Monica Gupta

Writer, Author, Cartoonist, Social Worker, Blogger and a renowned YouTuber

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December 8, 2016 By Monica Gupta Leave a Comment

नशे की चाहत – सिगरेट पीने से लाभ नही होता

मटके का पानी छी होता है क्या

नशे की चाहत – सिगरेट पीने से लाभ नही होता .. नशे के कितने नाम हैं … नशाखोरी , युवाओं में बढ़ती नशे की प्रवृत्ति , युवाओं में नशे की लत , नशाखोरी और देश का युवा , नशाखोरी के दुष्परिणाम , नशे की लत , नशे की गिरफ्त में , सिगरेट पीने से लाभ , सिगरेट के नुकसान,nashe ki chahat , नशा कैसे छोङे – सिगरेट पीने से लाभ नही होता आदि आदि … पर सोचने वाली बात ये है कि हम कितना जागरुक है इसे लेकर …

नशे की चाहत – सिगरेट पीने से लाभ नही होता

कल मैं फेसबुक देख रही थी कि अचानक एक पोस्ट पर ध्यान चला गया … पोस्ट में एक प्यारी सी बच्ची की तस्वीर  थी  और उसमे लिखा था कि ” मेरे पापा ने कहा है कि अगर इस फोटो को एक हजार लाईक मिले तो वो सिग्रेट पीना छोड देंगें. हैरानी तो हुई पर अच्छा ये लगा कि लगभग 900 से ज्यादा लाईक मिल चुके थे.

मैने भी तुरंत लाईक कर दिया. पता नही पर उसके बाद वो पोस्ट दुबारा तो दिखाई नही दी क्या हुआ होगा क्या नही ये तो पता नही पर दुख होता है जब लोग नशा करते हैं ये नही सोचते कि उनके परिवार वालो पर क्या बीतती है  बस बहाने लगाते हैं  कल छोड देंगें परसों छोड देंगें पर …

मेरे एक जानकार भी बहुत  स्मोक करते हैं जिससे उनके परिवार वाले बहुत गुस्सा हैं और वो हर बार अपना टारगेट रख लेते है साल के शुरु में उन्होने कहा था कि बस कि बस होली के बाद कभी नही लूंगा…

फिर राखी पर बात आती है फिर दीपावली पर और फिर नए साल पर … साल दर साल गुजरते जा रहे हैं पर छोड ही नही रहे …. वैसे इस सिचूएशन  पर हमेशा मुझे एक बात याद आती है …

कि एक आदमी ने पेड पकडा हुआ और जोर जोर से चिल्ला रहा कि बचाओ पेड ने मुझे पकड रखा है .. जो देखता हंसता कि भई पेड क्या पकडेगा. तूने ही पेड को पकडा हुआ है.

हमारे जानकार भी हालत भी ऐसी ही है. सिग्रेट को पकडा उन्होनें हुआ है और चिल्ला रहे हैं कि बचाओ सिग्रेट ने उन्हें पकडा हुआ है … वैसे नशा कोई भी हो बुरा ही होता है इसलिए जरुरत बस किसी बहाने की या कल परसो की नही आज और अभी छोडने की होनी चाहिए …वैसे इसी बात पर एक कहानी भी पढी थी …

 

नशे की चाहत – सिगरेट पीने से लाभ नही होता

एक कहानी नशे की लत पर … 

एक गांव में बहुत अमीर आदमी था वो अपने बेटे की बुरी आदतों से बहुत परेशान था। वो जब भी अपने बेटे से बुरी आदतों को छोड़ने के लिए कहता तो उसको एक ही जवाब मिलता “पिता जी कल से छोड दूंगा या परसो से छोड दूंगा पर अपनी बुरी आदतों को छोड ही नही रहा था।

उन्ही दिनों उनके गांव में जाने -माने एक महात्मा आए हुए थे। जब उस व्यापारी को उस महात्मा से अपने बेटे की बुरी आदतों के बारे में सब महात्मा को बता दिया। महात्मा ने व्यापारी की बात को बड़े ही ध्यान से सुना और उसने अपने बेटे को कल उसके पास लेकर आने के लिए कहा।

