Monica Gupta

Writer, Author, Cartoonist, Social Worker, Blogger and a renowned YouTuber

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July 9, 2015 By Monica Gupta

Samsun – Glimpses – Janamashtami

Samsun – Glimpses – Janamashtami

Samsun creations के अंतर्गत ढेरों कार्यक्रम बनाए गए ..  जिसमे ये है एक झलक  जमाष्टमी स्पेशल कार्यक्रम की  … जिसमे बच्चों ने अपने तरीके से मनाया  🙂

https://monicagupta.info – Monica Gupta – Glimpses of TV programs by Samsun Creations under talent search & promotion program of DOST at Sirsa, Haryana.

Samsun – Glimpses – Janamashtami

 

July 9, 2015 By Monica Gupta

Samsun – Glimpses – Kuchh Tum Kaho

Samsun – Glimpses – Kuchh Tum Kaho

इसमें आप देखेंगें सैमसन क्रिएशनस दारा बनाए गए कुछ कार्यक्रमों की झलक… पहली झलक  मे बहस इस बात पर है कि टयूशन होनी चाहिए या नही … बच्चों पर ट्यूशन कितना असर डालती है

https://monicagupta.info – Monica Gupta – Glimpses of TV programs by Samsun Creations under talent search & promotion program of DOST at Sirsa, Haryana.

July 9, 2015 By Monica Gupta

Monica Gupta – Zee News

Monica Gupta – Zee News

क्राईम न्यूज कवर करती हुई ज़ी न्यूज संवाददाता मोनिका गुप्ता

https://monicagupta.info – Monica Gupta, journalist at Sirsa, Haryana as Crime Reporter on Zee News.

July 9, 2015 By Monica Gupta

Monica Gupta – SamSun – DOST – Himanshu

Monica Gupta – SamSun – DOST – Himanshu

Samsun creations के अंतर्गत ढेरों कार्यक्रम बनाए गए ..  जिसमे ये है  कार्यक्रम है   … जिसमे जो बच्चे प्रोग्राम में  हिस्सा लेते उनके पेरेंट्स से एक मुलाकात कि इन्हे कैसा लग रहा है ….

https://monicagupta.info – http://www.dost.org.in – Video – Interview of parents of children participating in Samsun Creations making TV Programs for DOST, an NGO for Talent Search & Promotion at Sirsa, Haryana, India.

July 9, 2015 By Monica Gupta

Monica Gupta – Samsun – Dost – Jokes

Monica Gupta – Samsun – Dost – Jokes

Samsun creations के अंतर्गत ढेरों कार्यक्रम बनाए गए ..  जिसमे ये है एक झलक  जोक्स कार्यक्रम की  … जिसमे बच्चों ने अपने तरीके से चुटकुले सुनाए

https://monicagupta.info – Monica Gupta – TV program on jokes by Samsun Creations under talent search & promotion program of DOST at Sirsa, Haryana.

July 9, 2015 By Monica Gupta

गुस्सा अच्छा है

cartoon commentator

गुस्सा अच्छा है

पता नही अकसर लोग कहते मिलते जाते हैं कि गुस्सा नही करना चाहिए. गुस्सा सेहत के लिए अच्छा नही होता वगैरहा वगैरहा. पर गुस्सा तो अच्छा है. सच में, बहुत अच्छा है.

अब घर की ही बात करें तो घर पर कई बार आपको लगता होगा कि आज चपाती बहुत मुलायम बनी है जोकि अकसर नही बनती है या आज कपडे बहुत साफ धुले है जोकि अक्सर साफ नही धुलते.ये सब गुस्से की ही महिमा है कि गुस्सा आटा गूंथते समय या कपडे धोते समय निकाला जाता है और नतीजा हमारे सामने होता है.

