Monica Gupta

Writer, Author, Cartoonist, Social Worker, Blogger and a renowned YouTuber

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August 9, 2015 By Monica Gupta

हिल स्टेशन यात्रा -एक अनुभव

hills photo

Photo by diana_robinson

 

हिल स्टेशन यात्रा -एक अनुभव

एक हिला देने वाला अनुभव … जी हां मैने भी की हिल स्टेशन यात्रा… क्या ??? आपको विश्वास नही हो रहा ??? क्या मैं पूछ सकती हूं कि विश्वास न करने की क्या वजह है ??? फोटो ??? ओह … हां !!! ये तो सच है कि  कोई फोटो नही डाली पर इसका मतलब यह भी नही की हम गए ही नही… !!! असल में, कैमरा तो था पर तस्वीरे ली ही नही.. कैमरा बैग में ही पडा रहा.

बात ये हुई कि वैसे तो हम हिल स्टेशन पर जाते ही रहते हैं… अरे हां सच में … जाते रहते हैं … अब आपने बात सुननी है या मैं न बताऊं … ठीक है … तो मैं कह रहे थी कि वैसे तो हम हिल स्टेशन पर जाते ही रहते हैं  पर अब की बार जो अनुभव हुआ वो कभी नही भूलेगा. हुआ ये कि हर बार की तरह इस बार हम अपनी कार में नही गए उसके बजाय बडी गाडी यानि कैब  कर ली ताकि सपरिवार जाए और खूब मस्ती करें.कार बुक करवा दी और वो समय पर पहुच भी गई. हमने सारा सामान कार मे भरा और चल पडे मस्ती भरे सफर में पर अब ये बनने वाला था अंग्रेंजी वाला सफर … Suffer…

कार का ड्राईवर बहुत अच्छा था . सुबह सवेरे उसने चलने से पहले कार मे लगी भगवान की फोटो को प्रणाम किया और धूप बत्ती की. फिर भक्ति वाले गाने भी चला दिए … सुबह सवेरे एक दम खाली सडक थी और वो 30 की स्पीड से कार चला रहा था. रिक्शा भी आराम से हमे ओवरटेक कर सकती थी. खैर, जब उससे थोडी तेज चलाने को कहा गया तो वो बोला कि वो अभी रास्तों के लिए नया है इसलिए हमने भी कुछ नही कहा … कार आराम आराम से चलती रही … पर जो लोग ड्राईव करते हैं यकीनन वो इतनी धीमी गति शायद सहन नही कर सकते.. खैर जैसे तैसे आगे बढते रहे और जब बातो बातों में उसने ये बताया कि उसका ये पहला अनुभव है पहली बार कार लेकर निकला है तो हमने सोचा  बस … अब तो गए काम से !!!  क्योकि उसकी सबसे बडी वजह ये थी कि कई बार लगता था उसमें आत्मविश्वास ही नही है तो कई बार लगता उसमे भरपूर आत्मविश्वास है इतना आत्मविश्वास है कि हमारा ही डममगा रहा था क्योकिं खाली सडक पर बिल्कुल  धीमी गति  से चलाता और जब किसी वाहन को ओवरटेक करता तो इतनी तेज की लगता अब ठुकी कार…. तब ठुकी !!!

सांस रोक कर और  हम आखे फाड फाड कर उसकी ड्राईविंग  देखते रहे और बोलते रहे अब धीरे करो अब तेज करो …  एक बार तो उसे झपकी भी आने को हुई तो हमने कहा कि कार रोक कर आराम कर लो तो भी उसने मना कर दिया. जब हमने उससे ये कहा कि कार हम चला लेंगें तो भी उसने इंकार कर दिया कि अगर कुछ हो गया तो … कौन भरेगा…!!! मेरे मन में आया कि कह दूं कि और हमे कुछ हो गया तो उसकी भरपाई कौन करेगा !!! पर चुप रही… !!!