महात्मा उसके लड़के को नजदीक के ही बगीचे में लेकर चले गए। दोनों बगीचे में धीर -धीरे चल रहे थे। अचानक महात्मा रुके और उसने लड़के से कहा क्या तुम इस बगीचे से इस छोटे से पौधे को उखाड़ सकते हो ? जी महात्मा जी इसमें कौन सी बड़ी बात है यह तो बड़ा ही आसान काम है। लडके ने बड़ी आसानी से उस छोटे से पौधे को जड़ से उखाड़ दिया।

आगेचलकर वो एक पेड उखाडने को कहते हैं  इस पर लडका बोलता है कि पेड उखाडना … असम्भव है … इस पर महात्मा बोलते हैं कि  ऐसा ही हमारी अपनाई बुरी आदतों के साथ होता है जब यह नयी होती हैं तो हम इन्हें थोड़े प्रयास के साथ छोड़ सकते हैं पर जैसे ही यह पुरानी होने लगती हैं इन्हें छोड़ना बहुत मुश्किल हो जाता है हमें इनकी लत लग जाती है।

इसलिए आज और अभी …

असल में ,  हर उस काम को कर सकते हैं जिसे हम वाकई में करना चाह्ते हैं … .. बस !!

समय का महत्व – एक छोटी सी कहानी – Monica Gupta

समय का महत्व – एक छोटी सी कहानी -पहले समय में घडी किसी के पास नही होती थी पर समय सभी के पास होता था और आज घडी सभी के पास है पर वक्त … बस वक्त ही नही है…. समय का महत्व – एक छोटी सी कहानी – Monica Gupta

 

नशे की चाहत – सिगरेट पीने से लाभ नही होता के बारे में आपका क्या विचार है…

December 7, 2016 By Monica Gupta Leave a Comment

समय का महत्व – एक छोटी सी कहानी

 Art of Public Speaking in Hindi

 

समय का महत्व – एक छोटी सी कहानी -पहले समय में घडी किसी के पास नही होती थी पर समय सभी के पास होता था और आज घडी सभी के पास है पर वक्त … बस वक्त ही नही है…..जिसे देखो वही व्यस्त अति व्यस्त या महा व्यस्त है  इतना ही नही कई लोग तो ये भी कहते मिल जाते हैं कि इतने बीजी हैं कि मरने तक की फुर्सत नहीं..

समय का महत्व – एक छोटी सी कहानी

वक्त बिताएं, अपनों को तोहफे में घडी देना आसान लगता है – बस वक्त देना ही मुश्किल लगता है… आज कुछ ऐसा पढा कि लगा कि इस बात को आपसे शेयर करना चाहिए …

खबर है न्यूजीलैंड के प्रधान मंत्री जॉन की … जॉन 8 साल प्रधान मंत्री रहे. उन्होंने रिजाईन कर दिया….  पर रिजाईन  किसी और वजह से नही बल्कि इस वजह से कि अपनी पत्नी और अपने बच्चों को समय नही दे पाए …

उन्होने बताया कि कितने मौके ऐसे आए कि उनकी पत्नी उनके बिना रही और उनके बच्चे कब युवा हो गए पता ही नही चला और कहते कहते वो भावुक हो गए… हालाकि और भी वजह हो सकती हैं पर ये भी एक मुख्य वजह थी… उनके इस फैसले से सभी हैरान थे पर उनके बेटे बने कहा कि मेरे पिता मेरे रोल मॉडल हैं .. जिंदगी में व्यस्त रहना अच्छा है पर इस बात को भी नही भूलना चाहिए कि जिसके लिए कमा रहे हैं उनके लिए कितना समय दे पा रहे हैं…

कितने पति पत्नी शादी के बाद भी नौकरी की वजह से अलग रहते है … कितने बच्चे ऐसे है कि पेरेंटस उन्हीं के लिए कमा रहे हैं पर बच्चा होस्टल में है क्योकि उनके पास समय ही नही है…

समय का महत्व – एक छोटी सी कहानी

आमतौर पर समय न दे पाना बहुत घरों में तनाव की वजह बनती है.. जरुरत है इस बिजी लाईफ में अपनो के लिए समय निकालने की ..

