Monica Gupta

Writer, Author, Cartoonist, Social Worker, Blogger and a renowned YouTuber

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October 29, 2016 By Monica Gupta Leave a Comment

दीवाली से जुडी कुछ रोचक बातें – दीपावली पर जरुरी है सफाई

दिवाली की तैयारी

दीवाली से जुडी कुछ रोचक बातें – दीपावली पर जरुरी है सफाई  – दिवाली या दीपावली त्योहार है खुशियों का … आईए इससे जुडी हमारी आपकी आम जिंदगी से जुडी कुछ रोचक बातॆ सुनें

दिवाली की तैयारी – दीवाली से जुडी कुछ रोचक बातें

दीपावली का नाम आते ही हमारे जहन में सबसे पहले सफाई ही आती है … प्रश्न ये उठता है कि इस त्योहार पर इतनी सफाई किसलिए की जाती है असल में,  ये फेस्टिवल धन धान्य की देवी मां लक्ष्मी का  है मान्यता है कि इस दिन माता लक्ष्मी सभी के घर आती है और जिस भक्त घर सबसे साफ सुथरा होता है वो वही विराज,मान हो जाती है..

मां लक्ष्मी के साथ साथ गणेश जी का भी पूजन किया जाता है उनके साथ रिद्दी सिद्दी का भी अगमन होता है. इसीलिए घर का कोना कोना चमकाया जाता है. मान्यता है कि सफाई के साथ साथ  टूटे-फूटे बेकार चीजो को भी बाहर का रास्ता दिखा देने से घर में सकारात्मक ऊर्जा आ जाती है और वातावरण  भी स्वच्छ हो जाता है…घर में गरीबी का वास नहीं हो पाता। इस बात को उपदेश मे कहने की बजाय देवी लक्ष्मी के आगमन से जोड़ दिया गया ताकि इसी बहाने लोग घर में साल में एक बार तो कोने-कोने की सफाई करें…..

दिवाली की तैयारी

कैसे करें दीपावली की  सफाई

सफाई मात्र जाले उतारना या झाडू लगाना ही नही बल्कि कुछ ऐसी चीजे जिनसे नकारात्मक उर्जा आती है उसे भी निकाल देना चाहिए जैसा कि टूटा हुआ दर्पण हो रुकी या खराब घडी हो बेशक कितनी भी कीमती क्यो न हो … नकारात्मक ऊर्जा का प्रमुख कारण होती है … या फिर बहुत पुराना पर टूटा फूटा  समान जिसके प्रति हमारा मोह बरकरार रहता है और हम उसे सहेजे ही जाते है … उसे निकाल देना चहैए या फिर अगर किसी के काम आए तो उसे उसे दे देना चाहिए

ये तो बात हुई सफाई की अब क्योकि दीवाली आ गई है तो हमें ऐसे क्या काम है जो इस दिन नही करने चाहिए जो दीवाली वाले दिन

दीवाली के दिन लडाई झगडा नही करना चाहिए और .. खुशी खुशी इस त्योहार को मनाना चाहिए  दीए जलाते समय या पटाखे जलाते समय विशेष सावधानी रखनी जरुरी है .. कई बार हम पूजा घर में दीए रख देते हैं ऐसे में कई बार और अनहोनी भी हो जाती है इसलिए दीए प्लेट या थाली में ही रखे. परदे या कपडो से दूर ही रखें और घर के भीतर दीए जला रखे हैं और आप बाहर हैं तो बीच बीच मे अंदर का चक्कर लगा कर चैक करते रहना जरुरी हो जाता है .. जरुरी बात ये कि भी है कि किसी भी तरह का नशा न करें …

अब बात आती है उपहारों की … उपहारो का लेन देन होता है यकीनन अच्छा भी लगता है आमतौर पर एक उपहार आया और हम वो उपहार एज इट इज दूसरे को दे देते हैं  पर घर आया उपहार दूसरे को देने से पहले चैक करना बहुत जरुरी है  कई बार कोई अपना विटिंग कार्ड अंदर रख देता है या  खोए आदि की मिठाई फुई लग जाती है … जो भी उपहार दें बस देने से पहले चैक जरुर कर लें …

जो करेंं दिल से करें दिखावा नही करें … 

सबसे सबसे जरुरी बात की दिखावा नही करें जो करें सिर्फ और सिर्फ दिल से करें.. देवता भी उन्ही की प्रार्थना सुनते हैं जो दिल से करते हैं … इसी सिलसिले मे एक बहुत प्यारी सी कहानी भी है कि एक बार भगवान नारद से कहते हैं कि मैं पहाड पर रहता हूं तो भक्त वहां आ जाते हैं समुद्र की गहराई में जाता हो तो भक्त वहां भी आजाते हैं … मैं विश्राम् कहां करुं … इस पर नारद कहते हैं कि प्रभु आप लोगो के दिल में बस जाओ … वही वही एक जगह है जहा लोग नही खोजते … तो अगर प्रभु को पाना हो तो सिर्फ दिल से… दिखाने की कोई जगह नही होनी चाहिए

जाते जाते एक और एक जरुरी बात दीवाली एक बहुत अच्छा मौका है अगर किसी से नाराजगी या झगडा है तो उन्हें बधाई दीजिए शुभकामनाएं दीजिए और मिटा दीजिए आपसी झग़डा …

दीपावली आपके जिंदगी में ढेर सारी खुशिया लेकर आए इसी शुभकामनाओ  के साथ … हैप्पी दीपावली …

दीपावली की कहानी – पांच पर्वों का प्रतीक है दीवाली – Monica Gupta

दूसरे दिन चतुर्दशी को नरक-चौदस मनाया जाता है। इसे छोटी दिवाली भी कहा जाता है। इस दिन एक पुराने दीपक में सरसों का तेल व पाँच अन्न के दाने डाल कर इसे घर की नाली ओर जलाकर रखा जाता है। यह दीपक यम दीपक कहलाता है। एक अन्य दंत-कथा के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण ने इसी दिन नरकासुर राक्षस का वध कर उसके कारागार से 16,000 कन्याओं को मुक्त कराया था। read more at monicagupta.info

दिवाली पटाखे – पटाखों से होने वाले नुकसान- दीवाली है तो पटाखे  है पटाखें है तो  पर्यावरण को नुकसान है पर ये ईको फ्रेंडली पटाखें हैं इनसे नुकसान नही होगा बल्कि दोस्ती और बढेगी दिवाली पटाखे – पटाखों से होने वाले नुकसान बेशक कुछ पटाखे प्रदूषण फैला सकते हैं पर ये पटाखे दोस्ती और मित्रता […] Read more…

 

दिवाली की तैयारी कैसी चल रही है आपकी … ??