आगे जाकर सामने से धुमावदार रास्ता शुरु हो रहा था.. वो हैरान रह गया कि ये कैसी सडक है … हमने कहा कि कैसी क्या ??? पहाडी रास्ता है … इस पर वो बोला अरे ऐसा कैसा होता है … यानि की वो कभी पहाड पर गया ही नही था उसने तो पहाड ही पहली बार देखा था…  हे भगवान !!! ..हमारी सिट्टी पिट्टी गुम की होगा क्या … एक बार दुबारा ट्राई किया कि हम को कार दे दो हम चलाते है इस पर फिर उसने मना कर दिया कि फिर वो सीखेगा कैसे….. मानो सारा सीखना यही से ट्राई करना है … सांस रोकर कार मे बैठे रहे… वही एक साईड का शीशा बंद ही नही हो रहा था … मौसम की ठंड और भीतर की गरमी जबरदस्त तूफान पैदा कर रही थी… जिस तरह से उसकी ड्राईविंग थी….  मैं…  मैं तो यहां तक सोचने लगी थी कि कल अखबार की हैड लाईन क्या होगी … कार  50 फुट  गहरे खड्डे में गिरी. परिवार के सभी लोग …. !!! रास्ते के साईन बोर्ड मुंह चिढा रहे थे कि आपकी यात्रा सुखद हो और घर पर आपका कोई इंतजार कर रहा है…

जैसे तैसे करके हिल स्टेशन पहुंचे और कार से उतर कर जान में जान आई … और तुरंत  होटल के कमरे मे ही धुस गए. हिम्मत ही नही थी कि सैर करने जाए .. वही वापसी की भी चिंता थी क्योकि पहाडों से उतरते वक्त और  ज्यादा सावधान रहने की जरुरत होती है … उसे बहुत मनाया कि कार हम लोग चला लेंगें पर उसने मना कर दिया. एक बार मन किया हम दूसरी टैक्सी कर लेते हैं पर बुकिंग इतनी ज्यादा थी कि अगले हफ्ते ही  टैक्सी मिल पाती.

खैर,  दिन बीता और  हम कही धूमने नही निकले… मन ही नही कर रहा था. और हमारा वापिस जाने का समय आ गया.  बस भगवान से यही प्रार्थना थी कि सकुशल पंहुचा दे…  धडकते दिल से हम कार मे बैठे और एक दूसरे के हाथ कस कर पकड रखे थे. कोई देवी या देवता का स्मरण करना नही छोडा … अम्मा ने तो व्रत भी बोल दिए और जीजी ने प्रसाद … !!!रास्ते में बारिश भी थी और धुंध भी … बस उतरते  ही जा रहे थे उतरते ही जा रहे थे…  सांस में सांस तब आई जब हम घर के आगे खडे थे. फटाफट कार से सामान निकाला . जान बची सो लाखो पाए …

फिर उसका हिसाब किताब करने बाहर आए तो फिर धूप बत्ती कर रहा था बोला भगवान बहुत ग्रेट है उसने बहुत रक्षा की … मैने वाकई मे , कार मे लगी भगवान जी की फोटो को प्रणाम किया कि रक्षा इन्होने ही की वरना अपना प्रोग्राम तो पक्का ही था उपर जाने का …

पर जाते जाते मैं उसे इतना जरुर बोली कि थोडी प्रैक्टिस और करो … खासकर किसी कार को ओवर टेक करते समय स्पीड का ध्यान रखना जरुरी होता है वो बोला कि जिसने उसे सिखाई वो भी यही बोलता था इसलिए उसने उससे सीखना ही छोड दिया था … मेरे पास अब कहने को कुछ नही बचा और तुरंत घर दौड गई…

अब तो कसम ही खा ली कभी टैक्सी नही करेगें अपनी कार से ही जाएगें कम से कम एंजाय तो कर सकेंगें …इस हिल स्टेशन की यात्रा ने तो पूरा ही हिला कर रख दिया …  वैसे आपको एक बात बताऊ कि तस्वीर एक दो तो ली थी पर शक्ल इतनी धबराई हुई और चेहरे से मुस्कान नदारद थी इसलिए डाली ही नही कि कही आप लोग डर ही न जाए !!!

