Monica Gupta

Writer, Author, Cartoonist, Social Worker, Blogger and a renowned YouTuber

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September 11, 2015 By Monica Gupta

कितने दूर कितने पास

कितने दूर कितने पास

किससे  दूर किसके पास …

मैं नेट पर काम कर रही थी कि अचानक गेट पर धंटी बजी. ओफ !! कौन होगा !! असल में, वो क्या है ना कि कई बार कुछ शरारती बच्चे ऐसे ही घंटी बजा कर भाग जाते हैं तो सोचा शायद वही हों पर एक ही मिनट में दुबारा घंटी बजने पर मैं समझ गई कि बाहर जरुर कोई है.बाहर गई तो एक महिला खडी थी. मेरे पूछ्ने पर उस महिला ने इशारा करके बताया कि वो हमारे घर के पीछे ही रहते हैं उनका नया घर बन रहा है इसलिए वो POP देखने आई है क्योकि आपका घर नया बना है ना … मैने उसे कभी नही देखा था इसलिए मैं उसे भीतर लाने में इच्छुक नही थी इसलिए गेट पर ही खडे खडे बोला कि हमने  बिल्कुल साधारण सा पीओपी करवाया है पर जब उसने हमारे अडोस पडोस में रहने वालो के बारे में बताया कि वो उन्हें जानती है तो ना चाह्ते हुए भी मैं एक घर के साथ भीतर ले आई. उसने दो चार मिनट लगाए एक दो कमरे  देखे और कुछ ही पल में हम बाहर आ गए.

मुझे महसूस तो हुआ पर मैने उससे चाय पानी का भी नही पूछा. असल में, आज के माहौल को देखते हुए एक डर सा रहता है कि पता नही कौन है कितनी सही है वगैरहा वगैरहा… !! जाते जाते मैनें उसे जता भी दिया कि क्षमा करें मैने आपको पहले कभी देखा भी नही और आज का समय ठीक नही है इसलिए.. इस पर वो बोली कि वो समझती है और थैक्स कह कर चली गई.

कुछ देर नेट पर काम करने का मन ही नही किया. सोच रही थी कि हम कितना बदल गए हैं कभी हम भारतीयों की पहचान यही होती थी कि घर आए मेहमान का स्वागत करते थे बेशक गांव में ये परम्परा आज भी है पर छोटे शहरों में किसी अनजाने भय से गुमनाम सी होती जा रही है और मैंट्रो में तो यह खत्म ही हो गई है. तभी देखा कि फेसबुक पर दो तीन मैसेज आए हुए हैं जिन्हें मैं जानती तक नही. मैं सोच रही थी कि फेसबुक या अन्य सोशल नेट वर्किंग साईटस पर हम कितना जानते हैं लोगो को पर उन अनजाने लोगो को जवाब देने  में जरा भी देर नही लगाते … चाहे मित्रता स्वीकार करनी हो या मैसज करना हो पर जो हमारे घर के नजदीक रहते हैं उन्हें हम जानते तक नही….

writer on computer photo

Photo by C.E. Kent

 

कितने दूर कितने पास

September 11, 2015 By Monica Gupta

मीट पर प्रतिबंध

मोनिका गुप्ता

 

 

मोनिका गुप्ता

बैन पर कार्टून मोनिका गुप्ता

 

मीट पर प्रतिबंध

मीट पर बैन होना चाहिए या नही इस विषय पर टीवी पर बहस जोरों पर हैं और जो लोग इसे नही खाते उनका दिमाग देख सुन कर ही घूमे जा रहा है कि सरकार के बैन का तो पता नही पर टीवी पर ऐसी खबरो पर प्रतिबंध यानि बैन  कब लगेगा !!!

