Monica Gupta

Writer, Author, Cartoonist, Social Worker, Blogger and a renowned YouTuber

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August 31, 2016 By Monica Gupta Leave a Comment

स्वास्थ्य ही जीवन है

अच्छे स्वास्थ्य का महत्व

स्वास्थ्य ही जीवन है और इसे समझने के लिए हमें व्‍यक्तिगत स्‍वच्‍छता को समझना बहुत जरुरी है व्‍यक्तिगत स्‍वच्‍छता  दो शब्‍दों से मिलकर बनी है  ”व्‍यक्ति”  एवं ”स्‍वच्‍छता” इस बात में कोई दो राय नही कि हमारा  स्वास्थ्य हमारे स्वच्छ हाथों में है… हाथ कैसे धोऎ यानि hand wash पर तो बहुत बातें हैं पर कुल मिला कर हमारा स्वास्थय हमारे हाथों में ही है.

हाथ धोने की विधि

स्वास्थ्य ही धन है

स्वास्थ्य ही जीवन है और इतना ही नही हमारा स्‍वास्‍थ्‍य ही धन है. इसकी महत्ता हमे समझनी होगी. व्यक्तिगत स्वच्छता और स्‍वास्‍थ्‍य का ख्याल रखना बेहद जरुरी है.  व्यक्तिगत स्‍वास्‍थ्‍य में शरीर की स्‍वच्‍छता,  दॉंतों की सफाई, नाखूनों तथा पैरो की देखभाल,  भोजन,  आहार,  व्‍यायाम,  विश्राम एवं नींद ध्रूमपान लत,  मानसिक विचार तथा मद्यपान संबंधी नियमों का पालन आतें हैं। इनके प्रति लापरवाही हमारे स्‍वास्‍थ्‍य पर बुरा प्रभाव डाल सकती है उदाहरण के तौर पर दॉंतों की सफाई भरे मैल में जमे रोगाणुओं से ऑंतों में कृमि तथा अन्‍य विकार पैदा हो सकते हैं।

इससे बहुत सारी बीमारियों को निमत्रंण मिल जाता है और वो हाथो के जरिए या नाखूनों के माध्यम से मुह में चले जाते है और जाने कितनी तरह तरह की बीमारियों फैलती चली जाती है। इसलिए हाथों को राख या साबुन से भली प्रकार धोना चाहिए। कई बार घरो में लोग और खासतौर पर महिलाए नंगे पांव रहना ज्यादा पसंद करती है। नंगे पाव से हुकवार्म शरीर में घुस जाते है और इसकी वजह से शरीर में कमजोरी और खून की कमी हो जाती है।

त्वचा की सफाई ना होने पर पसीने और मैल की परत चढ़ती चली जाती है इसकी वजह से दाद खाज, खुजली और त्वचा के रोग हो जाते है। इस तरह के रोग बहुत जल्दी फैलते है इसलिए शरीर की सफाई रखनी बहुत ही जरूरी हो जाती है दांतो की सफाई भी उतनी ही जरूरी है अगर नियमित रूप से दात साफ नहीं होगे तो खाने के कण दांतो में पड़े पड़े सड़ जाऐगे इससे ना सिर्फ दांतो में सड़न होती है बल्कि पेट सम्बन्धी रोगो के होने का भी अंदेशा रहता है इन्ही सब बातों को ध्यान में रखते हुए व्यक्तिगत सफाई बहुत जरूरी है खाने से पहले और खाना खाने के बाद हाथ या तो साबुन अथवा राख से अच्छी तरह धोने बहुत जरूरी है

एक सर्वे से पता चला है कि अगर हाथ सही प्रकार से wash हो तो दस्त जैसे अनेक रोगो में 50 प्रतिशत से भी ज्यादा कमी आई है इसलिए शौच के बाद या खाना बनाने से पहले और खाते समय हाथ साफ रखने बहुत जरूरी है जिन महिलाओं के बच्चे अभी बहुत छोटे है और उन्ही का दुग्धपान करते है उनके लिए यह और भी जरूरी हो जाता है कि हाथों को साफ रखे।

शौच त्यागने के बाद भी भली प्रकार हाथ धोने चाहिए हाथों के नाखूनों को भी नही बढ़ने देना चाहिए। इन नाखूनों में अन्दर की तरफ रोगाणु लम्बे, गंदे नाखूनों से भोजन करते वक्त भोजन में चले जाते है और  दूषित कर देते है इस भोजन का सेवन करने से दस्त व अन्य रोग पैदा हो जाते है

चप्पल पहनना भी बहुत जरूरी हो जाता है ताकि कीटाणु पैरो के जरिए शरीर में प्रवेश करके बीमार ही ना कर दे।

शरीर में सिर के बालों की सफाई भी बहुत जरूरी होती है क्योंकि गन्दे सिर में जुए आ जाती है जोकि इसे नुकसान पहुंचाती है इसी प्रकार दांतो की सफाई बहुत जरूरी है ताकि मुंह की दुर्गन्ध ओर सड़न से बचा जा सके इसके लिए या तो दातुन या फिर नमक का भी इस्तेमाल किया जाता है

हर रोज नहाने से शरीर भी स्वच्छ और तरो ताजा रहता है इसलिए नहाना धोना बहुत जरूरी है जब हम खुद साफ और स्वच्छ होगे तो हमारा मन करेगा स्वच्छ जगह पर ही खेलने का सफाई का ध्यान सिर्फ खुद रखे बल्कि दूसरों को भी इसकी महता समझाए।

कई लोग चलते फिरते सड़क पर ही थूक देते है। उन्हें इसके होने वाले नुकसान बता कर स्वच्छता के प्रति जागरूक करना हमारा पहला कर्तव्य है। यही बात लागू होती है कि जिस व्यक्ति को जुकाम है। कई बार बच्चे या बड़े नाक आने पर अपनी आस्तीन से या कमीज से और महिलाएं अपने दुपटटे से ही साफ कर लेती है। जोकि सीधे तौर पर बीमारी को न्यौता देता है इसलिए ऐसे कामों से बच कर ही रहें। अपने पास साफ रूमाल ही रखे और उसे ही इस्तेमाल करे।

घर की सफाई

खेतो को पॉस्टिक खाद तो मिलेगी ही जिससे मिटटी की उर्वरकता बढ़ेगी। और जो कूड़े कचरे और प्लास्टिक के सामान से पर्यावरण का नुकसान हो रहा है उससे बचाव हो जाऐगा कई बार गांव वासियों द्वारा खाद के ढ़ेर पर सफाई के दौरान इतनी गन्दगी डाल दी जाती है कि वो खाद का ढेर कम और गन्दगी का ढेर ज्यादा लगता है जिससे बीमारियों का निमत्रंण मिलता है।

गडडों में इसे डाल कर ना सिर्फ बीमारियों से बचेगे बल्कि उन कूड़े के ढेर की बजाय सड़क पर पेड़ लगाए जा सकेगे जिससे पर्यावरण की स्वच्छता बढ़ेगी। चूल्हा एक ही कमरे में होने की वजह से घर के लोगो को सांस की दिक्कत हो जाती है और चूल्हे के धुएं से आंखो में भी जलन हो जाती है

