Monica Gupta

Writer, Author, Cartoonist, Social Worker, Blogger and a renowned YouTuber

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June 8, 2015 By Monica Gupta

मजदूर

मेरी सहेली मणि के घर पर कुछ काम चल रहा था. बहुत मजदूर कार्य मे लगे थे. कुछ कमी पडने पर वो जब और मजदूरों को लेने गए तो पता चला कि बहुत मजदूर रैली मे गए हैं. असल में, चुनाव होने वाले थे इसलिए हर पार्टी जुटी हुई थी ज्यादा से ज्यादा भीड जमा करने में …

इस दिन मात्र दो मजदूर ही काम करने  घर आए.  उनको चाय देने के दौरान , रैली के बारे मे मेरे पूछ्ने पर एक मजदूर ने बताया कि बहुत बसे भर भर कर जा रही है. 500 रुपए मिलेगें इसके साथ साथ टिफिन भी फ्री और टिफिन मे एक कूपन भी होगा जिसके पास कूपन निकलेगा उसे ईनाम भी मिलेंगा.

इस पर मैने पूछा कि वो रैली मे क्यो नही गए. मेरी बात सुनने पर एक मजदूर   बोला कि आज तो वो 500 दे देंगें पर कल कौन देगा. वो तो बोतल लेकर पडे रहेंग़ें और दूसरा बोला कि हमारे मेहनत की कमाई ही सच्ची कमाई है.

शाम को अखबार मे पढ लेंगे कि रैली में क्या क्या हुआ. वोट तो अपनी सोच के हिसाब से ही देंगें जल्दी से चाय खत्म करके  वह दीवार की चिनाई मे जुट गया.

मुझे वाकई में खुशी हुई कि कुछ लोग  ऐसी सोच भी रखते हैं और अच्छी  सोच रखते हैं.  सारी उंगलियां बराबर नही होती.

 

 

indian labour  photo

June 8, 2015 By Monica Gupta

स्वतंत्रता दिवस

स्वतंत्रता दिवस 2014

स्वतंत्रता दिवस से पहले एक सहेली का मैसेज आया कि वो मुझे स्वतंत्रता दिवस पर सबसे पहले मुबारक दे रही है. मैं सोचने लगी कि स्वंतंत्र होना बेशक गर्व का विषय है हम भाग्यशाली हैं पर आज के समय को देखते हुए मन भारी सा हो रहा है खासतौर पर हम महिलाओ की सुरक्षा उनकी स्वतंत्रता को तो मानो एक ग्रहण सा लग गया है. पढने और नौकरी करके ह्म जितना खुद को आजाद महसूस करवाना चाह्ती थी उसका उलट ही होता जा रहा है. चारो तरफ बंदिशे लगनी शुरु हो गई.

वही वटस अप पर एक अन्य संदेश आया कि अगर आपको सही मायनों में अपने देश से प्यार है तो राष्ट्रीय ध्वज को अपनी प्रोफाईल पिक्चर बनाओ ?? अरे !!! ये क्या बात हुई !!!  क्या वाकई मात्र तस्वीर बदलने से अच्छे दिन आ जाएगें वैसे पिक्चर बदलने की बजाय अगर एक जुट हो कर ठोस कदम उठाए तो शायद वो 15 अगस्त की मह्त्ता को ज्यादा प्रतिबिम्बित करेगा.

 

bird flying from cage photo

Photo by Internet Archive Book Images

 

इसी बीच नेट पर कुछ खट्टी मीठी खबरे को मिली.

स्वतंत्रता दिवस से जुडी कुछ अजीबो गरीब खबरे : विभिन्न कार्यक्रमो में दो तीन जगह तिरंगा ही उल्टा फहरा दिया गया.

स्वतंत्रता दिवस के उपलक्ष मे बांटे गए लड्डूओ से कानपुर के स्कूल के 300 बच्चे और मुम्बई के 37 डाक्टर बीमार पडे.

मुम्बई मे एक राजनीतिक पार्टी ने बडे बडे होर्डिंगस में स्वतंत्रता दिवस की जगह गणतंत्र दिवस की बधाई दे डाली.

