Digital India
हे ईश्वर !! डिजीटल इंडिया का सपना क्या सपना ही रह जाएगा… हमारा नेट से और नेट का हमसे ई मेल (मिलन) क्या कभी नही हो सकेगा ????
Writer, Author, Cartoonist, Social Worker, Blogger and a renowned YouTuber
By Monica Gupta
By Monica Gupta
आप का परिवारवाद… AAP भी आ ही गए परिवारवाद के लपेटॆ में अरविंद जी
भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि केजरीवाल भी कांग्रेस के नक्शेकदम पर चलकर ‘जय हिंद जीजाजी’ कहने की परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं और कांग्रेस की‘‘जीजा जी’’ परंपरा को आगे ले जा रहे हैं। हालांकि केजरीवाल जी ने इस मुद्दे पर ट्विटर पर सफाई देते हुए कहा, ‘‘वो मेरे चाचा की साली के जीजा की भतीजी के ससुर की भांजी के भतीजे की साली के भाई की बेटी है।’’ उन्होंने कहा कि विपक्ष ये अफवाह फैला रहा है कि स्वाती मेरी बहन जोकि पूरी तरह से बकवास है।
Kejriwal on DCW row: Swati Maliwal not even remotely connected to me | The Indian Express
The Aam Aadmi Party on Wednesday refuted charges of nepotism in appointing Swati Maliwal, wife of party leader Naveen Jaihind, as the head of the Delhi Commission for Women (DCW), saying she had a long record of “activism” in different spheres.
Chief Minister Arvind Kejriwal was also quick to deny that Maliwal was related to him.
“Some media houses and opposition leaders alleging that Swati is my cousin. Complete nonsense. She is not even remotely connected,” Kejriwal tweeted.
“Some media houses and opposition leaders alleging that Swati is my cousin. Complete nonsense. She is not even remotely connected,” Kejriwal tweeted.
Some media houses n opp leaders alleging that swati is my cousin. Complete nonsense. She is not even remotely connected(1/2)
— Arvind Kejriwal (@ArvindKejriwal) July 15, 2015
The party said Maliwal has a long record of “activism” in different spheres and the appointment was done on “merit”. Kejriwal on DCW row: Swati Maliwal not even remotely connected to me | The Indian Express
By Monica Gupta

Social Networking Sites and our lives
क्या वाकई … सोशल नेट वर्किंग साईटस ही हमें अनसोशल बना रही है.. सबसे ज्यादा सवालिया निशान टवीटर पर उठ रहे हैं कम से कम शब्दों मॆं अपशब्दों का इस्तेमाल करते हुए किस तरह से किसका अपमान किया जाए उसका मजाक बनाया जाए ….कही न कही हमारे दिलो दिमाग पर हावी होता जा रहा है … बेशक,कुछ बातों मे टवीटर अच्छा भी होगा पर फिर भी प्रश्न यही खडा होता है कि कैसे बचे इससे और कैसे बचाए …!!
Another case of child abuse goes viral on social networking sites | Dhaka Tribune
Corporal punishment against two girls at an orphanage run by Social Welfare Directorate in Barisal has caused uproar among the public after its footage went viral on social networking sites.
Although the incident took place on July 4, the district administration became aware of it after the footage went viral.
The footage uploaded on Facebook shows Md Dulal, health assistant at the institution, is indiscriminately beating two girls as they try to flee from the shelter home.
Yesterday, Deputy Commissioner Dr Gazi Saifuzzaman went to the orphanage and asked officials concerned to take stern action against the people responsible for the abuse after a proper investigation. See more…
The Evolving Role of News on Twitter and Facebook | Pew Research Center
The share of Americans for whom Twitter and Facebook serve as a source of news is continuing to rise. This rise comes primarily from more current users encountering news there rather than large increases in the user base overall, according to findings from a new survey. The report also finds that users turn to each of these prominent social networks to fulfill different types of information needs.
The new study, conducted by Pew Research Center in association with the John S. and James L. Knight Foundation, finds that clear majorities of Twitter (63%) and Facebook users (63%) now say each platform serves as a source for news about events and issues outside the realm of friends and family. That share has increased substantially from 2013, when about half of users (52% of Twitter users, 47% of Facebook users) said they got news from the social platforms.
Although both social networks have the same portion of users getting news on these sites, there are significant differences in their potential news distribution strengths. The proportion of users who say they follow breaking news on Twitter, for example, is nearly twice as high as those who say they do so on Facebook (59% vs. 31%) – lending support, perhaps, to the view that Twitter’s great strength is providing as-it-happens coverage and commentary on live events. Read more…
By Monica Gupta


