Monica Gupta

Writer, Author, Cartoonist, Social Worker, Blogger and a renowned YouTuber

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April 2, 2017 By Monica Gupta Leave a Comment

सही और गलत क्या है – पेरेंटिंग टिप्स इन हिंदी

Importance of Mothers in Life

सही और गलत क्या है – पेरेंटिंग टिप्स इन हिंदी – sahi aur galat जहां हम हमेशा झूठ को लेकर परेशान  रहते हैं और हमेशा कहते हैं कि बच्चा झूठ बोलता है सच बोलना चाहिए पर… कल एक जानकार मिली वो अपने बच्चे के सच बोलने की आदत से परेशान है … उसके हिसाब से उनका बेटा बहुत बिगड गया है जिद्दी हो गया है उसे कैसे सबक सिखाऊं .. सही और गलत क्या है , सच और झूठ में अंतर , झूठ बोलना पाप , गलत सही में फर्क ,

सही और गलत क्या है – पेरेंटिंग टिप्स इन हिंदी

जब मैने पूछा कि हुआ क्या तो पूछ्ने पर बोली अरे एक हो तो बताऊ बहुत सारी बातें हैं फिर उसने कुछ एग्जामपल दिए … बोली कि दो दिन पहले  मार्किट में सब्जी खरीद रहे थे और वो मोल भाव कर रही थी जहां से फल लिए उन्होने बोल दिया कि भैया सही सही लगाओ सामने वाला तो तुमसे 10 रुपये कम दे रहा है इस पर साथ आया बेटा बोल पडा मम्मी कहा … वो भी तो इतनी ही दे रहा है … !!

अब बताईए कैसे सिखाऊ इसे कि ये ही तरीका होता है … एक दिन पडोसी ने कही जाना था और चाबी हमे देने लगे तो मैने कहा कि हम घर पर नही होंगें तो बेटा बीच में ही बोल पडा … नही तो कहां जा रहे हैं हम … तो उस समय तो बात को सम्भाल लिया पर इतना सच्चा होना भी सही नही है ना …

अब  एक बार घर पर गेस्ट आ गए फिर हम पार्टी में चले गए और मैं उसे learn  नही करवा पाई अगले दिन इसका टेस्ट था तो मैने डायरी में लिख दिया कि  बहुत तबियत खराब हो गई थी होस्पिटल जाना पडा पर बेटे ने स्कूल जा कर सारा सच उगल दिया कि लर्न किसलिए नही किया था … अब इसे कैसे सुधारु … मेरे विचार से अब सुधरना बच्चे को नही बल्कि खुद को पडेगा … ट्रांसपरेंसी रखनी ज़रूरी है। आप समझाईए कि आप झूठ किसलिए बोल रही हैं बच्चे को कनविंस कीजिए …   आज  बच्चे बहुत स्मार्ट है पर अब स्मार्ट पेरेंटस को बनना है और स्मार्टली हैंडल करना पडेगा … बच्चे का पहला स्कूल तो घर ही होता है।

जरुर सोचिएगा …

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सही और गलत क्या है – पेरेंटिंग टिप्स इन हिंदी

April 1, 2017 By Monica Gupta Leave a Comment

छोटी छोटी मगर मोटी बाते

मटके का पानी छी होता है क्या

छोटी छोटी मगर मोटी बाते – chhoti chhoti magar moti baatein  बडे बडे शहरों में छोटी छोटी बाते होती रहती हैं .बेशक हमें ये डायलॉग बहुत अच्छा लगता है और हम इसका इस्तेमाल भी बात बात पर करते रहते हैं पर इस बात में भी कोई शक नही कि छोटी छोटी बाते कई बार इतना असर डालती हैं कि हमारी सोच का नजरिया ही बदल जाता है

छोटी छोटी मगर मोटी बाते

एक प्रसंग मैने पढा आपने भी जरुर पढा और सुना होगा कि घर पर कूडा वाला आता है तो बच्चा मम्मी को आवाज लगाता है कि मम्मी कूडे वाला आया है तब मम्मी समझाती है कि नही बेटा कूडे वाला नही ये सफाई कर्मचारी है … कूडे वाले तो हम हैं जो हम इसे कूडा देते हैं  वाकई बहुत सही लगी थी ये बात और

आज ऐसा ही एक छोटा सा मैसेज पढा  … सूर्यास्त के समय एक बार सूर्य ने सबसे पूछा, मेरी अनुपस्थिति मे मेरी जगह कौन कार्य करेगा?

