Monica Gupta

Writer, Author, Cartoonist, Social Worker, Blogger and a renowned YouTuber

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December 3, 2016 By Monica Gupta Leave a Comment

कुछ खास है हम सभी में – अपने भीतर छिपी प्रतिभा को पहचानिए

दूसरों की मदद करना अच्छा – एक प्रेरक कहानी

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कुछ खास है हम सभी में – अपने भीतर छिपी प्रतिभा को पहचानिए

कुछ देर पहले घर के बाहर से बांसुरी बजाने की आवाज आई जब बाहर निकल कर देखा तो एक बहुत छोटा सा बच्चा बांसुरी बजा रहा था उसकी मम्मी गुब्बारे बेचने वाली थी बोली कि घर में पडी रहती है बस सीख गया होगा तब मैं सोचने लगी कि कुछ न कुछ खासियत हम सभी में होती है सोच इस बात की है कि हम खासियत को कितना जान कितना पाते हैं और अपनी अलग पहचान बना पाते हैं …

 

https://youtu.be/zVEITi2TukU

 

अगर मैं आप से पूछू की आप मे क्या खास बात है तो आप यही कहेंगें कहां कुछ नही है … पर नही ऐसा नही है … हम सभी में कुछ न कुछ तो है … और कई बार ऐसे ऐसे उदाहरण देखने को मिल जाते हैं कि हैरानी होती है… कि वाकई में हर किसी में कुछ न कुछ खास होता है…

चाहे कार रिपेयर करने वाला मिस्त्री हो या झाडू लगाने वाला सफाई कर्मचारी … हर किसी में कुछ न कुछ स्पार्क होता ही है …

इसलिए अपने भीतर को टटोलिए और अपनी अलग पहचान बनाईए. काम करो ऐसा की पहचान बन जाए/ हर कदम चलो ऐसा की निशान बन जाए/ यहां जिंदगी तो सभी काट लेते हैं ….. यहां जिंदगी तो सभी काट लेते हैं  /जिंदगी ऐसे जीयो की मिसाल बन जाए
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चिंता मत करो, मैं हूँ ना – जादुई शब्द (एक कहानी) – Monica Gupta

चिंता मत करो, मैं हूँ ना – जादुई शब्द (एक कहानी) अपना ख्याल रखना, मैं हूँ ना, जादुई शब्द , तुम चिंता मत करो, मैं हूं ना, टेक केयर , सब ठीक हो जाएगा रिलेक्स, read more at monicagupta.info

 

December 2, 2016 By Monica Gupta Leave a Comment

अच्छे काम के लिए चीयर्स – पर ढिंढोरा पीटना मना है

दूसरों की मदद करना अच्छा – एक प्रेरक कहानी

अच्छे काम के लिए चीयर्स – पर ढिंढोरा पीटना मना है -खामोशी से भी काम होते हैं मैने देखा है पेड़ों को छाया देते हुए… अच्छे या नेक काम करते रहना चाहिए पर उसका ढिंढोरा नही पीटना चाहिए कि मैने किया है किसी की भावनाएं आहत हो सकती हैं. गरीब हो या अमीर, बुजुर्ग हो या बच्चा किसी को ठेस लग सकती है…

अच्छे काम के लिए चीयर्स – पर ढिंढोरा पीटना मना है

आज नेट पर मैं सुबह नेकी की दीवार के बारे में पढ रही थी कि अलग अलग शहरों में नेकी की दीवार बनी है. तभी मेरी एक जानकर का फोन आया उसने पूछ कि किसी गरीब जरुरतमंद को जानते हो तो मुझे बताना हम मदद करेंगें …

मैने कहा अरे वाह !! ये तो बहुत ही अच्छी बात है किसी की मदद करना … कोई निगाह में आया तो जरुर बताऊंगी उसका फोन रखते ही माली आ गया … मुझे याद आया कि उसने बताया था बच्चे को साईकिल खरीद कर देनी है …

तो मैने उसे बताया कि एक है वो मदद करना चाह्ते है साईकिल दिलवा देंगें… वो भी खुश हो गया मैने उसे उनका नाम पता बताया तो एक दम से बोला अरे … वो अरे नही … बिल्कुल नही … बहुत दिखावा करते है सौ रुपये की चीज देते हैं और दस जगह अपना प्रचार करते फिरते है बडा बुरा लगता है