 

October 28, 2016 By Monica Gupta Leave a Comment

एनीमिया रोग – महिलाओं में खून की कमी

एनीमिया रोग - महिलाओं में खून की कमी

एनीमिया रोग – महिलाओं में खून की कमी- महिलाएं घर की धुरी होती हैं वह पूरे परिवार की जिम्मेवारी को बखूबी निभाती हैं, पर जब खुद की सेहत की हो तो अपना ध्यान ही  नहीं रखती… अपनी सेहत के प्रति बिल्कुल लापरवाह होती है…

एनीमिया रोग – महिलाओं में खून की कमी

नारी, महिला, औरत, नारायणी, शक्ति, दुर्गा न जाने कितने नामों से स्त्री  को सम्बोधित किया जाता है, लेकिन दुःखद पहलू यह है कि आज यही नारायणी एनीमिया की गिरफ्त में है।

शक्ति को शक्तिहीन करता एनीमिया

इस बात में कोई दो राय नहीं है कि एनीमिया का नाम सुनते ही हमारे जहन में महिलाएं ही आती हैं, क्योंकि ज्यादातर महिलाएं ही इसका शिकार होती हैं। महिलाएं घर की धुरी होती हैं। वह पूरे परिवार की जिम्मेवारी को बखूबी निभाती  हैं, पर दुःख की बात है कि परिवार की देखभाल में वह खुद पर ध्यान नहीं दे पातीं। यही वजह है कि अपने पोषण के प्रति ज्यादातर समय वे लापरवाह ही बनी रहती हैं और इस वजह से एनीमिया  Anemia) का शिकार बन जाती हैं।

एनीमिया क्या है

शरीर के खून में लाल रक्त कणों का सामान्य से कम होना ही एनीमिया कहलाता है। चिकित्सीय भाषा में हीमोग्लोबिन की कमी को एनीमिया कहा जाता है। ये लाल रक्त कण शरीर के सभी अंगों में जीवनदायक ऑक्सीजन पहुंचाने का कार्य करते हैं। लाल रक्त कणों की कमी होने पर ऑक्सीजन की आपूर्ति कम हो जाती है, जिससे थकान और कमजोरी का अहसास होने लगता है। रक्त में लौह तत्व की कमी होना एनीमिया का प्रमुख कारण है। साधारणतः पुरुषों में हीमोग्लोबिन का स्तर 13-5 तथा महिलाओं में 12 ग्राम@100 मिली ग्राम आरबीसी (रेड ब्लड सेल) होना चाहिए।
एनीमिया विश्व की खतरनाक बीमारियों में से एक है। विश्व में दो बिलियन से अधिक लोग एनीमिया से पीड़ित हैं। पुरुषों की अपेक्षा महिलाएं इस समस्या से अधिक ग्रस्त हैं। पिछले दशक में भारत सहित विश्व में एनीमिया पीड़ितों की संख्या में तेजी से वृद्धि हुई है।

इस बारे में अधिक जानकारी के लिए हमने डॉक्टर गिरीश चौधरी संपर्क किया। उन्होंने बताया कि एनीमिया होने के कई कारण हो सकते हैं। इनमें ज्यादा खून बहना, RBC (Red blood cells) का बहुत ज्यादा नष्ट होना या इनका नया न बनाना, आयरन  से भरपूर भोजन न करना या शरीर में आयरन (Iron) का ठीक से अवशोषण न होना शामिल है। इसके अलावा अन्य कारण भी हैं, जिनकी वजह से एनीमिया (Anemia) की समस्या बढ़ जाती है।

महिलाओं मे खून की कमी के कारण

सामान्यतः यह बीमारी महिलाओं में इसलिए भी अधिक पाई जाती हैं क्योंकि भारतीय समाज में लड़कियों की परवरिश  पर उतना ध्यान नहीं दिया जाता, जितना दिया जाना चाहिए। इस वजह से उन्हें पर्याप्त पोषण नहीं मिल पाता और उनमें खून की कमी होने लगती है। राष्ट्रीय पोषण मॉनिटरिंग ब्यूरो के अनुसार कि 13 से 15 वर्ष की लड़कियों को हमारे देश में 1620 कैलोरी वाला भोजन ही मिलता है, जबकि उन्हें 2050 कैलोरी वाले की आवश्यकता होती है। पर्याप्त मात्रा में कैलोरी नहीं मिल पाने के कारण लड़कियां कुपोषण का शिकार हो जाती हैं और इससे खून की कमी भी हो जाती है।

यह कमी गर्भधारण के बाद और प्रसव के समय अपनी चरम सीमा पर पहुंच जाती है। यही वजह है कि यह बीमारी महिलाओं में अधिक पाई जाती है। एनीमिया के लक्षण किसी भी युवती या महिला में बहुत साफ-साफ दिखाई दे जाते हैं। खून की कमी होने पर महिलाओं में थकान, उठने-बैठने और खडे़ होने में चक्कर  आना, काम करने का मन न करना, शरीर के तापमान में कमी, त्वचा में पीलापन, दिल की धड़कन असामान्य होना, सांस लेने में तकलीफ होना, सीने में दर्द रहना, तलवों और हथेलियों में ठंडेपन के साथ ही सिर में लगातार दर्द होना शामिल है।

डॉक्टर गिरीश चौधरी ने बताया कि हैरानी इस बात की है कि एनीमिया को लोग सामान्य रूप से बीमारी नहीं मानते, जबकि यह धारणा गलत होने के साथ ही मरीज के लिए घातक भी है। यह बीमारी जानलेवा भी हो सकती है। विषेशकर  गर्भवती महिला एनीमिया (Anemia) बीमारी का शिकार होती हैं, तो उनके गर्भ में पल रहे शिशु का जीवन तक खतरे में पड़ सकता है। इसी प्रकार एनीमिया से ग्रस्त महिला के प्रसवकाल में अत्यधिक रक्तस्राव होने पर उसकी मौत तक हो सकती है।

एनीमिया रोग - महिलाओं में खून की कमी

एनीमिया रोग – महिलाओं में खून की कमी

 

एनीमिया के उपचार

सामान्य तौर पर देखा जाए, तो एनीमिया का इलाज घर पर ही हो सकता है, क्योंकि यह सहज भी है। खाने में रेशदार पदार्थों का अधिक से अधिक मात्रा में सेवन, दूध, हरी सब्जी, फल, अनार विटामिन ए  और बी, अण्डा, लाल मीट, तुअर की दाल, राजमा, चावल और फाइबरयुक्त पदार्थों का अधिक से अधिक सेवन करना चाहिए।

इसके साथ ही सीजन में खाने में पालक, चौलाई, गुड़-चना, गाजर, चुकंदर, केला, सेब आदि का सेवन भी करना चाहिए। यह सभी खाद्य पदार्थ आयरन से भरपूर होते हैं और शरीर में तेजी से खून का निर्माण करते हैं। तरल और सुपाच्य खाद्य पदार्थ का नियमित सेवन करने से भी एनीमिया से बचाव संभव है।

इसके साथ ही लोहे की कढ़ाही में पका खाना भी खून बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। कोशिश करनी चाहिए कि अधिक मात्रा में चाय और कॉफी का सेवन ज्यादा न किया जाए। आजकल बाजार में लौहतत्व और आयोडीन युक्त नमक भी उपलब्ध है। इसमें आयोडीन के साथ आयरन कम्पाउंड होते हैं, जो जो शरीर में आयोडीन के साथ आयरन की भी पूर्ति करते हैं।डबल फोर्टीफाइड नमक की निश्चित मात्रा शरीर के लिए बहुत लाभकारी होती है।

एनीमिया रोग - महिलाओं में खून की कमी

एनीमिया रोग – महिलाओं में खून की कमी

जागरुकता का अभाव

इस बारे में डॉक्टर गिरीश ने बताया कि सबसे बड़ी कमी है कि हम एनीमिया के प्रति जागरूक नहीं हैं। गांव में ही नहीं, बल्कि शहर की महिलाओं को भी एनीमिया के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं है। एक डॉक्टर होने के नाते उन्होंने इस बात को बहुत गम्भीरता से समझा और इस दिशा में हर सम्भव प्रयास करने शुरू किए।

सन 2009-10 में एक सरकारी योजना के तहत उन्होंने 30 गांव चुने और सभी गांवों को दो हिस्सों मे बांटा गया और महिलाओं की जांच की गई। इनमें से कुछ एनीमिया से ग्रस्त महिलाओं को चुना गया। इनमें से 15 गाव की महिलाओं को एलोपैथी, जबकि 15 गांव की महिलाओं को आयुर्वेदिक इलाज दिया गया। सभी को 15 दिन बाद दोबारा चेकअप के लिए बुलाया गया, तो उनमें 80% तक सुधार था। कुछ महिलाओं ने स्वीकार किया कि वह दवाई नियमित रूप से नहीं ले सकीं। कुल मिलाकर यह अभियान सफल रहा।