समस्त विश्व मे सन्नाटा छा गया।

किसी के पास कोई उत्तर नहीं था।

तभी  कोने से एक आवाज आई–  दीपक ने कहा “मै हूं  ना”

मै अपना पूरा  प्रयास  करुंगा । आपकी सोच  में  दम होनी चाहिए , चमक होनी चाहिए।छोटा -बड़ा होने से फर्क  नहीं पड़ता,सोच  बड़ी  होनी चाहिए।

और वैसे भी … इंसान तब समझदार नही होता जब बडी बडी बाते करने लगता है बल्कि समझदार तब होता है जब छोटी छोटी बाते समझने लगता है … तो कल फिर मिलूगी तब तक इस बारे में जरुर सोचिएगा …

 

एक छोटी सी चींटी हमारे पैर में काट सकती हैं……….

….लेकिन……

हम उसके पैर में नहीं काट सकते………

छोटी सी बात , छोटी छोटी मगर मोटी बाते , कुछ ज्ञान की बाते , छोटी छोटी बातें , जिंदगी के सफर में ,

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March 31, 2017 By Monica Gupta Leave a Comment

पशु प्रेम पर बच्चों की कहानी – गाय के बारे में शिक्षाप्रद कहानी

 Art of Public Speaking in Hindi

पशु प्रेम पर बच्चों की कहानी  – गाय के बारे में शिक्षाप्रद कहानी – Moral Stories For Kids In Hindi – पशु पक्षियों का महत्व हमारी जिंदगी में बहुत है. पशु और पक्षी हमारे मित्र समान ही हैं. पशु पक्षियों के प्रति हमारा व्यवहार बहुत अच्छा होना चाहिए.

पशु प्रेम पर बच्चों की कहानी – गाय के बारे में शिक्षाप्रद कहानी

थोडी देर पहले कुछ बच्चों की बाहर से आवाजें आ रही थी … मैं  देखने के लिए बाहर आई तो देखा कि पांच सात बच्चे एक गाय को तंग कर रहे हैं एक बच्चा जोर जोर से  पूंछ खींच रहा था बाकि सब जोर जोर से हंस रहे थे …

मैं बोल पडी अरे क्या कर रहे हो … और बच्चे आवाज सुन कर भाग गए … और दूसरी तरफ गाय चुपचाप चली गई …

जब गाय जा रही थी तो मुझे याद आई मेरी एक कहानी जो मैने बहुत समय पहले लिखी थी … चलिए आज मैं आपको वही कहानी सुनाती हूं

कहानी का नाम है गाय को रोटी …

 

‘‘गाय को रोटी’’  मैं हूं मणि। अभी अभी चौथी कक्षा में हुई हूं। आप सोच रहे होंगे कि मेरे तीसरी कक्षा में कितने नम्बर आए। असल में हमें नम्बर नहीं ग्रेड मिलता है। मुझे ‘‘ए’’ग्रेड मिला था। नई-नई कॉपी, किताबें, नया स्कूल बैग बड़ा अच्छा लग रहा था। कुछ दिनों बाद छुट्टियां शुरू हो गई। मम्मी ने बताया कि वो दादा जी की बहन यानि पापा के बुआ जी गांव जाएंगे। मैं गांव कभी नहीं गई थी। पर गांव के लोग कैसे होते हैं, मुझे अच्छी तरह से पता है।

 

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गांव के भोले भाले बच्चों पर मैं खूब धाक जमाऊंगी। अगले दिन सुबह-सुबह ही हमने गांव जाना था। मैंने तीन चार सुंदर-सुंदर ड्रैस, उसी से मेल खाते रंग-बिरंगे चश्मे, सैडि़ल और छतरी भी अटैची में रख लिए। शाम होते-होते हम गांव पहुंच गए। गांव का वातावरण शहर से एकदम अलग था।