हैदराबाद के तेलंगाना के करीम नगर मे एक महिला ने सांस्कृतिक कार्यक्रम के दौरान चप्पल से अध्यक्ष की इसलिए पिटाई कर् डाली कि उसने उन्हे निमंत्रण नही भेजा था.

केरल के कोल्लम मे प्राईवेट स्कूल में सांस्कृतिक कार्यक्रम के दौरान वंदे मातरम ही नही बजने दिया गया.

भारी मन के साथ मैने नेट ही बंद कर दिया  !!

स्वतंत्रता दिवस

June 8, 2015 By Monica Gupta

Kalayana sundaram

Kalayana sundaram

आमतौर पर हमारे काम करने के बाद भी हमें वाहवाही न मिले तो हम निरुत्साही हो जाते हैं. अगर आप भी ऐसा सोचते हैं तो Kalayana sundaram जी से मिलिए.

30 साल यह Librarian रहे और जितनी हर माह तन्खाह मिलती वो सारी राशि गरीबो मे खर्च कर देते. जी हां आपने सही पढा. जितनी राशि मिलती उसे गरीबों में बांट देते. अपनी सैलरी का एक रुपया भी खुद पर खर्च नही किया यहां तक की पैंशन के दस लाख रुपए भी सेवा मे लगा दिए.

अपनी सारी राशि दूसरो पर लगाने के नेक कार्य करने का Kalayana sundaram जी को आज यह फल मिला कि संयुक्त राष्ट्र संघ  ने इन्हे 20वी सदी का Man of the Millennium’ अवार्ड से सम्मानित किया .

ये सब पढने के बाद आपके मन में भी एक प्रश्न  आ रहा होगा जो मेरे मन में भी था कि अपनी गुजर बसर कैसे करते थे?   जब इनसे पूछा गया कि वो अपना खर्चा कैसे चलाते थे तो  Kalayana sundaram  जी  ने बताया कि होटल मे सेवक के रुप मे काम करके अपनी आवश्यकताए पूरी की. आज य़ू एन ओ से उन्हे 30 करोड मिले हैं और आदतनुसार वो भी यह उन्ही पर खर्च कर रहे हैं. ह्मे गर्व है कि ऐसे नेक व्यक्ति हमारे देश के ही हैं .

73-year-old Tamil Nadu librarian donated Rs 30 crore to the uneducated poor

http://www.dnaindia.com/india/report-73-year-old-tamil-nadu-librarian-donated-rs-30-crore-to-the-uneducated-poor-1928555A will to serve humanity has been 73-year-old Kalyanasundaram’s guiding principle throughout his life. A gold medalist in library science, he also holds a masters degree in literature and history. During his 35-year-long career at Kumarkurupara Arts College at Srivaikuntam, he diligently and willingly donated his salary month after month towards charity and did odd jobs to meet his daily needs. Even after retirement, he worked as a waiter in a hotel in exchange for two meals a day and a meagre salary so that he could continue to donate to orphanages and to children’s educational funds.

He was amply rewarded for his service to humanity. The Union government acclaimed him as the best librarian in India. The International Biographical Centre, Cambridge, has honoured him as one of the ‘noblest of the world’ and the United Nations adjudged him as one of the most outstanding people of the 20th century. He also received Man of the Millenium award and Life Time of Service Award from Rotary Club of India in 2011.

“People think that I started doing charity when I was young by donating clothes and helping people study, and they attribute it to a public cause, but I insist it was for a private one. The place where I lived was a tiny village with no provision for roads, buses, schools, electricity, and there was not even a shop to buy a matchbox from. I had to walk 10km to school and back and walking all that way alone can be a pretty lonesome experience. Hence, I had this thought that if I could motivate most of the children to come with me to school, it would be great fun as well.” Read more…

Kalyanasundaram a man of ‘generosity’

He is the first person in the world to spend the entire earnings for a social cause. He received a sum of Rs 30 crores by USA government as part of this award which he distributed entirely for the needy as usual.