ऐसा अनुभव आप के साथ कभी न हो … शुभकामनाएं !!!!

 

August 8, 2015 By Monica Gupta

लाल खून काला कारोबार

blood-donate
blood donate photo

Photo by jonklinger

लाल खून काला कारोबार

रक्तदान महादान है और हम सभी को रक्तदान करना चाहिए.. रक्तदान करना और रक्तदान के लिए प्रेरित करना अच्छा लगता है . ये एक सामाजिक कार्य है जिसमे युवा वर्ग की भागीदारी आवश्यक है…

क्योकि मैं खुद भी रक्तदान से जुडी हुई हूं इसलिए रक्तदान से जुडी हर खबर हमेशा मुझे आकर्षित करती है पर आज  जब इसी संदर्भ में खबर पढी और यकीन मानिए  खबर जरा भी अच्छी नही लगी … आप भी सोच रहे होंगें कि ऐसा क्या हुआ … खबर अच्छी ना लगने का सबसे बडा कारण था कि रक्तदाता  नाबालिग थे यानि 18 साल से कम उम्र के थे… जी सही पढा … नाबालिग …  और रक्तदान करते  थे या करवाया जाता था जिसके उन्हे पैसे मिलते … यानि रक्त बेचते थे … 500 रुपये उन्हें मिलते और 500 दलाल को … खबर ने सन्न कर करके रख दिया ना  आपको भी … मैं भी ऐसे ही सन्न हो गई जब टीवी पर खबर देखी और फिर नेट पर  पढी .

खबर लखनऊ की है … चौक का कोहली ब्लड बैंक, नाबालिग बच्चों को पैसे का लालच देकर उनसे खून लेने और रिकॉर्ड से छेड़छाड़ के आरोप में शुक्रवार को सील कर दिया गया.  बच्चों की गरीबी का फायदा दलालों ने उठाया.  43 नाबालिग बच्चों को प्रोफेशनल डोनर बना दिया गया. इतना ही नही इनमें महिलाए यानि लडकियां  भी शामिल है …  पकडे जाने पर  इन लड़कों ने पुलिस को बताया कि चार दलाल उनसे खून देने का काम कराते थे.  इतना ही नही  ये दलाल  गरीब परिवारों के 43 युवकों का हर माह कई बार खून निकलवाते थे.

सुनकर दिल धक से रह गया मानो खून ही जम गया हो … मैं बहुत लोगों को जानती हूं जो रक्तदान के क्षेत्र मे अभूतपूर्व काम कर रहे हैं और जनता को रक्तदान के प्रति प्रेरित भी कर रहे हैं .. ऐसी खबरों से अभियान को कितना बडा धक्का लगता है क्योकि  लोगों को प्रेरित करना वैसे भी बहुत मुश्किल होता है और तो और रक्तदान के प्रति लोगों में भ्रांतिया भी बहुत तरह की होती है ऐसे में ऐसी खबर का आना बेहद सन्न करने वाला है …

 