एनीमिया रोग - महिलाओं में खून की कमी

एनीमिया रोग – महिलाओं में खून की कमी

इसमें सफलता मिलने के बाद कुछ समय बाद एक दूसरी कार्य योजना बनाई गई। इस बार सरकारी स्कूल की +2 की  लड़कियों को चुना गया। हरियाणा के जिले सिरसा के एक गांव कवरपुरा को चुना गया। पूरे गांव में कुल 250 घर थे। यहां जिन 60 लड़कियों को चुना गया, उन्हें पूरी तरह से ट्रेनिंग दी गई। इस दौरान एनीमिया, मलेरिया टीकाकरण आदि के बारे में विस्तार से बताया गया।

इस संबंध में एक प्रश्नावली भी तैयार की गई। छात्राएं समयानुसार हर घर में जातीं और गांव की महिलाओं को एनीमिया और मलेरिया के बारे में विस्तार से जानकारी दे कर आतीं।  ऐसे में महिलाओं ने उनकी बात को बहुत ध्यान से  न सिर्फ सुना, बल्कि अमल भी करना शुरू कर दिया।

यह अभियान लगभग दो महीने तक चला और महिलाओं पर असर भी छोड़ गया। इसी बारे में जब स्कूल के लेक्चरर श्री राजेश कुमार से बात की गई, तो उन्होंने बताया कि लड़कियों की बातों का महिलाओं पर बहुत असर दिखाई दे रहा है।

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एनीमिया रोग – महिलाओं में खून की कमी

इसका एक उदाहरण बताते हुए उन्होंने कहा कि गाँव में अक्सर दूसरे गांव के लोग बर्तन बेचने आते हैं। एक बर्तन बेचने वाले ने उनको बताया कि पता नहीं क्या बात है, इस गांव में लोग लोहे की कढ़ाही बहुत खरीद रहे हैं। यह जान कर बहुत खुशी हुई कि लोग जान गए हैं कि एनीमिया दूर करने के लिए क्या-क्या करना चाहिए।

डॉक्टर गिरीश ने बताया कि इस तरह के अभियान यदि नियमित रूप से चलाए जाएं, तो वह दिन दूर नहीं जब हम एनीमिया पर विजय जरूर पा लेंगे।  इसमें कोई शक नहीं कि यदि जागरूक करने वाले ऐसे अभियान लगातार चलते रहें, तो हमारा समाज समाज स्वस्थ एवं खुशहाल समाज कहलाएगा।

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बासी भोजन और महिलाए कल सुबह मेरी सहेली मणि के बहुत तेज पेट दर्द हुआ. फोन आते ही मैं उसके घर भागी. वो चुपचाप लेटी थी और घर के सभी सदस्य ऐसा लग रहा था कि read more at monicagupta.info

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एनीमिया रोग – महिलाओं में खून की कमी के बारे में आपके क्या विचार है … जरुर बताईएगा

October 27, 2016 By Monica Gupta Leave a Comment

दिवाली पटाखे – पटाखों से होने वाले नुकसान

दिवाली पटाखे

दिवाली पटाखे – पटाखों से होने वाले नुकसान- दीवाली है तो पटाखे  है पटाखें है तो  पर्यावरण को नुकसान है पर ये ईको फ्रेंडली पटाखें हैं इनसे नुकसान नही होगा बल्कि दोस्ती और बढेगी

दिवाली पटाखे

दिवाली पटाखे

दिवाली पटाखे – पटाखों से होने वाले नुकसान

बेशक कुछ पटाखे प्रदूषण फैला सकते हैं पर ये पटाखे दोस्ती और मित्रता का पाठ पढाएगे…

दीपावली की कहानी – पांच पर्वों का प्रतीक है दीवाली – Monica Gupta

दीपावली की कहानी – पांच पर्वों का प्रतीक है दीवाली . दीवाली को दीपावली भी कहते हैं. हमारे देश में बहुत धूमधाम से मनाया जाने वाला त्योहार है दीपावली. दिवाली read more at monicagupta.info

प्रदूषण रहित दिवाली – ध्वनि प्रदूषण को रोकने के उपाय – Monica Gupta

प्रदूषण रहित दिवाली – ध्वनि प्रदूषण को रोकने के उपाय- सुप्रीम कोर्ट ने कड़े निर्देश दिए है कि रात 10 बजे के बाद पटाखे फोड़ने पर कार्रवाई होगी. सुबह 6 बजे तक read more at monicagupta.info

दीपावली की रात्रि में टोने-टोटके – दीपावली की सफाई – Monica Gupta

कुल मिलाकर बात यही समझ आई कि दीपावली के बहाने ही सही घर में स्वच्छता रखिए… गद्दो के नीचे, धूल मिट्टी हो या दीवारों पर जाले इससे नकारात्मकता आती है… इसलिए कुछ अच्छी बाते भी लगीं जैसाकि घर की साफ सफाई रखनी चाहिए. साफ-सफाई के बाद घर में धूप-दीप-ध्यान करें.  दीवाली वाले दिन किसी तालाब या नदी में मछलियों को आटे की गोलियां बनाकर खिलाएं। इस पुण्य कर्म से बड़े से बड़े संकट भी दूर हो जाते हैं। घर में स्थित तुलसी के पौधे के पास दीपावली की रात में दीपक जलाएं. read more at monicagupta.info

 

 

 

 

October 27, 2016 By Monica Gupta Leave a Comment

प्रदूषण रहित दिवाली – ध्वनि प्रदूषण को रोकने के उपाय

प्रदूषण रहित दिवाली

प्रदूषण रहित दिवाली – ध्वनि प्रदूषण को रोकने के उपाय – पटाखों से पर्यावरण को नुकसान – आज घर पर कुछ काम करते हुए अचानक भडाम की बहुत तेज आवाज सुनी …

प्रदूषण रहित दिवाली – ध्वनि प्रदूषण को रोकने के उपाय

अचानक दिल धबरा गया कि ये क्या हुआ… कहां बम फटा… मन में बुरे ख्याल आने लगे … तभी ख्याल आया कि ओह दीवाली है … बाहर बच्चों ने बम चलाया होगा … सच,,, आजकल देश में इतना तनाव है, हमारी सीमा पर इतना तनाव है कि इस तरह ध्वनियां जो कभी खुशियां लेकर आती थी अब तनाव और  टेंशन लेकर आती हैं …

मैने फिर नेट पर सर्च किया कि दिवाली पर बढ़ते ध्वनि प्रदूषण को रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने क्या कड़े निर्देश दिए है तो पढा कि रात 10 बजे के बाद पटाखे फोड़ने पर कार्रवाई की जाएगी। सुप्रीम कोर्ट के ध्वनि प्रदूषण नियंत्रण के संबंध में दिए निर्देषों के अनुसार रात में 10 बजे तक ही निर्धारित ध्वनि स्तर के पटाखे फोडे़ जा सकेंगे। इसके बाद सुबह 6 बजे तक पटाखों का फोड़ना पूरी तरह से वर्जित रहेगा…

प्रदूषण रहित दिवाली

प्रदूषण रहित दिवाली

दिवाली पर्व के दौरान भारत सरकार के पर्यावरण एवं वन मंत्रालय की अधिसूचना के अनुसार पटाखों के लिए शोर मानक नियत किए हैं। इसके अनुसार प्रस्फोटन के बिंदु से चार मीटर की दूरी पर 125 डीबी (एआई) या 145 डीबी से अधिक ध्वनि स्तर के पटाखों का उपयोग करना वर्जित है

चलिए थोडी राहत तो है …वैसे इसमें कोई शक नही कि हर साल की तुलना में पटाखो का शोर कम ही होता जा रहा है जोकि अच्छा सकेंत भी है … खुशियां और भी बहुत तरह से मनाई जा सकती है बम फोडना क्या जरुरी है …

प्रदूषण रहित दिवाली  के बारे में आपके क्या विचाए हैं ??