One Year Drop
हमारे एक जानकार मित्र के बेटे ने आईआईटी क्लीयर न कर पाने के कारण आज एलान कर दिया है कि वो एक साल ड्राप करेगा और कोचिंग ले कर अच्छा नतीजा लाएगा. अभी तक घर मे बहुत तनाव था. दो ग्रुप बन गए थे एक चाहता था कि ड्राप करे और दूसरा बिल्कुल नही चाह्ता था.
पर आज बेटे की इच्छा के आगे अब सब झुक गए हैं और मान गए हैं. अब बस उसे सलाह दी जा रही है कि एक साल बहुत मायने रखता है अब डट कर मेहनत करनी है और बहुत अच्छे कोचिंग मे दाखिला लेना है. इसी बीच मैने भी कुछ छानबीन की और पता लगाया कि ड्राप करने पर भी अगर गम्भीरता से पढाई की जाए तो आईआईटी में अच्छी रैंक आ सकती है. एक जानकार के बेटॆ ने ड्राप करके पूरे साल कोचिंग ली और वो बहुत अच्छी रैंक से पास हो गया.
अब क्योकि निणर्य ले ही लिया है तो बार बार टोकने का क्या फायदा. अब बस ऐसा करना होगा कि वो बहुत आत्मविश्वास के साथ पढाई करे और अच्छा नतीजा ला कर दिखाए. बार बार यह भी कहने का कोई फायदा नही कि मोबाईल, टीवी सब बंद करके रख दो .. एक साल के लिए सब भूल जाओ.. आज के बच्चे समझदार है एक साक समय की क्या कीमत होती है शायद वो हमसे भी बेहतर समझते हैं …उन्हें बस अपने लक्ष्य पर केंद्रित होने दे. उन्हें सही या गलता का हम से ज्यादा ज्ञान है.
टेंशन खत्म करने के लिए बच्चे की इच्छा का खुशी खुशी स्वागत करें और उस पर विश्वास बनाए रखें…
By Monica Gupta

We Care for you
पहले समय मे घडी किसी के पास नही होती थी पर समय सभी के पास होता था और आज घडी सभी के पास है पर समय ही नही है. अरे भई…. भला ये क्या बात हुई… इसमे इतना सोचने की क्या बात है…. .अब आप समझदार हैं और जानते ही होंगे कि समय परिवर्तन शील है बदलता रहता है. पहले नई नई खोज नही हुई थी.जागरुकता नही थी समझ नही थी कि क्या, कब और कैसे करना है. आज का समय देखो. कैसे हो सकती है किसी के पास फुर्सत. सभी व्यस्त, अति व्यस्त बल्कि ये कहिए कि महा व्यस्त है तो गलत नही होगा. है ना….
मैने तो बहुत लोगो को ये भी कहते सुना है कि भई इतना काम है कि मरने तक ही भी फुर्सत ही नही है और आप बात करते है समय की.ये क्या बात हुई भला.काम के बारे मे तो मैं क्या बात करु. काम या कमाने के चक्कर मे पति महोदय दूसरे शहर मे उनकी श्रीमति जी अन्य शहर मे और बच्चे होस्टल मे.
महीने मे एक या दो बार मिलना हो जाता. बस बहुत है और क्या. भई,आज के समय मे नौकरी मिलनी आसान है क्या. दूसरे लोग गिद्द की तरह नजरे गडाए बैठे रह्ते है कि कब किसकी काट करे और नौकरी हथियाए और मंहगाई जो सिर पर खडी होकर ता ता थैया और ब्रेक डांस कर रही है उससे भी तो दो चार होना है, नजरे मिलानी है या नही.