आकडे तो यहा तक बताते है कि महिलाओं के खाना बनाते वक्त जितना धुआं सांस के साथ अन्दर जाता है। वो 200 सिग्रेट के धुए के बराबर होता है ऐसे में गर्भवती महिलाए खुद भी बीमार रहेगी और होने वाला बच्चा भी किसी ना किसी बीमारी से ग्रस्ति होगा ये तो रही घर की बात। अब लोग जब खेतो में शौच जाते है तो खुले में मल पड़ा रहने से संक्रामक रोगाणु फलो और सब्जियों में लग जाते है यही फल सब्जियां बिना धोए खा लेने पर दस्त या अन्य ऐसे रोग हो सकते है जो जानलेवा भी साबित हो सकते है।

तो इतनी सारी दिक्कतों के चलते इससे छुटकारा पाने का क्या कोई तरीका हो सकता है या नही तो जवाब सीधा सा है कि जिस घर में लोग रहते है सबसे पहले तो वो हवादार हो, पूरी रोशनी आए और घर में मच्छर मक्खी के बचाव के लिए जालीदार दरवाजे भी लगे हो अगर घर में धुए वाले चूल्हे है तो ऐसे चूल्हे बनाए जाए जो धुआ रहित हो इससे आखों की जलन के साथ साथ संास के रोगो में भी कमी आऐगी।

अब बात आती है सफाई की घर को खासकर फर्श को साफ रखना चाहिए।

घर का कूड़ा उठाकर सड़क पर फेकने की बजाय कूड़े के डि़ब्बे में ही डालना चाहिए। भोजन पर मक्खियां बैठ कर उसे दूषित ना कर दे उसके लिए जाती का इस्तेमाल करना बहुत जरूरी हो जाता है जो बना हुआ भोजन है उसे भी ढ़क कर ही रखना चाहिए ताकि वो प्रदूषित ना हो।

पीने के पानी को भी ढ़क कर रखने के साथ साथ मटके या किसी अन्य बर्तन से निकालने के लिए डण्डी वाले लोटे का प्रयोग करना चाहिए और पानी का हमेशा जमीन से थोड़ा उचां रखना चाहिए। इसके साथ साथ या तो सुराही या फिर ऐसे मटकें या डिब्बे जिनमें नलके की सुविधा हो तो इस्तेमाल करने चाहिए। कच्ची सब्जी को बनाने से या कच्ची सब्जी खाने से पहले भली प्रकार धो लेनी चाहिए ताकि सारे कीटाणु दूर हो जाए। बर्तनों को भी साफ पानी से ही धोना चाहिए अगर गन्दे पानी से धोऐगें तो बर्तनों के साथ-2 उनमें रखा सामान भी दूषित हो जाऐगा

खोमचे वाले से खुला रखा खाना खाने से भी बीमार होने के लक्षण जल्दी दिखने लगते है इसलिए वहां का भोजन ना ही करे और जो भोजन घर पर भी बनाए उसे अच्छी तरह हाथ धोकर ही बनाए अब हाथ या तो साबुन से या राख से धोने बहुत जरूरी है ताकि खाने के साथ-2 अपनी और घर के सदस्यों की स्वस्थता भी बनी रहे।

इन सभी बातों के साथ साथ अपना अड़ोस-पड़ोस भी साफ रखना चाहिए। कूडे को घर के बाहर ना फेंक कर गडे में डालना चाहिए छोटे बच्चों के घर में ही शौच करने की स्थिति में उसे तुरन्त साफ करके हाथ धो लेने चाहिए ताकि ना मच्छर, मक्खी आए और ना कोई बीमारी फैले। जानवरो के गोबर को भी कूड़े के गडडे में ही डाल देना चाहिए और उनके मूत्र के लिए नाली द्वारा सोख्ता गडडे में ही बहने देना चाहिए।

इसके लिए घर से अलग पशुशाला का प्रावधान होना चाहिए। इसमें पक्का फर्श और नाली की ओर ढलुवा हो ताकि उनका मूत्र वहां इकठठा रहने की बजाय बह जाए।

नाली को सोख्ता गडडे से मिला देना चाहिए इसमें सफाई का ध्यान देना बहुत जरूरी है ताकि दुधारू पशु किसी भी तरह की बीमारी से बचे रहे।

स्वच्छता अपनाने से  फायदे बहुत है …

कम मृत्यु दर और बेहतर स्वास्थ्य

पैसे की बचत

उत्पादकता में वृद्धि

ज्यादा आय के साधन

आत्म सम्मान

और सबसे बड़ी बात तो यह होगी कि स्वच्छता अपनाने से ड़ाक्टरों के चक्कर नही लगाने पड़ेगें जिससे पैसे बचेगें। पैसे बचेगें तो खुशियाँ आऐगी, खुशियाँ होगी तो आय के साधन और बढेगें क्योंकि अक्सर तनाव में रहने से काम नही हो पाता जब तनाव ही नही होगा तो और काम करने को मन करेगा, जिससे आय बढे़गी और आय बढे़गी तो जीवन स्तर में सुधार होगा और फिर देश को आगे बढ़ने से कोई  रोक ही नही सकता।

 

खुले में शौच, महिलाएं और स्वच्छता अभियान – Monica Gupta

खुले में शौच, महिलाएं और स्वच्छता अभियान स्वच्छ सर्वेक्षण 2017 हो या जन आंदोलन के रुप में चला स्वच्छता अभियान. महिलाओ को इसकी महत्ता समझ कर बढ चढ कर आगे आना ही होगा. अपनी और अपने गांव की स्वच्छता की ,कामयाबी की कहानी बनानी होगी. आज अचानक एक खबर ने फिर चौंका दिया. बदायूं बरेली … read more at monicagupta.info

वैसे स्वच्छता के बारे में आपका क्या ख्याल है … जरुर बताईएगा !!

 

 

August 30, 2016 By Monica Gupta Leave a Comment

स्वच्छता और स्वास्थ्य

स्वच्छ भारत अभियान के असली हीरो

स्वच्छता से स्वास्थ्य रक्षा

स्वच्छता और स्वास्थ्य की बात चलती है  तो हमारे जहन में सबसे पहले स्वच्छता से स्वास्थ्य रक्षा ही आती है आमतौर पर लोग स्वच्छता का सीधा सम्बंध शौचालय बनाने या इसका इस्तेमाल करने से ही निकालते है. यह बात ठीक है कि शौचालयों का बनाना और इस्तेमाल करना स्वच्छता का जरूरी अंग है पर इसक साथ साथ दूसरी बात भी उतनी ही जरूरी है जितनी शौचालयों के बारे में जागरूकता का होना…

क्या हैं स्वच्छता के अन्य जरूरी अंग

स्वच्छता और स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए कुछ बातो का ध्यान रखना बहुत जरुरी है

  1. पीने का पानी का रख रखाव और बर्ताव
  2. बेकार पानी की निकासी
  3. मानव मल का सही निबटान
  4. कूड़े कचरों का सही निबटान
  5. घर तथा भोजन की स्वच्छता
  6. व्यक्तिगत सफाई
  7. ग्रामीण स्वच्छता सामुदायिक एवं पर्यावरण स्वच्छता