October 27, 2016 By Monica Gupta Leave a Comment

लेखन के बारे में – लेखन कौशल को निखारने का सुनहरा अवसर

लेखन के बारे में

लेखन के बारे में – लेखन कौशल को निखारने का सुनहरा अवसर – लेखको के लिए खुश खबरी  से कम नही  ये खबर… एक समय था जब लेखको की रचनाए धन्यवाद सहित सम्पादक से वापिस आ जाती और मनोबल समाप्त हो जाता  या फिर अपनी किताब  प्रकाशित करवाने के लिए प्रकाशक के नखरे उठाने पडते  पर अब किसी के नाज नखरे उठाने की जरुरत नही बस अपना पूरा ध्यान लेखनी पर लगाईए… पल भर में अपने लेख प्रकाशित करके या अपनी लिखी किताब खुद प्रकाशित करके  पूरी दुनिया को अपना कला कौशल दिखाईए …

जी हां … न तो मैं गलत बोल रही हूं और न ही मैं मजाक कर रही हूं … मेरी बात जानने से पहले आपको सुनना पडेगा मेरा लेखन अनुभव…

  लेखन के बारे में – लेखन कौशल को निखारने का सुनहरा अवसर

वसुधैव कुटुम्बकम … पूरी पृथ्वी एक परिवार है … कुछ समय पहले तक मेरे मन में संशय था कि ऐसे कैसे सम्भव है पूरी पृथ्वी एक परिवार पर कैसे … पर जैसे जैसे इंटर नेट के सम्पर्क में आई मुझे यकीन होने लगा कि वाकई ये सच है आज हम नेट के माध्यम से पूरी दुनिया ना सिर्फ घूम सकते हैं बल्कि किस देश में कहां पर क्या हो रहा है क्या खबर है सब जान सकते है …कुछ् समय पहले तक ऐसा नही था.

 

लेखन के बारे में

लेखन के बारे में

मेरा लेखन का अनुभव …

बात बहुत पुरानी भी नही है अगर मैं अपने अनुभव की बात बताऊ तो बचपन मे यानि सन 1974 – 1975  में मुझे  बाल पत्रिकाए जैसे लोटपोट पढने का बहुत शौक था. इतना शौक था कि अगर मैं स्कूल जाने के लिए तैयार हो रही होती थी और अखबार वाला पत्रिका डाल जाता तो मेरे अचानक पेट दर्द शुरु हो जाता (झूठ मूठवाला)  … डांट तो पडती थी और कई बार मम्मी गुस्से मे मुझे अलमारी के उपर भी बैठा देती …  तो कई बार मैं कहती कि मम्मी लोटपोट भी पकडा दो … खैर ऐसे छोटे छोटे उदाहरण तो बहुत सारे हैं पर ये तो बात थी पढने की धीरे धीरे शौक बढने लगा और मैं अपने आप कहानी बना कर लिखने भी लगी पर नेट की सुविधा नही थी और ना ही कोई जानकारी इसलिए मेरी लिखी कहानियां कभी सम्पादक तक नही पहुंच पाई..

नासमझी, आधी अधूरी जानकारी में कभी टिकट नही लगाती थी तो कभी पोस्टकार्ड पर कहानी लिख कर भेज देती … और इंतजार भी करती कि मेरी कहानी जरुर छपेगी… खैर धीरे धीरे समझ आने लगी पर तब तक मैं बहुत कहानियां लिख कर भेज चुकी थी जिनका आज की तारीख में मेरे पास न कोई रिकार्ड है और न ही कोई सबूत …और लेखन जगत में मैं दस साल पीछे चली गई .. क्योकि आज अगर मैं अपना लेखन का अनुभव 27 साल लिखती हूं अगर तब मेरे पास साधन होते, नेट जैसी सुविधा होती, कोई बताने वाला होता तो मेरे लेखन का अनुभव आज 27 की बजाय 37 साल होता …

पर जब जागो तभी सवेरा …

लेखन कला का विकास

जब समझ आई और कहानियां सही ढंग से भेजना शुरु किया तब ये नही था कि जो भी कहानी या रचना भेजी वो प्रकाशित हो गई वैसे अगर 40% वापिस आई तो 60% प्रकाशित भी हुई.

एक लेखक के लिए अपनी रचना का जानी मानी पत्रिका में  प्रकाशित होना किसी सपने के सच होना से कम नही है … क्योकि मैं भी बहुत बार इस दौर से गुजरी हूं जब कहानी लिखी या कोई लेख लिखा और बहुत अच्छा लिखा पर वो छपा नही और  अगर टिकट लगा कर भेजा तो धन्यवाद सहित वापिस आ गया या फिर सम्पादक की मेज के नीचे रखे डस्टबीन की भेंट चढ गया.

ऐसे में उस समय आत्मविश्वास की बहुत कमी हो जाती है  … लगने लगता है कि शायद हममें काबिलियत ही नही है लेखक बनने की…

वो तो अब जाकर पता चला कि अकसर रचनाएं धन्यवाद सहित वापिस इसलिए भी आ जाती है कि ज्यादातर पत्र-पत्रिका के संपादक मंडल की अपनी एक रचनात्मक रुचि होती है अपनी टीम होती है और ज्यादातर उन्हीं की रचनाएं ली जाती हैं यानि हमारी रचना का न छपना इस बात का सकेंत नही होता था कि हम अच्छे लेखक नही है या अच्छा नही लिखा इसलिए प्रकाशित नही हुआ…

तो यानि हम में काबलियत है … हम न सिर्फ सोच सकते हैंं बल्कि अच्छा लिख भी सकते हैं अब रही बात  कि बेशक लिख तो  लिया पर दिखाएगें कहा  यानि प्रकाशित कहां करें कौन पढेगा हमारी रचना को … … कोई माध्यम ही नही … किताब की पांडुलिपि तैयार है पर कोई प्रकाशक  तैयार नही … ऐसे में क्या किया जाए ??? .

क्योकि बार बार रचना ना  छपना या धन्यवाद सहित वापिस आ जाना लेखक के लिए निराशा का कारण बनता जाता है और एक समय ऐसा आता है कि वो लेखन से विमुख होता जाता है यानि लेखक बनने से पहले ही लेखनी दम तोड डेती है…  बात सिर्फ लेखन की ही नही बल्कि पब्लिशर की भी है हम अपनी किताब छपवाना चाह्ते है पर पब्लिशर या तो मिलते नही या वो मनमानी करते हैं इस करके हमारा लेखन कही दब सा जाता है… तो क्या रास्ता है .. ? क्या है कोई आशा के किरण … !!!