ढिंढोरा पीटना

वो बता रहा था कि उसके पडोसी के बच्चे को स्कूल के काले बूट दिए और दस जगह फोटो डाल दी कि गरीब बच्चे की मदद की … उसके स्कूल के दोस्त उसके जूते का ही मजाक बनाने लगे …

वैसे कई बार समझ नही आता हम अपने किए काम की पब्लिसिटी क्यो करते है चुपचाप भी तो काम किए जा सकते हैं ढिंढोरा पीटना की क्या जरुरत

तभी मुझे ख्याल आई एक कहानी जो नेट पर पढी थी  कि एक आदमी दूसरे शहर जाता है उस शहर मे उसने सुना था उस शहर में  कि सभी खुशहाल हैं उसे समझ नही आया कि खुशहाल कैसे रहते हैं …

उस शहर मे पहुंचता है वहां कॉफी की दुकान होती है तो वो वहा चला जाता है एक आदमी शॉप में आया और उसने दो कॉफ़ी के पैसे देते हुए कहा दो कप कॉफ़ी , एक मेरे लिए और एक उस दीवार पर

व्यक्ति दीवार की तरफ देखने लगा लेकिन उसे वहाँ कोई नज़र नहीं आया , पर फिर भी उस आदमी को कॉफ़ी देने के बाद वेटर व्यवहार दीवार के पास गया और उस पर कागज़ का एक टुकड़ा चिपका दिया , जिसपर “एक कप कॉफ़ी ” लिखा था .

व्यक्ति समझ नहीं पाया कि आखिर माजरा क्या है . उसने सोचा कि कुछ देर और बैठता हूँ , और समझने की कोशिश करता हूँ .

थोड़ी देर बाद एक गरीब मजदूर वहाँ आया , उसके कपड़े फटे -पुराने थे पर फिर भी वह  आत्म -विश्वास के साथ शॉप में घुसा और आराम से एक कुर्सी पर बैठ गया .

व्यक्ति सोच रहा था कि एक मजदूर के लिए कॉफ़ी पर इतने पैसे बर्वाद करना कोई समझदारी नहीं है …तभी वेटर मजदूर के पास आर्डर लेने पंहुचा .“ सर , आपका order please !”, वेटर बोला .“ दीवार से ek cup कॉफ़ी .” , मजदूर ने जवाब दिया .

वेटर ने मजदूर से बिना पैसे लिए एक कप कॉफ़ी दी और दीवार पर लगी ढेर सारे कागज के टुकड़ों में से “एक कप कॉफ़ी ” लिखा एक टुकड़ा निकाल कर dustbin में फेंक दिया .

व्यक्ति को अब सारी बात समझ आ गयी थी . कसबे के लोगों का ज़रूरतमंदों के प्रति यह भावना देखकर वह खुश हो गया … सचमुच लोगों ने मदद का कितना अच्छा तरीका निकाला है जहां एक गरीब मजदूर भी बिना अपना आत्मसम्मान कम किये एक अच्छी सी कॉफ़ी -शॉप में खाने -पीने का आनंद ले सकता है .

अब वह शहर  की खुशहाली का कारण जान चुका था और

हम पडे रहते हैं दिखावे में …

खामोशी से भी काम होते हैं मैने देखा है पेड़ों को छाया देते हुए…..!!!

 

चिंता मत करो, मैं हूँ ना – जादुई शब्द (एक कहानी) – Monica Gupta

चिंता मत करो, मैं हूँ ना – जादुई शब्द (एक कहानी) अपना ख्याल रखना, मैं हूँ ना, जादुई शब्द , तुम चिंता मत करो, मैं हूं ना, टेक केयर , सब ठीक हो जाएगा रिलेक्स,

चिंता मत करो, मैं हूँ ना – जादुई शब्द (एक कहानी) – Monica Gupta

 

December 1, 2016 By Monica Gupta Leave a Comment

नये नोट २०१६ – बैंको की लम्बी लाईन कब कम होगी

नये नोट २०१६

नये नोट २०१६ – बैंको की लम्बी लाईन कब कम होगी – हर रोज हर समय एक नई कहानी आ रही है. लाईन में लगे लोग हैरान परेशान और बहुत दुखी है. बैंकों में कैश ही नही है.  बेशक मोदी जी के फैसले  का समर्थन किया था पर नोटबंदी पर नए नोट का आकाल को लेकर दुखी है लोग

 

नये नोट २०१६ - बैंको की लम्बी लाईन कब कम होगी

नये नोट २०१६ – बैंको की लम्बी लाईन कब कम होगी

…

नये नोट २०१६ – बैंको की लम्बी लाईन कब कम होगी

बैंक में बुजुर्ग मिले वो लाईन में खडे बोल रहे थे आज मैं अपना एकाऊंट बंद करवा दूगा …क्या फायदा जब अपने पैसे लेने के लिए बैंकों में लम्बी कतार में लगना पडे और पैसा मिले भी ना … जरुरत तो आज है और … ??? वैसे क्या होगा क्योकि कैश ही नही है बैंकों में और बैंक वाले खुद भी असहाय महसूस कर रहे है जब लोग मायूस , उदास होकर लौट रहे हैं … !!!