Will ensure there is no meat ban: Sena

मुंबई। जैनियों के पर्यूषण पर्व के दौरान मुंबई में मांस की बिक्री पर प्रतिबंध को लेकर महाराष्ट्र में सत्तारूढ़ भाजपा और शिवसेना के गठबंधन में दरार पैदा हो गई है। शिवसेना ने बुधवार को कहा कि वह इस तरह का कोई प्रतिबंध लागू नहीं होने देगी। मंगलवार को बीएमसी आयुक्त अजय मेहता ने पर्यूषण पर्व को देखते हुए मुंबई में चार दिन के लिए मीट की बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया। इसके अनुसार 10, 13, 17 और 18 सितंबर को चार दिनों के लिए मुर्गा और बकरे के मीट पर प्रतिबंध रहेगा। निजी दुकानदारों को भी कच्चा मीट बेचने की इजाजत नहीं दी जाएगी। हालांकि मछली और अंडे को प्रतिबंध से बाहर रखा गया है।

इस मुद्दे पर भाजपा से अलग रुख अपनाते हुए शिवसेना अध्यक्ष उद्धव ठाकरे ने कहा कि हम यह सुनिश्चित करने का प्रयास करेंगे कि मीट की बिक्री पर किसी तरह का प्रतिबंध न हो। दिलचस्प बात यह है कि राज्य सरकार की तरह शिवसेना बीएमसी में भी भाजपा के साथ सत्ता में है। इस बीच, मीट की बिक्री पर प्रतिबंध की आलोचना करने के एक दिन बाद राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी अपने रुख से पलट गई है। बुधवार को राकांपा शासित नवी मुंबई नगर निगम ने भी नौ से 17 सितंबर तक मीट की बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया।

Read more…

मीट पर प्रतिबंध या मीट पर बैन  के बारे मे आपकी क्या सोच है जरुर बताईएगा !!!

September 10, 2015 By Monica Gupta

Google Trends

cartoon monica bhaskermonica cartoon google

Google Trends

गूगल ट्रेंड कर रहा है मेरा बनाया कार्टून विषय है व्यापमं घोटाला और इसी पर आज जब इसी विषय पर  गूगल सर्च कर रही थी तो नजर पडी अपने ही बनाए कार्टून पर जोकि Google Trends कर रहा है Thumb nail  भी आप मेरे कार्टून को देख सकते हैं …

September 9, 2015 By Monica Gupta

बिहार चुनाव

बिहार चुनाव

बिहार चुनाव
बिहार चुनाव

बिहार चुनाव

बिहार चुनाव का बिगुल बज गया . अब कमर कसने का टैम आ गया नेता जी … पर खाए पीए नेता जी … अब तनिक हैरान परेसान से हो रहे हैं क्योकि कमरवा अब कमरा सा बन गवा है और कसने का तो सबाल ही पैदा नही होय रहा …

ABP News

12 अक्टूबर को पहले दौर का चुनाव

पहले चरण में भागलपुर मंडल के दोनों जिले भागलपुर और बांका, मुंगेर प्रमंडल के सभी पांचों जिले मुंगेर, लखीसराय, शेखपुरा, खगड़िया, जमुई के साथ मिथिला मंडल के समस्तीपुर, बेगूसराय और मगध मंडल के नवादा जिलों में वोट डाले जाएंगे. यानी कुल 10 जिलों की 49 सीटों पर वोटिंग होगी. 2010 में इन 49 सीटों में से जेडीयू के पास 29, बीजेपी के पास 13, आरजेडी के पास 4, कांग्रेस के पास 1 और अन्य के पास 2 सीटें थी.

चुनावों का सबसे छोटा चरण है. मगध प्रमंडल के गया, जहानाबाद, औरंगाबाद, अरवल के अलावा पटना प्रमंडल के कैमूर और रोहतास में वोट डाले जाएंगे. इन 6 जिलों में विधानसभा की कुल 32 सीटें हैं. 2010 के चुनाव में जेडीयू के पास 18 बीजेपी के पास 9, आरजेडी के पास 2, एलजेपी के पास 1 और अन्य को 2 सीटें मिली थी. abpnews.abplive.in

बिहार चुनाव

September 9, 2015 By Monica Gupta

बच्चे मन के सच्चे

बच्चे मन के सच्चे

बच्चे मन के सच्चे – बच्चे और उनका बचपन . बहुत मासूम होता है. बच्चे मन के सच्चे होते हैं बिना छल के जो भी कहतें हैं सच ही कहते हैं.