एक कहानी 

इसी बारे में बहुत समय पहले एक कहानी पढी थी कि एक पिता बहुत देर देर तक घर आते एक दिन उनका बच्चा जाग रहा होता है और पूछ्ता है कि पापा आप एक दिन में कितना कमा लेते हैं अब बच्चा ऐसी बात करेगा तो गुसा आएगा ही … खैर वो बोलते हैं कि 1o00 रुपये फिर बच्चा बोलता है कि क्या आप मुझे सौ रुपये देंगें… मेरे पास सौ रुपये कम है … पापा कहते हैं कि अभी तो घर आया हूं और तुम्हारी फरमाईश शुरु हो गई … जाओ अपने कमरे मे मैं कुछ नही दूगा … बच्चा चुपचाप कमरे में चला जाता है …

थोडी देर बाद पापा को रिएलाईज होता है कि उन्हें गुस्सा नही करना चाहिए था पता नही क्या खरीदना था उसे इसलिए वो बच्चे के कमरे में जाते हैं और उसे सॉरी बोलते हैं और 100 रुपये देते हैं कि ये लो बच्चा खुश हो जाता है और भाग कर अपने जमा किए रुपये लाता है और बोलता है कि ये लीजिए पूरे एक ह्जार अब मेरे साथ कल का पूरा दिन मेरे साथ बिताईए .. अब पापा के पास कोई जवाब नही था वो उसे बस गले लगा लेते हैं …

जीवन मे हास्य का महत्व – आपकी मुस्कराहट बहुत खूबसूरत है – Monica Gupta

जीवन मे हास्य का महत्व – आपकी मुस्कराहट बहुत खूबसूरत है – कुछ लोग खूबसूरत जगह खोजते हैं और कुछ लोग जहां जाते हैं जगह को ही खूबसूरत बना देते हैं .. कौन लोग read more at monicagupta.info

 

इसलिए अपनो को समय दीजिए , प्रोत्साहित कीजिए, अपनापन दीजिए वो कहते भी है ना कि समय सबको मिलता है जिन्दगी बदलने के लिए पर जिन्दगी दोबारा नहीं मिलती समय बदलने के लिए….

क्या आप जानते हैं ?? 

न्यूजीलैंडके प्रधानमंत्री जाॅन की ने इस्तीफा दे दिया … वजह, राजनीतिक, भ्रष्टाचार या कोई आरोप होना नहीं है। बल्कि परिवार को समय दे पाना है। जॉन 8 साल से प्रधानमंत्री थे। उन्होंने पार्टी के नेता पद से भी इस्तीफा दे दिया है। उनके फैसले से हर कोई हैरान है। क्योंकि इसके बारे में उनकी पार्टी को भी नहीं पता था।
जॉन की सोमवार को साप्ताहिक प्रेस काॅफ्रेंस कर रहे थे। बात करते-करते अचानक जॉन भावुक हो गए, बोले ‘मैं प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा दे रहा हूं। मेरे लिए यह बहुत ही कठिन फैसला है। लेकिन मैंने कई ऐसी रातें और दिन बिताए हैं जब पत्नी ब्रोना को अकेले रहना पड़ा.. कई खास मौके आए, जब मैं उनके साथ नहीं था। मेरे बच्चे स्टेफी और मैक्स कब युवा हो गए, मुझे पता भी नहीं चला। यदि मैं कहूं कि मैंने यह निर्णय अपनी निजी और पारिवारिक जिंदगी को फिर से पाने के लिए लिया है तो यह सही होगा। हालांकि कई और कारण भी हैं, लेकिन मेरे लिए राजनीति छोड़ने का यह सही समय है। मैंने अपनों के लिए यह फैसला लिया है

समय का महत्व – एक छोटी सी कहानी – आपको कैसी लगी जरुर बताईएगा ….

December 6, 2016 By Monica Gupta Leave a Comment

अलविदा अम्मा – तमिलनाडु की सीएम जयललिता

अलविदा अम्मा - तमिलनाडु की सीएम जयललिता

अलविदा अम्मा – तमिलनाडु की सीएम जयललिता को सादर नमन. एक ऐसी नेता जिसने आम जनता के दिलों में अपना घर बना लिया था और हमेशा उनकी अम्मा के रुप में जानी जाती रहेंगी.. कल जब अस्पताल के बाहर जन सैलाब देखा और और उनकी मौत की खबर अफवाह  मात्र सुनने से जनता में जो दुख जो बैचनी देखी गई वो वाकई हैरान कर गई कि कोई इतना प्रसिद्द कैसे हो सकता है…!!!

