Monica Gupta

Writer, Author, Cartoonist, Social Worker, Blogger and a renowned YouTuber

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November 20, 2015 By Monica Gupta Leave a Comment

महागठबंधन

cartoon by monica JDu

महागठबंधन

एक समय था जब जनता चाहती थी कि खिचडी सरकार न बने एक पार्टी सरकार बने ताकि काम काज सुचारु रुप से चलता रहे पर जनता मोदी सरकार की नीतियों से इस कदर तंग आ गई कि उसे बिहार चुनाव में महागठबंधन को जीतवा कर अपना रोष अपनी नाराजगी जाहिर कर दी . आज देश भर की नजरे पटना शपथ ग्रहण समारोह पर होंगी. बिहार चुनाव में महागठबंधन की अप्रत्याशित और ऐतिहासिक जीत के बाद बिहार के मुख्यमंत्री के तौर पर तीसरी बार शपथ लेंगे . लोगो में ज्यादा उत्सुकता यह जानने की भी है कि लालू जी के कौन से बेटे को क्या पद मिलने वाला है.

महागठबंधन

 http://aajtak.intoday.in/video/many-leaders-invited-for-nitish-kumar-oath-ceremony-1-842786.html

बिहार के मुख्यमंत्री पद की लगातार 5 वीं बार कमान संभालने जा रहे हैं नीतीश कुमार ।बिहार विधानसभा चुनाव में जेडीयू-आरजेडी-कांग्रेस महागठबंधन की शानदार जीतके बाद शपथ   समारोह में बहुत से जाने माने  गैर बीजेपी दलों के लोग होंगे, जो देश की सियासत में नए समीकरणों का संकेत है. शपथ ग्रहण समारोह में लालू प्रसाद यादव, जेडीयू अध्यक्ष शरद यादव सहित कांग्रेस के उपाध्यक्ष राहुल गांधी, पूर्व प्रधानमंत्री एच डी देवेगौड़ा,. ममता बनर्जी, अरविंद केजरीवाल, तरुण गोगोई और अखिलेश यादव, राकांपा प्रमुख शरद पवार, नेशनल कांफ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला और लोकसभा में कांग्रेस के नेता मल्लिकाजरुन खड़गे और राज्यसभा में कांग्रेस के नेता गुलाम नबी आजाद समेत विभिन्न नेता शामिल होंगे।

चुनाव के दौरान नीतीश कुमार-लालू गठबंधन के खिलाफ आक्रामक प्रचार करने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी मुख्यमंत्री ने समारोह में आने का न्यौता दिया था, लेकिन उनकी जगह केंद्रीय मंत्री वेंकैया नायडू और राजीव प्रतीप रूडी उनके प्रतिनिधि के तौर पर समारोह में मौजूद होंगे।

नई सरकार कुछ अच्छा कार्य करके दिखाए और जनता में विश्वास जगा पाए तभी असल मायने मे जीत मानी जाएगी

शुभकामनाएं

महागठबंधन

November 4, 2015 By Monica Gupta

टवीटर के टवीट

tweet photo

टवीटर के टवीट

 खबरों का बदलता रवैया

टवीट का बढता रुतबा …

ना महंगाई से डर लगता है ना भूकम्प से…  डर लगता है तो बस टवीट से

टवीट से डर लगने के बहुत कारण है….

पहले ऐसा नही था. एक समय था जब टवीट शुरु हुआ था  तो अच्छा  लगा था  और सोचा था  कि कम शब्दों में हम अपनी बात कह सकेंगें पर ना जाने ये किस दिशा में बह गया. अब तो बहुत कुछ गलत सलत, गंदा, अश्लील, अंट शंट सब इसमे है..!! पर पर पर सभी दुखी नही हैं इससे … अब हमारे खबरिया चैनल को देखिए.. उन्हें तो बैठे बिठाए टीआरपी मसाला मिल गया है.

