अच्छे दिन
अच्छे दिन
अच्छे दिन लाने के लिए बहुत मेहनत करनी पडती है .. ऐसा नही की आपने गाना गाया और अच्छे दिन आ गए. समय लगता है बहुत कुछ त्यागना पडता है बहुत कुछ निगलना या गटकना पडता है बहुतों से ना चाह्ते हुए भी मिलना पडता है और बहुत चाह्ते हुए भी किसी से मुहं फेरना पडता है..!!! कई बार उपहास का पात्र बनना पडता है तो कई बार शर्मिंदा होना पडता है. अरे आप क्या सोचने लगे !!! हे भगवान !! इसमे कही आप राजनीति तो नही ले आए !! कमाल हैं आप भी !! अरे भई !! वो क्या है ना वजन बढ रहा है उसे धटाने के लिए मेहनत ज्यादा करनी पड रही है तभी तो आएगें अच्छे दिन !!! आलू ,पूरी .टिक्की जैसी मुंह मे पानी लाने वाली चीजे त्यागनी पडती हैं उबला खाना या सब्जी निगलनी या गटकनी पडती है ना चाहते हुए भी खाना पडता है और बहुत चाह्ते हुए भी उस खाने से देखने से इंकार करना पडता है. कई लोग उपहास करते हैं कि वजन कम हो ही नही सकता तो कई बार लोगो के सामने जब वजन टस से मस नही होता तो शर्मिंदा भी होना पडता है!!
यहां हालत खस्ता हो रही है और आप है कि राजनीति ले कर आ रहे हैं अरे भई कम खाएगें … हल्का खाएगे, कसरत करेगें तो आएगें ना जल्दी से अच्छे दिन … बस वो ही तो कह रही हूं !!! अच्छे दिन आने वाले है:)
कितने दूर कितने पास
कितने दूर कितने पास
किससे दूर किसके पास …
मैं नेट पर काम कर रही थी कि अचानक गेट पर धंटी बजी. ओफ !! कौन होगा !! असल में, वो क्या है ना कि कई बार कुछ शरारती बच्चे ऐसे ही घंटी बजा कर भाग जाते हैं तो सोचा शायद वही हों पर एक ही मिनट में दुबारा घंटी बजने पर मैं समझ गई कि बाहर जरुर कोई है.बाहर गई तो एक महिला खडी थी. मेरे पूछ्ने पर उस महिला ने इशारा करके बताया कि वो हमारे घर के पीछे ही रहते हैं उनका नया घर बन रहा है इसलिए वो POP देखने आई है क्योकि आपका घर नया बना है ना … मैने उसे कभी नही देखा था इसलिए मैं उसे भीतर लाने में इच्छुक नही थी इसलिए गेट पर ही खडे खडे बोला कि हमने बिल्कुल साधारण सा पीओपी करवाया है पर जब उसने हमारे अडोस पडोस में रहने वालो के बारे में बताया कि वो उन्हें जानती है तो ना चाह्ते हुए भी मैं एक घर के साथ भीतर ले आई. उसने दो चार मिनट लगाए एक दो कमरे देखे और कुछ ही पल में हम बाहर आ गए.
मुझे महसूस तो हुआ पर मैने उससे चाय पानी का भी नही पूछा. असल में, आज के माहौल को देखते हुए एक डर सा रहता है कि पता नही कौन है कितनी सही है वगैरहा वगैरहा… !! जाते जाते मैनें उसे जता भी दिया कि क्षमा करें मैने आपको पहले कभी देखा भी नही और आज का समय ठीक नही है इसलिए.. इस पर वो बोली कि वो समझती है और थैक्स कह कर चली गई.
कुछ देर नेट पर काम करने का मन ही नही किया. सोच रही थी कि हम कितना बदल गए हैं कभी हम भारतीयों की पहचान यही होती थी कि घर आए मेहमान का स्वागत करते थे बेशक गांव में ये परम्परा आज भी है पर छोटे शहरों में किसी अनजाने भय से गुमनाम सी होती जा रही है और मैंट्रो में तो यह खत्म ही हो गई है. तभी देखा कि फेसबुक पर दो तीन मैसेज आए हुए हैं जिन्हें मैं जानती तक नही. मैं सोच रही थी कि फेसबुक या अन्य सोशल नेट वर्किंग साईटस पर हम कितना जानते हैं लोगो को पर उन अनजाने लोगो को जवाब देने में जरा भी देर नही लगाते … चाहे मित्रता स्वीकार करनी हो या मैसज करना हो पर जो हमारे घर के नजदीक रहते हैं उन्हें हम जानते तक नही….
कितने दूर कितने पास
मीट पर प्रतिबंध
मीट पर प्रतिबंध
मीट पर बैन होना चाहिए या नही इस विषय पर टीवी पर बहस जोरों पर हैं और जो लोग इसे नही खाते उनका दिमाग देख सुन कर ही घूमे जा रहा है कि सरकार के बैन का तो पता नही पर टीवी पर ऐसी खबरो पर प्रतिबंध यानि बैन कब लगेगा !!!
