Monica Gupta

Writer, Author, Cartoonist, Social Worker, Blogger and a renowned YouTuber

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July 6, 2017 By Monica Gupta Leave a Comment

छोटे बच्चों को गलती होने पर क्या सजा – Creative Punishments Ideas

बच्चों के लिए अच्छी आदतें

छोटे बच्चों को गलती होने पर क्या सजा – Creative Punishments Ideas – chhote bachho ko galti hone per saza kya –   discipline कैैैैसे आए  – आमतौर पर छोटे बच्चे जब कहना नही मानते गलती तो हम सजा देते है… सजा का मतलब है चांटा, पिटाई , चिल्लाना और क्या … खुद ही जज बन कर सजा दे देते हैं

छोटे बच्चों को गलती होने पर क्या सजा – Creative Punishments Ideas

क्या इसके इलावा भी सजा हो सकती हैं चलिए मान लीजिए हमने बच्चे को मारना नही है अब क्या सजा हो … छोटे बच्चे गलती की सजा

कुछ creative punishments ऐसी सजा बच्चा  महसूस भी करे और सीख भी ले क्या हो सकती हैं ऐसी सजा …

Creative Punishment Ideas –  effective punishments for kids

बच्चे के साथ मिलकर एक बॉक्स बनवाईए और उसमे बच्चे से ही पूछिए कि आपको अपनी गलती की क्या सजा मिलनी चाहिए आठ दस सजा पूछ कर लिख लीजिए और जब बच्चा गलती करे उसे एक स्लिप उठाने को कहिए …

जब बच्चा कहना ना माने जैसे कि आपने रुम साफ करने को कहा और उसने नही किया खिलौने  नही उठाए तो आप चुपचाप एक चीज गायब कर दीजिए … वो उसे खोजेगा और खुद आगे से सम्भाल कर रखेगा …

बच्चा गलती करे तो एक कार्नर उसे दीजिए वहां बैठ कर वो ड्रांईंग के माध्यम से कैसे दिखाएगा … उसे बोलिए या फिर कोई कविता लिखने को बोलिए …

गलती करे तो बोलिए आईस्क्रीम कैंसिल बस दाल और चपाती ही मिलेगी

या फिर जल्दी सोने को बोलिए कि अब आज कोई टीवी नही बस सो जाओ … नो टीवी. नो गेम ..

या फिर पौधो को पानी देना है

या चिडिया के लिए पानी रखना है

या फिर खाना सर्व करवाने में  में हैल्प  करवानी है…

ऐसे में बच्चे सीखेंगें और सजा भी हो जाएगी  …

छोटे बच्चों को गलती होने पर क्या सजा – Creative Punishments Ideas

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July 4, 2017 By Monica Gupta 18 Comments

कहानी लिखने का तरीका – Story Writing Tips for Beginners

बच्चों के लिए अच्छी आदतें

कहानी लिखने का तरीका – Story Writing Tips for Beginners – कहानी कैसे लिखें – kahani likhne ka tarika – how to write story in hindi – ऐसे बनती है कहानी … बहुत सारे मैसेज आते हैं वो कहते हैं कि हम भी कुछ लिखना चाहते हैं पर कैसे लिखे समझ नही आता …

कहानी लिखने का तरीका – Story Writing Tips for Beginners

जो लिखना चाह्ते हैं लेखक बनना चहते हैं उनके लिए बस एक ही बात कहना चाहूंगी कि अपने चारों तरफ जो भी हो रहा है ध्यान से देखिए observe कीजिए कहानी खुद ब खुद बन जाएगी … फिर उसे शब्दों का रुप दीजिए …

ऐसे बनती है कहानी ..

अब जैसे मैं एक बात बताती हूं बहुत समय पहले मैं एक पार्टी में गई … वहां एक तरफ बैठ गई … और इधर उधर देखने लगी … तभी देखा एक मम्मी अपने बच्चे के शू लेस बांध रही है और बाल ठीक कर रही है तभी बच्चा बोलता मम्मी दादा जी आ रहे हैं सामने से सिर ढक लो… मैं सब देख रही थी.