43 boys in the business of blood removed – Navbharat Times

लखनऊ पुराने शहर में 43 लड़कों को चंद रुपये का लालच देकर खून के कारोबार में उतार दिया गया। बड़ी बात यह है कि इनमें ज्यादातर नाबालिग हैं। कोहली ब्लड बैंक में खून देने वाले तीन नाबालिगों ने पुलिस पूछताछ में यह बात कबूली है। इन लड़कों ने पुलिस को बताया कि चार दलाल उनसे खून देने का काम कराते थे। ये दलाल गरीब परिवारों के 43 युवकों का हर माह कई बार खून निकलवाते थे। चौक इंस्पेक्टर आईपी सिंह ने बताया कि कोहली ब्लड बैंक में खून देने वाले किशोरों ने कबूला है कि उनको गजनी, राहुल, अमर और एक अन्य शख्स पैसों का लालच देकर ब्लड बैंक ले जाता था। इन चारों आरोपितों ने 43 लड़कों को प्रोफेशनल डोनर बना दिया। पुलिस को तीनों किशोरों ने सभी 43 लड़को के नाम भी बताए हैं। इनमें ज्यादातर किशोर हैं, जिनको खून के धंधे में शामिल किया गया है। पुलिस ने चारों आरोपितों के खिलाफ मामला दर्ज कर उनकी तलाश शुरू कर दी है। महिलाएं भी प्रफेशनल डोनर कोहली में खून बेचने वाले किशोरों ने कई महिलाओं के नाम भी बताए हैं, जो प्रफेशनल डोनर हैं। इनको 700 रुपये प्रति यूनिट पर दिया जाता था। ये महिलाएं वजीरगंज की बताई जा रही हैं। पुलिस इन महिलाओं से भी पूछताछ कर पूरे रैकेट तक पहुंचने की तैयारी में है। आप यहां दें सूचना Read more…

Taking blood from children, Kohli Blood Bank seal – Navbharat Times

लखनऊ चौक का कोहली ब्लड बैंक, नाबालिग बच्चों को पैसे का लालच देकर उनसे खून लेने और रिकॉर्ड से छेड़छाड़ के आरोप में शुक्रवार को सील कर दिया गया। कुछ स्थानीय युवकों से मिली जानकारी के आधार पर सीएमओ की टीम ने छापेमारी के बाद यह कार्रवाई की। ब्लड बैंक की कारस्तानी का खुलासा होते ही स्थानीय लोग भड़क गए और ब्लड बैंक में तोड़-फोड़ शुरू कर दी। तनाव बढ़ने पर पुलिस के अलावा पैरा मिलिट्री फोर्स को भी मौके पर बुलाना पड़ा। दलाल दिलवाते थे पैसा चौक में मोबाइल शॉप में काम करने वाले अनंत अग्रवाल और शिवा साहू ने बताया कि उनकी दुकान पर उनके मोहल्ले के कुछ नाबालिग बच्चे शुक्रवार को ब्लड देने के बदले रुपये लेने की बात कर रहे थे। उन्होंने बच्चों से पूछताछ की तो पता चला कि कोहली ब्लड बैंक में खून देने के एवज में 500 रुपये दिए जाते हैं। शिवा के अनुसार, बच्चों ने दर्जी पार्क में रहने वाले पांच लोगों के नाम बताए जो उन्हें ब्लड बैंक ले जाते हैं।

 नियमत: 18 साल से कम उम्र का शख्स रक्तदान नहीं कर सकता। तीन अरेस्ट पुलिस ने मौके से कोहली ब्लड बैंक के कार्यप्रभारी वीके भटनागर, लैब टेक्नीशियन विजय प्रकाश और कर्मचारी संतराम यादव को अरेस्ट किया है। इन पर धोखाधड़ी, फर्जी दस्तावेज रखने, कागजों से छेड़छाड़ करने और ड्रग एंड कास्मेटिक एक्ट की धाराओं में केस दर्ज किया गया है।  Read more…

ऐसे दलाल और ऐसे ब्लड बैंक समाज मे काल धब्बा है जिन्हे कडी से कडी सजा दी जानी चाहिए…

लाल खून काला कारोबार

August 7, 2015 By Monica Gupta

मैंगो फैस्टिवल

mango

मैंगो फैस्टिवल यानि आम का त्योहार.

