Monica Gupta

Writer, Author, Cartoonist, Social Worker, Blogger and a renowned YouTuber

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August 29, 2015 By Monica Gupta

कलाम को सलाम

cartoon kalam road by monica gupta

कलाम को सलाम

कलाम साहब का दिखाया मार्ग हो या उनकी याद में बनाया मार्ग … दोनों मार्गों पर चलना बेहद सुखद है !!!!जब सुना कि एपीजे अब्दुल कलाम साहब के एनडीएमसी एरिया के अंतर्गत आने वाली औरंगजेब रोड की पहचान अब पूर्व राष्ट्रपति स्व. डॉ. अब्दुल कलाम के नाम पर रखा दिया गया।

कलाम  साहब के निधन के बाद से ही दिल्ली की एक प्रमुख सड़क का नाम उनके नाम पर रखने की मांग उठती रही है।

एनडीएमसी ने ये फैसला कर लिया। औरंगजेब रोड का नाम बदल कर डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम रोड रखे जाने पर दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने खुशी जताई है। केजरीवाल ने ट्वीट कर एनडीएमसी को बधाई दी है। यह प्रस्ताव बीजेपी सांसद मीनाक्षी लेखी, महेश गिरि और आम आदमी पार्टी के ट्रेड विंग नेता विपन रोहिला की तरफ से लाया गया है। इस बारे में सांसद महेश गिरि पहले भी चिट्ठी लिख चुके हैं।

ndmc decided to rename aurangzeb road to apj abdul kalam road: :

Congrats. NDMC jst now decided to rename Aurangzeb Road to APJ Abdul Kalam Road

ndmc decided to rename aurangzeb road to apj abdul kalam road Keyword : Mahesh Giri, letter, PM, rename, Aurangzeb Road, APJ Abdul kalam Read more…

http://www.patrika.com/news/miscellenous-india/ndmc-decided-to-rename-aurangzeb-road-to-apj-abdul-kalam-road-1091671/

इससे पहले दिल्ली से बीजेपी सांसद महेश गिरी ने भी प्रधानमंत्री मोदी से दिल्ली के औरंगजेब रोड का नाम बदल कर पूर्व राष्ट्रपति कलाम के नाम पर रखने का अनुरोध किया था। इस संबंध में उन्होंने प्रधानमंत्री को एक चिट्ठी लिखी थी कि जनता के राष्ट्रपति के रूप में व्यापक रूप से सम्मानित कलाम की स्मृति के लिए यह एक उपयुक्त श्रद्धांजलि होगी।पूर्वी दिल्ली के सांसद ने पत्र में कहा है कि पूरा देश कलाम की मृत्यु से शोक में है। वह एक महान वैज्ञानिक और समाज सुधारक थे, जिन्होंने देश के लाखों लोगों को प्रभावित किया और अपना पूरा जीवन मातृभूमि के लिए समर्पित कर दिया। जनता के राष्ट्रपति को श्रद्धांजलि देने के लिए मैं नई दिल्ली में स्थित औरंगजेब रोड का नाम बदल कर डॉक्टर एपीजे अब्दुल कलाम रोड रखने का प्रस्ताव देता हूं।

कलाम को सलाम

August 8, 2015 By Monica Gupta

Flipcart baba

 

Flipcart baba

 

cartoon flipcart by monica gupta

घर बैठे बैठे हर चीज की सुविधा प्रदान कर रही है On line shopping… तरह तरह के विज्ञापनों से हमें लुभा रही हैं … इतना लुभा रही हैं कि अब तो भगवान जी भी कहने लगे हैं कि मुझ से नही फ्लिपकार्ट से मांग ..

Flipkart CLICK !