मम्मी ने उसे कहा सुन तू उधर मत देख … मैंने सिर नही ढकना … हजार रुपये देकर ब्यूटी पार्लर से बाल सेट करवाए हैं … चल तू जा … और अपनी कुछ सहेलियो से बात करने लगी … मैं सब देख रही थी …असल में,  बहुत लोग थे पार्टी में इसलिए उस महिला का ध्यान मेरे पर नही गया … मैंने देखा दो तीन सहेलियां आ गई और सब उसकी प्रशंसा कर रही थी कि बहुत सुंदर लग रही हो … और वो इतरा रही थी …

अच्छा हर कोई प्रशंसा नही करता … तो एक महिला और आई उसके पास और बोली … wow hair style  तो बहुत अच्छा लग रहा है पर बालों मे सफेद लट जरा भी अच्छी नही लग रही …

इस पर वो महिला चिढ गई और उसने अपना सिर तुरंत ढक लिया और बोली अरे समय ही कहा है सजने सवरने का मैं तो ससुर जी के सामने सिर ढकती हूं और उसने फटाफट सिर ढक लिया ताकि बालो की सफेदी किसी और को न दिखे … और मेरी बन गई कहानी …

मैंने पर्स से paper pen निकाला और   main points  लिख लिए तुरंत लिख दिया जब मैंने इसे लिखा तो ढेर कमेंटस आए कि यही है जीवन की सच्चाई … ऐसा ही होता है आप बिल्कुल नेचुरल लिखती हैं … बस यही है …  आस पास महसूस करो और लिखो …

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July 4, 2017 By Monica Gupta Leave a Comment

बच्चों को होमवर्क कैसे करवाएं – बच्चों को पढ़ाने का तरीका – छोटे बच्चों को कैसे पढ़ाएं – Bacho Ko Homework Kaise Karaye

बच्चों के लिए अच्छी आदतें

बच्चों को होमवर्क कैसे करवाएं – बच्चों को पढ़ाने का तरीका – छोटे बच्चों को कैसे पढ़ाएं – Bacho Ko Homework Kaise Karaye – छोटे बच्चों की पढ़ाई का तरीका क्या हो – होमवर्क कैसे करवाएं –  chote baccho ko kaise padhey – Bacho Ko Homework Kaise Karaye- बच्चों की पढ़ाई का तरीका क्या हो ताकि छोटा बच्चा  पढाई मे मन लगाए न कि पढाई से दूर भागे . पढाई को हौव्वा नही बनाना . कल दोपहर घर के सामने से एक महिला दो छोटे बच्चों के साथ जा रही थी और पूछ रही थी कि कितना होमवर्क मिला है … वाकई होमवर्क पेरेंटस के लिए कम टेंशन का काम नही है खासकर की बच्चा जब बहुत छोटा हो … पहली या दूसरी क्लास में हो उसमे interest जगाना मां का ही काम है क्योकि वो पहली teacher है … पर mothers घबरा जाती हैं कैसे करवाए बच्चा कहना ही नही मानता टिकता ही नही …

बच्चों को होमवर्क कैसे करवाएं – बच्चों को पढ़ाने का तरीका – छोटे बच्चों को कैसे पढ़ाएं –

  1. देखिए सबसे पहले तो ये मानना होगा कि ये मुश्किल काम है औरआप दुनिया की सबसे अच्छी मम्मी  या पापा है आपमे बहुत सहन शक्ति है आप बच्चे को जरुर प्यार से हैंडल कर सकती हैं … यानि पहले तो अपना मूड सही रखना है.

2.  बच्चे का स्कूल से आना fix होता है इसलिए पढने का समय हम fix कर सकते है जो समय आप और बच्चे को सूट करे बेहतर होगा कि आप मिल कर time table बना लें और बच्चे के खेलने का टाईम और कार्टून के समय का ख्याल रख कर ही इसे बनाए..