पीने के पानी का रख रखाव और बर्ताव

जब बात पीने के पानी की चलती है और खास तौर पर गांवों की बात होती है ता हमारे मन में पनघट कुऐं या हैंंड पम्पों की तस्वीर ही घूमती है जहां पर ठेठ घूघंट में ढकी महिलाए मटको में पानी भर भर के ले जा रही है  और वही दूसरी तरफ औरते कपडेे भी धो रही है.   बच्चे नहा भी रहे है और तो और  उसी पास खड़े गंदे पानी में  मच्छर, मक्खी भिनभिना रहे है वही पानी कच्चे रास्ते को गंदा बदबूदार बनाता हुआ जोहड़ में जा मिलता है   वही पशु स्नान कर रहे होते है बस यही से शुरू होती है बीमारियों की जड़ अगर ऐसे वातावरण दूषित जल का प्रयोग किया जाए तो हैजा, दस्त, पीलिया जैसे रोगों का खतरा बना रहता है इसलिए यह बहुत जरूरी हो जाता है कि साफ और स्वच्छ पानी ही इस्तेमाल करे। पर ऐसे माहौल में पानी स्वच्छ पानी कैसे हो। उसके लिए हमें कुछ बातों का खासतौर पर ध्यान रखना चाहिए जैसे कि जहां से पानी भरे… अगर कुआ है तो ढ़का हो अगर वहां जल हत्था लगा है तो वो जगह एकदम से सूखी और साफ हो वहां सही प्रकार से नाली बनाई हो ताकि पानी वहां जमा ही ना होने पाएं आमतौर पर खुली नदी या तालाब बीमारियों के घर माने जाते है इसलिए इसे बचे।

पानी भरने के जो भी स्त्रोत है वो सब पक्के होने चाहिए अब एक बात और बहुत जरूरी है कि जब भी पानी भरे उसे बर्तन का पहले धो ले और उसमें अपनी अगूलियां ना डुबवाए

पानी पीने के लिए डण्डी वाले लोटे का इस्तेमाल करे और पानी के बर्तन को हमेशा ढक कर ही रखें। हां कई बार पीने का सुरक्षित स्थान नही होता तो ऐसे में पानी का उबालना चाहिए।

20 मिनट उबाल कर पानी के रोगाणु नाष्ट हो जाते है उबालने के साथ साथ एक अन्य साधन भी है क्लोरीन से उसे साफ करना  असुरक्षित पानी का सुरक्षित बनाने का यह सबसे सरल, असरदार रसायन है क्लोरीन की दवाई स्थानीय चिकित्सा केद या दुकानों से मिल जाती है। इसलिए हमें अगर स्वस्थ रहना है तो पानी का स्वच्छ पान बहत जरूरी है इसलिए यह जरूरी है कि पानी जहां से ले वो जगह ढ़की हुई। साफ हो।

–           साफ बर्तन में पानी भरना चाहिए या फिर पानी भरने से पहले बर्तन साफ पानी  में धोना बहुत जरूरी है।

–           पाने के पानी को ढ़क कर रखना निहायत जरूरी है और उससे भी ज्यादा जरूरी है कि डंंडी वाला लोटा इस्तेमाल किया जाए या फिर लम्बी गर्दन वाली सुराही पीने के पानी के लिए इस्तेमाल की जाएं इसमें पानी दूषित होने के कारण बहुत कम होते है वैसे भी आजकल मटको एवं घड़ो में नलके लगे आने लेग है यह भी सुविधा जनक तथा स्वच्छता लिए होते है क्योंकि बार-बार ढ़कन्न हटा कर पानी पीने की जरूरत ही नही रहती

इसके पीने वाले पानी को हमेशा उंची जगह पर रखना चाहिए ताकि जल्दी से घूल मिटटी ना पड़े तो हमने देखा कि अगर साफ पानी का कोई साधन ही ना मिले तो पानी का उबाल कर या फिर क्लारीन की टिकिया डाल कर उसका इस्तेमाल करना चाहिए।

बेकार पानी की निकासी:-

जैसा कि पहले बताया गया है कि आमतौर पर पानी भरने वाली जगह सही ढ़ग से निकासी ना होने के कारण पानी खड़ा रह जाता है ऐसे मे ना सिर्फ गन्दगी बदबू फल जाती है बल्कि मच्छर, मक्खी बीमारियों का केन्द्र बन जाते है ऐसे में यह बहुत जरूरी हो जाता है कि बेकार पानी की निकासी सही ढ़ग से हो घर में अगर रसोई घर में पानी बाहर निकलने का पक्का रास्ता हो तो वो सबसे बेहतर है और वो रसोई घर से निकला बेकार पानी अगर बगीचे में लगी सब्जियों और खेते में जाए तो सोने पर सुहागा हो जाए। इससे पानी का सही इस्तेमाल भी हो जाता है और बगीचा और खेतो को भी पानी मिलता रहता है।

कूड़े कचरे का सही निबटान:-

गांव का नाम लेते ही हमारे दिलों दिमाक में बस भैंसे गाय, गौबर, गन्दगी ही आते है तो क्या यह गोबर और गन्दगी ही गांव की पहचान बन चुकी है इससे छुटकारा नही पाया जा सकता। जी हां, इसे बिल्कुल दूर किया जा सकता है सड़क और गलियों में पड़ा कूड़ा ना सिर्फ मच्छरों को जन्म देकर बीमारियों बढ़ाता है बल्कि टेटनस के रोगाणु खुले घाव से शरीर मे आते है और इससे नवजात बच्चों की जान का भी जबरदस्त खतरा हो सकता है।

अकसर कूड़े और गदगी के ढेर के पास सूअर, कुतो सांड़ो आदि जानवरों का जमावड़ा लगा रहता है और मच्छर, मक्ख्यिों और कॉकरोच की संख्या तो पूछिए ही मत … अगर बीमारी से बचना है तो स्वच्छता रखनी ही पडेगी.