लेखन कौशल का मूल्यांकन

जी … हां बिल्कुल है … आशा की किरण है जिससे न सिर्फ आपको लेखने का बल मिलेगा बल्कि अपनी लिखी किताब भी पब्लिश करवा सकते हैंं.. आज जो कुछ  हमें इंटर नेट ने दिया है हमें उसका धन्यवाद करना चाहिए … बस हममे लिखने का दम खम होना चाहिए फिर नाम कमाते समय नही लगेगा … लेखन कैसा हो ये तो खैर ये अलग विषय है फिलहाल आज बात हो रही है कि हम अपना लेखन दुनिया तक कैसे पहुंचा सकते हैं और वो माध्यम है ढेर सारी सोशल नेटवर्किंग साईटस और इन सब मे सबसे उपर है ब्लॉग लेखन …

ब्लॉग लेखन के माध्यम से हम अपनी बात कही तक भी पहुंचा सकते हैं और रही बात अपनी किताब प्रकाशित करवाने की तो वो भी हम बहुत आसानी से कर सकते हैं … मैं भी बहुत रास्तों से गुजरी, बहुत उदासी झेली पर अब नही क्योकि अब मैं अपनी किताब खुद प्रकाशित करके उसे नेट पर डाल सकती हूं …

अगर किताब का सारा मैटर हमारे सम्पादन करके बिल्कुल पास तैयार है तो 24 घंटे के भीतर भीतर आपकी किताब ऑन लाईन हो सकती है… मैने हाल ही में एक किताब ऑनलाईन की है जिसका लिंक आप देख सकते हैं . मैने  एक किताब लिखी और उसे प्रकाशित भी किया जिसकी बहुत अच्छी प्रतिक्रिया मिली जिस कारण मैं अपनी अगली ऑनलाईन किताब पर काम कर रही हूं  कुल मिलाकर अगर नई टेक्निलोजी का अगर सही तरीके से इस्तेमाल किया जाए तो लेखको के लिए आशा की किरण बन सकती है…

101 स्वच्छता के नारे 

 

लेखन कला का विकास

लेखन कला का विकास

My Experience and Blogging – Monica Gupta

एक कडवी सच्चाई जिससे मुझे दो चार होना पडा… और मैं जिंदगी की रेस में  दस  साल पीछे रह गई.  read more at monicagupta.info

 

 

 

लेखन के बारे में आपको ये लेख कैसा लगा … ??

 

तो तैयार है आप भी ब्लॉग के माध्यम से अपनी प्रतिभा दिखाने के लिए या ऑनलाईन अपनी लिखी किताब खुद प्रकाशित करने के लिए …

आज, जब, हमारे पास नेट जैसी सारी सुविधाएं है तो हमें ज्यादा सोचने मे समय नही लगाना चाहिए …

October 27, 2016 By Monica Gupta Leave a Comment

स्वच्छता अभियान पर निबंध – स्वच्छ भारत स्वस्थ भारत निबंध

स्वच्छ भारत अभियान के असली हीरो

स्वच्छता अभियान पर निबंध – कैसे बने स्वच्छ भारत स्वस्थ भारत निबंध लिखने के लिए कुछ बच्चे मेरे पास आए और बोले कि स्कूल में देना हैं और कुछ अलग हट कर होना चाहिए समझ नही आ रहा आप बता दीजिए…

स्वच्छता अभियान पर निबंध – स्वच्छ भारत स्वस्थ भारत निबंध

स्वच्छता में बहुत काम किया हुआ है निबंध लिख कर देना जरा भी मुश्किल नही पर इतना ही काफी नही है ..अक्सर  अपने चारों तरफ गंदगी देख कर मन दुखी भी हो जाता है कि लोगो में स्वच्छता नाम की कोई चीज ही नही है जैसे अपने घर को साफ रखते हैं वैसा ही सडक को भी अपना घर समझेंगें तो स्वच्छता आ जाएगी पर अभाव जागरुकता का ही है जो नेताओ या फिल्मी कलाकारों के बार बार कहने या करने के बाद भी नही आ रही… टीवी चैनल हो या विज्ञापन सभी में स्वच्छता भरी पडी है पर असल जिंदगी में घर से बाहर निकलना दूभर है…

बच्चों के कहने  के बाद मेरा ध्यान इसी बात पर लगा रहा कि क्या बात बताऊं ताकि उनको कुछ नया दे सकूं.



एक बात तो बहुत पहले पढी थी  कि घर पर एक व्यक्ति कूडा लेने आता है तो बच्चा मां को बोलता है कि मां कूडे वाला आया है इस पर मां उसे समझाती है कि नही बेटा वो तो सफाई वाला है हमारे घर से कूडा ले जाकर घर साफ करता है इसलिए उसे सफाई कर्मचारी कहो ना कि कूडे वाला… बहुत सही बात कही…. असल में,  हमारा नजरिया जब तक सही नही होगा तब तक स्वच्छता भी नही आ पाएगी…

थोडी देर पहले मार्किट से लौटते वक्त एक घर के सामने सफाई कर्मचारी अपनी रिक्शा लिए खडा था और घर की मालकिन कूडा डाल रही थी. सफाई कर्मचारी कह रहा था मैडम जी सूखा और गीला कूडा अलग अलग थैली मे दे दिया करो नही तो दिक्कत हो जाती है इस पर वो महिला उसे डांटने लगी कि तू सीखाएगा मुझे क्या सही और क्या गलत है ठहर तेरी शिकायत करुंगी … ऊपर.. तुझे नौकरी से निकलवाती हूं और वो बेचारा मुंह लटका कर आगे बढ गया.

मुझे याद आई कल की बात हमारा सफाई कर्मचारी दो दिन कूडा लेने नही आया आज जब आया तो मैने कहा कि दीवाली तक तो रोज आ जाया करो तभी मेरी नजर उसके हाथ पर बंधी पट्टी पर पडी. वो बोला कि आया तो था.. पिछ्ली गली मे एक मालकिन ने बहुत सारा टूटा कांच कूडे मे डाल दिया और रिक्शा में कूडा उलटते वक्त वो चुभ गया खून निकलने की वजह से वो वापिस चला गया… वैसा सारा दोष दूसरो पर भी डालना ठीक नही हमें खुद भी सुधरना होगा … है ना .. !! सफाई सफाई से करिए .

एक बात और ध्यान आई . हमारे पडोस की है कूडे वाला आया हुआ था और वो  बाहर कूडा डालने आई तो वो  बाई से बोला कि तू घर की सफाई करती है कभी कूडे की बाल्टी भी साफ कर लिया कर देख कितनी गंदी हो रखी है… अचानक मेरा ध्यान अपनी कूडे की बाल्टी पर चला गया और मैने सोच लिया कि आज कूडा देने के बाद इसे भी जरुर साफ करुगी…

जिन दिनों हमारे शहर और गांव में स्वच्छता अभियान चल रहा था उन दिनों कुछ लोग बैठे आपस में बात कर रहे थे कि बहुत खूब … स्वच्छता अभियान चला कर अच्छा काम हो रहा है उन में एक डाक्टर भी  बैठा था बोला अरे…  हमारे पेट पर क्यो लात मार रहे हो … जब आदमी स्वच्छता  अपना लेगा तो गंदगी नही रह जाएगी फिर बीमारियां खत्म हो जाएगी तो हमारा क्या होगा … ये है सोच..

समस्या है तो समाधान भी है …

वैसे स्वच्छता के लिए शहर में जगह जगह कूडा दान रखे जाएं और सडको पर सीसीटीवी कैमरे लगे तो ताकि पता चले कि कौन गंदगी कर रहा है और उसका फाईन लगे…

मेरा ये भी  मानना है कि अगर आज हमने अपने बैग से कुछ निकाल कर सडक पर नही फेका या कूडे दान में फेंका तो हमने स्वच्छता अभियान मे जबरदस्त सहयोग दिया है… !!