बच्चे मन के सच्चे

कल कुछ ऐसा ही देखने को मिला. असल में,  घर पर मेहमान आए हुए थे. उनका बच्चा बहुत ही छोटा था. बहुत शरारती भी था. खाने के मामले में तो अपनी मम्मी को बहुत तंग कर रहा था. वो आगे आगे दौड रहा था उसकी मम्मी उसके भागते भागते ही खाना खिला रही थी. मैने उससे बोला अरे !! आराम से बैठ कर खाओ ना ..

इस पर वो बोला ठीक है आप टीवी लगा दो. मैने तुरंत टीवी चला दिया और कार्टून नेटवर्क लगाने लगी क्योकि बच्चो का कार्टून जैसे मिकी माऊस . छोटा भीम  जैसी कार्टून पसंद आती हैं. इस पर वो बोला अरे नही न्यूज चैनल लगा दो .. ज़ी न्यूज या एबीपी … या कोई भी बस न्यूज चैनल …मैं हैरान !! अरे !! इतना छोटा बच्चा और न्यूज का शौक… मेरा तो दिमाग दौडने लगा कि इस बच्चे का इंटरव्यू ब्लाग पर दूंगी कि देखो इतना छोटा सा खबरों का शौकीन…

तभी अचानक उसने ओह शिट बोला और मेरा ध्यान टूटा.. अरे क्या हुआ बेटा !!उसने बोला न्यूज आ गई. मैने कहा… तो ??? news channel  में तो न्यूज ही आएगी ना … इस पर उसकी मम्मी ने बताया कि इसे विज्ञापन बहुत पसंद हैं और विज्ञापन सबसे ज्यादा न्यूज चैनल्स में ही आते हैं इसलिए ये न्यूज चैनल देखते हुए खाना पसंद करता है इसी बीच में बच्चा बोला “मिलते हैं एक ब्रेक के बाद”, “आप देखते रहिए… !! और फिर भागने लगा… उसकी मम्मी फिर उसके पीछे पीछे प्लेट लेकर … हे भगवान !!! 

वैसे बच्चा सच ही तो बोला … न्यूज चैनल में खबरे कम और विज्ञापनों की भरमार रहती है … धारावाहिको मे फिर भी कम रहती है पर न्यूज चैनल में एक खबर और दस मिनट का ब्रेक … आप उस बीच में अपना बहुत काम निबटा सकते हैं … 🙂

बच्चों की दुनिया बहुत प्यारी है इसे प्यारा ही बने रहने दीजिए

बच्चे मन के सच्चे

बच्चे मन के सच्चे

 

बच्चे मन के सच्चे  आपको कैसा लगा … जरुर बताईगा !!

September 8, 2015 By Monica Gupta

अभिव्यक्ति की स्वंतत्रता

 

cartoon freedom by monica gupta

अभिव्यक्ति की स्वंतत्रता

आश्चर्यजनक किंतु सत्य …सुनने मे आया है कि महाराष्ट्र सरकार ने सरकुलर जारी किया है जिसमे अगर जनप्रतिनिधियों पर आपतिजनक टिप्पणी की, बोला या चित्र बनाया तो आईपीसी धारा 124ऎ के अंतर्गत देशद्रोह माना जाएगा … पर ये नही बताया कि अगर जनप्रतिनिधि ही आपतिजनक बयान दे जिससे आम आदमी की भावनाए भडके और चैनल वाले मुद्दा बनाए तो उन जनप्रतिनिधि खिलाफ भी same टू same कानून रहेगा या … ???

महाराष्ट्र की फडणवीस सरकार के सरकुलर  से तनाव पैदा हो गया है। महाराष्ट्र के गृह विभाग ने कहा है कि, किसी भी जनप्रतिनिधी खिलाफ़ दिए बयान या लेख से अगर हिंसा भड़कती है तो ऐसा करनेवाले के खिलाफ IPC की धारा 124A के तहत कार्रवाई होगी।

यक्ष प्रश्न यही है कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता या आजादी पर इस तरह से रोक लगाना सही है या कानून सभी के लिए समान रहेगा …

अभिव्यक्ति की स्वंतत्रता

http://khabar.ndtv.com/news/india/read-the-the-circular-of-maharashtra-government-1214348

 