कुछ दिन पहले अखबार मे  पढा कि मैंगो फेस्टिवल चल रहा है. पढते-पढते अचानक हंसी आ गई. बुरा ना मानिएगा पर सच  मे, आजकल , आम आदमी का ही त्योहार चल रहा है और उस त्योहार का नाम है ‘महंगाई’. कोई हाल है क्या. अमीर और अमीर होता जा रहा है और गरीब और ज्यादा गरीब पर असली बैंड बज रहा है आम आदमी का. जिसकी हालत किसी भी तरह आम की विभिन्न किस्मो से अछूती नही है.

पैरी, मलिका और सुंदरी बनने के दिन तो अब हवा हुए … महंगाई ने  तो जनाब  उसका अचार,चटनी और मुरब्बा बना कर रखा हुआ है. किसी मिक्सी मे गोल गोल घूमते शेक की तरह उसकी हालत हो गई है जिसे हर नेता या पैसे वाला बहुत तबियत से स्वाद ले लेकर  निचोड रहा है. बेचारे का रंग  सफेदा की तरह् सफेद पड गया है मानो किसी ने सारा का सारा खून निचोड लिया हो. और अब तो ये हालत हो गई है कि वो सीधा चलना ही भूल गया है और लंगडा आम की तरह लगड़ा कर चल रहा है. अम्बी जैसी खटास जीवन मे भर गई है और शरीर पीला इस कदर हो गया है मानो जन्म से ही पीलिया का मरीज हो …

उफ ये आम आदमी !! ना जाने कितने सब्जबाग तोता परी सपने देखे होगे इसने भी. पर जिस तरह दशहरे मे रावण धू-धू करके चल जाता है ठीक वैसे ही उसके सपने भी दशहरी हो चले है और सब …!!! बेचारे ही हालत आम पापड जैसी हो चली है … जिसे काला नमक डाल कर बडा स्वाद लेकर खाया  जाता है

इससे भी बढ कर  विडम्बना क्या होगी कि अब आम ही नही खा पा रहा आम आदमी. तो हुआ ना ये  आम आदमी का  त्योहार.  इस त्योहार के  लिए ना तो आपको कही टिकट लेना पडेगा और ना कही जाना पडेगा. नजर घुमा कर तो देखिए जनाब,  मैंगो मैन फेस्टिवल ही फेस्टिवल दिखाई दे जाएगा जिसमे आम आदमी फुस होता ओह क्षमा करें हाफुस होता दिखाई देगा …

कैसा लगा ये लेख … जरुर बताईगा 🙂

August 6, 2015 By Monica Gupta

धारावाहिकों के किरदार

 

tv serial indian photo

Photo by jepoirrier

 

धारावाहिकों के किरदार

एक जानकार को डिनर पर आमत्रित करने के लिए फोन किया तो उन्होने कहा कि वो साढे नौ बजे के बाद  ही घर से चलेगें क्योकि वो अपना पसंदीदा सीरियल छोड नही  सकते. वैसे ये कहानी घर घर की है पर मेरा मानना ये है कि  टीवी  सीरियल सीरियसली कभी नही देखना चाहिए क्योकि ना सिर्फ मुख्य किरदार कभी भी बदल सकते हैं बल्कि  कहानी 10- 20 साल तक भी आगे जा सकती है और तो और  पूरी  कहानी ही बदल सकती है … कुछ समय पहले एक सीरियल आता था लौट आओ तृष्षा … कहानी हट कर थी इसलिए देखना शुरु किया .. इस मे वो बच्ची भी थी जो बजरंगी भाईजान मे थी.

खैर, देखते ही देखते अच्छी खासी सस्पैंस वाली कहानी  बिल्कुल ही बदल गई. फिर उसमे अलग अलग  कोर्ट केस ही रह गए  जिसका पहले की कहानी से कोई लिंक ही नही था और केस भी ऐसे जो हर बार नई कहानी लेकर आते  जैसाकि  अदालत सीरियल मे होते थे कभी वो सीरियल 40 मिनट का होता कभी 50 मिनट का  और फिर अचानक सीरियल ही बंद हो गया.