अलविदा अम्मा – तमिलनाडु की सीएम जयललिता

सच पूछिए तो मैं अगर अपनी बात करुं तो जयललिता को मैं सिर्फ महंगी साड़ियों और जूतों के लिए ही जानती थी बहुत पहले पढा था कि जब उनके यहां जब CBI के छापे पड़े थे, तब उनके पास से 10,500 बेहद महंगी साड़ियां और 750 जोड़ी जूते मिले थे. पर कल जिस तरह से जनता में उनके प्रति बेहद प्यार देखा तो मन में आया कि आखिर वो आम आदमी की इतनी लोकप्रिय नेता कैसे बनी…

तो नेट पर सर्च किया और कुछ बातें पता चली जिससे वो हर आम आदमी के दिल तक पहुंची.. और तमिलनाडु की सत्ता में 6 बार मुख्यमंत्री बनीं…

अलविदा अम्मा - तमिलनाडु की सीएम जयललिता

अलविदा अम्मा – तमिलनाडु की सीएम जयललिता

उनके कुछ अहम फैसले …

सबसे ज्यादा प्रमुख  रही अम्माऔ उनवगम (मदर कैंटीन) जिसे अम्‍मा ने 2013 में शरू किया था. यह कैंटींन  की ऐसी चेन है जिसमें सभी आय वर्ग के लिए काफी कम कीमत पर लोगों को भोजन मिलता है. पूरे तमिलनाडु में इस तरह की 200 कैंटींस हैं और दही-चावल और सांभर-चावल केवल 3 रुपए में मिलता है. दाल के साथ दो रोटी भी इसी कीमत पर खा सकते हैं.

अलविदा अम्मा - तमिलनाडु की सीएम जयललिता

अलविदा अम्मा – तमिलनाडु की सीएम जयललिता

 

क्रेडल बेबी स्‍कीम  ने 1992 में क्रेडल बेबी स्‍कीम लॉन्‍च की थी. इसे कन्‍या भ्रूण हत्‍या को रोकने के लिए किया आरंभ किया गया था

हर वर्ग के लिए सौगात
बेशक वो  हर बार चुनावों से पहले लोगों को फ्री सामान बांटा करती थीं. इस बार के इलेक्‍शन में भी एआईडीएमके ने हर परिवार के एक सरदस्‍य को नौकरी देने का वायदा किया था. साथ ही 11वीं व 12वीं के छात्रों को फ्री लैपटॉप बांटने के साथ इंटरनेट और हर घर को 100 यूनिट बिजली फ्री देने की घोषणा की थी.

अम्‍मा का नमक
अम्‍मा ने कम कीमत पर नमक बेचने का फैसला लिया. इसका नि‍र्माण तमिलनाडु सॉल्ट कॉरपोरेशन करता है. इसे बाजार में बिक रहे अन्‍य नमक की तुलना में सस्‍ता बेचा जाता है.

वीरप्‍पन का एनकाउंटर
वीरप्‍पन का एनकाउंटर 2004 में जयललिता की सरकार के समय ही किया गया था. यह उनके सरकार की काफी बड़ी उपलब्धि थी. इसके बाद वे लोगों के बीच ऐसी अम्‍मा बनीं जिन्‍हें लोग अपनी रक्षक समझने लगे थे.

अलविदा अम्मा - तमिलनाडु की सीएम जयललिता

अलविदा अम्मा – तमिलनाडु की सीएम जयललिता

 

इसके इलावा राज्य में शराब की 500 रिटेल दुकानें बंद करवाई … तमिलनाडू में लॉटरी की टिकट बिक्री पर रोक लगाई … महिला थाना की शुरुआत की … करुणा निधि को जेल भेजना भी बहुत बडा फैसला था …

ये सारी जानकारी नेट से जुटाई और इतने कामों को देख कर और जनता का उमडता सैलाब देख कर नम नयन हैं … सादर श्रदांजलि

इतना जनाधार वाला शायद ही कोई दूसरा नेता हो … इसलिए अन्य नेताओं भी कुछ अच्छा कुछ भला करना चाहिए ताकि लोगो के दिलों में अपनी जगह बना सकें…

जब अफवाह उडी थी और खंडन भी किया गया…

अलविदा अम्मा - तमिलनाडु की सीएम जयललिता

अलविदा अम्मा – तमिलनाडु की सीएम जयललिता

 

Kalayana sundaram – Monica Gupta

Kalayana sundaram आमतौर पर हमारे काम करने के बाद वाहवाही न मिले तो हम निरुत्साही हो जाते हैं. अगर आप भी ऐसा सोचते हैं तो .Kalayana sundaram जी से मिलिए read more at monicagupta.info

