Monica Gupta

Writer, Author, Cartoonist, Social Worker, Blogger and a renowned YouTuber

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August 2, 2015 By Monica Gupta

उफ ये मुस्कुराहट

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(व्यंग्य)

                                           उफ ये मुस्कुराहट        

इस तनाव भरे माहौल मे अगर कोई कहे कि मुस्कुराओ तो बहुत ही अजीब सा लगता है वैसे ऐसा मेरा मानना है पर पिछ्ले दो चार दिन से कुछ ऐसा हुआ कि मुझे अपने विचार बदलने पडे और मै भी हंसने मुस्कुराने के मैदान मे कूद पडी. वैसे आपको एक सच बात बताऊ कि हँसने खिलखिलाने का शौक तो मुझे बचपन से ही था पर बडे होते होते कुछ ऐसा होता चला गया कि हँसी भी कही दब कर रह गई. दो दिन पहले मेरी सहेली मणि आई उसने बताया कि मुस्कुराहट तो अनमोल गहना है इसे हमेशा धारण करना  चाहिए. वही बाजार मे खरीददारी करते एक अन्य दोस्त ने बताया कि जब 2 सैंकिंड की मुस्कान से फोटो अच्छी आ सकती है तो मुस्कुराने से जिंदगी भी तो अच्छी हो सकती है कि नही. पता नही क्यो पर मुझे बात जम गई. और बस सोच लिया कि अब जो हो सो हो. हमेशा हसंना और मुस्कुराना ही है और अपनी अलग पहचान बनानी है.

अगली सुबह मे बहुत अच्छे मूड मे सो कर उठी और सैर को निकल पडी. एक दम शांत माहौल मे मैने एक पेड चुना और वहाँ हाथ ऊपर करके ठहाका लगा कर जोर जोर से हंसने लगी. इतना ही नही बीच बीच मे ताली भी बजा रही थी इस बात से बिलकुल बेखबर कि सामने ही एक मोटी लडकी व्यायाम करने के लिए रस्सी कूद रही थी और वो गिर गई थी. पता तब चला जब शायद उसकी मम्मी आग्नेय नेत्रो से मुझे धूरने लगी और उसके पास खडा आज्ञाकारी कुत्ता भी मुझ पर बेहिसाब भौकने लगा. इससे पहले मै अपनी सफाई मे कुछ कहती उनकी लडकी और जोर जोर से रोने लगी और मैने चुपचाप खिसकने मे ही भलाई समझी. उफ!! मैने ठंडी सासं ली और धडकते दिल के साथ  घर लौट आई.

घ्रर लौटी तो हमारी पडोसन मिक्सी मांगने आई हुई थी. पर पता नही क्यो आज उसे देखकर मुझे हसीं आ गई. असल मे, वो क्या है ना कि वो डकारे बहुत लेती है. पहले तो मै कुछ नही कहती थी पर जब से हंसना अनमोल गहना है और जिंदगी हंसने से बेहतर बनती है तो सोचा कि आज हंस ही लूं इतने  दिनो बाद खिलखिलाकर हँसी तो शायद उसे बुरा लगा. उसने हसंने का कारण पूछा  तो मैने भी हंसते हुए बता दिया कि उसकी डकार सुनकर मुझे बहुत हंसी आती है. इस पर वो बहुत नाराज हुई और बाहर चली गई. मै एकदम चुप हो गई. इतने मे वो फिर आई और गुस्से मे वहाँ रखी मिक्सी ले गई.मै चुपचाप उसे देखती रह गई.उफ ये मुस्कुराहट!!!

अगले दिन किसी कवि सम्मेलन मे जाना था. वहां एक महोदय बहुत देर से कविता पे कविता सुनाए चले जा रहे थे. मेरे साथ बैठी महिला मुहं पर रुमाल रख कर धीरे धीरे  हसें जा रही थी. मैनें इधर उधर नजरे घुमा कर देखा तो कोई उबासी ले रहा था तो कोई सिर खुजला रहा था तो कोई मोबाईल पर मैसेज भेजने मे जुटा था यानि कुल मिलाकर माहौल मे सन्नाटा था. मैने कनखियो से एक दो बार उस महिला को  देखा तो  भीतर ही भीतर वो इतनी हंस रही थी इतनी हंस रही थी कि उसके आंसू निकल रहे थे.बस फिर क्या था. बोर तो मै भी हो रही थी पर उसे देख कर हंसने वाली बात याद आ गई और उसे देख कर मै जोर से खिलखिला कर हंस पडी. उसके बाद आपको ज्यादा बताने की जरुरत नही क्योकि आप सभी बहुत समझदार है. मुझे बाहर का रास्ता दिखा दिया गया और मै चुपचाप बाहर आ गई.उफ!! बहुत महंगी पडी ये मुस्कुराहट.