खुल्ले-खुल्ले घर, घरों में हैंडपंप, चौड़े-चौड़े रास्ते….सब बहुत अच्छा लग रहा था। घर के बाहर कितना भी,कैसे भी खेलो, किसी गाड़ी या स्कूटर का डर नहीं। घर में तो मैं छोटी सी जगह में ही बैडमिंटन खेलती हूं पर यहां तो जगह ही जगह थी।

पापा की बुआ यानि दादी जी के गांव में मेरे बहुत सारे दोस्त बन गए। बबीता, मोहन, कर्ण, सुनीता और रेखा से तो मेरी जल्दी ही अच्छी दोस्ती हो गई थी।

पहले पहल तो वो सब मेरे चश्मे और छतरी से दूर भागते रहे, पर दोस्ती हो जाने के बाद उनका डर दूर भाग गया। मैंने अपनी सब चीजें उनको इस्तेमाल करने के लिए भी दीं। वो सब बहुत ही शरीफ बच्चे थे लेकिन मैंने दो ही दिन में उनको शरारती बना दिया।

दादी जी पशुओं और पक्षियों को बेहद प्यार करती थीं। पक्षियों को दाना डालना और गाय को गुड और रोटी देना कभी नहीं भूलती थी।

हर सुबह और शाम, दिन छिपने से पहले एक गाय हमेशा आती थी। एक दिन उस गाय को रोटी खिलाते-खिलाते दादी जी ने बताया कि चाहे कुछ भी हो जाए, यह गाय यहां गुड़ और रोटी खाने जरूर आती है।

दादी जी की बात गलत साबित करने के लिए मैंने एक दिन एक तरकीब बनाई। मोहन कुछ पटाखे ले आया और शाम को गाय जब रोटी खाने आई तो मैंने चुपचाप उसकी पूंछ पर पटाखे बांध दिए। दादी जी गाय को रोटी देकर अंदर चली गई।

माचिस मुझे जलानी नहीं आती थी तो मोहन ने ही मेरी मदद की। आग लगते ही पटाखे फटफट करके जलने लगे। धागा ठीक से नही बांधा था इसलिए पटाखे जमीन पर ही गिर गए पर शायद एक पटाखा गाय को लग गया था और वो घबरा कर भाग गई पर इसकी सजा हमें बहुत बड़ी मिली। मोहन को तो उसी समय उसकी बहन ले गई और मुझे कमरे में बंद कर दिया गया

अगले दिन मौसम बहुत अच्छा था और मेरा मन कहीं बाहर जाने को कर रहा था। दादी जी सो रही थी। मम्मी पापा भी पास वाले गांव में किसी से मिलने के लिए गए हुए थे। मुझे बबीता ने अपने घर का पता बताया था और आने के लिए भी काफी बार कहा था।

वो कह रही थी कि उसके घर के पास बहुत सारे खेत हैं। वहां खेलने में बहुत मजा आएगा। मैंने सोचा कि चुपचाप निकल जाती हूं और दादी जी के उठने से पहले ही वापिस आ जाऊंगी। मैं बबीता के बताए रास्ते पर दौड़ पड़ी। दिन का समय था इसलिए मुझे डर भी नहीं लग रहा था पर अचानक देखते ही देखते आसमान में बादल इतने ज्यादा हो गए कि अंधेरा सा हो गया।

बरसात भी शुरू हो गई। दूर-दूर तक कोई नजर नहीं आ रहा था। मैं तो डर के मारे रोने लगी। जल्दबाजी की वजह से किस रास्ते से आई थी यह भी याद नहीं रहा। उधर जमीन पर बहुत पानी जमा हो गया था और पता ही नहीं चल रहा था कि कहां सड़क है और कहां नहीं।

दो तीन बार तो मैं बहुत बुरी तरह से गिरी। अंधेरा बढ़ता ही जा रहा था। मुझे अपने ऊपर गुस्सा आ रहा था…हुंह, बड़ा समझती है अपने आपको।