(सभी तस्वीरें गूगल से साभार)

December 6, 2016 By Monica Gupta Leave a Comment

समाज में फैले अंधविश्वास – अंधविश्वास पर कहानी

 Art of Public Speaking in Hindi

समाज में फैले अंधविश्वास – अंधविश्वास पर कहानी – समाज में इतने अंधविश्वास फैले हुए हैं कि दुख होता है ये सब देख कर. एक तरह से अभिशाप ही ये अंधविश्वास …थोडी देर पहले मेरी सहेली मणि आई हुई थी अचानक उसे छींकें आनी लगी तो मैने उसे अपना रुमाल दे दिया तो उसने मना कर दिया बोली अगर मैं तेरा रुमाल ले लूंगी तो हमारी लडाई हो जाएगी … हे भगवान मैने कहा कि किस चक्कर में पडी है फिलहाल अपना जुकाम ठीक कर और वो बिना रुमाल लिए छींकें मारती घर चली गई..

समाज में फैले अंधविश्वास – अंधविश्वास पर कहानी – अंधविश्वास के उदाहरण, अंधविश्वास के प्रकार , अंधविश्वास एक अभिशाप, अंधविश्वास पर कहानी , अंधविश्वास क्या है , अंधविश्वास पर विश्वास , samaj me andhvishwas , समाज में फैले अंधविश्वास , समाज में फैले व्यापक कुरीतियाँ , samaj me faile andhvishwas

 

समाज में फैले अंधविश्वास – अंधविश्वास पर कहानी

मैं सोचने लगी कि आज भी हम अंधविश्वास की गिरफ्त में ही हैं… इससे निकल नही पा रहे या निकलना नही चाह्ते …  वैसे बहुत पहले सरिता पत्रिका में एक कॉलम पढा करती थी … हमारी बेडिया … उसे पढ कर बहुत हैरानी होती थी कि अच्छा ऐसा भी होता था समाज में … …

 

और आज देख लीजिए कोर्ट के आदेश से बेशक, महिलाओ ने मंदिरों या दरगाहों में जाना शुरु कर दिया अच्छी बात है पर अंधविश्वास अभी भी समाज मे व्याप्त हैं उसका का दामन कब छोडेगें हम इसका कोई आईडिया नही ???  आज भी अंधविश्वास पर बहुत उदाहरण देखने को मिल जाते हैं … कि मन सोचने पर मजबूर हो जाता है…

बात तब की है जब श्राद्द चल रहे थे इस बीच एक महिला को जोकि प्रेगनेंट थी उसे पैन शुरु हो गए पर परिवार वाले इसलिए चुप रहे कि बस श्राद्द निकल जाए फिर डाक्टर के लेकर जाएगें वो तो जब डाक्तर ने गुस्सा किया तब वो उसे अस्पताल लेकर भागे  पर बात यही खत्म नही हुई बच्चे का जन्म क्योकि श्राद्द के दिनों मे हुआ इसलिए पिता ने बच्चे का तीन दिन मुंह नही देखा अब बताईए इस बात का क्या जवाब है… कुछ समय पहले उपवास की खबर भी पढी थी कि हैदराबाद की 13 साल की लडकी ने 68 दिन का इसलिए उपवास रखा कि उसके पिता का बिजनेस अच्छा चले …

समाज में फैले अंधविश्वास – अंधविश्वास पर कहानी

बिजनेस का तो पता नही पर वो लडकी जरुर स्वर्ग सिधार गई…

इतना ही नही आजकल ई अंधविश्वास भी है … मेरी एक जानकार की मम्मी  तो फेसबुक पर सारी भगवान की फोटो शेयर करती हैं और हमें भी टैग कर देती हैं और फोन करके बोलती हैं कि लाईक करो कृपा बरसेगी और जब उसकी पोस्ट को कोई लाईक या कमेंट नही मिलता तो ये भी कहती हैं कि न जाने किसकी नजर लग गई …

अब बताईए ये अंधविश्वास कब दूर होंगें वैसे एक बात तो पक्की है कि कहते है ना कि जो भाग्य में होगा वो भाग कर भी आएगा जो भाग्य में नही होगा वो आकर भी भाग जाएगा…