 

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पता नही कब छ्टेग़ी ये लाईन … कब मिलेगा हमें हमारा ही पैसा ???

नये नोट २०१६ – बैंको की लम्बी लाईन कब कम होगी  क्या कोई बताएगा ???

 

December 1, 2016 By Monica Gupta Leave a Comment

रक्तदान है महादान – एक संदेश थैलीसीमिया मरीज का

रक्तदान है महादान – एक संदेश थैलीसीमिया मरीज का – रक्तदान पर संदेश, अपनी बात को मनवाने के लिए या जोरदार तरीके से रखने के लिए कई बार लोग खून से लिखा पत्र भेजते हैं पर आज जो मैं आपको सुनाने जा रही हूं वो ब्लड से लिखा तो नही लिखा पर ब्लड के लिए लिखा गया है यानि अपील की गई है कि खून डोनेट करें रक्तदान करें और ये मैसेज है संगीता वधवा का संगीता थैलीसीमिया मेजर की मरीज हैं अभी तक लगभग 750 बार खून चढ चुका है .

सफलता की कहानी, थैलीसीमिया से लडती एक मरीज, आईए रक्तदान करें, रक्तदान , रक्तदान के फायदे, थैलीसीमिया,  थैलीसीमिया क्या है. thalassemia treatment , thalassemia treatment,

रक्तदान है महादान – एक संदेश थैलीसीमिया मरीज का

संगीता ने बताया कि जब वो 5 साल की हुई तब  समझ आना शुरु हुआ  कि कुछ समझ नही आ रहा कि यह हो क्या रहा है. संगीता की बहन भी थैलीसीमिया मेजर की मरीज थी. उनके मम्मी पापा और भईया कभी एक अस्पताल तो कभी दूसरे अस्पताल खून के लिए भागते रहते. लोग आटा चीनी मांगने एक दूसरे के घर जाते है पर वो खून मांगने लोगो के घर जाते थे.

एक समय ऐसा आया जब रिश्तेदार भी कतराने लगे कि कही खून के साथ साथ पैसा भी न मांग लें क्योकि खर्चा भी बहुत हो जाता था. जब दूसरे बच्चे पिकनिक पर जाते थे तब वो लोग ब्लड ट्रास्फ्यूजन के लिए होस्पीटल जाते. पढने की इच्छा होती तो लोग दबे स्वर मे पेरेंट्स को कहते कि क्या फायदा पढा के मर तो जाना ही है इन्हें … वो अक्सर पापा से पूछ्ती कि वो ही क्यो? तब पापा उसे समझाते कि वो भगवान के स्पेशल बच्चे हैं और भगवान हमारा टेस्ट ले रहा है. बिना धबराए उस टेस्ट मे हमें खरा उतरना है.

5 साल के बाद से और आज तक लगभग 750 बार खूब चढ चुका है.संगीता ने बताया कि अगस्त 2010 में जब बडी बहन की डेथ हुई तब अचानक ऐसा महसूस होना शुरु हुआ कि सही जानकारी न होने के अभाव से उसकी डेथ हुई है. बस तब से एक जुनून एक आग सी दिल में भर गई कि कुछ भी हो जाए जनता को इसके बारे मे जागरुक करना ही करना है. एक संस्था बनाई youth thalamic alliance और उसका मोटो रखा  FACE,  FIGHT ,  FINISH . …

आज संगीता 39years हैं MBA कर रही हैं   Health Care and Hospital Administration मे और इसी के साथ साथ हशू अडवाणी मैमोरियल फांऊंडेशन हैल्थ एड केयर थैलीसिमिया सेंटर में PRO  और Counseller की भूमिका निभा रही हैं..आज वो संगीता जो जीने की इच्छा खो चुकी थी आज उन लोगों की काऊंसलिंग कर रही है जो जीने की इच्छा छोड चुके हैं.