गुस्सा करने से सेहत अच्छी रहती है वो इसलिए कि जब हमे बहुत ज्यादा गुस्सा आता है तब खाना खाने का मन नही करता.मुहँ फुला कर चुपचाप लेट जाते है.एक तरह से उपवास ही हो जाता है. हाँ, पानी जरुर ज्यादा पी लेते है. भई, किसी तरह पेट तो भरना ही है ना.

एक बात और कि शांति बहुत हो जाती हैं.सास बहू या पति पत्नी सब चुप हो जाते है. यहाँ तक की टीवी भी बंद कर दिया जाता है नाराजगी दिखाने के लिए गुस्से में.

नाखूनो की कटाई हो जाती है क्योकि गुस्से मे हम अपने नाखूनो को चबाने लगते है.

हाँ, गुस्से मे भगवान का नाम बहुत लिया जाता है कि भगवान के नाम पर अब बस चुप करो . ओम शांति.गुस्सा जाने के बाद खुद पर हंसी बहुत आती है वो भी अच्छी बात है. सबसे बडी बात जब तक आग हमारे सीने मे नही होगी हम जीत नही पाएगे. अगर किसी ने चैंलज कर दिया को तुम डाक्टर या पत्रकार किसी कीमत पर नही बन सकते. बस यही बात एक आग बन जाती है और गुस्से मे ही सही हम वो बन कर दिखाते है.. अब आप को गुस्सा आ रहा है कि लेख अच्छा नही लगा तो आप इस पर कमेंट लिखेग़ें फिर मैं उसका जवाब  दूंगी फिर आप दुबारा लिखेगें इसी बहाने आपका लेखन भी सुधर जाएगा और आप टवीटर या फेसबुक पर लिख कर जाने माने कमेंटेटर बन सकते हैं …तो  सोचना क्या गुस्सा अच्छा है ना…

कैसा लगा आपको ये गुस्सा … मेरा मतलब ये लेख … जरुर बताईगा 🙂  और अगर इसी को लेकर आपके अपने अनुभव हो जो हमसे सांझा करना चाहे तो भी आपका स्वागत है …

July 8, 2015 By Monica Gupta

Whistleblowers

 

cartoon vyapam by monica gupta

 

Whistleblowers

व्यापम घोटाले के दौरान बार बार एक शब्द बहुत सुनने को मिला वो शब्द था ..Whistleblowers   means व्हिसल ब्लोअर्स… थोडा बहुत अंदाजा तो था कि ये कौन लोग होते हैं पर ज्यादा डिटेल नही पता थी इसलिए नेट सर्च करना शुरु किया.. तब पता चला कि

 