अब जान निकल रही है। किसी को बता कर आती तो शायद कोई खोजता हुआ आ भी जाता। अब बैठ यहां और रो जोर से…और मैं जोर-जोर से रोने लगी। धीरे-धीरे बरसात कुछ कम हो गई थी। मैं एक पेड़ से चिपक कर बैठी हुई थी।

तभी मुझे किसी के चलने की आवाज आई। मैं बहुत बुरी तरह से डर गई। आवाज धीरे-धीरे पास आ रही थी। मैं आंखें बंद कर ली। फिर आवाज आनी बंद हो गई।

मैंने आहिस्ता से अपनी आंखें खोली तो देखा कि जो गाय रोज दादी जी के घर रोटी खाने आती थी, वही गाय मेरे पास खड़ी पूंछ हिला रही थी। वही पूंछ जिस पर मैंने पटाखे बांधे थे।

उसकी पूंछ पर अब भी जलने के निशान थे। अनायास ही मैं उससे लिपट गई। अब मेरा डर कुछ कम हो गया था। फिर उसने धीरे-धीरे चलना शुरू कर दिया। मैं भी चुपचाप उसके ऊपर हाथ रखकर चलती रही। कुछ ही देर में हम खेत वाले रास्ते से निकलकर घर वाले रास्ते पर पहुंच चुके थे।

अब मुझे रास्ता भी याद आ गया था। लेकिन मैं फिर भी गाय के साथ-साथ ही चलती रही। कुछ ही देर में हम घर पहुंच गए। घर के बाहर बहुत लोग खड़े थे।

दादी जी ने काफी लोगों को इकट्ठा कर रखा था। मेरे लिए सब परेशान हो रहे थे। मुझे देखते ही दादी जी की जान में जान आई। आंखों में आंसू लिए उन्होंने मुझे गले से लगा लिया।

मैं भी उनसे गले लग कर रोने लगी। फिर मैंने गाय की पीठ पर प्यार से हाथ फेरते हुए उन्हें सारी बात बताई कि किस तरह आज इस गाय की वजह से ही मैं घर वापिस लौट पाई हूं।

काले बादल अब धीरे-धीरे छंट गए थे। ठीक उसी तरह मेरे मन से भी अहंकार के बादल छंट गए थे। मैंने दादी जी से कहकर पशुओं के डाक्टर को बुलवाया और गाय के जख्मों पर दवाई लगवाई।

उस दिन के बाद से मैं भी दादी जी के साथ उस गाय को गुड़ और रोटी खिलाने लगी। मुझे यह सब बहुत अच्छा लगने लगा। शहर लौटते वक्त मैंने दादी जी से वायदा किया कि आगे से मैं कभी भी किसी भी पशु या पक्षी को तंग नहीं करूंगी, बल्कि उनकी ही तरह से सभी को प्यार करूंगी।

 

पशु और पक्षी का हमारे जीवन में महत्व – पशु पक्षी हमारे मित्र है – YouTube

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पशु प्रेम पर बच्चों की कहानी

March 30, 2017 By Monica Gupta Leave a Comment

कपिल शर्मा कॉमेडी शो की गुत्थी

कपिल शर्मा कॉमेडी शो की गुत्थी

कपिल शर्मा कॉमेडी शो की गुत्थी  – Kapil Sharma Comedy Show ki Guthi  – कपिल शर्मा के शो में अब  कॉमेडियन जॉनी लीवर की बेटी जैमी लीवर नजर आने वाली हैं. राजू श्रीवास्तव भी दिखाई देंगें. बेशक,  ये सभी लोग अपने अपने क्षेत्र में प्रतिभावान भी है … पर जो शो बना हुआ था वैसा तो शायद न बन पाएगा …

कपिल शर्मा कॉमेडी शो की गुत्थी

कई बार लगता है कि कपिल और सुनील ग्रोवर की फिर से दोस्ती हो जानी चाहिए पर कई बार लगता है कि नही … सही किया सुनील ग्रोवर ने … !!! मेरे विचार से सुनील ग्रोवर ने सही किया और कपिल को महसूस realize भी करवा दिया अब अपना बडप्पन दिखाना चाहिए और उन्हें माफ कर देना चाहिए भले ही शो करो या  न करो …