 

 

 

 

 

एक संदेश थैलीसीमिया मरीज का हमारे लिए 

संगीता का आप सभी के लिए ये संदेश है … दो तरह के लोग होते हैं. पहले तो वो जो रक्त दान नही करते और दूसरे वो जो रक्तदान तो करते हैं पर उनका ब्लड रिजेक्ट हो जाता है. दोनो के लिए यह सोचने की बात है..

दुर्भाग्य की बात है कि आज की तारीख मे जितने लोग रक्तदान करते हैं उनसे चार गुणा हमे ज्यादा चाहिए. मंदिर मे हम दान करके आते हैं तो हमे पता नही चलता कि हमारा रुपया कहां जाता है किसके काम आता है पर रक्तदान…

आपके द्वारा किया गया रक्तदान हमारी जिंदगी बचा सकता है..   रक्तदान महादान है रक्त दान देंगे तो एक साथ चार जिंदगी बचाएगें. इसलिए आप सभी से हाथ जोड अनुरोध है कि थैलीसीमिक बच्चों को जीवन दान देने के लिए रक्तदान के लिए आगे आएं, स्वैच्छिक रक्तदान कीजिए और हमारी जिंदगी बचाईए. प्लीज … तो क्या सोचा … ???

रक्तदान है महादान – ब्लड डोनेशन के फायदे – Monica Gupta

रक्तदान है महादान – ब्लड डोनेशन के फायदे – रक्तदान के बहुत फायदे हैंं इसलिए इसकी महत्ता समझते हुए स्वैच्छिक रक्तदान हर तीन महीने मे करते रहना चाहिए जान बचाई रक्तदान है महादान – ब्लड डोनेशन के फायदे – Monica Gupta

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November 30, 2016 By Monica Gupta Leave a Comment

चिंता मत करो, मैं हूँ ना – जादुई शब्द (एक कहानी)

चिंता मत करो, मैं हूँ ना - जादुई शब्द (एक कहानी)

चिंता मत करो, मैं हूँ ना – जादुई शब्द (एक कहानी) अपना ख्याल रखना, मैं हूँ ना, जादुई शब्द , तुम चिंता मत करो, मैं हूं ना, टेक केयर , सब ठीक हो जाएगा , रिलेक्स, मैं कर दूंगा , सॉरी, थैंक्यू… आदि कुछ जादुई शब्द हैं इनका इस्तेमाल करते रहना चाहिए

चिंता मत करो, मैं हूँ ना – जादुई शब्द ( एक कहानी)

दो दोस्त होते हैं बचपन में एक साथ खेले पढे और शादी हो गई और अपनी अपनी जिंदगी में दोनो बिजी हो गए… बहुत साल बाद एक मित्र के पास दूसरे दोस्त की पत्नी का फोन आता है कि भाई साहब …, हमे आपकी मदद चाहिए. अब उसे ये सुनकर हैरानी तो हुई कि क्या हुआ पर उन्होनें कह दिया कि कोई बात नही मैं हूं ना … आप चिंता न करना …

यह कह कर उसने फोन तो रख दिया पर सोचने लगा कि हमारी पैसे की तंगी चल रही है… अगर उन्हें पैसे की जरुरत हुई तो कैसे मदद कर पाएगा …क्योकि उसके परिवार का खर्चा भी बहुत था इसलिए फोन पर बात करने के बाद वो ये सोच कर परेशान हो गया कि आर्थिक तंगी के चलते वो उनकी मदद कैसे कर पाएगा. फिर क्या हुआ … ??? क्या दोस्त ठीक हो गया ???

हर बार सिर्फ रुपया पैसा ही सब कुछ नही होता कई बार कोई और स्पोर्ट भी चाहिए होती है…  इसलिए समय समय पर सॉरी या थैक्स भी बोलना पडॆ तो बोल देना चाहिए … तुम चिंता मत करो मैं हूं ना,, सब ठीक हो जाएगा , रिलेक्स, मैं कर दूंगा ….