3.  टाईम टेबल में पांच मिनट रिलेक्स होने के भी रखिए जैसे स्कूल में बच्चे पढते पढते बोर हो जाते हैं तो बोलते हैं … may I go to drink water… etc   टेंशन वाला नही बनाना … जितना easy relax होगा उतना ही मन लगा पाएगा बच्चा पढाई में …

4.  जब पढा रहे हो तो tv बंद कर दीजिए … दूसरे बच्चे खेल रहे हों तो उन्हे कुछ देर मना कर दीजिए या ऐसी जगह बैठिए जहा आवाज न आए क्योकि इससे बहुत ध्यान बटता है .. और जब पढा रहे हो तो ममी लोग भी बैठी रहे ये नही कि चावल गैस पर रखे है या कूकर सीटी मार रहा है या आप मोबईल पर वटस अप या मैसेज कर रहे हैं

 

5.  बच्चों को समझाते समझाते खुद नही करना कई बार पेरेंटस खुद ही होमवर्क कर देते है … बच्चे को करने दीजिए

 

6.  बच्चे के बार बार सवाल पूछ्ने से डरिए मत … सामना कीजिए डर के आगे ही जीत है कुछ समझ नही आ रहा तो क्लास टीचर से पूछ सकते हैं और नेट से भी हर तरह की जानकारी मिल सकती है.

7.  बच्चे को समझाने के लिए आप खुद भी बच्चा और बच्चा को टीचर बना सकते हैं

8 रोल मॉडल बने बच्चे के लिए टीचर को डायरी में झूठ नही लिखे तबियत खराब थी इसलिए होमवर्क नही करवाया

9  अब बारी आती है शाबाशी की कि अगर बच्चे ने सब सही कर लिया तो उसे शाबाशी दीजिए उसके लिए एक सरप्राईज गिफ्ट भी तैयार रखिए…

.. देखिए एक बार interest create हो गया तो पूरी जिंदगी दिक्कत नही होगी

एक सर्वे में ये बात सामने आई है कि 50 % पेरेंटस मानते हैं कि होमवर्क के दौरान वो बच्चे की खूब पिटाई भी करते हैं और गुस्सा भी … आप तो ऐसे नही है ना जरुर सोचिएगा इस बारे में…

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छोटे बच्चों की पढ़ाई का तरीका क्या हो …

बच्चों को होमवर्क कैसे करवाएं – बच्चों को पढ़ाने का तरीका – छोटे बच्चों को कैसे पढ़ाएं – Bacho Ko Homework Kaise Karaye

July 3, 2017 By Monica Gupta Leave a Comment

माँ तुझे सलाम – वंदे मातरम

बच्चों के लिए अच्छी आदतें

माँ तुझे सलाम – वंदे मातरम – Maa Tujhe Salaam – धन्य है देश के वीर जवान – जो अपनी जान पर खेल कर देश की रक्षा करते हैं  वीर जवान तुझे सलाम-  bharat ke veer jawan –  अमर रहेगें वीर जवान. एक प्रेरक कहानी नेट पर पढी.

माँ तुझे सलाम – वंदे मातरम

कल खबर आ रही थी कि बाढ में फंसे लोगो को सैनिको ने बचाया, वही खबर थी कि देश की सीमा पर लड रहे जवान शहीद हुए … वाकई गर्मी हो या सर्दी आग हो या तूफान, बाढ हो या भूकम्प वीर सैनिक अपने कार्य मे हमेशा जुटे रहते हैं …

वाकई घर परिवार से दूर रहते हुए हर पल खतरे का सामना करते हैं …

वाकई धन्य हैं इनके परिवार … खास तौर पर इनकी माताएं…

 

इसी संदर्भ में मैंने एक कहानी पढी.

एक माँ के तीन बच्चे सेना में थे और युद्द छिड गया. तीनों ने युद्ध में भाग लिया . कुछ दिन बाद यह खबर आयी कि पहला पुत्र युद्ध में मारा गया है। माँ ने मुस्कराते हुए कहा – “वह भाग्यशाली है कि उसने देश के लिए अपने प्राणों को न्योछावर किया है।”

कुछ ही दिनों बाद दूसरा पुत्र भी युद्धभूमि में शहीद हो गया। माँ ने कहा – “मुझे ऐसे पुत्र की माँ होने का गर्व है जिसने देश के लिए अपने प्राणों को न्योछावर किया ”

कुछ समय बाद उसका तीसरा पुत्र भी शहीद हो गया। इस बार जब उसने तीसरे पुत्र के निधन का समाचार सुना तो मुस्कराहट के साथ माँ की आँखों में आँसू भी थे।

उनके पास में खड़े एक व्यक्ति ने कहा – ” आपकी आँखों में आँसू ?”