वैसे इस बारे में आपकी राय क्या है जरुर बताईएगा… क्योकि हमारे एक कार्टूनिस्ट मित्र ने तो कार्टून बनाने ही बंद कर दिए है और तनाव में चले गए हैं

September 8, 2015 By Monica Gupta

दही हांडी उत्सव

cartoon monica gupta dahi haandi

 

दही हांडी उत्सव

अच्छे दिन उत्सव

दही हांडी उत्सव dahi handi utsav बहुत धूमधाम से मनाया गया हालाकि पिछ्ले साल सरकार ने भी कुछ नियम बनाए थे जिसके चलते इस साल उतनी रौनक देखने को नही मिली जितनी हर साल मिला करती थी और दूसरी बात महंगाई और अन्य बातो को लेकर भी जनता में सरकार के प्रति कुछ रोष है जो कि दही हांडी फोडने के रुप मे देखने को मिल रहा है…

हमारी गूगल मूगल लेडी गोविंदा को डर लगता है इसलिए कुर्सी पर खडे होकर हाथ मे डंडा लेकर मटकी फोडने को तैयार है

दही हांडी उत्सव …. आपको कैसा लगा … जरुर बताईएगा !!

दही हांडी खेल एडवेंचर स्पोर्ट

दही हांडी खेल एडवेंचर स्पोर्ट किसी ऎडवेंचर स्पोर्ट से कम नही है दही हांडी फोडने का खेल और हमारे स्किल्ड भारतीय इसे बहुत शान से करते हैं पर अफसोस इसी एडवेंच Read more…

 

 

September 7, 2015 By Monica Gupta

रसोईघर की सफाई

रसोईघर की सफाई

घर का सबसे महत्वपूर्ण कमरा है रसोईघर यानि किचेन .. जहां सुबह से लेकर देर रात तक चहल पहल रहती है खाने बनाने के साथ साथ कभी चाय, कभी खाना तो कभी मीठा कुछ न कुछ बनता ही रहता है.कुल मिलाकर व्यंजनों की महक से महकता रहता है रसोईघर..!! लेकिन रात को रसोई सोई सोई सी हो जाती है. एक दम शांत.मानो पूरा आराम लेकर  अगले दिन के लिए खुद को तैयार कर रही हो..

बात उस रात की है जब पानी पीने के लिए रसोई में जाना पडा. रात का दो बज रहा था. हर जगह सन्नाटा ही सन्नाटा था. सडक पर बहुत दूर से एक आध कुत्ते के भौकने की आवाज आ रही थी. कुल मिला कर माहौल पुरा डरावना था.फिर भी मैं लाईट जला कर रसोई की ओर बढ गई.

कुछ ही पल बाद मै रसोई के बाहर थी और भीतर जाने से पहले मैणे रसोई की लाईट भी जलाई. अचानक कुछ ऐसा देखा की मेरी सांस उपर की उपर और नीचे की नीचे अटक गई. इतने भयावह सीन की तो मैनें सपने मे भी कल्पना नही की थी. मैं तो जहां खडी थी वही ठिठक कर खडी रह गई.

आगे  कुछ बताने से पहले मैं आपको बता दूंकि  आमतौर पर महिलाए रात को गैस चूल्हा और स्लैब साफ करके सोती हैं ताकि सुबह सुबह रसोई साफ न करनी पडी और बच्चों के लिए नाश्ता व अन्य चीजें समय पर बन जाए.

मैं भी ऐसा ही करती हूं और कई बार साफ सुथरी रसोई मे दाल इत्यादि भी भिगो कर रखी या बादाम भिगो कर रखे तो उन्हे ढकने की जरुरत नही समझती कि सारी रसोई साफ है कोई क़ीट, मकौडा तक नही है तो क्या जरुरत और कई बार तो साफ स्लैब पर सुबह बिना कपडा लगाए स्कूल के टिफिन के लिए चपाती भी बना लेती.

