सिंह ने भारत के राष्ट्र गान ‘जन गण मन’ पर सवाल उठाकर एक नई बहस को हवा दे दी है.

कल्याण सिंह ने हाल में राजस्थान विश्वविद्यालय के 26वें दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए पूछा था कि ‘जन गण मन अधिनायक जय हो’ में अधिनायक किसके लिए है.

उन्होंने कहा था कि यह ब्रिटिश समय के अंग्रेज़ी शासक का गुणगान है. उन्होंने कहा कि राष्ट्रगान में संशोधन होना चाहिए.

अब जरा, एक नज़र इस गाने के इतिहास पर भी डाल लेते हैं.

यही वह गाना था जिसे नेताजी सुभाष चंद्र बोस की आज़ाद हिंद फ़ौज के लड़ाकों ने राष्ट्रगान के तौर पर अपनाया था.

स्वतंत्रता से पहले 1937 में प्रांतों में पहली चुनी हुई सरकारों ने भी इसे अपनाया. स्वतंत्र भारत के गणराज्य ने काफी चिंतन-मनन के बाद इसे 1950 में अपनाया.

यह गाना पहली बार 27 दिसंबर 1911 को भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के कलकत्ता अधिवेशन के दूसरे दिन का काम शुरू होने से पहले गाया गया था.

‘अमृत बाज़ार पत्रिका’ में यह बात साफ़ तरीके से अगले दिन छापी गई. पत्रिका में कहा गया कि कांग्रेसी जलसे में दिन की शुरुआत गुरुदेव रवींद्र नाथ टैगोर द्वारा रचित एक प्रार्थना से की गई.

यही वह साल था जब अंग्रेज सम्राट जॉर्ज पंचम अपनी पत्नी के साथ भारत के दौरे पर आए हुए थे. तत्कालीन वायसराय लॉर्ड हार्डिंग्स के कहने पर जॉर्ज पंचम ने बंगाल के विभाजन को निरस्त कर दिया था और उड़ीसा को एक अलग राज्य का दर्जा दे दिया था.

इसके लिए कांग्रेस के जलसे में जॉर्ज की प्रशंसा भी की गई और उन्हें धन्यवाद भी दिया गया.

‘जन गण मन’ के बाद जॉर्ज पंचम की प्रशंसा में भी एक गाना गाया था. यह दूसरा गाना रामभुज चौधरी द्वारा रचा गया था, सम्राट के आगमन के लिए. Read more…

July 2, 2015 By Monica Gupta

Digital India Weak

Digital India Weak /week ???

Digital India  week by  monica gupta   Digital India Weak / week ??               बेशक देशवासी Digital India week  को लेकर बेहद उत्साहित हैं सब कुछ नेट से जुड जाएगा और आराम ही आराम होगा … पर मूल भूत समस्या का क्या करें समस्या है नेट का न चलना या नेट का बेहद धीरे चलना !!!  तभी तो आज  Digital India week ???मनाए  या Digital India Weak !!!

 

PHOTOS: Digital India Week: PM Narendra Modis 15 point dream | The Indian Express

“I dream of a digital India where 1.2 billion connected Indians drive innovation.” (Express photo by Anil Sharma)

“I dream of a digital India where knowledge is strength and empowers people.” (Express photo by Anil Sharma)

“I dream of digital India where quality healthcare reaches right upto the remotest areas through e-health care.” (Express photo by Anil Sharma)

“I dream of digital India where cyber security becomes an integral part of national security.”

“I dream of digital India where there is mobile and e-banking for financial inclusion.”

“I dream of digital India where e-commerce drives entrepreneurship.”

“I dream of digital India where the world looks to India for the next big idea.”

“I dream of digital India where netizens are empowered citizens.” See more…

‘M-Governance (Mobile, Not Modi),’ Quips PM at Digital India Push: 10 Facts

Prime Minister Narendra Modi launching the Digital India Week. See more…

June 30, 2015 By Monica Gupta

बच्चे और कार्टून चैनल

 cartoon photo

Photo by nalends

बच्चे और कार्टून चैनल

बहुत सारे बच्चे पार्क में खेलते हुए बतिया रहे थे कुछ स्कूल की तो कुछ होम वर्क की बाते कर रहे थे और एक बच्चों का समूह शायद थक हार कर बैठ गया था  और उनके बीच शुरु हो गया  कार्टून का वार्तालाप. सभी अपनी अपनी पसंद के कार्टून बता रहे थे. किसी को डेक्स्टर किसी को पावर पफ गर्ल तो किसी क शिन चैन पसंद है…

शिन चैन का नाम लेते ही मुझे  याद आया कि कुछ दिनों पहले जब शिन चैन देख अतो उसकी शब्दावली ऐसी थी कि अगर बच्चे बोले तो …. अच्छा नही लगेगा. वैसे  एक ये भी महसूस की कि अगर कोई मूवी डब हो हिंदी में या कार्टून हिंदी मे डब हो तो भाषा बहुत गंदी इस्तेमाल करते हैं जबकि आम बोल चाल मॆं ऐसा नही होता.