नई दिल्ली: हर इंसान की कई ख्वाहिशे होती है, लेकिन कई बार हर ख्वाहिश को पूरा कर पाना मुमकिन नहीं होता। अब आप खुद की ही बात करें, तो कई बार हमारे साथ ऐसा होता है, हम सोचते है कि हम अपने घर के लिए, अपने लिए या हमारे किसी अपने के लिए कुछ ऐसा खरीदें जो उनके और हमारे चेहरे पर मुस्कान ला दें, लेकिन हमारी मनचाही चीज हमें नहीं मिल पाती और हमें अपनी ख्वाहिश को मारकर किसी दूसरी चीज से ही गुजारा करना पड़ता है। पर अब ऐसा नहीं होगा, जी हां, अब आप जो भी सोचगे कि जो भी खरीदना चाहेंगे, आपको वो सब कुछ ‘फिल्पकार्ट’ पर मिलेगा। जी हां, ट्विटर पर भी ‘फिल्पकार्ट’ का सलोगन ‘अब हर विश होगी पूरी’ काफी ट्रेंड कर रहा है। इस ट्रेंड को यूज करके लोग कमेंट कर रहे है कि ‘फिल्पकार्ट’ पर आप जो भी खरीदना चाहे, सब कुछ मिलेगा। ‘फिल्पकार्ट’ आपकी हर विश पूरी करेगा, चाहे फिर आप कोई ड्रैस खरीदना चाहते, कोई गैजेट, क्रिकेट से जुड़ी कोई चीज या फिर कुछ भी और ये सब ‘फिल्पकार्ट’ पर ऑनलाईन खरीदारी करके आप आसानी से अपने घर ला सकते है। हालांकि, इस बात के बारे में कुछ नहीं कहा जा सकता कि चीज आपको वाकई में अच्छी ही मिले। लेकिन लोग इस हैशटैग के साथ काफी कमेंट कर रहे और कंपनी की जमकर तारीफ कर रहे, तो देर किस बात की आप भी कुछ खरीदकर देख ले, कि आपकी विश पूरी हुई की नहीं। See more…

August 5, 2015 By Monica Gupta

Traffic

Traffic

आज गूगल सर्च के दौरान जब गूगल का साईन देखा तो समझ नही आया कि ये क्या है … उसमे ट्रैफिक लाईट बनी हुई थी और ट्रैफिक भी था. पर भला हो नेट का बहुत जल्दी पता चल गया कि आज ट्रैफिक लाईट का 100वा जन्मदिन है …

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सडक के ट्रैफिक के साथ साथ सोशल साईटस पर हमारा भी ट्रैफिक बनाए रखिए … शुभकामनाएं !!! Best wishes !!!

August 4, 2015 By Monica Gupta

Cartoon – Justice

cartoon justice by monica gupta

Cartoon – Justice

जिस तरह से संसद नही चलने दी जा रही और हर रोज लाखों रुपयों का नुकसान हो रहा है ऐसे मे न्याय इन लोगो को नही न्याय मुझे चाहिए !!! I WANT JUSTICE !!!!

 

August 2, 2015 By Monica Gupta

नया साल और संकल्प

satire by monica gupta

satire by monica gupta

 

( व्यंग्य )

नया साल और संकल्प

 

उफ्फ …!!! आखिरकार नए साल मे मैने क्या संकल्प लेना है सोच ही लिया .अब आपसे क्या छिपाना …हर साल जब भी नवम्बर समाप्त होने लगता और दिसम्बर जी का आगमन होता. मन मे अजीब सी बैचेनी करवट लेने लगती कि नए साल मे नया क्या क्या करना है और क्या क्या नही करना है.बस इसी उधेड बुन मे पूरा समय निकल जाता पर भगवान का लाख लाख शुक्र है कि इस साल यह नौबत ही नही आई और समय से पहले ही डिसाईड हो गया.

पता है, पिछ्ले साल मैने यह सोचा था कि सच बोलना शुरु कर दूगी. अरे नही.. नही … आप गलत समझ गए.असल मै, वैसे मै, झूठ नही बोलती पर ना जाने क्यू टीवी पर सच का सामना देख कर डर सी गई थी इसलिए बोल्ड होकर यह निर्णय लिया कि यह आईडिया ड्राप.फिर सोचा था कि कुछ भी हो जाए पतली हो कर दिखाऊगी पर पर पर .. सर्दियो के महीने मे ऐसा विचार मन मे लाना जरा मुश्किल हो जाता है.सरदी की गुनगुनी धूप हो,रजाई हो और गर्मा गर्म पराठे हो और उस तैरता और पिधलता मखन्न.मन भी पिधलना शुरु हो जाता अब ऐसे मे भला खाने पर कैसे ब्रेक लग सकती है.चलो इसे भी सिरे से नकार कर यह सोचा कि सुबह शाम की सैर ही शुरु कर दी जाए. इस पर तुरत अमल करना भी शुरु कर दिया था पर दो ही दिन मे यह मिशन फेल होता सा प्रतीत हुआ. असल मे , ऊबड खाबड सडके, सडको पर मस्ती मे धूमते आवारा बैल,और गंदगी के ढेर के साथ साथ सीवर के ढक्कन गायब.अब बताईए ऐसे मे हाथ पैर तुडवाने से अच्छा है कि कुछ और सोचा जाए.