Will ensure there is no meat ban: Sena
मुंबई। जैनियों के पर्यूषण पर्व के दौरान मुंबई में मांस की बिक्री पर प्रतिबंध को लेकर महाराष्ट्र में सत्तारूढ़ भाजपा और शिवसेना के गठबंधन में दरार पैदा हो गई है। शिवसेना ने बुधवार को कहा कि वह इस तरह का कोई प्रतिबंध लागू नहीं होने देगी। मंगलवार को बीएमसी आयुक्त अजय मेहता ने पर्यूषण पर्व को देखते हुए मुंबई में चार दिन के लिए मीट की बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया। इसके अनुसार 10, 13, 17 और 18 सितंबर को चार दिनों के लिए मुर्गा और बकरे के मीट पर प्रतिबंध रहेगा। निजी दुकानदारों को भी कच्चा मीट बेचने की इजाजत नहीं दी जाएगी। हालांकि मछली और अंडे को प्रतिबंध से बाहर रखा गया है।
इस मुद्दे पर भाजपा से अलग रुख अपनाते हुए शिवसेना अध्यक्ष उद्धव ठाकरे ने कहा कि हम यह सुनिश्चित करने का प्रयास करेंगे कि मीट की बिक्री पर किसी तरह का प्रतिबंध न हो। दिलचस्प बात यह है कि राज्य सरकार की तरह शिवसेना बीएमसी में भी भाजपा के साथ सत्ता में है। इस बीच, मीट की बिक्री पर प्रतिबंध की आलोचना करने के एक दिन बाद राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी अपने रुख से पलट गई है। बुधवार को राकांपा शासित नवी मुंबई नगर निगम ने भी नौ से 17 सितंबर तक मीट की बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया।
मीट पर प्रतिबंध या मीट पर बैन के बारे मे आपकी क्या सोच है जरुर बताईएगा !!!
अभिव्यक्ति की स्वंतत्रता
अभिव्यक्ति की स्वंतत्रता
आश्चर्यजनक किंतु सत्य …सुनने मे आया है कि महाराष्ट्र सरकार ने सरकुलर जारी किया है जिसमे अगर जनप्रतिनिधियों पर आपतिजनक टिप्पणी की, बोला या चित्र बनाया तो आईपीसी धारा 124ऎ के अंतर्गत देशद्रोह माना जाएगा … पर ये नही बताया कि अगर जनप्रतिनिधि ही आपतिजनक बयान दे जिससे आम आदमी की भावनाए भडके और चैनल वाले मुद्दा बनाए तो उन जनप्रतिनिधि खिलाफ भी same टू same कानून रहेगा या … ???
महाराष्ट्र की फडणवीस सरकार के सरकुलर से तनाव पैदा हो गया है। महाराष्ट्र के गृह विभाग ने कहा है कि, किसी भी जनप्रतिनिधी खिलाफ़ दिए बयान या लेख से अगर हिंसा भड़कती है तो ऐसा करनेवाले के खिलाफ IPC की धारा 124A के तहत कार्रवाई होगी।
यक्ष प्रश्न यही है कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता या आजादी पर इस तरह से रोक लगाना सही है या कानून सभी के लिए समान रहेगा …
अभिव्यक्ति की स्वंतत्रता
http://khabar.ndtv.com/news/india/read-the-the-circular-of-maharashtra-government-1214348
वैसे इस बारे में आपकी राय क्या है जरुर बताईएगा… क्योकि हमारे एक कार्टूनिस्ट मित्र ने तो कार्टून बनाने ही बंद कर दिए है और तनाव में चले गए हैं
दही हांडी उत्सव
दही हांडी उत्सव
अच्छे दिन उत्सव
दही हांडी उत्सव dahi handi utsav बहुत धूमधाम से मनाया गया हालाकि पिछ्ले साल सरकार ने भी कुछ नियम बनाए थे जिसके चलते इस साल उतनी रौनक देखने को नही मिली जितनी हर साल मिला करती थी और दूसरी बात महंगाई और अन्य बातो को लेकर भी जनता में सरकार के प्रति कुछ रोष है जो कि दही हांडी फोडने के रुप मे देखने को मिल रहा है…
हमारी गूगल मूगल लेडी गोविंदा को डर लगता है इसलिए कुर्सी पर खडे होकर हाथ मे डंडा लेकर मटकी फोडने को तैयार है
दही हांडी उत्सव …. आपको कैसा लगा … जरुर बताईएगा !!
दही हांडी खेल एडवेंचर स्पोर्ट
दही हांडी खेल एडवेंचर स्पोर्ट किसी ऎडवेंचर स्पोर्ट से कम नही है दही हांडी फोडने का खेल और हमारे स्किल्ड भारतीय इसे बहुत शान से करते हैं पर अफसोस इसी एडवेंच Read more…
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