किसी का टवीट आता है.. फिर उसी टवीट पर आवाज उठती है. न्यूज चैनल वाले सर्तक हो जाते हैं और उस टवीट पर आई प्रतिक्रिया पर प्रतिक्रियाओं  का दौर चालू हो जाता है. काम की बात ये होती है कि टवीट बैसिर पैर का होता है और फिर शुरु हो जाती है उसी टवीट पर बहस … चैनल पर बैठ कर चीखतें हैं चिल्लाते हैं फिर शाम को खबर आती है कि जिस व्यक्ति ने टवीट किया था उसने अपना टवीट वापिस ले लिया.. अरे !! तो क्या हुआ !! कोई दिक्कत नही … उन्होनें अपना टवीट वापिस क्यो लिया, किसलिए लिया, इस पर भी बहस चालू होगी…

हे भगवान !! ऐसे मे आप हमारे सहिष्णु, सहनशील होने की उम्मीद कैसे रख सकते हैं.. बिल्कुल बढ रही है असहिष्णुता, असहनशीलता … !!!

वैसे टवीटर के टवीट के बारे में आपकी क्या राय है… जरुर टवीट करके बताईएगा !! ह हा हा !!!

November 3, 2015 By Monica Gupta

Maids Home Services

Maids Home photo

Photo by Internet Archive Book Images   

Maids Home Services

Maids यानि काम वाली बाई या आया का आजकल बहुत प्रचलन हो गया है . इन्हे घर में रखना हर घर की प्राथमिकता बन चुकी है.बच्चे अपने माता पिता पर नही बल्कि इन पर ज्यादा भरोसा करते हैं.

कुछ दिनों पहले एक बच्चे के हैप्पी बर्थ डे पर जाना हुआ. खूब सारे छोटे छोटे बच्चे आए हुए थे.बच्चे जितने स्मार्ट थे मम्मियां उतनी ही अलग सी लग रही थी. एक महिला चुपचाप एक किनारे पर बैठी चुपचाप बच्चों को देख रही थी. मैं उन्ही के पास बैठ गई. तभी उस महिला की चार साल की बेटी आई और नाराजगी में बोली कि आप चली जाओ ना. यहां किसी की मम्मी नही आई. वो महिला उदास सी हो गई. फिर बेटी बच्चो के साथ खेलने चली गई. मेरे पूछ्ने पर उस महिला ने बताया कि उसकी कोशिश रहती है कि ज्यादा से ज्यादा समय अपनी बेटी के साथ रहे पर इस आया (maid)  कल्चर की वजह से परेशान है क्योकि बेटी कहती है कि सभी के घर में  maid है तो आप को भी रखनी चाहिए. बातो बातो में मुझे ये पता चला की वो महिला गोल्ड मेडलिस्ट और यूनिवर्सिटी टापर भी रही है पर बेटी होने के बाद् नौकरी इस वजह से  छोड दी कि बेटी की खुद परवरिश करेगी पर …!!! उसे ये समझ नही आ रहा कि उसने कहां और क्या गलती की. उसका मूड इतना खराब था कि उस समय उससे बात करना सही नही था.

केक कटने वाला था वो उठ कर बच्चों के पास चली गई और मैं सोचने लगी कि गलती इस महिला की नही बल्कि उन महिलाओं की है जो कामकाजी न होने के बावजूद भी स्टेटेस सिम्बल दिखाने के चक्कर में अपने बच्चों को अपने से दूर करती जा रही हैं. बच्चों को जितना लगाव अपनी maid से होता जा रहा है ये अच्छा सकेंत नही है. अब तो मेरा भी मूड आफ हो गया क्योकि पार्टी में 99% maid ही आई हुई थी बच्चों के साथ…

Maids Home Services

October 27, 2015 By Monica Gupta

बीफ राजनीति और मीडिया

 

कार्टून ( मोनिका गुप्ता )

कार्टून ( मोनिका गुप्ता )

 

बीफ राजनीति और मीडिया

कुछ दिन मामला शांत बैठा पर अब फिर  बीफ पर बवाल चालू हो गया. केरल हाऊस की कैंटीन में  गौमांस परोसे जाने पर फिर सुर्खियों मे है और मीडिया बार बार इस मुद्दे को हवा दे रहा है . इस पर गऊ माता का कहना है कि