कपिल शर्मा से लड़ाई के बाद नर्वस हैं सुनील ग्रोवर – BBC हिंदी

कपिल शर्मा से हुई लड़ाई के बाद सुनील ग्रोवर ने ट्वीट किया

  • आप सभी के प्यार के लिए शुक्रिया. आपके प्यार के बिना मैं कुछ भी नहीं हूं. मेरी पहचान सिर्फ आप लोगों के प्यार की वजह से ही है. मैं इसे गले लगाता हूं. आपके इस प्यार से मेरा दिल भर जाता है, जहां फिर नफरत के लिए कोई जगह नहीं बचती.मैं बस ख़ुद को अच्छे काम और अच्छे लोगों को समर्पित करना चाहता हूं, जो ये जानते हैं कि मेरी नीयत क्या है. हां इस वक्त मैं थोड़ा नर्वस और खोया-खोया सा हूं. नहीं जानता कि भविष्य में मेरे साथ क्या होगा पर शुक्र है कि मेरा बेटा मोहन मेरी बगल में लेटा है. जब मैं मोहन के मासूम चेहरे की तरफ देखता हूं मैं खुद को किस्मत वाला महसूस करता हूं कि मेरे पास मुस्कुराने की वजह है. मैं इस बात से आश्वस्त हो जाता हूं कि चाहे कुछ भी हो, आने वाला कल खूबसूरत होगा. नया और खूबसूरत.

हाल में विमान पर कपिल शर्मा की अपने शो के अन्य कलाकारों से लड़ाई के बाद सुनील ग्रोवर ने क्या कहा. See more…

 

खुश रहने के टिप्स इन हिंदी- डिजिटल डिटॉक्स प्लान – Monica Gupta

खुश रहने के टिप्स इन हिंदी- डिजिटल डिटॉक्स प्लान – शरीर का ख्याल कैसे रखे . खुश रहने के लिए क्या करें. डिटॉक्स detox diet प्लान करते होंगें ‘वर्चुअल वर्ल्ड’ read more at monicagupta.info

 

जो भी है लडाई लम्बी चलनी सही नही … आपस में सुलह कर लेनी चाहिए भले ही रास्ते अलग अलग क्यो न हो … क्योकि मीडिया हो या सोशल नेटवर्किंग साईटस भडकाने वाले ज्यादा होते हैं और सलाह देने वाले बहुत कम … इसलिए सोच समझ कर ही कदम उठाईए तो बेहतर होगा …

वैसे आपके क्या विचार हैं ?? टविटर और फेसबुक की दुनिया से हट कर सच्चे मन से सोच कर बताईएगा …

तस्वीर गूगल से साभार

March 30, 2017 By Monica Gupta Leave a Comment

विद्यार्थी जीवन में माता पिता का सहयोग

मटके का पानी छी होता है क्या

विद्यार्थी जीवन में माता पिता का सहयोग –  माता पिता की भूमिका  बच्चों का करियर बनाने में महत्वपूर्ण है .परीक्षा के कठिन दिन होते हैं
माता पिता की भूमिका और बच्चों का करियर क्या हो अपने इच्छा या  विचार नही लादें तो बेहतर हो …
बच्चों का क्या भविष्य हो, बच्चा क्या बनें , माता पिता क्या सोचते हैं बच्चों के करियर के बारे में ..

विद्यार्थी जीवन में माता पिता का सहयोग

बेशक,  छोटे बच्चो के एग्जाम खत्म हो गए पर पेरेंटस की चिंता अभी भी बरकरार  है कल मेरी एक जानकार मिली बोली वो दिल्ली शिफ्ट हो रहे हैं ताकि बच्चे की पढाई अच्छी हो कोचिंग …… वो अभी दूसरी क्लास में है …

वैसे इन दिनों अखबार भी विज्ञापन से भरे हुए है और  और विज्ञापन हैं कोचिंग सैंटर्स के  और उन बच्चों के  जिन्होने मैडिकल या नॉन मैडिकल में रैंक ली हैं …