वैसे स्वच्छता के फायदे बता कर भी स्वच्छात के लिए प्रेरित किया जा सकता है जैसा कि

  1. कम मृत्यु दर और बेहतर स्वास्थ्य
  2. पैसे की बचत।
  3. उत्पादकता में वृद्धि।
  4. ज्यादा आय के साधन।
  5. आत्म सम्मान- देश का सम्मान

 

कुल मिलाकर उदाहरण देकर समझाना चाहिए बजाय लिखा हुआ पढाने के ताकि बच्चे इसे रट्टा न लगाए बल्कि दिल से अपनाएं

अन्य गांवो  की सफलता की कहानियां बताए और सुनाए ताकि बच्चे प्रेरित हों बच्चों ने जो स्वच्छता पर काम किया उन्हें प्रोत्साहित करें और ईमान दें ताकि दूसरे बच्चे भी यह करने की प्रेरणा पा सकें …

 

स्वच्छता अभियान पर निबंध

स्वच्छता अभियान पर निबंध

फिलहाल मेरे बहुत से लिखे लेख आपके काम आ सकते हैं

कैसे आएगी स्वच्छता -क्या है स्वच्छता – Monica Gupta

श्रीलंका बना मलेरिया मुक्त आखिर कैसे आएगी स्वच्छता …स्वच्छता का अर्थ क्या है NDTV के प्राईम टाईम में रवीश कुमार बता रहे थे कि श्रीलंका मलेरिया मुक्त हो गया कैसे आएगी स्वच्छता -क्या है स्वच्छता – Monica Gupta

स्वच्छता का महत्व कितना आवश्यक – Monica Gupta

स्वच्छता का महत्व स्वच्छता की बात करने से पहले हमारे लिए सबसे पहले यह जानना बहुत जरूरी है कि स्वच्छता का महत्व कितना आवश्यक है क्योकि स्वच्छता और पेयजल की read more at monicagupta.info

स्वच्छ भारत अभियान- स्वच्छ भारत स्वस्थ भारत – Monica Gupta

क्लिक करिए और सुनिए स्वच्छता अभियान पर 4 मिनट और 35 सैकिंड की ऑडियो… मेरा अनुभव स्वच्छता अभियान और मेरे मन की बात बात स्वच्छता अभियान के दौरान की है. जब गांव गांव जाकर लोगों को जागरुक किया जा रहा था.लोगो को समझाया जा रहा था कि खुले मे शौच नही जाओ आसान नही था क्योकि सदियों से चली आ रही मानसिकता बदलना मुश्किल था. See more… Read more…

जीवन में स्वच्छता का महत्व – Monica Gupta

हमारे जीवन में स्वच्छता का महत्व समझते हुए मैने आज स्वच्छता में बहुत बडा योगदान दिया. अपने पर्स में पडे कागज सडक पर फेंकने की बजाय घर के डस्टबीन में फेंका See more…

स्वच्छता अभियान पर निबंध

स्वच्छता अभियान पर निबंध

https://www.youtube.com/playlist?list=PLNHDwUHKA9scPFO9px0XTHhI7gstdwY-O

 

स्वच्छ भारत अभियान नारे – 101 स्वच्छता के नारे

स्वच्छ भारत अभियान नारे – लोगों में स्वच्छता के प्रति जागरुकता आए, एक जोश पैदा हो और इसके लिए स्वच्छता के नारों से बढ़ कर और कोई माध्यम हो ही नही सकता…!!! स्वच्छ भारत अभियान नारे – 101 स्वच्छता के नारे

 

स्वच्छता से सम्बंधित और वीडियो देखने के लिए क्लिक कीजिए

Swachhta – Importance of Cleanliness – Motivational Videos in Hindi – YouTube

http://https://www.youtube.com/@MonicaGupta/ – Motivational Videos in Hindi by Monica Gupta Swachhta – Importance of Cleanliness Motivational & Inspirational Videos o… youtube.com

 

सफाई सफाई से करिए…

आपके स्वच्छता के बारे के क्या विचार हैं …स्वच्छता अभियान पर निबंध  कैसा लगा ??  जरुर बताईएगा …

October 26, 2016 By Monica Gupta Leave a Comment

छुट्टी का एक दिन – छुट्टी की एप्लीकेशन

छुट्टी का एक दिन

छुट्टी का एक दिन – त्योहारो के चलते अक्सर छुट्टी हो जाती है या कई बार लेनी भी पडती है… खास तौर पर दीपावली पर जो सफाई अभियान या सम्पूर्ण स्वच्छता अभियान चलता है उसके चलते घर पर बहुत काम हो जाता है इसलिए अपने कामों से कई बार छुट्टी भी लेनी पडती है…

छुट्टी का एक दिन – छुट्टी की एप्लीकेशन

छुट्टी का दिन है आज कार्टून बनाने से छुट्टी है क्योकि समय ही नही मिल रहा कार्टून बनाने का …

 

छुट्टी का एक दिन

Sick Leave – Monica Gupta

Sick Leave बचपन मे क्लास english की हो या हिंदी की एक पत्र यानि application का हमें रट्टा लगा होता था और वो है Sick Leave. सविनय निवेदन है कि आज मुझे

बाहर बरसात हुई मौसम चाऊ माऊ हुआ कि हमें और किसी की याद आए न आए छुट्टी की याद जरुर आती है और बहाना … अजी बहाना तैयार है कि सर …  कल बरसात मे भीगने के कारण सर्दी लग गई और बुखार भी हो गया. इसलिए आज आफिस  नही आ पाउगां… और फिर बच्चों को लेकर निकल जाते है long drive पर ….  अगर लिख कर दे रहे हैं तो अलग बात है पर अगर फोन करके बताना है तो एक दो फर्जी छीकें तो मारनी पडेगी और एक दो बार नाक से भी बोलना पडेगा अरे भई … आपकी नाक भी तो बंद है ना read more at monicagupta.info

 

 

 

 

 

October 26, 2016 By Monica Gupta Leave a Comment

एक कहानी ऐसी भी – हिन्दी लघु कहानी

स्वच्छता का महत्व - स्वच्छ भारत अभियान में हमारा योगदान

एक कहानी ऐसी भी – हिन्दी लघु कहानी-ये कहानी सुमन और कुसुम दो महिलाओं की है…. जिंदगी में बस दिन भर चैट, लाईक और कमेंट करना ही काफी नहीं इसके आगे भी बहुत कुछ है पर क्या ??? जानने के लिए आपको सुननी पडेगी – एक कहानी ऐसी भी- हिन्दी लघु कहानी

एक कहानी ऐसी भी – हिन्दी लघु कहानी

वो दो सहेलियां थी, बिल्कुल पक्की वाली. नाम था कुसुम और सुमन. दोनो की पढाई एक ही स्कूल मे हुई  और फिर एक ही कालिज में दाखिला हुआ और फिर दोनों की शादी भी एक ही शहर में हुई. दोनो लडकियों को उनके परिवार वाले और दोस्त बहनें ही बुलाते थे और कहते कि पिछ्ले जन्म में दोनो सगी बहनें ही होगी तभी तो इस जन्म में इतनी पक्की दोस्ती है.

शादी के बाद दोनो अपना अपना घर सम्भालने में व्यस्त हो गई. दोनो के एक एक बच्चा भी हो गया और दोनों अपनी अपने गृहस्थी में मस्त हो गई. एक शहर में रहने के बाद भी दोनों जल्दी से मिल नही पाती थीं. एक दिन अचानक मार्किट में दोनो का सामना सामना हो गया. कुसुम सुमन को देख कर और सुमन कुसुम को देख कर हैरान रह गई. कुसुम जहां हमेशा की तरह एक्टिव और स्मार्ट थी वही सुमन बिल्कुल बदल गई थी.

थोडी ज्यादा ही मोटी भी हो गई थी  बिल्कुल घरेलू टाईप महिला बन गई थी… सुमन ने कुसुम से पूछा कि तुमने तो जरुर नौकरी ज्वाईन कर रखी होगी तभी तो इतनी स्मार्ट लग रही हो… इस पर कुसुम बोली … अरे नही बिल्कुल नही … घर पर बाबूजी हैं और बेटा भी बहुत छोटा है उनकी देखभाल करनी होती है ऐसे में नौकरी का तो सोच भी नही सकती… सुमन ने उसका नम्बर लिया और पूछा कि वो वटसअप पर या फेसबुक पर तो होगी तुम ?? चैट किया करेंगें…

कुसुम भी खुश हो गई और अपना नम्बर देते हुए बोली अरे वाह … फिर तो मैं भी तुम्हें फ्रेंड रिक्वेट भेजूगी … कुछ देर बात करके दोनो सहेलिया अपने अपने घर चली गई..