एक धारावाहिक महाराणा प्रताप आ रहा है दो साल आगे कर दिया कोई दिक्कत नही दिक्कत तब आई जब मुख्य पात्र अकबर को ही बदल दिया. जरा सोचना चाहिए जो अपना समय निकाल कर इन धारावाहिको को देखते हैं उनके दिल पर क्या गुजरती होगी .एक समय था जब 13 एपिसोड ही  होते थे दर्शक दिल से देखते थे फिर एपिसोड की संख्या बढने लगी अब तो कोई हाल ही नही. शायद ही कोई बिरला सीरियल  होगा जिसका कभी कोई किरदार ही न बदला हो… यकीनन सभी किरदार बहुत मेहनत करते हैं और अपना बेस्ट भी देते हैं पर अगर देखते ही देखते किरदार ही बदल जाए तो दर्शक बेचारा भी क्या करे किसके पास जाए किसके पास रोना रोए … आज के फास्ट लाईफ मे वो भी तो समय निकाल रहा है ना देखने के लिए ….

तो अगर आप किसी भी धारावाहिक को देख रहे है जरुर देखिए उसका पुन प्रसारण भी देखिए पर अचानक  बदलाव के लिए  भी तैयार रहिए  और सबसे अहम बात ये कि इन सीरियल्स को  सीरियसली देखना बंद कर दीजिए…

August 6, 2015 By Monica Gupta

हमारा पशु प्रेम

 

animals photo

Photo by magnus.johansson10

                                  हमारा पशु प्रेम (व्यंग्य)

तू इस तरह से मेरे जिंदगी मे शामिल है जहां भी जाऊं ये लगता है तेरी महफिल है …. रुकिए रुकिए ज्यादा सोचिए मत!!! असल मे, यह गाना मैं पशुओ के लिए गुनगुना रही हूं जो हमारे चारो तरफ है. जिधर देखू तेरी तस्वीर नजर आती है…क्या???

 आपको विश्वास नही हो रहा चलिए मै बताती हूं. सुबह सुबह घर से आफिस  जाने के लिए  निकलती हूं तो हमारी पडोसन गजगामिनी उर्फ मुन्नी अक्सर हमारे गेट के आगे फल और सब्जियो के छिलके फैकती मिल जाती है. असल मे, वो क्या है ना सडक पर धूमने वाले सांड और बैल भूखे रहे यह उसे सहन नही होता और उसके घर के आगे उनका नाच हो यह भी उसे अच्छा नही लगता इसलिए वो अच्छी पडोसन होने के नाते अपना प्यार दिखाती हुई ,छिलके फेंक कर मीठी मुस्कुराहट लिए भीतर चली जाती है और मै भी जल्दी से कार मे बैठ कर दफ्तर लपकती हूं कि कही लडाई करते सांड और बैल मेरा रास्ता ही ना रोक ले.

अब रास्ते की बात करे तो सडक पर एक मैन होल का ढक्कन किसी ने चुरा लिया तो गऊ माता उसमे गिर गई थी. ना सिर्फ लोग बल्कि चैनल वाले भी लाईव कवरेज के लिए माईक लेकर खडे सनसनी पेश कर रहे थे और यह अब तो हर रोज की ही बात हो गई हैं.

हमेशा की तरह भारी ट्रैफिक से बच बचाकर किसी तरह  दफ्तर पहुची तो  मेरा स्वागत बुलडोजर से  हुआ. क्या !! आप उसे भी  नही जानते !! बुलडोजर हमारे बास के कुत्ते का नाम है पर श्श्श्श्श्श … उसे  कुछ भी कहना …पर…. कुत्ता मत कहना. बास बुरा मान जाएगे.खैर, जैसे ही मै बास के रुम मे पहुंची तभी उनकी श्रीमति जी का फोन आ गया और शेर से वो अचानक भीगी बिल्ली बन कर म्याऊ म्याऊ करके बात करने लगे. उफ ये पशु प्रेम !!