बडे बच्चों को तो है ही पर छोटी क्लास मे पढने वाले बच्चों के पेरेंटस को चिंता है कि बच्चा क्या सब्जेक्ट ले … किस फील्ड में जाए … ….. दो दिन पहले मैं भी नेट पर ऐसा ही कुछ सर्च कर रही थी कि एक टोपिक इसी से रिलेटिड था

बडा अच्छा लगा और सोचा कि इसे आप से जरुर शेयर करुं मैनें पढा कि एक मातापिता जानना चाह रहे थे कि उनका बेटा 5 में है उसके लिए आईआईटी के लिए कौन सा कोचिंग सेंटर सही रहेगा … अब बताईए … 5 क्लास से ही आप बच्चे को लेकर इतने गम्भीर हो जाएगें तो उसका बचपन तो गया…

वैसे बात यही नही रुकी थी लोगो ने अपनी प्रतिक्रियाए भी दी थी इस विषय पर … एक ने तो कहा था कि लेकिन आपका बच्चा थोड़ा लेट हो गया है. आईआईटी की तैयारी तो 5वीं क्लास के पहले से ही शुरू हो जाती है. यही नहीं यह तो बच्चे के पैदा होने से पहले ही शुरू हो जाती है.

दूसरे लिखा कि एक ने लिखा- मेरे पास इससे बेहतर आइडिया है. जब आपकी पत्नी दोबारा गर्भवती हों तो उन्हें सारी अच्छी किताबे पढा देना एचसी वर्मा ,डीसी पांडेय की किताबों से सवाल हल करने के लिए कहें क्योंकि आप जानते ही होंगे कि अभिमन्यु ने गर्भ में ही चक्रव्यूह के बारे में जान लिया था. इससे आपका बेटा कम से कम समय में आईआईटी की तैयारी कर लेगा.

ये बात बताने का मेरा बस एक ही मतलब है कि बच्चे को जीने दीजिए उन पर अपनी इच्छाओं का बोझ मत लादिए … उन्हें स्प्पेस दीजिए …

एक सर्वे रिपोर्ट में ये भी लिखा था कि 51 % इंडियन पेरेंटस बच्चे का सफल करियर चाह्ते हैं … पर हैरानी ये है कि बच्चों की खुशी और हैल्थ को प्राथमिकता नही थी बस करियर को प्राथमिकता है  वैसे आप तो ऐसे नही है ना …जरुर सोचिएगा …
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vidyarthi jeewan mai mata pita ka sehyog

March 29, 2017 By Monica Gupta Leave a Comment

संतोष सबसे बड़ा धन है

यम से बचना है तो नियम अपनाए

संतोष सबसे बड़ा धन है –  Santosh sabse bada dhan hai –  संतोष धन सर्वोपरि , जब आवे संतोष धन , सब धन धूरि समान , पता हम सभी को है पर मानते कितने लोग हैं कि हमें संतोष से रहना चाहिए … गौ धन गज धन बाज धन और रतन धन खान।जब आवे संतोष धन सब धन धूरि समान ।। जितना है उसी में खुश रहिए और ईश्वर का शुक्र मानिए

संतोष सबसे बड़ा धन है

कल जब मैं मार्किट में नारियल ले रही थी  दुकानदार को मैं जानती थी मैने इनसे पूछा कि कैसे हो भईया … वो बोले शुक्र् है भगवन का … सुनकर बहुत अच्छा लगा

तभी वहां एक बडी सी कार आकर रुकी और उसमे से एक महिला उतरी मैने देखा मेरी जानकार थी  वो भी नारियल खरीदने लगी …

मैने उसे हैलो किया और पूछा कि कि कैसी हो तो वो बोली क्या बस कट रही है …

मैं नारियल ले कर लौट रही थी और सोच रही थी कि एक तरफ  नारियल वाला कितना संतुष्ट था … दूसरी तरफ वो जानकार जो इतनी बडी कार से आई और फिर भी बोली बस कट रह्ही है इस पर मुझे एक कहानी याद आई जो मैने नेट पर पढी थी

Shikshaprad Kahani – 

एक छोटे से गाँव में महात्मा  गए. सभी गांव वाले इकट्ठे हो गए और उन्होंने महंत के समक्ष अपनी फरियादें रखीं, ‘हमें हमारी परेशानियों से छुटकारा पाने में कृपया मदद कीजिए… हमारा जीवन खुशियों से तब भरेगा जब हमारी इच्छाएँ पूरी होंगीं.