माँ ने कहा – “मेरी आँखों में आँसू इसलिए हैं क्योंकि मेरे प्यारे देश पर न्योछावर करने के लिए अब मेरे पास और पुत्र नहीं बचे हैं।”

तो ये होता है जज्बा … !!

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माँ तुझे सलाम – वंदे मातरम…

 

July 2, 2017 By Monica Gupta Leave a Comment

जिंदगी का कड़वा सच ये भी – कड़वी बाते लेकिन सच्ची बाते

बच्चों के लिए अच्छी आदतें

जिंदगी का कड़वा सच ये भी – कड़वी बाते लेकिन सच्ची बाते – मन को नियंत्रित करने का एक तरीका ये भी –  सच – कई बार कडवी दवाई पिलानी पडती है .. .

जिंदगी का कड़वा सच ये भी – कड़वी बाते लेकिन सच्ची बाते

कल मार्किट से लौटते हुए एक सहेली मिली … वो अपनी मम्मी के खाने पीने की आदत से बहुत परेशान थी .. बोली बहुत शौक है मानते ही नही इस वजह से तरह तरह की बीमारियां लग गई हैं …अब लगता है कि गुस्सा होना ही पडेगा …  कि खाने पर कंट्रोल रखो नही तो अस्तपताल में भर्ती करवाना पडेगा.

 

 

 

सही बात है कई बार जब आराम से कोई बात न समझे तो कडवी बात कहनी ही पडती है …

इसी बारे में एक कहानी याद आई … नेट पर पढी थी कि एक सेठ होता है खूब चटोरा … उन्हें खट्टी चीजें – खट्टा दही, खट्टा मट्ठा, अचार आदि खाने की बुरी आदत थी। वह खांसी के उपचार के लिए कई वैद्यों के पास गया। सभी ने उसे खट्टी चीजें न खाने की सलाह दी ताकि उनकी दवाऐं कुछ असर दिखा सकें परंतु सब बेकार…
हार कर वो एक बुजुर्ग वैद्य के पास जाते हैं   वैद्य ने उसे दवाऐं दी और सेठ अपनी आदत के अनुसार खट्टी चीजें खाता रहा। कुछ दिनों बाद जब वह वैद्य के पास पहुंचा तो वैद्य ने उसका हालचाल पूछा। उसने कहा – ” कुछ खास फायदा नहीं हुआ।” फायदा तो होना चाहिए तीन फायदे होने चाहिए  वैद्य ने उससे कहा –  सेठ ने व्यग्रता से पूछा – “कौन से तीन फायदे?” वैद्य ने उत्तर दिया –

पहला यह कि तुम्हारे घर में कभी चोर नहीं आयेंगे

दूसरा यह कि तुम्हें कुत्ता नहीं काटेगा

तीसरा यह कि तुम बूढ़े नहीं होगे

सेठ ने फिर पूछा – “ये सब तो अच्छी बात है परंतु इनका खट्टी चीजों से क्या संबंध?”वैद्य ने उत्तर दिया –

“यदि तुम खट्टी चीजें खाते रहोगे तो तुम्हारी खांसी कभी ठीक नहीं होगी। तुम दिन-रात खांसते रहोगे तो चोर तुम्हारे घर कैसे आयेंगे?

और खांसी से तुम इतने कमजोर हो जाओगे कि बिना छड़ी की सहायता के तुम चल भी नहीं सकोगे

तुम्हारे हाथ में छड़ी देखकर कुत्ते तुम्हारे पास नहीं फटकेंगे। कमजोरी के चलते भरी जवानी में ही मर जाओगे इसलिए तुम बूढ़े ही नहीं होगे।

““जो व्यक्ति अपने खान-पान को लेकर लापरवाह है, वह कभी भी बीमारियों से मुक्त नहीं हो सकता।”

कड़वा सच – सुधर जाओ – जीवन का एक सत्य – zindagi ka sabse bada sach

June 30, 2017 By Monica Gupta Leave a Comment

Cartoon on GST India

Cartoon on GST India

Cartoon on GST India – जी एस टी बिल क्या है – What is Goods and Service Tax GST  अभी कुछ नही कह सकते कि इसके आने से फायदा होगा या नुकसान … पर एक बात तो तय है कि डर तो है … इसी डर से बन निकला एक कार्टून

Cartoon on GST India

 