We heard about Harshwardhana, Mahabali and Harischandra. These characters lie in history books and rarely we find such examples in today’s self-oriented life. But in South India, a simple looking man named Kalyanasundaram rejuvenated the history and made a great example of honorary works.USA recently awarded Kalyanasundaram as ‘Man of the Millennium’. Kalyanasundaram had been working as a librarian for 30 years. Every month in his 30-year-long service, he donated his entire salary to help the needy. He worked as a server in a hotel to meet his needs. He donated even his pension amount of about ten lakh rupees to the needy. He is the first person in the world to spend the entire earnings for a social cause. He received a sum of Rs 30 crores by USA government as part of this award which he distributed entirely for the needy as usual. Moved by his passion to help others, Super Star Rajnikanth adopted him as his father. He still stays as a bachelor and dedicated his entire life for serving the society. This is Painful to see this unsung hero is continue to serve the Nation silently but his deeds are not recognised by Indian Authorities or Media. Latest News from India News Desk Kalyanasundaram a man of ‘generosity’

मैने भी यह सीखा कि भले ही नेक कार्य करने पर शाबाशी ना मिले फिर भी सच्चे दिल से जुटे रहना चाहिए. 

सैल्यूट है Kalayana sundaram जी !!! आप एक मिसाल हैं… ढेरों शुभकामनाए!!!

Image via dnaindia.com

June 8, 2015 By Monica Gupta

इतनी सी खुशी

इतनी सी खुशी

कई बार बात बहुत छोटी होती है पर बहुत खुशी दे जाती है. किसी काम से मुझे संजीवनी अस्तपाल के फीजियोथैरीपी विभाग मे जाना हुआ. साथ वाले कमरे से एक बच्चे की बहुत देर तक रोने की आवाजे आती रही. उसका रोना सुनकर मैं भी सहम गई.

डाक्टर ने बताया कि एक बच्चे की बाजू मे फ्रेकचर था. अब वो खुल गया है और बाजू की कसरत हो रही है शुरु मे दर्द होता है इसलिए बच्चा रो रहा है . उसके आने का समय और मेरे वहां होने का लगभग एक ही समय था.

अगले दिन फिर वही दर्द भरी रोने की आवाज सुनी. मैने हिम्मत करके उस कमरे मे झांका. मोटे मोटे आसूं  छोटे से बच्चे की आखो से टपक रहे थे. तीसरे दिन मैं हिम्मत करके उस बच्चे के पास चली गई.

(इतनी सी खुशी)

डाक्टर उसे बहुत प्यार से कसरत करवा रहे थे पर वो रोए जा रहा था. मैंने हैलो करके उससे बातों का सिलसिला शुरु किया. पहले तो वो थोडा झेंपा पर बहुत जल्द  उसने अपने बारे में बताना शुरु किया कि उसका नाम  लक्ष्य जोशी है वो  राजस्थान नोहर रहता है और दूसरी क्लास मे पढता है. बहुत जल्द उससे मेरी दोस्ती हो गई. उसने मुझसे वायदा किया कि अब वो नही रोएगा यहां रोज आएगा और स्कूल मे चल रही छुट्टियों मे ही वो ठीक हो जाएगा. दो तीन बार फिर उससे मिलना हुआ और इस बार मैं  उसके लिए चाकलेट भी ले गई.

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 मुस्कुराते हुए उसने फोटो भी खिचवाई. है ना छोटी सी बात पर उसकी आखों मे खुशी देखकर बेहद खुशी मिली…

June 8, 2015 By Monica Gupta

सकारात्मक सोच

नेट एक बहुत अच्छा माध्यम है बहुत सारी बातें खोजने का. मुझे सकारात्मक सोच के  विचार पढने बेहद पसंद हैं. एक दिन एक बहुत अच्छे से विचार की तलाश में मैने बहुत साईटस देखी . देखते देखते एक विचार बहुत पसंद आया.मैं उसने नोट करने ही वाली थी कि सोचा चलू और आगे देख लूं शायद उससे भी अच्छा मिल जाए .