पर आज कुछ ऐसा देखा कि …. !!! असल में जब लाईट जलाई तो देखा कि स्लैब पर तीन चार कोकरोच आराम से घूम रहे थे और छिपकली भी अपने परिवार के साथ टहल रही थी. अचानक लाईट पडते थे उनका चौंकना भी स्वाभाविक था. सब इधर उधर दौडने लगे. कभी स्लैब पर रखे तवे पर तो कभी भिगाई हुई दाल पर और धो कर रखे बर्तनों पर ऐसे भाग रहे थे ऐसे भाग रहे थे कि बस पूछिए ही मत…एक तो भाग दौड के चक्कर में मेरे पैरों पर ही आ गिरी. एक तरफ वो मुझे देख  कर भाग रही थी तो दूसरी तरफ मैं उससे  डर कर भाग रही थी

हे भगवान !! वो रसोई जिसे मैं रात को चमका कर जाती थी छिपकली और काकरोचों का अड्डा बना हुआ था.

खैर, तीन चार मिनट के अंदर अंदर सब नार्मल हो गया पर मुझे बडी सीख दे गया सबसे पहली तो जो भी रसोई मे रखो सब ढक कर रखना चाहिए. प्लेट कटोरी आदि सोने से पहले भीतर या स्टेट्ड पर लगा देने चाहिए. और रात को रसोई कितनी भी साफ करके क्यो न सोए सुबह एक बार स्लैब पर कपडा जरुर लगाना चाहिए.

उस रात मैं फिर  सोई नही और गूगल सर्च करने की छिपकली या काकरोचों आदि को कैसे भगाना चाहिए.

 

lizard photo

Photo by incidencematrix

Natural Alternatives To Pest Control |

मच्‍छर पर रोक- मच्‍छरों को भगाने के लिये आप नीम, तुलसी और गंजनी की पत्‍तियों को अपने घर के आस-पास लगाएं। इस बात का ध्‍यान रहे कि इनको प्रभावित करने वाली चीजें घर पर ना रखें। गहरे रंग के कपड़े, परफ्यूम और हेयर स्‍प्रे से यह काफी आकर्षित होते हैं।

कपूर का प्रभाव- कपूर में सल्‍फर पाया जाता है जो कि कीट को दूर रखने के लिये बहुत ही कार्यगर है। इसके अंदर एंटी बैक्‍टीरियल और एंटी फंगल तत्‍व पाए जाते हैं। अपने घर पर कपूर की दो-तीन गोलियां जलाएं जिससे आपको छोटे-मोटे कीटों से छुटकारा मिल सके।

चींटी उपचार- क्‍या आपके किचन में चिटियों का प्रकोप है, जो आपके चाय के कपों और अलमारी में रखी चॉकलेट को खा जाती हैं। अगर ऐसा है तो अपने किचन को हमेशा साफ-सुथरा बनाएं रखनें में ही भलाई है। इसके साथ ही हफ्ते में एक बार कैरोसीन से पोछा लगाने पर भी वह गायब हो जाती हैं। Read more…

Ajab Gjab

जानिए छिपकली से जुड़े शकुन और अपशकुनों के बारे में। 1 – नए घर में प्रवेश करते समय यदि गृहस्वामी को छिपकली मरी हुई व मिट्टी लगी हुई दिखाई दे तो उसमें निवास करने वाले लोग रोगी हो सकते हैं, ऐसा शकुन शास्त्र में लिखा है। इस अपशकुन से बचने के लिए पूरे विधि-विधान से पूजन करने के बाद ही नए घर में प्रवेश करना चाहिए। 2 – अगर छिपकली समागम करती मिले तो किसी पुराने मित्र से मिलना हो सकता है। लड़ती दिखे तो किसी दूसरे से झगड़ा संभव है और अलग होती दिखे तो किसी प्रियजन से बिछुडऩे का दु:ख सहन करना पड़ सकता है। 3 – शकुन शास्त्र के अनुसार दिन में भोजन करते समय यदि छिपकली का बोलना सुनाई दे शीघ्र ही कोई शुभ समाचार मिल सकता है या फिर कोई शुभ फल प्राप्त हो सकता है। हालांकि ये घटना बहुत कम होती है क्योंकि छिपकली अधिकांश रात के समय बोलती है। 4 – छिपकली अगर माथे पर गिरती है तो संपत्ति मिलने की संभावना बढ़ जाती है। 5 – यदि छिपकली आपके बालों पर गिरती है, इसका मतलब मृत्यु सामने खड़ी है। Read more…