महात्मा ने चुपचाप सबकी बातें सुनीं. अगले दिन उन्होंने घोषणा की- ‘इस गाँव में कल दोपहर एक चमत्कार होगा . सभी गाँव वासी अपनी सारी समस्याएँ एक काल्पनिक बोरी में बाँध लें और उसे नदी के उस पार ले जाकर छोड़ दें.

 

संतोष सबसे बड़ा धन है

फिर, उसी काल्पनिक बोरी में वह सब डाल लें जो आपको चाहिए….सोना, आभूषण, अन्न…और उसे अपने घर ले आयें. ऐसा करने से आपकी समस्त इच्छाएँ पूरी हो जायेंगीं.’ ये मौका एक ही बार मिलेगा …

गाँववाले हैरान !! हक्के-बक्के थे परन्तु…..उन्होंने सोचा कि हिदायत का पालन करने में कोई हानि नहीं है. अगर सच है तो जो वह चाहते हैं, वह उन्हें वास्तव में मिल जाएगा और अगर झूठी है तब भी कोई अंतर नहीं पड़ेगा. अतः उन्होंने घोषणा का पालन करने का निश्चय किया.

अगली दोपहर, सबने अपनी मुसीबतें एक काल्पनिक बोरी में बाँधीं, उन्हें नदी के उस पार छोड़ा और वह सब ले आए जो उनकी सोच के अनुसार उन्हें ख़ुशी देने वाला था….सोना, गाड़ी, घर, आभूषण, हीरे.

गाँव वापस लौटने पर सभी हैरान थे.  जिस व्यक्ति को गाड़ी चाहिए थी, उसके घर के आगे गाड़ी खड़ी थी. जिसने आलीशान घर की कामना की थी, उसने देखा कि उसका घर एक शानदार घर में बदल गया था. सब अत्यंत खुश थे. उनकी ख़ुशी का ठिकाना नहीं था.

पर  हर्ष व उल्लास कुछ समय तक ही कायम रह पाया. जल्द ही सब अपनी तुलना अपने पड़ोसियों से करने लगे. सब महसूस करने लगे कि उनके बगल वाला उनसे अधिक प्रसन्न व धनी था.

अतः दूसरों के बारे में और अधिक जानने के लिए सब आपस में बात करने लगे. इस व्यवहार से सबको पछतावा होने लगा. ‘मैंने एक साधारण सोने की चेन की माँग की थी परन्तु पड़ोस की लड़की ने आकर्षक सोने के हार माँगा था और उसे वह मिल गया!

मैंने केवल एक मकान की माँग की थी पर सामने के घर में रहने वाले व्यक्ति ने हवेली माँगी थी. एक कार मांगी दो मांगता …

हमें भी ऐसी वस्तुओं की माँग करनी चाहिए थी! यह एक अनोखा व सुनहरा मौक़ा था परन्तु हमने अपनी मूर्खता के कारण इसे गवाँ दिया.’

सभी गाँववाले एक बार पुनः महात्मा के पास गए और सारा गाँव एक बार फिर निराशा व असंतोष में डूब गया.

जबकि संतोष में रहना सीखना चाहिए वो कहते भी हैं कि ना कि  जब संतोष आ जावे तब सब धन धुरि के समान लगते है।गौ धन गजधन बाज धन और रतन धन खान।जब आवे संतोष धन सब धन धूरि समान ।।  खुश है जितना है खुश रहिए और ईश्वर का शुक्र मानिए तभी खुश रह सकेग़ें …

संतोष सबसे बड़ा धन है

Shikshaprad Kahani – jab aave santosh dhan sab dhan dhuri saman , santosh sabse bada dhan , संतोष का अर्थ ,
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