वैसे सोचा तो मैने यह भी था कि नए साल मे किसी पर गुस्सा नही करुगी.चेहरे पर स्माईल रखूगीं. पिछ्ले साल 31 की रात सबसे यही कह कर सोई कि सभी 1 जनवरी को सुबह सुबह मंदिर चलेगे .मै तो सुबह सुबह तैयार हो गई पर कोई सुबह उठने को तैयार ही नही था. मुस्कुराते मुस्कुराते उठाती रही पर रात को देर से सोने के चक्कर मे सभी गहरी नींद मे थे. इतने मे काम वाली बाई आ गई. उसे पता नही क्या हुआ. बर्तनो को जोर जोर से शोर करते हुए धोने लगी .एक तो देर से आई ऊपर से मुहं बना रखा था इसने. मैने खुद को संयत किया कि मोनिका स्माईल … कंट्रोल कर… कहती हुई ताजा हवा लेने के लिए खिडकी पर जा खडी हुई कि अचानक मेरी नजर पडोसियो की नई चमचमाती कार पर पडी शायद कल ही के लर आए थे.बस आगे आपको बताने की जरुर नही कि ….. !!!!

इस साल भी यही विचार चल रहा था कि नए साल मे क्या संकल्प लिया जाए कि पूरा भी किया जा सके. घर के एक बडे बुजुर्ग ने सुझाया कि हम लोगो को तीर्थ यात्रा करवा दिया करो हर चार महीने मे एक बार. पुण्य मिलेगा.बात जमी नही और मै बच्चो के कमरे मे गई तो बच्चे कहते कि छोडो मम्मी… हर महीने हमे पिक्चर और पिकनिक पर ले जाया करो.काम वाली बाई भी कहा पीछे रहने वाली थी बोली कि मेरी पगार बढा दो और छुट्टी भी बढा दो. बाहर निकली तो ये बोले कि तुम फुलके पतले नही बनाती जरा श्रीमति ऋतु से सीख लो इतने पतले,मुलायम और गोल गोल चपाती बनाती है और कृष्णामूति से डोसा बनाना भी सीख लो … खश्बू से ही मुहं मे पानी आ जाता है.वो बात कर ही रहे थे कि इतने मे मेरी सहेली मणि का फोन आ गया उसने राय दी कि दो चार किट्टी पार्टी ज्वायन कर ले. थोडी सी चालाक बन बहुत भोली है तू.!!! अगले साल ही तुझे सोसाईटी की सैकट्ररी ना बनवा दिया तो मेरा नाम मणि नही!! मैने कोई बहाना कर के तुरंत फोन रख दिया.उफ्फ !!!किस की सुनू किस की ना सुनूं… देखा कितना टेंशन था.

 

अब आपको भी टेंशन हो रही होगी कि आखिर इस साल मैने क्या सकंल्प लिया है. तो सुनिए … पिछ्ले दो तीन सालो के अनुभव को देखते हुए… बहुत सोच विचार के मै इस नतीजे पर पहुंची हूँ कि चाहे कुछ भी जाए बस बहुत हुआ. अब और नही इसलिए इस साल … इस साल … इस साल … नए साल के लिए कोई सकंल्प ही नही लूगी.इसलिए मै खुश हू और बहुत ही खुश हूं ..

कैसा लगा आपको ये व्यंग्य     नया साल और संकल्प   जरुर बताईगा 🙂

दैनिक भास्कर की मधुरिमा मे प्रकाशित

August 2, 2015 By Monica Gupta

उफ ये मुस्कुराहट

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(व्यंग्य)

                                           उफ ये मुस्कुराहट        

इस तनाव भरे माहौल मे अगर कोई कहे कि मुस्कुराओ तो बहुत ही अजीब सा लगता है वैसे ऐसा मेरा मानना है पर पिछ्ले दो चार दिन से कुछ ऐसा हुआ कि मुझे अपने विचार बदलने पडे और मै भी हंसने मुस्कुराने के मैदान मे कूद पडी. वैसे आपको एक सच बात बताऊ कि हँसने खिलखिलाने का शौक तो मुझे बचपन से ही था पर बडे होते होते कुछ ऐसा होता चला गया कि हँसी भी कही दब कर रह गई. दो दिन पहले मेरी सहेली मणि आई उसने बताया कि मुस्कुराहट तो अनमोल गहना है इसे हमेशा धारण करना  चाहिए. वही बाजार मे खरीददारी करते एक अन्य दोस्त ने बताया कि जब 2 सैंकिंड की मुस्कान से फोटो अच्छी आ सकती है तो मुस्कुराने से जिंदगी भी तो अच्छी हो सकती है कि नही. पता नही क्यो पर मुझे बात जम गई. और बस सोच लिया कि अब जो हो सो हो. हमेशा हसंना और मुस्कुराना ही है और अपनी अलग पहचान बनानी है.