वैसे पढा ये भी है कि मोर पंख रखने से छिपकली नही आती अब उसी की तालाश मे हूं … शायद काम बन जाए … फिलहाल तो बस बहुत सर्तक हो गई हूं …

रसोईघर की सफाई के बारे में आपके पास भी कोई टिप्स हो तो जरुर बताईएगा …

September 7, 2015 By Monica Gupta

न्यूज चैनल्स

न्यूज चैनल्स

कुछ देर पहले मणि से बात हो रही थी. विषय था वही धिसा पिटा राधे मां और इंद्राणी का (और अब तो डोली बिंद्रा की एंट्री भी हो गई है) मणि का कहना ये था कि ये चैनल वाले बहुत कोमल दिल के होते हैं किसी का दुख दर्द नही देख सकते इसलिए बार बार ऐसी खबरें दिखाते है.. ह हा हा … मेरा हंसना उसे अच्छा नही लगा इसलिए मैने हंसी रोकते हुए बताया कि ये चैनल वाले कोई ईमोशनल, विमोशनल नही होते.

बहुत करीब से देखा और जाना है मैने ..बस हर बात मे टीआरपी मसाला खोजते हैं और जहां मसाला मिला वही दर्शकों पर छिडकाव कर देते हैं. अगर ध्यान से देखोगी तो पत्थर दिल होते हैं. सबसे जल्दी, सबसे तेज खबर दिखाने के चक्कर मे कई बार लोगो की भावनाओ से भी खेल जाते हैं जिसकी आम आदमी जिंदगी भर भरपाई नही कर पाता.कहां खबर बनानी है और कहां दबानी होती है उसमे एक्स्पर्ट होते हैं ये …

कई बार बहुत दुख होता है जब आम आदमी का जीना ही दूभर कर देते हैं.जैसाकि अगर किसी ताजा उदाहरण की बात करें वो है दिग्विजय सिह की शादी … उनकी पत्नी अमृता जोकि खुद भी न्यूज एंकर है उन्होने लिखा कि वो साईबर क्राईम का शिकार हुई हैं उनके खिलाफ आपतिजनक और अपमान जनक भाषा  का इस्तेमाल किया गया. सोशल मीडिया पर भी बहुत शर्मिंदा किया गया. जबकि उनकी कोई गलती ही नही थी.

कल ही ये लैंटर फेसबुक पर डाला और वायरल हो गया.  और मीडिया को फिर मसाला मिल गया जबकि ये किसी की निजी जिंदगी है इसमे इस तरह से दखल देना … हैरानी इस बात की भी हुई कल एक न्यूज चैनल के सवांददाता ने फेसबुक पर ही लिखा कि उन्होनें बेशक अपने चैनल पर ये खबर बार बार चलाई पर दिल से इस तरह की खबर चलाने पर वो बहुत दुखी हैं. और उसी बात के बाद ह हा हा  हा हा लिखा हुआ था .

समझ से बाहर है कि ऐसी खबरों से किसका और क्या भला होगा. ऐसे में तो  अपना मजाक ही बनवा रहे हैं ये न्यूज चैंनल्स वाले और तो क्या !!!cartoon radhey ma by monica guptaन्यूज चैनल में निष्पक्षता का अंत हो चुका है और शायद यही ब्रेकिंग न्यूज भी है जिसे वो दिखाने से परहेज करते हैं..