इसी की कुछ और बाते सर्च करने के लिए मैनें पर देखा.

आजकल कार्टून की दुनिया भी अपनी सोच और हास्य में बॉलीवुड फ़िल्मों की तरह हो गई है. फ़िल्मों पर ‘क़ैंची’ चलनी तो आम बात थी ही अब बच्चों के कार्टूनों पर भी क़ैंची लगने लगी है.

BBC

आजकल कार्टून की दुनिया भी अपनी सोच और हास्य में बॉलीवुड फ़िल्मों की तरह हो गई है. फ़िल्मों पर ‘क़ैंची’ चलनी तो आम बात थी ही अब बच्चों के कार्टूनों पर भी क़ैंची लगने लगी है.

जिन कार्टूनों को देखकर बच्चे हँसते हैं, ख़ुश होते हैं उन पर भी ‘कैंची’ चलने का दौर शुरू हो गया है.

भारत में पिछले एक दशक में ‘जापानी’ कार्टूनों ने अपना दबदबा बनाया है. जो बच्चे ‘टॉम एंड जेरी’ और ‘टेलस्पिन’ जैसे कार्टून देखा करते थे. वहीँ आज ‘डोरेमोन’, ‘शिनचैन’ जैसे कार्टून चरित्रों के दीवाने हैं.

बी.सी.सी.सी, यानि ‘ब्राडकास्टिंग कंटेंट कम्प्लेंट्स काउंसिल’ एक संस्था है. यहां टेलीविज़न पर दिखाए जा रहे कार्यक्रम के ‘आपत्तिजनक’ दृश्यों के विरोध में कोई भी शिकायत दर्ज करा सकता है.

हाल ही में बी.सी.सी.सी में बहुत से माता पिता ने शिकायतें दर्ज कीं. इन शिकायतों में कहा गया कि कार्टून चैनल ‘अनुचित’ दृश्य दिखा रहे हैं. बी.सी.सी.सी ने तुरंत इन कार्टून चैनलों को हिदायत दी की वे ऐसा कोई दृश्य न दिखाए जो बच्चों के लिए ठीक न हों.

अब कार्टून चैनल आपत्तिजनक दृश्यों को हटा कर उन्हें बिलकुल ही नए रूप में ढाल रहे हैं.

डबिंग इंडस्ट्री के निर्देशक या क्रिएटिव एक्सपर्ट ऐसे कार्टूनों पर अपनी पैनी नज़रें जमाए रखते हैं. उन्हें बदल कर वे ऐसे कार्टून तैयार करते हैं जिसके चाहने वाले देश भर के बच्चे होते हैं.

कार्टून किरदारों को डब करते वक़्त छोटी मोटी तब्दीलियाँ अक्सर हर विदेशी कार्टून और प्रोग्राम में करनी पड़ती है. क्योंकि उनके विचार स्थानीय दर्शकों के विचारों से मेल नहीं खाते.

पर कई बार कार्टून की तब्दीलियाँ काफ़ी अजीब और मज़ेदार होती हैं.

अलका शर्मा अरसे से शिनचैन की आवाज़ रही. ‘शिनचैन’ जापानी कार्टून है. वह एक पांच साल का बच्चा है और अपने माता पिता और बहन के साथ रहता है.

शिनचैन बेहद नटखट किरदार है और बच्चों में ख़ासा लोकप्रिय है.See more…

Cartoons

Cartoons

 

amitabh bachchan to play superhero cartoon in tv series: :

एक सूत्र ने कहा कि 72 साल के महानायक ने ‘एस्ट्रा फोर्स’ कार्टून के लिए एंटरटेनमेंट कंपनी ग्राफिक इंडिया और डिजनी से हाथ मिलाया है. इस सुपरहीरो की रचना अमिताभ और ग्राफिक इंडिया के सीईओ और सहसंस्थापक शरद देवराजन को करनी है. अमिताभ बच्चन के सुपरहीरो अवतार वाली इस काटूर्न सी‍रीज को डिजनी चैनल लॉन्च करेगा. यह कार्टून हंसी-मजाक, मारधाड़ , रोमांच और रहस्य से भरपूर बताया गया है.