मानव मल का सही निबटान

जहां खुल्ले में मल बीमारियों को निमत्रंण देता है  इसको बनाने के लिए ज्यादा जगह की भी जरूरत नही होती अब यह अपनी घरेलू स्थिति, भूजल विज्ञान, क्षेत्र में प्राप्त निर्माण वस्तुओं का प्रकार, आदत, निवाज और खुद की सहुलियत और दुष्टिकोण पर निर्भर करता है कि वो किस प्रकार का शौचालय बनाना चाहते है।

घर की सफाई, सुव्यवस्था एवं सुरक्षित भोजन

गांव के लोगों के ज्यादातर घर छोटे, अंधेरे वाले होते है जहां ताजी हवा की निकासी सही प्रकार से नही होती इसके साथ-2 सारा परिवार एक ही कमरे में रहता है और ज्यादातर रसोई घर भी वही एक कोने में बना होता है ऐसे में सहज ही कल्पना इससे ना सिर्फ गांव स्वच्छ और सुन्दर बनेगा बल्कि निर्मल ग्राम पुरस्कार के लिए भी दावेदार हो सकते है।

व्यक्तिगत सफाई

अभी तक हमने बात की घर व आस पड़ोस की सफाई की। अब हम आते है अपनी व्यक्तिगत सफाई पर। जी हां जितनी जरूरी घर की सफाई है उतनी ही जरूरी खुद की सफाई भी है। कई रोग ऐसे है जो व्यक्तिगत सफाई के अभाव में ही फलते है हमे विश्वास नही होगा लेकिन हाथो की सफाई हममें सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण है। आमतौर पर झाडू या बर्तन धोने के बाद या शौच जाने के बाद या सिर्फ बच्चे का शौच साफ करने के बाद हाथो को उतनी अच्छी तरह नहीं धोते जितने धोने चाहिए।

सामुदायिक एंव पर्यावरण स्वच्छता:-

स्वच्छता के बारे में जागरूकता होनी बहुत ही जरूरी है। क्योंकि अगर वातावरण स्वच्छ नहीं होगा तो स्वच्छ जीवन शैली नही बन पाऐगी। मान ले कि हमने अपना घर तो साफ करके चमका लिया पर कूड़ा बाहर ही सड़क पर फेंक  दिया। ऐसे में गन्दगी के कीटाणु मच्छर, मक्खी सब गन्दगी पर जाने के बाद आराम से घर के भीतर भी आऐगे और ज्यादा गन्दगी फैलाऐगे अब लोग घरो में सोख्ता गडडे तो बनवा लेते है पर उसकी देखभाल ना होने की वजह से उसका पानी सड़क पर ही बहे जाता है और गन्दगी फैलाता है।

स्वच्छ भारत

स्वच्छ भारत बनाम गांधी जयंती पिछ्ले साल यानि सन 2014 में 2 अक्टूबर से स्वच्छ भारत अभियान की शुरुआत की गई. आरम्भ में झाडू हाथ मे लेकर फोटो खिचवाने See more…

 

तो यह हुए स्वच्छता के सात विभिन्न अंग सभी बहुत जरूरी है और इनको अपनाने से जीवन खुशहाल और रोग मुक्त हो जाएगा।

अगर आपके भी स्वच्छता को लेकर कोई विचार हों तो जरुर सांझा करें …

 

 

August 30, 2016 By Monica Gupta Leave a Comment

स्वच्छता का महत्व कितना आवश्यक

स्वच्छ भारत अभियान- स्वच्छ भारत स्वस्थ भारत

स्वच्छता का महत्व

स्वच्छता की बात करने से पहले हमारे लिए सबसे पहले यह जानना बहुत जरूरी है कि स्वच्छता का महत्व कितना आवश्यक है क्योकि स्वच्छता और पेयजल की कमी से 80 प्रतिशत बीमारियों पैदा होती है और हर साल विश्वभर में 5 साल से कम उम्र के 15 लाख बच्चे मौत का शिकार बनते है.  निश्चित तौर पर यह आंकड़े चौका देने वाले है चाहे हैजा, टाईफाईड, पीलिया, पोलियो, अतिसार, चमडी का चाहे हैजा, टाईफाईड, पीलिया, पोलियो, अतिसार, चमडी का रोग या आखों की बीमारी हो सभी का कारण स्वच्छता का ना होना ही है.

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स्वच्छता और गंदगी

स्वच्छता का महत्व समझते हुए यह जानना जरुरी है कि गन्दगी मुख्य रूप से हमारे शरीर में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से जल, मक्ख्यिों, खाने की वस्तुओं और अगुलियों के रूप में प्रवेश करती है। जिसे रोकना और स्वच्छता के प्रति जागरूक होना हमारा कर्तव्य है ताकि स्वस्थ और सुखी जीवन जी सक

सामाजिक प्रतिष्ठा आत्म सम्मान और सबसे ज्यादा महिलाओं और लड़कियों के आराम के लिए स्वच्छता के नियमों को अपनाना बहुत जरूरी है स्वच्छता रहने पर व्यक्ति की सेहत ठीक रहेगी वह हर रोज काम पर जाऐगा जिससे आय के साधन भी बढ़ेगे और जीवन का आनन्द भी लिया जाएगा।

सोच शौच की

शौच से होने वाली बीमारियों के प्रति लोगो की सोच ना के बराबर है.  वो सपने में भी नही सोच सकते कि जो शौच वो घर से बाहर दूर खेत में करके आते है घर आकर वो ना सिर्फ उसे खाते है बल्कि दूसरों को भी खिलाते है.

असल में, होता इस तरह से है कि जब व्यक्ति खुले में मल त्यागता है तो मल पर ढेरो मक्खियां बैठ जाती है वही गन्दगी मक्खियां हमारे भोजन, कपड़े, शरीर ओर पानी पर बैठ कर अपने छः पैरो पर चिपकाए मल को कर उड़ जाती है और अनजाने में व्यक्ति कम से कम 10 से 20 मिली ग्राम मल खा जाता है एक मिलीग्राम मल में एक करोड़ विषाणु होते है और बीमार व्यक्ति के मल में तो असंख्य मात्रा में बीमारी पैदा करने वाले विषाणु जीवाणु, कृमि और उनके अण्डे मौजूद रहते है जिन्हे सूक्ष्मदर्शी यंत्र से ही देखा जा सकता है।

खुले में पड़ा यह शौच पानी, सब्जी, गन्दे हाथो, मिटटी, मक्खी और छोटे-2 अद्वश्य जीवो के माध्यम से होता हुआ स्वस्थ व्यक्तिक पहुंच कर उसे ही अस्वस्थ बना देता है इसके कारण आंतो में कीड़े, पेचिश, दस्त, हैजा, टायफायड, हार्ट-अटैक जैसी गम्भीर और जानलेवा बीमारिया हो जाती है।

यह जानकर बहुत हैरानी होगी कि पोलियो का एक मात्र कारण पोलियोग्रस्त व्यक्ति के मल से ही होता है ये विषाणु सबसे पहले बच्चो को ही अपना शिकार बनाते है।

आकड़े भी बताते है कि गांव के लगभग आधे से ज्यादा आबादी बाहर ही शौच के लिए जाती है। मानले कि अगर एक व्यक्ति एक दिन में 300 ग्राम शौच करता है और प्रतिदिन गांव का हजार आदमी शौच जाता है जब हम गांव की 1 महीने की शौच की गिनती करेगे तो हम पाऐगे कि हर मीने इस गाव में 30 टन (30 दिन 1000 व्यक्ति 300 ग्राम) (लगभग दो ट्रक) शौच की जाती है अगर हम एक साल का अनुमान लगाए तो इससे लगभग 24 ट्रक शौच के भर सकते है। और 10 सालों में 240 ट्रक शौच के भरे जा सकते है।