और बेहतर के चक्कर में मैं आगे सकारात्मक सोच देखने लगी पर कोई पसंद ही नही आया फिर सोचा चलो पहले वाला ही विचार अच्छा था वही नोट कर लेती हूं  पर ओह नही … वो भी गायब हो गया. यानि बहुत सारी साईटस सर्च कर रही  थी ना वो उसी में कही गुम हो गया.  खोजा… खोजा उसे बहुत खोजा पर !!!  पर मिला नही 🙁 और याद भी नही था कि क्या लिखा था. मात्र एक लाईन तो नही डाल सकती थी ना …

तभी मेरे मन में विचार आया कि जिंदगी मे भी अक्सर ऐसा होता है जो हमारे पास होता है उसकी परवाह नही करते और बेहतर और अच्छा खोजने के चक्कर मे हम अपनो को भी खो देते हैं इसलिए जो है उसी की वेल्यू करनी चाहिए और खुश रहना सीखना चाहिए नही तो मेरी तरह परेशान होना पडेगा!! सकारात्मक सोच

 

positive thinking photo

Photo by somnathbhagat84

June 8, 2015 By Monica Gupta

हस्त रेखाएं

हस्त रेखाएं

कुछ देर पहले मैं मणि के घर गई उसके घर मेहमान आए हुए थे. वो एक महिला का हाथ देख कर कुछ बता रही थी. मेरा हैरान होना स्वाभाविक था क्योकि मुझे पता था कि उसे हाथ वाथ देखना नही आता. बल्कि कई बार शौकिया तौर पर मुझे ही कहती है कि हाथ देख कर कुछ भी बता.

मैने देखा वो बहुत गम्भीर मुद्रा में हस्त रेखाएं देख रही थी और फिर कुछ उंगुलियों पर गिन कर और कुछ सोचते हुए कुछ् बाते उस महिला को बताई और वो महिला भी खुश हो गई और वो खुशी खुशी चली गई.

उसके जाने के बाद मैने भी अपना हाथ बढा दिया कि मेरी भी हस्त रेखाएं  देख कर  कुछ बताईए. इस पर वो हंसते हुए बोली धत, मुझे कहा आता है हाथ वाथ देखना . ये हमारी जानकारी में हैं जरा परेशान थी…  बस हाथ देखने के बहाने इसकी कांउसलिंग कर दी. दो चार सकारात्मक बातें बता दी अब ये काफी सहज होकर गई है. अरे वाह ये तो बहुत अच्छी बात है …

Palmistry Money Line – Money Line in Palm, Hand

http://www.speakingtree.in/blog/money-line-in-palmistrySo let’s explore the money lines in our palm… The Money Lines 3 Some markings and configuration of lines present on your palm are very helpful indicators of your financial fate.

Money line is one of the lines present on your palm which demonstrate how your financial fate would be and how can you accumulate the money. Read more…

सच, कई बार दुख दर्द का ईलाज हस्त रेखाएं के माध्यम से भी किया जाए तो क्या हर्ज है.

Image via www.speakingtree.in

June 8, 2015 By Monica Gupta

फ्रिज ने किया फ्रीज

 फ्रिज ने किया फ्रीज

मेरी सहेली मणि का फ्रिज बहुत पुराना और इतना भारी है कि अगर उसे सरकाना हो तो चार आदमियो की जरुरत होती है. आज की तारीख में इतना पुराना हो चला था कि बार बार कहने पर मेरे कहने पर वो नया फ्रिज लेने मार्किट गई कम्पनी के दुकानदार ने गोदाम से फ्रिज मंगवाया तो उनका आदमी अपने कंधे पर फ्रिज लाया. एक अकेला आदमी बडे आराम से फ्रिज लेकर आ रहा था.