2010 में यूपीए-2 सरकार एक बिल लेकर आई. नाम था, पब्लिक इंटरेस्ट डिसक्लोज़र एंड प्रोटेक्शन फॉर पर्सन्स मेकिंग डिसक्लोज़र बिल 2010. संक्षेप में कहें, तो व्हिसल ब्लोअर बिल 2010. व्हिसल ब्लोअर बिल 2010 में सरकारी धन के दुरुपयोग और सरकारी संस्थाओं में हो रहे घोटालों की जानकारी देने वाले व्यक्ति को व्हिसल ब्लोअर माना गया यानी भ्रष्टाचार के ख़िला़फ बिगुल बजाने वाला. इस बिल में केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) को अतिरिक्त अधिकार दिए गए. सीवीसी को दीवानी अदालत जैसी शक्तियां भी देने की बात कही गई. सीवीसी भ्रष्टाचार के ख़िला़फ आवाज़ उठाने वालों के ख़िला़फ अनुशासनात्मक कार्रवाई रोक सकता है. भ्रष्टाचार की जानकारी देने वाले की पहचान गुप्त रखने की ज़िम्मेदारी सीवीसी की है. अगर पहचान उजागर होती है, तो ऐसे अधिकारियों के ख़िला़फ शिक़ायत भी की जा सकेगी.
इस विधेयक के दायरे में केंद्र सरकार, राज्य सरकार और सार्वजनिक क्षेत्र के कर्मचारी भी शामिल हैं. बहरहाल, इस विधेयक में सीवीसी को जितनी ज़िम्मेदारी सौंपी गई, सीवीसी उसे पूरा कर पाने में सफल होगा या नहीं, यह एक सवाल था. जैसे, क्या सीवीसी की सांगठनिक संरचना इतनी बड़ी है, जिससे वह भारत जैसे बड़े देश में व्याप्त भ्रष्टाचार की समस्या से लड़ पाए? राज्यों, ज़िलों और पंचायतों में फैले भ्रष्टाचार से कैसे निबटेगा सीवीसी? यह विधेयक 2011 में ही लोकसभा से पारित हो गया था, लेकिन उच्च सदन से पारित होने में इसे लंबा समय लगा. खैर, यूपीए-2 ने अंतिम समय में जब इस विधेयक को पारित कराने के लिए राज्यसभा में पेश किया, तो भाजपा ने कुछ संशोधन पेश किए थे. यूपीए-2 सरकार ने इन संशोधनों को ज़रूरी बताते हुए स्वीकार भी कर लिया था, लेकिन उच्च सदन में बहस के दौरान यूपीए ने भाजपा से इस बिल को दोबारा निचले सदन में भेजने का दबाव न बनाने का आग्रह भी किया था. संसद ने इस विधेयक को पारित कर दिया था, जिसे राष्ट्रपति की मंजूरी भी मिल गई थी.
राष्ट्रपति द्वारा विधेयक पर 9 मई, 2014 को हस्ताक्षर किए जाने के बावजूद सरकार ने अब तक इसे क़ानून के तौर पर लागू नहीं किया है. सवाल है कि एक साल बीतने के बाद भी इस बहुप्रतिक्षित क़ानून को (पारित किए जाने के बाद भी) लागू क्यों नहीं किया गया, जबकि पिछले कई सालों से पूरे देश के सामाजिक कार्यकर्ता सरकार से मांग करते रहे हैं कि भ्रष्टाचार के ख़िला़फ बिगुल बजाने वाले लोगों को सुरक्षा मुहैया कराई जाए. एक ऐसा क़ानून बनाया जाए, जिससे इस तरह के लोगों की पहचान गुप्त रखी जा सके. अब जब क़ानून बना भी, तो उसे लागू नहीं किया गया. अब, इस क़ानून को लागू करने की जगह एक बार फिर मौजूदा केंद्र सरकार इसमें संशोधन की बात कह रही है. केंद्र की एनडीए सरकर ने राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दों को व्हिसिल ब्लोअर्स प्रोटेक्टशन एक्ट के दायरे से बाहर रखने के लिए क़ानून में संशोधन का प्रस्ताव रखा है

  CHAUTHI DUNIYA

अब सवाल यह है कि सरकार भ्रष्टाचार से जुड़े मामले में किस तरह का संशोधन करना चाहती है? आ़िखर भ्रष्टाचार के मामले उजागर होने से राष्ट्र की अखंडता और सुरक्षा को किस तरह से ़खतरा हो सकता है? अगर इस क़ानून में संशोधन करना ही है, तो होना यह चाहिए था कि इस क़ानून की संस्थागत संरचना पर विचार हो. यह सोचना चाहिए कि आरटीआई क़ानून के लिए तो केंद्रीय सूचना आयोग के साथ राज्य सूचना आयोग भी हैं. उपभोक्ता अधिकारों की रक्षा के लिए तो ज़िला स्तर तक आयोग गठित किए गए हैं. फिर भ्रष्टाचार जैसी संवेदनशील समस्या से निपटने के लिए स़िर्फ सीवीसी ही क्यों? वह भी स़िर्फ केंद्रीय स्तर पर? यह अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि ऐसे में सीवीसी के काम का दायरा कितना बड़ा हो जाएगा और वह अपने तीन सदस्यों के बूते कितना बोझ ढो पाएगा. देखते हैं, व्हिसिल ब्लोअर्स प्रोटेक्टशन एक्ट में अब किस तरह के संशोधन होते हैं और उनके क्या मायने निकल कर सामने आते हैं.