September 6, 2015 By Monica Gupta

दही हांडी खेल एडवेंचर स्पोर्ट

दही हांडी खेल एडवेंचर स्पोर्ट

किसी ऎडवेंचर स्पोर्ट से कम नही है दही हांडी फोडने का खेल और हमारे स्किल्ड भारतीय इसे बहुत शान से करते हैं पर अफसोस इसी एडवेंचर का शिकार अनगिनत गोविंदा भी बन रहे हैं.सन 2008 में दही हांडी में सात आठ स्तर तक पहुंचने वाले दयानंद आज जमीन पर बिना सहारे भी नही चल पाते. दही हांडी तोड़ते समय दयानंद सांतवें स्तर पर थे कि अचानक किसी का संतुलन बिगड़ गया और पूरी की पूरी मंडली ज़मीन पर आ गिरी. इस हादसे में दयानंद की रीढ़ की हड्डी में चोट आयी और वह हमेशा के लिए विकलांग हो गए. ऐसे अनगिनत दयानंद हैं जोकि जिंदगी भर के लिए अपाहिज हो चुके हैं. ऐसे खेल का क्या फायदा !! हालाकि मटके फोड खेल के गोविंदाओं पर 18 साल की उम्र होने की पाबंदी, हांडी की ऊंचाई 20 फ़ीट तक सीमित रखने और सुरक्षा उपकरण इस्तेमाल करने की बात कही है पर फिर भी लाईव टेलिकास्ट के दौरान ऐसा देखने को मिल नही रहा है … !!

दही हांडी खेल  एडवेंचर स्पोर्ट   या  दही हांडी खेल बनाम  एडवेंचर स्पोर्ट  क्या कहा जाए इसे  ….

BBC

बीबीसी से बातचीत में दयानंद ने कहा, “दही हांडी बहुत अच्छा उत्सव है. लेकिन इसे कुछ नियम तथा सुरक्षा के साथ मनाना बेहद ज़रूरी है.”

उन्होंने कहा, “मुंबई उच्च न्यायालय ने इस बारे में जो आदेश दिया है वह सराहनीय है. मैं इसका स्वागत करता हूं. यह पहले किया जाना चाहिए था. मैं सिर्फ़ इतना चाहता हूं कि जो दुख और यातनाएं मैंने सही है वह किसी और के नसीब में न आए.”

हादसों के बाद इन युवाओं के साथ-साथ उनके परिवार भी आहत हुए हैं.

दयानंद ने कहा, “जब कोई गोविंदा दही हांडी में घायल होता है या जान गवांता है तो इस व्यक्ति का पूरा परिवार प्रभावित होता है. इन हादसों के बाद की ज़िंदगी नर्क से भी बदतर हो जाती है,”.

उन्होंने सभी गोविंदाओं से उत्सव के दौरान पूरी सावधानी बरतने की अपील की.

मुंबई से सटे भिवंडी के रहने वाले नागेश भोईर साल 2009 में दही हांडी में घायल हुए थे. वह आज तक बिस्तर पर हैं.

उन्होंने कहा, “दही हांडी मूलतः बच्चों का खेल है. भगवान श्रीकृष्ण के बचपन की शरारतों में से एक दही हांडी है. इसमें बच्चों का शरीक होना स्वाभाविक है लेकिन उनकी सुरक्षा सर्वोपरि है.”

गुणीजन कहते हैं, “मुंबई, ठाणे और नवी मुंबई इलाक़े में जितने भी लोग गोविंदाओं का मार्गदर्शन करते हैं, वे सब बच्चों की सुरक्षा के प्रति बेहद सजग होते हैं. उनके अभिभावक बड़े विश्वास के साथ बच्चों को हमें सौंपते हैं, तब उनकी सुरक्षा हमारी ज़िम्मेदारी बन जाती है.” Via bbc.com

Dahi Handi Govinda insurance now in trend – Navbharat Times

सर्वाधिक इश्योरेंस कराने वाली ‘ओरियंटल इश्योरेंस कंपनी’ ने 55,908 गोविंदाओं का बीमा दर्ज किया है। इसमें वि‌विध इलाकों के कुल 943 जन्माष्टमी मंडल शामिल हैं। दही हांडी मंडलों का इंश्योरेंस कराने वाली बीमा कंपनियां और भी हैं। इनके आंकड़े जोड़ने पर बीमे की सुरक्षा वाले गोविंदाओं की संख्या लाख पार करने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। Read more…

lord krishna india photo

Photo by Abee5

ऐसे में या तो दही हांडी खेल एडवेंचर स्पोर्टबंद होना चाहिए या आयोजको को इस बात पर ध्यान देना होगा अन्यथा … वैसे  देखा जाए तो ये बालपन की शरारत ही तो थी बाल गोपाल की पर अगर इससे किसी के शरीर को हानि पहुंचे तो बेहद दुखद ….

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