अच्छे समय में तो हर कोई साथ देता है पर कठिनाई के समय में साथ जरुर देना चाहिए … शब्दों का इस्तेमाल करते रहना चाहिए … करके देखिए …

 

 

प्रशंसा करना – अगर कोई हमारी प्रशंसा न करे तो – Monica Gupta

प्रशंसा करना – अगर कोई हमारी प्रशंसा न करे तो – किसी की प्रशंसा करना कितना जरुरी , how to encourage, how to encourage someone who is depressed, motivation read more at monicagupta.info

 

 

November 29, 2016 By Monica Gupta Leave a Comment

Viral News India- Viral News ka Sach

दूसरों की मदद करना अच्छा – एक प्रेरक कहानी

Viral News India- Viral News ka Sach – वायरल होती खबर हमें भले ही रोचक लगे अच्छी लगे पर अगर उसे फार्वर्ड करना हो तो सोच समझ कर और पूरी तरह बात की तह तक जा कर रही करना चाहिए …     पहाड़ चढ़ने का एक उसूल है.. झुक कर चलिए .. दौडे नही .. ज़िंदगी भी बस इतना ही मांगती है

वायरल सच , सच का सामना , वायरल वीडियो , वायरल पोस्ट  , viral fever, viral sach , viral news , post, stories, video, viral news india, Viral News India- Viral News ka Sach, सोच और समझ कर वायरल करें खबर

Viral News India- Viral News ka Sach

आज में टापिक सर्च कर रही थी कि क्या बोला जाए … तो अचानक एक खबर पर नजर गई जोकि खबर तो थी पर खबर नही थी … नही समझ आया ना … मुझे भी नही आया … यानि वो बेसिर पैर की खबर थी जो कि अब वायरल के भेंट चढ चुकी थी…  और उस खबर में जरा भी सच्चाई नही थी.. बहुत दुख हुआ कि इतने पढे लिखे सभ्य लोग होकर हम इतना असभ्य काम कर रहे हैं.. बिना सच्चाई को जाने परखें बस भेड चाल है कि हमने बस इसे फार्वर्ड करना है … जोकि बेहद दुखद है …

बहुत समय पहले मेरे पास अब्दुल कलाम जी की death की वायरल खबर आई … तो मैने बहुत हैरानी जाहिर कि और  गूगल पर सर्च किया तो ऐसा कुछ नही थी … न्यूज देखी वहां भी ऐसा कुछ नही था … तब समझ आया कि अन्धाधुंध वायरल खबर है … वहीं एक जाने माने अभिनेता की news की वायरल हुई कि उनकी death हो गई है… जबकि वो भले चंगे थे …

थोडे समय पहले भी एक खबर देखी उत्तर प्रदेश के एक गांव में रहनेवाली 40 साल की औरत तब आत्महत्या करने पर मजबूर हो गई जब उसका वीडियो सोशल नेटवर्किंग वेबसाइट वॉट्सऐप पर वायरल हो गया

 

ये वायरल होना बहुत खतरनाक संकेत हैं और हमारा बिना जाने समझे बढावा देन और भी खतरनाक है … भेडचाल है बस और लोग फोलो किए जा रहे हैं … भेडचाल से एक बात याद आई … जब हम हाई वे पर थे रास्ता बंद था कारण किसी को पता नही था

कोई कहता सडक बन रही है कोई कहता accident हो गया … पता था नही सब अपने अपने क्यास लगा रहे थे लगभग 2 किलोमीटर लम्बी लाईन थी …

तभी एक कार आई और उसे अपनी कार को कच्चे में उतार लिया … उसने उतारा और सब उसके पीछे बिन जाने कि रास्ता है भी या न ही … एक घंटा तक 60 कारे उसके पीछे हो गई और लगग एक घंटे बाद  वापिस वो उसी सड्क पर पहुंचे पर अब वो जॉम था ही नही किसी को पता ही नही चला कि वहां हुआ ही क्या था…

ये भेडचाल वाला रास्ता कही नही जाता इसलिए जरुरी है कि सोच समझ कर ही इसे अपनाए… किसी पोस्ट को फार्वर्ड ये देख ले की किस भरोसे मंद से पता चला है या कितना यकीन किया जा सकता है या  करने से पहले ये खबर सही है इसका क्या सबूत है  और जहां तक पता लगाने की बात है …जहां तक जानने की बात है

आजकल गूगल से कुछ भी पता लगाया जा सकता है इसलिए बजाय वायरल खबर को बढावा देने के असलियत को देखे जाने और फिर फार्वर्ड करें तो बेहतर होगा …

न्यूज चैनल वालों – न्यूज चैनल जरा रहम करो – Monica Gupta

न्यूज चैनल वालों – न्यूज चैनल जरा रहम करो -जिस तरह से न्यूज चैनल या खबरिया चैनल खबरों को टीआरपी के लिए परोसते हैं ऐसी खबरें सुनना अब आम हो जाएगा read more at monicagupta.info

 

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