अंधविश्वास एक समस्या – Monica Gupta

अंधविश्वास एक समस्या एकदम सच्ची बात पर आधारित. हमारे देश में अंधविश्वास बहुत है आज इसी बात का एक उदाहरण देखने को मिला..आलू लो, मटर लो प्याज लो, टमाटर लो … दो दिन पहले एक जानकार के घर गई हुई थी. अचानक बाहर से सब्जी वाले ने आवाज लगाई और मेरी जानकार एक मिनट कह … read more at monicagupta.info

 

समाज में फैले अंधविश्वास – अंधविश्वास पर कहानी  पर आपकी राय क्या है ???
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December 5, 2016 By Monica Gupta 1 Comment

जीवन मे हास्य का महत्व – आपकी मुस्कराहट बहुत खूबसूरत है

मटके का पानी छी होता है क्या

जीवन मे हास्य का महत्व – आपकी मुस्कराहट बहुत खूबसूरत है – कुछ लोग खूबसूरत जगह खोजते हैं और कुछ लोग जहां जाते हैं जगह को ही खूबसूरत बना देते हैं .. सोचने वाली वाली बात ये कौन लोग हैं जो जगह को खूबसूरत बना देते है

जीवन मे हास्य का महत्व – आपकी मुस्कराहट बहुत खूबसूरत है

कल मैं पढ रही थी कि कुछ लोग खूबसूरत जगह खोजते हैं और कुछ जहां जाते हैं जगह को खूबसूरत बना देते हैं .. सोचने वाली वाली बात ये हैं कौन लोग हैं जो जगह को खूबसूरत बना देते है… मेरे विचार से जो लोग खुश रहते है हसंते मुस्कुराते रहते हैं वही माहौल को खूबसूरत बनाते है … उदास चेहरे वाले को देख कर तो माहौल अच्छा बन नही सकता … वैसे खुश रहने के मुस्कुराने के बहुत फायदे भी है …

 

 

स्माईल हमारे शरीर को स्वस्थ रखती है … हंसने से  ब्लड सर्कुलेशन अच्छा  होता है / दिल मजबूत बनता है हँसने से अधिक मात्रा में ऑक्सीजन मिलती है। हँसने से हार्ट-अटैक की संभावना कम हो जाती है।  मुस्कराने से चेहरे की झुर्रिया खत्म होती है/  रोज हँसने से  कैलोरी बर्न होती है, जिससे मोटापा भी काबू में रहता है / रात को नींद अच्छी आती हैं  अगर नींद अच्छी आएगी तो हम फ्रेश उठेगें … और सारा दिन पॉजिटिव विचार आएगें घर का आफिस का माहौल खुशनुमा रहेगा … नए नए आईडियाज आएगें …लोग इँप्रेस होंगें और हमसे मिलना चाहेगें … तो बना दिया न हमने जगह को खूबसूरत …

इतने फायदे है फिर भी पता नही हम हंसने मुस्कुराने में इतनी कंजूसी किसलिए करते हैं

वैसे एक काम हम कर सकते हैं सुबह उठ कर शीशे के सामने खडॆ होकर में दो चेहरे बनाए … पहले स्माईल वाला फिर रोंंदू वाला … फिर आपके चेहरे पर सूट करें उसे दिन भर के लिए चुन लीजिए… सिंपल .. तो आप सोचिए कल फिर मिलूगी… वैसे आपकी पर्सनेलिटी से मुस्कुराहट बहुत ज्यादा मैच करती है स्माईल आप पर बहुत सूट करेगी … ट्राई करिएगा …dont forget to smile  तब तक बाय … टेक केयर…

वक्त के साथ बदलना जरुरी – बच्चों से सीखने में झिझके नहीं – Monica Gupta

वक्त के साथ बदलना जरुरी – बच्चों से सीखने में झिझके नहीं , जिंदगी बदलने के लिए लडना पडता है और आसान करने के लिए समझना पडता है …परिवर्तन प्यारा लगेगा जरुर. read more at monicagupta.info

 

December 4, 2016 By Monica Gupta Leave a Comment

वक्त के साथ बदलना जरुरी – बच्चों से सीखने में झिझके नहीं

 Art of Public Speaking in Hindi

वक्त के साथ बदलना जरुरी – बच्चों से सीखने में झिझके नहीं , जिंदगी बदलने के लिए लडना पडता है और आसान करने के लिए समझना पडता है …परिवर्तन प्यारा है.