समझ नही आ रहा था कि आखिर गलती हो कहाँ रही है.खैर रुआसी होकर घर लौट आई. शाम को बेटा हंसता मुस्कुराता घर आया और उसने मुझे उसका नया पासपोर्ट दिखाया. मै खुशी खुशी देखने लगी पर पासपोर्ट की फोटू मे उसकी मुस्कान ही गायब थी. मेरे पूछ्ने पर उसने बताया कि आजकल पासपोर्ट पर फोटो खिचवाते समय  चेहरे पर कोई भाव नही आना चाहिए…!! यही नियम है.

मुझे लगा कि मेरे लिए भी यही ठीक होगा और फिर मैनें अपने को पहले की तरह बनाने मे ही भलाई समझी और चुपचाप बिना मुस्कुराए काम मे जुट गई….

कैसा लगा ??? जरुर बताईगा??

ये व्यंग्य दैनिक भास्कर की मधुरिमा पत्रिका में प्रकाशित हुआ था.

 

August 1, 2015 By Monica Gupta

छोटी बातें

ऐसा भी होता है …!!!!

friends photo

छोटी बातें

शीना और गीता बहुत अच्छी सहेलियां थी. पर अचानक एक दिन ना जाने क्या हुआ क्या नही पर दोनो की आपसी बोल चाल बंद हो गई. यह बात लगभग 2 महीने तक चली और जब उनका आमना सामना हुआ तो हकीकत जान कर दोनो बहुत झेंपी. असल मे ,हुआ यू कि एक शाम शीना बाजार जा रही थी और गीता अपने घर की बालकनी मे खडी थी. मुस्कुराते हुए शीना ने उसे हाथ हिलाया पर उसने ना तो कोई जवाब दिया और ना स्माईल.

शीना को बहुत गुस्सा आया और मन ही मन उसने उससे कुट्टा कर ली कि बहुत अकड आ गई है उसमे. एक दो बार गीता के फोन भी आए पर उसने जवाब नही दिया. वही एक दिन गीता को बाहर जाना था और उसने देखा कि शीना पौधो को पानी दे रही है उसने प्यार से हाथ हिलाया पर शीना यथावत पानी ही देती रही.बस दोनो मे दूरियां बढती गई.

एक दिन दोनो का अनयास ही आखों के डाक्टर के यहा आमना सामना हुआ.बातो बातो मे जब बात खुली तो झेंप इसलिए आई कि बात कुछ भी नही थी.असल में, दोनो की नजर कमजोर हो गई थी. हल्के अंधेरे मे दोनो को ही दिखाई नही दिया और एवई ही बात का बतंगड बन गया.
ऐसे ना जाने कितने उदाहरण है जिसमे बात कुछ भी नही होती और दिलो मे खटास बेवजह ही पैदा हो जाती है.चाहे माता पिता मे हो, बच्चो मे हो या दोस्तो मे हो या अपने दफ्तर मे हो.अगर ऐसे मे कभी भी थोडा भी संदेह हो तो बजाय बोलचाल बंद करने के खुल कर बात कर लेना बेहतर है. दूसरे लोग ऐसे मे ना सिर्फ मजाक उडाते है बल्कि आनंद भी लेते हैं तो किसी को क्यो मौका देना … वैसे आप तो ऐसा कुछ नही कर रहे होंगे अगर कर रहे हैं तो बिना समय गवाए बात कर लीजिए प्लीज … !!!

 

 

 

August 1, 2015 By Monica Gupta

समय बहुत बलवान

time  photo

Photo by becosky…

समय बहुत बलवान

बहुत समय से एक जानकार अपनी बिटिया की शादी का सोच रहे थे . बहुत लडके देखे, अखबारो के विज्ञापन और नेट पर भी सर्च किया पर एक साल होने को आया पर बात नही बनती दिख रही थी. आज फिर उनकी बिटिया को  देखने लडके वाले आ रहे थे. घर पर जबरदस्त इंतजाम किया गया था. परदे, मंहगे सोफे, भव्य शो पीस,क्राकरी और भी ना जाने क्या क्या.  दस तरह की मिठाई , बीस तरह की नमकीन और फल और ड्राई फ्रूट का तो पूछो ही मत.. यानि  शादी मे रुपया पैसा जैसी कोई रुकावट नही थी. करोडों की शादी होनी थी. लडके वाले आए. खूब खातिर दारी भी हुई  पर   पर पर बात नही बनी.