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अब अगर व्यापम घोटाले की बात करें तो

Whistleblowers

BBC

आशीष की भूमिका और बाद में लगातार मिलने वाली धमकियों की वजह से अदालत ने स्थानीय प्रशासन को इन्हें सुरक्षा मुहैया कराने के निर्देश दिए.

प्रशांत के बारे में जानकारों की राय है कि इन्हीं के ज़रिए मध्य प्रदेश की मौजूदा सरकार के कुछ कथित ‘बड़े लोगों’ के नाम व्यापमं घोटाले से जोड़े जाने लगे.

बताया जाता है कि ख़ुद प्रशांत संदिग्ध अधिकारियों के कंप्यूटरों की हार्ड ड्राइव से डेटा निकालने में जांच एजेंसियों का सहयोग कर रहे थे. लेकिन प्रशांत के मुताबिक़ उनकी मुश्किलें तभी से शुरू हुईं जब उन्हें खुद कुछ ऐसा डेटा (एक्सेल शीट) मिला जिसमें कई बड़े लोगों के नाम शामिल थे.

इनका दावा है कि जहाँ ये जानकारी सार्वजनिक हुई इन्हे प्रदेश की जांच एजेंसियों ने परेशान करना शुरू कर दिया. पहले इन्हें कुछ दिन हिरासत में रखा गया और बाद में इन पर आईटी एक्ट और आईपीसी की धारा 420 के तहत मामले दर्ज किए गए.

फिर प्रशांत को हाईकोर्ट से राहत मिली. इसके बाद से प्रशांत पांडे सुप्रीम कोर्ट का दरवाज़ा भी खटखटा चुके हैं और इन दिनों सुरक्षा कारणों से अपना ज़्यादातर समय दिल्ली में ही बिताते हैं. Read more…

जो भी है .. आज ये मुद्दा बेहद गर्माया हुआ है…. !!!

July 8, 2015 By Monica Gupta

अधिनायक जय है

adhinayak  by monica gupta

अधिनायक जय है

बचपन से पढते और सुनते आ रहे हैं कि कुछ लोग इतिहास बदल देते हैं …  By God  इस का जीता जागता उदाहरण भी मिल गया … हमारे नेता  और कुछ कर पाए या न कर पाए पर देश का इतिहास जरुर बदलने पर आमादा है

अरे !! हमारे नेता के सिवा है किसी मे इतनी जुर्र्त? नेता और कुछ कर पाए या न कर पाए पर देश का इतिहास जरुर बदलने पर आमादा है चाहे अकबर की बात हो, महाराणा प्रताप की बात हो या फिर हमारे राष्ट्रीय गान जन ग़ण मन … अधिनायक की बात हो… आईए बदलते इतिहास के हम भी साक्षी बनें … भूले व्यापम व्यूपम और बदले इतिहास…… जय जय जय जय हे

Adhinayak Word Should Be removed From National Anthem 12567358

जयपुर। राजस्थान के राज्यपाल कल्याण सिंह ने कहा कि राष्ट्रगान से ‘अधिनायक’ शब्द हटाना चाहिए, इसके बदले ‘मंगल’ शब्द का इस्तेमाल होना चाहिए। अधिनायक शब्द आजादी से पहले के अंग्रेजी शासकों का महिमा मंडन करता है।

राजस्थान विश्वविद्यालय के 26वें दीक्षांत समारोह में कल्याण सिंह ने कहा -‘जन-गण-मन अधिनायक जय है.. लेकिन अधिनायक कौन है? ये अंग्रेजी शासक की प्रशंसा है। अब हमे इसकी जगह जन-गण-मन मंगल गाए.. लिखना चाहिए।’ उन्होंने कहा कि राष्ट्रगान में संशोधन करने का मतलब यह नहीं है कि वह इसके रचयिता रविंद्र नाथ टैगोर का सम्मान नहीं करते हैं।