अपनी सीट पर आई तो एक फाईल गायब थी तभी पता चला कि आज बंदरो की टोली आई थी खिडकी के रास्ते. हो सकता है कि कागज,वागज उठा कर ले गए हो. मैने सिर पकड लिया कि अब बलि का बकरा मै ही बनने वाली हूं और हुआ भी यही चाहे आप इसे बंदर धुडकी कहे या गीदद भभकी … मुझे घर भेज दिया गया कि आप जाकर आराम करें. कल बात करेगे.

देखे कल ऊटं किस करवट बैठता है सोचते सोचते  मै घर लौट आई. पर बात अभी भी खत्म नही हुई. घर पर चूहे बिल्ली की कोई कार्टून चल रही थी.सच, उफ!!! जानवरो ने तो मुझे कही का नही छोडा.आज अगर मेरी नौकरी जाएगी भी तो वो भी सिर्फ बंदर की वजह से.सच मे, ये जानवर जिंदगी मे इस कदर हावी हो गए है कि मुझे  काला अक्षर भैंस बराबर लगने लगा है और मैं खडी बास यानि भैस के आगे बीन बजा रही हूं और शायद  मगरमच्छ के आसूं बहा रही हू पर .. पर … पर …!!!

तभी भैंस का  मेरा मतलब  बास का फोन आ गया. उन्हे शाम को अपनी पत्नी के साथ शांपिग जाना था और मेरी डय़ूटी लगा दी कि बुलडोजर को पार्क मे घुमाने ले जाना है क्योकि मैनें उन्हे बताया हुआ था कि मुझे जानवरो से विशेष प्रेम है इसलिए मरती क्या न करती. मुस्कुरा  कर हामी भर् दी.सोचा शेर के मुहं मे हाथ डालने से क्या फायदा.अब तो जल्दी ही बुलडोजर के बहाने गधे को बाप बना कर अपनी प्रोमोशन  का राग जरुर छेड दूगी और मै बछिया का ताऊ बनी जी हजूरी मे जुट गई.

सडक पर बुलडोजर इतरा कर चल रहा था जैसे अपनी गली मे कुत्ता भी शेर हो. सैर सपाटा करवा कर घर पहुची तो पडोसन मुन्नी रात के खाने की तैयारी कर चुकी थी. गेट के आगे  छिलको मे मटर और गाजर भी थी लग रहा था कि शायद मेहमानो को बुलाया है नही तो सुबह शाम मैथी,गोभी और आलू के छिलको से ही दो चार होना पडता है मै खडी खडी सोच ही रही थी तभी  ना जाने कहां से बैलो के जोडे को छिलको की महक आई और वो अचानक  सरपट भागते भागते आए और छिलके खाने मे जुट गए और मै डर के मारे घर के भीतर भागी. तभी फोन की घंटी घनघना उठी बास का फोन था  कि कल सुबह जल्दी आ जाना क्योकि शाम को घर लौटते वक्त कोई बैल अचानक उनकी  गाडी के सामने आ गया टक्कर हो गई और उन्हे  पैर मे फ्रैक्चर हो गया है….

तो  मै सही हू  ना … जानवर हमारी  जिंदगी मे शामिल हुए कि नाहि  …  इसलिए जहां भी जाए ये लगता है …!!!!

जरुर बताईएगा कि आपको हमारा पशु प्रेम कैसा लगा ??

August 5, 2015 By Monica Gupta

एक पत्र दुल्हनियां के नाम

 

indian bride photo

Photo by naveen chander joshi

एक पत्र दुल्हनियां के नाम ….

बचपन मे घर घर खेलने वाली देखते ही देखते इतनी बडी हो गई कि आज अपना ही घर बसाने  पिया के घर जा रही है.जहां एक तरफ् मम्मी पापा  को खुशी होती है वही दूसरी ओर उनके सुखद भविष्य को लेकर अंजाना सा भय उनके मन मे व्याप्त  रहता है.