मणि के हैरानी से पूछ्ने पर दुकानदार बोला उनका रोज का काम है उन्हें भारी नही लगता पर वो इतनी हल्की क्वालिटी देख बिना खरीदे लौट आई. फ्रिज बेहद हल्का था. मणि का मन ही नही बना कि ऐसा फ्रिज खरीदा जाए. दूसरे शब्दों में कहूं तो मणि को फ्रिज ने किया फ्रीज. वो चुपचाप वापिस आ गई.

fridge photo

वैसे देखा जाए तो यही हाल स्टील के ट्रंक और अलमारी  का भी हैं. कुछ दिन पहले मैं भी मार्किट गई थी. ट्रंक और अलमारी को  खरीदना था. पर इतनी हल्की क्वालिटी देख कर खरीदने का मन ही नही हुआ.कमाल है, बेशक हम प्रगति की राह पर हैं पर ये चीजें सालिड बनने की बजाय इतनी धटिया क्यों बन रही हैं ???

 हैरानी तो तब हुई जब दुकान दार ने भी कहा कि आप के पास जो ट्रंक है  या अलमारी है उसे आप रखिए … ऐसी चीज अब दुबारा नही बन सकती … आजकल वो पुरानी बात नही रह गई है दुकान दार भी मानते हैं कि पहले वाली बात अब नही

सच, मैने तो अब अपना पुराने वाला ही ठीक  करवा लिया और मणि का अभी तक वही फ्रिज चल रहा है 🙂

फ्रिज ने किया फ्रीज

 

 

June 8, 2015 By Monica Gupta

No Parking

No Parking

भारत की ज्यादातर आबादी पार्किंग की समस्या से जूझ रही है। निसंदेह, वाहनों की आबादी इतनी बढती जा रही है कि खडे करने को जगह नही और तो और इस भयंकर गर्मी में और भी एक समस्या देखने को मिल रही है… असल में, वो क्या है ना कि भयंकर गर्मी के चलते  लोग खुले मे कार खडी करने को मजबूर है क्योकि अब पेड  तो रहे नही और लोग वाहन खडा करके खुद ए सी रूम में चले जाते हैं और लाखों की कार  बाहर खडी तपती रहती है. मजबूरी में लोग ‘नो पार्किंग’ वाली जगहों पर गाड़ियां खड़ी करते हैं..

No Parking cartoon no parking by monica gupta

ऐसे मे इन महाशय ने ये जगह खरीद ली है. और पेड के छांव  में इन्होने पार्किंग के रेट भी बढा दिए हैं  और जो भी कोई आसपास खडा हो जाता है उसे धमका भी देते हैं …

 

No Parking

 

Parking Problems in India and Their Solutions | My India

India is facing a new problem nowadays – lack of sufficient parking space. With families getting smaller and the total number of motor vehicles exceeding the total number of heads per family, the parking scenario is woefully falling short of the current requirements in the country. The situation is such that on any given working day approximately 40% of the roads in urban India are taken up for just parking the cars. The problem has been further exacerbated by the fact that nowadays even people from low income group are able to own cars. The number of families with cars has become much more than what the country is able to manage.

As it is, the cities in India are highly congested and on top of that the parked cars claim a lot of space that could otherwise be used in a better way. Thanks to poor, and at times zero, navigability, Indian cities are regarded as some of the worst options for living. One can also add the issue of pollution to this mix and understand the enormity of the crisis. In this context it needs to be understood that the Indian cities, with the possible exception of Chandigarh, were never planned in such a way so as to accommodate a deluge of cars as is the situation now. The apathy of present day urban planners has only made the situation worse.

Possible Solutions to the Menace

There are some other ways to solve car parking issues, such as multi-level car parking. Multi-level car parking is of two types – conventional and automated. Conventional multi-level car parking can be done anywhere – over the ground or under it. The open parking areas are more preferred as opposed to closed areas in case of parking above the ground as specialised fire protection systems and mechanical ventilation are not needed in this case. Automated multi-level car parking is more difficult to achieve in India considering the fact that it is entirely technology driven and does not involve much human element. As it stands now, India and Indians might not be ready for this technology. The more conventional option seems to be the better bet. Read more…