अकबर नहीं महाराणा प्रताप महान

राज्यपाल कल्याण सिंह ने इसके पहले महाराणा प्रताप को मुगल शासक अकबर से ज्यादा महान बताया था और अकबर की बजाय महाराणा प्रताप नाम से पहले ‘महान’ शब्द लगाने की बात कही थी। ऐसे ही वे झांसी की रानी को विक्टोरिया से अधिक महान और मराठा शासक शिवाजी को औरंगजेब से महान बता चुके हैं। Via jagran.com

 

  BBC

राजस्थान के राज्यपाल कल्याण सिंह ने भारत के राष्ट्र गान ‘जन गण मन’ पर सवाल उठाकर एक नई बहस को हवा दे दी है.

कल्याण सिंह ने हाल में राजस्थान विश्वविद्यालय के 26वें दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए पूछा था कि ‘जन गण मन अधिनायक जय हो’ में अधिनायक किसके लिए है.

उन्होंने कहा था कि यह ब्रिटिश समय के अंग्रेज़ी शासक का गुणगान है. उन्होंने कहा कि राष्ट्रगान में संशोधन होना चाहिए.

अब जरा, एक नज़र इस गाने के इतिहास पर भी डाल लेते हैं.

यही वह गाना था जिसे नेताजी सुभाष चंद्र बोस की आज़ाद हिंद फ़ौज के लड़ाकों ने राष्ट्रगान के तौर पर अपनाया था.

स्वतंत्रता से पहले 1937 में प्रांतों में पहली चुनी हुई सरकारों ने भी इसे अपनाया. स्वतंत्र भारत के गणराज्य ने काफी चिंतन-मनन के बाद इसे 1950 में अपनाया.

यह गाना पहली बार 27 दिसंबर 1911 को भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के कलकत्ता अधिवेशन के दूसरे दिन का काम शुरू होने से पहले गाया गया था.

‘अमृत बाज़ार पत्रिका’ में यह बात साफ़ तरीके से अगले दिन छापी गई. पत्रिका में कहा गया कि कांग्रेसी जलसे में दिन की शुरुआत गुरुदेव रवींद्र नाथ टैगोर द्वारा रचित एक प्रार्थना से की गई.

यही वह साल था जब अंग्रेज सम्राट जॉर्ज पंचम अपनी पत्नी के साथ भारत के दौरे पर आए हुए थे. तत्कालीन वायसराय लॉर्ड हार्डिंग्स के कहने पर जॉर्ज पंचम ने बंगाल के विभाजन को निरस्त कर दिया था और उड़ीसा को एक अलग राज्य का दर्जा दे दिया था.

इसके लिए कांग्रेस के जलसे में जॉर्ज की प्रशंसा भी की गई और उन्हें धन्यवाद भी दिया गया.

‘जन गण मन’ के बाद जॉर्ज पंचम की प्रशंसा में भी एक गाना गाया था. यह दूसरा गाना रामभुज चौधरी द्वारा रचा गया था, सम्राट के आगमन के लिए. Read more…

July 8, 2015 By Monica Gupta

Suicide Note

Suicide Note

cartoon suicide note by monica

आजकल व्यापम धोटाले को लेकर टेंशन तो है ही उससे भी ज्यादा टेंशन होने वाली मौतों को लेकर है … ये बेचारा टिल्लू दुनिया से जा रहा है पर मामले की गम्भीरता को देखते हुए एक काम इसने किया कि अपने सोसाईट नोट में लिख दिया कि इसमें व्यापम की कोई भूमिका नही है ताकि पुलिस पब्लिक, पत्रकार ,मंत्री गण हैरान परेशान न हो …

खैर ये तो टिल्लू ने अच्छी बात की पर टिल्लू महाराज  सोसाईड करना अच्छी बात भी नही  है …

July 8, 2015 By Monica Gupta

व्यापम बनाम प्रश्नवाचक

cartoon vyapam by monica gupta

एक नही दो दो प्रश्न वाचक चिन्ह लिए है ये व्यापम घोटाला  … भला इस पर प्रश्न क्यों नही उठेंगें … NRHM के बाद अब तक का सबसे बडा घोटाला.. व्यापम यानि व्यवसायिक परीक्षा मंडल   ….