व्यक्ति द्वारा त्यागा हुआ शौच  जानवरों के खुरो से, बच्चों की चप्पल से, टायरों से, मक्खियों द्वारा वापिस घर पहुंच जाता है और हमारे हाथ द्वारा खाने पीने की चीजो में शामिल हो जाता है इसलिए यह बताने में कोई संकोच नही है कि व्यक्ति शौच ना सिर्फ खाता है एक दूसरों को भी खिलाता है अगर शौच के प्रति इस सोच को जागृत कर दिया जाए तो निश्चित तौर पर शौच के प्रति उसे इतनी घृणा हो जाऐगी और उसकी सोच बदलनी शुरू हो जाऐगी।

असल में, सदियो से खुले में शौच जाने की आदत को छुड़वाना बहुत मुश्किल है ऐसे में गांव के लोगों के पास ढ़ेरो प्रश्न होते है कि हम बाहर जाना किसलिए बंद करे, शौचालय बनवाना आसान नहीं है। जगह भी नही है, शौचालय बनवाने से उन्हे क्या फायदा होगा, और सबसे ज्यादा मुश्किल तो बुर्जुगो को समझाना है।

ऐसे में उनके प्रश्नों का उतर देना उन्हे समझाना बहुत जरूरी हो जाता है ताकि वो संतुष्ट हो जाए और स्वच्छता को अपना ले।

ज्यादातर लोगो की सोच होती है कि वो अपने जीने का तरीका क्यों बदले उससे उन्हे क्या फायदा होगा। तो उन्हे यही समझाना चाहिए कि अच्छी आदत और जीवन को सुखी बनाने के लिए, सम्मान जनक रूप से जीने के लिए और दूसरो के सामने उदाहरण बनने के लिए स्वच्छता को अपनाना ही होगा। इसे अपनाने से स्वास्थ्य सही रहेगा, बीमारियां होगी ही नही, खर्चा कम होगा और आय के साधन ज्यादा बनेगे।

सोच कैसी कैसी … 

कई लोगो का मानना होता है कि सुबह सुबह सैर भी हो जाती है और शौच भी तो इसमें गलत क्या है ? ऐसे में अपनी बहू बेटियों की सुरक्षा का अहसास करवाना चाहिए उन्हे अहसास दिलाना चाहिए कि शर्म के साथ-2 समय का दुरूपयोग होता है। सड़क पर, खेतो में पड़ा मल पैरो व चप्पलों के सहारे घर तक आ जाता है वाशिश के मौसम में या देर सवेर जाने से जंगली जानवरों का निरन्तर खतरा बना रहता है।

बहुत लोग अडियल किस्म के होते है उनके अकसर यही प्रश्न होते है कि उनके पास तो जगह ही नही है या वो तो गरीब है वो इसे बनवाने के लिए रूपया कहा से लाऐगे ऐसे में उन्हे समाझाना चाहिए कि इसके लिए कोई बहुत ज्यादा जंगह की जरूरत नही होती या फिर पड़ोसी या ग्राम पंचायत जमीन दे सकती है ऐसे में सामुदायिक शौचालय का भी निर्माण करवाया जा सकता है या फिर शौचालय का उपरी ढाचा छत पर और गडडा नीचे आगन पर बनाया जा सकता है या फिर दोनों पड़ोसी उपरी ढा़चा अलग अलग बना कर गढ़ढा एक ही रख सकते है इसके साथ साथ पड़ोसी ग्राम हित में अपनी जमीन भी दे सकता है समाधान तो बहुत निकल सकते है बशर्त स्वच्छता को जीवन का महत्वपूर्ण अंग माना जाए

अब बात आती है उनकी गरीबी की बात घूम फिर कर पैसे की गरीबी की नही बल्कि मानसिकता की गरीबी है जिससे जानबूझ कर वो उतरना ही नही चाहते । गरीब लोग शादी के लिए बीमारी के लिए रिश्तेदार में कामकाज शुरू करने पर कर्ज ले सकते है पर शौचालय बनवाने के लिए सरकार का मुंह ताकते है।

शौचालय ना बनवाने की इच्छा वाले बहाने  ढूढ ही लेते है मसलन वो कह देते है कि हम तो मजदूर आदमी है दिहाड़ी पर काम करते है इसे बनवाने में कितना समय लग जाऐगा या फिर पीने का पानी तो है नही इसके लिए कहा से लाऐगे या फिर बदबू की दुहाई देकर किनारा करना चाहते है।

ऐसे में हर बात का जबाव तैयार होना चाहिए. शौचालय बनाना मात्र आधे दिन का भी काम नही है जहां तक पानी की कमी की बात है जितना बोतल में वो भरकर बाहर ले जाते है उतना ही पानी लगता है।

 

स्कूली  स्वच्छता

बच्चे नए विचारों को बहुत जल्दी ग्रहण करते है स्कूल ऐसी संस्था है जहां शिक्षको की मदद से बच्चो के आचार व्यवहार में बहुत जल्दी बदलाव लाया जाता है क्योंकि बच्चों पर अपने शिक्षकों का प्रभाव बहुत ज्यादा पड़ता है इसलिए उन्हे प्रेरित करके शिक्षा के माध्यम से खुले में शौच ना के लिए भली प्रकार समझाया जा सकता है इसके लिए विद्यालय में अभिभावक शिक्षक संध का गठन भी बहुत फायदेमंद रहेगा।

स्कूली बच्चों का योगदान

अगर सम्पूर्ण स्वच्छता अभियान में बच्चों और स्कूली अध्यापको की बात नही की जाऐगी, तो यह अभियान अधूरा ही रहेगा। अक्सर स्कूली बच्चें अपने अध्यापकों से बहुत प्रेरित होते हैं। अध्यापकों ने स्वच्छता की गम्भीरता को समझते हुए सुबह प्रभात फेरी, रैलियाँ और नारे लगवाएं ताकि बच्चें अपना संदेश घर लेकर जाएँ।

बच्चों के माध्यम से स्वच्छता अभियान बहुत जल्दी फैलता है  क्योंकि बच्चें जब सुबह स्कूल जातें हैं तो आसपास उन्हीं जैसे बच्चें शौच के के लिए बैठे मिल जाते हैं  जिससे उन्हें बहुत बुरा लगता है  और दूसरी बात स्कूल के मैदान में ना तो खेल सकते थे और ना ही भागदौड़ कर सकतें थे क्योंकि वहाँ पड़ी शौच उनके पाँव पर लग जाती थी और जूते, चप्पल के सहारे वो कक्षा तक आ जाती और वहाँ मक्खियाँ ड़ेरा जमा लेती। जहाँ एक ओर बदबू से उनका बैठना मुहाल हो जाता वही दूसरी ओर जो खाना मिड़ डे़ मिल के रूप में परोसा जाता, वहाँ भी स्वच्छता नही रहती। इन सभी परेशानियों को ध्यान में रखते हुए स्वच्छता अभियान स्कूली बच्चों से आरंभ किया जाना चाहिए

महिलाओं का योगदान

बाहर शौच जाने से महिलाए सबसे ज्यादा पीडित हैं क्योकि दिन भर  शौच जा नही सकती और इसलिए अंधेरे में जाना पडता है जहांं जानवरों का खतरा है वहींं आदमियों से भी खतरा बना रहता है … हर रोज कही न कही की खबर छ्पती रहती है कि फलां महिला के साथ बलात्कार हुआ … फलांं बच्ची के साथ बलात्कार  हुआ ..  इसलिए चाहे वो अनपढ हो, धूंधट निकालती हो. अपनी किस्मत पर रोने से बेहतर  है कि घर मे ही शौचालय बना कर इस्तेमाल किया जाए और शर्म के साथ साथ बीमारियों से भी बचा जाए.