No Parking

June 8, 2015 By Monica Gupta

बासी भोजन और महिलाए

बासी भोजन और महिलाए

कल सुबह मेरी सहेली मणि के बहुत तेज पेट दर्द हुआ. फोन आते ही  मैं उसके घर भागी. वो चुपचाप लेटी थी और घर के सभी सदस्य ऐसा लग रहा था कि नाराज हो. मैने सोचा कि अरे … बेचारी की तबियत ठीक नही और आप नाराज हैं इस पर वो बोले कि नाराजगी वाली तो बात ही है. महीने के बाद  आज मणि फ्रिज साफ कर रही थी. बर्फ भी बहुत जम गई थी इसलिए साफ कर रही थी और फ्रिज में खाने का छोटा मोटा सामान भी पडा हुआ था. थोडी बहुत सब्जी, दाल कटोरियों में बची हुई थी. (बासी भोजन और महिलाए )

कुछ तो शायद इसने फेंक दिया पर एक सब्जी नही फेंकी. उसे ठीक लगी और उसने बासी( Stale food)  परौठी के साथ खा ली. वो सब्जी हफ्ते पुरानी थी. ऐसे में तकलीफ और दर्द  नही होगा तो क्या होगा वो तो बचाव हो गया कि फूड पायजनिंग नही हुई. अब तो मुझे भी मणि पर गुस्सा आ रहा था. वैसे हम महिलाए जरा भी अपना ख्याल नही रखती. जहां परिवार और बच्चों की सेहत की बात हो वहां समझौता नही करेगी पर जब अपनी सेहत की बात आती है तो लापरवाह हो जाती है. वैसे आप तो ऐसी नही होंगी … और अगर है तो जरा नही बहुत सोचने की दरकार है !!

 no  photo

 

Webdunia Hindi

कहने को तो हम प्रतिदिन भरपूर मात्रा में हरी सब्जियाँ, अंकुरित अनाज, फल, जूस, सूप, सलाद व संतुलित मात्रा में पोषक तत्वयुक्त भोजन करते हैं। वहीं दूसरी ओर लगभग 90 प्र.श. व्यक्ति विभिन्न पोषकजन्य बीमारियों, कमर दर्द, सिर दर्द आदि व्याधियों से पीड़ित हैं। नेत्र ज्योति कमजोर होना, थकान होना, हाथ-पैरों में सूजन आम बीमारियाँ हैं। आखिर हमारे खानपान, पाक विधि में कहीं न कहीं कोई त्रुटि अवश्य है जिससे हमारे द्वारा लिया जा रहा उत्तम आहार भी उतना प्रभावी नहीं होता जितना होना चाहिए। भारतीय पाक कला, व्यंजनों की विविधता, लजीजता विश्वविख्यात हैं। भारतीय महिलाएँ तो इस कला में निपुण होती हैं, किन्तु भोजन बनाने के दौरान वे ऐसी गलतियाँ कर बैठती हैं जिससे उसकी पौष्टिकता बहुत कम हो जाती है अथवा नष्ट हो जाती है। अतः आवश्यक हो जाता है कि भोजन पकाते समय कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखा जाए। जिस समय भोजन करना हो उसी वक्त बनाएँ। बार-बार गरम करने से विटामिन नष्ट हो जाते हैं। जरूरत से ज्यादा भोजन न बनाएँ। बासी भोजन स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है अथवा उसे फेंकना पड़ता है। दोनों ही स्थितियाँ हानिकारक हैं। दाल, चावल आदि रगड़-रगड़कर न धोएँ, इससे ऊपरी सतह पर विद्यमान पोषक तत्व नष्ट हो जाते हैं। कोई भी अनाज एकदम बारीक न पिसवाएँ, विशेषकर गेहूँ तो चोकरयुक्त ही पिसवाएँ। हरी सब्जी, दाल, चावल फ्राइंग पेन अथवा प्रेशर कुकर में ही पकाएँ। इससे ईंधन तो बचता ही है, पोषक तत्व भी कम से कम नष्ट होते हैं।

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बासी भोजन और महिलाए

 

भारतीय लड़कियों में सुस्त जीवनशैली, बासी भोजन की आदतें और मोटापे के कारण पोलीसिस्टिक ओवरी सिड्रोम फैलने की सम्भावना बढ रही है.