अमिताभ छोटे पर्दे पर इससे पहले रियलिटी शो ‘कौन बनेगा करोड़पति’ के सूत्रधार के रूप में और धारावाहिक ‘युद्ध’ में मुख्य भूमिका में नजर आ चुके हैं. Read more…

कार्टून साफ सुथरी हों प्रेरक हों तो बहुत कुछ हम इनसे सीख सकते हैं जैसाकि बचपन में हम अमर चित्र कथा पढ कर सीखते थे. अगर सुधार नही होगा हर बच्चा बहुत शान से शीन चैन जैसे किरदार बोलता नजर आएगा और हमारी आखॆ शर्म से झुकती चली जाएगी …

वैसे आपके क्या विचार हैं इस बारे में …

June 25, 2015 By Monica Gupta

Subsidy

cartoon subcidy by monica gupta  Subsidy    बहुत सीधी साधारण सी बात पूछी जा रही है नेता जी से कि आपने कहा कि सक्षम लोग सब्सिडी न लें तो लाखों लोगों ने इसे नही लिया पर जो लोग सक्षम हैं उन्हें आरक्षण न लेने के लिए भी तो बोलना चाहिए … पर नही शायद नेता लोग अपना वोट बैंक बनाए रखने के लिए यह बात कभी नही बोलेंगें …

रही बात खुद की तो वो ढेरों सांसद सब्सिडी का भरपूर लाभ ले रहे हैं

Mutton cutlet for Rs 18 and Dosa for Rs 6: Government faces heat over subsidy on Parliament canteen food

At a time when the Narendra Modi government is taking steps to cut subsidies, there is a shocking response to an RTI query. It has been revealed that many of the food items served in Parliament canteen are sold at just one-tenth of the cost of raw-materials used in preparing them.

For instance, the cost for procuring raw items for a dish like vegetable stew comes to about Rs 41 while the MPs are getting it for just Rs 4, which is a subsidy of about 90%.

The canteens in Parliament got a total subsidy of Rs 60 crore during last five years, revealed the RTI plea.

Talking about the issue, Union Parliamentary Affairs Minister M Venkaiah Naidu said that he would discuss the issue and make attempts to reach a solution.

“I don’t deny it as a Minister. There’s the Lok Sabha and the Rajya Sabha, and everyone should be attentive about this,” he added.

Parrying queries over whether his government would discontinue with the subsidy, he said it has been going on for long and was not something decided by the BJP government.

The RTI activist, whose plea made the revelation, slammed the government over the issue, saying, “They tell others to give up on subsidies, but Parliament canteen gets heavy subsidy. The government should end this.”

In his RTI plea, the petitioner had sought answers to questions like “Has the Union government had taken cognizance of adverse media reports and public relations on providing food-items in canteens of Parliament at highly subsidised prices?”

Meanwhile, Aam Aadmi Party leader Alka Lamba said it was shocking that such subsidy was given in Parliament canteen, pointing that the food was already cheap for the members.

Congress, meanwhile, backed a re-look at the huge subsidy being given to the canteens, saying a “course correction” is needed on the matter. Party spokesperson Tom Vadakkan said, “If you look at the scale of subsidy being provided, I think there needs to be some course correction.” He, however, noted that subsidised canteens function in different ministries. See more…

June 24, 2015 By Monica Gupta

Smile please

cartoon smile by monica guptaSmile please… आज कल तनाव इतना ज्यादा बढ गया है कि स्माईल गायब ही हो गई है. पोस्टर छपने लगें हैं कि अगर किसी ने स्माईल को देखा है तो तुरंत सम्पर्क करें

और बच्चों का बचपन तो इतना तनाव ग्रस्त हो गया है कि उन्हें तो ये भी नही पता कि आखिर स्माईल होती क्या चीज है …

कोशिश यही रहनी चाहिए कि तनाव के बजाय हमेशा चेहरे पर स्माईल ही रहे… वैसे भी मुस्कुराता चेहरा बहुत खूबसूरत लगता है इसलिए स्माईल प्लीज Smile please

June 21, 2015 By Monica Gupta

Charlie Chaplin Lines

charlienamespic 1pic2cartoon Chaplin by monica gupta

Charlie Chaplin Lines

हर दिल अजीज चार्ली चेप्लिन के जन्म के 125 वे वर्ष पर उनके फ़िल्मी जीवन में व्यंग्य की कथा के साथ-साथ उनकी स्क्रीन पर उपस्थिति का 100 वां वर्ष मनाने के लिए ये साल यानि 2015 चार्ली चैपलिन वर्ष के रूप में मना रहा है. हास्य रेखाओं के रचनाकारों ने उन्हें श्रद्धांजलि देने के लिए कार्टून और हास्य चित्र बनाए हैं।इनमें से लगभग 200 कार्टून एक विशेष पुस्तक में शामिल किए गए हैं.चार्ली चैपलिन लाइन्स’ के रूप में सबसे पहले भारत में चार्ली चैपलिन वर्ष समारोह 25-27 जून , NCPA मुंबई में कार्टून/करिकेचर प्रदर्शनी आयोजित की जा रही है।

खुशी की बात ये भी हैं कि इसमे मेरे बनाए चार्ली चैपलिन भी शामिल हैं …. Charlie Chaplin Lines  🙂

 

vintage everyday: Rarely Seen Candid Photos of Charlie Chaplin While Filming on Venice Beach, California, ca. 1914

These rarely seen photographs may be from on-site at the shooting of 1914 silent film Kid Auto Races at Venice (also known as The Pest) on Venice Beach, California.

This is an Essanay Studios film starring Charlie Chaplin in which his “Little Tramp” character makes his first appearance in a film exhibited before the public. See more…

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