Cartoon on GST India

GST बोले तो

June 30, 2017 By Monica Gupta Leave a Comment

अच्छे काम करते रहने चाहिए

अच्छे काम करते रहने चाहिए

अच्छे काम करते रहने चाहिए – अच्छे काम कोई भी हो … भले ही कोई प्रशंसा करे न करे पर छोडना नही चाहिए  … असल में मेरी एक सहेली ने घर की दीवार पर पानी से भरा बर्तन रखना शुरु किया … कुछ दिन रखा पर पिछ्ले दो तीन दिन से नही रखा वो इसलिए कि मौसम भी बारिश वाला था और उसे लगा कि कोई पक्षी आता तो है नही पानी पीने …

अच्छे काम करते रहने चाहिए

आज जब वो घर से बाहर  निकली तो देखा कि दो पक्षी बैठे खाली बर्तन को देख रहे हैं … ये देख कर उसे बहुत दुख हुआ … इसलिए अच्छा काम करना कभी नही छोडना चाहिए …  इसी बारे में एक कहानी भी बहुत समय पह्ले पढी थी कि

एक शहर में एक मंदिर में नए पंडित जी आए … उनका बहुत नाम था कि बहुत ही अच्छे हैं नेक हैं  एक बार उन्हें दूसरे शहर जाना था तो वो बस मे चढ़े उन्होंने कंडक्टर को किराए के रुपये दिए और सीट पर जाकर बैठ गए. कंडक्टर ने जब किराया काटकर रुपये वापस दिए तो पंडित जी ने पाया की कंडक्टर ने दस रुपये ज्यादा उन्हें दे दिए है

पंडित जी ने सोचा कि थोड़ी देर बाद कंडक्टर को रुपये वापस कर दूँगा

 

 

कुछ देर बाद मन मे विचार आया कि अरे वापिस किसलिए करु .. कौन सा इसे याद है गलती से तो दिए हैं … ये तो भगवान का प्रशाद ही है .
मन मे चल रहे विचार के बीच उनका शहर आ गया बस मे उतरते ही उनके कदम अचानक रुके उन्होंने जेब मे हाथ डाला और दस का नोट निकाल कर कंडक्टर को देते हुए कहा भाई तुमने मुझे किराए के रुपये काटने के बाद भी दस रुपये ज्यादा दे दिए थे

कंडक्टर मुस्कराते हुए बोला क्या आप ही गाँव के मंदिर के नए पुजारी हो? पंडित जी को हामी भरने पर कंडक्टर बोला आपका बहुत नाम सुना था.. आज जब आपको यहां देखा तो सोचा चलो देखते है कि मैं ज्यादा पैसे लौटाऊँ तो आप क्या करते हो अब मुझे पता चल गया की आपके प्रवचन जैसा ही आपका आचरण है आप वाकई में अच्छे हैं मैं जरुर आऊंगा … और बस आगे बढ गई

पंडित जी ने हे भगवान बोला और शुक्रिया बोला कि आज तूने बचा लिया … नही तो दस रुपये के पीछे  बहुत गलत हो जाता … इसलिए अच्छा काम करते रहना चाहिए …

 

व्यक्तित्व विकास , स्मार्ट दिखने का एक तरीका,

सावधान रहें सतर्क रहें इन लोगो से

June 30, 2017 By Monica Gupta Leave a Comment

जीवन में माता पिता का महत्व – माँ और बेटे की कहानी

जीवन में माता पिता का महत्व

जीवन में माता पिता का महत्व – माँ और बेटे की कहानी. Jeevan mai Mata Pita ka Mahatva –  मां शब्द इतना प्यारा है कि जहां भी उनके बारे में पढने को मिलता है सब प्यारा सा हो जाता है …Mata Pita ke Prati Bacho ka Kartavya..कल बहुत खूबसूरत बात पढी मां के बारे में और बहुत कुछ सोचने पर मजबूर हो गई..