शाम को कुसुम ने देखा उसके वटस अप पर सुमन ने ढेर सारे मैसेज भेजे हुए थे और फेसबुक पर भी वो दूसरो पर खूब कमेंट करती रहती. दो चार बार तो कुसुम ने जवाब दिया पर वो ज्यादा समय चैट पर नही रहती थी. उसका कारण था कि कुसुम को जब भी घर के काम से समय मिलता वो ब्लॉगिंग करती उसने एक ब्लॉग बनाया हुआ था और घर के काम से फुर्सत मिलते ही उसी पर व्यस्त रह्ती.

असल में, उसे शुरु से ही प्रकृति नेचर  बहुत पसंद थी इसलिए उसी पर अलग अलग फोटो क्लिक करती और उस पर डालती और उस पर कुछ न कुछ लिखती रहती.

उसने सुमन को भी फेसबुक पर लगातार एक्टिव रहते हुए देख कर बहुत बार बोला कि तुम भी कुछ करो पर हमेशा समय कहां है सारा दिन तो घर का काम ही खत्म नही होता और कामों की लम्बी चौडी लिस्ट बता देती और बात टाल जाती पर कुसुम समझ गई थी कि वो करना ही नही चाह्ती इसलिए बहाना बना रही है क्योकि घर परिवार का जितना काम कुसुम को होता उतना ही सुमन को रहता … दोनो का छोटा बच्चा और बाबूजी थे यानि काम एक जैसा सा ही था पर सुमन घर के काम से फारिक होकर वटसअप या फेसबुक पर चैटिंग और मैसेजिंग में जुट जाती.

वही कुसुम अपने समय का सही उपयोग कर रही थी. वटस अप हो या फेसबुक समय सभी को देती पर कुछ थोडा ज्यादा समय अपने शौक को देती. और आज ना सिर्फ वो बहुत क्रिएटिव हो गई बल्कि उसमें आत्मविश्वास भी बहुत आ गया अपने सर्कल में उसका नाम के साथ साथ मान सम्मान  और पहचान बनने लगी  बहुत लोग जानने लगे  और उस से टिप्स भी लेने लगे.

वही दूसरी ओर सुमन थी … दिनभर बस चैट, लाईक और कमेंट करती वो किसी भी मुकाम पर नही पहुंच पाई थी और ना ही अपनी पहचान बना पाई थी.

हो सकता है उसके मन में एक दर्द, एक टीस सी तो उठती हो पर उसे ज्यादा न सोच कर गर्दन झटकती उस बात से ध्यान हटाती वो फिर जुट जाती किसी की पोस्ट लाईक करने, किसी पर ताना कसने में …

एक दिन जब सुमन किसी पर कमेंट कर रही थी एक जानकार महिला का उसके पास मैसेज आया उस पर लिखा था कि कि आपकी फ्रेंड लिस्ट में कुसुम जी है जरा मेरी उनसे जान पहचान करवा दीजिए प्लीज …वो बहुत क्रिएटिव है और उन्ही की तरह बनना चाहती हूं इसलिए उनसे मिलना चाहती हूं …

सुमन ने कल मिलवाने  की बात कही और अगले दिन सुबह ही वो कुसुम के घर जा रहे थे. कुसुम ने दोनो को चाय सर्व की और सुमन के साथ आई महिला से मिलकर बहुत खुश हुई कि वो भी कुछ करना चाह्ती है क्योकि आमतौर पर कुछ महिलाएं नेट पर रहती तो सारा समय है पर कुछ क्रिएटिव करना हो या कुछ अलग करना हो तो समय न होने का बहाना बना देती हैं जबकि घर बैठे बैठे अपनी एक अलग पहचान बनाने का ये सबसे अच्छा माध्यम है…

कुसुम ने अपने बारे में बताया कि उसे प्रकृति की फोटो लेने का बहुत शौक था बस इसी शौक को कोनटिन्यू रखा और अपनी एक सहेली मणि से ब्लॉग बनवाया  उसमे आर्टिकल फोटो पोस्ट करती रही …और सोचा भी न था कि इसके शौक को इस कदर पसंद किया जाएगा… उस महिला ने बताया कि उसे कुकिंग का बहुत शौक है … इस पर कुसुम ने कहा कि फिर तो वो बहुत कुछ कर सकती है… नई नई डिश सीखाए … और नेट से और भी नई नई डिश बनाना सीखे … अपने अनुभव शेयर करे … बहुत कुछ है कर दिखाने को बस मन में लग्न होनी चाहिए और एक दिन ऐसा भी आएगा जब अपने शौक के साथ साथ ये करियर भी बन जाएगा और सोर्स ऑफ इंकम भी …

वही सुमन उन दोनों की बातों में खो सी गई सच … ये सब कितना आसान था … और वो बस अपना समय ही वेस्ट करती रही …और दो साल में उसे मिला क्या… कुछ नही न अपनी पहचान बनी और न वो क्रिएटिव… अब उसे भी जिंदगी में कुछ बनना है घर बैठे बैठे ही वो बहुत कुछ करके दिखाएगी

कुसुम के घर से बाहर निकलते निकलते वो सोच रही थी कि वो भी अपने भीतर छिपे  इंटर्स्ट को खोज कर जल्द ही कुसुम के पास आएगी और वो भी अपनी पहचान जरुर बनाएगी..

और मन बना लिया कि कल ही वो कुसुम के पास जाकर अपनी जिंदगी को नई पहचान देगी… वो भी कुछ कर के दिखाएगी…

वैसे आपने क्या सोचा घर पर रहते हुए भी क्या आप भी अपनी पहचान बनाना चाहती हैं …एक कहानी ऐसी भी – हिन्दी लघु कहानी-

वैसे अगर आप  भी जिंदगी में कुछ करना चाहते हैं तो प्लीज सोचिए मत कर डालिए … आप भी किसी के लिए आदर्श या प्रेरणा बन सकते हैं

बच्चों की छोटी कहानियाँ – Monica Gupta

दीदी की चिठ्ठी नियमित स्तम्भ बच्चों की छोटी कहानियाँ हो या बडी कहानियां बाल लेखन ने हमेशा मुझे प्रेरित किया है.नेशनल बुक ट्र्स्ट , हरियाणा साहित्य अकादमी read more at monicagupta.info

एक कहानी की मौत – Monica Gupta

संदीप घर से हंसता मुस्कुराता निकला। उसकी पत्नी बेबी ने बाहर आकर उसे बाय-बाय किया और अपनी पड़ोसन नीलम से बतियाने लगी। संदीप दफ्तर के सौ कामों के बीच छोटी बहन रीना के बारे में सोचता मोटरसाइकिल दौड़ाए चला जा रहा था। कल रीना को लड़के वाले भी देखने आ रहे हैं। उसकी छोटी-सी प्यारी बहन दुल्हन बनकर घर से विदा हो जाएगी और एक नया संसार उसका घर होगा जहां वो किसी की चाची, ताई, आंटी, जेठानी, बड़ी बहू या फिर रीनू बनकर रम जाएगी। read more at monicagupta.info

 

एक कहानी ऐसी भी – हिन्दी लघु कहानी – आपको कैसी लगी… जरुर बताईगा .. !!