अगली सुबह मे बहुत अच्छे मूड मे सो कर उठी और सैर को निकल पडी. एक दम शांत माहौल मे मैने एक पेड चुना और वहाँ हाथ ऊपर करके ठहाका लगा कर जोर जोर से हंसने लगी. इतना ही नही बीच बीच मे ताली भी बजा रही थी इस बात से बिलकुल बेखबर कि सामने ही एक मोटी लडकी व्यायाम करने के लिए रस्सी कूद रही थी और वो गिर गई थी. पता तब चला जब शायद उसकी मम्मी आग्नेय नेत्रो से मुझे धूरने लगी और उसके पास खडा आज्ञाकारी कुत्ता भी मुझ पर बेहिसाब भौकने लगा. इससे पहले मै अपनी सफाई मे कुछ कहती उनकी लडकी और जोर जोर से रोने लगी और मैने चुपचाप खिसकने मे ही भलाई समझी. उफ!! मैने ठंडी सासं ली और धडकते दिल के साथ  घर लौट आई.

घ्रर लौटी तो हमारी पडोसन मिक्सी मांगने आई हुई थी. पर पता नही क्यो आज उसे देखकर मुझे हसीं आ गई. असल मे, वो क्या है ना कि वो डकारे बहुत लेती है. पहले तो मै कुछ नही कहती थी पर जब से हंसना अनमोल गहना है और जिंदगी हंसने से बेहतर बनती है तो सोचा कि आज हंस ही लूं इतने  दिनो बाद खिलखिलाकर हँसी तो शायद उसे बुरा लगा. उसने हसंने का कारण पूछा  तो मैने भी हंसते हुए बता दिया कि उसकी डकार सुनकर मुझे बहुत हंसी आती है. इस पर वो बहुत नाराज हुई और बाहर चली गई. मै एकदम चुप हो गई. इतने मे वो फिर आई और गुस्से मे वहाँ रखी मिक्सी ले गई.मै चुपचाप उसे देखती रह गई.उफ ये मुस्कुराहट!!!

अगले दिन किसी कवि सम्मेलन मे जाना था. वहां एक महोदय बहुत देर से कविता पे कविता सुनाए चले जा रहे थे. मेरे साथ बैठी महिला मुहं पर रुमाल रख कर धीरे धीरे  हसें जा रही थी. मैनें इधर उधर नजरे घुमा कर देखा तो कोई उबासी ले रहा था तो कोई सिर खुजला रहा था तो कोई मोबाईल पर मैसेज भेजने मे जुटा था यानि कुल मिलाकर माहौल मे सन्नाटा था. मैने कनखियो से एक दो बार उस महिला को  देखा तो  भीतर ही भीतर वो इतनी हंस रही थी इतनी हंस रही थी कि उसके आंसू निकल रहे थे.बस फिर क्या था. बोर तो मै भी हो रही थी पर उसे देख कर हंसने वाली बात याद आ गई और उसे देख कर मै जोर से खिलखिला कर हंस पडी. उसके बाद आपको ज्यादा बताने की जरुरत नही क्योकि आप सभी बहुत समझदार है. मुझे बाहर का रास्ता दिखा दिया गया और मै चुपचाप बाहर आ गई.उफ!! बहुत महंगी पडी ये मुस्कुराहट.

समझ नही आ रहा था कि आखिर गलती हो कहाँ रही है.खैर रुआसी होकर घर लौट आई. शाम को बेटा हंसता मुस्कुराता घर आया और उसने मुझे उसका नया पासपोर्ट दिखाया. मै खुशी खुशी देखने लगी पर पासपोर्ट की फोटू मे उसकी मुस्कान ही गायब थी. मेरे पूछ्ने पर उसने बताया कि आजकल पासपोर्ट पर फोटो खिचवाते समय  चेहरे पर कोई भाव नही आना चाहिए…!! यही नियम है.

मुझे लगा कि मेरे लिए भी यही ठीक होगा और फिर मैनें अपने को पहले की तरह बनाने मे ही भलाई समझी और चुपचाप बिना मुस्कुराए काम मे जुट गई….

कैसा लगा ??? जरुर बताईगा??

ये व्यंग्य दैनिक भास्कर की मधुरिमा पत्रिका में प्रकाशित हुआ था.

 

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