मैंने पढा कि अपने जन्मदिन पर अपनी मम्मी के लिए समय निकालो क्योकि ये दिन उनके लिए भी बहुत खास है … वाकई मां जन्म देती है और और सही मायनों में उनका भी एक जन्म होता है …

जीवन में माता पिता का महत्व – माँ और बेटे की कहानी

मां बनना और मां  कहलाना बहुत खूबसूरत अहसास होता है … जितना मां अपने बच्चे का ख्याल रखती है क्या बच्चे भी रखते हैं … खूबसूरत से रिश्ते पर नेट पर एक कहानी पढी ……

एक बूढ़ी मां नींद की गोलियों की आदी हो चुकी थी और एक दिन फिर गोली के लिए ज़िद कर रही थी। बेटे की कुछ समय पहले शादी हुई थी। बहु डॉक्टर थी। बहु सास को नींद की दवा की लत के नुक्सान के बारे में बताते हुए उन्हें गोली नहीं देने पर अड़ी थी। जब बात नहीं बनी तो सास ने गुस्सा दिखाकर नींद की गोली पाने की कोशिश की। अंत में अपने बेटे को आवाज़ दी।

 

बेटे ने आते ही कहा,कोई बात नही आज दे देते हैं ‘माँ मुहं खोलो।’पत्नी ने मना करने पर भी बेटे ने जेब से एक दवा का पत्ता निकाल कर एक छोटी पीली गोली माँ के मुहं में डाल दी।पानी भी पिला दिया।गोली लेते ही आशीर्वाद देती हुई माँ सो गयी।.पत्नी ने कहा ,’ऐसा नहीं करना चाहिए।’ पति ने दवा का पत्ता अपनी पत्नी को दे दिया।

विटामिन की गोली का पत्ता देखकर पत्नी के चेहरे पर मुस्कराहट आ गयी। धीरे से बोली ‘आप माँ के साथ चीटिंग करते हो।’बचपन में माँ ने भी चीटिंग करती थी .. इंजेक्शन लगवाने ले जाती थी और बोलती देखो कोको … और जब मैं ऊपर देखता तो डाक्टर सूई लगा देता …  पहले वो करती थीं, अब मैं बदला ले रहा हूँ।’

वैसे एक बात और भी पढी थी कि अगर गलती हो जाए तो माफी मांग लेनी चाहिए …खूबसूरत रिश्ते कल फिर

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जीवन में माँ का महत्व- माँ की ममता और माँ का महत्व जानिए – ईश्वर का दूसरा रुप है मां , भगवान हर जगह नही जा सकते इसलिए उन्होनें मां को बना दिया.
आसमान ने कहा…. “माँ एक इन्द्रधनुष है, जिसमें सभी रंग समाये हुए हैं।”
शायर ने कहा…. “माँ एक ऐसी गजल है, जो सबके दिल में उतरती चली जाती है।”
माली ने कहा…. “माँ एक दिलकश फूल है, जो पूरे गुलशन को मह्काता है।”
औलाद ने कहा…. “माँ ममता का अनमोल खजाना है, जो हर दिल पर कुर्बान है।”
वाल्मीकि जी ने कहा…. “माता और मातर भूमि का स्थान स्वर्ग से भी ऊँचा है।”
वेद व्यास जी ने कहा…. “माता के समान कोई गुरु नही है।”
पैगम्बर मोहम्मद साहब ने कहा…. “माँ वह हस्ती है, जिसके क़दमों के नीचे जन्नत है।”

 जीवन में माता पिता का महत्व

June 29, 2017 By Monica Gupta 1 Comment

छोटे बच्चों को कैसे पढ़ाए – पेरेंटिंग टिप्स इन हिंदी

जीवन में माता पिता का महत्व

छोटे बच्चों को कैसे पढ़ाए – पेरेंटिंग टिप्स इन हिंदी – कल जब मैं अपनी जानकार के घर गई तो टेबल पर खूब सारी कॉपी बिखरी हुई थी … वो कुछ उल्टे हाथ से लिख रही थी … मुझे देख कर वो एक दम से खडी हो गई … और कॉपी समेटते हुए बताया कि बेटे का स्कूल का होमवर्क कर रही हूं उसने किया नही अब स्कूल खुलने वाले हैं … स्कूल में सजा न मिले इसलिए उल्टे हाथ से खुद ही लिख रही हूं … ताकि पता न चले ..