 

October 25, 2016 By Monica Gupta Leave a Comment

महिला और समाज – भारतीय समाज में नारी का स्थान

महिला और समाज - भारतीय समाज में नारी का स्थान

महिला और समाज – भारतीय समाज में नारी का स्थान – हाल ही में हम महिलाओं से जुडे दो बेहद खास त्योहार गए. करवा चौथ और अहोई अष्टमी का. पर नेट पर तो मानों मजाक बनाने वालो की बाढ सी आ गई. बहुत ही ज्यादा मजाक बनाया गया. कुछ अच्छा भी लगा तो कुछ बुरा भी…

महिला और समाज – भारतीय समाज में नारी का स्थान

खैर ये लोगो की अपनी सोच या मानसिकता है और ऐसा करके उन्हें किस तरह की खुशी मिलती होगी इस बारे मे चर्चा का अलग विषय हो सकता है पर आज मैं कुछ और सोच रही हूं

असल में, तीन चार दिन पहले खबर पढी थी कि इराकी और पश्चिमी सेना के प्रहार से बचने के लिए ISIS के आतंकी  महिलाओ की वेशभूषा पहन कर भागने की फ़िराक में है

महिला और समाज - भारतीय समाज में नारी का स्थान

वही एक अन्य खबर में मोसुल की सीमा पर कुर्द सेना ने ऐसे ही कई आतंकियों को पकड़ा है जो महिलाओ की वेशभूषा धारण किये हुए थे.

हमारे देश में ऐसे उदाहरण हुए है जब महिला रुप धारण करके भागना पडा जैसाकि बाबा रामदेव…

वही कॉमडी के शो में भी पुरुष ज्यादातर महिला बन कर आने लगें हैं  हैं जिसमे कपिल भी महिला के रुप में नजर आए थे… क्या वाकई महिलाओं का इतना वर्चस्व है कि पुरुषों का उनका रुप लेना पडता है … या वाकई हम महिलाओं की दशा बस मजाक उडाने तक ही सीमित है

महिला और समाज - भारतीय समाज में नारी का स्थान

 

खुले में शौच, महिलाएं और स्वच्छता अभियान – Monica Gupta

महिलाओं का खुले में शौच जाना बेहद शर्मनाक आज हम बात करते हैं खुले में शौच, महिलाएं और स्वच्छता अभियान की . स्वच्छ सर्वेक्षण 2017 हो या जन आंदोलन के रुप में च read more at monicagupta.info

महिलाएं – खेल, खिलाडी और आत्मविश्वास – Monica Gupta

महिलाएं – खेल, खिलाडी और आत्मविश्वास Rio Olympic 2016, रियो ओलम्पिक 2016  में भारत की महिलाओं का ही बोल बाला रहा … जहां एक बार भारतीयों ने पदक की आस छोड दी थी वहीं साक्षी मलिक और पीवी सिंधु एक उम्मीद बन कर आईं और दीपा कर्माकर ने जिस तरह से महिला जिमनास्ट में चौथा … महिलाएं – खेल, खिलाडी और आत्मविश्वास – Monica Gupta

 

खुशी इस बात की भी है कि महिलाए हर क्षेत्र में आगे आ रही है …

 

 

महिलाएं छेडछाड और सोशल मीडिया

October 25, 2016 By Monica Gupta Leave a Comment

पान मसाला खाने के नुकसान हैं या फायदे

पान मसाला खाने के नुकसान

पान मसाला खाने के नुकसान हैं या फायदे ये हमे ही सोचना है सिग्रेट पीते हुए हम वाकई ग्रेट लगते हैं या ये  सी ग़्रेड चीज है  … ये हमारी सोच पर है और यकीनन अगर हम अपने बच्चो से अपने परिवार से प्यार करते हैं तो हमें समझादारी से काम लेना होगा   है ना …

पान मसाला खाने के नुकसान हैं या फायदे

पान मसाला खाने के नुकसान हैं या फायदे  …आईए सुने इसी से जुडी एक बात

बहुत समय बाद एक जानकार से मिलना हुआ. उन्हें पान मसाला और सिग्रेट का बेहद बेहद और बेहद शौक है. मैने उन्हें बधाई दी तो सिग्रेट सुलगाते हुए बोले अरे भई किस बात की बधाई … मैने कहा कि आप दिन रात लगातार सिग्रेट पी रहे है और गुटखा चबा रहे हैं इसलिए बधाई… उन्हें फिर भी समझ नही आया तो मैने बोला कि बधाई  इसलिए आप बहुत शक्तिशाली हैं आप दर्द सहने की शक्ति रखते हैं …

वो हैरानी से बोले कौन सा दर्द … मैने कहा अभी नही पर आएगा … जब आपको इतना पीने या गुटखे से तकलीफ होगी.. पर आप मानसिक रुप से तैयार है कि आपको दर्द से कोई फर्क नही आपने अपना लक्ष्य बना रखा है कि चैन स्मोक करनी ही है दर्द हो या कैंसर… कोई फिक्र नही… आप तो दूसरों के लिए भी प्रेरणा हैं…

मेरी बात उन्हें शायद बहुत बुरी लगी और उन्होनें पूछा आपने चाय ली क्या … चाय पूछ्ना मतलब मुझे जाने के लिए कहना …. अचानक मेरे मोबाईल की रिंग हुई और मेरी नींद खुल गई… जी हां नींद खुल गई…

असल में मेरी एक सहेली के पति बहुत ज्यादा गुटखा और स्मोक करते हैं उसने मुझसे उपाय पूछा तो मैने तिकडम लगाई और सोचा कि क्यों न अपनी ऑडियो सुना दू शायद बदलाव आ जाए और छोड दे इसे खाना पर हैरानी इस बात की हुई कि ऑडियो सुनने के बाद उन्होने मेरी ही तीन चार गलतियां निकाल दी कि थोडा स्क्रिप्ट और बडी करो और थोडा सा आराम से बोलो बेशल एक मिनट का और बडा हो जाए तो भी कोई दिक्कत नही …

पान मसाला और हमारा प्यार – Monica Gupta

आम आदमी पार्टी की सरकार ने सोमवार को पत्र लिखकर चार बॉलीवुड अभिनेताओं से पान मसालों के विज्ञापन न करने का आग्रह किया है। दिल्ली सरकार का कहना है कि इन प्रोडक्ट्स में सुपारी होती है, जो कि कैंसर की प्रमुख वजहों में से एक है। दिल्ली सरकार ने इस बार शाहरुख खान, अरबाज खान, अजय देवगन और गोविंदा की पत्नियों को पत्र लिखा है। गौरतलब है कि स्वास्थ्य विभाग ने पहले इन अभिनेताओं को ही पत्र लिखा था, लेकिन उनकी तरफ से अभी तक विभाग के पास कोई जवाब नहीं आया। read more at jansatta.com read more at monicagupta.info

 

पान मसाला

पान मसाला अगर आप जिंदगी से परेशान हैं तो पान मसाला खाईए. अगर आपका कोई दोस्त रुठ गया है तो पान मसाले से मनाईए. पान मसाला जिंदगी में खुशियां और रंग भर देता monicagupta.info

बस तभी से इसी उधेडबुन में लगी हुई हूं कि कैसे उन्हें समझाया जाए कि इसे छोडने मे ही समझदारी है … शायद इसीलिए ये बात सपने में भी चल रही है वैसे अगर आपके पास कोई आईडिया हो तो बताईएगा … क्योकि ये वाकई बहुत नुकसान दायक है

पान मसाला खाने के नुकसान हैं या फायदे ये आपको डिसाईड करना है सिग्रेट पीते हुए आप वाकई ग्रेट लगते हैं या सी ग़्रेड … ये आपकी सोच पर है और आप समझदार हैं … है ना …

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