वृद्धों का योगदान

बेशक,  गाँव के बडे बूढों को समझाना किसी चुनौती से कम नही … उनकी मानसिकता बदलनी बहुत जरुरी है… और अगर वो समझ गए तो यकीन मानिए  गांव स्वच्छ हो गया… !! उन्हें अपने बच्चों की सेहत का और महिलाओं की सुरक्षा का वास्ता देकर समझाया जा सकता है.

 

स्वच्छता के नारे – Monica Gupta

स्वच्छता के नारे / स्वच्छता पर नारे स्वच्छता हम सभी के लिए बेहद जरुरी है जानते हैं हम सब पर फिर भी मानते नही है और गंदगी फैलाए चले जाते हैं. read more at monicagupta.info

 

स्वच्छता अभियान अगर एक जन आंंदोलन के रुप में चले तो कोई ताकत स्वच्छता आने से नही रोक सकती…

अगर आज आपने अपने पर्स से या बैग  से कुछ निकाल कर सडक पर नही फेंका तो यकीन मानिए आपने आज स्वच्छता अभियान में बहुत बडा योगदान दिया है…

(तस्वीर गूगल से साभार)

August 30, 2016 By Monica Gupta Leave a Comment

स्वच्छ भारत अभियान- स्वच्छ भारत स्वस्थ भारत

स्वच्छ भारत अभियान- स्वच्छ भारत स्वस्थ भारत

 मेरे सपनोंं का भारत

स्वच्छ भारत अभियान जोर शोर से चल रहा है.  स्वच्छता और स्वास्थ्य एक दूसरे के पूरक हैं . जन सर्वेक्षण 2017 हो,  जन आंदोलन हो , सम्मान हो, पुरस्कार होंं  या फिल्मी कलाकार  जैसे  कंगना रनावत , अमिताभ बच्चन या विद्या बालन  को स्वच्छता के मैदान में उतारना हो, मतलब स्वच्छता और जागरुकता लाने से है.

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(तस्वीर गूगल से साभार )

 क्या है स्वच्छता और क्या है खुले में शौच से मुक्ति

स्वच्छ भारत अभियान में  स्वच्छ भारत स्वस्थ भारत का सपना हम सभी देखते हैं .इस बात में कोई दो राय नही कि सरकार ने समय-समय पर योजनाएॅ बनाई और उन्हें लागू किया पर आम जनता तक उनकी आवाज नही पहुँच पाई और वो सरकारी दफ्तरों तक ही सिमट कर रह गई। बेशक, सम्पूर्ण स्वच्छता अभियान के मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों के सामान्य जीवन स्तर को बेहतर बनाना, ग्रामीणों को स्वस्थ जीवन देना ताकि वो निरन्तर कामों में जुटे रहें और कार्य स्थल में उनकी अनुपस्थिति ना के बराबर रहें, जल और स्वच्छता से जुडी़ बीमारियों के प्रतिशत को कम करना और स्वच्छता का प्रचार एवं प्रसार करके उनमें स्वच्छ आदतों का विकास करना था पर ऐसा महसूस किया गया कि बिना गावों के लोगों की मदद के यह अभियान नही चलाया जा सकता इसलिए योजना बनाई गई कि सम्पूर्ण स्वच्छता अभियान को लागू करने के लिए ग्राम पंचायतों, स्वयं सहायता समूहों, साक्षर महिला समूहों, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं, आशा वर्कर, अध्यापकों, स्कूली छात्रों, महिला मंड़ल तथा ग्राम स्तर पर सभी सामाजिक कार्यों से जुडे़ लोगों को जोड़ा जाना चाहिए जो कि स्वच्छता के क्षेत्र में रूचि रखते हों।

 

क्या है स्वच्छता का अर्थ

  1. जल का उचित रख रखाव और बर्तावः- हैंड़ पंप और नल से प्राप्त सुरक्षित या उबले/ क्लोरिन युक्त जल का उपयोग करना। जल को सुरक्षित स्थान पर रखना।

 

  1. बेकार पानी की उचित निकासीः- पूरे गाँव की नालियां पक्की बनाना और बेकार जल के निष्पादन की उचित व्यवस्था करना।

 

  1. मानव मल का सुरक्षित निबटानः- व्यक्तिगत, सामूहिक/महिला शौचालय स्कूल प्रांगण व आंगनवाडि़यों में शौचालय का निर्माण एवं उपयोग।

 

  1. कूडा़-कर्कट का सही निपटानः- कूडा़- कर्कट व गोबर को सही प्रकार के गड्ढों में संचित करना।

 

  1. घर की सफाई, सुव्यवस्था एवं सुरक्षित भोजन।

 

  1. व्यक्तिगत सफाईः- शौच के बाद साबुन से हाथ धोना, नाखून काटना, नहाना धोना।

 

  1. सामुदायिक एवं पर्यावरण स्वच्छताः- पूरे गाँव की साफ सफाई एवं वृक्षारोपण

 

सम्पूर्ण स्वच्छता अभियान के उट्ठेश्य

  1. ग्रामीण क्षेत्रों के सामान्य जीवन स्तर को बेहतर बनाना।
  2. ग्रामीण आबादी में स्वच्छता का प्रचार-प्रसार कर स्वच्छ आदतों का विकास करना।
  3. शिक्षा एवं जागरूकता के द्वारा समुदाय में स्वच्छता सुविधाओं की मांग उत्पन्न करना।
  4. विद्यालयों में स्वच्छता सुविधाओं का निर्माण सामुदायिक सहयोग से करना।
  5. कम लागत तथा सार्थक तकनीको को प्रोत्साहित करना।
  6. ग्रामीणों को स्वस्थ जीवन प्रदान करना ताकि कार्यस्थलो पर अनुपस्थिति कम हो सके।
  7. जल और स्वच्छता से जुड़ी बीमारियों के प्रतिशत को कम करना।

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स्वच्छता अपनाने से होने वाले फायदे

ये सबसे अहम है और इसे जान लेना हमारे लिए बहुत जरुरी भी है कि आखिर स्वच्छता से फायदे क्या क्या हैं..