छोटे बच्चों को कैसे पढ़ाए – पेरेंटिंग टिप्स इन हिंदी

वैसे होम वर्क तो बहुत मिलता है बच्चों को .. पर क्या ये सही है मम्मी खुद होमवर्क करें … इसके लिए पढाई में interest create करना  होगा

मेरे पास भी बहुत मैसेज आते हैं बच्चा LKG में है UKG मे है कैसे पढाए ध्यान ही नही है उसका … असल में,  बच्चे से ज्यादा मम्मियां  impatient हो जाती हैं … तो छोटे बच्चों को कैसे पढ़ाए

Interest create करें ..सबसे पहले तो किताबी दुनिया से बाहर आकर असली दुनिया की चीजे दिखाए … इससे बच्चा जल्दी सीखेगा.  किताब में चिडिया दिखाने की बजाय असल में चिडिया दिखाएं .. जितना प्रैक्टिकल दिखाएगें उतना फर्क पडेगा

गाने या कविता के माध्यम से बच्चे जल्दी सीखते हैं … बाजार में बहुत तरह के खिलौने आते हैं जिनसे बहुत कुछ सीखा जा सकता है

टीवी या computer games   के माध्यम से बच्चे बहुत बातें सीख सकता है

दोस्तों के साथ खेलने दें … हम उम्र के बच्चों से जल्दी सीखते हैं बच्चे को स्पेस दें ताकि वो सीख सके

 

अब आती है बहुत जरुरी बात … अगर बच्चे को कुछ समझ न आए तो वो बार बार पूछ्ता है तो उसे सही और ढंग से जवाब दें टालमटोल न करें

नही पढाई की तो पीटूंगी … या खाना नही मिलेगा या आज खेलना बंद ऐसे उसके मन में डर बैठ जाएगा ..बल्कि ये कहना चाहिए चलो अप्पन  मिलकर होमवर्क खत्म करते हैं फिर पार्क चलेंगें या पसंद की कार्टून देखेंगें.

मनोबल बढाए ,

शाबाशी दें

ईनाम दें ,

तारीफ करें

और सबसे जरुरी बात की आप धर्य धैर्य रखें … आधीर न हो कि आज से स्कूल जाना शुरु किया छोटी ए बी सी, क ख ग अगले दिन ही आ जाए …  बिना मारे प्यार से सारी बात आराम से समझाएं

बच्चे को डांट देना या मार देना ही एक विकल्प नही ऐसे पढाए कि बच्चे की रुचि बने रहे …

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छोटे बच्चों को कैसे पढ़ाए – पेरेंटिंग टिप्स इन हिंदी

June 28, 2017 By Monica Gupta Leave a Comment

लोकतंत्र का चौथा स्तम्भ क्या वाकई गम्भीर है

लोकतंत्र का चौथा स्तम्भ क्या वाकई गम्भीर है

लोकतंत्र का चौथा स्तम्भ क्या वाकई गम्भीर है – loktantra ka chautha stambh एक महिला के घर पर उसके बच्चे ने कुछ ऐसा बोल दिया जो उसे नही बोलना चाहिए था अब उस महिला ने घर घर जाकर ये बात बताई कि बेटे ने क्या कह दिया … उसकी बात सुनकर लोग भी बात बनाने लगे और कुछ हंसने भी लगे … अब प्रश्न ये उठता है कि जब बात सही ही नही थी तो उस महिला ने वो बात लोगो को किसलिए बताई … क्या उस बात का ढिंढोरा पीटना सही था … ???

लोकतंत्र का चौथा स्तम्भ क्या वाकई गम्भीर है 

यकीनन आप भी सोच रहे होंगें कि घर पर ही बच्चे को समझा  लेती तो सही हो जाता ना लोगो को बात पता चलती न वो मजाक का कारण बनते … पर आजकल ये हो नही रहा … मीडिया को ही ले लीजिए …

एक से एक खराब और गलत खबर खोज खोज कर लाएगें और फिर उस पर बहस करवाएगें  साथ ही साथ ये भी कहेंगें कि मीडिया  इस बात की प्रमाणिकता की पुष्टि नही करता और नतीजा वही ढाक के तीन पात …