ना लडकी में कोई कमी थी और न ही उस परिवार का कोई क्रिमिनल रिकार्ड … तो फिर आखिर क्या हुआ कि बात नही बनी…

इसका बस  यही कारण था कि कमरे मे लगी महंगी दीवार घडी रुकी हुई थी और कैलेंडर भी फरवरी  महीने का ही लटका हुआ फडफडा रहा था. ये बात एक कमरे की नही थी सभी कमरों में महंगी से महंगी घडी थी पर सही समय कोई नही दिखा रही थी . जिस कमरे में लंच था उस कमरे में तो सन 2014 का कैलेडर टंग़ा हुआ था.

शायद  लडकी वालो के लिए रुपया पैसा ही सब कुछ था और लडके वालो की सोच  उनसे हट कर  थी.

वैसे बात शादी ब्याह की न भी हो तो हमें अपने घर का समय यानि दीवार घडी का समय और कैलेंडर सदा अपडेट रखने चाहिए … समय की कीमत समझनी बेहद जरुरी है … वैसे आप तो ऐसे नही होंगें … अरे आप कहां चले .. ?? ओह .. आज पहली अगस्त है और आपने महीना बदला नही था अभी तक 🙂

August 1, 2015 By Monica Gupta

बहुत बदल गया है वो

 

wall clock photo

बहुत बदल गया है वो !! हालांकि पिछ्ले कुछ दिनो
से उसमे बदलाव तो महसूस हो रहा था.सिर्फ मै ही नही मेरे आस पास के लोगो ने
भी इस बदलाव को महसूस किया पर खुल कर नही कहा. बस दबी दबी आवाज मे उन लोगो
की फुसफुसाहट सुनती रही.

पर देखते ही देखते अचानक इतना बदलाव आ जाएगा
विश्वास सा नही हो रहा.वही दूसरी तरफ बार बार मन एक ही बात कह रहा था कि परिवर्तन ही
नियम है और मुझे  सहज ही स्वीकार कर लेना चाहिए.

बहुत सोच विचार के मैने अपना मन पक्का किया कि अगर यही सही है तो ठीक है मैं भी तैयार हूं
और “मौसम” के इस बदलाव का स्वागत करती हूं. सुबह शाम की हल्की हल्की ठंडक
और शाम का जल्दी ढल जाना और सुबह का देरी से आना… सर्दी के “मौसम” के बदलाव की
मीठी सी दस्तक है. .. है ना !!

आक्छी !!! आक्छी !!!

अरे क्या हुआ? जी हां, मै तो मौसम के बदलाव की ही बात कर रही थी और आप कुछ और समझ बैठे !!!

August 1, 2015 By Monica Gupta

आईए परेशान हों

worried people photo

Photo by photoloni

आईए परेशान हों

इसका टाईटल पढ कर हैरान होने वाली तो कोई बात ही नही है क्योकि हम है ही ऐसे. बात बात पर रोंदडू सा मुहं बना लेगे और परेशान ही रहेगें.

अब देखिए ना !! आज सुबह की ही बात है सरकारी दफ्तर के बाहर दो बाबू लोग चाय पीते पीते बतिया रहे थे .एक बोला क्या बताऊ आज धुंध की वजह से सब गडबड हो गया. दूसरे ने पूछा पर यार अब तो मौसम एक दम साफ था. धुंध तो थी ही नही इस पर वो  बोला तभी तो …. आज मै धुंध के चक्कर मे जल्दी घर से निकल गया ताकि दफ्तर के लिए देरी ना हो जाए पर मौसम एक दम साफ मिला और मै इतनी जल्दी आफिस पहुच गया कि ताले भी नही खुले थे और ना ही यह चाय वाला आया था.बाहर इतनी सर्दी थी और अकेला खडा खडा  इतना बोर हुआ कि पूछो मत.

अब दूसरा उदाहरण देखिए .. एक श्री मति जी अपनी काम वाली बाई के आने पर रो रही थी. हुए ना आप हैरान !! असल मे वो क्या है ना कि चार दिन से देवी जी बिना बताए छुट्टी पर चल रही थी श्रीमति जी दिन रात इंतजार मे लगी रही पर इनके दर्शन नही हुए. इसलिए आज सुबह से ही उन्होने कमर कस ली और जुट गई सफाई मे. जैसे ही घर का सारा काम निबटा तो वो देवी जी अचानक प्रकट हो गई.अब आप ही बताईए क्या ऐसे  मे वो क्या उनकी जगह कोई भी होता वो खुश नही हो पाता.