हम तो सही मायनों में मीडिया के लिए दुधारू गाय बन गए हैं जब भी देखो यही टॉपिक कभी बीफ तो कभी गो मांस ।।।दुखी कर दिया इसलिए यही चाहते हैं कि अगले जन्म मोहे गऊ न कीजो ।।।

बीफ राजनीति और मीडिया

October 24, 2015 By Monica Gupta

हिंदी साहित्य और साहित्यकार

सिरसा जनपद

सिरसा जनपद

हिंदी साहित्य और साहित्यकार

हिंदी साहित्य , साहित्यकार और हरियाणा

आज के समय में जहां न्यूज चैनलों ने साहित्यकारों का साहित्य  सम्मान लौटाना सुर्खियों बनाया हुआ हैं वही हरियाणा के सिरसा के साहित्यकार इन सब बातों से दूर  कुछ हट कर दिखाने में जुटे हैं. जिसका ताजा उदाहरण है “सिरसा जनपद की काव्य सम्पदा” नामक किताब .

इस किताब में सिरसा जनपद के 115 लेखकों का परिचय है और दो उनकी दो दो रचनाए. इस किताब के बारे में मैने प्रोफेसर रुप देवगुण जी से बात की तो उन्होने बताया कि कुछ समय पहले राज्य कवि उदय भानु हंस सिरसा आए हुए थे. उन्होने कहा कि हरियाणा के सिरसा में इतने लेखक है ऐसा लगता है मानो सिरसा हरियाणा की साहित्यिक राजधानी है… बस ये बात उनके दिल के कोने मे कही घर कर गई. रुप जी ने सोचा कि “हंस” जी ने बहुत सही कहा बेशक, साहित्यिक राजधानी है सिरसा पर इसे सिद्द कैसे किया जाए और इसी बात को और पुख्ता करने के लिए उन्होनें योजना बनाई कि एक किताब बनाई जाए जिसमें लेखकों का परिचय और उनकी दो दो रचनाओं को सम्मलित किया जाए.
आज उनकी वही सोच पुस्तक रुप मे हमारे सामने हैं. इस पुस्तक को तीन खंडों में बांटा गया है. पहले खंड “स्मृति” में सिरसा के दिवंगत कवि , दूसरे खंड में समकालीन कवि व लेखक तथा तीसरे खंड में “नई कलम“हैं जिन्होनें हाल ही में लेखन आरम्भ किया है.
115 लेखकों की रचनाए और उनका परिचय सिलसिलेवार लिखने में लगभग एक साल का समय लगा. पुस्तक के सम्पादक मंडल में तीन लेखकों ने अपनी भूमिका बहुत अच्छी तरह निभाई.

उनका इस तरह का काम देख कर बेहद खुशी हुई और मैने सोचा कि क्यों ना इसे” लिम्का बुक आफ रिकार्डस” के लिए भेजा जाए. पूरे विश्वास के साथ, मैनें इस किताब के बारे में लिम्का बुक आफ रिकार्डस में विस्तार से जानकारी भेज दी है. रुप जी से पूछ्ने पर कि किताब छपने पर कैसा महसूस हो रहा है उनका कहना था कि टीम ने मिलकर मेहनत की और वो किताब रुप में छ्प कर मेहनत सफल हुई. जिसकी खुशी शब्दों में बयान नही की जा सकती. इस किताब का विमोचन पहली नवम्बर को होगा.

 

हिंदी साहित्य और साहित्यकार

October 20, 2015 By Monica Gupta

हे न्यूज चैनल्स

कार्टून ( मोनिका गुप्ता )

कार्टून ( मोनिका गुप्ता )

  हे न्यूज चैनल्स

 

बचपन में हम एक खेल खेलते थे. गाय उड, चिडिया उड, फल उड, आज शायद यही खेल न्यूज चैनल खेल रहा है. एक खबर बनती है और दूसरी फुर्र करके उड जाती है… किसान आत्महत्या की खबर उड. इंद्राणी उड, रेप उड, विवादित बयान उड, अकादमी सम्मान उड…