 

  1. कम मृत्यु दर और बेहतर स्वास्थ्य
  2. पैसे की बचत।
  3. उत्पादकता में वृद्धि।
  4. ज्यादा आय के साधन।
  5. आत्म सम्मान- देश का सम्मान

 

और सबसे बड़ी बात तो यह होगी कि स्वच्छता अपनाने से ड़ाक्टरों के चक्कर नही लगाने पड़ेगें जिससे पैसे बचेगें। पैसे बचेगें तो खुशियाँ आऐगी, खुशियाँ होगी तो आय के साधन और बढेगें क्योंकि अक्सर तनाव में रहने से काम नही हो पाता जब तनाव ही नही होगा तो और काम करने को मन करेगा, जिससे आय बढे़गी और आय बढे़गी तो जीवन स्तर में सुधार होगा और फिर देश को आगे बढ़ने से कोई  रोक ही नही सकता।

इतना सब होने पर भी आखिर क्यों नही आ पा रही है स्वच्छता

 

ऽ     साधनों की कमी

ऽ     जन जागरण की कमी

ऽ     स्वच्छता की महत्ता पर कम समझ

ऽ     स्वच्छता को सामाजिक प्रतिष्ठा के साथ न जोड़ा जाना

ऽ     उपभोक्त्ता की पसन्द पर कम ध्यान

ऽ      सरकारी अनुदान की उम्मीद

ऽ     गलत और प्रभावहीन योजना और तरीके

ऽ     संस्थागत ढ़ाचे की कमी

ऽ     बच्चों और महिलाओ की समाज में कमजोर स्थिति

 

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तो क्या  हो रणनीति

 

ऽ     समुदाय की भागीदारी सुनिश्चित करना और समुदाय को नेतृत्व प्रदान करना।

ऽ     जागरूकता अभियान के द्वारा स्वच्छता का प्रसार करना।

ऽ     वैकल्पिक वितरण प्रणाली को मजबूत करना।

ऽ     सरकारी अनुदान पर कम निर्भरता।

ऽ     कार्यक्रम को जन केन्द्रित कार्यक्रम के रूप में कार्यान्वित करना।

ऽ     विद्यालयों को स्वच्छता का एक महत्वपूर्ण घटक मानकर इसे क्रियान्वित करना।

हमें पता है कि

वर्ष 2001 में जनगणना के आधार पर देश भर में ग्रामीण क्षेत्रो में केवल 21.9 प्रतिशत परिवारों को शौचालय सुविधाएँ उपलब्ध थी जबकि हरियाणा में यह प्रतिशत लगभग 28.66 थी। मानवमल खुले में त्यागने से अन्य प्रकार की गन्दगी तथा पीने का साफ पानी न मिलने के कारण हैजा, दस्त, पेचिश, हैपिटाइटिस, मलेरिया, पीलिया और पोलियो जैसी भयंकर और जानलेवा बीमारियों का खतरा मंड़राता रहता और इसी गंदगी की चपेट में महिलाएं और बच्चे आ रहे थे।

वैसे तो ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता सुविधाएं उपलब्ध करवाने हेेतु केन्द्र तथा राज्य सरकार समय-समय पर नित नए प्रयास करने में जुटी हुई थी इसलिए 1986 में भारत सरकार द्वारा केन्द्रीय ग्रामीण स्वच्छता कार्यक्रम की शुरूआत की गई और वर्ष 1999 में भारत सरकार द्वारा “सम्पूर्ण स्वच्छता अभियान” की शुरूआत की गई। लेकिन सम्पूर्ण स्वच्छता अभियान केन्द्रीय ग्रामीण स्वच्छता कार्यक्रम से बिल्कुल भिन्न था। क्योंकि यह कार्यक्रम अनुदान आधारित ना होकर समुदाय संचलित, ’जन केन्द्रित’ और मांग जनित कार्यक्रम बना।

इसके अन्तर्गत जनसाधारण को स्वच्छता के प्रति जागरूक करना था ताकि लोग सदियो से चली आ रही खुले में शौच जाने की प्रवृति के नुकसान जान कर सुविधाओं की मांग कर सकें। इस कार्यक्रम में व्यक्तिगत, स्कूल, आंगनवाडि़यों में शौचालय सिर्फ बनाने ही नही बल्कि उसके प्रयोग पर भी बल देना था। हालांकि राज्य सभा सम्पूर्ण स्वच्छता अभियान के प्रति पूर्ण रूप से जागरूक है और वर्ष 2012 का लक्ष्य निर्धारित कर दिया गया है लेकिन इस बारे में प्रयासरत है कि वर्ष 2010 तक ही लक्ष्य को हासिल कर लिया जाए ताकि चारों ओर स्वच्छता ही स्वच्छता हो।

कोई शक नही स्वच्छता आज एक आवश्यकता बन गई है और न सिर्फ गांव में बल्कि शहरों में भी जिस तरह से गंदगी बढती जा रही है उससे दूर करना हमारा परम कर्तव्य होना चाहिए.

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प्रश्नावली –  एक  क्विज स्वच्छता के बारे में 

 

  1. एक गाँव कितने दिन में खुले में मलत्याग सेे मुक्त्त हो सकता हैंः-

1 दिन

2-5 दिन

5-7 दिन

 

  1. खुले में त्याग से मुक्त्ति का अर्थ हैः-

 

शौचालय मुक्त्ति

शौचालय उपयोग

लोग खुले में त्याग बंद करें

 

  1. समुदाय में व्यवहारिक बदलाव लाने के लिए कौन अधिक प्रभावशाली है?

 

स्वयं समुदाय

स्वंय सेवी संस्था

बाहर के लोग

 

4 साधारणतया लोग शौचालय क्यों बनवाते हैं?

 

गोपनीयता के लिए

सुविधा के लिए

स्वास्थ्य कारणों

उपरोक्त सभी

 

5 शौचालय का निर्माण, इसके उपयोग को भी सुनिश्चित करता है।

सत्य

असत्य

 

6 घर में शौचालय होने पर महिलाएँ इसका प्रयोग पुरूषों से ज्यादा करती हैं।

 

सत्य

असत्य

 

7 मानव मल वापस हम तक पहुँचता है?

 

पानी द्वारा

भोजन द्वारा

हवा द्वारा

उपरोक्त सभी माध्यम द्वारा

 

8 निम्न में से क्या अधिक महत्वपूर्ण है?

 

पूरे गाँव में शौचालय का निर्माण

खुले में मल त्याग से मुक्त्ति

दोनों

 

9  निम्न में से कौन सम्पूर्ण स्वच्छता अभियान का अंग है?

 

ठोस कचरे व प्रदूषित जल का निस्तारण

स्कूल स्वच्छता

आंगनवाढी़ स्वच्छता

व्यक्तिगत स्वच्छता

उपरोक्त सभी

 

10. स्कूल में शौचालय व मूत्रालय का प्रावधान होने से कन्या विद्यार्थियों की संख्या बढ़ जाती है।

 

सत्य

असत्य

 

11. आपके विचार में सम्पूर्ण स्वच्छता के लिए कौन जिम्मेदार है।

 

सरकार

स्वयं सेवी संस्थाएं

समुदाय

उपरोक्त सभी

12. खुले में शौच को रोकने का सही समय है ?

गर्मी

बरसात

सर्दी

तुरंत

13. सम्पूर्ण स्वच्छता अभियान के लिये क्या विधि होनी चाहिए?

 

व्यक्तिगत घर को केंद्रित करना।

सम्पूर्ण गाँव को केंद्रित करना।

 

14. क्या आप मानते हैं कि किसी भी गाँव में सबसे गरीब व्यकित भी शौचालय का निर्माण कर सकता है?