और सुनिए!! भारी ठंड और धुंध को देखते हुए स्कूलो की छुट्टियाँ आगे बढा दी ताकि बच्चे घर मे सुरक्षित रहें. पर अब घर मे रहने वाली महिलाए अब और ज्यादा दुखी है कि सारा दिन हल्ला गुल्ला शोर शराबा होता रहता है. बच्चे नाक मे दम किए रखते हैं इसलिए. ना स्कूल जाए तो उसमे दुखी और  जाए तो उसमे और भी ज्यादा दुखी कि सरकार और हमारा कानून कितना निर्मम है इतनी सर्दी मे भी मासूमो को पढने जाना पड रहा है.

एक और उदाहरण तो पढिए. एक मोहतरमा गैस खत्म होने से बहुत खुश थी. नही तो आम तौर पर गैस खत्म होने पर  एक चिंता सी हो जाती है. खासतौर पर जब बुक करवा रखी हो और ना आए !! असल मे, अचानक उनके घर मेहमान आ गए और वो खाना बनाने से बच गई. खुशी टपक टपक के दिखाई दे रही थी उनके चेहरे पर से. अरे भई ,होटल मे खाना खाने जो जाना था उन्हे!!वही दूसरी तरफ  पतिदेव के चेहरे से उदासी टपक टपक के गिर रही थी.

जहां आजकल जबरदस्त सर्दी के दिनो मे  अचानक धूप या सूरज निकलने से हमे राहत मिल रही है वही नीना आज धूप को कोसे ही जा रही है पूछ्ने पर पता चला कि अखबार मे और टीवी पर सुना  था कि मौसम बादल वाला ही रहेगा इसलिए उसने आज कपडे नही धोए और आज सुबह से ही धूप आसमान मे चमक रही है मौसम एक दम साफ है पर नीना का पारा एकदम गर्म!!! काश उसने भी कपडे धो लिए होते.!!! किसी पर विश्वास ना किया होता !! बस आज वो यही प्रार्थना किए जा रही है कि हे भगवान!!  बरसात आ जाए या बादल हो जाएं!!

देखा !!! आप भी यह लेख पढ कर परेशान हो रहे हैं और  मुझे कोसने लगे कि  ना जाने कैसे कैसे लोग ब्लाग लिखने लगे है. जो भी मन मे आता है लिख डालते है..ह हा हा धन्यवाद !!! यानि मेरा लेख सार्थक हुआ!!

आईए परेशान हों

 

July 29, 2015 By Monica Gupta

Facebook Friend

facebook photo

Facebook Friend

एक अच्छी पुस्तक हजार दोस्तों के बराबर होती है और एक अच्छा दोस्त पूरी की पूरी लाईब्रेरी होता है. हम खोजते रहते हैं ऐसे दोस्त को जो हमारे दुख, दर्द समझे  और हमारी बाते सुने और हमारा साथ दे…

फेसबुक मित्र अलग किस्म के होते है पहली बात तो लडकी मे छिपे लडके या लडके मे छिपी लडकी.. वो नही होते जो दिखाई देते हैं यानि असल फोटो से शायद बहुत अलग… वैसे एक बात मैं पहले ही साफ कर दूं कि अपवाद हर क्षेत्र में होते हैं अगर आपके फेसबुक पर अच्छे अनुभव रहे हैं तो जानकर बहुत खुशी हुई …

 

facebook photo

 

हां तो मैं बात कर रही हू फेसबुक मित्र की… एक फेसबुक सहेली ने मुझसे किसी के बारे मे पूछा तो मैने अनभिज्ञता जाहिर की क्योकि शायद वो मेरी मित्र लिस्ट मे नही था. फेसबुक सहेली ने बताया कि वो पिछ्ले एक साल से फेसबुक मित्र सबसे अच्छा था वो इसलिए कि जब भी वो कुछ पोस्ट करती है वो सबसे पहले लाईक करता था और कमेंट तो करता ही करता था. जन्मदिन आने से महीना पहले विश करना शुरु कर देता था. वाल पर कम ही लिखता था जो करता था मैसेज मे ही करता था. अपने बारे मे कभी नही बताया और न ही अपनी कभी फोटू दिखाई ये भी नही पता की वो देश के किस कोने मे रहता था पर था वो सबसे अलग और सबसे अच्छा हमेशा गुड मार्निग और गुड नाईट करके ही जाता था.

मेरी सहेली अभी तक परेशान है क्योकि अब उसका प्रोफाईल भी नही दिख रहा शायद डिएक्टिवेट कर दिया है … पर उसे अभी भी इंतजार है पहली लाईक और पहला कमेंट का … फिलहाल उसका मन रखने के लिए अब ये काम मैं कर रही हूं … क्योकि आखिर वो भी तो मेरी फेसबुक मित्र है 🙂

 

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