  वक्त के साथ बदलना जरुरी – बच्चों से सीखने में झिझके नहीं

समय के साथ बदलना और मिलकर चलने मे ही भलाई है कल आपने बच्चे को उंगली पकड कर चलना सीखाया आज वो आपकी आप उंगली थाम कर चल रहे हैं.चाहे कम्प्यूटर सीखाने की बात हो या एस्केलेटर पर चलना सीखने की बात हो  वो कहते भी है ना कि जिंदगी बदलने के लिए लडना पडता है और आसान करने के लिए समझना पडता है

बदलते समय , बदलता समय, समय के साथ बदलना जरुरी, समय के साये में, बदलाव जरुरी, परिवर्तन ही जीवन है, परिवर्तन ही संसार का नियम है, जीवन है, परिवर्तन ही प्रकृति का नियम है,

वक्त के साथ बदलना जरुरी – बच्चों से सीखने में झिझके नहीं

समय वाकई बदल रहा है और हमें भी बदलते समय के साथ कदमताल मिला लेना चाहिए … एक जानकार जोकि हाल ही में रिटायर हुए हैं बहुत खुशी खुशी घर आए और बोले आज मैने फेसबुक पर कमेंट किया … बोले लाईक तो मैं हमेशा करता था पर आज पहली बात कमेंट किया … और खुशी खुशी दूसरे दोस्तों को बताने चले गए …

मुझे याद आया कि जब मैं एक बार अपनी सहेली के गई तो उनका बेटा जोकि 10 में पढता है बहुत बुरी तरह से अपनी मम्मी को गुस्सा हो रहा था कि क्या है आप तो समझती ही नही ..कितनी बार समझा चुका हूं … और वो सिर झुकाए डांट खा रही थी …

मेरे पूछ्ने पर सहेली ने बताया कि असल में गलती ही उसी की है कमेंट पोस्ट करना नही आ रहा इसलिए ..

मैनें उसके बेटे को कहा कि अरे भई मम्मी है आपकी  जरा प्यार से समझाओ …तो मेरी सहेली मुझसे बच्चे की तरह लिपट कर बोली कि जरा इससे कहो कि मेरी फ्रेंडरिक्वेस्ट भी ले ले … ले ही नही रहा …

वैसे बात चाहे मोबाईल सीखने की हो या .. एस्केलेटर पर जाने की … सीख लेनी चाहिए … जी वो भी तो नए जमाने की देन है.. मेरी सहेली मणि को एस्केलेटर से बहुत डर लगता है …

एक बार जब वो बेटे के पास  दिल्ली गए तो जिस मॉल मे गए वहां सिर्फ एस्केलेटर ही था … मणि ने साफ मना कर दिया कि वो वापिस घर जाएगी पर इस पर नही जाएगी..

वक्त के साथ बदलना जरुरी - बच्चों से सीखने में झिझके नहीं

तो उसका बेटा आगे आया और बोला मम्मी आप मेरा हाथ पकडो और बहुत कोमलता से उसका हाथ पकडा ठीक वैसे जैसे मणि अपने बेटे का हाथ बचपन में पकड कर चलना सीखाती थी मणि कुछ नही बोल पाई … बेटे ने कहा कि कुछ नही करना बस अपना पैर पीली लाईन के अंदर रखो और अगले ही पल दोनो उपर जा रहे थे…

मणि ने बताया कि जब बचपन मे वो बेटे को  चलना सीखाती थी और  जब वो चलते चलते  जमीन पर गिर जाता था था तो कभी झूठ मूठ से फर्श की पिटाई करती और कभी कहती ओ देखो ये तो चींटी मर गई आपके नीचे आकर. आज बातो बातो मे बॆटे ने भी बहुत सारे कारण देकर उसका ध्यान बांटा  और उसके अंदर छिपे हुए डर को चुटकियो मे भगा दिया. तो बताईए परिवर्तन अच्छा है ना .

 

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हिंदी ब्लॉग लेखन पर कुछ टिप्स जहां नेट की दुनिया में , सोशल मीडिया में फेसबुक, गूगल प्लस, ट्विटर छाया हुआ है वहीं blog और blogging के लिए हिंदी ब्लॉग टिप्स read more at monicagupta.info

वक्त के साथ बदलना जरुरी – बच्चों से सीखने में झिझके नहीं के बारे में आपकी राय का स्वागत है…

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