Photo by Celestine Chua 
हाँ, तो मै कह रही रही थी कि परिवार, दोस्त, जोश और हमारा स्वास्थ्य अजी इनकी चिंता छोडिए.
चिंता किसलिए करनी है.ये लोग कही भागे थोडे ही ना जा रहे हैं.आखिर ये क्या बात हुई पर नौकरी चली गई तो सब चला जाएगा रुपया पैसा होगा तो ये सभी लोग हमारे साथ होंग़े.क्यो है ना . है ना..
आखिर हम सभी यही तो कर रहे हैं. काम के चक्कर मे इतने उलझ गए हैं कि सुबह काम पर जल्दी निकल जाना देर रात को लौटना.परिवार का ध्यान देने का तो समय ही नही है. पत्नी की अलग दुनिया है और पति पत्नी दोनो के चक्कर में बच्चों का किसी को ध्यान ही नही. जबकि आमतौर पर सुनने मे तो यही आता है कि यह सब बच्चो के लिए ही तो कर रहे हैं हमने कौन सा साथ लेकर जाना है. पर इस बारे मे बच्चो की या घर वालो की राय लेने की कभी जरुरत नही समझी.
पता नही, पर सच पूछो तो ऐसा महसूस होता है कि ये क्या बात हुई???? .शायद कही ना कही कुछ गलत हो रहा है. सच पूछो तो यकीनन काम से बढ कर है स्वास्थ्य ,परिवार, दोस्त और हमारा जोश.
काम तो एक रबड की गेंद की तरह है जो उछ्ल कर वापिस आ ही जाएगी पर… पर…. पर…. हमारा परिवार, हमारा शरीर, हमारे दोस्त, हमारा जोश उस कांच की गेंद की तरह है कि उछालते समय अगर एक बार हाथ से छूट गई तो बिखर जाएगी और जिसे सम्भालना या जोडना नामुमकिन हो जाएगा.सच मे,अब यही कहना पडेगा कि वाह ये क्या बात हुई !!
कोई शक नही है कि जिंदगी में काम बहुत जरुरी है और इसे दिल लगा कर करना भी बहुत जरुरी है पर जब हम काम करके बाहर निकले तो बस फिर हम हमारा परिवार, हमारा जोश और हमारे दोस्त ही होने चाहिए. आज के समय मे इन सभी को अहमियत देना बहुत ही ज्यादा जरुरी हो चला है.
वो कहते भी है ना उसे कभी नजर अंदाज मत करो जो आपकी बहुत परवाह करते हैं वरना किसी दिन आपको अहसास होगा कि पत्थर जमा करते करते आपने हीरा गवां दिया…. वाह!!! अब तो यही कहना पडेगा कि यह हुई ना बात !!!! और ये क्या खूब बात हुई !!!!! We Care for you ….
कैसा लगा आपको ये लेख … जरुर बताईएगा !!!
By Monica Gupta

ऐसा प्यार कहां
वाह !!! आज एक महाशय … मेरे हिसाब से महानुभाव बोलना ऊचित रहेगा .. हां, तो आज एक महानुभाव से मिलना हुआ. वो खुदकुशी कर रहे थे. उन्हे और उनके प्यार को देखकर मै उनसे प्रभावित हुए बिना नही रह सकी. अरे!! हैरान होने की जरुरत नही है और ना ही मैने कुछ गलत लिखा है. असल में, उन्हे ब्लड शूगर है और वो बस मीठा और तला चोरी छिपे खाए चले जा रहे है भले ही घर वाले नाराज हो पर खाने से वो अपना प्यार, मोह नही छोड पा रहे है.
वही मेरी प्रिय सहेली मणि के एक मित्र है मुहं पका हुआ है एक छाला महीने से ठीक नही हो रहा पर पान मसाले और गुटखे का प्रेम इतना है कि उसे छोड नही पा रहे.
वही एक अन्य जानकार है दोनो गुर्दे जवाब देने को है पर शराब… अजी, इतना प्यार है उससे कि छूट ही नही रही. जाने अंजाने ये सभी लोग खुदकुशी पर आमादा है.. भले ही घर परिवार वाले नाराज हो लडे मरे या खुद अपने शरीर के साथ कितने भी दुख उठाए पर छोड नही सकते.
देखा है आपने ऐसा प्यार!!! अब प्यार हो तो ऐसा हो वर्ना ना हो !! वैसे आप कही आप भी तो खुदकुशी ….. !!!!
ऐसा प्यार कहां

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