कल मणि से बात होते होते बहस में तबदील हो गई. असल में, बात हो रही थी न्यूज चैनल की. जिस तरह से खबरें परोसी जा रही हैं… अंतहीन बहस हो रही है उस का क्या प्रभाव हो रहा है समाज पर. मेरी राय यह थी कि  न्यूज चैनल आतंक फैला रहे है जहां उनकी भूमिका निष्पक्ष होनी चाहिए पर उससे उलट वो टीआरपी बढाने के चक्कर मे कुछ भी परोसे जा रहे हैं जबकि उनके उपर बहुत बडा दायित्व है समाज के प्रति. उसके क्या पूछ्ने पर मैने बताया चाहे हिंदू मुस्लमान के झगडे हो या बडबोले नेताओ के विवादित बयान… अरे !!! जो जरुरी ही नही है वो किसलिए दिखाए जाएं… ना दिखाने की बात तो दूर वो तो तोड मरोड के पेश किए जा रहे हैं फिर उस पर लोगो के टवीट दिखाते हैं और एक घंटा बहस करवाते हैं और नतीजा … गई भैंस पानी में …यानि शून्य…

इस पर उसका कहना था कि कई खबरे जरुरी होती है दिखाना चाहिए कि समाज में क्या क्या हो रहा है  !!! और हिंदू मुस्लमान के झगडे ??? मैने बीच मे ही बात काटी… ये क्या है इससे क्या भला होगा समाज में बल्कि बार बार दिखा कर आपसी नकारात्मकता और हिंसा को ही बढावा मिलेगा… बिल्कुल गलत ट्रैक पर चले गए हैं न्यूज चैनल..बस अपने 24 घंटे पूरे करने हैं जिसमें मार काट, दंगे, विवादित बयान और विज्ञापन ही मकसद रह गया है. एक तरफ कैंसर की बात करेंगें दूसरी तरफ पान मसाला उस  कार्यक्रम को प्रायोजित करता है !!  बहुत उलझा हुआ मसला है ये !!

ऐसा नही था हमारा देश.. !! अचानक मैं इमोशनल हो गई. हिंदू ,मुस्लमान को हमने कभी नही अलग समझा. बचपन मे भी यही पढा था कि भारत में भिन्नता होते हुए भी एकता का देश है और वाकई था … पर जिस तरह से घर वापिसी और बीफ, मार काट के मुद्दे उठे मानों खबरों का पूरा संसार ही बदल गया. बीफ गौ वध सुन सुन कर कान ही पक गए. मेरे एक मित्र बता रहे थे कि आजकल न्यूज चैनल लगाने मे एक डर सा लगने लगा है..पता नही क्या झेलना पड जाए. और तो और साहित्य अकादमी को लेकर सम्मान लौटाने के मुद्दे को भी इन्होने बेवजह बहुत तूल दे दिया और भिडा दिया साहित्यकारों को …!!! राजनीति डाल दी उनके लेखन में !!! बेशक, जिस तरह से साहित्यकारों में अपवाद हैं ठीक वैसे ही न्यूज चैनल्स में भी अपवाद हैं …

पर फिर भी समझ नही आता कि बेसिर पैर की खबरे दिखा कर क्या मकसद पूरा करना चाह्ते हैं.

अरे भई !!!दिखाओ पर दोनो पहलू तो दिखाओ … सकारात्मक दिखाते नही बस नकारात्मकता के पीछे ही पडे हुए हैं. मैं खुद भी दस साल ज़ी न्यूज से जुडी रही हूं पर यकीनन तब इतना बुरा हाल नही था खबरों का…!!! शायद इसलिए कि तब टवीटर और सोशल मीडिया इतना तेज नही था..

आज इंसानियत उड, संवेदनशीलता उड…. गम्भीरता उडन छू हो चली है और बिना किसी निष्कर्ष के हमारी भी बह्स गर्म चाय पर समाप्त हो गई.

ऐसा प्रतीत हो रहा है कि मानों ये न्यूज चैनल रावणी हंसी हंस रहे हों और हम दर्शक सीता के समान हाय राम हाय राम चिल्ला रहे हो … कि आओ हमे इससे बचाओ …!!!( राम लीला का मौसम  है न इसलिए ये डायलाग लिखना जरुरी है)

हे न्यूज चैनल्स जरा रहम करो !!! ईश्वर आपको सदबुधि प्रदान करे!!!

 

 

 

 

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