 

 

: 10 – ABP News

नई दिल्ली: सांसें रोक देने वाले व्यापम घोटाले में मौत का सिलसिला थमा नहीं रहा है. आज सागर में ट्रेनी महिला सब इंस्पेक्टर की खुदकुशी की खबर आई है. पिछले तीन दिन में 3 मौत से देश में सनसनी मची हुई है. दो दिन पहले एक पत्रकार अक्षय सिंह की मौत हुई. एक दिन पहले जबलपुर मेडिकल कॉलेज के डीन की भी मौत हुई.

हर तरफ से सीबीआई जांच की मांग हो रही है, लेकिन शिवराज सरकार टस से मस नहीं हो रही है. कांग्रेस ने दावा किया कि अनामिका को व्यापम की जांच में लगी एसटीएफ से धमकियां मिल रही थीँ. कांग्रेस ने दस सवाल दागकर सीएम शिवराज सिंह की भी इस घोटाले में जांच कराने और इस्तीफे की मांग की है.

76 लाख छात्रों के भविष्य से जुड़े व्यापम घोटाले में महिला ट्रेनी सब-इंस्पेक्टर अनामिका कुशवाहा की खुदकुशी को 45वीं मौत बताया जा रहा है. ब़ड़ा खुलासा ये हो रहा है कि आईजी सागर रेंज केपी खरे ने एबीपी न्यूज़ से कहा कि अनामिका कुशवाहा को ससुराल से मानसिक प्रताड़ना मिल रही थी. पति पत्नी में मतभेद था. रिश्तों में तनाव था. अनामिका के पिता का आरोप है कि दहेज के लिए प्रताड़ित किया जा रहा था. पति ने कल रात से अपना फोन बंद कर रखा था. आज सुबह 6.40 पर तालाब में कूदी अनामिका.

अनामिका की मौत पर मध्य प्रदेश सरकार ने दावा है कि उसने पारिवारिक कलह के कारण मौत हुई. वो घोटाले की आरोपी भी नहीं थी लेकिन कांग्रेस का दावा है कि अनामिका को लगातार धमकियां मिल रही थीं.

आइए जानते हैं व्यापम से जुड़े आज के 10 बड़े अपडेट्स

1. सागर में महिला ट्रेनी सब-इंस्पेक्टर अनामिका कुशवाहा ने खुदकुशी की है. पुलिस ने खुदकुशी का ही केस दर्ज किया है. पुलिस एकेडमी के पास ट्रेनिंग कॉलेज के बगल के तालाब में डूब कर अनामिका ने जान दी. मुरैना की अनामिका की भर्ती पिछले साल व्यापम से ही हुई थी. दिग्विजय सिंह ने सवाल उठाया है कि ये 46 वीं मौत या 47वीं. पढ़ें पूरी खबर

2. सीएम शिवराज से सीबीआई जांच की मांग की जा रही है लेकिन शिवराज कह रहे हैं कि हर मौत का व्यापम से कनेक्शन नहीं है. उनका कहना है कि हर मौत को व्यापम से जोड़ना ठीक नहीं है.  देखें: सीएम शिवराज क्या कह रहे हैं

3. कांग्रेस ने दावा किया कि अनामिका को व्यापम की जांच में लगी एसटीएफ से धमकियां मिल रही थीँ. कांग्रेस ने दस सवाल दागकर सीएम शिवराज सिंह की भी इस घोटाले में जांच कराने और इस्तीफे की मांग की है. जानें कांग्रेस के 10 सवाल Via abpnews.abplive.in

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