स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने बताया कि एक अनुमान के मुताबिक, 10 से 30 फीसदी महिलाएं इससे प्रभावित हो रही हैं।

इंद्रप्रस्थ अस्पताल में वरिष्ठ प्रसूति रोग सलाहकार रंजना शर्मा ने बताया, ‘मोटापा और पीसीओएस का गहरा संबंध है, खासकर जब यह किशोरावस्था के समय होता है .

  Read more…

 

 

बासी भोजन और महिलाए

अक्सर अखबार में भी खबर आती रहती है कि बासी खाना खाने से चार लोग अस्पताल में भर्ती या पूरे परिवार की तबियत बिगडी. वगैरहा वगैरहा… इसी के साथ साथ तो कुछ  पंडित जी तो यह भी मानते हैं कि बासी खाना, बासी रोटियां दान करने, गाय को खिलाने से बच्चों पर बुरा असर पड़ता है. यही नहीं, गाय को खराब सब्जियां खिलाने का बुरा प्रभाव भी बच्चे की जिंदगी पर पड़ता है.

बेशक, बासी खाना हमें बहुत टेस्टी लगता है. आलू मैथी की सब्जी हो और बासी परौठीं या ताजे निकाले मखन्न के साथ बासी रोटी या बासी खिचडी और कडी….  एक रात की बासी हो जाए तो कोई दिक्कत नही पर अगर 5-7 दिन पुरानी हो जाएगी तो कैसे चलेगा… फिर तो वो शरीर को हर हालत में नुकसान ही देगा इसलिए ….

बासी भोजन और महिलाए

Image via .images

June 7, 2015 By Monica Gupta

whatsapp ladies

whatsapp ladies   शिक्षा की बात हो तो हम लडकियां नम्बर वन…  परीक्षा परिणामों की हमेशा एक ही  हैड लाईन होती है कि लडकियों ने बाजी मारी … वही जब शापिंग की बात होती है तो भी महिलाओं का नाम पहले लिया जाता है कि महिलाओं को बहुत शौक होता है. पर हाल ही में एक हुए सर्वे ने मुझे हैरान कर दिया सर्वे था… हाउसवाइफ की बड़ी तादाद को ये तक नहीं पता कि इंटरनेट का इस्तेमाल कैसे करते हैं। ये चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं गूगल के सर्वे विमेन एंड टेक्नोलॉजी से।

ladies internet photo

 

whatsapp ladies

सर्वे के मुताबिक देश में 18 से 55 साल की महिलाओं में से करीब 50 फीसदी इंटरनेट से दूर है। इस सर्वे में 828 महिलाएं शामिल थीं। भारत में करीब 24.3 करोड़ इंटरनेट यूजर्स हैं और इंटरनेट की पहुंच पूरी आबादी के सिर्फ 19 फीसदी तक है।

है न हैरानी वाली बात … इंटरनेट  एक ऐसी दुनिया है जिसका इस्तेमाल हर कोई किसी ना किसी रूप में करता ही है. यहां तक की छोटे छोटे बच्चे भी इसका इस्तेमाल करना जानते हैं. ऐसे में महिलाए कैसे पीछे रह गई.

 

News Flicks

 

http://hindi.moneycontrol.com/mccode/news/article.php?id=119700

whatsapp ladies  मेरे सर्कल में जितनी महिलाए हैं  उसमें से ज्यादातर महिलाओं ने  ने वटस अप के माध्यम से इस दुनिया में कदम रख दिया है. कुछ वही तक सिमट कर रह गई हैं  तो कुछ अब शापिंग इत्यादि  पर सर्च भी करने लगी हैं…

बेशक,  समय अभाव के कारण हो या कम जानकारी होने की वजह से वो नेट न इस्तेमाल करती हों पर अगर वो नई  दुनिया के साथ कदम ताल करेगीं उसे समझेगी तो न सिर्फ कुछ नया बल्कि फायदेमंद जानकारी भी पा सकेगी खुद को भी एक नई पहचान दे सकेंगीं.

Photo by Internet Archive Book Images

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