 

हाँ

नही

 

15 लोग खुले में मल त्याग क्यों करतें हैं?

 

शौचालय निर्माण के लिए धन का न होना

शौच के लिए उपलब्ध पर्याप्त खुली जगह

अनुदान मिलने में देरी

स्वच्छता और स्वास्थ्य के मध्य सम्बन्ध का ज्ञान न होना

 

16. मानव और कुत्ते में क्या अंतर है?

 

दोनों खुले में शौच करतें है

कुत्ता शौच के उपरान्त मल को मिट्टी से ढ़क देता है।

दोनों शौच के उपरान्त मल को मिट्टी से ढ़क देते है।

उपरोक्त में से कोई

 

17. खुले में शौच करने की प्रथा की शुरूआत कब हुई?

 

500 वर्ष पूर्ण से

1000 वर्ष पूर्व से

10000 वर्ष पूर्व से

जब से मानव की उत्पति हुई हैं

 

18 खुले में शौच जाने से कौन-कौन सी बीमारियाँ हो सकती है?

 

पोलियो

हैजा

दस्त

उपरोक्त सभी

19 आप सोचते हैं कि जन जन में स्वच्छता आनी चाहिए

हां

नही

स्वच्छता अभियान और मेरे मन की बात – Monica Gupta

क्लिक करिए और सुनिए स्वच्छता अभियान पर 4 मिनट और 35 सैकिंड की ऑडियो… मेरा अनुभव स्वच्छता अभियान और मेरे मन की बात बात स्वच्छता अभियान के दौरान की है. जब गांव गांव जाकर लोगों को जागरुक किया जा रहा था.लोगो को समझाया जा रहा था कि खुले मे शौच नही जाओ आसान नही था क्योकि सदियों से चली आ रही मानसिकता बदलना मुश्किल था. See more…

 

स्वच्छता, हमारे लिए कितनी जरुरी है…  वैसे आपका क्या विचार है स्वच्छता के बारे में .. अगर आज आपने  अपने पर्स से कोई बेकार कागज सडक पर नही फेका तो यकीन मानिए आपने भी आज स्वच्छता में अहम रोल अदा किया है … ऐसा मेरा मानना है !!

(सभी तस्वीर गूगल से साभार )

August 30, 2016 By Monica Gupta Leave a Comment

जरा सोचिये

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जरा सोचिये

Jara Sochiye किसी का गुस्सा किसी पर निकालने में कहां की समझदारी है !! जरा सोचिए कि कही आप भी तो ऐसे नही हैं ना !! 

एक जानकार के घर गई तो वो अपने बच्चे को होमवर्क करवा रही थी और बीच बीच में उसे बहुत बुरी तरह डांट भी रही थी और डांटते हुए बार बार घडी देख रही थी बाद में पता चला कि कामवाली बाई अभी तक नही आई इसलिए उसका गुस्सा अपने बच्चे पर उतार रही थी…
Jara Sochiye अकसर बॉस आफिस में गुस्सा करते हैं तो उनका गुस्सा पति महोदय द्वारा घर आकर पत्नी पर उतारा जाता है.. !!

Jara Sochiye सुबह आफिस के लिए निकलते वक्त देर हो गई तो वाहन तेज चलाएगें और गुस्सा सामने वाले पर निकालेगें कि हार्न सुनाई नही दे रहा क्या … बहरा हो गया !! और और और हमारा सोशल मीडिया भी इससे अछूता नही है ..

Jara Sochiye फेसबुक पर लिखेंगें और कमेंट इक्का दुक्का आने पर सारा कसूर फेसबुक का ही निकालेंगें कि क्या बेकार चीज है ये .. फालतू, खाली पीली टाइम वेस्ट है ये .. !! अरे!! अब इसमें बेचारे फेसबुक की क्या गलती .. इतना ही नही जब फेसबुक पर हैप्पी बर्थ डे की ढेर सारी शुभकामनाएं मिलती है तो भी बौखला जाते हैं कि इतनी सारी बधाई मिल रही है समय ही नही है सभी को थैंक्स कहने का …!!!

क्या हैं आप ऐसे या … ???Jara Sochiye

सोशल साईटस बनाम अनसोशल ऐक्टिविटीज – Monica Gupta

सोशल साईटस बनाम अनसोशल ऐक्टिविटीज Sociale sites / unsocial activities सोशल नेट वर्किंग पर हम कितने सोशल … छेडखानी, पीछा करना, अश्लीलता, तंग करना, अपशब्द  बोलना ,अस्वच्छता , गंदगी सिर्फ असल जिंदगी मे ही नही सोशल मीडिया पर भी होता है और जिसकी वजह से सोशल अनसोशल बन जाता है. एक सहेली का birth day था सोचा … read more at monicagupta.info

 

August 30, 2016 By Monica Gupta Leave a Comment

Skirts, ladies and India’s Tourism Minister

 

Skirts, Girls and India's tourism minister

Skirts, ladies and India’s Tourism Minister

Advice – हमारा भारतीय पहनावा और संस्कार .

केंद्रीय संस्‍कृति और पर्यटन मंत्री महेश शर्मा ने कहा है कि भारत आने वाली महिला विदेशी पर्यटक स्‍कर्ट या अन्‍य छोटे कपड़े नहीं पहनें.ये सुनकर भारतीय लडकियां सोच में हैं कि किसलिए उन्होनें विदेशी महिलाओं को कहा होगा.

Tourism Minister of India dr Mahesh Sharma has said foreign women should not wear skirts or walk alone at night in the country’s small towns and cities “for their own safety”.

Female tourists should not wear skirts in India, says tourism minister | World news | The Guardian

Foreign arrivals issued with welcome kit including safety advice for women, after high-profile assaults Read more…

केंद्रीय संस्कृति मंत्री की ‘छोटी’ सलाह- भारत आने वाले विदेशी सैलानी स्कर्ट न पहनें

केंद्रीय संस्‍कृति मंत्री महेश शर्मा ने कहा है कि भारत आने वाली महिला विदेशी पर्यटक स्‍कर्ट या अन्‍य छोटे कपड़े नहीं पहनें. Read more…

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वैसे इस बात का हल्ला तो इतना मच गया कि मानो उन्होने लिखा और उसे मान लिया गया… नियमों को ताक पर रखने में कानून की धज्जिया या मजाक उडाने में हमसे बेहतर और कोई नही !!!

 

ऑडियो – डियर महिलाओं – Monica Gupta

बिहार के शिक्षा मंत्री ने जब केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री को अपने ट्वीट में संबोधित करते हुए ‘डियर’ लिखा तो इसके जवाब में स्मृति ने पूछ लिया, ‘महिलाओं को डियर कबसे लिखने लगे.’ read more at bbc.com

क्लिक करिए और सुनिए महिलाओं और उनकी सोशल नेट वर्किंग पर 2 मिनट और 27 सैकिंड की ये ऑडियो – डियर – महिलाओं ऑडियो – डियर महिलाओं घर के सामने से एक सभ्य महिला अपनी कार बैक कर रही थी और Read more…

 

वैसे आपके क्या विचार है इस बारे में …

 

 

 

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