इसमे कोई शक नही कि समय बहुत तेजी से बदल रहा है और इसी आपा धापी मे हमारी मान्याताए भी बदल रही है. आजकल पापा तो व्यस्त रह्ते ही है साथ ही साथ  मम्मियां भी नौकरी करने लगी है और इसी वजह से ज्यादातर बच्चे होस्टल मे रहने लगे है और यहां तक की अपने  घर की शादी जैसे मौको पर  मम्मी को भी आफिस से  ज्यादा से ज्यादा हफ्ते की छुट्टी ही मिल पाती है.

वैसे देखा जाए तो इसमे कोई दिक्कत भी नही है आजकल सब रेडिमेट हो रहा  है.शादी के लिए हाल ,खाना पीना आदि  वगैरहा सारे इंतजाम. बस आर्डर बुक करवा दो और सभी चिंताओ से मुक्त हो जाओ. और मेहमान भी चंद घंटे के लिए आते हैं और चले जाते है किसी के पास समय ही नही होता.

मम्मी पापा को शादी के समय  बस एक ही चिंता हमेशा रहती है और वो है शादी के बाद वो अपना घर बार कैसे सम्भालेगी. इसमे कोई शक नही कि आजकल आप सभी लडकियां बहुत स्मार्ट हो गई हो. खूब शिक्षित हो गई हो और हजारो कमाने लगी हो.और आप अपना भला बुरा खूब अच्छी तरह से समझती हो या कई बार ऐसा भी होता है कि  आप किसी की बात सुनना भी पसंद नही करती.

प्यारी दुल्हनियां, शादी कोई गुड्डे गुडिया का खेल नही. यह एक बेहद पवित्र बंधन है और इस रिश्ते की गरिमा को रखने के लिए कुछ बाते ख्याल रखनी बहुत ही जरुरी है. पति पत्नी के एक साथ मिल जुल कर ही गृहस्थी रुपी गाडी आराम से चला  सकते हैं. आप आजकल देख ही रही है कि एकल परिवार ज्यादा होने लग गए है. बेटा भी अपने घर से दूर रह कर नौकरी करने लगा है.ऐसे मे पति पत्नी दोनो की सूझबूझ से घर खूबसूरत बन सकता है. अपना आचरण नारी सुलभ यानि लज्जा,सादगी, शालीनता और वाणी मे मिठास रखें. अपने घर परिवार को पूरा समय दें. बजाय जो आपके घर मे होता था उसका अनुसरण करने के  आपको अपने  नए घर और पति के परिवार के हिसाब से ही एडजस्ट करना होगा. बात बात पर व्यंग्य करना या किसी बात पर कटाक्ष करना बहुत चुभ जाता है इसलिए जो भी बोले और किसी के लिए भी बोले बहुत सोच समझ कर ही बोले.वैसे यही बात वर पक्ष पर भी लागू होती है और  यह सब आपसी तालमेल से ही आएगी.

सबसे जरुरी बात यह है कि अपने घर की बात घर की चार दीवारी मे ही रहे. छोटा मोटा झगडा हर घर मे होता है इसलिए बजाय इधर उधर बाते करने के या हर बात फोन करके घर बताने के  कोशिश करे कि  बात घर मे ही  मिल बैठ कर करे और उसका निष्कर्ष निकाले. सूझबूझ से आप अपने घर की बगिया महका सकती हैं. अपने नए प्यारे से घर को समझे और समझादारी से काम लें…

बाते तो बहुत सारी है अभी आप नई दुनिया मे कदम रखने जा रही है इसलिए अभी के लिए इतना ही ….

अपने नए जीवन की शुरुआत के पहले कदम ले लिए ढेर सारी शुभकामनाएं…

 

शेष फिर

आपकी शुभचिंतक

 

 

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