अगले दिन फिर कोई मुद्दा आएगा और फिर उसके पीछे दौड पडेगें …

सच मानिए मुझे नही लगता कि न्यूज मीडिया देशहित में जरा भी सोच रहा है  ठीक उसी तरह जैसे मैंने पहले उदाहरण दिया … अगर कोई नेता गलत बोलता है और उसके बयान  वाकई में देश हित में नही है उस बात से देश का माहौल खराब होता है तो उसे उछालना गलत है …  जो उस बात से सम्बंधित है उससे बात साफ करनी चाहिए बजाय मीडिया पर एक घंटा ढिंढोरा पीटने से (जिसमे से लगभग 30 मिनट या ज्यादा का समय  विज्ञापनो को सादर समर्पित होता हैं)   …

और ये भी देखिए कि  इससे नतीजा क्या निकल रहा है देश गर्त में जा रहा है …

कही सुरक्षा नही रही … हर जगह मार पिटाई, खून खराबा … आखिर कहां आ गए हैं हम … इसकी सबसे बडी जिम्मेदार मीडिया है और रही सही कसर पूरी कर रहा है सोशल मीडिया …

सोशल मीडिया वाले लोगो पर तो नाराजगी बाद में होगी पर जो चौथा स्तम्भ बना हुआ है उस के भी कुछ कर्तव्य हैं या नही ???

और एक बात और … अगर इतनी ही देशभक्ति  या दिल में देश के प्रति दर्द है तो मुद्दे का हल जब तक न निकल जाए उसी पर डटे रहो … 24 घंटे का चैनल है आप लोगो के पास फिर किसलिए कहते हो कि अब समय समाप्त हो रहा है … एक बहुत बडा प्रश्नवाचक ??

विधायिका, कार्यपालिका, न्‍यायपालिका को लोकतंत्र के तीन प्रमुख स्‍तंभ माना जाता है. इसमें चौथे स्‍तंभ के रूप में मीडिया को शामिल किया गया. कहते है कि किसी भी लोकतंत्र की सफलता  के लिए जरूरी है कि उसके ये चारों स्तंभ मजबूत हों. चारों अपना अपना काम पूरी जिम्मेदारी व निष्ठा से करें…

यहां विधायिका जहां कानून बनाती है, कार्यपालिका उन्‍हें लागू करती है और न्‍यायपालिका कानूनों की व्‍याख्‍या करती है, उनका उल्‍लंघन करने वालों को सजा देती है. मीडिया यहां जहां समसामयिक विषयों पर लोगों को जागरुक करने तथा उनकी राय बनाने में बड़ी भूमिका निभाता है  इसलिए

प्लीज जरा ख्याल करो देश का … !!

खबरे फटाफट … खबर  और तेज एक मिनट में  50 खबरें … कल अखबार के आखिरी पन्ने पर एक छोटी सी खबर थी कि तेजपाल को राहत नही. याद ही नही आया कि कि कौन तेजपाल. फिर दिमाग पर जोर दिया तो याद आया. ओह वो. फिर सारी कहानी आखों के आगे घूम गई, असल में, आज कल खबरो की रफ्तार इतनी तेज और इतनी ज्यादा तेज हो गई है कि हफ्तें की खबर तो क्या दो दिन पहले की खबर भी याद नही रहती. अब तो खबर आती है इस घंटे की खास खबर फिर आएगी इस सैकिंड की खास खबर !!एक मिनट मे दस खबरें, फटाफट खबरें और 5 मिनट मे सौ खबरों के बीच दिमाग अगर भूल भी जाए तो कोई हैरानी की बात नही … loktantra ka chautha stambh

प्लीज जरा ख्याल करो देश का … !! रहम … T R P  से बचो … देशहित किसमे है इसका सोचो !!

लोकतंत्र का चौथा स्तम्भ क्या वाकई गम्भीर है ?? आपके विचारो का स्वागत है …

 

सोशल मीडिया का समाज पर असर कितना

 

 

प्लीज जरा ख्याल करो देश का … !! रहम … T R P  से बचो … देशहित किसमे है इसका सोचो !!

लोकतंत्र का चौथा स्तम्भ क्या वाकई गम्भीर है ?? आपके विचारो का स्वागत है …

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GST बोले तो –  चाहे मीडिया हो या समाचार पत्र जीएसटी की खबरे ही खबरें सुनाई देती हैं पर हर कोई कंफ्यूज है कि आखिर होगा क्या  ?  क्या ये सही कदम है या  देशवासी दुखी ही रहें …  GST बोले तो Goods and Service Tax.  The full form of GST is Goods and Services Tax. […]

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